लड़की की मोटे लंड से चुदाई - Mote lund se ladki ki chut gand chudai

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम श्रेया है और मैं नासिक की रहने वाली हूँ। मैं 36D साईज की ब्रा पहनती हूँ और मुझे पब्लिक में अपने बूब्स के बीच की लाईन दिखाना बहुत पसंद है। ये स्टोरी मेरी और मेरे ननंद के बेटे अभिजीत की है। मैं एक अच्छी फेमिली से हूँ और मेरी उम्र 38 साल है।

लोग कहते है कि मैं अपनी उम्र से 10 साल जवान दिखती हूँ। मेरे बूब्स बड़े होने के कारण लोग हमेशा उन्हें घूरते रहते है जो कि मुझे बहुत पसंद है। मेरे पति बिजनेस के सिलसिले में हमेशा आउट ऑफ स्टेट रहते है और इसी वजह से में बहुत बोरिंग महसूस किया करती थी।

ये बात 1 साल पहले की है जब अभिजीत अपनी इंजिनियरिंग की पढाई के लिए हमारे घर शिफ्ट हुआ था। अभिजीत बहुत ही सुंदर, सेक्सी और हैप्पी लड़का था और वो हमेशा से मेरे बहुत करीब था। उसके लुक की वजह से मैं अपने मन को संभाल नहीं पाई और हमेशा उसके करीब रहने की कोशिश करती थी। जब भी वो आस-पास होता तो मैं उसे अपनी क्लीवेज ज़रूर दिखाया करती थी।

कई बार मैं अपनी साड़ी का पल्लू गिरा देती और उससे सिड्यूस करने की कोशिश करती। अब उसकी आँखों में भी मुझे वही तड़प दिखाई देती थी। अब वो भी मेरे पास रहता और मुझे टच करने का एक भी चान्स नहीं छोड़ता था। वो कभी मेरे बूब्स तो कभी गांड पर हाथ फेर देता तो मैं उसे एक स्माइल देती और कुछ नहीं बोलती थी।

एक दिन घर पर मेरे और अभिजीत के अलावा कोई नहीं था और हम दोनों यू ही बातें कर रहे थे और वो मेरे बूब्स को घूरे जा रहा था, उसने शॉर्ट्स पहनी थी और मेरे बूब्स के कारण उसका मोटा लंड खड़ा हो गया था। में हंसी और वहां से अंदर कमरे में चली आई। अब अभिजीत का चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो मेरे बेडरूम में मुझसे माफी माँगने आया। अब मैंने यही सही मौका देखकर उसे माफ़ कर दिया और पूछा कि क्या तुम्हें मैं पसंद हूँ? तो उसने भी हाँ में अपना सिर हिलाया। फिर क्या था?

अब मेरे अंदर का सेक्स जाग उठा और मैंने उसे अपनी तरफ खींच एक लंबा किस किया तो शुरू में वो थोड़ा घबराया, लेकिन बाद में अच्छे से मेरा साथ देने लगा। फिर 10-15 मिनट तक स्मूच करने के बाद वो मेरे बूब्स पर अपने हाथ फैरने लगा और मैं भी अपने हाथों से उसके लंड को जीन्स के ऊपर से सहलाने लगी। अब मैं अपने आपको रोक नहीं पाई और उसकी जीन्स उतार कर एक छिनाल की तरह उसके लंड को चूसने लगी तो वो भी या आह्ह्ह्ह मामी करके मज़े लेते रहा।

फिर मैंने उसके लंड को अपने मुँह में से निकाला और उसे समझाया कि वो मुझे मामी ना कहे, वो मुझे चाहे जो बुलाए वो चलेगा, लेकिन वाइल्ड रहना चाहिए। अब वो समझ गया था कि मुझे वाइल्ड सेक्स पसंद है और मुझे अपनी रंडी बुलाने लगा। अब उसके मुँह से ये सुनकर मैं बहुत ज़्यादा खुश हो गई और तेज़ी से उसका लंड चूसने लगी। फिर उसने मेरे बूब्स को इतना मस्त चूसा कि मैं तो बस पागल ही गयी और अब वो मेरे बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा।

फिर उसने मुझे उठाकर बेड पर लेटाया और मेरी पेंटी को अपने दातं में लेकर नीचे कर दिया, वो तभी वाइल्ड हो गया और मेरी चूत चाटने लगा। अब मैं पूरी तरह से गर्म थी और उसके सिर को अपनी चूत की तरफ खींचने लगी। उसे चूत चाटना बहुत पसंद था और तो उसने लगभग 25 मिनट तक मेरी चूत चाटी। अब वो इतना मस्त होकर चूत चाट रहा था, जैसे कि वो कोई एक्सपीरियंस लड़का हो जो कई सारी आंटीयों को चोद चुका हूँ।

अब मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और उससे मुझे चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी तो उसने अपना मोटा सा लंड अचानक से मेरी चूत में डाल दिया। मैं चिल्लाने लगी आअहह हह्ह्ह्हह्ह हम्मम्मम आअहह और वो तेज़ी से धक्के मारते रहा। मैं इतने लंडो से चुद चुकी थी, लेकिन उसके चोदने के तरीके से मैं बिल्कुल मदहोश गयी थी और इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक किसी ने नहीं की थी। उसका जोश इतना ज़्यादा था कि वो मुझे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय से वो मुझे अलग-अलग स्टाइल में लेकर चोद रहा था।

उसने उस रात मेरी 3 बार चूत मारी और 1 बार गांड मारी और वो मुझे चोदते वक़्त भी रंडी, छिनाल कहकर ज़ोर-ज़ोर से चोदता रहा। उसे एक असंतुस्ट औरत को संतुष्ट करना बहुत अच्छे से आता था और तब से लेकर आज तक वो मुझे चोद रहा है। उसका लंड पाकर मेरी अधूरी सेक्स लाईफ पूरी तरह भर गयी है। उसके चोदने में एक अलग ही मजा है। अब हमें जब भी मौका मिलता है तो वो मुझे चोदता है और मैं उसके लंड से बहुत मजा करती हूँ...

अन्तर्वासना ने भाई से चुदवा दिया - Antarvasna Ne Bhai Se Chudva Diya

अन्तर्वासना ने भाई से चुदवा दिया - Antarvasna Ne Bhai Se Chudva Diya, भाई ने मौका पाकर चोद दिया, Bhai Ne Mauka Pa Kar Chod Diya, बहन ने छोटे भाई से चूत चुदवा कर मजा दिया. Behan Ne Chhote Bhai Se Choot Chudwa Kar Maja Diya.

मेरा कोई सगा भाई नहीं है। इसलिए जब भी राखी या दूज का त्यौहार आता है मैं पड़ोस के एक लडके को राखी बांधती हूँ। उस लडके का नाम विशाल है। वह मेरा दूर के रिश्ते की बुआ का लड़का है। उसकी आयु 24 आयु 17 साल है। विशाल मेरे घर से 7 किलोमीटर दूर सिटी में कम्पूटर की मरम्मत की दुकान है।

साथ ही विशाल वहीं पर विडियो लाइब्रेरी भी चलाता था। अपने साथ उसने एक लड़े को भी काम पर रहा था। जिसका नाम सुनील था। सुनील 27 साल का युवक था। उसका काम ग्राहकों को उनकी पसंद की सीडियां देना था। विशाल का घर दूकान और मेरे घर से बहु दूर था ,इसलिए उसने अपनी दूकान के ऊपर एक कमरा किराये पर ले लिया था। कमरे में लैट बाथ साथ ही थे। जब भी विशाल को समय मिलाता था वह एक दो दिन में मेरे घर जरुर अत था। कई बार मम्मी उस से बाजार से जरूरी सामान मंगवा लेती थी।

छोटी होने के कारण विशाल मुझे बहुत चाहता था ,और जब भी आता था मेरे लिए कोई न कोई चीज जरुर लाता मम्मी भी उसे पसंद कराती थीं ,और उस से हरेक बात में सलाह लेती थीं... विशाल के पिता गुजर गए थे ,और वसीयत में एक मकान छोड़ गए थे ,जो दुकान से दूर था ,उसी में विशाल की माँ रहती था ,विशाल दिन भर दुकान पर रहता था ,सुनील उसके लिए घर से खाना ले आता था। रत को विशाल घर में खाना खाता था।

यह घटना राखी के दिन की है ,हर साल की तरह मैं विशाल को राखी बांधती थी। और उसी के आने का इन्तेजार हो रहा था। विशाल ने मुझे राखी पर एक मोबाइल गिफ्ट देने का वादा किया था। उस दिन रह रह कर बरसात हो रही थी। और रास्तों में पानी भर गया था ,करीब शाम के पांच के करीब विशाल आया और देर के लिए माफ़ी मांगी। फिर मैंने जब उसे राखी बांधी तो ,उसे मोबाइल देने का वादा दिलाया।

खाने के बाद विशाल में कहा मेरे साथ मार्केट चलो ,तुम्हें जैसा मोबाईल चाहिए वैसा दिलवा दूंगा। उस समय शाम के सात बज चुके थे ,तभी जोर की बरसात होने लगी। मेरी मम्मी ने विशाल से कहा तुम अगले दिन मोबाइल खरीद देना। लेकिन मैं उसी दिन की जिद करने लगी। विशाल ने कहा अगर पानी के कारण देर हो गयी तो ? मगर मैंने कहा चाहे कितनी भी देर हो जाये नुझे तो मोबाईल चाहिए। मेरी मम्मी भी बोली बेटा यह बड़ी जिद्दी है।

अगर तू आज मोबाईल नहीं देगा तो यह मेरी जान खाती रहेगी। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है ,भले कुछ देर अधिक भी हो जाये।

विशाल बोला आंटी चिंता मत करो ,अगर बरसात जोर से आने लगेगी तो हम अपनी दुकान के ऊपरी कमरे में रुक जायेंगे। क्योंकि वह में सिटी में है। वहीँ नए नए तरह के मोबाइल मिलते है।

यह सुनते ही मैं विशाल की बाइक पर बैठ गयी और जाते जाते विशाल ने ममी से कहा आंटी आप चिंता नहीं करो। मैं आपको फोन कर दिया करूँगा।

उस समय थोड़ी बून्दाबून्दी हो ताहि थी ,हमने काफी घुमानेके बाद एक मोबाईल पसंद कर लिया। लेकिन जैसे ही हम दुकान से बहार निकले तो मुसलाधार बरसात होने लगी। साथ में ठंडी हवाएं भी चलने लगी विशाल ने मेरी मम्मी को बता दिया कि हम बाजार में हैं ,हमें देर हो सकती है ,विशाल का कमरा थोड़ी दूर ही था ,उसने कहा कि बरसात रुकने तक मैं उसके कमरे में रुक सकती हूँ ,क्यों वहां कोई नहीं होगा ,कमरे की एक चाभी विशाल के पास थी। दूसरी उसने अपने नौकर को दे रखी थी।

कमरे के आने तक हम पूरी तरह भीग चुके थे। मिझे सर्दी लग रही थी। मैं काँप रही थी। लेकिन उस कमरे में मेरे लिए दूसरा कपड़ा नहीं था ,विशाल ने मुझे अपना कुरता दे दिया ,मैं निचे से नंगी थी।

विशाल के कमरे में सिर्फ एक तौलिया और लुंगी थी। जब वह गिले कपडे बदने लगा तो उसकी तौलिया निचे गिर गयी और उसका लम्बा मोटा ,गोरा ,प्यारा लंड मैंने देख लिया। शायद उसने जानबूझ कर ऐसा किया होगा।
मैं दो तीन बार मोहल्ले के लड़कों से चुदवा चुकी थी। तब से मुझे लंड लेने की इच्छा होती रहती थी। मैं चाहती थी कि कोई लम्बा लंड वाला मेरी चूत की जमकर चुदाई करे और मेरी चूत की प्यास बुझादे…

विशाल का लंड मुझे अच्छा लगा ,10 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था। मेरी चूत भर जाने पर भी लंड बचा रहता
जब से मैंने विशाल का मस्ताना लंड देखा देखा सर्दी होने बावजूद मेरी चूत में वासना की आग भड़क रही थी ,मैं सोच रही थी की ,किसी न किसी तरकीब से विशाल का लंड लिया जाये ,मैंने विशाल से कहा मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे सर्दी होने वाली है। तुम्हारे कमरे में गैस भी नहीं है ,वर्ना चाय बन सकती थी।

विशाल ने कहा मैं तो नीचे से किसी दुकान से चाय मंगवा लेता हूँ। अगर कोई दुकान खुली हो ,मरे पास तो सिर्फ एक बोतल ब्रांडी है। मुझे जब भी सर्दी हो जाती है ,मैं एक दो पैग ले लेता हूँ। मैं नौकर सुनील को फोन करता हूँ वह चाय का इंतजाम कर देगा ,अगत तुम चाहो तबतक तुम भी एक पैग ले सकती हो। मैं खुश होकर बोली अगर तुम खुद अपने हाथों से पिलाओगे ,तो मैं पी लूंगी।

मेरा काम हो गया, मेरी चूत लुप लुपहोने लगी। मैंने फ़ौरन एक कि जगह तिन पैग ले लिए और कहा मेरी सर्दी जल्दी जाने वाली नहीं है ,मुझे और गर्मी चाहिए। विशाल में मुझे अपने पास बिठाया और कहा लो तुम मुझ से सट कर बैठ जाओ ,शायद मेरे शारीर से तुम्हे कुछ गर्मी मिल जाए। बातें करते वक्त विशाल मेरे शारीर पर हाथ फेरने लगा। उसका लंड लुंगी में उछलने लगा था और मेरी चूत से रस रिसने लगा था। विशाल ने मुहे अपने बिलकुल पास लिटा लिया। और अपनी टाँगें मेरी टांगों में फसा लीं। मेरी चूचियां एकदम कड़क हो गयीं। विशाल कि सांसें मेरी सांसों से मिल रही थीं।

तभी विशाल का नौकर सुनील अचानक कमरे में अगया ,हम दरवाजा बंद करना भूल हाय थे ,हमें ऐसी हालत में देखकर सुनील पहले तो चौंका और बोला यार मॉल तो मस्त लाये हो ,क्या अकेले ही मजा लेने का प्लान था। विशाल ने कहा यह मेरी मुंहबोली बहिन है। सुनील बोला इस से कोई फर्क नहीं होता। यह तेरी सगी बहिन तो नहीं है ,तुझ्र यह कहावत पता नहीं ?

“लंड न देखे दिन या रात,छूत ने देखे रिश्ता नात”यार जब लंड टायर हो ,छुट गर्म हो। तो सरे रश्ते नाते भूलकर चुदाई का मजा लेना चाहिए ,ऐसे में अगर मेरी सगी बहिन भी होती तो ,मैं उसे चोदे बिना नहीं छोड़ता। यार चूत का अपमान नहीं करना चाहिए।

सुनील में मुझ से कहा ,आप ही बताइए क्या मैंने कोई गलत बात कही है .? ब्रांडी के नशे में ,या चुदवाने की इच्छा में मैंने हाहा तुम सच कह रहे हो। कुदरत ने सर्फ मर्द और स्त्री ही बनाये हैं ,रिश्ते तो लोगों ने बनादिये हैं।
विशाल ने कहा इसला मतलब ,तुम चुवाने को राजी हो। सुनील भी बोल पड़ा मैंने यह ज्ञान दिया है ,मेरा भी कुछ हक़ बनता है। इस लड़की को एक साथ दो दो लंड का मजा मिलेगा। यह भी याद करेगी कि चुदाई क्या होती है। विशाल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम तय्यार हो ?मैंने अपना सर हिला कर हाँ का इशारा कर दिया।

सुनील फ़ौरन नंगा हो गया ,उसका लंड भी दस इंच से कम नहींथा ,और कड़क होकर ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लंड का गुलाबी गुलाबी सुपरा बहुत प्यारे लग रहे थे ,और उनको चूसने कि इच्छा नहीं रोक पा रही थी
तभी सुनील ने विशाल हे कहा आओ अज पिंकी को दो दो लंड का मजा इ दें ,यह भी याद करेगी।

अगर यह ऐसा मजा ले लेगी तो हमें खुद चोदने के लिए रोज बुलाया करेगी। विशाल ने कहा पिंकी आओ ,तुम मेरे खड़े लंड पर इस तरह चढ़ जाओ ,जिस से लंड फक से चूत में समां जाए। तुम चुद चुकी हो ,तुम्हे दर्द नहीं होगा। जिस समय में विशाल का लंड लेने के लिए लंड पर सवार होने लगी तो मेरी गंद सुनील के सामने आगई। उसने फ़ौरन अपना लंड मेरी गंद में घुसा दिया। लंड गांड में रास्ता बनाते हुए अन्दर समां गया। मेरी चीख निकने ही वाली थी लेकिन मने उसे रोक लिया। मजा लेने के लिए दर्द सहना ही पड़ता है ,वर्ना मजा कैसे आयेगा।

फिर दौनों के लंड अपना कम करने लगे ,मई स्वर्ग के मजे ले रही थी मेरी चूत से चिकना रस रिस रहा था ,लेकिन गांड लाल हो रही थी।

उस दिन दो घंटे तक मैं दोनो छेदों में दो दो लंड के मजे ले रही थी। थोडा सी ब्रांडी पीकर यही कम दुहराया गया ,दोनो झड गए ,मैंने उनके लंड चाट चाट कर साफ कर दिया। और वादा किया कि जब भी मैं रिंग करूँ तो सब कम छोड़कर मेरी चूत कि सा सर्दी निकल दिया करो।

आज भी मैं चुप कर दोनो से लंड ले रही हूँ ,मेरी गांड इतनी पोली हो गयी है कि गांड मरवाने में कोई तकलीफ नहीं होती ,बल्कि मजा आता है। 

अगर आप चाहे तो आप भी मेरे साथ मजा ले सकते हैं आखिर छूट और गांड किस लिए होते है ?
जो लड़कियाँ दो दो लंड लेती हैं ,वह जवान बनी रहती हैं गांड मरवा कर देखो!

चुत एक झटका दे कर झड़ने लगी थी - Chut ek jhtke ke sath jhadne lagi thi

चुत एक झटका दे कर झड़ने लगी थी - Chut ek jhtke ke sath jhadne lagi thi, मस्त और जबरदस्त चुदाई , चुद गई , चुदवा ली , चोद दी , चुदवाती हूँ , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी , Hindi Sex Story , Porn Stories , Chudai ki kahani.

मैं लंच के बाद से सोच रही थी कि अंकल ने मुझे रूम में क्यों बुलाया होगा, लंच करते वक्त ही अंकल बोले थे कि नीतू दोपहर को मेरे रूम में आना, थोड़ा काम है.


अभी अभी मेरी बारहवीं के एग्जाम खत्म हो गए थे, मम्मी और पापा दोनों जॉब करते थे, इसलिए मैं दोपहर को घर में अकेली ही रह जाती थी.


समीर अंकल, उनको मैं अंकल ही बुलाती थी. वो मेरे पापा के दोस्त के भाई हैं. उनका गांव यहां से बहुत दूर है, पर अभी हमारे ही शहर के एक कॉलेज में इंग्लिश के प्राध्यापक है.


हमारे बंगलो में एक गेस्ट क्वार्टर में उनके रहने की व्यवस्था की गई है. अब तो वे पापा के भी अच्छे दोस्त बन गए हैं. अंकल अकेले ही रहते थे, इसलिए उनके खाने की व्यवस्था भी हमारे ही यहां की थी.


उनके यहां पर रहने पर मम्मी को भी कोई ऐतराज नहीं था, क्योंकि उनका पढ़ाने का विषय इंग्लिश था. मैं इंग्लिश में थोड़ी कमजोर थी, तो मम्मी को लगा कि उनकी ट्यूशन का मुझे फायदा होगा. अंकल ने भी मुझे बहुत अच्छे से पढ़ाया, ट्यूशन में मेरे साथ मेरी दो सहेलियां सीमा और जया भी थीं और हम तीनों के पेपर्स अच्छे गए थे. मेरी तरह वो दोनों भी अंकल की पढ़ाई से बहुत खुश थीं.


मैंने दोपहर को सब काम खत्म करके थोड़ी देर आराम किया, फिर मैं दरवाजे को लॉक करके अंकल के क्वार्टर की तरफ गयी. दरवाजे पर खटखटाया, तो अंकल ने दरवाजा खोला.
अंकल- आओ नीतू बेटी, मैं तुम्हारी ही राह देख रहा था.


अंकल लगभग चालीस बयालीस की उम्र के होंगे, पर अभी तक उनकी शादी नहीं हुई थी. वे बैचलर थे, फिर भी उन्होंने अपना रूम बिल्कुल साफसुथरा रखा था. उनके रूम में ज्यादा सामान भी नहीं था. एक कोने में एक लकड़ी का बेड था, उसके पास उनका स्टडी टेबल, उसके पास एक फ्रिज. एक दीवार के पास सोफासैट और उसके सामने वाली दीवार पर टीवी.


अंकल बोले- ऐसे क्या देख रही हो, कहीं कुछ सामान तो नहीं बिखरा पड़ा?
मैंने कहा- कितनी साफ सुथरा है आपका रूम, मेरा रूम तो आपके रूम से गंदा होगा. अंकल क्या काम था?


अंकल ने मुझे बेड पर बिठाया और और स्टडी टेबल की कुर्सी खींच कर मेरे सामने बैठ गए और बोले- नीतू तुम्हें तो पता है कि मैं मैगज़ीन में और ब्लॉग पर आर्टिकल लिखता हूँ.


वैसे तो अंकल बहुत ही टैलेंटेड इंसान हैं, पढ़ाते भी अच्छा हैं, उतना अच्छा लिखते भी हैं. गाना भी अच्छा गाते हैं और स्पोर्ट्स में भी अच्छे हैं. हर रोज जिम जाकर उन्होंने अच्छी खासी बॉडी भी बना ली है.


मैं- हां पता है, कल ही पापा घर में आप के किसी आर्टिकल की तारीफ कर रहे थे.
वे बोले- उसी सिलसिले में मुझे तुम्हारी मदद चाहिए थी.
अंकल जैसे टैलेंटेड इंसान को भला मैं किस तरह की मदद कर सकती थी?
वे बोले- मुझे मेरे ब्लॉग पर एक आर्टिकल लिखना है, उसके लिए ही मुझे तुम्हारी मदद चाहिए.
मैं- अंकल, आप जैसे एक्सपर्ट को मैं क्या मदद कर सकती हूं? वैसे आर्टिकल का विषय क्या है?
अंकल बोले- अब तुम्हें कैसे बताऊं, तुम गुस्सा तो नहीं होगी ना?


अंकल खामखा सस्पेंस बढ़ा रहे थे. मैं बोली- मैं कभी आप पे गुस्सा हो सकती हूं क्या, आपने मेरी इतनी मदद की है. आप नहीं होते, तो मैं फेल ही हो जाती. आप बताओ न, क्या विषय है आर्टिकल का?


उनके चेहरे पर बोलूँ कि नहीं बोलूँ, कुछ ऐसे भाव थे. फिर हिम्मत करके वो बोले- तुम्हें अंग्रजी में ‘किस’ शब्द पता है?
मैं थोड़ा डर गई, क्या बोलूँ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
“पता है तुम्हें?” अंकल ने दूसरी बार पूछा तो मैंने सिर्फ सिर हिलाकर हां बोला.
अंकल ने पूछा- फिर बताओ हिंदी में क्या कहते हैं?
मैं बोली- उसे ‘चुम्मी..’ बोलते हैं.


अंकल- बराबर … क्या तुमने देखा है किसी को किस करते हुए?
मैं थोड़ा शर्माते हुए बोली- अंकल फिल्मों में देखा है और एक दो बार गलती से मम्मी पापा को भी करते हुए देखा है.
अंकल- करेक्ट, मुझे किसी जवान लड़की को किस करने के बाद मन में उठते हुए फीलिंग्स के बारे में आर्टिकल लिखना है. क्या उसमें तुम मेरी मदद करोगी?
मैं- मुझसे क्या मदद चाहिए आपको?


मैं बहुत ही कंफ्यूज हो गयी थी.


अंकल थोड़ा डरते हुए बोले- मुझे तुमसे एक किस चाहिए.
“क्या?” मैं लगभग चिल्लाते हुए बोली, तो अंकल भी डर गए.


“अरे नीतू बेटा सुनो तो, मुझे एक रिसर्च करना है, इसके लिए मुझे तुमसे एक किस चाहिए.” वो मुझे समझाते हुए बोले.
थोड़ा रुक कर मुझे फिर से समझाने लगे- नीतू बेटा, तुम्हें तो पता है, मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ. तुम्हें तुम्हारे अंकल पर भरोसा नहीं है क्या?


मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया था, पल भर कुछ समझ नहीं आ रहा था. एक तरफ एग्जाम में की हुई उनकी मदद याद आती, तो दूसरी तरफ उनकी यह अटपटी मांग.


अंकल बोले- तुम सोच के देखो, नहीं तो मैं तुम्हारी सहेली जया या फिर सीमा को हेल्प करने के लिए बोलता हूँ.


मेरी ही तरह जया और सीमा भी अंकल पर फिदा हैं, अंकल की पर्सनालिटी ही ऐसी है. जब वो दोनों अंकल से बातें करती थीं, तब मुझे बहुत जलन होती थी. मैं सोचती थी कि अंकल पे सिर्फ मेरा हक होना चाहिए, ऐसा मुझे हमेशा लगता था. शायद इसी लिए अंकल ने उन दोनों का नाम लिया होगा.
“ठीक है अंकल, मैं तैयार हूं.”
मैं अंकल के जाल में फंसने जा रही थी.


वो मेरे पास आए और मेरे बाजुओं को पकड़ कर मुझे खड़ा किया. उनके स्पर्श से मैं पूरी रोमांचित हो गयी थी. अंकल ने अपना एक हाथ मेरे पीठ पर लेकर आ गए और दूसरा हाथ मेरे सिर के पीछे ले आए. मेरे सिर के पीछे से दबाव डालकर मेरे चेहरे को उनकी तरफ ले जाते हुए उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.


मेरे पूरे शरीर में मानो बिजली दौड़ गई, मेरी जिंदगी का वह पहला कामुक किस था. मेरे पैरों ने जैसे जवाब ही दे दिया था, अंकल ने मुझे पकड़े रखा था, नहीं तो मैं गिर ही जाती.
“क्या हुआ नीतू?”
मैं उन्हें बोली- अंकल, मुझे ठीक से पकड़े रखो, नहीं तो मैं गिर जाऊंगी.


अंकल ने अपने दोनों हाथ मेरी गांड पर रख कर मुझे अपनी तरफ खींचा. अब मेरा पूरा बदन उनके शरीर से चिपका हुआ था. अंकल के होंठों ने फिर से मेरे होंठों को अपनी हिरासत में लिया. मेरा नीचे का होंठ अपने होंठों में पकड़ कर वह मजे से चूसने लगे. मेरे अन्दर अलग ही मीठी से संवेदना जागने लगी थी. अंकल अपनी जीभ से मेरे दांतों की पकड़ को खोलने की कोशिश कर रहे थे, मैंने भी उन्हें खोल कर उनकी जीभ को रास्ता दिया.


अंकल की जीभ मेरी जीभ से द्वन्द खेल रही थी. मेरा अब मुझपे कोई कंट्रोल नहीं था. अंकल मेरी जीभ को उनके होंठों में पकड़ कर चूसने लगे. मैंने अंकल को कस कर पकड़ लिया, मुझे मेरी टांगों के बीच गीलापन महसूस होने लगा था. मेरी सांस अब तेज होने लगीं, ऐसा लगने लगा था कि पूरी जिंदगी भर उनकी बांहों में पड़ी रहूँ. अंकल ने मुझे थोड़ी देर ऐसे ही दबोचे रखा और फिर मुझे अपने से दूर कर दिया.


“क्यों तुम्हें नीतू कैसा लगा?”


मेरी तो उनसे नजरें मिलाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी. अंकल ने मुझे पकड़ कर बेड पर बिठाया, मेरा तो गला सूखा पड़ गया था, मैंने अंकल को बताया तो वो फ्रिज के पास गए और फ्रिज से स्लाइस की बोतल निकालकर मुझे दी.


मैंने होंठों पर रखकर उसे पीने लगी, ठंडा मैंगो जूस मेरे सूखे गले को ठंडक दे रहा था. एक ही बार में आधे से ज्यादा गटक कर मैंने बोतल को अंकल के हाथ में दी.
अंकल बोले- अरे पूरी पियो ना.
मैं बोली- नहीं, मेरा पेट भर गया.


तभी अंकल ने उस बोतल को अपने होंठों पर रखा और उसे पीने लगे.
“ईशशय … अंकल क्या कर रहे हो, झूठा है वो मेरा..!”
“अभी तो मेरे होंठ अपने होंठों से जूठे किये ना तुमने, तो इस बोतल का क्या?”
उनकी बातों से मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी.

मैं बोली- अंकल, आप का काम हो गया हो तो मैं जाऊं?
अंकल मुझे रोकते हुए बोले- अरे नीतू रुको, तुम्हें यह सब अच्छा नहीं लग रहा क्या?


अब उनको कैसे बताती कि मेरे पूरे बदन की हर तार झनकार कर रही थी. मुझे तो यह सब चाहिए था, पर अपने मुँह से बताने में शर्मा रही थी.


“नीतू, किस के बहुत प्रकार है और मुझे सब ट्राय कर के देखने है, यह काम एक दिन में खत्म नहीं होने वाला. तुम मुझे मदद करोगी ना?”


अंकल के बोलते ही मैंने शर्माकर सिर्फ हां में सिर हिलाया.
“नीतू, जरा नीचे तो लेट जाओ.
मैं कुछ समझी नहीं, तो मैंने अंकल से पूछा- क्यों अंकल, क्या करना है?
“आज का भाग अभी तक पूरा नहीं हुआ, उसे तो पूरा करते हैं.”


मेरे सीना ज़ोरों से धड़क रहा था. पता नहीं अंकल क्या करने वाले थे. मैं उनके कहने के मुताबिक बेड पर जाकर लेट गयी. अब अंकल बेड पर मेरे बाजू में बैठ गए.
“कितनी सुंदर हो तुम नीतू, ऐसे लगता है कि तुम्हें देखता ही रहूँ. अंकल मेरी तारीफ कर रहे थे और मैं शर्म से लाल हो रही थी.
“अब तक हमने किस का सिर्फ एक ही पार्ट किया, अब दूसरा कर के देखते हैं.”


अंकल ने अपने होंठ मेरे माथे पर रखे. माथे पर किस करने के बाद धीरे धीरे नीचे आते हुए मेरे आंखों पर और नाक पर किस करने लगे. अंकल का हाथ मेरे कंधे पर इस तरह रखा था कि उनका अंगूठा मेरे स्तनों के ऊपरी हिस्से को स्पर्श कर रहा था. अंकल ने मेरे गोरे गोरे गालों पर किस करना शुरू किया, वह मेरे मुँह पर हर जगह पर किस कर रहे थे. उन्होंने मेरे कानों को भी नहीं छोड़ा, अंत में उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे और उन्हें चूसने लगे.


“नीतू, मैंगो का स्वाद बहुत अच्छा है.” वह मेरे होंठों पर अपनी जीभ फेरते हुए बोले.


उनके होंठों से भी मैंगो का स्वाद आ रहा था. अचानक अंकल का हाथ कंधे से सरककर मेरे स्तन पर आ गया. मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई, मेरे स्तनों को हुआ पहला आदमी का स्पर्श. मुझे तो खुद को भी अपने स्तनों को हाथ लगाने में शर्म आती थी और इधर मेरा स्तन आराम से अंकल के हाथ में आ गया था.


“आहहहह … अंकल हाथ हटाओ ना, कहां पर रखा है आपने.”
“ओह. … सॉरी नीतू, गलती से वहां पर चला गया, तुम उठ जाओ अब, आज का कोर्स पूरा हो गया.”
मेरे मना करने से शायद वह डर गए थे.


वो डरते डरते हुए बोले- कल आओगी ना … तुम बाकी का कोर्स पूरा करने?
मैं- ओके अंकल.
मेरा जवाब सुनते ही अंकल की जान में जान आयी.


“पर अंकल एक बात बताओ, आज हमने जो कुछ भी किया, उससे आपको आर्टीकल लिखने में मदद तो होगी ना?”
“नीतू बेटा आज तुमने मेरी बहुत मदद की है, इसका मुझे बहुत फायदा होगा. कल हम चेहरे के नीचे के अंगों पर किस ट्राय करेंगे.”


उनकी बातें सुनकर मेरी मन में लड्डू फूट रहा था, चेहरे के नीचे मतलब क्या था अंकल का?


“तुम कल आ रही हो, सुनकर मेरा बहुत बड़ा टेंशन खत्म हो गया, मैंने जानबूझ कर वहां पर हाथ नहीं रखा, गलती से चला गया. तुम गुस्सा तो नहीं हो ना … खैर ये लो मुझे मदद करने के बदले तुम्हारा गिफ्ट.”


उन्होंने मेरे हाथ में एक बड़ी कैडबरी रखी, उसे देख कर मैं भी पिघल गयी. अंकल को पता था कि कैडबरी मेरा वीक पॉइंट है.
“थैंक्स अंकल, मैं चलती हूँ.” मैं दरवाजे के पास चली गई और न जाने मुझे क्या सूझा और मैं पलट कर उन्हें बोली- और अगर आप जानबूझ कर भी उधर हाथ रखते, तो भी मैं आपसे गुस्सा नहीं होती.
मैं अपने घर चली गई.


रात को सोते वक्त अंकल का ही ख्याल मन में आ रहा था, बार बार उनका मेरे स्तन पर हुआ स्पर्श याद आ रहा था. वैसे तो सेक्स के बारे में मुझे थोड़ा बहुत मालूम था, फ्रेंड्स से सेक्स के बारे में बहुत सुना था, पर कभी देखा नहीं था. सहेलियों के साथ रहकर चुत लंड जैसे शब्द भी मालूम हो गए थे. जब हम सहेलियां सेक्स के बारे में बात करतीं, तब मेरी भी चुत में गुदगुदी होती थी. अंकल की दोपहर की कामुक हरकतों से मेरे मन में भावनाओं का सुनामी पैदा हो गया था, अंकल अब कल क्या करेंगे, इसका मुझे बहुत कौतूहल पैदा होने लगा था. पर मुझे भी वह सब महसूस करना था.


पिछले कुछ दिनों से रात को सोते वक्त मेरा हाथ अपने आप शरीर के कुछ अंगों को सहलाने लगता था. मुझे अलग कमरा मिला था, यह बात अच्छी हुई थी. पर कभी कभी ज्यादातर एमसी होने के बाद सहलाने की बहुत इच्छा होती थी. चुत में अलग सी गुदगुदी होती थी. तब रूम बंद करके, लाइट बंद करके और अपने ऊपर ब्लैंकेट ले कर ही अपने अंगों को सहलाने लगती. वैसे तो मम्मी पापा मुझे डिस्टर्ब नहीं करते थे, शायद उनका भी यही कार्यक्रम चलता होगा, पर मैं भी बिना रिस्क लिए सब सोने के बाद ही मेरा कार्यक्रम शुरू करती.


बेड पर लेटने के बाद मैं अपने शरीर पर ब्लैंकेट ओढ़ लेती, फिर अपना स्कर्ट उतार देती. फिर शर्ट के एक एक बटन खोलना शुरू करती, बटन निकालते वक्त ही स्तनों को हो रहे स्पर्श से ही मेरे निप्पल्स कड़क हो जाते थे. फिर सब बटन खोल कर शर्ट को स्तनों पर से हटा देती थी.


दिन ब दिन मेरे स्तनों का साइज शायद बढ़ रहा था, तभी तो सभी मर्दों की नजर मेरी छाती पर ही होती. मैं थोड़ा उठकर अपना शर्ट हाथों से निकाल देती थी. फिर हाथ पीठ पर ले जाकर अपने ब्रा का हुक खोलती थी. ब्रा ढीली होने से स्तनों को बहुत आराम मिलता था. मैं ब्रा भी उतार कर शर्ट के पास बेड के कोने में रख देती थी. फिर धीरे से स्तनों पर से ब्लैंकेट भी हटा देती थी, सीलिंग फैन की ठंडी हवा लगने के बाद मेरे निप्पल्स और भी कड़क हो जाते थे और उन्हें मसलने को मचल उठते. मेरे मस्त गोल गोरे स्तन सहलाने की याचना करने लगते थे.


दिन भर ब्रा से घिरे मेरे पसीने से सने स्तन पर हो रही हाथ की मालिश, मेरी जांघों के बीच खलबली पैदा करती और अपने आप ही अपनी जांघें एक दूसरे पर घिसने लगतीं.


दोनों स्तनों को अच्छे से मसलने के बाद मैं अपने अंगूठे और उसके पास वाली उंगली को मुँह में डाल कर अच्छे से गीला करके अपने निप्पल्स पर रगड़ती. मैं दो तीन बार यही क्रिया दोहराती. अपनी लार और पसीने से सने निप्पलों की एक अलग ही गंध मेरे नथुनों में भर जाती. मुझे वो गंध बड़ी अच्छी लगती थी. वह गंध आते ही एक अलग ही संवेदना मेरे दिमाग से मेरी चुत में चली जाती. तब तक मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चुत तक चला जाता और चुत को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगता.


अब तो मुझे पैंटी निकालने की भी फुरसत नहीं मिलती, वैसे भी जांघें एक दूसरे पर रगड़ने से पैंटी नीचे सरकने लगती थी. मेरी उंगलियां मेरी वी शेप पैंटी के इलास्टिक के अन्दर चली जाकर चुत के अन्दर समा जातीं. थोड़ी देर उंगली अन्दर बाहर करने के बाद फिर चुत के दाने को छेड़ती रहती.


उस वक्त बायां हाथ अब भी मेरे स्तनों को और निप्पल्स को सहलाता मसलता रहता. खुद को इसी तरह शांत करने की क्रिया मैं अपने अनुभव से ही सीखी थी.


अब उत्तेजना से मेरी सांसें तेजी से चलने लगतीं. मेरी मुँह से भी दबी दबी मादक सिस्कारियां निकलने लगती थीं. बदन अकड़ने लगता, उंगलियों की स्पीड अपने आप बढ़ जाती. चुत से मीठी मीठी लहरे पूरे बदन में दौड़ने लगतीं.


अब तो अंकल की छवि मेरी आंखों के सामने आ गई थी और चुत एक झटका दे कर झड़ने लगी थी. धीरे धीरे पूरे बदन की ऊर्जा चुत से बहकर शरीर से बाहर चली जाने लगी.


कितने दिन से यही सिलसिला चलता आ रहा था, आज का दिन भी यही हुआ. अंकल का आगे का स्टेप कौन सा होगा, यही सोचते सोचते मेरी आंख लग गई. अंकल ने किस तरह से मेरी वासना को एक ऐसे स्थान पर पहुंचा दिया, जहां सिर्फ चुदाई से ही अंत हो सकता था.

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दूसरे दिन अंकल सुबह नौ बजे घर पर आए, उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में एक्स्ट्रा लेक्चर्स है, इसलिए वह लंच पर नहीं आएंगे. जाते वक्त वह मुझे दो बजे अपने रूम में आने को बोले.


दिन भर मेरा किसी काम में मन नहीं लगा. खुद पर कंट्रोल नहीं हो रहा था, तो मैं पंद्रह मिनट पहले ही उनके रूम के पास गई और दरवाजा खटखटाया.
अंकल ने दरवाजा खोला, उनके गाल पर शेविंग क्रीम का फोम लगा हुआ था- बैठो नीतू, तब तक मैं शेविंग कर लेता हूँ.
मैं अन्दर आ कर बेड पर बैठ गई, अंकल ने मुझे टेबल पर रखी दो चॉकलेट खाने को बोला.


मैं चॉकलेट का कवर खोलते हुए बोली- अंकल आप नहीं खाते चॉकलेट?
अंकल ने जवाब दिया- मैं शेविंग कर रहा हूँ ना, शेविंग के बाद खा लूंगा.


मैं टेबल पर पड़ी मैगज़ीन पढ़ने लगी, थोड़ी देर बाद अंकल मेरे पास आ गए, उनसे आफ्टर शेव लोशन की सुगंध आ रही थी.


अंकल थोड़ा टेंशन में आकर बोले- नीतू, कल जो कुछ हमने किया यह तुमने किसी को बताया तो नहीं ना?
मैं शर्माते हुए बोली- मैं कैसे बता सकती हूं? ये भी क्या बताने वाली बात है?
“आज का अभ्यास करने से पहले हम कल के अभ्यास का रिवीजन कर लेते हैं.”


उनके हमारे खेल को अभ्यास बोलना मुझे बड़ा मजाकिया लगा, आज अंकल कल की तरह डर नहीं रहे थे और बहुत ही कॉन्फिडेंस में बात कर रहे थे. मुझे बांहों में पकड़कर उन्होंने मेरे चेहरे पर किस की बारिश शुरू कर दी. पर मेरे नाजुक पिंक होंठों पर उनकी खास नजर थी. मेरे होंठ उनकी चुसाई से अब दुखने लगे थे.


“अंकल, बस अब … मेरे होंठ दुखने लगे है.” मैंने खुद ही उनको बताया, तो अंकल ने मुझे अपने से अलग कर दिया.
अंकल बोले- अरे हां, नहीं तो आज का पीरियड रिवीजन में ही खत्म हो जाएगा … नीतू तुम बेड पर लेट जाओ, हमें अब आगे बढ़ना होगा.


अब मेरे चेहरे पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया था.


“कल मैंने तुम्हारी गर्दन तक किस ली … आज गर्दन से पेट तक के हिस्से की किस लेनी है.”
“गर्दन से पेट तक?” मुझे अभी भी समझ में नहीं आ रहा था.
अंकल बोले- हां, गर्दन से लेकर पेट तक हर एक अंग पर किस लेना है.
उनके मुँह से ‘हर एक अंग..’ सुनकर मैं रोमांचित हो गयी.


अंकल ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे बेड पर लिटाया- नीतू … तुम्हारा बदन गर्म लग रहा है, तुम्हारी तबियत ठीक है ना?
अब अंकल को कैसे बताऊं कि मेरे बदन की गर्मी उन्हीं की वजह से बढ़ी है. मैं ठीक से लेट गयी और स्कर्ट को ठीक किया. मैंने अपनी जांघें एक दूसरे पर रख कर टाइट पकड़ी हुई थी. अंकल ने भी इस बात को नोटिस किया.


“नीतू … अपने शरीर को ढीला छोड़ दो, रिलैक्स करो और एन्जॉय भी करो. इधर तुम्हें खाने के लिए कोई शेर नहीं आने वाला है.”


उनके कहने पर मैंने अपने मसल्स और पैर ढीले छोड़ दिए. अब अंकल बेड पर चढ़कर मेरे नजदीक बैठ गये- नीतू … अब मुझे तुम्हारी शर्ट को खोलना पड़ेगा.
वो कुछ ऐसा बोलेंगे, इसी की मैं अपेक्षा कर रही थी.
“पर क्यों अंकल?” मैं नासमझ बन कर बोली.
“नहीं तो मैं किस कैसे लूंगा, तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है ना?”
मैंने ना में सिर हिलाया.


“गुड..” बोलते हुए अंकल मेरी शर्ट के बटन खोलने लगे. कल उन्होंने मेरे स्तन को छुआ था, तो अंकल बोले थे कि गलती से हुआ. पर आज शर्ट के बटन खोलते वक्त वह खुल कर मेरे उभारों को छू रहे थे.


अभी अभी किये हुए किस और अभी स्तनों को हो रहे अंकल के स्पर्श से मैं गर्म होने लगी थी. सब बटन खोलने के बाद उन्होंने शर्ट के आगे की साइड को मेरी छाती से अलग किया.
मेरे ब्रा में कैद स्तन, उनके बीच की घाटी, मेरा सपाट पेट और उसके बीच की नाजुक नाभि को देख अंकल पागल हो गए थे- ओहहह ब्यूटीफुल … नीतू क्या नजारा है … वाह!
मेरी कामुक तारीफ सुनकर मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही थी, मेरी आंखें अपने आप बंद हो गई थीं.


“अंकल … मैं क्या इतनी सुंदर हूँ?” मैं आंखें आधी खोलते हुए बोली.
“तुम्हें क्या पता कि तुम कितनी सुंदर हो, कभी खुद को आईने में देखो, आईने को भी तुम्हें निहारने का सौभाग्य दो.”


अंकल की बातों से मैं पिघलने लगी थी.


“शर्ट निकाल रही हो ना?” उनके कहने पर मैं होश में आई.
“अंकल पूरा मत उतारो ना, मुझे शर्म आती है.”
“पूरा मतलब..?” अंकल को तो सब पता था, फिर भी अनजान बनने का नाटक कर रहे थे, शायद उनको मेरे ही मुँह से सब बुलवाने में मजा आ रहा था.
“ब्रा … मत निकालो न…” मैं शर्माते हुए बोली.
“ठीक है मैं ऊपर से ही मैनेज कर लूंगा. अब शर्ट तो उतारो.”


मैं लेटे लेटे ही शर्ट उतारने लगी, शर्ट उतारने के लिए हाथ ऊपर करते ही मेरे स्तन ऊपर तन गए, तब अंकल ने लपक कर उनको अपने हाथों में पकड़ लिया.


“आहहहह … अंकल, शर्ट तो उतारने दो ना, कुछ तो सब्र करो.”
“नीतू … तुम्हारे जैसी सुंदर लड़की इस अवस्था में हो, तो ऋषिमुनि भी सब्र खो दें.”
“अंकल … मत सताओ न … कुछ कुछ होता है.”
“नीतू शर्ट उतार दिया ना … अब अपने हाथ अपने सिर के नीचे रखो.”


अंकल बड़े ही बदमाश निकले, शायद उनको मेरे तने हुए स्तन बहुत अच्छे लग रहे थे.
“मुझे तुम्हारी कांख को किस करना है, कोई भी पार्ट छूटना नहीं चाहिए.”


अच्छा तो अंकल का ये प्लान था. मेरे कांख वाली त्वचा, एकदम कोमल है, वहां पर हाथ लगते ही मुझे गुदगुदी होने लगती थी. वहां पर अंकल किस करने वाले थे और मुझे कौन कौन से प्रकार से तंग करने वाले थे, क्या पता. वैसे मुझे भी यही सब चाहिए था, खाली अंकल को क्यों दोष देना.


अंकल के कहने पर मैंने अपने हाथ मेरे सिर के पीछे रखे, तो मेरी कांख उनके सामने आ गयी. अंकल ने मुँह से हल्की सी सीटी बजायी- नीतू … तुम्हारी कांख में हल्के हल्के बाल हैं … हाऊ स्वीट.
अंकल बड़े शैतान हैं, मेरी प्राइवेट बातें खुलकर मुझे ही बता रहे थे. उन्होंने अपना मुँह मेरी एक कांख पर रख दिया और दूसरी पर अपना हाथ घुमाने लगे. मैंने उत्तेजना में अपनी जांघों को भींच लिया.


“नीतू … आहहहह … क्या मस्त खुशबू आ रही है, कौन सा परफ्यूम लगाती हो?”
मैं बोली- कुछ खास नहीं, पर नहाने के बाद डीओ लगती हूँ.
मेरी आंखें अभी भी बंद थीं.
“अच्छा तो ये तुम्हारी और डीओ की मिली-जुली खुशबू है, बहुत ही मादक है ”


अंकल ने मेरी दोनों कांखों पर किस किया और दोनों जगह पर जीभ भी घुमाई. उनके जीभ के स्पर्श से अलग ही सरसराहट पैदा हुई, उन्होंने मेरी नाजुक त्वचा पर हल्के से काटना भी शुरू कर दिया. मेरा दिमाग उन्हें रोकने को कह रहा था, पर मेरा शरीर दिमाग की बात नहीं सुन रहा था. मैं बड़ी मुश्किल से अपनी उत्तेजना को काबू करने की कोशिश कर रही थी, पर मेरी चुत?? उसको तो आज बहुत ही जोश चढ़ा था, पूरी गीली होकर मुझे और उकसा रही थी.

“नीतू … तुम्हें कब से यहां पर बाल आने शुरू हुए?”
अंकल के इस सवाल पर मैं बहुत शर्मा गयी- मैं नहीं बताऊंगी, अंकल … तंग मत करो … आप अपनी रिसर्च छोड़ कर यह क्या सवाल पूछ रहे हो?
“ओह सॉरी, इतना सुंदर दृश्य देख कर खुद पर कंट्रोल नहीं रहा, अब नहीं पूछूँगा.”
अंकल थोड़ा शर्मिंदा हुए.


अंकल ने ब्रा के कप पर अपना मुँह रखा, मेरे स्तनों पर उनके मुँह का दबाव महसूस हुआ. अंकल अब क्या करेंगे उसकी मैं अधीरता से राह देख रही थी. अंकल ने अपने दोनों हाथ मेरे पीठ के पीछे ले गए और चतुराई से मेरी ब्रा का हुक को खोल दिया. मैंने अपने हाथ मेरे सिर के पीछे रखे थे, इसलिए मेरे स्तन तने हुए थे, उस पर कस कर बैठी मेरी ब्रा अब खुल गई थी.


“अंकल … बेईमानी नहीं, आप ने वादा किया था कि ब्रा नहीं निकालेंगे.”
“नीतू निकाल नहीं रहा हूँ. सिर्फ थोड़ी ऊपर सरकाऊँगा … नहीं तो तुम्हारे आमों की चुम्मी कैसे ले पाऊंगा?”


अंकल ने मुझे निरुत्तर कर दिया और ऊपर से उन्होंने मेरे स्तनों को आम कहा था. मेरे विरोध की परवाह न करते हुए उन्होंने ब्रा को मेरे स्तनों से हटाकर मेरे उभारों को नंगा कर दिया था, शर्माकर मैंने अपनी आंखें बंद कर दीं.


कुछ पल कमरे में पूरा सन्नाटा था, थोड़ी देर बाद मैंने अपनी आंखें थोड़ी खोलीं, तो अंकल मेरे उभारों को बिना पलक झपकाए लगातार देखे जा रहे थे- सुंदर, अति सुंदर … नीतू सच में मैं बहुत भाग्यशाली हूँ, जो मुझे तुम्हारा यह हुस्न देखने को मिला है.
उन्होंने हल्के से मेरे वक्ष को छुआ, मेरे पूरे शरीर में सनसनी दौड़ गई. किसी बिजली की तार को गलती से छुआ हो, ऐसा आभास हुआ.


“अंकल … नहीं, मत करो..”
पर मुझे नहीं लगता कि अंकल के कानों में मेरी बातें गयी होंगी. अंकल ने मेरे दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों से सहलाना शुरू कर दिया था.


“नीतू तुमने पूछा था ना मैं चॉकलेट खाता हूं कि नहीं, अब देखो मैं ये दो चॉकलेट खाने वाला हूँ. अंकल ने मेरी दोनों चॉकलेटी रंग के निप्पल्स को अपने उंगलियों में पकड़ कर हल्के से दबाया. अंकल की कामुक बातों से मेरी चुत में खुजली होने लगी थी. चुत से पानी बहना शुरू हो गया. तो मैंने अपनी जांघें और कस कर भींच लीं.


अंकल का स्पर्श सह पाना मेरे लिए मुश्किल होने लगा था. मैंने अपने हाथों को अपने सिर के नीचे से हटाया और उनके हाथों को स्तनों से दूर धकेलने की कोशिश करने लगी. पर उनके अन्दर का जानवर जाग गया था, वो मेरे से हिल भी नहीं रहे थे. किसी भूखे शेर की तरह वो मुझ पर झपट पड़े, मेरी छाती पर किस करने लगे, मेरे निप्पल्स को चूसने लगे. मेरे एक स्तन को मुँह में लेकर चूसते, तो दूसरा स्तन हाथ में पकड़कर गेंद की तरह दबाते.


जैसा तय किया था, उस तरह से किस करने के बजाए अपने आप पर से आपा खोने लगे थे. वह सब भले ही मुझे अच्छा लग रहा था, पर उन्हें रोकना जरूरी था- अंकल … रुको, ऐसा मत करो.
मैं थोड़ा ऊंची आवाज में बोली.
अंकल अब होश में आ गए थे- ठीक है, रुक जाता हूं. तुम कहती हो तो नहीं खाता चॉकलेट … पर थोड़ा रिसर्च अब भी बचा है, उसको तो पूरा करने दो.
अंकल की मस्ती अभी भी कम नहीं हो रही थी.


“अब क्या बचा है?”
“तुम देखो तो सही..”
मेरे हां बोलने से पहले ही अंकल ने अपना मुँह मेरे पेट पर रखा, उनकी मूंछें मेरे पेट पर गुदगुदी करने लगी थी; तो मैं हिलने लगी.


“नीतू थोड़ी देर ठीक से लेटो, ज्यादा हिलो मत.”


उनका पूरा ध्यान अब मेरी नाभि पर था, नाभि पर एक किस करने के बाद उसके इर्द गिर्द हल्के से काटने लगे. अंकल मुझे सताने के लिए नई नई ट्रिक ढूंढ निकाल रहे थे. उन्होंने अपनी जीभ मेरी नाभि में घुसा दी.
मुझसे उनका टॉर्चर सहन नहीं हो रहा था, मैं उनसे कसमसाते हुए बोली- बस अंकल, रुको अब..मुझे घर जाना है.


“बस और दो मिनट … प्रॉमिस..” ये कहकर उन्होंने फिर से अपनी जीभ मेरी नाभि में घुसाई और अपना दायां हाथ मेरी त्रिकोणीय घाटी पर रख दिया. उनकी इस हरकत से मैं चकित हो गई, अब अंकल धीरे धीरे मेरी चुत सहलाने लगे.


मैं झटके से उठकर बैठ गई, अंकल के हाथ पर एक चपत लगाकर उनको बोली- अंकल बस हो गया … अब मैं जा रही हूँ.
“ओके नीतू बेटा, जैसी तुम्हारी मर्जी मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं. पर कल आ रही हो ना? कल आखिरी पार्ट बचा है.


मैं थोड़ी देर सोचने लगी, पल भर मुझे ऐसा लगा कि ना बोल दूँ, पर आखिरी पार्ट क्या होगा, मुझे इसी बात का कौतूहल था, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अंकल से पूछ लिया- आखिरी पार्ट मतलब क्या?
“कल हम नाभि के नीचे किस कर कर देखेंगे, तुम तैयार हो ना?”
“ठीक है अंकल, कल आती हूँ.”


मेरा जवाब सुनकर वह बहुत खुश हुए, कल की तरह उन्होंने मुझे एक बड़ी सी कैडबरी दी- नीतू एक बात पूछूँ, तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
अंकल की बातों से ही मुझे लगा कि कुछ नॉटी सवाल पूछेंगे. मैंने भी हां में सिर हिलाया.
“नीतू तुम्हारी जांघों के बीच में हाथ रखा था, तब मुझे महसूस हुआ था, इसलिए पूछ रहा हूँ, तुम्हारी पैंटी गीली हो गई है क्या?”


अंकल की बेशर्मी की हद हो गई थी. अब मैंने भी बेशर्म होने की सोची और खड़े खड़े ही स्कर्ट के अन्दर हाथ डालकर मेरी पैंटी उतारकर अंकल के हाथ में थमा दी.
“अंकल मैं चलती हूँ, अब आप ही चैक करते रहो कि मेरी पेंटी गीली है या नहीं.”


अंकल ने अगले ही पल मेरी पेंटी को अपनी नाक से लगा लिया. मुझे एकदम से शर्म आ गई और मैं दबी सी मुस्कराहट लिए वहां से चली आई.


रात को मुझे वही सब याद आ रहा था, किस तरह अंकल ने मेरे बदन को सहलाया था, छेड़ा था. आंखें बंद करते ही वही सब आंखों के सामने किसी फिल्म की तरह दिखने लगा था. रात को मुझे झड़ने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. बार बार मुझे उनके शब्द याद आ रहे थे कि नाभि के नीचे का बाकी रह गया है.


मैं सोच रही थी कि अंकल मेरी चुत की भी चुम्मी लेंगे क्या. इसी ख्याल से ही मैं रोमांचित हो गई, इसीलिए चुत पर सिर्फ हाथ रखने से ही चुत ने पानी छोड़ दिया.


दूसरे दिन सुबह चुत को अच्छे से साबुन लगाकर साफ किया और उस पर भी डीओ लगाया, अंकल को अच्छी खुशबू आए इसलिए.


अब अंकल के घर जाने का टाइम हो गया था, मैंने हल्का सा मेकअप किया, होंठों को मम्मी की लिपस्टिक लगाई और अंकल के रूम की तरफ जाने लगी. मेरे आने की खबर अंकल को पहले ही लग गयी, मेरा दरवाजा खटखटाने से पहले ही उन्होंने दरवाजा खोला. मेरी तरह वो भी आगे का पार्ट पूरा करने के लिए उत्सुक थे. आज उन्होंने सिर्फ टी-शर्ट और लुंगी पहनी हुई थी.


आज उनका ये रूप देख कर मेरी चूत में चींटियां रेंगने लगी थीं. अब आगे क्या होता है, उसको मैं अगले पार्ट में लिखूँगी.

अंकल के मुँह को चूम कर पूरा गीला किया - Uncle ke munh ko chum kar pura gila kiya

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“अंकल आज भी कल की तरह रिवीजन करेंगे या सीधे आगे के चैप्टर पर जाएंगे?” यह कहते हुए आज के खेल की शुरूआत मैंने खुद ही की.
“अरे वाह नीतू … तुम आज पूरी रेडी हो कर आई हो.


यह कहकर उन्होंने मुझे अपनी बांहों में पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे चूमने लगे. अंकल ने डिरेक्टली रिवीजन शुरू कर दी थी, मैंने भी अपने होंठ खोल कर अंकल की जीभ को रास्ता दिया. अंकल ने एक हाथ मेरी पीठ पर रखा, तो दूसरा मेरे चूतड़ पर रखा और मुझे और करीब खींचा. मुझे मेरे पेट पर एक सख्त चीज चुभने लगी थी. ये अंकल का कड़क लंड था. अंकल भी मजे से मेरे होंठ चूसने लगे थे.


“चलो नीतू … कल की तरह बेड पर लेट जाओ.”
मुझे बेड पर लिटाने के बाद उन्होंने मेरे स्तनों को शर्ट के ऊपर से ही सहलाया, उनके सहलाने से मेरा अंग भड़क उठा.
“नीतू आज तुम्हारी शर्ट पूरी उतार दूँ?”
“हां अंकल, पूरी उतार दो.” मैंने आज अंकल को पूरी आजादी देने की सोची थी.


“तो नीतू तुम ही उतार दो ना.”
मैं उठकर बैठ गई, शर्म को बाजू में रख कर मैंने खुद ही मेरी शर्ट को उतार दिया और ब्रा भी उतार दी. मेरी फुर्ती देख कर अंकल का मुँह खुला ही रह गया.


अब अंकल मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे, उनके हाथ मेरी नंगी पीठ पर घूम रहे थे. उन्होंने मेरा चेहरा, छाती, पेट पर चुम्मियों की बारिश कर दी.


“नीतू अब पेट के बल लेट जाओ, कल तुम्हारी पीठ की चुम्मी लेना ही भूल गया.”
“ईशशश … अंकल, आप भी अजीब अजीब तरीके ढूंढ निकालते हो … आपको यह सब कैसे सूझता है?”
“अब तुम्हारे जैसी हूर की परी सामने अधनंगी लेटी हो, तो मेरे जैसे कलाकार को यह सब सूझेगा ही ना.”


अंकल के कहने के मुताबिक मैं पेट के बल लेट गयी, अंकल भी मेरे पास बैठ गए. मेरे बाल साइड में कर के उन्होंने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रखे और हाथों से मेरी पीठ को सहलाने लगे.
“उम्म … अंकल … मत सताओ ना … मुझे गुदगुदी हो रही है.”
“नीतू इधर तुम अपनी जवानी के जलवे बिखेर कर मुझे सता रही हो और उल्टा मुझे ही कह रही हो कि मत सताओ.”


अंकल ने मेरी पीठ की मालिश करनी शुरू कर दी, अपना हाथ मेरी गर्दन से कमर तक घुमा रहे थे और वही प्रक्रिया अपने होंठों से भी दोहरा रहे थे. उनके चुम्बन से मेरी पीठ अच्छे से गीली हो गई थी, बीच बीच में वह अपने हाथ मेरी बग़लों से ले जाते हुए मेरे स्तनों को दबोच लेते. थोड़ी देर सहलाने के बाद अंकल ने मेरे पेट के नीचे हाथ ले जाकर मुझे पलट दिया.


“नीतू … अब जरा नीचे खिसको और अपने पैर बेड के नीचे ले आओ.”
“क्यों अंकल?”
“आखिरी चैप्टर शुरू करना है ना!”


मैं नीचे खिसकी और पैर नीचे छोड़ दिए, अब मैं सिर से कमर तक बेड पर लेटी थी और पैर घुटनों से फोल्ड करके जमीन पर रखे हुए थे. जिस पल का मैं बेसब्री से इंतजार कर रही थी, वो पल पास आ रहा था.


अंकल- नीतू अब मुझे तुम्हारी स्कर्ट उतारनी होगी और..
उन्होंने बात आधे में ही रोक दी.
मैंने उत्तेजना वश पूछा- और क्या अंकल?
“और तुमने अन्दर जो पहना है वो … अगर पहना हो तो … वो भी उतारना पड़ेगा.”
अंकल मेरी तरफ देख कर मेरे रिएक्शन का इंतजार कर रहे थे.


मैंने भी उनको तड़पाने की सोची- अंकल आपका कहना है कि मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना?
“मुझे नहीं पता?..कल तो तुमने मुझे उतार कर दी थी.”
“आपको क्या लगता है, मेरे पास एक ही पैंटी है?”
“अच्छा बाबा माफ करो, पर स्कर्ट और पैंटी उतारने दे रही हो या नहीं?”
“पर मेरी एक शर्त है, उन्हें उतारने पर मैं आंखें बंद कर लूंगी … मुझे शर्म आ रही है.”
“नीतू तुम आराम से आंखें बंद कर लो, जो कुछ खोलना है, मैं खोल लूंगा.”


अंकल बहुत ही नॉटी बातें कर रहे थे और अब तो मेरी तरफ से भी उन्हें ग्रीन सिग्नल मिला था. अंकल मेरे पैरों के करीब बैठ गए और मेरी स्कर्ट ऊपर उठाने लगे और उसे एक जगह मेरी पेट पर इकठ्ठा किया. पर उनका इरादा मेरी स्कर्ट उतारने का बिल्कुल नहीं था. मेरे बदन पर सिर्फ नाम के लिए स्कर्ट और पैंटी बची हुई थी. अंकल ने अपना हाथ मेरी पैंटी पर रखा, यह एक तूफान की शुरूवात थी, जो मेरे अन्दर पैदा होने वाला था.


अंकल ने उंगली से पैंटी के ऊपर से ही मेरी चुत मसलनी शुरू कर दी, मेरी चुत भी गीली होने लगी. अंकल ने अपनी उंगली चुत की दरार पर रख कर अन्दर दबाई. पैंटी थोड़ी लूज़ ही थी, तो पैंटी उंगली के साथ चुत के अन्दर चली गयी और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चुत के होंठों का फूला हुआ आकार दिखने लगा. अब अंकल उस होंठों के आकार को पैंटी के ऊपर से ही मसलने लगे.


“अंकल मत कर..रो ना … कुछ तो … हो रहा है.”
“नीतू … इधर भी बाल हैं क्या?”
“मैं नहीं बताऊंगी … आप खुद ही पता कर लो..”


मैं शर्म से लाल हो रही थी, अंकल भी मस्ती के मूड में थे. मेरी परमिशन मिलते ही उन्होंने मेरी पैंटी खींच कर मेरे पैरों से उतार भी दी, मैंने शर्म से अपनी जांघें भींच लीं.


अंकल ने मेरे पैर खोलने की कोशिश की पर खोल नहीं सके, पता नहीं मेरे अन्दर कौन सी ताकत आ गयी थी. दो तीन बार प्रयास करने के बाद अंकल ने मुझे गुदगुदी करनी शुरू कर दी, उसकी वजह से मेरी पकड़ ढीली पड़ गयी, तो अंकल झट से मेरे पैरों के बीच आ कर पैरों को अलग किया. अब मेरे पैर खुलने से मेरी चुत भी थोड़ी खुल गई.


अंकल मंत्रमुग्ध हो कर मेरी चुत को देख रहे थे. उसी अवस्था में आगे झुककर अंकल ने मेरी चुत के होंठों पर चुम्मी ली.
“नीतू … तुम यहां भी कितनी खूबसूरत हो, रियली ब्यूटीफुल..!”


मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी, पहली बार कोई मेरी चुत को नंगी देख रहा था, वो भी इतने करीब से. उन्हें क्या बोलूँ मुझे सूझ नहीं रहा था. अचानक मुझे कल उनको दी हुई पैंटी की याद आयी- अंकल वो मेरी कल दी हुई पैंटी कहां है?


अंकल ने अपना हाथ गद्दे के नीचे डाला और मेरी पैंटी बाहर निकाली, पर मुझे देने की बजाय उन्होंने उसे अपने नाक के पास ले जाकर उसे सूंघने लगे.
“ईशश … अंकल क्या कर रहे हो?”
“नीतू तुम्हारी चुत की खुशबू सूंघ रहा हूँ.”
“आप भी ना पूरे बेवकूफ हो.” मेरे जवाब पर अंकल के चेहरे पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया.
“क्या बेवकूफी की मैंने?”
“जिस जगह की गंध आप डायरेक्टली ले सकते हो, उसकी गंध आप इंडिरेक्टली ले रहे हो..”


मैं मेरी चुत की तरफ इशारा कर के बोली. मेरा जवाब सुनकर अंकल को शॉक सा लगा- नीतू मान गए तुमको … कितनी बिंदास बातें करती हो … कहां से सीखा यह सब?
“अंकल आपसे ही तो पिछले दो दिन से ट्यूशन ले रही हूँ.”
“सच में नीतू दो दिन में बहुत अच्छा सीख गई हो, तुम्हें तो इनाम मिलना चाहिए.”


अंकल फ्रिज की तरफ गए और दो टॉफी ले कर मेरे पास आए, उसमें से एक मुझे देखर बोले- ये लो, ये तुम खाओ … जब मैं तुम्हारी चुम्मी लूंगा, तो मुझे मीठा स्वाद आना चाहिए …


मैंने उस टॉफी को खोल कर मेरी मुँह में डाला, चॉकलेट मेरी सबसे फेवरेट चीज है.
“अंकल आप नहीं खाओगे टॉफी?” मैंने उनके हाथ में टॉफी देखकर बोला.
“खाऊंगा ना … पर थोड़ा अलग तरीके से … तुम देखती तो जाओ.”


अंकल ने टॉफी का कवर निकालकर टॉफ़ी को झट से मेरी चुत में घुसाया, थोड़ी देर तो मुझे कुछ समझ नहीं आया, पर टॉफी की ठंडक चुत में महसूस होते ही मेरे शरीर में रोंगटे खड़े हो गए.
“उफ … अंकल, ठंडा है … बाहर निकालो उसे.”
“नीतू थोड़ी देर रुको, तुम्हारी चुत की गर्मी से वह पिघल जाएगी, तो मुझे तुम्हारी चुत की मिठास भी चखने को मिलेगी.” ऐसा बोलकर अंकल मेरी टांगों के बीच बैठ गए और मेरी चुत की पंखुड़ियों पर एक किस किया. अंकल ने मेरी चुत के दाने को अपने उंगलियों में पकड़ा. चुत के दाने को छूते ही मेरे पूरे बदन के तार बजने लगे. अंकल ने धीरे धीरे दाने को मसलना शुरू कर दिया, तो मेरे अन्दर की अग्नि भड़क उठी.

अब अंकल ने आगे की तरफ झुककर मेरे दाने को अपने मुँह में पकड़ा और हल्के से खींचते हुए काटा, फिर उसे होंठों में पकड़ कर मस्ती से चूसने लगे, अपनी जीभ से छेड़ने लगे. फिर उनकी जीभ मेरी चुत की पंखुड़ियों पर चलने लगी.


मुझे भी मेरी चुत के अन्दर चिपचिपापन महसूस होने लगा था, क्योंकि उसमें मेरी चुत के रस के साथ चॉकलेट था.


मैंने अपने हाथों से चुत की पंखुड़ियों को खोला और अंकल के मुँह को वहां पर दबाया. प्यासे को मानो कुआँ मिल गया हो, अंकल बरसों से प्यासे आदमी की तरह मेरी चुत के अन्दर के चॉकलेटी रस को पीने लगे.


“उम्म … नीतू इतना डेलिशियस चॉकलेट मैंने आजतक नहीं खाया … उम्म…” अंकल ने चाट चाट कर मेरी चुत के अन्दर का चॉकलेट खत्म कर दिया और अपनी जीभ मेरी चुत के अन्दर बाहर करने लगे.
मैं व्याकुल होकर बोली- आह … अंकल … बहुत अच्छा … लग रहा है … और अन्दर घुसाऽऽऽओ आप अपनी … जीभ..
“जीभ से कुछ नहीं होने वाला..” अंकल बोले.
“फिर … मुझे तो कुछ कुछ होने लगा है.”
“नीतू बेटा … जब ऐसा होता है तो जीभ नहीं, इसे अन्दर डालते हैं..”


उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी लुंगी पर रखा, उस वक्त मुझे करंट सा लगा. मेरे हाथों में उनका तना हुआ लंड था.


“लुंगी निकालूँ क्या?” अंकल ने पूछा.


मैं कुछ भी नहीं बोली. मेरे मौन को मेरी सहमति समझकर उन्होंने अपनी लुंगी उतारी, तो मैं देखती ही रह गई. अंकल ने लुंगी के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. अंकल का तना हुआ लंड देख कर मेरे शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए. उनके लंड के सामने की चमड़ी पीछे सरक गयी थी और उनका लाल लाल सुपारा साफ़ दिख रहा था, मानो इतनी देर कैद कर रखने की वजह से वो ग़ुस्से से लाल हो गया था.


“अंकल ये क्या कर रहे हो?”
“नीतू बेटा, अब तुम्हारी चुत को इसी की जरूरत है, उंगली जीभ से अब कुछ नहीं होने वाला है.”
“अंकल … मुझे डर लग रहा है … आप ये सब मत करो.”
“नीतू … तुम डरो मत, मैं सब आराम से और बड़े प्यार से करूँगा. तुम्हारा पहली बार है, इसलिए तुम्हें शुरू में थोड़ी तकलीफ होगी, पर बाद में तुम भी एन्जॉय करने लगोगी.”


ये कहकर अंकल मेरे पैरों के बीच में आकर खड़े हो गए. अंकल ने मेरे पैरों को घुटनों में फोल्ड किया और घुटनों को पकड़ कर मेरे कंधे तक ले आए. अब मेरे चूतड़ ऊपर हो गए और चुत की पंखुड़ियां खुल कर लंड के स्वागत के लिए तैयार हो गईं.


अंकल ने अपने लंड को पकड़ कर मेरी चुत पर रख दिया.


“आह..” मेरी चुत को लंड का पहला स्पर्श हुआ. उस गर्म स्पर्श से ही मैं पिघलने लगी. अंकल भी देर ना करते हुए अपना लंड चुत के अन्दर घुसाने लगे.


उनका इतना बड़ा लंड मेरी चुत में कैसे घुसेगा? मेरी चुत फट तो नहीं जाएगी? ऐसे सवाल मेरे मन में चल रहे थे, पर अंकल बहुत ही प्यार से लंड को अन्दर डाल रहे थे.
“नीतू दर्द होगा … तो बोलना … मैं बाहर निकाल लूंगा.”


वैसे तो मैंने बहुत सेक्स कहानियां पढ़ी थीं, उन कहानियों में पहले संभोग के दरम्यान स्त्री को होने वाले दर्द को हमेशा लिखा जाता था. पर अंकल मुझे दर्द ना हो, इसका पूरा ध्यान रख रहे थे. पहली बार होने की वजह से और चुत के मसल्स संभोग के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होने की वजह से दर्द तो हो रहा था, पर वह दर्द भी मीठा लग रहा था.


अब अंकल के चौड़े मूसल ने चुत के अन्दर की खाली जगह को पूरी तरह से भर दिया था. चुत के मसल्स किसी इलास्टिक की तरह खुल रहे थे और लंड को अपनी बांहों में कस कर पकड़े हुए थे.
उनका लंड मेरी चूत में अन्दर तक आ जा रहा था.


“नीतू … कैसा लग रहा है … तकलीफ हो रही हो तो बोलना … मैं बाहर निकाल लूंगा.”
अंकल ने मेरे चेहरे पर हल्के दर्द के भाव को देखकर बोला, सच में उनको मेरी कितनी फिक्र थी. मैंने भी आज दर्द को सहने की सोच ली थी.


दस मिनट की चुसाई के बाद मेरी चुत तो वैसे ही चिपचिपी हो गयी थी, तो अंकल के लंड को अन्दर बाहर होने में मदद ही हो रही थी. अंकल अब मेरे शरीर पर झुके और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर मुझे किस करने लगे. मुझे उनके लंड से चुदवाने में मजा आने लगा था.


उनका एक हाथ मेरे छाती पर था और वह मेरे स्तन मसल रहे थे, दूसरा हाथ मेरी चुत पर रख कर मेरी चुत के दाने को छेड़ रहे थे.


मैंने अपना पूरा तन मन अंकल को समर्पित कर दिया था, अंकल बड़े आराम से मेरी चुत में लंड से पम्पिंग कर रहे थे. योनिमार्ग के साथ मेरा दाना भी रगड़ खाने की वजह से मेरी चुत फुरफुराने लगी थी. उसने अंकल के लंड पर अपनी पकड़ अब और टाइट कर दी.


“नीतू … देखो कैसे अच्छे से पकड़ा है तुम्हारी फुद्दी ने मेरे लंड को, आहहहह … बहुत टाइट है तुम्हारी चुत..”


चुत लंड के संगम से ‘पच..पच…’ की आवाजें निकलने लगी थीं. अंकल भी अब जोश में आ गए थे. अपने धक्कों की स्पीड डबल कर दी थी. मैं भी सब कुछ भूल कर चुत लंड के मिलन का आनन्द ले रही थी.


“अंकल अब. … सहन नहीं हो रहा … आप जोर से करो … और जोर से चोदो मेरी चुत को, चोद चोद कर पूरी हेकड़ी उतार दो साली की.”
“नीतू, अब देखो कैसी चुत चौड़ी करता हूँ.” यह बोलकर अंकल ने मेरी टांगें और फैला दीं और एक जोर का धक्का दे दिया. लंड अन्दर बच्चेदानी तक जाके लगा. मेरी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल गई लेकिन मुझे इस वक्त लंड इतना मजा दे रहा था कि बस मेरी आंखें मस्ती से बंद होकर लंड का मजा ले रही थीं. मेरी हालत एकदम से अकड़कर मस्त होती जा रही थी. मेरा शरीर मानो कटने के कगार पर था.


कुछ ही देर बाद अंकल के लंड से गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी मेरी चुत में गिरी, वीर्य मेरी चुत में उगलते हुए अंकल पागलों की तरह धक्के लगा रहे थे. अंकल के गर्म वीर्य की वजह से और उनके आखिरी धक्कों की वजह से मेरा भी बांध छूट गया और उनके साथ मैं भी झड़ने लगी.


पूरा वीर्य मेरी चुत में निचोड़कर अंकल थक कर मेरे ऊपर लेट गए, मैं भी सेक्स की वजह से चूर हो गयी थी. मैंने अंकल को मेरी बांहों में जकड़ लिया. मेरे पैर अभी भी बेड के नीचे लटक रहे थे. मैंने उनको अंकल की कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया. अंकल के मुँह को चूम कर पूरा गीला किया था.


थोड़ी देर के बाद अंकल मेरे ऊपर से हटे और बेड पर मेरे साथ लेट गए. मैं भी ऊपर सरकते हुए अपना सिर अंकल के हाथ पर रखा. पैर अंकल के पैरों पर रखे और मेरी उंगलियां उनके सीने के बालों में घुमाते हुए उनसे पूछा.


“अंकल एक बात पूछूँ? सही सही जवाब देना हां.”
“हां पूछो ना..!”
“आपने यह सब करने के लिए जो आर्टिकल लिखने की बात की थी, वह सब सच था? देखो सच सच बोलना.”


अंकल अभी भी मेरे स्तन से खेल रहे थे.
“थोड़ा सच था, थोड़ा नहीं था..” अंकल बोले.
“क्या..” मैं चिल्लाई.
“वो क्या है ना नीतू, लिखने वाली बात सही थी. पर जवान लड़की से चुम्बन … इस विषय पर आर्टिकल नहीं था बल्कि मुझे ‘कुंवारी लड़की के साथ संभोग..” इस विषय पर कहानी लिखनी थी.


अंकल ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ा और अपने होंठों से मेरे होंठ बंद कर दिए.

चूत पर चोदने वाले का नाम नहीं लिखते - Choot Par Chodne Wale Ka Naam Nhi Likhte

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दस मिनट बाद मैंने उनकी चूत में गरम-गरम रस डाल दिया और इस दौरान वो भी दोबारा झड गई थीं। मेरा लंड अभी तक उनकी चूत के अन्दर था, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए।
मैंने कहा- भाभी मन नहीं भरा है..!
वो बोलीं- तो करते रहो।
मैंने कहा- पहले तुम्हें इस लंड महाराज की सेवा करनी होगी..!
उसने उसे हाथ में लेकर सहलाना चालू किया। मैं उसके स्तन के निप्पल को मसलने लगा। उनके निप्पल भी अब टाइट होने लगे थे। उन्होंने मेरे लंड को चूमा फिर मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मैं भी बोल रहा था, “भाभी आज इसे पूरा पी लो और जोर से चूस… पूरी जीभ से चाट.. खा लो न.. खूब जोर से लो प्लीज..!”
वो भी “उम्म्मम्म” करके लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी। उसने अपनी जीभ से मेरा पूरा लंड साफ कर दिया और उसे वापस ‘फ्रेश-बनाना’ की तरह कर दिया और चूस-चूस कर अब उसने मेरा लंड गरम लोहे की तरह बना दिया। मैं उसके और उसके स्तनों से खेल रहा था। वो भी अब कड़क हो गई थी।
“अब तुमको फिर मज़ा देता हूँ..! और उससे बोला- अब मैं तुम्हें डॉगी-स्टाइल में चोदूँगा।
वो बोलीं- कैसे?
मैंने कहा- अरे पागल आज तक ऐसे नहीं करवाया तो क्या मस्ती मिली रे.., रोज नए-नए स्टाइल से चोदने का आनन्द लेना चाहिए मेरी जान..!
नेहा भाभी बोलीं- तो करो… नए-नए स्टाइल से आज मेरे ऊपर.. देखूं तो सही..!
मैंने उसे उसके दोनों हाथ को साइड में रखी टेबल पर जमा दिए और बोला- अब थोड़ा झुक जाओ।
फिर मैंने उन्हें डॉगी-स्टाइल में खड़ा कर दिया और पीछे से उनके दोनों स्तन को पकड़कर मसल डाला और अपना लंड उनकी दोनों जाँघों के बीच में डालकर अपने लंड को उनकी चूत पर थोड़ा रगड़ा और उसे गर्म किया।
फिर मैंने अपना पूरा लंड एक ही झटके में अन्दर डाल दिया और मेरे हाथ उनके स्तन को मसल रहे थे, निप्पलों को पकड़ कर खींच रहा था.. मसल रहा था..।
इस स्टाइल में उन्हें दोनों तरफ से इतना मज़ा आ रहा था कि वो “अह्ह्ह्ह” करती जा रही थीं, “करते रहिए रुकिए नहीं..!”
अब मेरा लंड उनकी चूत में स्क्रू की तरह चला गया था और फिट हो गया था, इससे उन्हें बहुत अधिक उत्तेजना हो रही थी।
मुझे भी जबरदस्त आनन्द आ रहा था।
अब मैंने उनसे कहा- अब मेरी ‘हॉर्स-पावर’ देखो तुम्हें घोड़े की तरह चोदूँगा।
मैंने अपनी पोजीशन के लिए उनके स्तन को जोर से पकड़ लिया और धक्का देने लगा। वो भी अपनी गांड को पीछे कर कर के मेरा पूरा लंड खाना चाहती थी।
अब मैं भी जोर-जोर से धक्के देने लगा। उसके गोल-गोल चूतड़ों को धक्के देने में मज़ा आ रहा था।
वो बोल रही थी, “चल मेरे घोड़े फटा-फट और जोर से और जोर आज तेरी भाभी मस्त हो गई है.. शिशिर आज मान गई.. तुझको.. आज तक इतना जोर का मज़ा नहीं आया..!
अब मेरा वक़्त आ गया था। मैं कभी भी अपना लोड छोड़ सकता था और वो भी अब झड़ने वाली थी। मैंने अब उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर धक्के देना चालू किया और वो भी काफी उत्तेजित हो कर चिल्ला रही थी, “आःह ओफफ्फ्फ्फ़ ईईस्स्स्स और जोर से धक्का मारो मेरी चूत फाड़ दो….!”
फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए।
फिर तो मैंने भाभी को कई बार और कई तरीकों से चोदा और उस दिन के बाद से यह चुदाई अभी जारी है।
मुझे पता है कि भाभी के और भी कई यार हैं, जिनसे वो चुदवाती हैं, पर मेरी जगह उनकी ज़िन्दगी में एक ख़ास मुकाम रखती है।
अब नेहा यानि मैं सच कहूँ आज चुदाई में मज़ा बहुत आया, पर दिल कर रहा था अभी कुछ और भी हो.. घर में कोई था नहीं और मेरे पति सुनील वैसे ही देर से आने वाले थे इसलिए कुछ और खेलने का मन कर रहा था।
मैंने कहा- भैया, मैं नहा लेती हूँ, सब साफ़ कर लूँ.. फ्रेश हो जाऊँ…!
शिशिर बोला- ठीक है दी..!
मैंने कहा- दी.. क्यों बोला..!
तो वो बोला- आपने भी तो भैया कहा..!
मैं हंस दी, चलो ठीक है.. देवरजी.. पर दी बोलोगे तो भी चलेगा.. मैं समझूँगी मेरे भैया ने मुझे चोदा।
मैंने शिशिर को बताया नहीं, पर आपको तो पता है कि मेरा एक कजिन मुझे चोदना चाहता था, सो आपकी सलाह पर मैंने उससे चुदवा लिया था।
घर की बात घर में, सो मेरे कजिन ने मुझे चोदा था।
ख़ैर मैं उस से बोली- इस हिसाब से तो तू बहनचोद हुआ..!
वो भी जोर से हँसा और बोला- ऐसा ही सही.. तो तू मेरी रंडी बहना हो गई..!
अब मैं नहाने चली गई..बाथरूम का दरवाज़ा खुला ही था। मैं नंगी ही नहाने लगी।
मुझे शैतानी सूझी, मैंने कहा- देवर जी आओ आप भी नहा लो ना..!
सो वो भी नंगा ही अन्दर बाथरूम में आ गया और हम दोनों साबुन लगा कर खूब नहाए।
नहाते-नहाते शिशिर का लंड फिर जवान होने लगा था। मैंने शिशिर का लंड पकड़ कर अपने चूत में ले लिया और हम खड़े-खड़े बाथरूम में ही चुदाई करने लगे।
ऊपर शावर से पानी की धार.. नीचे से लंड की मार.. मज़ा आ रहा था।
तुम कभी आए तो अपुन ऐसे ही चुदाई करेंगे बाथरूम में…!
खैर चुदाई जारी थी, फिर हम दोनों झड़ गए। शिशिर नहा कर बाहर निकल गया, मैं नहाती रही।
शिशिर मुझे नहाते देख रहा था, तभी वो बोला- भाभी तुम्हारे चूतड़ तो बहुत मस्त हैं यार…. तो गांड भी बहुत शानदार होगी। चल जल्दी बाहर आ तेरी गांड मारनी है।
मैं मन ही मन बहुत खुश हुई कि चलो एक और दौर होगा, पर ऊपर-ऊपर से कुछ डरते हुए बोली, “नहीं यार गांड नहीं… सुना है गांड मारने में बहुत दर्द होता है; गांड नहीं चाहो तो चूत चोद लेना..!”
वो बोला- नहीं.. जल्दी बाहर आ.. आज तेरी गांड भी मारनी है।
मैं तो ऐसे ही ऊपर-ऊपर से कह रही थी, सत्य यह है कि मुझे तो गांड मराने में बहुत ही मजा आता है सो मैं भी जल्दी से बाहर आ गई।
मैं बाहर आ गई तो शिशिर बहुत खुश हुआ, बोला- भाभी तुम कितनी अच्छी हो.. मेरा कितना कहना मानती हो.. मुझे कितना साथ दे रही हो..!
मैंने कहा- चल अब मक्खन मत मार.. गांड मारनी है तो मार ले..!
मैं प्रेम से गांड मराने लगी, वो भी प्यार से गांड मार रहा था।
अचानक उसने पूरा लंड बाहर निकाल कर पूरा का पूरा एक झटके से मेरी गांड में डाल दिया, तो एकदम से मेरा मूत ही निकल गया। हम दोनों ही जोर-जोर से हंसने लगे। चुदाई के बाद मैं शर्माने जैसा नाटक कर के शिशिर से बोली- मुझे अब बहुत शर्म आ रही है.. मैं न.. कितनी गन्दी हूँ… मैं कितनी बेशरम हो गई थी और तुमने भी आज मुझे कितना रगड़ा है।
तो शिशिर बोला- नहीं भाभी, आप बहुत अच्छी हैं और मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ और शरमाओ मत.. ये सब नेचुरल हैI
शिशिर बहुत खुश था। उसने मुझे हर तरह से रगड़ा था, मैं भी खुश थी कि मेरे तीनों छेद खूब भरे थी.. खूब अच्छे से चुदाई हुई थी।
भरपूर चुदाई के आनन्द के बाद हमने सोचा कि अब वापस चलना चाहिए तो दोनों ने कपड़े पहने और एक-दूसरे को खूब प्यार किया और वादा किया कि हम फिर मौक़ा मिलते ही इस सब को फिर से करेंगे और बार-बार करेंगे।
अब जब भी मेरे पति बाहर जाते हैं, शिशिर चोदने की जिद करता है। मैं भी कभी-कभी उसे मौक़ा देती हूँ, पर बाकी मेरे ढेरों और यार भी तो हैं… उनको भी तो अवसर देना होता है न…!
खैर आप आइएगा.. आपको भी निराश नहीं करूंगी।
अपने विचार कहानी के नीचे डिसकस में ही लिखें !

चोदने वाले खुद का नाम चूत पे नहीं लिखते - Chodne Wale Khud ka Naam Choot Par Nhi Likhte

चोदने वाले खुद का नाम चूत पे नहीं लिखते - Chodne Wale Khud ka Naam Choot Par Nhi Likhte, मस्त और जबरदस्त चुदाई , चुद गई , चुदवा ली , चोद दी , चुदवाती हूँ , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी , Hindi Sex Story , Porn Stories , Chudai ki kahani.

मैं चाय लेकर चुपचाप उसके पीछे खड़ी होकर देखने लगी। वो भी हॉट सेक्सी सीन्स का मज़ा ले रहा था।


अचानक उसने देखा तो मैं पीछे थी, वो जैसे ही हड़बड़ी में पीछे घूमा, मैं चाय लेकर खड़ी थी, तो पूरी ट्रे मुझ पर ही उलट गई।
चाय बहुत गर्म थी, तेज़ी से जलन हुई तो मैं भाग कर जल्दी से बाथरूम में जाकर पानी से धोने के लिए चली गई। चाय बहुत गर्म थी।


अब आगे की कहानी आप शिशिर के शब्दों में सुनिए।


दोस्तों मैं 23 साल का जवान लड़का हूँ मेरा लंड 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है और मेरी हाइट 5’ 11” इंच है। मैं एक स्मार्ट लड़का हूँ मेरा रंग गोरा है। आज मैं आपको अपने पहले सेक्स अनुभव के बारे में बता रहा हूँ।
भाभी जल्दी से बाथरूम में जाकर पानी से धोने के लिए चली गई, चाय बहुत गर्म थी।
वो जल्दी से बाथरूम में गई और शावर ही खोल दिया ताकि जल्दी ठंडे पानी से आराम मिले।
दरवाज़ा खुला ही था।
मैंने कहा- पानी तेज़ चला लो और तुम्हें कहीं जलन तो नहीं हो रही है, जल्दी से कपड़े बदल डालो।
यह कहते हुए मैं बाथरूम के पास चला गया और देखा तो भीगे कपड़ों में वो बेहद खुबसूरत लग रही थी।


उसकी ब्रा ब्लाउज में से साफ़ नज़र आ रही थी। ब्रा में से स्तन बाहर आने को आतुर हो रहे थे, स्तनों का साइज़ 38 था। साड़ी का पल्लू पूरा नीचे था।
वो बोलीं- जरा मेरी मदद कीजिए.. जरा अलमारी से तौलिया ला दीजिए।
मैं तौलिया निकालने गया।
इसी बीच भाभी ने अपनी साड़ी उतार दी थी, ब्लाउज भी खोल दिया, अब वो अपनी ब्रा खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो हुक खुल नहीं रहा था।
मैंने उनको तौलिया पकड़ा दिया। उन्होंने उसे हाथ में लेकर हेंगर पर टांगा और अपने ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश करने लगी।
मैंने बाहर से कहा- मैं हेल्प करूँ..!
वो बोलीं- हाँ हाँ जल्दी खोल दीजिए न.. चाय गर्म थी ना..!
वो दरवाजे की तरफ पीठ कर के खड़ी हो गई और मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- कहीं जलन तो नहीं हो रही..!
मैं बड़े प्यार से कमर पर हाथ चला रहा था, बोला- ठंडे पानी को बदन पर डालो..!
फिर मैंने शावर चला दिया। शावर के नीचे उनके स्तन बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। उनके स्तन उठे हुए थे। उनको देख कर, पूरी मस्ती आ रही थी।
मैं भी भीग गया।
फिर वो बोलीं- देवर जी, आप भी भीग गए हो.. जल्दी कपड़े उतार लीजिए..!
मैंने ‘फट’ से सारे कपड़े उतार दिए।


मेरा लंड पूरा टाइट होकर खड़ा हो गया था। अंडरवियर में लंड खूब तना हुआ था। भाभी ने भी गौर किया था, पर उनको शायद कोई एतराज़ नहीं था। मैंने फिर धीरे से उनके बाल गर्दन पर से हटाए।
मैंने कहा- भाभी, जरा सामने घूमो कहीं यहाँ जलन तो नहीं हो रही है।
सामने घूमने पर उन के खरबूजे बहुत मस्त लग रहे थे।
मैंने दोनों हाथों से उनको प्यार से सहलाया और कहा- इन पर थोड़ा पानी और डालो।
उसके मस्त मम्मे सहलाते हुए मैंने पूछा- कहीं जलन तो नहीं हो रही? ठीक से पानी पैरों पर और जांघों पर भी डालो.. वहाँ भी चाय गिरी है।
यह कहते हुए मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। फिर भाभी ने जल्दी से पेटीकोट उतार दिया और फिर पानी डालने में लगीं।
मैंने कहा- इधर कहीं जलन तो नहीं हो रही..!
यह कहते हुए मैंने पूरी जाँघों पर, टांगों पर और उसकी चूत पर और चूतड़ों-गांड पर खूब हाथ मला जैसे कि मैं धोने में मदद कर रहा होऊँ।
मैंने कहा- कहीं जलन हो रही हो तो क्रीम लगा दूँ..!
बोलीं- नहीं, अब ठीक लग रहा है।
मैंने कहा- पर अब जलन मेरे बदन पर शुरू हो गई है।
बड़ी मदमस्त लग रही थी वो, और मुझसे रहा नहीं जा रहा था। अब मैं क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
मैं भाभी की कमर पर हाथ फेरने लगा और बोला- मेरी जान, तुम तो इतनी सेक्सी हो मैंने कभी सोचा नहीं था।
पीछे से भाभी का बदन बहुत सेक्सी लग रहा था। उनका फिगर का साइज़ 38-30-38 था।
“आज तो मुझे गिफ्ट चाहिए..!” यह बोलकर झट से मैंने पहले हाथ को चूमा और फिर उनके लबों को चूम लिया।
वो बोलीं- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मस्ती और क्या..!
फिर थोड़ा सा आगे पैर दबाया और उनके पास सट कर खड़ा हो गया और उनके बालों को हटाते हुए एक हाथ को कमर पर और दूसरे हाथ को उनके स्तन के ऊपर रखते हुए उनको अपनी तरफ खींच लिया।
और उनसे बोला- जब से मैंने आपके भीगे हुए बदन को देखा है, मेरे मन में आग सी लगी है। मैं बेचैन हो गया हूँ। आज मैं अपनी हर कामना को पूरा करना चाहता हूँ।
अब मैं उनके बड़े बड़े स्तनों को दबाने लगा, तो वो पहले कुछ देर तक तो विरोध करती रहीं लेकिन थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि वो “उम् आह..” की आवाजें निकालने लगीं और फिर “स्स्स्स आह उम्” की मस्ती भरी एक अजीब से आवाज़ निकलने लगी।
वो हालांकि उस वक्त भी यह दिखाने की पूरी कोशिश कर रही थीं कि वो वैसा नहीं चाहती है, लेकिन उन्हें मज़ा आने लगा था।
मैं उनके स्तनों को जोरों से दबाने लगा और फिर जीभ से चाटने लगा और बोला- इससे सारी जलन मिट जाएगी..!
और चारों तरफ जीभ फेरने लगा।
अहह.. क्या लग रही थी..!
मैं उनके स्तनों पर टंके हुए सेक्सी निप्पलों को चूस रहा था। फिर मैंने उनके स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और उनको दबाने लगा। स्तन इतने बड़े थे कि मुश्किल से हाथ में आ रहे थे।
मैं अपने भाग्य को सराह रहा था कि आखिर आज मेरे लंड को चुदाई का मौका मिल ही गया…
मैंने उनके मुँह में मुँह डाला और उन्हें पागलों की तरह चूमने लगा।
वो भी जोश में आ गई थी मैं उनके स्तनों को अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो इतने बड़े थे कि यह नामुमकिन था।
वो उधर सिसकरियाँ भर रही थी- अम्म… आह्ह्ह्ह क्या कर रहे हैं आप अह उम्म्म..!
मैं भी जोश में आ गया। भाभी भी स्तन को हाथ लगाने लगी, उनके मन में भी अब सेक्स की इच्छा प्रबल हो उठी थी शायद…!
मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया, मेरा लंड पूरी मस्ती से खड़ा था।
वो देखकर बोलीं- शिशिर यह तो बहुत ही बड़ा है मैं नहीं झेल सकती.. कितना लम्बा और मोटा है। तुम्हारे भैया का 5 इंच से ज्यादा नहीं होगा पर तुम्हारा तो.. ओफ्फ्फ्फ़… बताओ तो सही क्या साइज़ है..!
मैं बोला- ज्यादा नहीं यही कोई 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है और अब तुम डरो नहीं मेरा वादा है कि जब यह तुम्हारी चूत में एक बार पूरा जाएगा, तब तुम खुद ही बोलोगी कि प्लीज शिशिर पूरा डाल कर चोदो मुझे, ट्रस्ट मी जरा इसको अपने प्यारे हाथों में लेकर थोड़ा प्यार करो।
फिर भाभी डरते हुए मेरे लंड को अपने हथेली से सहलाने लगी। कुछ देर बाद भाभी को अच्छा लगने लगा तो उन्होंने किस करते हुए मेरे लंड को जोर से दबाया।
फिर मैंने तौलिये से उनके गीले बदन को पोंछते हुए कहा- चलिए, हम आज सुहागदिन ही मनाएंगे।
भाभी भी अब जोश में आ गई थीं और मजा लेना चाह रही थीं।
उन्होंने मुझे लिपटना और चूमना शुरू कर दिया बोलीं- तुम्हारा लंड कितना प्यारा है.. मैं इससे प्यार कर लूँ..!
मैंने कहा- जानू ये तो बस अब तुम्हारा ही है खूब प्यार करो और चूसो।
भाभी बड़े प्यार से लंड को प्यार करने लगीं चूमने लगीं। भाभी अब दिल ओ जान से तैयार थीं।
भाभी गर्म हो उठी थीं और चुदना चाह रही थीं।
उन्होंने अपनी टांग उठा कर लंड को चूत के नजदीक ले जा कर चूत में लेना चाहा, पर मैं उनके मुँह से सुनना चाहता था कि आओ शिशिर मुझे चोदो..!
लंड भाभी की चूत के बाहर खड़ा है, चोदना मुझे भी है और चुदना भाभी भी चाह रही है, पर मुझे लगा अभी जल्दी है थोडा फोरप्ले और होना चाहिए।
अब मैंने उनको अपने बांहों में उठा लिया और ले जाकर बेड पर लिटा दिया और उन्हें चूमने लगा।
वो बोलीं- चूमा-चाटी में ही टाइम ख़राब करोगे या कुछ आगे भी करोगे?
मैं उनके दोनों स्तनों के चूचकों को चूसने लगा था और वो जोर-जोर से, “आह…हह.. और जोर से चूसो अआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह..!”
और वो छटपटा रही थी। मैंने दोनों हाथों से उनके स्तनों को दबा रहा था और मुँह से एक-एक करके पपीते चूस रहा था।
फिर मैं एक हाथ से उनके चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा।
वो उछल-उछल कर चिल्ला रही थी, “शिशिर और जोर से करो.. और जोर से दबाओ.. और जोर से चूसो…!”
फिर मैं उनके पूरे बदन को चूमने लगा। वो मानो नई दुल्हन की तरह सिसकारियाँ ले रही थीं और मैं उनके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाट रहा था।

फिर मैंने उन्हें उल्टा लिटा दिया और उसके पिछले हिस्से पर अपनी जीभ फिराने लगा। उसको मानो स्वर्ग का आनन्द मिल रहा था।


मैंने उनकी दोनों जांघों के बीच में भी अपनी जीभ को घुमाकर उन्हें मस्त कर डाला और फिर ऊपर से नीचे तक उन्हें चूम लिया।


अब रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपना लंड उसके मुँह की तरफ कर दिया और चूसने को कहा।
तो वो बोलीं- नहीं शिशिर… यह मेरे मुँह में नहीं जा सकता..!
मैंने कहा- ठीक है कोशिश तो करो.. मैं तुम्हारी चूत चूसता हूँ और तुम मेरा लंड..!
फिर मैं ऊपर और वो नीचे थी, मैं उनकी बालों वाली चूत को जीभ डालकर चाटने लगा तो वो स्वर्ग में उड़ने लगी और मस्ती में मेरा लंड मुँह में जितना ले सकती थी, उतना लेकर चूस रही थी। उसको अब खूब मज़ा आ रहा था।
करीब 15 मिनट बाद वो बोलीं- शिशिर मैं झड़ने वाली हूँ… जोर-जोर से मेरी चूत को चूसो, खा जाओ मेरी चूत को आआह्ह्ह… आज तक कभी मेरे पति ने इस तरह मेरी चूत नहीं चाटी आअम्म्म्म..!
ये बोलते हुए उन्होंने मेरी गर्दन अपनी टांगों में कस ली और अपनी चूत ऊपर उठा दी, मैं समझ गया कि वो झड़ गई है।
इतनी देर में उनकी चूत का रस मेरे मुँह के रास्ते मेरे गले में उतर गया। वो शांत हो चुकी थी और मेरा लंड अब भी चूस रही थी।
कुछ देर बाद मैं उठकर उनकी टांगों के बीच में बैठ गया और उनकी चूत के मुँह पर लंड रखा और थोड़ी देर के लिए उन्हें सताने के लिए उस पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा।
उन्हें इतना मज़ा आ रहा था कि वो बोल नहीं पा रही थीं, पर उनके चेहरे से साफ़ जाहिर था कि वो मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेने के लिए बेकरार हो रही थीं।
फिर मैंने उनकी चूत के मुँह पर लंड रखकर एक हल्का सा धक्का मारा, वो सिहर उठीं, अब उन्हें दर्द होने लगा। मैंने उनके मुँह पर झुककर उन्हें चुम्बन करने लगा और अपने हाथ उनके स्तनों पर फेरने लगा।
भाभी बोलीं- अय्यीयाह… मर जाऊँगी.. अह… यार बहुत मोटा है.. धीरे करो..!
उन्हें वो अच्छा लगा और मैंने चूमते हुए ही एक और धक्का दे दिया और मेरा लंड कुछ और अन्दर डाल दिया, तो उनकी चीख निकल गई।
पर मेरे लगातार चुम्बन करने की वजह से वो मेरे मुँह में ही रह गई। मैं ने चुम्बन को चालू रखा, उन्हें इससे बहुत अच्छा लग रहा था और मेरे दोनों हाथ उसके उभारों को मसल रहे थे।
उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था।


फिर मैंने उनके मुँह को अपनी जीभ से भर दिया और उसके मम्मों को जोर-जोर से दबाने लगा। उसे थोड़ा दर्द जरुर हुआ, पर वो मज़े लूट रही थी।


फिर थोड़ी देर उनके मम्मों को सहलाने के बाद मैं एक और आखरी धक्का दे दिया और मेरा पूरा 6 इन्च लम्बा लंड उनके चूत के अन्दर था।
वो जोर से सिसकारी मार रही थी, “आह्ह्ह्ह उईईई मरीईए गई मज़ा आ गया चोद दे याररर अह्ह्ह्हह…!”
अब मैं फिर धक्का मारने लगा। धीरे-धीरे अब वो अब वो मुझे अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर साथ देने लगी।


कुछ देर बाद मैंने उसके पैर अपने कन्धों पर रखे और अपना पूरा लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।


उनके पैर मेरे कंधे पर होने से पोजीशन इतनी टाइट थी और मैं उनके चूत के अन्दर तक चला गया था।


मेरा लम्बा लंड भाभी की चूत में उछल-कूद करने लगा।
वो चिल्ला रही थी, “बहुत बड़ा है..अब बस करो मुझसे सहा नहीं जाता प्लीजजज..!”
पर मैं बस थोड़े ही करने वाला था। कुछ देर बाद उनकी चूत में मेरे लंड ने अपनी जगह बना ली थी।
अब भाभी भी मुझे कह रही थीं, “और जोर से चोद.. आज से पहले ज़िन्दगी में ऐसी मज़ा कभी नहीं आया..!”
और मैं धक्के पर धक्के दे रहा था और वो भी उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थी। मैं जोर-जोर से अपना लंड उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।


वो अपने बाल नोंच रही थी, तो कभी अपने स्तन को दबा रही थी। बस मुझे उसके साथ आज ज़िन्दगी का मज़ा लूटना था।


अब वो इतनी तेज़ी से उछल रही थी कि वो उसकी चूत से ‘फच फच’ की आवाजें पूरे रूम को भरने लगीं।
भाभी भी मेरा हौसला बढ़ा रही थीं, “और जोर से शिशिर और जोर से.. अब मैं झड़ने वाली हूँ.. तुम मुझे बहुत मज़ा दे रहा हूँ आह्ह अआम्म्म हाँ… और जोर से आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्… लो मैं झड़ी…आ..हह..!”
और वो झड गई। कुछ देर बाद करीब मैं परेशान हो गया था कि मैं झड़ क्यूँ नहीं रहा था। भाभी को फिर तो मैंने अलग-अलग आसनों में अलग-अलग तरीके से खूब चोदा। उन्होंने भी खूब मजे से चुदवाया। मुझे भी खूब मजा आ रहा था। दस मिनट बाद मैंने उनकी चूत में गरम-गरम रस डाल दिया और इस दौरान वो भी दोबारा झड गई थीं। मेरा लंड अभी तक उनकी चूत के अन्दर था, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए।
मैंने कहा- भाभी मन नहीं भरा है..!
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