पति को वो करने का टाइम नहीं मिलता है Pati ko vo karne ka time nahi milta hai

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मै एक इंजिनियर हूँ और मेरा नाम विजय (बदला हुआ नाम) है. ये बात तब की है, जब मैं बंगलौर में था और वहां जब कर रहा था. मेरा ऑफिस और घर थोडा पास में ही था. तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती थी ट्रेवल करने में और मेरा काफी समय सेव हो जाता था. मैं करीब 6:30 PM तक मेरे रूम पर पहुँच जाता था. अपार्टमेंट में, मैने ग्राउंडफ्लोर पर एक 2 BHK ब्लाक रेंट पर लिया था. वो पूरी बिल्डिंग ही नयी बनी हुई थी. जिसमे रहने वाला, मैं पहला रेजिडेंट था.

कुछ दिन के बाद, मेरी ही बिल्डिंग में एक कपल रहने आ गया, बिल्डिंग के 3rd फ्लोर पर. वो लोग राजस्थानी थे और वो दोनों न्यूली मैरिड कपल थे. दोनों स्टेयर (ऊपर जाने की सीढ़िया) मेरे ही फ्लैट के बगल में थे, तो वो मेरे ही ब्लाक से होकर गुज़रते थे. चुकि, पूरी बिल्डिंग में हम दोनों ही लोग थे, हम लोगो की आपस में बातचीत शुरू हो गयी थी और वो मेरे घर भी आने लगे थे. अक्सर सन्डे को या छुट्टी वाले दिन, टाइम मिलने पर वो मेरे घर आ जाते टाइम पास करने के लिए और हम टीवी देखकर या बातें करके अपना टाइम पास करते. ऐसे ही समय बीत रहा था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

थोड़े ही दिनों में, हम लोगो की अच्छी फ्रेंडशिप हो गयी और एक दिन राजेश ने मुझसे से कहा – “अरे विजय तुम तो दिन भर ऑफिस में रहते हो और मैं भी शॉप में ही रहता हूँ और मेरी वाइफ, निकिता पूरा दिन घर अकेली रहती है और पुरे दिन बोर होती है”. तो मैने बोला – “हाँ, तो मै क्या कर सकता हु???” तो राजेश ने बोला – “कुछ नहीं अगर तुम बुरा नहीं मानोगे, तो एक रिक्वेस्ट है”. मैने बोला – “हाँ, बताओ तो सही”. तो उसने पूछा – “तुम्हारे घर की चाबी अगर तुम मेरी वाइफ को दे सकते हो, तो अच्छा रहेगा. जब भी वो बोर होगी, तो वो आके टीवी देख लेगी, तुम्हारे घर पर”. मैने कहा – “ओके, नो प्रॉब्लम. लेकिन, थोडा ध्यान से .. बैचलर का रूम है. हर चीज़ इधर-उधर पड़ी रहती है”.

वैसे ही डेज पास्ड और एक दिन मेरा ऑफिस थोडा जल्दी ख़तम हो गया और मैं 5 बजे ही घर पहुँच गया. उसदिन, निकिता बैठी हुई थी मेरे घर पर और टीवी देख रही थी. जब मैं अन्दर घुसा, तो मुझे शौक लग गया, वो मेरी ब्लूफिल्म की डीवीडी लगा कर देख रही थी. मुझे अचानक देखकर वो डर गयी और उसने डीवीडी प्लेयर बंद कर दिया और नार्मल टीवी चालू कर दिया और अपने घर जाने लगी. मैने उसे रोका और बोला – “बैठो ना, नो प्रॉब्लम. कुछ गलत नहीं है”. फिर वो मेरे कहने पर रुक गयी और डरी हुई सी बैठ गयी और बोली – “विजय, प्लीज ये बात किसी को नहीं बताना और तुम भी इस बात को इग्नोर कर देना प्लीज”. मैने बोला – “ठीक है” और वो चली गयी. वो अगले दिन से रोज़ मैने आने तक मेरे ही घर पर बैठी रहती और जब मैं आता, तो मेरे लिए चाय बनाके लाती और दोनों देर तक बातें करते और फिर मैं सिगरेट पीता और उसको भी उसके स्मोक से कोई प्रॉब्लम नहीं थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

एकदिन, वैसे ही जब मैं आया, तो वो फिर से मेरी वो ब्लूफिल्म वाली डीवीडी लगा कर देख रही थी, तो मैने वो देखा और शौक हो कर पूछा – “क्या हुआ, ब्लूफिल्म देखने का बड़ा शौक चड़ा है तुम्हें”. तो उसने पुरे डेरिंग से बोला – “हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो, रियल लाइफ में तो कुछ ज्यादा मिलता नहीं”. तो हमारा कन्वर्सेशन कुछ ऐसे चला.

मैं – “क्यों क्या हुआ?”

निकी – “कुछ नहीं, बस मेरे हँजबेंड को उस काम के लिए टाइम ही नहीं मिलता”.

मैं – क्यों?

निकी – वो आते रात को 11 बजे तक और तब तक मुझे बहुत ही नीद आती है और मैं सोयी रहती हूँ. वो आके खाना खाते ही सो जाते है और मुझे सेक्स करने का बहुत ही इंटरेस्ट है, लेकिन उनके पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है.

मैं – ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तो अब क्या करना चाहती हो?

निकी – कुछ नहीं

मैं – इफ यू डोंट माइंड, मैं तुम्हे सेटइसफाई कर सकता हूँ.

निकी – ये सुनते ही वो बोली – “अरे नहीं, इट्स ओके”

मैं – देख लो गोल्डन ऑफर दे रहा हु, मेरे जैसा जबरदस्त लड़का ढूंढने से भी नहीं मिलेगा, तुम्हें!

(उसें 2 - 3 बार मना किया, फाइनली उसने एक्सेप्ट किया)

निकी – तुम क्या-क्या कर सकते हो, बताओ तो सही?

मैं – बताऊंगा नहीं, सब कुछ करके दिखाऊंगा.

मैने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खीच लिया और उसे अपनी बाहों में जकड कर हग किया, तो वो बोली – “इतनी छोटी सी बात समझने में, इतने दिन लगा दिए, विजय”? मैने उसकी ये बात को सुनते ही फुल टेम्प्ट हो गया और उसको किस करने लगा होठो पर, फुल जोर से किस किया. उसने भी बहुत जोर से और पुरे इंटरेस्ट से कोआपरेट किया. फिर मैने उसके कपडे उतारे. उसके बूब्स ओह माय गॉड! वो तो बहुत गोरे-गोरे और सॉफ्ट जैली की तरह थे. मै उन बूब्स को सक कर रहा था. 5 मिनट के बाद, उसने बोला – “सिर्फ तुम ही चूसते रहोगे, या मुझे भी लोलीपोप चूसने का मौका दोगे?” आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं उठा और उसने मेरे सारे कपडे उतारके मेरा 7.5 इंच का लौड़ा उसके हाथ में लिया और बोला “अरे वाह, ये तो मेरे पति के लंड से काफी बड़ा है. सेम तो सेम, ब्लूफिल्म में रहता है उतना बड़ा”. उसने उसे अपने मुह में लेकर चुसना शुरू कर दिया और उसने मुझे 10 मिनट तक ब्लोजॉब दिया. मेरा आउट हो गया और उसने वो पूरा लिक्विड पी लिया और 2 - 3 मिनट तक और चूसा और मेरा लंड अगेन खड़ा हो गया, तो उसने कहा – “चलो अब रियल गेम शुरू करते है”. मैने कहा – “ मैं तो कब से रेडी हूँ”. तो उसने कहा – “अच्छा है, कब से मैं चूस रही हूँ, तुम मज़े ले रहे थे, तब क्यों नहीं रोका. मैने बोला – “कोई बात नहीं, अब मेरे पास आ जाओ, ये सारी बातें छोड़कर”.

मैने उसको पूरा नंगा किया और उसे बेड पर लिटा दिया. उसने अपने दोनों पैरो को खोलकर मुझे अपनी प्यारी सी चूत का व्यू दिखा दिया, जो उसने अच्छे से शेव कर रखी थी. मैं उसकी तरफ और भी ज्यादा टेम्प्ट हो गया और उसकी क्लीन सेव्ड चूत देखकर, मैने उसकी चूत को 4 मिनट तक चूसा. वो मेरा सिर पकड़कर बोल रही थी. “अह्ह्ह्हह्ह … उम्म्मम्म ….मम्म, विजय तुम कितने अच्छे से चूसते हो”. “अह्ह्ह्हह्ह विजय तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले”. अह़ा अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह विजय आआआह्ह्ह. फिर उसने मुझे मेरा सिर पकड़कर उठाया और मेरे कानो में पास आकर बोला – “प्लीज विजय, मेरी चूत बहुत ही प्यासी है. लौड़े की प्यास है मुझे आज. मुझे चोदो ना … बहुत जोर से चोदो ना”. ये सुनते ही, मैने उसके चूत में अपना लंड डाला और जोर से धक्का लगाया. तो उसकी आह निकल गयी. फिर उसे दर्द हुआ और उसने बोला – “अरे विजय, थोडा धीरे से”. उसदिन, मैने उसको बहुत चोदा और बहुत जोर से चोदा. 10 मिनट तक चोदते ही रहा और उसकी आँखे बंद हो गयी थी

और उसकी जुबान से सिर्फ अहह्ह्ह निकल रही थी और वो बार-बार बोल रही थी – “विजय चोदो..विजय चोदो…मुझे चोदो..आज बहुत चोदो मुझे विजय … मेरी चूत फाड़ दो, विजय … और जोर से चोदो. मेरा हँजबेंड तो मुझे प्यार नहीं करता, तुम मुझे प्यार करो ना, मुझे बहुत प्यार करो. मुझे बहुत प्यार करो और मुझे बहुत चोदो..आज मैं सिर्फ तुम्हारी हु … सिर्फ तुम्हारी … चोदो मुझे ..बहुत जोर से चोदो”. मेरा आउट हो गया और उसने बोला – “तुम मेरे अन्दर ही आउट करो, मुझे बहुत अच्छा लगेगा”. और उस दिन उसका पति घर नहीं आने वाला था. तो वो रात भर मेरे घर पर ही थी. हम दोनों ने रात भर ब्लू फिल्म्स देखि और वही पोजिशन में सेक्स किया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

उस दिन के बाद से तो मेरी लाटरी लग गयी. रोज़ जब मैं घर जाता हूँ, तो मेरे लिए फ्रेश होने के लिए गरम पानी लाती है और एक मस्त सेक्सी चूत अपनी सेक्सी ब्रा और पेंटी में तैयार रहती है, एक गरम और वाइल्ड सेशन के लिए.

मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरी कुवारी चूत फाड़ दी Mere boyfriend ne meri kuvari chut faad di

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हाय दोस्तो, मेरा नाम डॉली शर्मा है.. मैं 26 साल की हूँ आज मेरा फिगर 32-30-34 का है.. बहुत से लड़के मुझ पर आज भी मरते हैं..उस वक्त मेरा गोरा बदन.. 28-24-28 का मोहक फिगर.. उम्र 20 की थी, मेरा पूरा बदन भरा-पूरा था, मेरे काले घने बाल लेकिन छोटे बहुत से लड़के मुझ पर मरते हैं.. बाकी लड़कों के साथ मेरे पड़ोस में ब्यूटी पार्लर वाली आंटी का लड़का भी था। मैं 12वीं क्लास में पढ़ती हूँ और मेरी आंटी का लड़का राजराग भी मेरे साथ मेरे स्कूल में ही 12वीं क्लास में पढ़ता है, स्कूल की बहुत सी लड़कियाँ उस पर मरती हैं। मैं उसे राज कह कर बुलाती हूँ और हम दोनों साथ ही स्कूल जाते हैं, इस तरह लगभग सारा समय इकट्ठे ही बिताते है। हम दोनों अच्छे दोस्त थे.. इस वजह से राज अक्सर हमारे घर आता-जाता था।

एक दिन मेरे-स्कूल में बायो का प्रैक्टिकल चल रहा था। मैं और मेरी फ्रेण्ड रोशनी साथ में ही थे। यह मेरे इम्तिहानों का फाइनल वाला प्रैक्टिकल था। मैं और रोशनी अपनी ही मस्ती में थे, हम दोनों मेंढक के नीचे वाले अंग देख रहे थे। ओहह.. अब आप से क्या छुपाना.. मैं और रोशनी मेंढक के पप्पू महाराज के दीदार कर रहे थे।
तभी रोशनी ने कहा- इतने से लण्ड से क्या करता होगा मेंढक? मेरे मुँह से निकल पड़ा- उसकी मेंढकी से जा कर पूछ.. जिसकी चुनमुनिया में ये जाता है.. वो ही बताएगी। यह बात को उसके ब्वॉय-फ्रेण्ड ने सुन ली और वो हमारे पास आकर बोला- डॉली तुम्हारा तो पता नहीं पर.. रोशनी को सब पता है कि कैसा मज़ा आता है।
मैं यह सुन कर थोड़ी सी भौंचक्की रह गई। बाद में रोशनी ने मुझे बताया कि वो उसके साथ चुदाई का मज़ा ले चुकी है और वो भी स्कूल में ही चुदी थी। मैं उसकी बात सुन कर गर्म हो चुकी थी और मेरा मन कर रहा था कि कोई आकर मेरी भी चुनमुनिया में अपना लण्ड डाल दे.. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

पता नहीं इस ख़याल में मेरा हाथ पता नहीं कब चुनमुनिया पर चला गया.. और मैं उसको सहलाने लगी।
उस वक्त मेरी मुन्नी पर बाल थे.. तभी रोशनी ने मुझको बोला- चल तुझको ठंडी कर देती हूँ। मैं मना किया.. लेकिन वो मानी नहीं और मुझे टॉयलेट में ले गई। उस वक्त वहाँ कोई नहीं था.. क्योंकि स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। मैं वहाँ गई.. तो उसने जाते ही मेरी पैन्टी और सलवार एक झटके में उतार दिया। मैं हैरान थी कि वो करना क्या वाली है। उसके बाद वो मेरी मुन्नी को सहलाने लगी.. कभी वो अपनी उंगली मेरी चुनमुनिया में अन्दर कर दी.. कभी बाहर.. मैं अपने होश में नहीं थी.. पर मुझे मज़ा आ रहा था। बस 5 मिनट में ही मेरी मुन्नी ने पानी छोड़ दिया और रोशनी ने अपने रूमाल से मेरी मुन्नी को साफ़ किया। उसके बाद बोली- चुनमुनिया की सफाई नहीं करती है क्या?

मैंने कहा- रोज़ तो नहाती हूँ.. और साबुन से रोज चुनमुनिया साफ़ करती हूँ।
वो बोली- पागल बचपन वाली सफाई नहीं.. बड़ी वाली।
मैं समझी नहीं कि वो कहना क्या चाहती है।
उसने बोला- तू ऐसे ही खड़ी रह और अपनी आँखें बंद कर ले।

जैसा वो बोली.. मैंने किया.. तभी मुझे लगा कि मेरी चुनमुनिया पर कुछ चल रहा है.. लेकिन मैं देख नहीं पाई.. क्योंकि उसने मेरी आँखों पर रूमाल बाँध दिया था। मैंने रूमाल हटाया तो देखा.. मेरी मुन्नी का वो आधा मुंडन कर चुकी है।

मैंने उससे बोला- क्या कर रही है..?
बोली- तेरी मुन्नी को बड़ा बना रही हूँ।

कुछ ही देर में उसने मेरी मुन्नी को पूरी तरह से गंजा कर दिया। पहली बार मैंने अपनी चुनमुनिया को बिना बालों के देखा था। बहुत प्यारी लग रही थी। उसके बाद वो और मैं क्लास में वापस आ गए। प्रैक्टिकल हुआ और सब घर जाने को रेडी हो गए.. मैं.. राज.. रोशनी और उस का ब्वॉय-फ्रेण्ड ही रह गए थे।

रोशनी बोली- डॉली तुम जाओ.. मैं थोड़ा सा लेट आऊँगी।
मैं समझ गई.. और बोली - ठीक है..
उसके बाद मैं ओर राज जाने लगे कि तभी राज को कुछ काम याद आ गया, वो बोला- डॉली तुम चलो.. मैं अभी आता हूँ… मुझे कुछ काम है।
मैंने बोला- ठीक है।
मैं चलने लगी.. तभी मुझे रोशनी की याद आई कि देखना चाहिए कि वो वहाँ कर क्या रही है? मैंने सोचा वापस जा कर देखती हूँ कि माज़रा क्या है। मैं वापस स्कूल में गई.. सब जगह देखा.. पर मुझे वो दोनों नहीं दिखे। मैं वापस आने लगी.. तभी कुछ ‘खुस्स फुस्स’ की आवाजें आ रही थी- आराम से डालो.. आह्ह.. मैं मर जाऊँगी.. आह्ह.. मैंने वापस जाकर देखा कि रोशनी पूरी नंगी थी और जय रोशनी का ब्वॉय-फ्रेण्ड भी नंगा था। रोशनी उसकी गोद में बैठी थी.. और पागलों की तरह उछल रही थी। उन दोनों को कुछ भी होश नहीं था कि मैं भी यहाँ हूँ। दस मिनट तक वो उसकी गोद में मज़े ले रही थी। उसके बाद रोशनी उसके कान में कुछ बोली तो जय ने उसको गोद से उतार कर बड़े वाले डेस्क पर ले गया और वहाँ लिटा दिया। उसके बाद जय अपना लौड़ा उसकी चुनमुनिया में डालने लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
इस चुदाई को देख कर मैं भी पागल हो गई थी.. ये क्योंकि पहली बार था जब मैंने किसी लड़के का लौड़ा रियल में देखा था… वो भी अपनी बेस्ट फ्रेण्ड की चुदाई करते हुए। उसके बाद जय रोशनी के ऊपर चढ़ गया और तेज-तेज झटके देने लगा। रोशनी पागलों की तरह.. कभी किस करती.. कभी अपने चुचों को दबाती.. कभी कुछ करती.. जय ने अपना लण्ड आराम से निकाला और एकदम से उसकी गाण्ड में डाल दिया। रोशनी उसके लिए रेडी नहीं थी.. वो चिल्लाई.. लेकिन जय ने उसका मुँह बंद कर दिया और पूरा लौड़ा उसकी गाण्ड में डाल दिया। रोशनी अब भी मज़े ले रही थी.. थोड़ी देर बाद वो दोनों झड़ गए और कपड़े पहनने लगे। मैं भी वापस जाने के लिए जैसे ही मुड़ी.. तो मैंने देखा कि मेरे पीछे राज खड़ा था और उसकी पैन्ट आगे से गीली और ऊपर को उठी हुई थी। मैंने उसको हटाना चाहा.. तो बोला- डॉली.. तुम ऐसी होगी.. मैं सोच नहीं सकता था।

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और उसी कमरे में अन्दर ले गया.. जहाँ रोशनी की चुदाई चल रही थी। थोड़ी देर हमारी बहस हुई तो पता चला कि यह इन तीनों का प्लान था कि मेरी और राज की भी चुदाई करवा ही दी जाए।
मैं ये सुन कर हैरान थी कि मेरी बेस्ट फ्रेण्ड ही मेरी ठुकाई की तैयारी करवा रही थी। मैंने मना कर दिया- मुझको ऐसा कुछ नहीं करना है.. लेकिन राज ने मेरा हाथ पकड़ लिया- आई लव यू.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। मेरे होंठों को चूसने लगा..

तो मैंने कहा- नहीं राज.. ये सब ग़लत है.. तुम मेरे फ्रेंड हो..
राज ने मेरे कंधे हाथ रख दिया और कहने लगा- देखो डॉली मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.. और जैसे-जैसे तुम जवान हो रही हो.. मैं तुम्हें और भी प्यार करना चाहता हूँ।
उसने मेरे गाल पर एक चुम्बन कर दिया.. मैं शर्मा गई और मैंने कहा- राज प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ.. पर अगर किसी को पता चल गया.. तो बहुत बुरा होगा।
राज बोला- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा..
मैं तो वैसे ही रोशनी की चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी… मैंने ज्यादा नाटक नहीं किया। फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे चुचों पर रख दिया और कहा- डॉली मैं इनका रस पीना चाहता हूँ। उसने मेरे शर्ट को ऊपर कर दिया। आगे कुछ और होता.. इससे पहले वहाँ से रोशनी और जय चले गए थे। रोशनी मेरे हाथ में जाने से पहले कन्डोम का पैकेट दे कर हँसते हुई बोली- हैपी फकिंग डे.. मैं भी हँस पड़ी थी। उसके बाद राज ने मेरी कमर में अपना हाथ डाल दिया, अब मैं भी गर्म हो गई थी, राज मेरे चुचों को ब्रा के ऊपर दबाने लगा.. वो बेरहमी से चुचों को मसल रहा था। एक साथ दोनों चुचों को बुरी तरह मसलने से मैं एकदम से चुदासी हो उठी। राज ने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिए और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे। वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगा था। अब उसने मेरे कपड़े उतारना शुरू किए.. पहले मेरी कमीज़ निकाली.. फिर मेरी सलवार खींच दी। अब मैं सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। फिर राज ने मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तने हुए चुचों को चूमने-चाटने लगा।
राज के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था..

मैं अपने दोस्त के साथ नंगी थी, राज मेरे चुचों को मुँह में पूरा भर के चूस रहा था और अपने एक हाथ से मेरी चुनमुनिया को भी सहला रहा था। फिर थोड़ी देर बाद राज ने मेरी अनछुई चिकनी-चिकनी जाँघें चूम लीं.. मैं सिहर उठी। राज पागलों की तरह मेरी जाँघों को अपने मुँह से सहला रहा था और चूम रहा था। फिर हौले से राज ने मेरी पैन्टी भी निकाल दी। मेरी बिना बालों वाली अधखिली गोरी गुलाबी चुनमुनिया को देखते ही वो एकदम से चकित रह गया और बोला- रोशनी शेव अच्छी करती है। मैं हँस दी..
उसने मुझको बोला- रोशनी को मैंने ही बोला था कि तेरी मुन्नी का मुंडन कर दे।

राज ने मेरी पूरी चुनमुनिया हाथ में थाम ली और मेरी पूरी चुनमुनिया को दबा दिया। चुनमुनिया को सहलाता हुआ राज बोला- हाय डॉली.. मेरी जान.. क्या चीज़ है तू.. क्या मस्त माल है.. हहमम्म ससस्स हहा.. राज ने अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया.. अब वो मेरी चुनमुनिया को बुरी तरह मसलने लगा, मुझे बहुत मज़ा आने लगा.. मैं सिसकारी भरने लगी.. राज और जोश में चुनमुनिया को मसलने लगा.. उसने मसल-मसल कर मेरी चुनमुनिया लाल कर दी थी। उसके इस तरह से रगड़ने से मेरी मुन्नी 2-3 बार झड़ चुकी थी, बहुत गीला हो गया था, राज के हाथ भी गीले हो गए थे.. सारा पानी निकल बाहर रहा था, मैं निढाल हो रही थी। फिर राज ने मेरी चुनमुनिया की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चुनमुनिया के होंठों को अपने होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसने लगा।
मैं तो बस कसमसाती रह गई.. मैं तड़पती मचलती हुई ‘आआहह.. आअहह.. राज.. राज.. हाय.. उईईइ.. आहह..’ कहती रही और राज चूस-चूस कर मेरी अधपकी जवानी का रस पीता गया। बड़ी देर तक मेरी चुनमुनिया की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी। तभी राज ने अपने कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गया और उसका लंड फड़फड़ा उठा.. करीब 7 या 8 इंच का लोहे जैसा सरिया था। मैंने कहा- राज.. यह तो बहुत बड़ा और मोटा है.. ये मेरी चुनमुनिया में नहीं जा पाएगा।
तो राज ने कहा- डॉली तू फिकर मत कर.. फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ.. तुझे कुछ नहीं होने दूँगा।
उसने अपना लंड मेरी चुनमुनिया की तरफ बढ़ाया… तभी राज बोला- डॉली.. कन्डोम तो दे.. जो रोशनी ने जाते समय तुमको दिया था। मुझे याद ही नहीं था कि इसकी भी जरूरत पड़ेगी। मैंने अपने हाथों से कन्डोम राज के लण्ड पर लगाया और सहलाने लगी। उसके बाद राज ने मुझको डेस्क पर आराम से लिटा दिया। मैं सोच रही थी जो हालत अभी रोशनी की थी.. अब मेरी होने वाली है। राज के लंड के टच करते ही मेरी चुनमुनिया ने पानी छोड़ दिया। मैं बुरी तरह तड़प रही थी। राज 5 मिनट तक मेरी चुनमुनिया को अपने लंड से सहलाता रहा.. फिर उसने मेरी चुनमुनिया पर हल्का सा ज़ोर लगाया.. तो मेरी चीख निकल गई। उसका लंड अन्दर नहीं जा रहा था।
राज ने कहा- थोड़ा दर्द होगा.. लेकिन फिर ठीक हो जाएगा।
मैंने मंत्रमुग्ध कहा- ओके.. लेकिन राज प्लीज़ आराम से करना।
राज ने ज़ोर से अन्दर डाला.. तो उसका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया।
मेरी आँखों में आँसू आ गए- आह.. मैं मर जाऊँगी राज.. प्लीज़ निकालो.. बहुत दर्द हो रहा है.. आह ओफ… ममाआ..
यह कहते हुए मैं उससे गिड़गिड़ाने लगी.. पर वो नहीं माना और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठों लगा दिए। वो मेरे होंठों को चूसने लगा और अपने लौड़े को मेरी चुनमुनिया में ऐसे ही डाले रखा। मेरी चुनमुनिया से खून निकल रहा था और मैं बुरी तरह तड़प रही थी। वो कहने लगा- तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़।
मैंने हल्के स्वर में कहा- राज आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।
फिर राज ने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चुनमुनिया में जड़ तक घुस गया। मैं सिहर उठी और ‘आह.. ओह्ह.. राज मैं मर गई..’ कहने लगी। राज मुझे तसल्ली देता रहा और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, वो मेरे दूध चूसता रहा। लगभग 5 मिनट बाद उसने धीरे-धीरे झटके मारना शुरू किए।
मैं- आह्ह.. राज.. मज़ा आ रहा है… इस बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी और वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुआ मुझे चोदता रहा। लगभग 10 मिनट बाद राज ने अपना सारा माल मेरी चुनमुनिया में ही छोड़ दिया। हम लेट गए.. मेरी चुनमुनिया पानी और खून छोड़ती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थी, मेरी चुनमुनिया का हाल-बेहाल हो चुका था। कुछ देर बाद राज ने मेरी चुनमुनिया को साफ़ किया और फिर से चूसने लगा। थोड़ी देर में राज का लंड फिर से खड़ा हो गया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
राज ने मुझको लण्ड मुँह में लेने के लिए कहा पर मैंने मुँह में नहीं डाला और उसे किस करने लगी। पर राज के बहुत बार कहने पर मैंने उसको मुँह में ले लिया। मुझे लण्ड का स्वाद कुछ अजीब सा लगा। राज मुझसे कहने लगा- डॉली मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरी फ्रेण्ड मुझसे इतना प्यार करती है। उसके बाद हम ऐसे ही लेटे रहे। इतनी अधिक थकान थी कि मेरी तो उठने की भी हिम्मत नहीं थी। राज ने मेरी टाँगों की मालिश की और मुझको कपड़े पहनाए.. उसके बाद जब मैं पैदल नहीं चल पा रही थी तो उसने मुझको रिक्शे से मेरे घर पर छोड़ा। उस के 1-2 हफ्ते तक मैंने उससे बात नहीं की.. मुझे लाज आ रही थी। उसके बाद सब नॉर्मल हो गया।

मालिन की चुदाई की सेब के बगीचे में Malin ki chudai ki seb ke bagiche mein

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बात उन दिनों की है जब मैं बी.एस.सी. प्रथम वर्ष में पढ़ता था। एक बार मैं अपने मामा के सेब के बगीचे में गया जो कि हिमाचल में है। मेरे सबसे बड़े मामा और उनका परिवार भी वहीं रहते हैं। उनका लड़का बाहर पढ़ता था। मामी, मामा, और उनकी लड़की सभी सरकारी नौकरी में हैं। मैं अक्तूबर के महीने में उन लोगों के पास गया था, यानि की बात अक्तूबर माह की है। उस समय अभी बर्फ नहीं गिरी थी, तो पालतू जानवरों के लिए घास काटकर सुखा ली जाती है जो बर्फ गिरने के समय जानवरों को खाने के लिए दी जाती है। वास्तव में बर्फबारी के बाद हरी घास नहीं मिल पाती है इसलिए पहले ही काट कर जमा कर ली जाती है।

मामी ने विद्यालय से छुट्टी ले रखी थी, और हमारे माली की घरवाली यानि मालिन भी उन के साथ घास काट रही थी। उसका नाम अंजू था। मैंने जब मालिन को देखा तो देखता ही रह गया... यार क्या बताऊँ, क्या सॉलिड माल थी। उम्र तकरीबन 26 की थी और एकदम मस्त फिगर, काम वगैरह करते रहने की वजह से उसकी डील-डौल एकदम कमाल की थी, और बदन कसा हुआ था। ठीक से तो नहीं बता सकता पर शायद 36-26-34 की फिगर रही होगी, जिसे याद कर के आज भी मुझे बहुत मज़ा आता है। जब मैंने उसे देखा तो मैंने सोचा कि अगर इसकी मिल जाए तो मज़ा आ जाए। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

इस चक्कर में मामी के मना करने के बावज़ूद भी उनके साथ काम करना शुरू कर दिया। घास काटने का काम लगभग 10 दिनों तक चलना था और उस दिन तो पहला ही दिन था, और मेरे कॉलेज में छुट्टियाँ भी थीं तो मैंने सोचा, अभी तो काफी समय है, मुझे प्रयास करना चाहिए, शायद किस्मत मेहरबान हो जाए।

मैं ज्यादातर उसके आस-पास ही काम करता रहता था। मैं घास को इकट्ठा कर के उस को बाँधता था। जब वह घास काटने के लिए झुकती तो उस के मम्मे उस की कमीज के ऊपर से दिख जाते। पहाड़ों में काम करते समय, औरतें ज्यादातर ब्रा नहीं पहनतीं। तो बार-बार देखने पर कभी-कभी मुझे उसके निप्पल भी दिख जाते, कसम से मेरा एकदम खड़ा हो जाता था। मैं बड़ी मुश्किल से उसे छुपाता था। डरता था कहीं मामी को पता न चल जाए। मैं इसलिए उनसे दूर ही रहता था।

मालिन ने मुझे कई बार घूरते हुए देख लिया था और शायद उसने पैन्ट के अन्दर मेरे खड़े लण्ड को भी देख लिया था। इसलिए वह कभी-कभी मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा देती थी। मैंने धीरे-धीरे उससे बात करनी शुरू कर दी और वह भी मुझसे बात करने में खुलने लगी। जब शाम हुई तो मामी कहने लगी कि मैं घर जाकर कुछ खाने के लिए बनाती हूँ, तुम लोग थोड़ी देर बाद आ जाना। और वह वहाँ से चलीं गईं।

अब मैं और मालिन दोनों ही वहां रह गये, तो मैंने उससे पूछा कि आजकल तुम्हारा पति कहाँ रहता है, तो उसने बताया कि उसकी ननद बीमार है और अस्पताल में भर्ती है, जो यहाँ से करीब 40 किलोमीटर दूर है। और मैंने उसके बच्चों के बारे में पूछा तो बोली कि दो हैं, एक लड़का 4 साल का, और लड़की 2 साल की, वे उसकी सास के पास रहते हैं। उनका घर भी वहीं पर थोड़ी सी दूरी पर था, मतलब मामाजी के घर से दिख जाता था। और मैं उससे ऐसे ही इधर-उधर की बातें करता रहा, वो भी मेरे बारे में पूछती रही। समय हो गया और हम दोनों वापस मामा के घर आ गए, जहाँ मामी ने कुछ खाने के लिए बना रखा था। और वह उस दिन मेरे लण्ड को खड़ा ही छोड़कर चली गई। अब मुझे जल्दी से अगले दिन का इन्तज़ार था कि कब सुबह हो और वह आए।

अगले दिन वह फिर आई और मैं उस दिन भी उस के साथ काम कर रहा था, मैं कभी उस के मम्मे देखता और कभी उस के पीछे जा कर उसकी गाँड देखता। तभी उसके हाथ में काँटा चुभ गया और वह दर्द की वजह से हल्के से चिल्लाई। मैंने पूछा कि क्या हुआ, तो उसने जवाब दिया कि हाथ में काँटा चुभ गया। तब मैंने उसका काँटा निकालने के बहाने उसका हाथ पकड़ लिया और काँटा निकालने लगा। धीरे-धीरे उस के बाज़ू को सहलाने लगा, मगर वह काँटा इतनी जल्दी नहीं निकल रहा था, मैंने उसे कहा कि इसे पकड़ कर बाहर खींचना पड़ेगा, तो वह बोली, कैसे खींचें, यहाँ तो कुछ भी नहीं है। तभी मैंने उसका अँगूठा अपने मुँह के पास लाया और अपने दाँतों से उसे निकालने लगा, मगर वह इतनी आसानी से नहीं निकल रहा था, थोड़ी मेहनत करने के बाद वह निकल गया। मगर उस के हाथ से खून बहने लगा, तो मैंने उसका अँगूठा चूस लिया, तो वह बोली, छोड़ दो, कोई देखेगा तो जाने क्या समझेगा। हालाँकि वहाँ कोई और नहीं था पर मैंने फिर भी छोड़ दिया। ओर हम फिर से काम करने लगे। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा- अंजू एक बात बताऊँ?

तो वह बोली- क्या?

मैंने कहा- यार तुम बड़ी टेस्टी हो !

तो वह बोली- क्या मतलब?

तो मैंने कहा- मतलब कि तुम्हें खाने में बहुत मज़ा आएगा !

वह मेरा मतलब समझ गई और बोली- "धत्त" ! अपना काम करो।

तो मैंने कहा- नहीं सच में तुम बहुत ख़ूबसूरत हो, और टेस्टी भी हो, तुम्हें खाने में सही में बहुत मज़ा आएगा।

तो वह बोली- सही में मुझे खाना चाहते हो?

तो मैंने कहा- चाहता तो मैं बहुत कुछ हूँ पर...। और मैं चुप हो गया तो वह बोलने लगी- क्या चाहते हो बताओ?

मैंने कहा- कल बताऊँगा, तो वह बोली- नहीं अभी बताओ।

हम बातें कर ही रहे थे कि मामी आ गईं और बोलीं- चलो काफी शाम हो गई है। और हम तीनों वापिस घर आ गए।

फिर अगले दिन मामी को स्कूल जाना था और पीछे हम दोनों ही रह गये थे और हम दोनों साथ-साथ काम कर रहे थे और वह मुझसे पूछने लगी कि हाँ अब बताओ कि क्या चाहते हो।

तो मैंने कहा- छोड़ो तुम बुरा मान जाओगी।

इस पर वह बोली- नहीं तुम बताओ मैं बुरा नहीं मानूँगी।

तो मैंने कहा- मेरा दिल तुम्हें चूमने का करता है।

वह थोड़ी देर खामोश बैठी मेरी तरफ देखती रही और मैं डर गया कि शायद यह कहीं मेरी शिकायत न कर दे। पर थोड़ी देर बाद वह बोली कि ऐसा नहीं बोलते, तब मैं थोड़ा सामान्य हुआ फिर कहा- तुम ही बार-बार पूछ रही थी, तो मैंने बता दिया।

उसके बाद वह कुछ चुपचाप रहने लगी, और मैंने सोचा सारा खेल ही खराब हो गया। हम पूरा दिन थोड़ा-बहुत बात करते रहे, शाम के समय वह ऊपर वाले खेत पर जा रही थी, और मैं ठीक उस के पीछे था। उसका पैर फिसला और वह गिरने लगी, तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया, और मेरा एक हाथ उसकी कमर में और दूसरा उसकी दाईं चूची पर आ गया। मैं भी ठीक से संतुलन नहीं बना पाया, और हम दोनों ही नीचे वाले खेत में गिर गये, मैं नीचे और वह मेरे ऊपर।

हम थोड़ी देर यूँ ही रहे और फिर वो और मं जोर-जोर से हँसने लगे। मैंने तब भी उसका एक मम्मा अपने हाथ में पकड़ रखा था और उसकी गाँड बिल्कुल मेरे लण्ड पर थी, मैंने पतले से सूट के अन्दर उसकी निप्पल पकड़ ली और मसलने लगा। वह फिर भी हँसे जा रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने उसके गाल पर चूम लिया, मैं गरम हो चुका था। तब वह हँसते-हँसते उठ गई। मैं भी उठ गया और उससे कहने लगा कि मेरे पीठ में जलन हो रही है, वास्तव में खेत में पत्थरों पर गिर पड़ा था और थोड़ी बहुत खरोंच भी लग गई थी।

उस पर वह बोली- दिखाओ !
मैंने कहा- मुझे टी-शर्ट उतारनी पड़ेगी, अगर किसी ने देख लिया तो...?

वह बोली- उधर घने पेड़ों के बीच चलते हैं, वहीं देखते हैं। तो मैं और वह घने पेड़ों के बीच चले गये और मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी। मेरी पीठ पर रगड़ लगी थी, और वह बोली कि थोड़ा सा छिल गया है, अब यहाँ तो कोई क्रीम भी नहीं है, उसने बताया कि उसकी बाँह भी थोड़ी सी छिल गई है, तो मैंने कहा कि तुम्हारी बाँह के लिए क्रीम तो है, पर निकालनी पड़ेगी, वह थोड़ी देर से समझी और फिर हँसने लगी।

मैंने उससे कहा कि मेरे ज़ख्म ठीक हो सकते हैं, अगर तुम थोड़ा चूम लो तो। वह बोली ठीक है, और मेरी पीठ पर 2 - 3 जगह चूम लिया। मैंने कहा कि मेरे होठों पर भी रगड़ लगी है, यहाँ भी चूम लो ना... तब वह बोली, आज नहीं, आज बहुत देर हो गई है, फिर कभी... मगर मैं मान नहीं रहा था, मैंने ग्रीन सिग्नल तो देख लिया था इसलिए उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। वह भी गरम हो गई थी और मेरा साथ देने लगी।

तब मैंने उसका मोम्मा पकड़ लिया और दबाने लगा। वह उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म... आआआआआहहहह्ह्हह्ह्हहह... की आवाज़ों में सिसकारियाँ भरने लगीं। मैंने उसे ज़मीन पर लिटा दिया और उसकी कमीज़ ऊपर कर दी और उसका एक मम्मा चूसने लगा और दूसरी हाथ से दबाने लगा। मैं बारी-बारी से उस के दोनों मम्मे चूस रहा था। तभी मैंने एक हाथ उसकी सलवार के अन्दर डाला और उसकी चूत को सहलाने लगा। उसकी चूत थोड़ी गीली हो गई थी। पर मेरी किस्मत खराब थी कि मामी हम दोनों को जोर-जोर से आवाज़ लगा रही थी। और हम दोनों को जाना पड़ा। तो मैंने उसे कहा कि बाकी का कल करेंगे, तो उसने कहा कि अब तो यह बस होता ही रहेगा। और हम दोनों वापिस घर आ गये।

कुछ खाने के बाद मामी ने कहा कि जा इसे इसके घर छोड़ दे। आज थोड़ी देर हो गई है, जल्दी ही अँधेरा हो जाएगा तो मैं उसे उसके घर छोड़ने चल पड़ा। हम रास्ते में भी खूब चूम्मा-चाटी करते रहे और मैंने उसके मम्मे चूसे। वो रात मेरी बहुत मुश्किल से कटी।

मैं सुबह ही उठ गया और उसका इन्तज़ार करने लगा। मामा-मामी सुबह 7 बजे ही स्कूल निकल जाते थे। वह तकरीबन 1:00 बजे आई और हम दोनों फिर बगीचे में चले गये। बगीचे के साथ-साथ एक दूसरे गाँव का रास्ता भी जाता है, इसलिए वहाँ सुबह थोड़ी चहल-पहल होती है तो हम सिर्फ बातें ही करते रहे। उसने बताया कि उसके पति ने कभी भी उसके निप्पलों को नहीं चूसा, वह सिर्फ मम्मे ही दबाता है। अब तो वह सेक्स भी हफ्ते में शायद एक बार ही करता है। और रोज़ शाम को देसी दारू पी लेता है और सो जाता है।

वह बोली कि मैं सारी रात तुम्हारे बारे में सोचती रही और सो नहीं पाई। दोपहर के समय हम दोनों फिर घने पेड़ों में गये और मैंने उसे जाते ही चूमना शुरू कर दिया। और मैंने उसके मम्मे दबाने और कमीज़ के ऊपर से ही चूसने शुरू कर दिये, वह केवल सिसकारियाँ भर रही थी, और मेरे सिर को अपने मम्मों के बीच दबा रही थी। मैं सच में उस वक्त ज़न्नत में था।

मैंने उसको ज़मीन पर लिटा दिया और उसकी सलवार खोल दी, उसकी चूत एकदम गोरी-चिट्टी ती। उसपर थोड़े बाल भी थे, मैंने हाथ से बाल हटाकर देखा, उसकी चूत अन्दर से गुलाबी थी। मैंने उसमें अपनी एक ऊँगली डाल दी। वह एकदम गीली और चिकनी थी, मैं ऊँगली को अन्दर-बाहर करने लगा और उसके मम्मे चूसने लगा। वह उफ्फ्फ्फ्फफफफ..... आआआआहहह्ह्ह्हहह.... उईईईईईई मममाँआआआआ की आवाज़ें निकाल रही थी। बीच-बीच में उसे चूम भी रहा था।

मैंने उसे अपना लण्ड चूसने को कहा, तो वह बोली- नहीं यह गन्दा होता है। पर मैंने उसे काफी प्रयास करने के बाद मना लिया, फिर वह मेरा लण्ड चूसने लगी। उसने थोड़ी देर चूसा और मैं फिर से उसकी चूत में ऊँगली करने लगा और मम्मे चूसने लगा। अब मैंने अपनी दो ऊँगलियाँ उस की चूत में डाल दीं और अन्दर-बाहर करने लगा।

वह ज़ोर-ज़ोर से हम्म्म्म्म्म.... आआआआआहहहहहहह... उउउउफ्फ्फ्फ्फ... आआआआहहहह... करने लगी और जब वह अपनी दोनों टाँगें इकट्ठी करने लगी तो मैं रूक गया। मैं समझ गया कि वह पूरी तरह तैयार हो गई है। तभी मैंने अपनी पैंट की जेब से कोहिनूर कंडोम निकाला और लण्ड पर चढ़ा लिया, जो कि लोहे की तरह सख्त हो रहा था। मैंने उसकी टाँगें फैला कर अपने लण्ड की टोपी उसकी चूत के मुहाने पर लगाई और हल्का सा झटका दिया। वह दर्द से आआआआहहहहहह... करने लगी, तो मैंने कहा तुम्हें अब भी दर्द हो रहा है?

तो वह बोली- तुम्हारा मेरे पति से मोटा है, और लम्बा भी। तभी बातें करते-करते मैंने दूसरा ज़ोर का झटका दिया और अपना सारा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया और वह दर्द से उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ करने लगी। और मैंने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया और थोड़ी सी रफ्तार बढ़ा दी। वह आँखें बन्द करके मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी। मैंने 8 - 10 मिनट बाद उसे अपनी गोद में बिठाया और नीचे से धक्के लगाने लगा और उसे ऊपर-नीचे होने को कहा। अब वह ऊपर-नीचे हो रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे उठाया और एक पेड़ से उसकी पीठ लगा दी और उसकी दोनों टाँगें हाथ में उठा लीं और उसे हवा में उठाकर चोदने लगा। मैं बहुत ज़ोर से धक्के लगा रहा था और मैंने फिर उसे नीचे लिटा दिया और धक्के लगाने लगा। मैंने अपनी स्पीड बहुत बढ़ा दी थी। उसने एकदम अपनी टाँगें सिकोड़ लीं, मैं समझ गया कि वह छूट गई है, मैं फिर भी धक्के लगा रहा था। थोड़ी देर बाद जब मैं छूटने वाला था तो वह बोली कि मैं दुबारा छूटने वाली हूँ, और थोड़ी देर में हम दोनों शान्त हो गए। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने उससे पूछा कि मज़ा आया या नहीं? तो वह कहने लगी कि आज पहली बार यह हुआ कि मैं दो बार छूटी हूँ, और ऐसे तरह-तरह से पहली बार चुदी हूँ। उसके बाद हम दोनों फिर काम पर लग गए। फिर तो हम दिन में कम से कम 3 - 4 बार कर ही लेते थे...

मनेजर ने मेरी की ऑफिस की लिफ्ट में चुदाई manager ne meri ki office ki lift me chudai

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हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम जायरा हैं और आज मैं आप को मेरी चुदाई की एक घटना बताने आई हूँ. मैं दिल्ली के एक ऑफिस में रिसेप्शन का काम करती हूँ. मेरी उम्र 36 साल हैं और मेरी शादी हुए 10 साल हो चुके हैं. 10 साल के वैवाहिक जीवन में मुझे एक बेटा हुआ हैं जिसकी उम्र अभी 6 साल हैं. यह बात आज से कुछ 6 महीने पहले की हैं. उस शाम को मैं ऑफिस से निकलने ही वाली थी. तभी निबिद साहब (हमारे मैनेजर) ऑफिस से बाहर निकले और उन्होंने पूछा, “जायरा आज तुम घर नहीं गई अभी तक? हसबंड लेने तो आ रहे हैं ना.?” मैं: नहीं सर, आज हसबंड पुणे गए हुए हैं किसी काम से. मेरा बेटा अपनी नानी के वहाँ हैं. मैं घर जाते वक्त पार्सल ले लुंगी डिनर का. और बस लेट की हैं इसलिए मैं यहीं रुक गई. निबिद की आँखों में यह सुन के जैसे की एक अजब सी चमक आ गई. उन्होंने कहा, “अगर तुम फ्री हो तो हम लोग बाहर खाने के लिए जा सकते हैं.”

मुझे पहले तो लगा की वो मजाक कर रहे हैं इसलिए मैंने हां या ना कुछ नहीं कहा. वैसे पहले भी सर मुझे गलत नजरों से देखते रहते थे. लेकिन मैंने देखा की वो आराम से खड़े मेरे जवाब की राह देख रहे थे. मैंने इधर उधर देखा और कहा, “सर कोई गलत मतलब निकाल लेंगा इसका…!” निबिद: अरे छोडो वो सब, कोई अच्छे रेस्टोरेंट में डिनर कर के मैं तुम्हे अपनी गाडी में घर ड्राप कर दूंगा. अब मैं ना कही कर सकी. निबिद साहब की ऑडी गाडी में हम लोग करीब के ही एक चाइनीज़ रेस्टोरेंट में गए जहाँ उन्होंने दो तीन चींजें ऑर्डर की. बातों बातों में मैंने देखा की उनकी टांग मेरी टांग से टकरा रही थी. वो जानबूझ के ऐसा कर रहे थे शायद. मैंने देखा की अब मुझे निचे अपनी जांघ के ऊपर भी कुछ स्पर्श हो रहा था. अरे बाप रे निबिद साहब ने अपने हाथ को मेरी जांघ पे घिसा था. मैं घबरा गई की ऐसे भरचक रेस्टोरेंट में भी यह आदमी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा. मैं सच में घबरा रही थी की कही किसी ने एम्एम्एस बना लिया तो प्रॉब्लम हो जायेंगी.  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने अपनी कुर्सी को पीछे खिंचा और निबिद के चुदाई के सपने को जैसे तोड़ दिया. निबिद भी समझ गया कि मैं अभी इंटरेस्टेड नहीं हूँ और उसने चाउमीन को खाना चालू कर दिया. फिर मैंने हम दोनों खाना खाने के बाद रेस्टोरेंट से बाहर आयें तो मैंने देखा की मेरे घर की तरफ की एक बस आ रही थी. मैंने निबिद को थेंक्स कहा और बस पकड ली. पुरे रास्ते में इस गोल्डन चांस को छोड़ देने पे मैं मन ही मन पछता रही थी. निबिद कुछ 35 साल के होंगे लेकिन उनका फिजिक किसी जवान लड़के को भी शर्म में डाल सकता हैं. और ऐसे बन्दे से चुदवाना तो फिर एक सुनहरा मौका ही था मेरे लिए. रात को मुझे वही सारे ख़याल आये. जैसे की निबिद मेरी हार्ड चुदाई कर रहे हैं और मैं उनके लंड के ऊपर बैठ के उछल रही हूँ. दो बार तो इस ख़याल से मेरी आँख भी खुल गई थी. ज्यों त्यों से मेरी रात निकली और सुबह मैं ऑफिस के लिए निकल पड़ी, आज वक्त से पहले ही.

टेबल के ऊपर टेलीफोन वगेरह साफ़ कर के मैं अब जैसे निबिद साहब की ही राह देख रही थी. वो 10 बजे भी चले आते हैं कभी कभी. लेकिन आज 12 बजने तक भी उनका कोई नामोनिशान नहीं था. आज से पहले मैंने इतनी बेसब्री से किसी का भी इंतजार नहीं किया. तभी कुछ 12:20 को निबिद आये, उनके हाथ में एक छोटी सी ब्रीफकेस थी. आज उन्होंने मुझे गुड आफ्टरनून भी नहीं कहा और वो सीधे ही अपने केबिन की और चल पड़े. आखिर मुझे जिसका डर था वही हुआ ना. मैंने उन्हें भड़का दिया था. जब आदमी को लगता हैं की इस चूत से तेल नहीं निकलने वाला तो वो उसे रिजेक्ट कर देते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था. निबिद साहब को लगा की मैं इंटरेस्टेड नहीं हूँ इसलिए वो अब दूर रह रहे थे. या फिर उन्हें सच में गुस्सा आया था मुझ पर. मैंने सोचा की चलो देख ही लूँ जा के उनके केबिन में. मैंने अपनी स्कर्ट ऊँची की और सीधे उनकी ऑफिस में जा पहुंची. केबिन पे नोक करते ही उनकी आवाज आई, “कम इन प्लीज़.” आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

लेकिन जैसे ही मुझे देखा वो जैसे निरुत्तर से हो गए. मैंने उनके टेबल पे जानबूझ के झुक के अपनी बूब्स की गली का उन्हें नजारा करवाया. लेकिन वो तो फ़ाइल में ही अपनी माँ चुदवा रहे थे.

मैं: क्या बात हैं सर, आप तो नाराज हो गए.
निबिद: जायरा, ऐसी बात नहीं हैं. अगर तुम को दिलचस्पी ना हो फिर मैं लट्टू नहीं बनना चाहता हूँ.

मैंने अपनी चुंचियां निबिद के सामने और खोलते हुए कहा, “आप को किसने कहा की मुझे दिलचस्पी नहीं हैं?” निबिद की आँखों में एक अजब सी चमक आ गई उसने मेरी और देखा और कहा, “फिर कल भाग क्यूँ गई थी?” मैं: मैं अभी भी पछता रही हूँ. आज भी मैं शाम को फ्री हूँ; चलेंगे चायनिज़ खाने के लिए.
निबिद अपना सर खुजाते हुए: अरे बाबा मेरी दिल्ली की फ्लाइट हैं 1 घंटे में. और उसने बिना रुके आगे कहा, “अभी कुछ नहीं कर सकते हैं क्या हम.?”

मैंने चौंक के पूछा, “अभी, कहाँ, कैसे?”
निबिद ने कुछ सोचा और बोला, “आओ मेरे साथ.”

मैं उसके पीछे चलने लगी. जाते वक्त उसने मेरी टेलीफोन की पिन को निकाल डाला ताकि घंटी बजती ना रहें. हम लोग सीडियों से उपर होते हुए दूसरी मंजिल पे आये. और मैं समझ गई की वो कहाँ ले के जा रहा था मुझे. दुसरे मंजले पे एक स्टोर रूम था और एक लिफ्ट थी जो ख़राब थी. वो एक पुरानी लिफ्ट थी जिसे बंध कर के नई लिफ्ट लगवाई गई थी. दुसरे मजले पे शायद ही कोई आता था. निबिद मेरा हाथ पकड के लिफ्ट में घुसे और उसके दरवाजे को बंध किया. उन्होंने दरवाजे को थोडा खुला रखा और हम दोनों अंदर बंध थे. काफी गरम लग रहा था वहां पे. एक भी पल को गवाएं बिना निबिद साहब ने मेरे स्कर्ट को ऊपर कर दिया. मेरी पेंटी पहले से गीली हो चुकी थी, जिसे निचे खींचने में उन्होनें दूसरी मिनट वेस्ट नहीं करनी पड़ी. उन्होंने पेंटी को उतार के मेरी एक टांग को ऊपर किया. मैंने पेंटी को लिफ्ट की हुक में टांग दिया. निबिद साहब ने सीधे ही अपने मुहं को मेरी चूत पे लगा दिया. मेरी गरम और चिकनी चूत को वो अपनी जबान से चाटने लगे. 

मैंने उनके बालों को पकड के अपनी और खिंचा और उन्हें चूत में दबाने लगी. निबिद की जीभ अब मेरी चूत के छेद में घुस चुकी थी जिसे वो जोर जोर से कुत्ते की तरह चाटने में व्यस्त थे. आह क्या मजा था ऐसे चूत को चटवाने में. करीब पांच मिनिट तक वो मेरी चूत को अपनी जबान से मजे देते रहे और इस बीच एक बार मेरी चूत अपना पानी निकाल चुकी थी. अब मैं कैसे भी चुदाई करवाना चाहती थी. मैं काफी गरम हो चुकी थी. मैंने निबिद को कंधे से पकड के ऊपर उठाया. उठते ही उसने अपनी ज़िप खोल के लंड को बाहर निकाला. उनका लंड काफी मोटा था और उसके उपर हलके हलके बाल भी थे. अब घुटनों पे बैठने की मेरी बारी थी. जैसे ही मैं निचे बैठी वो 7 इंच का लंड मेरे मुहं में आ गया. निबिद साहब अपने लंड को बिना कुछ सोचे मेरे मुहं में मारने लगे. उनका लौड़ा मेरे गले तक घुस रहा था जैसे. मैं भी अपनी जबान को उनके लंड पे घिस के जैसे आइसक्रीम चाट रही थी.

अब उन्होंने मुझे उठाया और मेरे मुहं को लिफ्ट की दिवार की और किया. मेरे दोनों हाथ लिफ्ट की दिवार पे थे. मेरी अगली टांग को उन्होंने थोडा आगे कर के चूत के पास अपने लंड की जगह बनाई. अब उन्होंने धीरे से मेरी चूत में अपने लंड को टच किया. काफी हॉट था उनका लम्बा लंड. और दुसरे ही पल लंड की गरमी अब मेरी चूत के अंदर महसूस हो रही थी. हाँ निबिद ने एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चूत में डाल जो दिया था. मैंने गांड को थोडा पीछे किया ताकि मैं चुदाई आराम से करवा सकूँ. आह क्या मजा था उस चौड़े लौड़े को अपनी चूत में लेने में. निबिद ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और वो जोर जोर से मुझे चोदने लगा. उसका लंबा लंड मेरी चूत में आ जा रहा था और चुदाई अपनी असीम सीमा पे थी. आह आह ओह ओह की आवाजें निकाल के मैं भी अब अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी और वो मुझे और भी जोर जोर से चोदने लगा.

लंड ने मेरी चूत को लाल कर दिया और चूत की एक एक मसल को जैसे उसने छू लिया था. निबिद साहब भी अब चरमसीमा पे लग रहे थे और मैं भी उसी कगार पे थी. अब झटके और चुदाई तेज हो चुके थे. वो पुरे लंड को बाहर निकाल के एक झटके में अंदर मार रहे थे. तभी मुझे लगा की चूत की गली में गरम पिचकारी निकल चुकी हैं. निबिद साहब के लंड ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया था. उन्होंने मुझे लिफ्ट के साथ दबा दिया और आखरी बूंद तक अपने पानी को चूत में ही निकाल दिया. मैंने भी अपनी चूत को टाईट कर के उस महंगे पानी को अंदर ले लिया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

लंड बाहर निकाल के उन्होंने फट से उसे अंदर लिया. उन्होंने ज़िप बंध की और मैंने पेंटी पहन ली. स्कर्ट सही कर के मैंने अपनी हेन्की से चूत को भी साफ़ किया. निबिद को फ्लाईट लेनी थी इसलिए वो उस दिन निकल गये. लेकिन उस दिन के बाद मेरी चुदाई उस लिफ्ट में सिमित नहीं रही हैं. कभी हम किसी होटल में मजे करते हैं तो कभी उसके घर पे. मुझे उससे चुदने में बहुत ही मजा आ रहा था लेकिन इससे भी ज्यादा मजा तब आया जब मुझे सेलरी मिली क्योंकि इस बार मेरी मंथली सेलरी 5000 रुपए बढ़ गई थी......

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मैं एक शादीशुदा औरत हूँ। शादी से पहले मैं बहुत चुदी हुई लड़की थी। दसवीं क्लास से चुदवाने का ऐसा चस्का लगा कि अब में मर्द के बिना रहना सपने में भी नहीं सोचती। मर्द के बिना मेरा जिस्म मचलता है। लो अब मुद्दे पे आती हूँ। मेरी उमर सिर्फ़ २४ साल की है मैं अपने ससुराल में रहती हूँ, मेरी शादी राहुल मेहरा के साथ २-२-२००८ में हुई। मेरी शादी घरवालो ने एक अमेरिकन सिटिज़न लड़के के साथ की। सब जानते है पंजाब में बाहर के रिश्ते सभी ढूंढते हैं, शादी के बाद पति देव ३ महीने भारत में रहे, खूब मज़े किए, खूब चुदाई करवाई।

मेरी सासू माँ और ससुर जी दोनों सरकारी मुलाज़िम है ससुर जी भी और सासू माँ सरकारी टीचर। एक देवर है नागपुर में पढ़ाई करता है एक ननद है १९ साल की, वो भी ए कर रही है। सो दोस्तो मेरा ससुराल वाला घर अमृतसर के ख़ालसा कॉलेज के पास है वहाँ बाहर से लड़के पढ़ने आते हैं सो ससुर जी ने ऊपर वाला हिस्सा किराए पे दे रखा है। मेरा घर बहुत सेफ है पूरी तरह बन्द, बड़ा सा मेन-गेट है। ३ लड़के किराए पे रहते हैं वो मुझे जब मिलते तभी वासना उनकी आँखों में दिखती वो मेरी जवानी देख रह नहीं पाते।

पति के जाने के बाद मैं चुदने को बेचैन रहने लगी। फिर मैंने सोचा कि उनमें से एक लड़के को मैंने भी लाइन देनी शुरू कर दी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। जब वो छत पे बैठे रहते, मैं कपड़े सुखाने के लिए जब जाती तो जानबूझ कर झुक कर उनको अपने मस्त गोल मोल मम्मे दिखाती। उनकी निगाहें भी मेरे मलाई जैसे मम्मो पे रहती। जब मैं उनके पास से निकलती, अपने होंठ चबा देती, गाण्ड मटका मटका के चलती। वो आहें भरते, कॉमेंट देते- क्या माल है यार। उनकी ऐसी बातें मेरी प्यास और बढ़ा देती।

आख़िर एक दिन ऐसा मिल ही गया। सास ससुर को किसी काम से मेरी बड़ी वाली ननद मिन्नी के घर जाना था। मिन्नी दिल्ली में रहती है, ननद के पेपर चल रहे थे, वो वैसे भी रोज़ ९ बजे चली जाती मेरी सासू माँ उन लड़कों को अपने बच्चों की तरह समझती और रोज़ सुबह उनके लिया चाय बनवा के भेजती इसीलिए उन्होने मुझे कहा कि तुम इनकी चाय बना दिया करना और आवाज़ लगा देना, ले जाया करेंगे। अँधा क्या चाहे दो आँखें। मैंने कहा- जी ठीक है। अगली सवेर हुई, मैं जल्दी उठ जाती हूँ वैसे भी आज मुझे बन-फब के रहना था, सेक्सी कपड़े, मैंने गहरे गले का सूट पहन लिया वो भी नेट का, जिसके पीछे ज़िप।

मैंने रजनी के जाने के बाद गेट बन्द कर रसोई से चाय बना के उनको आवाज़ लगाने की बजाए खु्द ही उपर चली गई, दरवाज़ा खड़काया तो उनमे से सुमित ने दरवाज़ा खोला मुझे देख वो खुश हो गया, बोला- भाभी आप। चाय?

मैंने कहा- जी हाँ जनाब। सासू मां मेरी ड्यूटी लगा के गई हैं। उसने टी-शर्ट और नीचे सिर्फ़ कच्छा पहन रखा था मेरी नज़र बार बार उसके फ़ूले हुए आधे जगे लंड पे चली जाती। वो बोला- भाभी। क्या देख रही हो? कभी अपने पति को कच्छे में नहीं देखा? मैं बोली- हट। उसने चाय मेज़ पे रख दी और मेरी कलाई पकड़ मुझे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी बाहों में ले लिया। मैंने कहा- क्या कर रहे हो?बोला- तुमने हमें बहुत तड़फ़ाया है, हम तीनो के लंड रोज़ खड़े करती हो, जानबूझ कर अपने मम्मे दिखाती हो, कभी होंठ काटती हो, कभी ज़ुबान होंठों पे फेरती हो। इतनी गर्मी तो आपकी ननद रजनी में भी नहीं है। कहते हुआ बोला- आज हम सब मिलकर चाय पीते है। 

विकी उठा और उसने भी मुझे अपनी बाहों में ले लिया और बोला- आज मौका है, भाभी चुदवा लो। हम जानते हैं तुम बहुत चुदासी औरत हो। तभी राजू बोला- हाँ भाभी। आज चोदने दो। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने सोचा- तीन लड़के। शादी से पहले दो लड़को के साथ एक बार में मैं सो चुकी थी, चूत गीली होने लगी और मैंने खुद को उन्हें सौंपते हुए विकी से चिपक गई। तभी राजू ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया, मुझे पता नहीं चला। जब सलवार नीचे गिर गई, विकी ने पीछे से ज़िप खोलते हुए कमीज़ उतार दी। सुमित ने मेरी ब्रा खोल दी। मैं उनकी रज़ाई में घुस गई और वो भी रज़ाई में आ गए। 

मैंने अंदर से हाथ डाल विकी और सुमित के लंड पकड़ लिए। राजू रज़ाई से बाहर खड़ा था, उसने अपना सोया हुआ लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने उसको चूस चूस के खड़ा कर दिया, लॉलीपोप की तरह चूस रही थी। विकी बोला- रंडी सच में बहन की लौड़ी चुदासी है। तभी उसने भी रज़ाई से निकलते हुए अपना आधा खड़ा लंड मेरे मुँह में डाल दिया, उसका खड़ा कर दिया, सुमित ने भी अब अपना लंड मेरे होंठों के पास लगा दिया और मैं बारी-बारी तीन लंड चूसने लगी। वाह। कितना मज़ा दे रही है साली। तभी राजू बोला- चल साली टाँगे खोल। चिकनी चूत चाटने दे। वो मेरी चूत चाटने लगा। आिइ उईईइ हा। साथ साथ मेरी गाण्ड में उंगली करने लगा। सुमित का लंड मैं बिना रूके चूस रही थी।

तभी राजू ने मुझे कहा- घोड़ी बनो भाभी। मैं घोड़ी बन गई। उसने कोल्ड क्रीम अपने लंड पे लगा के लंड मेरी गाण्ड में डाल दिया। हाए। क्या किया। इसको क्यूँ चोद रहा है?बोला- मुझे गाण्ड मारनी पसंद है। सुमित नीचे से मेरे स्तनों को चूस रहा था, कभी चूचुक को काट देता। विकी मेरे मुँह में डाल कर चुसवा रहा था, राजू ने अपना लण्ड मेरी गाण्ड से निकाल लिया और खुद सीधा लेट गया, मुझे कहा कि ऊपर से आ कर गाण्ड में डाल लो। मैंने उसका लंड पूरा अंदर ले लिया। 

तभी विकी ने दराज़ से कंडोम निकाल कर अपने लंड पे चढ़ा लिया और बीच में बैठ उसने मेरी चूत पे थूक लगा के उंगली डाली। सीईईईईई उहह आह के साथ उसने एक मिनट में मेरी फुदी में ज़ुबान डाल के गरम कर दिया और लंड पेल दिया। जब उसने पूरा घुसा दिया, राजू रुक सा गया। लेकिन जल्दी दोनों तेज़-तेज़ चोदने लगे। हाए। साली तू तो अपनी कुँवारी ननद से भी खरा माल निकली।

सुमित मस्ती में लंड चुसवा रहा था। तभी राजू का झड़ने वाला था उसने निकाल लिया और तभी विकी को निकलना पड़ा लेकिन जल्दी से सुमित नीचे लेट गया और अपना लंड राजू की जगह डालते हुए चोदने लगा। विकी ने फ़िर डाल दिया। राजू बोला- चूस के माल निकाल दो। लेकिन मैं उसकी मूठ मारने लगी। चूस चूस। तभी उसको जोश आया उसने खुद मूठ मारते हुए अपना पूरा माल मेरे होंठों पे डाल दिया और लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया। मैं चुद रही थी, गरम थी, मैं भी उसका एक एक कतरा पी गई और चाट चाट के साफ कर डाला। 

तभी विकी उठा और उसने भी कंडोम उतार दिया और मूठ मारते हुए अपने लंड का सारा माल मेरे मम्मों पे डाल दिया और उसको मेरे निप्पल्स के साथ मसलने लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने झट से उसको खींचा और चाट कर साफ कर दिया। वो दोनों बराबर में लेट के हाँफने लगे और सुमित अब मुझे अपने नीचे डाल के फुदी मारता हुआ जल्दि ही छुट गया। उसने सारा माल मेरे अंदर डाल दिया। उसने कंडोम नहीं लगाया था। सो दोस्तों। दो बजे तक कमरे में नंगा नाच चला। तीनों ने एक एक बार और चोदा, मेरी प्यास बुझा दी, इतना मज़ा दिया। फिर मैं हर रोज़ एक से चुदवाती और फिर ननद रजनी को भी खेल का हिस्सा बना लिया। 

बास्केटबॉल मेडम की चूत मारी Basket ball madam ki chut aur gand Ki Chudai

बास्केटबॉल मेडम की चूत मारी Basket ball madam ki chut aur gand Ki Chudai, बास्केट बॉल वाली मैडम ने गांड मरवाई, बास्केट बॉल वाली मैडम और मैं पहुँच गए सेक्स की दुनियां में, वो बहुत बड़ी रण्डी थी.

हैल्लो फ्रेंड्स आप सभी का top-hindi-sex-stories-kahani.blogspot.com पर स्वागत है और हम सभी एक ही साईट के साथी है और में इस साईट पर कई समय से कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ मुझे सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों मेरा नाम नितिन है और में अंबाला का रहने वाला हूँ। अब आप सभी का ज्यादा टाईम खराब ना करते हुए में सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ लेकिन पहले अपना परिचय करा दूँ दोस्तों ये स्टोरी जो कि मेरे और मेरे बास्केटबॉल वाली मेडम के बीच की है जिसको आज में आप सभी के सामने रखने जा रहा हूँ। दोस्तों में एक स्कूल स्टूडेंट हूँ और मेरी उम्र 18 साल की है और में दिखने में अच्छा हूँ मेरी 5.9 हाईट है मेरे लंड की लम्बाई 6 इंच है।

दोस्तों ये बात अभी से कुछ महीने पहले की है जब हमारे स्कूल में एक समारोह था जिसमे बहुत बड़े बड़े लोग आने वाले थे और वो समारोह शाम को 7 बजे शुरू होने वाला था और सभी लोग आ गये थे और फिर रात के 11 बजे तक समारोह भी ठीक ठाक तरीके से खत्म हो गया। जिस जगह पर समारोह हो रहा था वो मेरे घर से बहुत दूर था। तो मैंने सोचा था कि में एक रात अपने फ्रेंड के घर में रुक जाऊंगा लेकिन उस समारोह में मेरा वो फ्रेंड आया ही नहीं और समारोह खत्म होते होते रात के 11 बज गये थे। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने घर जाने के लिए बस का सहारा लिया लेकिन उसमे भी बहुत भीड़ थी। फिर वहाँ पर एक लेडीस सीट खाली हुई लेकिन में वहाँ पर बैठा नहीं.. मैंने जैसे ही उस सीट को देखा तो उस पर मेरी बास्केटबॉल मेडम बैठ गई उनका नाम प्रीत है, वो बिल्कुल सेक्सी है बड़े बड़े बूब्स मस्त गांड और फिर मेरा लंड हमेशा उन्हे देख कर खड़ा हो जाता था उनका फिगर 36-30-36 है जो मुझे बाद में पता चला। फिर में जब उनके पास गया तो उन्होंने मुझे उनके साथ बैठने को कहा और में जल्दी ही मान गया और में उनके चिपककर बैठ गया। फिर हमने समारोह की बातें करनी स्टार्ट कर दी और तभी मैंने उन्हें बताया कि मेरा घर कितना दूर है। तो उन्होंने कहा कि उनका घर पास में ही है फिर वो कहने लगी कि में उनके साथ उनके घर पर जाऊँ.. लेकिन पहले तो मैंने मना किया लेकिन बाद में मेरे अंदर का जानवर जाग गया और मैंने जल्दी से हाँ कर दी। 

तभी मैंने घर पर कॉल करके पापा को कह दिया कि में अपने एक दोस्त के घर में आज रात को सो जाऊंगा और फिर उन्होंने मेरी पूरी बात सुनकर हाँ कर दी। फिर जब हम उनके घर पहुंचे तो मैंने देखा कि वो अकेली रहती थी। जिससे तो में मन ही मन और खुश हो गया। फिर प्रीत मेडम नहाने चली गयी और में बैठकर टीवी देखने लगा। तभी थोड़ी देर बाद में मुझे सू सू लगी तो में मूतने चला गया मुझे पता नहीं था कि उनका बाथरूम और टॉयलेट एक साथ है। तभी मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो देखा कि मेडम चूत शेव कर रही है तभी में अचानक उन्हे ऐसे देख कर डर गया और उन्होंने भी अपनी चूत पर एक हाथ रखकर चूत छुपा ली और में जल्दी से हड़बड़ा कर बाहर आ गया और टीवी देखने लगा। फिर वो नहाकर बाहर आई तो में उन्हे देखता ही रह गया और मेरा लंड खड़ा हो गया था जिसे मेडम ने देख लिया.. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और मेरे पास आकर बैठ गई और मुझे कहा कि जो मैंने अभी देखा वो किसी को मत बताना और वो बहुत डरी हुई थी। तभी मैंने सोचा कि क्यों ना इस बात का फायदा उठा लिया जाए। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। फिर मैंने उनसे कहा कि ठीक है लेकिन मुझे एक बार वो देखनी है। तभी उन्होंने ने स्माईल करते हुए पूछा क्या? फिर मैंने कहा कि आपकी गोरी गुलाबी चूत। तभी वो बोली कि क्या तुम पागल हो गये हो? अपने टीचर के साथ ऐसा कहते हुए तुम्हे शरम नहीं आती? तभी मैंने कहा कि ठीक है तो फिर में स्कूल में अपने सभी दोस्तों को सच सच बता दूँगा।

वो फिर से डर गयी और बोली कि ठीक है में दिखा देती हूँ जो तुम्हे देखना है और फिर उन्होंने अपनी मेक्सी ऊपर कर दी और वो अपनी काले कलर की पेंटी को नीचे करके खड़ी हो गयी। तभी में तो खुशी से पागल हो गया उनकी चूत देखकर उनके और पास जाने लगा और वो मेरे से दूर होने लगी। तभी मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा और उन्हें सोफे पर बैठा दिया और मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत पर रख दिया तो वो उछल गयी। कसम से उनकी चूत को कभी किसी ने छुआ भी नहीं होगा मैंने पहली बार चूत देखी थी। फिर में उसकी खुश्बू लेने लगा जो कि मुझे मदहोश कर रही थी। फिर मैंने एक हाथ मेडम के बूब्स पर रखा जो बड़े मुलायम थे तभी उन्होंने गुस्से से मेरा हाथ हटा दिया।

मैंने फिर से बूब्स को पकड़ा और सहलाने और दबाने लगा और दूसरे हाथ से चूत को रगड़ रहा था। मेडम अब गरम होने लगी और अब वो भी मेरा साथ देने लगी उन्होंने मुझे देखा और मेरे होंठो पर एक किस किया में और जोश में आ गया और अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिए और चाटने चूमने लगा। हम दोनों एक दूसरे की जीभ चाट रहे थे। 5 मिनट के किस के बाद मेडम ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया जो उनकी चूत को देख कर खड़ा हो गया था। तभी उन्होंने नीचे घुटनों के बल बैठकर मेरी पेंट उतारी और लंड को मुहं में लेकर चाटने लगी। दोस्तों में तो पागल हो रहा था और मेरा वीर्य निकल गया और उन्होंने पूरा वीर्य पी लिया। फिर उसके बाद मैंने मेडम के बूब्स को ब्रा से बाहर निकाला और चाट चाट कर लाल कर दिए उनके गुलाबी निप्पल तो बिल्कुल कड़क थे।

फिर मैंने उन्हे भी बहुत चाटा और मेडम पागल हो रही थी और कह रही थी कि और ज़ोर से और ज़ोर से तभी मैंने बूब्स को चाटना बंद किया और चूत की तरफ चला गया मैंने जैसे ही अपना मुहं चूत पर लगाया तो मेडम ने ज़ोर से मेरे सर को पकड़ा और चूत पर दबाने लगी और में भी पागलो की तरह चूत को चाट रहा था और दो मिनट बाद मेडम का माल निकल गया और में उसे पूरा पी गया। फिर मेडम ने कहा कि अब रहा नहीं जाता जल्दी से लंड को चूत में लंड डाल दो। में खड़ा हुआ और अपने खड़े लंड को चूत पर रख दिया और एक ज़ोर से झटका मारा। मेडम ज़ोर से चिल्लाई अरे में मर गयी और फिर उन्होंने कहा कि थोड़ा धीरे धीरे करो मेरा आधा लंड उनकी चूत में घुस चुका था। फिर में 1 मिनट रुका और फिर से ज़ोर का झटका मारा और पूरा लंड मेडम की चूत में घुस गया। तभी मेडम का बुरा हाल हो गया था दर्द से उनका मुहं लाल हो गया था और में थोड़ी देर रुका और झटके देने शुरू कर दिए। मेडम का दर्द कम हो गया था और वो हर झटके का मज़ा ले रही थी। में पूरे दम से लंड चूत में डाल रहा था और वो कह रही थी अह्ह्ह चोदो मुझे बेबी चोदो मुझे तभी ये सुन कर मुझे और जोश आ रहा था और में मेडम को कुतिया की तरह चोद रहा था।

तभी मेडम का पानी निकल गया और वो थोड़ी ढीली पड़ गयी.. लेकिन में जोर जोर से धक्के दिए जा रहा था मेडम के पानी के कारण मेरा लंड अब और तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था। 15 मिनट बिना रुके सेक्स करने के बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था तो मैंने मेडम को कहा कि कहा डालूं? तभी वो बोली कि तुम चिंता मत करो और अंदर ही डाल देना में गर्भ निरोधक गोली खा लूंगी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। तभी मैंने 8-10 धक्को के बाद अपना पूरा वीर्य मेडम की चूत में डाल दिया और बिना लंड चूत से बाहर निकाले वैसे ही उनके ऊपर लेट गया और उनके बूब्स को चूसने लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में एक साथ नहाकर बाहर आए हमे चुदाई खत्म करते करते रात के 2 बज गये थे।

फिर हमने एक किस किया और एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर सो गये। फिर में जब सुबह करीब 7 बजे उठा तो देखा कि मेडम सो रही है मैंने उन्हें जगाया और कहा कि.. में आपको एक बार और चोदूंगा। तभी उन्होंने मना कर दिया और कहा कि उन्हें चूत में बहुत दर्द हो रहा है और जलन हो रही है। तभी में उनके बूब्स चूसने लगा फिर थोड़ी देर बाद उठा और तभी पापा का कॉल आ गया.. तो फिर मुझे मेडम के घर से जाना पड़ा। जाते टाईम मैंने मेडम को किस किया और चला गया ।।

एयरहोस्टेस की चुदाई - वो भी मुझे किस करने लगी Air hosts ki chudai ki kahani

एयरहोस्टेस की चुदाई - वो भी मुझे किस करने लगी Air hosts ki chudai ki kahani, हॉट एयर होस्टेस को जमकर चोदा प्लेन में, बड़े लंड से चुदाई, सुखी चूत की चुदाई, नर्म चूत चोदी.

हेल्लो दोस्तों….मेरा नाम है राहुल और मेरा लंड 8 इंच लंबा और 3.5 मोटा है.. वैसे में इस साइट पर स्टोरी रेग्युलर पड़ता हूँ.. इसलिए आज अपनी स्टोरी तुम सब के साथ शेयर करने जा रहा हू… अगर कोई मुझसे गलती हुई हो तो उसके लिए सॉरी. यह मेरी फर्स्ट स्टोरी है सो इसलिए….चलो मे
स्टोरी पर आता हू…

मे दिल्ली मे रहता हो..और साउथ दिल्ली मे स्टडी करता हू….एक दिन मे अपने कोंचिग जा रहा था..और मे गाने सुन रहा था अपने मोबाइल पर की अचानक एक लड़की से मेरी टक्कर हो गई तो उसकी बुक्स सारी गिर गई… तो मेने उसको देखा तो देखता ही रह गया… वो बहुत ब्यूटीफुल दिख रही थी. तो मेने उसकी बुक्स उठाने मे हेल्प की और उससे सॉरी बोला तो उसने भी मुझे सॉरी कहा…और वो मुस्कुराई और चली गई।

फिर अगले दिन वही लड़की फिर मुझे आती दिखी तो मेने भी उसे स्माइल की और उसने भी स्माईल की..और चली गई. इस तरह कई दिनो तक यही चलता रहा..तो मेने एक दिन हिम्मत करके उससे बात की…तो मेने पूछा की आप रोज स्माइल क्यों करती हो..तो वो कुछ नही बोली…तो मेने उससे उस दिन टक्कर पर फिर से सॉरी बोला… तो यारो यकीन नही मानोगे की उसकी आवाज इतनी प्यारी थी की मे सुनता ही रह गया. उसने कहा की इट्स ओके… फिर मे हिम्मत करके उससे बात करनी स्टार्ट की। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मेने पूछा की तुम यहा क्या करती हो तो उसने कहा की वो एक एयरहोस्टेस है और यहा साउथ दिल्ली के एक एयरहोस्टेस कम्पनी से कोर्स कर रही है तो फिर मेने अपनी पहचान दी कि मे भी संस्कृत कोर्स कर रहा हूँ… फिर हम चलते चलते बात करने लगे. मेने उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम दिव्या बताया. इस तरह हम काफ़ी दिन तक मिलते रहे और हम दोनो ने अपना मोबाइल नम्बर एक दूसरे को दे दिया…और काफ़ी देर तक बाते करते रहते और काफ़ी जगह घूमने जाते।

एक दिन उसने मुझे कॉल कर और कहा की..आज मेरी क्लास जल्दी खत्म हो गई है तो तुम आ जाओ घूमने चलते है…तो मेने अपनी बाइक ली और चला गया…तो उसकी कम्पनी के बाहर उसका वेट कर रहा था की मेने देखा की वो एयरहोस्टेस की ड्रेस मे बाहर.. मे देखता ही रह गया. उसने एयरहोस्टेस की हाफ स्कर्ट पहन रखी थी और उसकी गोरी गोरी टांगे दिख रही थी. मे तो उन्हे देखता ही रह गया. वो बहुत ब्यूटीफुल लग रही थी…तो मेरी बाइक पर बेठ गई और मेने पूछा कहा चलना है तो वो बोली कही मॉल मे चलते है.. तो मे उसे अंसल प्लाज़ा मे ले गया. हमे वहा पहुचने मे कीब 25 मिनिट लगे. वो बाइक पर मुझे कस के पकड़ के बेठी थी. मुझे मझा आ रहा था….मे बार बार ब्रेक मार रहा था. हम पहुँच गये वहा पर…और हम घूमने लगे…तो मेने देखा की वहा पर काफ़ी कपल्स घूम रहे थे…और वो हमे बार बार देख रहे थे क्युकी वो देखेगे ही वो लग ही रही थी सेक्सी….मे भी इस बात को नोट कर रहा था…शायद उसे भी यह बात पता होगी…और फिर लास्ट मे हम अंसल के गार्डन मे गये।

वहा काफ़ी कपल बेठे थे और एक दूसरे के किस कर रहे थे और हम उन सब को देख कर आगे चले गये तो उसने आगे जा कर कहा की यह सब क्या कर रहे है तो मेने कहा की एक दूसरे को प्यार कर रहे है..तो मेने सही टाइम का फ़ायदा उठा कर उससे प्रफोज कर दिया मेने कहा की दिव्या i love u मे तुम से यह बात काफ़ी दिन से कहना चाहता था लेकिन कह नही पाया…तो वो कुछ देर चुप रही और बोली अब हमे चलना चाहिए… तो हम बाइक पर बेठे और अपने अपने घर आ गये।

मुझे तो काफ़ी डर लग रहा था की उसने बुरा तो नही मान लिया मेने उसे कॉल भी नही करा की वो और बुरा ना मान जाए. फिर नाइट मे 1:30 बजे उसका कॉल आया. मे तो देखता ही रह गया मेने कॉल अटेंड की और हेलो बोला तो उसने कुछ नही बोला फिर मेने उसे सॉरी कहा और साफ़ कह दिया की जो मेरे दिल मे बात है मेने वो कह दी थी…आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मेने फिर उससे पूछा की u love me..???? तो कुछ देर बाद वो बोली की तुम्हे क्या लगता है की एक लड़की इतनी रात को 1:30 पर कॉल क्यू करेगी.. तो मे समझ गया. बात क्या है तो उसने मुझे i love u कह दिया…और मे इतना खुश हुवा की क्या बताऊ यारो की जैसे मुझे कोई परी मिल गई हो अरे वो भी तो परी है एयरहोस्टेस की…आख़िर मे हम दोनो ने कीब 2 घंटे तक बाते की और फिर सो गये।

और अगले दिन मिलने का प्रोग्राम बनाया. अगले दिन हम मिले. तो उसकी आँखे कुछ झुकी हुई थी तो मेने कहा की इसमे शरमाने की क्या बात है.. तो वो कुछ नही बोली बाइक पर बेठी हम वहा से अंसल प्लाज़ा की और निकल गये. वहा पहुचते ही मेने बाइक पार्क की और उसका हाथ अपने हाथ मे लेकर चलने लगा. उसे भी काफ़ी अच्छा लग रहा था.

फिर हमने वहा बर्गर खाया और कोक पी.. फिर बातें करने लगे… उसने कहा की चलो गार्डन मे चलते है तो मेने कहा ठीक है… हम गार्डन मे गये. वहा फिर से वही सीन था की कपल्स एक दूसरे को किस कर रहे थे तो हम एक अच्छी सी जगह जाकर बेठ गये और बातें करने लगे. बाते करते उसने पूछा की तुमने उस दिन क्या कहा था तो मेने पूछा की क्या.. उसने कहा फिर मेने कहा की सही तो है.. तो उसने कहा की तुम कुछ नही करोगे मेंने यह बात सुनते ही रह गया. मे जोश मे आ गया मेने उसे खड़ा करा और किस करने लगा और उसने भी मुझे कस के पकड़ लिया और अब मेने फ़िल्मी स्टाइल मे उसके चेहरे को अपने हाथ से जोर से पकड़ लिया और किस करने लगा और वो भी मुझे किस करने लगी. 10 मिनिट तक किस करते रहे. फिर में थोड़ी हिम्मत करके अपना हाथ धीरे धीरे नीचे उसके बोब्स पर ले गया और बिल्कुल आराम से दबाने लगा और वो कुछ नही बोली और आ..अहा.. निकाल रही थी और गर्म भी हो गई थी. इतने मे वहा एक लेडिस गार्ड जो गार्डन मे आ गई और हम अलग हो गये. और फिर हम वहा से चले गये. आखिर कई दिन तक यही चलता रहा हम कभी अंसल गार्डन मे या बुद्धा गार्डन जाकर किस करते और काफ़ी टाइम तक मोबाइल पर बातें करते. इस तरह से काफ़ी दिन गुजर गये. मुझे मोका मिल नही रहा था।

आख़िर मे मुझे एक मोका मिल गया उसका रात को फोन आया और बोली राहुल कल मेरे मम्मी पापा जयपुर जा रहे है और 2दिन बाद आएगे… मे तो खुश हो गया मुझे तो इसी टाइम का इंतज़ार था. फिर अगले दिन उसने फोन किया और कहा की राहुल तुम 11 बजे मेरे घर आ जाना क्योंकि मेरे मम्मी पापा 9 बजे निकल जायेंगे. तो मेने कहा ठीक है… फिर मे तेयार हो कर ठीक 11बजे उसके घर पहुँच गया।

दरवाजा खोलते ही जब मेने उसको देखा तो यारो देखता ही रह गया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसने पिंक कलर का टॉप और स्कर्ट पहन रखी थी. जिसमे वो बिल्कुल सेक्सी ओर हॉट लग रही थी। फिर उसने मुझे अंदर बुलाया और मे अंदर जाकर सोफे पर जाकर बेठ गया और वो मेरे लिए वॉटर लेकर आई और झुक कर मुझे जैसे ही वॉटर देनी लगी तो उसके बोब्स वो बहुत मोटे दिख रहे थे. मे उनको देख कर पागल वो गया. किसी तरह मेने कंट्रोल किया और मेने वॉटर पिया और हम दोनो बाते करने लगे….. बाते करते करते वो मुझे अपने रूम मे ले गई. जैसे ही रूम मे पहुचे की उसने मुझे किस करना स्टार्ट कर दिया और मेने भी उसे… इस तरह कीब 20 मिनिट तक हम किस करते रहे और 20 मिनिट बाद वो बोली की सिर्फ़ किस ही करते रहोगे या कुछ और भी करोगे.. यह सुनते ही मे गर्म हो गया और किस करते हुए उसके बोब्स दबाने लगा. बोब्स दबाते हुआ मेरा हाथ अब धीरे धीरे नीचे जाने लगा।

मेने अपना हाथ उसकी स्कर्ट मे डालते हुए उसकी चूत पर पहुच गया..वो पूरी तरह मदहोश हो गई थी और उसकी चूत पूरी गीली हो गई थी. अब मे अपनी उंगली उसकी चूत मे धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहा था और एक हाथ से उसके बोब्स और किस करे जा रहा था और वो पागल हुई जा रही थी. अब उसके कपडे धीरे धीरे सारे उतार दिए और वो बिल्कुल नंगी हो गई थी. क्या बताऊ यार नंगी मे वो बिल्कुल सेक्सी और हॉट लग रही थी और उसका गोरा बदन तो मानो एक दम मिल्क जैसा हो… अब मुझे कंट्रोल नही हो रहा था… मेने उसे उठाया और बेड पर ले गया. बेड ले जाते ही मेने अपना लंड उसे दिखाया तो वो डर गई और कहने लगी की इतना बड़ा और मोटा कैसे झेलेगी.. और कहने लगी की उसकी चूत तो इतना मोटा लंड नही सह पाएगी और फट जाएगी.. तो मेने कहा डरो मत पहली बार मे थोडा दर्द होगा बाद मे नही होगा… लेकिन वो मना कर रही थी मेने कुछ नही देखा और अपना लंड उसके मुह मे डाल दिया और कहने लगा की चुसो और वह मना कर रही थी लेकिन किसी तरह उसे मनाया और वो मान गई. चूसने लगी।

दोस्तों आप को यकीन नही होगा की वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी की मानो जैसे लोलीपॉप हो और उसे भी मजा आ रहा था. अब मे झड़ गया और सारा माल उसके मुहँ पर डाल दिया और वो उसे चाटने लगी और कहा की अब मेरा लंड उसकी चूत मे जाएगा…. अब मेने अपना मोटा लंड उसकी चूत मे डाला तो वो चिल्लाई तो मेने उसके होंठ पर अपना होंठ रख दिया और एक जोर का झटका मारा और उसके आँखों मे से पानी आने लगा और वो कहने लगी की छोड़ दो मुझे तो…

मे कहने लगा की अभी कुछ देर दर्द होगा बाद मे नही… इस तरह मे और जोर से झटके मारने लगा. अब उसकी चूत मे से ब्लड आ रहा था. लेकिन उसे भी मजा आ रहा था. करीब 1 घंटे तक मेने उसे लगातार चोदा और बाद मे उसकी गांड भी बहुत मारी और हमे काफ़ी मजा आ रहा था।
इस तरह मेने उसको 2 दिन तक नॉन स्टॉप चोदा और उसकी चूत और गांड फाड़ डाली. उसे भी मुझसे चुदवाने का शौक हो गया और इस तरह मे उसे जब भी मोका मिलता उसे खूब चोदता . . .
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