पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था - Papa ka hath meri chut par lag gayaa

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हाय दोस्तो, मैं रानी हूँ, मेरी उम्र 20 साल है मेरा रंग गोरा है और लंबे बाल हैं। मेरे होंठ पतले हैं और ऊपर के होंठ के दाहिनी ओर एक तिल है। मेरी सहेलियां कहती हैं कि उस तिल से मेरी सुंदरता में चार चाँद लग गए हैं।

मेरे चूचे अभी 36 इन्च के हो गए हैं। मेरी कमर 32 इन्च की है और मेरे चूतड़ बहुत ज़्यादा बाहर को आ गए हैं।

क्या करूँ सभी मेरी गाण्ड में ही लौड़ा डालने को मरते हैं, इसलिए मेरी गाण्ड उभर कर बाहर को आ गई है।

आज मेरी ये हालत है कि मेरी चूत और गाण्ड में गधे का लौड़ा भी घुस जाए क्योंकि वक़्त और हालत ने मुझे इतनी बड़ी चुदक्कड़ बना दिया है कि मैं आपको क्या बताऊँ।

मैं एक सीधी-सादी लड़की थी पर जब आप कहानी पढ़ेगे तो सब जान जाएंगे कि कैसे हवस के पुजारियों ने मेरी जिंदगी बर्बाद की है।

अब आपको ज़्यादा बोर नहीं करूँगी, चलो सीधे मेरी बर्बादी की दास्तान आपको सुनाती हूँ।

यह बात 14 जून 2006 की है, जब मैं कमसिन थी, मेरे पापा की बीमारी के कारण मौत हो गई थी तो माँ एकदम टूट सी गई थीं।
उनका बस मैं ही अकेली सहारा थी।
इस हादसे ने हमारी जिंदगी बदल थी, पैसों की तंगी रहने लगी थी, तब हमारे दूर के रिश्तेदारों ने माँ पर दबाव डाला कि वो दूसरी शादी कर लें। मगर माँ न मानी, मगर वक़्त के साथ माँ भी टूट गईं और आख़िर एक साल बाद माँ ने दूसरी शादी कर ली।

मेरे नए सौतेले पापा शराबी थे, उनके दो बेटे थे जो करीब मेरी ही उम्र के थे या शायद मुझसे थोड़े बड़े थे।

शुरू में तो सब ठीक तक चलता रहा मगर साल भर में ही पापा माँ को मारने लगे और वे मुझे भी पसन्द नहीं करते थे सो मेरी पढ़ाई भी बन्द हो गई थी।

मेरे दोनों भाई भी हमेशा मुझे मारते रहते थे, घर का सारा काम हम माँ-बेटी मिल कर करती थे और धीरे-धीरे माँ टूट सी गई और बीमार रहने लगी।
आख़िरकार 12 फरवरी 2010 को माँ भी मुझे छोड़ कर चली गईं। अब तो मुझ पर ज़ुल्म बढ़ने लगे। मैं भी धीरे-धीरे इनकी मार की आदी हो गई।

सॉरी दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि यह तो पका रही है, मगर क्या करूँ ये सब कुछ सत्य है और आपको इसके बारे में बताना जरूरी भी है।

अब आपको मेरी चुदाई की कहानी बताती हूँ।

8 सितम्बर 2010 को मेरा जन्मदिन था अब कौन मेरा जन्मदिन मनाता, कहाँ नए कपड़े थे, कहाँ पार्टी थी और कहाँ प्यार.. बस मैं काम में पिस रही थी।

उस दिन तक मैं पूरी जवान हो गई थी। मेरे सीने के उभार दिखने लगे थे। मेरा सौतेला भाई अजय जो 18 साल का था, अक्सर मुझे मारने के बहाने मेरे चूतड़ों को दबा देता तो कभी मेरे सीने पर हाथ रख देता था।

दोपहर को मैं छत से कपड़े उतारने गई तो अजय वहाँ आ गया और मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उस वक़्त मैंने एक पुरानी सी सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी, दुपट्टा मैंने एक तरफ रख दिया था।
आपको बता दूँ मैं हमेशा दुपट्टा ही अपने सीने पर रखती हूँ।

अजय- अरे रानी, आज ये दुपट्टा तूने एक तरफ क्यों रखा है नहीं तो इसके बिना तू रहती ही नहीं है?

रानी- वो क्या है ना भाई, आज मुझे गर्मी लग रही है इसलिए मैंने सोचा छत पर हवा अच्छी आ रही है, थोड़ी हवा खा लूँ।

अजय- अरे मेरी रानी, बहना आज तो मस्त लग रही हो आओ आज तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ।

अजय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे घूरने लगा।

मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैं घूम गई। तभी वो मेरे पीछे चिपक गया।

रानी- भाई क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे प्लीज़…

मैंने उसको हटाने की लाख कोशिश की, मगर वो माना नहीं और छत पर बने कमरे में मुझे जबरदस्ती ले गया।
वहाँ वो मेरे होंठ चूसने लगा और एक हाथ से मेरी गाण्ड सहलाने लगा।

मैं छटपटा रही थी मगर वो मेरी एक ना सुन रहा था इतने में विजय जो मेरा बड़ा भाई है, वो आ गया, वो करीब 20 साल का था।

विजय- क्या हो रहा है यहाँ?

अजय- क.. क.. कुछ नहीं भाई.. देखो ये रानी है.. मुझसे चिपक रही है.. पता नहीं क्या चाहती है?

रानी- न.. न.. नहीं भाई.. अजय झूठ बोल रहा है।

अजय ने झट से मुझे एक थप्पड़ मारा।

अजय- चुप साली मुझे झूठा बोलती है.. भाई इसने खुद ही मुझे यहाँ बुलाया और मुझसे चिपक गई। मुझसे बोल रही है, मुझे गर्मी लग रही है।

विजय ने मुझसे पूछा- क्या अजय सही बोल रहा है?

रानी- वो तो दुपट्टे की बात पर मैंने कहा था, मगर मेरा मतलब ऐसा कुछ नहीं था।

विजय- अच्छा यह बात है साली छिनाल हमने सोचा तू जैसी भी है हमारी बहन है.. तुझे खाना देते हैं मगर तू तो पता नहीं किसका गंदा खून है.. रुक आज मैं तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा और तेरे सारे मतलब पूरे कर दूँगा।

रानी- भाई प्लीज़.. मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो…
पर असल में तो मैं सब समझ रही थी कि ये दोनों भाई मुझे चोदने के ख्याल से यह नौटंकी कर रहे हैं। जवान तो मैं भी हो चुकी थी, मेरे बदन में भी वासना की अग्नि तो उठती ही रहती थी, कहीं मेरे अन्तर्मन में भी कुछ तमन्ना थी नर-नारी के तन के मिलन का मज़ा लेने की, पर मैंने विरोध तो करना ही था ना अपने सौतेले भाइयों की हरकतों का।

अजय वहाँ खड़ा मुस्कुरा रहा था और विजय से नजरें चुरा कर मुझे चिढ़ा रहा था।

विजय- अजय तू नीचे जा और ऊपर मत आना.. आज मैं इसको बताता हूँ कि मैं क्या चीज हूँ।

अजय वहाँ से चला गया और विजय ने मुझे कपड़े निकालने को कहा।

मेरे मना करने पर विजय ने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं एकदम नंगी हो गई क्योंकि उस वक़्त मुझे कौन ब्रा-पैन्टी लाकर देता.. बस पुराने कपड़े ही नसीब में थे।

अब मैं एकदम नंगी दीवार के पास खड़ी थी, मेरे बेदाग गोरे बदन को देख कर भाई की आँखों में चमक आ गई थी।

मेरे मम्मे उस वक्त कोई 28 इन्च के रहे होंगे।
भाई की पैन्ट में तंबू बन गया था, उनका लौड़ा मेरे जिस्म को देख कर फुंफकार मार रहा था।

विजय- वाह.. साली तू तो बड़ी ‘हॉट-आइटम’ है.. तभी तुझमें गर्मी ज़्यादा है.. आजा आज तेरी सारी गर्मी निकाल देता हूँ।

रानी- नहीं भाई.. प्लीज़ मुझे जाने दो.. मैं आपकी बहन हूँ प्लीज़…

विजय- चुप साली.. छिनाल की औलाद.. तू कहाँ से मेरी बहन हो गई.. हाँ.. आज तुझे अपनी बीवी जरूर बनाऊँगा।

इतना बोलकर भाई मुझ पर टूट पड़ा। मेरे होंठों को चूसने लगा, मेरे मम्मों को दबाने लगा। मुझे बहुत दर्द हो रहा था मगर उस पर भूत सवार था, वो कहाँ मानने वाला था। मैंने उससे छूटने की कोशिश की, उसको गुस्सा आ गया और वो मेरे गाल पर थप्पड़ मारने लगा।

विजय- क्या हुआ.. साली अब आया समझ में.. कुतिया बहुत नाटक कर रही थी।

इतना बोल कर भाई अपने कपड़े निकालने लगा। धीरे-धीरे वो पूरा नंगा हो गया, उसका 6 इन्च का लौड़ा एकदम तना हुआ मेरी आँखों के सामने लहरा रहा था।

मैं घबरा गई और जल्दी से पलट गई यानि पेट के बल लेट गई।

विजय- अरे वाह.. तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. साली आज इसी का मुहूर्त करूँगा।

इतना बोलकर वो बिस्तर पर चढ़ गया और मेरे मम्मे दबाने लगा, अपनी ऊँगली से मेरी गाण्ड के छेद को खोलने लगा।

मैं थोड़ी कसमसाई तो उसने ज़ोर से मेरी गाण्ड पर मार दिया, मैं दर्द के कारण सिहर गई।

अब मुझे समझ आ गया था कि यह हरामी मुझे पीछे से ही चोदने वाला है, इसकी मार खाने से अच्छा है अब चुपचाप पड़ी रहूँ।

भाई ने काफ़ी देर मेरे चूतड़ सहलाए अब मैं चुप पड़ी थी उसने अपने लौड़े पर ढेर सारा थूक लगाया और मेरे छेद पर भी थूक लगाया।

विजय- हाँ.. अब आई ना लाइन पर बस ऐसे ही चुपचाप पड़ी रह.. नहीं तो मार खाएगी.. आहह.. क्या मस्त गाण्ड है। अब अपना बदन ढीला छोड़ दे.. मैं लौड़ा डाल रहा हूँ अगर जरा भी हिली ना तो तेरी खैर नहीं…

भाई ने लंड की टोपी गाण्ड के छेद पर रखी और ज़ोर से एक धक्का मारा.. एक ही बार में आधा लौड़ा मेरी गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया।

रानी- आआ.. उईईई माआ..मर गई.. आआआ आह.. भाई आह.. मेरी जान निकल रही है.. आह निकाल.. लो..

विजय कहाँ मानने वाला था उसने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड की गहराइयों मैं खो गया और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया।

मैं चीखती रही वो झटके मारता रहा.. मज़ा लेता रहा।
विजय- आ उह..साली तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. आह मज़ा आ गया उह ले आह उह उह उफ़ क्या कसी गाण्ड है.. आह आह आह…

मैं चिल्लाती रही.. 20 मिनट तक वो मेरी गाण्ड मारता रहा और आख़िरकार उसके लौड़े ने लावा उगल दिया, जो मेरी गाण्ड के कोने-कोने में समा गया। दो मिनट तक विजय मेरे ऊपर पड़ा रहा, उसके बाद एक तरफ लेट गया।

मैं वैसी की वैसी पड़ी रही, उसका वीर्य मेरी गाण्ड से बह कर बाहर आ रहा था।

मेरी गाण्ड में अब भी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मोटा डंडा घुसा हुआ हो, बड़ी जलन हो रही थी।
विजय उठा और मेरे कपड़ों से अपना लौड़ा साफ किया अपने कपड़े पहनने लगा।

विजय- साली बड़ी कमाल की गाण्ड है तेरी.. मुझे अभी कहीं जाना है.. नहीं तो तेरी और ठुकाई करता। अब ध्यान से सुन अगर किसी को ये बात बताई ना.. तो तेरा वो हाल करूँगा कि ज़िंदगी भर पछताएगी समझी।

विजय वहाँ से चला गया और मैं वैसे ही पड़ी रोती रही कोई 5 मिनट बाद अजय अन्दर आया।

अजय- हरामजादी.. अगर मेरी बात मान लेती तो तेरा ये हाल ना होता.. अब फट गई ना तेरी गाण्ड.. साली कुतिया भाई का लौड़ा लेकर मज़ा नहीं आया तो अब मेरा लेकर देख.. शायद तुझे मज़ा आ जाए।

इतना बोलकर वो भी नंगा हो गया, उसका भी लौड़ा 6 इन्च का ही था, पर विजय के लौड़े से ज़रा मोटा था। मेरी कहाँ हिम्मत बची थी उसको रोकने की, वो भी मुझ पर सवार हो गया और एक ही झटके में पूरा लौड़ा मेरी खुली हुई गाण्ड में घुसा दिया।

मैं फिर दर्द से कराहने लगी और वो मेरी गाण्ड मारता रहा, मज़े लेता रहा।

अजय- आहह.. आह.. मज़ा आ गया.. साली तेरी गाण्ड में तो बड़ी गर्मी है.. आहह.. साला लौड़ा बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहा आहह.. जल्दी ही पानी छोड़ देगा.. आहह.. मन तो तेरी चूत की सील तोड़ने का है.. मगर डर है कहीं साली तू मर-वर गई तो हमें मुफ़्त की नौकरानी कहाँ से मिलेगी.. आह.. उहह.. मेरा निकलने वाला ही है.. आह उहह…

करीब 7-8 मिनट में वो ठंडा हो गया और मेरी गाण्ड को पानी से भर कर चला गया।

मैं काफ़ी देर तक उसी हालत में पड़ी रही और न जाने कब मेरी आँख लग गई।

शाम को 6.30 बजे मेरी आँख खुली.. गाण्ड में अब भी दर्द था।

मैं जल्दी से उठी और गुसलखाने में चली गई, वहाँ से नहा कर कपड़े पहने।

हाँ.. एक बात मैं आपको बता दूँ.. यहाँ पड़ोस के लोग जानते हैं कि इस घर में मेरी क्या हालत है, इसी लिए बेचारे अपने बच्चों के पुराने कपड़े मुझे दे देते हैं बस मेरा गुजारा चल जाता है।

उन्हीं कपड़ों में से एक गुलाबी टी-शर्ट और नीला पजामा मैंने पहना और खाना बनाने की तैयारी में लग गई।

पापा- रानी कहाँ हो.. यहाँ आओ।

दोस्तो, मैं आपको बताना भूल गई, पापा की खुद की दुकान है, तो वो सुबह 8 बजे जाते हैं तो सीधे शाम को 7 बजे ही आते हैं और आने के साथ ही उनको खाना चाहिए।

मैं भाग कर रसोई से बाहर आई और कहा- बस 15 मिनट में खाना बन जाएगा।

पापा- हरामखोर किसी काम की नहीं है तू.. अब तक खाना नहीं बना.. इतनी देर क्या कर रही थी?

रानी- वो वो.. पापा मेरी आँख लग गई थी, इसी लिए…जरा देर हो गई।

मैं आगे कुछ बोल पाती इससे पहले पापा ने एक जोरदार तमाचा मुझे जड़ दिया।

मैं रोने लगी और अपने आप को बचाने के लिए मैंने वो बोल दिया जो शायद मुझे नहीं बोलना चाहिए था।

रानी- उउउ उउउ पापा.. प्लीज़ मेरी बात तो सुनिए.. इसमें मेरी ग़लती नहीं है.. वो वो.. विजय भाई ने मेरे साथ दोपहर को उूउउ उउउ…
पापा- क्या किया विजय ने.. हाँ.. बताओ?

रानी- उउउ.. वो वो.. उन्होंने मेरे साथ गंदा किया उउउ मेरे कपड़े निकाल कर उूउउ.. उसके बाद अजय ने भी उूउउ…
मैंने पूरी दास्तान कह दी।

मेरी बात सुनकर पापा गुस्सा हो गए और मुझे प्यार से चुप करवाया और कहा- आज आने दो दोनों को, उनकी आज खैर नहीं..

आज पहली बार पापा ने मुझसे प्यार से बात की थी, मैं खाना बनाने चली गई।

पापा अपने कमरे में चले गए, उन्होंने कपड़े बदले.. तब तक खाना भी तैयार हो गया था।

आज पापा ने मेरे साथ बैठ कर खाना खाया और मुझे भी अपने हाथ से खाना खिलाया।

खाने के बाद मैं बर्तन धोकर अपने कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट कर रोने लगी। मुझे माँ की बहुत याद आ रही थी, तभी पापा मेरे कमरे में आ गए।

पापा- अरे रानी.. बेटी रो क्यों रही है? उन दोनों का फ़ोन आया था किसी दोस्त की शादी में गए हैं.. कल शाम तक वापस आएँगे, अब फ़ोन पर तो उनको क्या कहता, कल आने दो उनको अच्छा सबक सिखाऊँगा.. तू मेरे कमरे में आ.. कुछ बात पूछनी है।

इतना बोलकर पापा चले गए, मैंने आँसू पौंछे और उनके पीछे चली गई।

पापा- आओ.. यहाँ बैठो.. मेरी रानी बेटी तू रो रही है.. क्या बहुत दर्द हो रहा है? मुझे ठीक से बता हुआ क्या था?

रानी- पापा अब मैं कैसे बताऊँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।

पापा ने बहुत ज़िद की, तब मैंने उनको बताना शुरू किया कि बात कैसे शुरू हुई और मेरी गाण्ड तक कैसे पहुँची। पापा मेरे एकदम करीब चिपक कर बैठे थे, उन्होंने शराब पी हुई थी, उसकी बदबू आ रही थी।

मेरी बात को सुनते-सुनते लुँगी के ऊपर से वो अपना लौड़ा मसल रहे थे और एक हाथ से मेरी पीठ सहला रहे थे।
‘अच्छा ये बात है… कितने कमीने हैं दोनों.. अच्छा ये बता.. यहाँ ज़ोर से दबाया क्या विजय ने?’ मेरे मम्मों को सहलाते हुए पापा ने पूछा।

मेरी तो हालत खराब हो गई.. उनका छूना मेरे लिए ऐसा था जैसे किसी ने जलते हुए अंगारे मेरे मम्मों पर रख दिए हों।

रानी- पापा ये आप क्या कर रहे हो?

पापा- अरे मैं तो पूछ रहा हूँ.. अब तू ठीक से बताएगी तब ही तो पता चलेगा ना.. अब जो पूछूँ.. चुपचाप बता समझी…

इस बार पापा के तेवर एकदम बदल गए थे, उनकी आँखों में गुस्सा आ गया था और पापा का गुस्सा मैं खूब जानती थी कि अगर वो मारने पर आ गए तो हालत खराब कर देंगे।

रानी- हाँ.. पापा यहाँ ज़ोर से दबाया था, अभी भी दर्द हो रहा है।

पापा ने उनको देखने के बहाने से टी-शर्ट ऊपर कर दी, ब्रा तो थी नहीं, उनको मेरे मम्मों के दीदार हो गए।

पापा- अरे अरे.. कुत्तों ने कैसे ज़ोर से दबाए हैं तेरे छोटे-छोटे चूचे.. देखो तो कैसे लाल निशान पड़ गए हैं।

मेरे सौतेला पिता अपनी औकात दिखा रहे थे, मेरे मम्मों को हल्के-हल्के सहला रहे थे। अब पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था और उन्होंने अपनी ऊँगली चूत पर घुमा कर पूछा।

पापा- रानी.. उन दोनों ने पीछे से ही मारी.. या यहाँ भी कोई छेड़छाड़ की?

मैं एकदम कसमसा गई थी और मैंने ‘ना’ मैं सिर हिलाया।

पापा – चलो अच्छा है.. तेरी सील नहीं टूटी वरना मेरा बड़ा नुकसान हो जाता.. बेटी ये पजामा निकाल तो देखूँ तेरी गाण्ड का क्या हाल किया दोनों ने।

पापा की बात सुनकर मेरी अच्छी तरह समझ में आ गया कि ये कुत्ता मेरा बाप नहीं हवस का पुजारी है। उन दो हरामियों ने तो मेरी गाण्ड मारी थी.. ये मादरचोद मेरे चूत को फाड़ने वाला है।

रानी- नहीं पापा.. रहने दो अब दर्द कम है, मुझे जाने दो नींद आ रही है।

पापा- मैंने कहा ना.. दिखाओ कहीं कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो..? चल खड़ी हो जा तुझे शर्म आ रही है तो मैं खुद देख लूँगा।

मैं कर भी क्या सकती थी सो चुपचाप खड़ी हो गई। पापा ने मेरा पजामा नीचे सरकाया और मेरी गोल गाण्ड पर हाथ फेरने लगे।

पापा- आह ह.. क्या कोमल गाण्ड है तेरी.. कमीनों ने कैसे मार कर लाल कर दी है.. देखो सूजन भी आ रही है.. तू पूरे कपड़े निकाल कर लेट जा.. तुझे मालिश की जरूरत है.. तभी तेरा दर्द जाएगा।

मैं ‘ना’ भी करती तो भी पापा नहीं मानते, तो मैंने सोचा अब जो होगा देखा जाएगा.. इसी बहाने पापा मुझे प्यार से तो पेश आएँगे।

मैं चुपचाप नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।
पापा ने पास रखी तेल की बोतल ले ली और मेरी गाण्ड पर मालिश करने लगे।
अपने हाथ चलाते-चलाते वो मेरी चूत पर भी ऊँगली घुमा देते।

वहाँ हल्की-हल्की झांटें थीं जो एकदम रुई की तरह मुलायम थीं।

रानी- आहह.. ककककक पापा उह.. गुदगुदी सी हो रही है।

पापा- अरे रानी बेटी.. ये तो शुरूआत है.. आगे देखना तुझे कितना सुकून मिलेगा.. मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इस उम्र में आकर तेरी जैसी कच्ची कली की मालिश करने का मौका मिलेगा.. रानी अगर तू मेरी बात इसी तरह मानती रहेगी ना.. तो तेरे सारे दु:ख दूर हो जाएँगे.. तुझे मैं सच्ची की रानी बना कर रखूँगा.. मानेगी ना मेरी बात?

रानी- हाँ.. पापा आपका प्यार पाने के लिए मैं आपकी हर बात मानूँगी.. मगर पापा ये गलत है.. मैं आपकी बेटी हूँ।

पापा- अरे कहाँ की बेटी.. तेरी माँ तुझे साथ लाई थी यहाँ और ऐसी कमसिन कली सामने हो तो कौन रिश्ते देखता है.. अगर तू मेरी सग़ी बेटी भी होती ना.. तो भी मैं तुझे नहीं छोड़ता.. भला हो उन दोनों का जो उन्होंने तेरी गाण्ड मार कर मेरा रास्ता आसान कर दिया, वरना मैंने तो ये कभी सोचा ही नहीं था।

रानी- ठीक है.. पापा जैसा आपको अच्छा लगे.. अब मैं कुछ नहीं बोलूँगी।

पापा- ये हुई ना बात.. चल अब सीधी हो जा आज बरसों बाद दोबारा सुहागरात मनाऊँगा तेरे साथ.. अब तू मेरी बीवी बनकर इस घर में राज करेगी.. आज से तेरे दु:ख के दिन ख़त्म हो गए हैं।

अब मुझे किसी बात का डर नहीं था क्योंकि अगर मैं मना भी करती तो भी पापा मुझे छोड़ते नहीं, तो क्यों ना उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला कर कम से कम अपनी आगे की जिंदगी तो ठीक करूँ।

मैं सीधी होकर लेट गई, पापा भी एकदम नंगे हो गए, उनका लौड़ा किसी काले नाग की तरह फुंफकार मार रहा था वो करीब कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही होगा और मोटा इतना कि मेरी हथेली में भी ना समा पाए। रानी- पापा आपका तो अजय और विजय से भी बड़ा है, उन्होंने ही इतना दर्द दिया और आप तो मेरी जान ही निकाल दोगे।

पापा- अरे रानी… बड़ा कैसे नहीं होगा.. मैं उनका बाप हूँ और तू डर मत.. वो तो नए खिलाड़ी थे, उनको क्या पता चुदाई क्या होती है.. तू बस देखती जा.. मैं तुझे कैसे सात आसमानों की सैर करवाता हूँ। वो दोनों गधे थे जो तेरी जैसी कच्ची कली की चूत का स्वाद चखने की बजाए गाण्ड से खुश हो गए। अब तुझे ऐसा चूसूंगा कि तू खुद मुझसे कहेगी कि मेरे राजा जल्दी से लौड़ा चूत में पेल दो..

रानी- हा हा हा हा.. पापा मैं आपको राजा बोलूँगी.. हा हा हा.. मैं रानी.. आप राजा.. मज़ा आएगा…

मेरी बात सुनकर पापा हँसने लगे और मेरे ऊपर आ गए, मेरे होंठ चूसने लगे।

मैं भी उनका साथ देने लगी.. बड़ा मज़ा आ रहा था।

पापा अपनी जीभ मेरे मुँह में दे रहे थे मैं उसको चूस रही थी। पापा मेरे छोटे-छोटे अमरूदों जैसे मम्मों को भी हल्के-हल्के दबा रहे थे, मुझे पता नहीं क्या हो रहा था।

लेकिन ‘हाँ’ इतना जरूर कहूँगी कि मज़ा बहुत आ रहा था।

पापा अब मेरे चूचुकों को चूस रहे थे और अपना हाथ मेरी चूत पर घुमा रहे थे। मेरे जिस्म में न जाने कहाँ से इतनी गर्मी आ गई थी कि मेरी चूत आग की भट्टी की तरह जलने लगी थी।

रानी- आह उईईइ.. उफ़ ककक.. सस्स आह.. पापा आहह.. मज़ा आह रहा है.. आराम से पापा आह.. काटो मत दु:खता है आहह…

पापा- अरे मेरी रानी.. अब पापा नहीं.. राजा बोलो और जितने गंदे शब्द आते हैं.. सब बोलो.. उससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा।

रानी- आहह उईईइ मुझे नहीं समझ आहआह आह रहा है.. क्या बोल रहे हो?

पापा- सीधी सी तो बात है.. तुम मुझे गाली दो.. चूत और लंड की बात करो.. बस जो भी तुम्हें समझ आए.. आह्ह.. जैसे उहह साली रंडी आह्ह.. क्या मस्त दूध हैं तेरे.. आह आज तो तेरी चूत को भोसड़ा बना दूँगा.. आहह…

इतना बोलकर पापा मेरी चूत चाटने लगे.. अब तो मेरा मज़ा दुगुना हो गया था.. मेरी आँखें अपने आप बन्द होने लगी थीं।

रानी- आहह ससस्स उफ़फ्फ़.. मेरे राजा आह.. मज़ा आह रहा है.. आह चाटो मेरी चूत को आह.. और ज़ोर से चाटो उफ़ आह…

पापा- ये लो मेरी रानी बिटिया.. क्यों मज़ा आया ना.. गाली निकाल साली.. और मज़ा आएगा…

रानी- आहह.. अब मज़ा आया तू एक नम्बर का कुत्ता है आह.. हरामी अपनी ही बेटी की चूत चाट रहा है.. आहह पापा आह.. मेरी चूत में कुछ हो रहा है आहह…

पापा- हा हा हा.. ये हुई ना बात.. अब तू झड़ने के करीब है.. झड़ जा बेटी आज तेरा झड़ने का पहला मौका है, भर दे मेरा मुँह अपने रस से.. आह.. क्या मजेदार माल है.. बरसों बाद मेरी जीभ को चूत रस चखने को मिलेगा।

पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा दी थी और जीभ से मुझे चोद रहे थे।

दोस्तो, क्या बताऊँ वो पल ऐसा था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मेरी चूत का फव्वारा फूट पड़ा।
मैं गाण्ड उठा-उठा कर झड़ने लगी और पापा ने मेरा सारा रस पी लिया।
मेरी आँखें बन्द थीं मैं दो मिनट तक झड़ती रही और फिर शान्त पड़ गई.. मेरा बदन ठंडा पड़ गया।

पापा- उफ़ कितना गर्म और स्वादिस्ट रस था.. मज़ा आ.. गया.. क्यों मेरी जान तुमको मज़ा आया ना?

रानी- आहह पापा उफ़फ्फ़.. क्या बताऊँ.. आह.. पता नहीं क्या हुआ.. मेरा बदन एकदम हल्का हो गया.. बहुत मज़ा आया आहह…

पापा- यह तो शुरूआत है.. रानी अब देख आगे क्या होता है.. ले मेरे लौड़े को चूस.. इसमें भी बहुत मज़ा आएगा।

पहले तो मैं थोड़ी झिझकी मगर जैसे ही पापा का सुपारा जीभ से चाटा.. उस पर पानी की बूँदें थीं जो अजीब से स्वाद की थीं, मगर उसको चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था.. अब मैं खुल कर पापा का लौड़ा चूसने लगी थी।

अब तो पापा पूरा लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस कर झटके मार रहे थे।

दस मिनट तक उनका लौड़ा चूसने के बाद मेरी चूत में दोबारा खुजली होने लगी और मैं अपने हाथ से चूत मसलने लगी।

पापा- अच्छा.. तो मेरी रानी बिटिया दोबारा गर्म हो गई.. क्यों लौड़े का स्वाद कैसा लगा?

रानी- उफ़.. पापा बहुत मज़ा आ रहा है.. आपका लंड चूसने में.. पर क्या करूँ मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।

पापा- अच्छा ये बात है.. चल घूम कर मेरे ऊपर आजा, इस तरह तू मेरा लौड़ा चूसना.. मैं तेरी चूत चाटूँगा ताकि दोनों को बराबर मज़ा मिले।

रानी- ओह्ह वाह.. मज़ा आएगा.. ये आइडिया अच्छा है.. पापा आप तो बहुत दिमाग़ वाले हो.. अच्छा एक बात तो बताओ.. आप ये लौड़ा मेरी चूत में कब डालोगे.. विजय ने तो इतना वक्त लिया ही नहीं था.. बस सीधा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया था।

पापा- हा हा हा.. अरे इसमें दिमाग़ की क्या बात है.. तू अभी बच्ची है.. तुझे नहीं पता इसे 69 का आसन कहते हैं और लौड़ा भी डालूँगा.. तेरे जैसी कच्ची कली को पहले पूरा गर्म करना जरूरी है ताकि तू लौड़े को सहन कर सके समझी.. विजय तो खुद बच्चा है उसे क्या पता लौड़ा कब और कैसे डालते हैं?

हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए.. अब मैं पापा के ऊपर लेट कर उनका लौड़ा चूस रही थी और पापा कभी जीभ से तो कभी ऊँगली से मेरी चूत को चोद रहे थे या यूँ कहो कि मेरी कसी चूत को पापा ऊँगली से खोल रहे थे।

करीब दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। अब मैंने पापा के लौड़े को बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया था। मेरा बदन एकदम अंगार उगलने लगा था, मेरी चूत रिसने लगी थी और चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी।

तभी पापा ने मेरी चूत को चाटना बन्द कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे उतार दिया।

रानी- उफ़फ्फ़ पापा प्लीज़ आह.. बीच में क्यों छोड़ दिया.. आह.. अभी तो मज़ा आ रहा था।

पापा- मेरी जान.. अब सही वक्त है लौड़ा तेरी चूत में घुसेड़ने का.. अब तू इसको लेने के लायक हो गई है.. तेरी चूत एकदम रसीली है… और मेरा लौड़ा भी तेरे थूक से सना हुआ है.. चल अब पैरों को मोड़ ले और ले ये तकिया कमर के नीचे रख ले ताकि तेरी चूत का उभार ऊपर आ जाए.. आज तुझे कली से फूल बनाने का वक्त आ गया है।

पापा ने एक हाथ से मेरी चूत को खोला और लौड़ा मेरी चूत पर सैट किया।

पापा- रानी.. अब मैं लौड़ा पेल रहा हूँ.. बस तू अपने दांत भींच लेना.. शुरू में दर्द होगा, उसके बाद हम रोज चुदाई करेंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…

रानी- आहह आहह आहह.. उफ़फ्फ़ पापा डाल दो.. अब जो होगा, देखा जाएगा.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आहअहह…

पापा ने अपने लौड़े की टोपी चूत में फँसाई और धीरे से आगे को धक्का मारा, कोई 2 इन्च लौड़ा मेरी चूत में फँस गया।
मुझे बहुत दर्द हुआ मगर मेरे ऊपर मस्ती सवार थी, मैंने दाँत भींच लिए।
पापा ने कमर को पीछे किया और एक जोरदार झटका मारा, अबकी बार आधा लौड़ा मेरी सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

अबकी बार दर्द की इंतहा हो गई और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकली, जो शायद बाहर तक किसी ना किसी ने जरूर सुनी होगी। पापा ने जल्दी से अपने होंठ मेरे मुँह पर रख दिए और मेरी दूसरी चीख उनके मुँह से दब कर रह गई।
करीब 5 मिनट तक पापा बिना हिले वैसे ही पड़े रहे। अब मुझे भी दर्द कम हो गया था और मेरा शरीर ढीला पड़ गया था, तब पापा ने अपना मुँह हटाया।

रानी- आहह पापा ऊउउहह बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ बस अब निकाल लो… आह मैं मर जाऊँगी ऊउउहह…
पापा- अरे कुछ नहीं होगा.. मेरा जान ये तो आज तेरा कौमार्य भंग हुआ है.. इसलिए इतना दर्द हुआ.. बस आज बर्दाश्त कर ले.. फिर तू खुद मेरे लौड़े पर बैठ कर उछल-उछल कर चुदेगी.. अब जितना लौड़ा अन्दर गया है उसी को आगे-पीछे करूँगा.. थोड़ा दर्द होगा और कुछ नहीं.. जब दर्द कम हो जाए तो बता देना, एक ही बार में पूरा हथियार घुसेड़ दूँगा.. उसके बाद मज़ा ही मज़ा है।

मैं मुँह से कुछ नहीं बोली बस ‘हाँ’ में सर हिला दिया। अब पापा अपने लौड़े को आगे-पीछे करने लगे मुझे दर्द हो रहा था, पर मैं दाँत भींचे पड़ी रही।
कहानी जारी है।

अपना लण्ड अन्दर डालकर उसे चोदने लगा - Lund chut ke andar dalkar khub chudai ki

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हम सब कार में कैम्प की तरफ जा रहे थे, सब बड़े उत्साहित थे। वहां तक का सफ़र छह घंटे का था। काफी भीड़ थी वहां.. पहाड़ी इलाका था। सभी कारें लाइन में अन्दर जा रही थी।

पापा ने गेट से अपने केबिन की चाबी ली और हम आगे चल पड़े। पापा ने बताया कि उनके छोटे भाई अजय यानी हमारे चाचा की फैमिली भी उनके साथ उसी केबिन में रहेगी।

चाचा हमेशा उनके साथ दो बेडरूम वाले केबिन में ही रहते थे। इस बार हमारी वजह से पापा ने तीन बेडरूम वाला केबिन लिया था। हम अन्दर पहुंचे तो मैं वहां का मैंनेजमेंट देख कर हैरान रह गया।

एक छोटी पहाड़ी पर बने इस जंगल कैम्प में तक़रीबन 90-100 केबिन बने हुए थे, काफी साफ़ सफाई थी; हर केबिन एक दूसरे से काफी दूर था। इनमें एक से तीन बेडरूम वाले कमरे थे। बीच में एक काफी बड़ा हॉल था जिसमे शायद मनोरंजन के प्रोग्राम होते थे।

पहाड़ी इलाके की वजह से काफी ठंड थी।

हम अपने केबिन पहुंचे, वहां पहले से ही अजय चाचा का परिवार बैठा था। चाचा की उम्र क़रीब 40 साल थी। कान के ऊपर के बाल हल्के सफ़ेद थे… गठीला शरीर और घनी मूंछें। उनकी पत्नी यानि हमारी चाची आरती की उम्र 36-37 के आसपास थी। वो काफी भरे हुए शरीर की औरत थी, काफी लम्बी, चाचा की तरह इसलिए मोटी नहीं लग रही थी। साथ ही हमारी कजिन सिस्टर नेहा भी थी। वो शरीर से तो काफी जवान दिख रही थी पर जब बातें करी तो पाया कि उसमें अभी तक काफी बचपना है!

हम सबने एक दूसरे को विश किया और अन्दर आ गए। पापा ने पहला रूम लिया और दूसरा अजय अंकल ने! पापा ने मुझे और ऋतु से कहा की तीसरा रूम हमें एक साथ शेयर करना पड़ेगा क्योंकि वहां इससे बड़ा कोई केबिन नहीं था।

मैंने मासूमियत से कहा- नो प्रॉब्लम डैड, हम मैंनेज कर लेंगे.
और ऋतु की तरफ देख कर आँख मार दी।

हम सबने अपने सूटकेस खोले और कपड़े बदल कर बाहर आ गए। शाम हो चुकी थी; हॉल में ही खाने का इंतजाम किया गया था; हर तरह का खाना था।

हमारा ग्रुप आया… हमने पेट भरकर खाना खाया और मैं ऋतु को लेकर टहलने के लिए निकल गया। मम्मी पापा और अजय अंकल की फैमिली वहीं अपने दूसरे दोस्तों से बातें करने में व्यस्त थे।

हमने पूरा इलाका अच्छी तरह से देखा। ठंड बढ़ रही थी इसलिए हम वापिस केबिन की तरफ चल दिए। वहाँ पहुँचकर हमने पाया कि वो सब भी अन्दर आ चुके हैं और ड्राइंग रूम में बैठे बीयर पी रहे हैं।

मैंने पहली बार मम्मी को भी पीते हुए देखा पर उन्होंने ऐसा शो किया कि ये सब नोर्मल है। हम सभी वहीँ थोड़ी देर तक बैठे रहे और बातें करते रहे। पापा ने हमें बताया कि नेहा भी हमारे रूम में रहेगी। दोनों लड़कियां एक बेड पर और मैं एक्स्ट्रा बेड पर सो जाऊंगा।

हमने कोई जवाब नहीं दिया।

नेहा पहले ही जाकर हमारे रूम में सो चुकी थी। फिर तक़रीबन एक घंटे बाद सबको नींद आने लगी और सभी एक दूसरे को गुड़ नाईट करके अपने-2 रूम में चले गए।

रास्ते में मैंने ऋतु से नेहा के बारे में विचार जानने चाहे तो उसने कहा- पता नहीं… छोटी है… देख लेंगे!
और हंसने लगी।

अपने रूम में जाकर मैंने ऋतु से कहा- मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि इन्होंने हमें एक ही रूम में सोने के लिए कहा है इससे बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता था।

ऋतु- हाँ… सच कह रहे हो, हम अब एक दूसरे के साथ पूरी रात ऐश कर सकते हैं।
मैंने नेहा की तरफ इशारा करके कहा- पर इसका क्या करें?
ऋतु ने कहा- देख लेंगे इसको भी…पर पहले तो तुम मेरी प्यास बुझाओ!
और वो उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी और अपनी टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटा ली और मेरे होंठों पर अपने सुलगते हुए होंठ रख दिए।

मैंने अपना सर पीछे की तरफ झुका दिया और उसके गद्देदार चूतड़ों पर अपने हाथ रखकर उसे उठा लिया। ऋतु की गरम जीभ मेरे मुंह के अन्दर घुस गयी और मुझे आइसक्रीम की तरह चूसने लगी।

मैंने उसके नीचे के होंठ अपने दांतों के बीच फ़सा लिए और उन्हें चूसने और काटने लगा… आज हम भाई बहन काफी उत्तेजित थे; मैंने एक नजर नेहा की तरफ देखा पर वो बेखबर सो रही थी।

मैंने दरवाजा पहले ही बंद कर दिया था। मैं ऋतु को किस करता हुआ बेड की तरफ गया और पीठ के बल लेट गया। नेहा एक कोने में उसी बेड पर सो रही थी; हमारे पास काफी जगह थी; मैंने अपने हाथ बढ़ा कर ऋतु के मम्मों पर रख दिए… वो कराह उठी- आआआ आअह… .मम्मम… दबाओ भाई… ऊऊऊ…मेरी चूचियाँ!
मैंने उसकी टी शर्ट उतार दी, उसकी ब्रा में कैद चुचे मेरी आँखों के सामने झूल गए, मैंने उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाया; काली ब्रा में गोरी चूचियां गजब लग रही थी।

मैंने गौर से देखा तो उसके निप्पल ब्रा में से भी उभर कर दिखाई दे रहे थे।

मैंने अपने दांत वहीं पर गड़ा दिए और उसका मोती जैसा निप्पल मेरे मुंह में आ गया। ऋतु ने हाथ पीछे ले जा कर अपनी ब्रा भी खोल दी और वो ढलक कर झूल गयी। मैंने अपना मुंह फिर भी नहीं हटाया और उसकी झूलती हुई ब्रा और निप्पल पर मैं मुंह लगाए बैठा था।

ऋतु की आँखें उन्माद के मारे बंद हो चुकी थी; उसने मेरा मुंह अपनी छाती पर दबा डाला… मेरे मुंह में आने की वजह से उसकी ब्रा भी गीली हो चुकी थी। गीलेपन की वजह से ऋतु के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गयी।

उसने मेरे मुंह को जबरदस्ती हटाया और बीच में से ब्रा को हटाकर फिर से अपना चुचा पकड़ कर मेरे मुंह में ठूंस दिया जैसे एक माँ अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए करती है, वैसे ही उसने अपना निप्पल मेरे मुंह में डाल दिया; मैंने और तेजी से उन्हें चूसना और काटना शुरू कर दिया।
मैंने एक हाथ नीचे किया और पलक झपकते ही उसकी जींस के बटन खोल कर उसे नीचे खिसका दिया। जींस के साथ-2 उसकी पेंटी भी उतर गयी और मेरी बहन की चूत की खुशबू पूरे कमरे में फैल गयी।

मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी… मेरी बहन की चूत में उंगली ऐसे अन्दर गयी जैसे मक्खन में गर्म छुरी… वो मचल उठी और उसने अपने होंठ फिर से मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगी। एक हाथ से वो मेरी जींस को उतारने की कोशिश करने लगी; मैंने उसका साथ दिया और बेल्ट खोल कर बटन खोले।

ऋतु किसी पागल शेरनी की तरह उठी और बेड से नीचे उतर कर खड़ी हो गयी। उसने अपनी जींस पूरी तरह से उतारी और मेरी जींस को नीचे से पकड़ा और बाहर निकाल फेंका। मेरा लंड स्प्रिंग की तरह बाहर आकर खड़ा हो गया। वो नीचे झुकी और मेरा पूरा लंड निगल गयी और चूसने लगी।
उसकी व्याकुलता लंड को चूसते ही बनती थी। मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे अपनी तरफ घुमा कर 69 की अवस्था में लिटा लिया। उसकी चूत पर मुँह लगते ही मेरा मुंह उसके रस से भर गया क्योंकि उसका एक ओर्गास्म हो चुका था।

मैंने करीब 15 मिनट तक बहन की चूत चाटी, मैं भी झड़ने के करीब था पर मैं पहले बहन की चूत का मजा लेना चाहता था। मैंने उसे फिर से घुमाया और अपनी तरफ कर के उसकी गीली चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया… वो चिल्लाई- आआ उम्म्ह… अहह… हय… याह… अय्य्य्यीईईइ…
ऋतु की चूत काफी गीली थी पर उसके कसी होने की वजह से अभी भी अन्दर जाने में उसे तकलीफ होती थी… पर मीठी वाली।

मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू किये; उसकी चूचियां मेरे मुंह के आगे उछल रही थी किसी बड़ी गेंद की तरह। मैं हर झटके के साथ उसके निप्प्ल को अपने मुंह में लेने की कोशिश करने लगा। अंत में जैसे ही उसका निप्पल मेरे मुंह में आया… वो झटके दे दे कर झड़ने लगी… और मेरे दाई तरफ लुढ़क गयी।
मैंने अपना लंड निकाला और उसे लेटा कर उसके ऊपर आ गया और फिर अपना लण्ड अन्दर डालकर उसे चोदने लगा।

मैंने नोट किया कि इस तरह से स्टॉप एंड स्टार्ट तकनीक का सहारा लेकर आज मेरा लंड काफी आगे तक निकल गया… मैंने करीब पांच मिनट तक उसे इसी अवस्था में चोदा। वो एक बार और झड़ गयी।
मैं भी झड़ने वाला था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकालना चाहा, उसने मुझे रोक दिया और अपनी टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट दी और बोली- आज अन्दर ही कर दो…
मैं हैरान रह गया पर इससे पहले कि मैं कुछ पूछ पाता… मेरे लंड ने पानी उगलना शुरू कर दिया।

उसकी आँखें बंद हो गयी और चेहरे पर एक अजीब तरह का सुकून फ़ैल गया। मैंने भी मौके की नजाकत को समझते हुए पूरे मजे लिए और उसकी चूत के अन्दर अपना वीर्य खाली कर दिया और उसके ऊपर लुढ़क गया।

उसकी टांगें अभी भी मुझे लपेटे हुए थी। मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया, मेरा हाथ बगल में सो रही चचेरी बहन नेहा से जा टकराया। मैंने सर उठा कर देखा तो वो अभी भी सो रही थी और काफी मासूम लग रही थी।

ना जाने मेरे मन में क्या आया, मैंने अपना एक हाथ उसके चुचे पर रख दिया। वैसे तो वो कमसिन थी पर उसके उभार काफी बड़े थे। मुझे ऐसे लगा कोई रुई का गुबार हो। मैंने नोट किया कि उसने ब्रा नहीं पहनी थी। यह महसूस करते ही मेरे लंड ने ऋतु की चूत में पड़े-पड़े एक अंगड़ाई ली। मेरे नीचे मेरी नंगी बहन पड़ी थी और मैं पास में सो रही दूसरी बहन के चुचे मसल रहा था।

मेरी बहन के साथ रंगीन रातें कब तक चलेंगी, चचेरी बहन के हमारे कमरे में होते हुए रोज रातें रंगीन करना मुश्किल काम लग रहा था.

मैं उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गया; ऋतु भी मेरे पीछे आ गयी और मेरे सामने नंगी पोट पर बैठ कर मूतने लगी। वो मुझे लंड साफ़ करते हुए देखकर हौले हौले मुस्कुरा रही थी। मैंने तौलिये से लंड साफ़ किया और बाहर आ गया।
मैंने अपनी शोर्ट्स पहनी और टी शर्ट उठाई और पहन कर दीवार पर लगे छोटे से शीशे के आगे आकर अपना चेहरा साफ़ करने लगा।

शीशा थोड़ा छोटा और गन्दा था। मैं थोड़ा आगे हुआ और अपने हाथ से उसे साफ़ करने लगा। मेरे हाथ के दबाव की वजह से वो हिल गया और उसका कील निकल कर गिर गया। मैंने शीशे को हवा में लपक कर गिरने से बचाया।

मैंने देखा शीशे वाली जगह पर एक छोटा सा होल है। मैं आगे आया और गौर से देखने पर मालूम चला की दूसरी तरफ भी एक शीशा लगा हुआ है पर शीशे के उलटी तरफ से देखने की वजह से वो पारदर्शी हो गया था जिस वजह से मैं दूसरे कमरे में देख पा रहा था। वो कमरा अजय चाचा का था; वो खड़े हुए अपनी बीयर पी रहे थे।

तब तक ऋतु भी बाथरूम से वापिस आ चुकी थी और कपड़े पहन रही थी; मैंने उसे इशारे से अपनी तरफ बुलाया; वो आई और मैंने उसे वो शीशे वाली जगह दिखाई तो वो चौंक गयी और जब सारा माजरा समझ आया तो हैरानी से बोली- ये तो चाचा का कमरा है… क्या वो हमें देख पा रहे होंगे?

मैं- नहीं, ये शीशे एक तरफ से देखने वाले और दूसरी तरफ से पारदर्शी है… ये देखो!
और मैंने उसे अपने रूम का शीशा दोनों तरफ से दिखाया।

उसके चेहरे के भाव बदलते देर नहीं लगी और उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और बोली- ह्म्म्म तो अब तुम अपनी बहन के बाद चाचा के कमरे की भी जासूसी करोगे।
मैंने कहा- चोरी छुपे देखने का अपना ही मजा है।
वो हंस पड़ी और हम दूसरे कमरे में देखने लगे।

अब चाचा बेड के किनारे पर खड़े हुए अपने कपड़े उतार रहे थे। उन्होंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी और सिर्फ चड्डी में ही बैठ गए। आरती चाची बाथरूम से निकली और चाचा के सामने आकर खड़ी हो गयी; उन्होंने गाउन पहन रखा था।
चाचा ने अपना मुंह चाची के गुदाज पेट पर रगड़ दिया और उसके गाउन की गाँठ खोल दी। चाची ने बाकी बचा काम खुद किया और गाउन को कंधे से गिरा दिया। चाची ने नीचे सिर्फ पेंटी पहन रखी थी। चाची के मोटे मोटे चुचे बिल्कुल नंगे थे और चाचा के सर से टकरा रहे थे। मैंने इतने बड़े चुचे पहली बार देखे थे… मेरे मुंह से “आउउ” निकल गया। ऋतु जो मेरे आगे खड़ी हुई थी उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी और बोली- वाह… आरती चाची की ब्रेस्ट कितनी बड़ी और सुंदर है. तुम्हारी तो पसंदीदा चीज है न इतनी बड़ी चूचियां… है ना?
मैंने सिर्फ हम्म्म्म कहा और दोबारा वहीं देखने लगा। मेरा लंड अब फिर से खड़ा हो रहा था और ऋतु, मेरी बहन की की गांड से टकरा रहा था.

चाचा ने चाची की कच्छी भी उतार दी और उसे पूरी नंगी कर दिया…”क्या चीज है यार पूरी नंगी चाची! ” मैंने मन ही मन कहा।
चाची का पूरा शरीर अब मेरे सामने नंगा था, उसकी बड़ी-बड़ी गांड, हल्के बालों वाली चूत और बड़ी बड़ी चूचियां देख कर मेरा इस कमरे में बुरा हाल था।

चाचा ने ऊपर मुंह उठा कर चाची का एक चुचा अपने मुंह में ले लिया और उसे चबाने लगे। चूस वो रहे थे और पानी मेरे मुंह में आ रहा था। चाची थोड़ी देर तक अपने चुचे चाचा से चुसवाती रही और खड़ी हुई मचलती रही। फिर चाची ने चाचा को धक्का देकर लिटा दिया और चाचा का अंडरवीयर एक झटके से निकाल फेंका। चाचा का लंड देख कर अब ऋतु का मुंह भी खुल गया… क्योंकि काफी बड़ा था; मेरे लंड से भी बड़ा और मोटा, काले रंग का था, उसकी नसें चमक रही थी।

चाची ने चाचा का लंड अपने मुंह में डाला और उसे चूसने लगी। चाचा ने अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगे। आरती चाची हिल हिल कर चाचा का लंड चूस रही थी तो उनके मोटे मोटे चुचे झटकों से ऊपर नीचे हो रहे थे। आधी बैठने की वजह से उस की गांड बाहर की तरफ उभर कर काफी दिलकश लग रही थी… मैं तो उसके भरे हुए बदन का दीवाना हो गया था।

अचानक चाचा के रूम का दरवाजा खुला और मेरी माँ कमरे में दाखिल हुई।
मैं उन्हें एक दम देख कर हैरान रह गया।
मम्मी ने भी गाउन पहन रखा था पर उन्हें आरती चाची को चाचा का लंड चूसते देखकर कोई हैरानी नहीं हुई; आरती ने सर उठा कर माँ को देखा तो वो भी बिना किसी हैरानी के उन्हें देख कर मुस्कुरा दी और फिर से लंड चूसने में लग गयी।

जितना हैरान मैं था, उतनी ही ऋतु भी; वो मुंह फाड़े उधर देख रही थी और फिर हैरानी भरी आँखों से मेरी तरफ देखा और आँखों से पूछा- ये क्या हो रहा है?
मैंने अपने कंधे उचका दिए और सर हिला दिया… मुझे नहीं मालूम कहने के स्टाइल में!

हमने वापिस अन्दर देखा। माँ अब बेड पर जा कर उन के पास बैठ गयी थी, वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे और हमारी माँ, चाची को अजय चाचा का लंड चूसते हुए देख रही थी. मेरा तो दिमाग चकरा रहा था कि ये सब हो क्या रहा है।

अब चाचा उठे और मेरी माँ को देख कर मुस्कुराते हुए घूम कर नीचे बैठ गये और आरती चाची को अपनी वाली जगह पर वैसे ही लिटा दिया। मेरी माँ ने भी चाचा को निहारा और एक सेक्सी सी स्माइल दी।
चाचा ने अपना मुंह आरती की सुलगती हुई चूत पर लगा दिया ‘आआआआ आआअह्ह्ह.. म्मम्म… आआ आआह्ह्ह’

पूरा कमरा चाची की गरम आह से गूंज उठा… चाचा चाची की चूत चाट रहे थे, चाची पूरी नंगी थी! मेरी माँ आगे आई और बेड पर चाची के बराबर लेट गयी और अपने हाथ से चाची के बालों को सहलाने लगी। अजय चाचा पूरी तन्मन्यता से चाची की चूत चाट रहा था।

अचानक उन्होंने एक हाथ बढ़ा कर मेरी माँ के गाउन में डाल दिया। मेरी हैरानी की कोई सीमा न रही जब मेरी माँ ने चाचा को रोकने के बजाय अपनी टाँगें थोड़ी और चौड़ी कर ली और अजय के हाथ को अपनी चूत तक पहुचने में मदद की… मैं ये देखकर सुन्न रह गया।

मेरी माँ पूर्णिमा अब चाची के बगल में उसी अवस्था में लेट गयी और अपनी आँखें बंद कर ली और फिर उन्होंने अपने गाउन को खोला और अपने सर के ऊपर से घुमा कर उतार दिया और अब वो भी चाची की तरह बेड पर उनकी बगल में नंगी लेटी हुई थी।

मैंने पहली बार अपनी माँ को नंगी देखा था, मैं उनके बदन को देखता रह गया। अब समझ आ रहा था कि ऋतु किस पर गयी है; साफ़ सुथरा रंग, मोटे और गोल गोल चुचे, ऋतु से थोड़े बड़े पर आरती से छोटे, और उन पर पिंक कलर के निप्पल अलग ही चमक रहे थे।
उनका सपाट पेट, जिस पर ऑपरेशन के हल्के मार्क्स थे और उसके नीचे उनकी बिल्कुल साफ़ और चिकनी बिला बालों वाली चूत…
हालांकि हम दूसरे कमरे में थे पर मम्मी की चूत की बनावट काफी साफ़ दिखाई दे रही थी।

मेरा तो लंड खड़ा हो कर फुंफकारने लगा जिसे ऋतु ने अपनी गांड पर महसूस किया; उसने अपनी गांड का दबाव पीछे करके मेरे लंड को और भड़का दिया।

चाचा अपनी पत्नी की चूत चाट रहा था और अपनी भाभी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उन्हें मजा दे रहा था। पूरे कमरे में दो औरतों की हल्की हल्की सिसकारियां गूंज रही थी। फिर अजय चाचा ने अपना चूत में भीगा हुआ सर उठाया और अपनी भाभी यानि मेरी माँ की चूत पर टिका दिया। वो एक दम उछल पड़ी और अपनी आँखें खोल कर अजय यानि अपने देवर को देखा और उसके सर के बाल हल्के से पकड़ कर उसे अपनी चूत में दबाने लगी। अजय दूसरे हाथ से चाची की चूत को मजा दे रहा था।

मुझे और ऋतु को विश्वास नहीं हो रहा था कि हमारी माँ इस तरह की हो सकती है। मेरे मन में ख्याल आया कि पता नहीं पापा को इसके बारे में कुछ मालूम है या नहीं… कि उनकी बीवी उन्ही के छोटे भाई के साथ मस्ती कर रही है और अपनी चूत चटवा रही है।

पूरे कमरे में सेक्स की हवा फैली हुई थी। मैंने घड़ी की तरफ देखा, रात के 11:30 बज रहे थे; नेहा सो रही थी; मैं और ऋतु अजय चाचा के रूम में बीच से बने झरोखे से देख रहे थे और हमारी माँ अपने देवर अजय और देवरानी आरती के साथ नंगी पलंग पर लेटी मजे ले रही थी।

मेरा दिमाग सिर्फ ये सोचने में लगा हुआ था कि मम्मी ये सब सेक्स, चुदाई वगैरा अजय चाचा के साथ कब से कर रही है? चाची को इससे कोई परेशानी क्यों नहीं है… और पापा को क्या इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है?
पर मुझे मेरे मेरे सभी सवालों का जवाब जल्दी ही मिल गया। पापा कमरे में दाखिल हुए… बिल्कुल नंगे… उनका लंड खड़ा हुआ था और वो सीधे बेड के पास आये और नंगी लेटी हुई आरती चाची की चूत में अपना लंड पेल दिया।

मेरी और ऋतु की हैरानी की सीमा न रही; उनका लंड अपने छोटे भाई की पत्नी जो बहु के समान होती है उनकी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था।
अब मुझे सब समझ आ रहा था कि ये लोग हर साल यहाँ इकठ्ठा होते हैं और एक दूसरे की बीबी और पति से मजा लेते हैं। मैंने स्वेपिंग के बारे में और ग्रुप सेक्स के बारे में सुना था पर आज देख भी रहा था। पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था की मैं ये सब अपने ही परिवार के साथ होते हुए देखूंगा।

मेरा लंड ये सब देखकर अकड़ कर दर्द करने लगा था’ मैंने अपनी शोर्ट्स गिरा दी और अपने लंड को हाथों में लेकर और माँ की चूत पर अजय चाचा का चेहरा देख कर हिलाने लगा।
उधर ऋतु के तो होश ही उड़ गए थे अपने पापा का लम्बा, गोरा और जानदार लंड देख कर… पर जल्दी ही वो भी सब कुछ समझते हुए हालात के मजे लेने लगी थी और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर जा लगा और दूसरा हाथ घुमा कर मेरे लंड को पीछे से पकड़ लिया और मेरे से और ज्यादा चिपक गयी।

ऋतु- मम्मम रोहन… देखो तो जरा, हमारे पापा का लंड कितना शानदार है!
वो था भी शानदार, चाचा के लंड जितना ही बड़ा… पर गोरा चिट्टा!

चाची की चूत में मेरे पापा का लंड जाते ही चाची गांड उछाल उछाल कर अपनी चूत चुदवाने लगी। पापा ने अपने हाथ उसके मोटे मोटे चूचों पर टिका दिए और मसलने लगे; फिर थोड़ा झुके और उनके दायें चुचे पर अपने होंठ टिका दिए।

मेरे आगे खड़ी ऋतु ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे पापा वो सब उसके साथ कर रहे है क्योंकि वो उनके झटके के साथ साथ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी और पापा द्वारा चाची के चुचे पर मुंह लगते ही वो भी सिहर उठी और अपनी चूत से हाथ हटा कर अपने निप्पल को उमेठने लगी।
ऋतु ने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और अब वो अपने आगे झूलते हुए मोटे मोटे चूचों को एक एक कर के दबा रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियां ले रही थी।

मैं समझ गया लो मेरी बहन को उसके पापा का लंड पसंद आ गया है… जैसे मुझे मम्मी का बदन और उनकी चूत पसंद आ गयी है।

मम्मी ने अपनी आँखें खोली और उठ कर बैठ गयी; उसने अजय चाचा के चेहरे को पकड़ कर उठाया और बड़ी व्याकुलता से अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए। फिर तो कामुकता का तांडव होने लगा बेड पर… अजय चाचू माँ के होंठ ऐसे चूस रहे थे जैसे उन्हें कच्चा ही चबा जायेंगे; उनके मुंह से तरह तरह की आवाजें आ रही थी।

माँ ने चाचा के चेहरे पर लगे अपने रस को सफा चट कर दिया। मम्मी उनकी घनी मूंछों से ढके होंठों को वो चबा रही थी और बीच बीच में उनकी मूंछों पर भी अपनी लम्बी जीभ फिरा रही थी।
अजय चाचा से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने माँ को दोबारा लिटा दिया और अपना तन तनाता हुआ लंड मां की गीली चूत में पेल दिया.
आआआ आऐईई ईइ मररर गयीईई…” माँ धीरे से चिल्लाई।

मेरा तो बुरा हाल हो रहा था अपनी माँ को अपने सामने चुदते हुए देख कर; पापा भी अपनी पूरी स्पीड में चाची की चूत को चोद रहे थे। ऋतु की नजरें पापा के लंड से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।

अचानक चाची ने पापा के लंड को अपनी चूत में से निकाल दिया और बेड पर उलटी हो कर कुतिया की तरह बैठ गयी। पापा ने अपना चेहरा चाची की गांड से चिपका दिया। मैंने नोट किया कि पापा आरती चाची की चूत नहीं गांड का छेद चाट रहे है… मेरी उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी।

पापा उठे और अपने लंड को चाची की गांड के छेद से सटाया और आगे की तरफ धक्का मारा। चाची तो मजे के मारे दोहरी हो गयी… ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
उसकी गांड में पापा का लंड फ़चाआअक की आवाज के साथ घुस गया।

पापा अब चाची की गांड मार रहे थे। दोनों के चेहरे देख कर यही लगता था की उन्हें इसमें चूत मारने से भी ज्यादा मजा आ रहा है।
ये देखकर ऋतु की सांसे तेज हो गयी और उसने अपने हाथों की गति मेरे लंड पर बड़ा दी और अपनी गांड को पीछे करके टक्कर मारने लगी।

ऋतु ने अपने दूसरे हाथ से अपनी स्कर्ट उतर दी; नीचे उसने पेंटी नहीं पहनी थी; अब उसके गोल चूतड़ मेरे लंड के सुपारे से टकरा रहे थे; वो उत्तेजना के मारे कांप रही थी।
ऐसा मैंने पहली बार देखा था।
वो थोड़ा झुकी और अपनी गांड को फैला कर अपने हाथ दीवार पर टिका कर खड़ी हो गयी और मेरे लंड को पीछे से अपनी चूत पर टिका दिया. मैंने एक हल्का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी रसीली चूत में जा घुसा।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली और पीछे हो कर तेजी से धक्के मारने लगी. फिर तकरीबन 5 मिनट बाद अचानक उसने मेरा लंड निकाल दिया और उसे पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर टिका दिया।
मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा… तो ऋतु बोली- प्लीज… मेरी गांड में अपना लंड डाल दो!
मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई उसे ना कहने की… मैंने ऋतु की चूत के रस से भीगा हुआ अपना लंड उसकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और एक करारा झटका मारा।
ऋतु चिल्लाई- आआआआ आआआ अह्ह्ह्ह… मररर… गयी…
तो मैंने उसके मुंह में अपनी उंगलियाँ डाल दी ताकि वो ज्यादा न चिल्ला पाए; वो उन्हें चूसने और काटने लगी’ उसके मुंह की लार ने मेरी सारी उंगलियाँ गीली कर दी और मैंने वही गीला हाथ उसके चेहरे पर मल कर उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया।

मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था। मैंने उसे बाहर निकाला और अगली बार और ज्यादा तेजी से अन्दर धकेल दिया… वो पहले झटके से उबर भी नहीं पायी थी कि दूसरे ने तो उसकी गांड ही फाड़ दी.

ऋतु थोड़ी देर के लिए नम सी हो गयी, उसका शरीर एकदम ढीला हो गया और वो मेरे हाथों में लटक सी गयी… वो झड़ भी चुकी थी।

वहां दूसरे रूम में पापा ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर से हुंकारते हुए अपना टैंक आरती चाची की चूत में खाली कर दिया। चाची अपनी मोटी गांड मटका- मटका कर अपने जेठ का लंड और उसका रस अपनी चूत के अन्दर ले रही थी। चाची का चेहरा हमारी तरफ था और वो अपने मुंह में अपनी उँगलियाँ डाले चूस रही थी… जैसे कोई लंड हो।

अजय चाचू भी लगभग झड़ने के करीब थे, उन्होंने एक झटके से मेरी माँ को ऊपर उठा लिया जैसे कोई गुड़िया हो और खड़े खड़े उन्हें चोदने लगे। माँ ने अपने हाथ चाचू की गर्दन के चारों तरफ लपेट लिए थे और टांगें उनकी कमर पर।

तभी चाचा ने एक जोर का झटका दिया और अपने रॉकेट जैसी वीर्य की धारें मेरी माँ की चूत में उछाल दी; माँ भी झड़ने लगी हवा में लटकी हुई; मेरी माँ की चूत में से चाचा का रस टपक कर नीचे गिर रहा था।
मैंने माँ को झड़ते देखा तो मेरा लंड भी जवाब दे गया और मैंने भी अपना वीर्य अपनी बहन की कोमल गांड में डाल दिया और अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को पकड़ा और दबाने लगा।

ऋतु ने अपनी कमर सीधी करी और अपने एक हाथ को पीछे करके मेरे सर के पीछे लगाया और अपने होंठ मुझ से जोड़ दिए। मेरा लंड फिसल कर उसकी गुदाज गांड से बाहर आ गया और उसके पीछे पीछे मेरा ढेर सारा रस भी बाहर निकल आया।

हम एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रहे थे। ऋतु ने आँखें खोली और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखकर थैंक्स बोली… पर तभी पीछे देख कर वही आँखें फैल कर चौड़ी हो गयी।

हमारी कजिन सिस्टर नेहा उठ चुकी थी और हमारी कामुकता का नंगा नाच आँखें फाड़े देख रही थी। मैंने जब पीछे मुड़ कर देखा तो नेहा हम भाई बहन को नंगा देखकर हैरान हुई खड़ी थी, उसकी नजर मेरे लटकते हुए लंड पर ही थी। मैंने अपने लंड को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश की पर उसकी फैली हुई निगाहों से बच नहीं पाया।
नेहा ने हैरानी से पूछा- ये तुम दोनों क्या कर रहे हो?
“तुम्हें क्या लगता है नेहा… हम लोग क्या कर रहे हैं?” ऋतु ने बड़े बोल्ड तरीके से नंगी ही उसकी तरफ जाते हुए कहा।
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया कि ऋतु ये क्या कह रही है और क्यों!

नेहा ने हकलाते हुए कहा- मम्म मुझे लगता है कि तुम… दोनों… गन्दा काम कर रहे थे।
ऋतु- गंदे काम से तुम्हारा क्या मतलब है?
नेहा- वो ही जो शादी के बाद करते हैं.
उसका हकलाना जारी था।

ऋतु- तुम कैसे जानती हो कि ये गन्दा काम है… शादी से पहले या बाद में; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता! ये तो सभी करते है और खूब एन्जॉय करते हैं।
नेहा- पर तुम दोनों तो भाई बहन हो… ये तो सिर्फ प्रेमी या पति पत्नी करते हैं।
ऋतु- हम्म्म्म… काफी कुछ मालूम है तुम्हें दुनिया के बारे में, लेकिन अपने घर के बारे में भी कुछ मालूम है के नहीं?
नेहा- क्या मतलब??
ऋतु- यहाँ आओ और देखो यहाँ से!

ऋतु ने उसे अपने पास बुलाया और ग्लास वाले एरिया से देखने को बोला।
नेहा पास गयी और अन्दर देखने लगी।
अन्दर देखते ही उसके तो होश ही उड़ गए; उसके मम्मी पापा हमारे मम्मी पापा यानि उसके ताऊ और ताई जी के साथ नंगे एक ही पलंग पर लेटे थे।

अब तक दूसरे रूम में सेक्स का नया दौर शुरू हो चुका था, मेरी माँ अब जमीन पर बैठी थी और नेहा के पापा का यानि अपने देवर का लम्बा लंड अपने मुंह में डाले किसी रंडी की तरह चूसने में लगी थी।
मेरे पापा ने भी आरती चाची को उल्टा करके उनकी गांड पर अपने होंठ चिपका दिए और उस में से अपना वीर्य चूसने लगे।

ऋतु ने आगे आकर नेहा के कंधे पर अपना सर टिका दिया और वो भी दूसरे कमरे में देखने लगी और नेहा के कान में फुसफुसा कर बोली- देखो जरा हमारी फैमिली को… तुम्हारे पापा मेरी माँ की चूत मारने के बाद अब उनके मुंह में लंड डाल रहे हैं और तुम्हारी माँ कैसे अपनी गांड मेरे पापा से चुसवा रही है। इसी गांड में थोड़ी देर पहले उनका मोटा लंड था।

नेहा अपने छोटे से दिमाग में ये सब समाने की कोशिश कर रही थी कि ये सब हो क्या रहा है। उसकी उभरती जवानी में शायद ये पहला मौका था जब उसने इतने सारे नंगे लोग पहली बार देखे थे।
मैंने नोट किया कि नेहा का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया है।

ऋतु ने कहा- जब हमारे पेरेंट्स, माँ बाप, चाचा चाची ताऊ ताई ये सब एक दूसरे के साथ खुल कर कर सकते हैं तो हम क्यों पीछे रहें?
नेहा देखे जा रही थी और बुदबुदाये जा रही थी- पर ये सब गलत है.
“क्या गलत है और क्या सही अभी पता चल जाएगा…” और ऋतु ने आगे बढ़ कर मेरा मुरझाया हुआ लंड पकड़ कर नेहा के हाथ में पकड़ा दिया।

नेहा के पूरे शरीर में एक करंट सा लगा और उसने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे और ऋतु को हैरानी से देखने लगी।
ऋतु बोली- देखो, मैं तुम्हें सिर्फ ये कहना चाहती हूँ कि जैसे वहां वो सब और यहाँ हम दोनों मजे ले रहे हैं क्यों न तुम भी वो ही मजे लो…
और फिर से मेरा उत्तेजित होता हुआ लंड उसके हाथ में दे दिया।

इस बार नेहा ने लंड नहीं छोड़ा और उसके कोमल से हाथों में मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया। उसका छोटा सा हाथ मेरे लम्बे और मोटे लंड को संभाल पाने में असमर्थ हो रहा था। उसने अपना दूसरा हाथ आगे किया और दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया।

मैं समझ गया कि वो मन ही मन ये सब करना चाहती है पर खुल के बोल नहीं पा रही है; अपनी तरफ से तो ये साबित कर रही है कि इन्सेस्ट सेक्स यानी पारीवारिक सेक्स बुरा है पर अपनी भावनाओं को रोक नहीं पा रही है।

ऋतु ने मुझे इशारा किया और मैंने आगे बढ़ कर एक दम से नेहा के ठन्डे होंठों पर अपने गरम होंठ टिका दिए। उसकी आँखें किस करते ही फ़ैल गयी पर फिर वो धीरे धीरे मदहोशी के आलम में आकर बंद हो गयी।

मैंने इतने मुलायम होंठ आज तक नहीं चूमे थे… एकदम ठन्डे… मुलायम, मलाई की तरह। मैंने उन्हें चूसना और चाटना शुरू कर दिया; नेहा ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया।
नेहा ने भी मुझे किस करना शुरू किया; मैं समझ गया कि वो स्कूल में किस करना तो सीख ही चुकी है वो किसी एक्सपर्ट की तरह मुझे फ्रेंच किस कर रही थी… अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल कर मेरी जीभ को चूस रही थी।

अब मेरे लंड पर उसके हाथों की सख्ती और बढ़ गयी थी। ऋतु नेहा के पीछे गयी और उसके चुचे अपने हाथों में लेकर रगड़ने लगी। नेहा ने अपनी किस तोड़ी और अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी।
मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर टिका दी। वो सिसक उठी- स्स्स स्स्स्स स्स्सम्म म्मम्म… नाआआअ…

ऋतु की उँगलियों के बीच नेहा के निप्पल थे। नेहा मचल रही थी हम दोनों भाई बहन के नंगे जिस्मों के बीच… नेहा अपनी छोटी गांड पीछे करके उससे ऋतु की चूत दबा रही थी। नेहा ने आत्म समर्पण कर दिया था हम दोनों के आगे और अपनी उत्तेजना के सामने।

मैंने अपने हाथ नेहा के चुचे पर टिका दिए… ‘क्या चुचे थे…’ ये ऋतु से थोड़े छोटे थे पर ऐसा लगा जैसे उसने अपनी टी शर्ट के अन्दर संतरे छुपा रखे हैं।

ऋतु ने नेहा की टी शर्ट पकड़ कर ऊपर उठा दी; उसने काली रंग की ब्रा पहन रखी थी; गोरे चुचे उसके अन्दर फँस कर आ रहे थे। शायद ब्रा छोटी पड़ रही थी। मैंने हाथ पीछे करके उसके कबूतरों को उसकी ब्रा से आजाद कर दिया और वो फड़फड़ा कर बाहर आ गए। वो इतने छोटे भी नहीं थे जितना मैंने सोचा था। बिल्कुल उठे हुए, ब्राउन निप्पल, निप्पल के चारों तरफ फैला काले रंग का एरोला… बिल्कुल अनछुए चुचे थे।

मैंने आगे बढ़ कर अपना मुंह उसके दायें निप्पल पर रख दिया। नेहा ने मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुंह को अपने सीने पर दबा दिया। वो अपनी गोल आँखों से मुझे अपने चुचे चाटते हुए देख रही थी और मेरे सर के बाल पकड़ कर मुझे कण्ट्रोल कर रही थी।

नेहा मेरे सर को कभी दायें चुचे पर रखती और कभी बाएं पर… मैंने अपने दांतों से उसके लम्बे निप्प्ल को जकड़ लिया और जोर से काट खाया.
“आआ आआआ आआह्ह्ह…” उसने एक दो झटके लिए और फिर वो नम हो गयी।
मेरे चूसने मात्र से ही उसका ओर्गास्म हो गया था।

मैंने अपनी चचेरी बहन के चूचों को चूसना जारी रखा, उसके दानों से मानो बीयर निकल रही थी। बड़े नशीले थे उसके बुबे… मैंने उन पर जगह जगह काट खाया, चुबलाया, चूसा, और उसकी पूरी छाती पर लाल निशाँ बना दिए।

ऋतु ने पीछे से उस की कैपरी भी उतार दी और नीचे बैठ कर उस की कच्छी के इलास्टिक को पकड़ कर नीचे कर दिया।
मेरी चचेरी बहन अब बिल्कुल नंगी थी हमारे सामने।

मेरे मन में ख्याल आया कि मात्र दस मीटर के दायरे में दो परिवार पूरे नंगे थे। भाई बहन चचेरी बहन, जेठ छोटी भाभी देवर भाभी… की जोड़ियाँ नंगे एक दूसरे की बाँहों में सेक्स के मजे ले रहे थे।

मेरी बाँहों में मेरी चचेरी बहन नंगी खड़ी थी और उसके पीछे मेरी सगी बहन भी नंगी थी। मेरा लंड पिछले दो घंटों में तीसरी बार खड़ा हुआ फुफकार रहा था और अपने कारनामे दिखाने के लिए उतावला हुए जा रहा था, उसे मेरी चचेरी बहन की कुंवारी चूत की खुशबू आ गयी थी।

मैंने अपना एक हाथ नीचे करके नेहा की चूत पर टिका दिया; वो रस से टपक रही थी। मैंने अपनी बीच की उंगली उसकी चूत में डालनी चाही पर वो बड़ी कसी हुई थी। मैंने उंगलियों से उसका रस समेटा और ऊपर करके उन्हें चूस लिया।
बड़ा मीठा रस था।

ऋतु ने मुझे ये सब करते देखा तो लपक कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और बचा हुआ रस चाटने लगी “म्म्म्म स्स्स्स… इट्स… सो… टेस्टी…”
नेहा के चेहरे पर एक गर्वीली मुस्कान आ गयी, उसने अपनी आँखें खोली और मेरा हाथ अपनी चूत पर रखकर रगड़ने लगी। मैं समझ गया कि वो गरम हो चुकी है।

मेरी नजर दूसरे कमरे में चल रहे खेल पर गयी। वहां मेरी माँ तो अपने देवर का लंड ऐसे चूस रही थी जैसे कोई गन्ना… अजय चाचू ने मेरी माँ को वहीं जमीन पर लिटाया और लंड समेत उनके मुंह पर बैठ गए- ले साली… चूस मेरे लंड को… चूस छिनाल भाभी… मेरे लंड कओ… आआआ आआह्ह्ह…

वो अपने टट्टे मेरी माँ के मुंह में ठूंसने की कोशिश कर रहे थे। माँ का मुंह थोड़ा और खुला और लंड निकाल कर वो अब गोटियाँ चूसने लगी। चाचू का लंड उनकी नाक के ऊपर लेटा हुआ फुफकार रहा था।
मम्मी की लार से उनका पूरा चेहरा गीला हो चुका था- ले साआआ आआली… चुस इन्हीईईए… आआआ आआह्ह्ह्ह!
मेरी माँ की आँखों से आंसू निकल आये… इतनी बर्बरता से चाचू उनका मुंह चोद रहे थे। मेरे पापा अपने छोटे भाई के कारनामे देख कर मुस्कुरा रहे थे पर अपनी पत्नी को भाई के द्वारा ऐसा होते देखकर वो भी थोड़ा भड़क गए और अपना गुस्सा उन्होंने उसकी पत्नी आरती के ऊपर निकाला।

पापा ने आरती की टांगों को पकड़ा और उसे हवा में शीर्षासन की मुद्रा में अपनी तरफ मुंह करके उल्टा खड़ा कर दिया और टांगें चौड़ी करके उनकी चूत पर अपने दांत गड़ा दिए। चाची अपनी चूत पर इतना हिंसक प्रहार बर्दाश्त ना कर पाई और उसके मुंह से सिसकारी निकल गयी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ आअह्ह्ह… भेन चोद… क्या कर रहा है… आआ ह्ह्ह्ह.. धीईरे… आआ आआआह्ह…
पर वो अपनी गांड हिला रही थी यानि चाची को भी मजा आ रहा था।

तभी मेरे पापा ने अपने लंड को आरती चाची के मुंह की तरफ करके पेशाब कर दिया। उनकी धार सीधे आरती चाची के उलटे और खुले मुंह में जा गिरी। कुछ उनकी नाक में भी गयी और वो खांसने लगी।
मुझे ये देख कर बड़ी घिन्न आई पर मैंने नोट किया कि आरती चाची को इसमें मजा आ रहा था और वो खूब एन्जॉय कर रही थी।

अपनी बीवी से बदला लेते देख कर अजय चाचा मेरे पापा की तरफ देख कर हंसने लगे और मेरी माँ पर और बुरी तरह से पिल पड़े। वो दोनों भाई एक दूसरे की बीवियों की बुरी तरह से लेने में लगे हुए थे।
मैं और मेरी बाकी दोनों बहनें मेरे साथ ये सब देख रही थी और एक दूसरे के नंगे जिस्म सहला रही थी।

अब नेहा के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो गया, उसने मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मेरे होंठों को पागलों की तरह चूसने लगी। शायद अपने मम्मी पापा के कारनामे उसे उत्तेजित कर रहे थे।
ऋतु ने नीचे बैठ कर नेहा की लार टपकाती चूत पर अपना मुंह रख दिया जिससे उसकी चूत की लीकेज बंद हो गयी। नेहा की चूत पर हल्के हलके सुनहरे रोंये थे; वो अभी जवानी की देहलीज पर पहुंची ही थी और अपनी अनचुदी चूत के रस को अपनी बहन के मुंह में डाल कर मजे ले रही थी।

ऋतु चटकारे ले ले कर उस की चूत साफ़ करने लगी’ वो नीचे से उस की चूत चूस रही थी और मैं ऊपर से उस के होंठ। ऋतु ने अपनी जीभ नेहा की चूत में घुसा दी; नेहा की चूत के रस की चिकनाई से वो अन्दर चली गयी और फिर अपनी दो उंगलियाँ भी उसके अन्दर डाल दी।
नेहा मचल उठी और मेरी जीभ को और तेजी से काटने और चूसने लगी। मैंने अपने पंजे उस की छाती पर जमा दिए, उस पर हो रहा दोहरा अटैक उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

ऋतु ने धक्का दे कर हम दोनों को बेड पर ले जा कर गिरा दिया। मैंने अब गौर से नेहा का नंगा जिस्म बेड पर पड़े हुए देखा, उसका मासूम सा चेहरा, दो माध्यम आकार के चुचे, पतली कमर और कसे हुए चूतड़, मोटी टांगें और कसी हुई पिंडलियाँ देख कर मैं पागल सा हो गया और उसे ऊपर से नीचे तक चूमने लगा।

मैं चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुंचा और गीली चूत को अपने मुंह से चाटने लगा। उसका स्वाद तो मैं पहले ही चख चुका था, अब पूरी कड़ाही में अपना मुंह डाले मैं उसका मीठा रस पी रहा था।
ऋतु ने दूसरी तरफ से नेहा को किस करना शुरू किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रगड़ने लगी।

नेहा बुदबुदाये जा रही थी- मुझे कुछ हो रहा है… कुछ करो।
ऋतु ने मुझे इशारा किया और मैं समझ गया कि वो घड़ी आ चुकी है। मैंने उठ कर अपना लंड उसके रस से चिकना कर उसकी छोटी सी चूत के मुहाने पर रखा, ऋतु ने मेरा लंड पकड़ा और उसे नेहा की चूत के ऊपर नीचे रगड़ने लगी और फिर एक जगह फिक्स कर दिया और बोली- भाई… थोड़ा धीरे धीरे अंदर करना… कुंवारी है अभी…
मैंने कुछ नहीं कहा और अपने लंड का जोर लगा कर अपना सुपारा अपनी चचेरी बहन की नन्हीं सी चूत में धकेल दिया।

नेहा की तो दर्द के कारण बुरी हालत हो गयी- नाआआ आआ आआअ… निकाआआ आआआआ अल्लओ मुझे नहीईइ करना… आआआअ… मर गई मैं!
मैं थोड़ा रुका, ऋतु ने नेहा को फिर से किस किया और उस के चुचे चूसे।
वो थोड़ा नोर्मल हुई तो मैंने अगला झटका दिया; उसका पूरा शरीर अकड़ गया मेरे इस हमले से; मेरा आधा लंड उस की चूत में घुस गया और उस की झिल्ली से जा टकराया।

वो चीख पड़ती अगर ऋतु ने उसके होंठों पर अपने मुंह की टेप न लगाई होती। मैंने लंड पीछे खींचा और दुबारा और तेजी से अन्दर डाल दिया; मेरा लंड उसकी झिल्ली को चीरता हुआ अन्दर जा घुसा।

मैंने अपने लंड पर उसके गर्म खून का रिसाव महसूस किया; मेरी बहन की छोटी सी चूत फट चुकी थी; मैंने सोचा भी नहीं था कि कोई चूत इतनी कसी भी हो सकती है।
मेरी चचेरी बहन मेरे नीचे नंगी पड़ी छटपटा रही थी, मेरी सगी बहन ने उसके दोनों हाथों को पकड़ा हुआ था और उसे किस करे जा रही थी।

मैंने लंड बाहर खींचा और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में उसके कूल्हे भी मेरे लंड के साथ साथ हिलने लगे, अब उसे भी मजा आ रहा था।
नेहा बोली- साआले… जान ही निकाआल दी तूने तो… अब देख क्या रहा है… जोर से चोद मुझे भेन चोद… सालाआआ कुत्ताआआआ… चोद मुझे ईईईए… आआआह्ह्ह्ह… बहन चोद!

नेहा की गरम चूत मेरे लंड को जकड़े हुए थी; मेरे लिए ये सब बर्दाश्त करना अब कठिन हो गया और मैंने अपना वीर्य अपनी छोटी सी कुंवारी बहन की चूत में उड़ेल दिया. वो भी झटके ले कर झड़ने लगी और मैं हांफता हुआ अलग हो गया।

नेहा की चूत में से मेरा रस और खून बाहर आने लगा। नेहा थोड़ी डर गयी पर ऋतु ने उसे समझाया कि ये सब तो एक दिन होना ही था और उसे बाथरूम मे ले गयी साफ़ करने के लिए और बेड से चादर भी उठा ली धोने के लिए।
मैं भी उठा और छेद से देखा कि अन्दर का माहौल भी लगभग बदल चुका है, मेरे पापा आरती चाची की चूत में लंड पेल रहे थे और मेरी माँ अजय चाचू के ऊपर उन के लंड को अन्दर लिए उछल रही थी।
मेरी माँ ने नीचे झुक कर चाचू को चूमा और झड़ने लगी; चाचू ने भी अपने हाथ मेरी माँ की मोटी गांड पर टिका दिए और अपना रस अन्दर छोड़ दिया।

पापा ने भी जब झड़ना शुरू किया तो अपना लंड बाहर निकाला और चाची के मुंह पर धारें मारने लगे, वो नीचे पेशाब वाले गीले फर्श पर लेटी थी, चाची की हालत एक सस्ती रंडी जैसी लग रही थी; शरीर पेशाब से गीला और चेहरा मेरे पापा के रस से।

थोड़ी देर लेटने के बाद मेरी माँ अपनी जगह से उठी और आरती चाची के पास आकर उनके चेहरे पर गिरा मेरे पापा का रस चाटने लगी; बड़ा ही कामुक दृश्य था।
आरती का चेहरा चाटने के साथ साथ मेरी माँ उन्हें चूम भी रही थी।

चाची ने भी मेरी माँ को भी किस करना शुरू कर दिया और उनके उभारों को चूसते हुए नीचे की तरफ जाने लगी और उन की चूत पर पहुँच कर अपनी जीभ अन्दर डाल दी और वहां पड़े अपने पति के रस को खोद खोद कर बाहर निकालने लगी।
माँ ने भी अपना मुंह चाची की चूत पर टिका कर उसे साफ़ करना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में दोनों ने एक दूसरे को अपनी अपनी जीभ से चमका दिया।

फिर मेरे मम्मी पापा अपने रूम में चले गए और चाचू चाची नंगे ही अपने बिस्तर में घुस गए।

ऋतु और नेहा भी वापिस आ चुकी थी, नेहा थोड़ी लड़खड़ा कर चल रही थी, उस की मासूम चूत सूज गयी थी मेरे लंड के प्रहार से। ऋतु ने उसे पेनकिलर दी और नेहा उसे खा कर सो गयी।
मैं भी घुस गया उन दोनों के बीच एक ही पलंग में और रजाई ओढ़ ली.
मजे की बात ये थी कि हम तीनों भाई बहन नंगे थे।

अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ - Main tumhara lund chusna chahti hun

अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ - Main tumhara lund chusna chahti hun , लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

सुबह दोनों को नाश्ते पर देखकर ऐसा नहीं लगा कि दोनों इस तरह की हैं.
दोनों ने नाश्ता किया और स्कूल चली गई. मैं भी कॉलेज गया और सारा दिन दोनों के बारे में सोचता रहा.

शाम को घर पहुंच कर ऋतु का इंतज़ार करने लगा.
वो स्कूल से आते ही सीधे मेरे रूम में घुसी और मुझसे लिपट गई और मुझसे पूछा- तुमने देखा… कैसा लगा… मजा आया या नहीं… बोलो?
मैंने कहा- अरे हाँ, मैंने देखा और बहुत मजा आया.

ऋतु बोली- हाय… मैं तुम्हें क्या बताऊँ पूजा की चूत का रस इतना मीठा था कि बस मजा आ गया.
और फिर मेरे लंड पर हाथ रखकर बोली- पर इसका कोई मुकाबला नहीं है.

फिर ऋतु ने पूछा- क्या तुम्हें देखने में अच्छा लगा?
मैंने कहा- हाँ, मेरा मन तो कर रहा था कि काश मैं तुम्हारे रूम में होता तुम्हारे साथ!
ऋतु ने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा- शायद एक दिन तुम भी वहाँ पर होगे… हम दोनों के साथ!

मैंने पूछा- तो क्या मैं सन्नी और विकास को बुला लूं… तुम दोनों का शो देखने के लिए, तुम्हें कोई आपत्ति तो नहीं है न?
ऋतु- तुम कितना चार्ज करोगे उनसे?
मैं- एक हजार एक बन्दे से यानी टोटल दो हजार रूपए पर शो!
ऋतु- पर अब हम दो लड़कियाँ हैं क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें ज्यादा चार्ज करना चाहिए?
मैं- हाँ, बात तो सही है कितने बोलू उनको… पंद्रह सौ ठीक है क्या?
ऋतु- हाँ ठीक है.
मैं- तो ठीक है, अगला शो कब का रखें, पूजा कब आ सकती है दुबारा तुम्हारे साथ रात को रुकने के लिए?
ऋतु- उसको जो मजे कल रात मिले है.. मैं शर्त लगा कर कह सकती हूँ वो रोज रात मेरे साथ बिताने के लिए तैयार होगी.
और वो हंसने लगी.

ऋतु- मुझे भी एक आईडिया आया है जिससे हम और ज्यादा पैसे कम सकते हैं.
मैं- कैसे?
ऋतु- अगर मैं भी अपनी सहेलियों को अपने रूम में बुलाकर तुम्हें मुठ मारते हुए दिखाऊं तो?
मैं- मुझे मुठ मारते हुए… इसमें कौन रूचि लेगी?
ऋतु- जैसे तुम लड़के लड़कियों को नंगा देखने के लिए मचलते रहते हो वैसे ही हम लड़कियां भी लड़कों के लंड के बारे में सोचती हैं और उत्तेजित होती हैं, अगर कोई लड़की तुम्हें मुठ मारते हुए देखे तो इसमें तुम्हें क्या आपत्ति है.
मैं- लेकिन ये तुम करोगी कैसे?

ऋतु- मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर चार बजे घर ले आऊँगी और तुम उससे पहले ही आ जाते हो. तुम ठीक चार बजे मुठ मारनी चालू कर देना. मैं उसको बोलूंगी कि मेरा भाई रोज इसी समय बजे अपने रूम में मुठ मारता है और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ. मुझे विश्वास है कि वो भी तुम्हें देखने की जिद करेगी, तब मैं उससे पैसों के बारे में बात करके तुम्हें मुठ मारते हुए दिखा दूँगी.

मैं- वाह, मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया… तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो.
ऋतु- आखिर बहन किसकी हूँ.
मैं- और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?
ऋतु- वो ही… एक हजार रूपए… ठीक है ना?
मैं- ठीक है.

ऋतु- और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों हम दोनों को देखने के तीन हजार रूपए अलग से तुम्हें देंगे… तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं.
ऋतु- वैसे एक बात बताऊँ… मुझे काफी उत्तेजना हो रही थी कि कल तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो… काफी मजा आ रहा था.
मैं- मुझे भी काफी मजा आ रहा था. मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है.
ऋतु- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ.
मैं- अभी… मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी.
ऋतु- अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा… अपना लंड निकालो… जल्दी!

मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतु झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई. ऋतु ने मेरी चड्डी एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नर्म हाथों में लेकर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और फिर उसे चूसने लग गई.

ऋतु के होंठ लगते ही उत्तेजित होकर एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली. वो उठी और अपना मुंह साफ़ करते हुए बोली- मुझे तो तुम्हारे वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है… और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसें छोड़ती हुई बोली- आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगे… समझे ना!
मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.

मैंने धीरे से कहा- अगर तुम चाहो तो बाद में मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ.
ऋतु- तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली… मैं रात होने का इन्तजार करुँगी.
मैं- मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा.

फिर वो अपने रूम में चली गई और रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए.

मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था कि पिछले कुछ दिनों से मैं और ऋतु एक दूसरे से कितना खुल गए हैं… लंड-चूत की बातें करते हैं… मुठ मारना… एक दूसरे को नंगा देखना और छूना.. कितना आसान हो गया है… मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया. मुझे ऋतु का इन्तजार था.

मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गई और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली- वाह.. तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ.

मैं- पर मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ!
ऋतु- कोई बात नहीं तुम मेरी चूत चूसो और मैं तुम्हारा लंड… हम 69 की पोजीशन ले लेते हैं.

ऋतु ने जल्दी से अपना गाउन खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मम्मे और तने हुए निप्पल देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे और मैंने नोट किया कि आज उसकी चूत एकदम साफ़ और चिकनी थी. शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया.

ऋतु झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगें उठा कर घुमाते हुए बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गई.
उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गई. उसकी चूत जल रही थी… एकदम गर्म, लाल, गीली, रस छोड़ती हुई…

मैं तो अपने काम में लग गया. उसकी चूत के लिप्स को अपनी उंगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखी तो मुझे उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…
मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियाँ साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता… मैं लगा रहा… लगा रहा… साथ ही साथ मैं अपनी एक उंगली से उसकी क्लिट भी रगड़ रहा था.

मेरे लंड का भी बुरा हाल था. ऋतु उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो… अन्दर तक ले जाती, जीभ से चारों तरफ चाटती और फिर बाहर निकालते हुए हल्के से दांतों का भी इस्तेमाल करती… वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.

मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चूसना शुरू कर दिया. वो तो बिफर ही गई मेरे इस हमले से… और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी.

मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और ऋतु ने जैसे ही मेरे टट्टों को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया… मैं झड़ गया और वो मेरा पूरा माल पी गई.

फिर हम दोनों उठे और एक दूसरे की तरफ देखा. हम दोनो के चेहरे गीले थे और हम ये देखकर हंसने लगे.

ऋतु- तुमने तो मुझे अपने वीर्य की लत लगा दी है… कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में!
मैं- मैं भी तुम्हारे मीठे रस का शौकीन हो चुका हूँ… जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.

मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था वो मेरे साथ लेट गई. उसके मोटे चूचे मेरे सीने से लग कर दब गए. उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगा. उसकी गर्म साँसें मेरे कानों पर पड़ रही थी. ऋतु की एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतु की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.

ऋतु- तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है… मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है…
और फिर उसने जो किया, मैं स्तब्ध रह गया.

ऋतु उठी और अपनी दोनों टाँगें फैला कर मेरे ऊपर आ गई. उसकी दोनों बाहें मेरे सर के दोनों तरफ थी और ऋतु के दोनों मोटे मोटे मम्मे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे और मेरी बहन की रसीली चूत मेरे खड़े हुए लंड को छू रही थी.

फिर ऋतु थोड़ा झुकी और मेरे होंठों को चूसने लगी. उसके मुंह में से मेरे वीर्य की गंध आ रही थी.
मैंने भी उसके नर्म होंठों को चूसना और चाटना शुरू कर दिया. फिर जब उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली तो मैं उसकी मचलती जीभ को पकड़ने की नाकाम कोशिश करते हुए जोर जोर से उसे चूसने लगा.

मेरे हाथ अपने आप उसकी छाती पर जा चिपके और मेरी उंगलियाँ उसके निप्पल को सहलाने लगी. लटकने की वजह से उसके मम्मे काफी बड़े लग रहे थे और मेरी हथेली में भी नहीं आ रहे थे.
ऋतु धीरे धीरे अपनी चूत की बाहरी दीवारों पर मेरे खड़े हुए लंड को रगड़ रही थी और उसकी चूत की गर्म हवाओं से मेरा लंड झुलस रहा था.
मैंने भी अपनी जीभ अब उसके मुंह में डाल दी. वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे मेरा लंड हो… पूरी तरह से वो मुझे पीना चाहती थी.

दूसरी तरफ मेरा लंड अब उसकी चूत की दरार में फंस गया था. ऋतु ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ नशीली आँखों से देखा और मुझसे कहा- आई लव यू… रोहण!

मैं कुछ समझ पाता इससे पहले उसने अपनी गांड का दबाव मेरे ऊपर डाल दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समाता चला गया.
ऋतु के मुंह से एक कराह निकल गई ‘आआआईईई… .म्म्मम्म्म्म… माआआअर.. ग्ईईईईई.. आआआअहहह!’

मैं तो भौचक्का रह गया. मुझे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी पर जब मैंने ऋतु का तृप्ति भरा चेहरा देखा तब उसकी बंद आँखें और हलकी मुस्कराहट से भरा चेहरा देखा तो मुझे एक सुखद अहसास हुआ और मैं भी पूरे जोश के साथ अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा.
ऋतु ने अपनी बाहों से मेरी गर्दन के चारों तरफ फंदा बना डाला जिसकी वजह से उसके मम्मे मेरे चेहरे पर रगड़ खा रहे थे.

मैंने अपने हाथ उसकी चौड़ी गांड पर रखे और उन्हें दबाते हुए नीचे से धक्के मारने लगा. उसके होंठ मेरे कान के बिल्कुल पास थे और वो मीठे दर्द से हल्के हल्के चिल्ला रही थी ‘आआआ आआअहहह… रोहण… आई लव यू… फ़क मी… आई लव यौर बिग… कॉक… तुम्हारा मोटा लंड… उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ… मेरी चूत में अन्दर तक डाआआअलो… और जोर से… और जोर से… आआआअह्ह्ह… मेरी चूत तुम्हारी है… मारो मेरी चूत… चोदो मुझे..’

ऋतु अब गन्दी गन्दी गालियाँ भी देने लगी थी ‘बहनचोद… चोद न… आआआअह… चोद अपनी कुँवारी… कमसिन… बहन को… अपने लम्बे लंड से… पूरा ले लूंगी… आआअईईई… हरामखोर… चोद मुझे… फाड़ दे अपनी बहन की चूऊऊत… आआआह…..माआआ आआआऐन तो गईई ईईई… आआअह…’

थोड़ी देर की चुदाई के बाद वो झड़ने लगी. मैंने अपने लंड पर उसका लावा महसूस किया. वो गहरी गहरी साँसें लेकर ढीली पड़ गई… फिर मैंने उसे बेड पर धक्का दिया और उसे घोड़ी बना कर उसकी चूत में पीछे से अपना लंड डाल दिया.

ऋतु की फैली हुई गांड काफी दिलकश लग रही थी. मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ा और अपनी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी. उसके मुंह से ‘ओह्ह्हह्ह… ओफ्फ फ्फ्फ… आआहह…’ की आवाजें दोबारा आने लगी. मैं भी अब झड़ने के करीब पहुँच गया.

मैंने ऋतु से कहा- ऋतु मैं आया…
और अपना लण्ड उसकी चूत से निकालकर अपने हाथों में ले लिया.
वो जल्दी से पलटी और मेरे लंड पर अपना मुंह लगा दिया… मेरे लिए ये काफी था. मैंने उसका मुंह उसकी मनपसंद मिठाई से भर दिया और वो सारी रसमलाई खा गई.

फिर ऋतु उठी और ‘आई लव यू’ कहकर मेरे सीने से लग गई. मैं भी उसके कोमल से शरीर को सहलाते हुए ‘आई लव यू टू… आई लव यू टू…’ कहने लगा.

हाँफते हुए ऋतु ने अपनी नजर मुझसे मिलाई और मुस्कुराकर बोली- मुझे तुम्हारा लंड पसंद आया… ये अन्दर जाकर तो बहुत ही मजे देता है. डिल्डो को अन्दर ले लेकर मैं थक गई थी. ये कितना मुलायम, गर्म, और मजेदार है.
मैंने कहा- तुम्हारी चूत भी बहुत मजेदार है. मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है. कितना आनन्द आ रहा था तुम्हारी रेशम जैसी चूत में अपना लंड डालने में. मैंने कभी इस आनन्द की तो कल्पना भी नहीं की थी.

ऋतु ने बेड पर से उठते हुए कहा- अब तुम कल मुझे सुबह उठाने के लिए आ जाना मेरे रूम में!
मैं- उठाने के लिए… पर किसलिए?
ऋतु- क्योंकि मुझे और मजे चाहिए इसलिए… कल से रोज सुबह तुम मेरी चूत चाटोगे और फिर अपने इस खूबसूरत लंड से मेरी चूत मारोगे… और अब तो हम बिज़नस पार्टनर हैं… हैं ना!
मैंने खुश होते हुए कहा- हाँ हाँ… बिल्कुल हैं.

ऋतु- ठीक है फिर… गुड नाईट…

और उसने झुक कर मेरे लंड को चूम लिया और बाहर निकल गई.

अगले दिन सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गई और मैंने जब छेद से ऋतु के रूम में देखा तो वहाँ अँधेरा था. मैं दबे पांव उसके रूम में गया और उसके बेड के किनारे जाकर खड़ा हो गया. थोड़ी देर बाद अँधेरे में अपनी आँखें जमाने के बाद मैंने देखा कि ऋतु अपनी चादर से बाहर निकल कर सो रही थी.
मेरी बहन एकदम नंगी थी, उसकी दोनों टांगें फैली हुई थी जिसकी वजह से मेरी बहन की चूत अलग ही चमक रही थी.
मेरा लंड यह नजारा देख कर फुफकारने लगा. मैंने फुर्ती में अपने कपड़े उतारे और उसकी खुली हुई टांगों के बीच कूद गया.

मैंने अपना मुंह जैसे ही उसकी चूत पर टिकाया, उसके शरीर में एक सिहरन सी हुई और उसकी नींद खुल गई.
जब उसने मुझे अपनी चूत चाटते हुए देखा तो वो सब समझ गई और उसके मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी. ऋतु सिसकारती हुई बोली- म्म्म्म म्म्म… आआ आआआह आआ… गुड मोर्निंग.. रोहन!

मैंने उसकी रसीली चूत से अपना मुंह ऊपर उठाया और बोला- गुड मोर्निंग!

हमेशा की तरह उसकी चूत में से ढेर सारा रस बहने लगा और मैं चटखारे लेकर उसे पीने लगा. ऋतु ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे ऊपर की तरफ खींचने लगी. मैं ऊपर खिसकते हुए उसकी नाभि, पेट और फिर मोटे-मोटे चूचों पर किस करता चला गया और अंत में उसके होठों ने मुझे ऐसे जकड़ा कि मेरे मुंह से भी आह निकल गई.

मैंने अपने दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ लिया और चूम चूमकर उसे गीला कर दिया. उसने अपना हाथ हम दोनों के बीच डाला और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया. बाकी काम मैं जानता था और एक तेज धक्के से मैंने अपना सात इंच लम्बा लंड उसकी गर्म चूत में डाल दिया. उसकी आँखें उबल कर बाहर आने को होने लगी पर फिर कुछ झटकों के बाद वही आँखें मदहोश होने लगी और उसके मुंह से तरह तरह की आवाजें आने लगी- आअअ अअहह… चोदो… मुझए… मुझे तुम्हारा लंड रोज चाहिए…. आअहहह… जोर से और जोऊर से!

मैंने अपना मुंह ऋतु के मुंह से जोड़ दिया और उसकी जीभ चूसने लगा. कुछ देर बाद मैं झड़ने के करीब था. मेरे मुंह से एक भारी हुंकार निकली, ऋतु समझ गई और उसने हमारी किस तोड़ते हुए मेरा लंड बाहर निकाला और बेड के किनारे पर लेट कर मेरा गीला लंड अपने मुंह में ले लिया.
मैं अब तेजी से अपना लंड उसके मुंह में आगे पीछे करने लगा और अब मैं उसका मुंह चोद रहा था.

वो भी मेरे लंड को अन्दर तक ले जा रही थी जो उसके गले के अंत तक जाकर उसकी दीवारों से टकरा रहा था. मैंने जल्दी ही झड़ना शुरू कर दिया और अपने गर्म वीर्य की धारें ऋतु के गले में छोड़ने लगा.
वो मेरे वीर्य की हर बूँद चटखारे लेकर पी गई.

फिर ऋतु ने मुझे धक्का दिया और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गई. उसकी चूत ने मेरे होंठों को ढक लिया. मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली और उसे चूसना शुरू कर दिया और जल्दी ही उसका रस बहकर मेरे मुंह में आने लगा और वो हल्के से चिल्ला कर झड़ने लगी.

झड़ने के बाद ऋतु उठी और फिर हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे की किस ली. फिर उसने किस तोड़ी और बोली- अब तुम जल्दी से अपने रूम में जाओ. इससे पहले कि मम्मी पापा उठ जाएँ… और कॉलेज भी तो जाना है ना तुम्हें, मुझे भी स्कूल के लिए तैयार होना है.
मैं- ओह्ह मैं तो भूल ही गया था… मुझे तो बस आज रात का इन्तजार है.
ऋतु- मुझे भी!

फिर मैंने अपने कपड़े पहने और रूम में जाकर तैयार हुआ.

नाश्ता करते हुए ऋतु ने सबको बता दिया कि आज रात उसकी फ्रेंड पूजा रात को यहीं रुकेगी.

कॉलेज जाकर मेरा मन सारा दिन कहीं नहीं लगा, मुझे तो बस शाम का इन्तजार था.
मैं कॉलेज से जल्दी घर आ गया. घड़ी देखी तो तीन बजने वाले थे और ऋतु साढ़े तीन बजे तक स्कूल से आती थी. मैं अपने रूम में जाकर उसका इन्तजार करने लगा.

कुछ देर बाद ऋतु और पूजा घर आ गई. मैंने छेद से देखा तो दोनों अपने रूम में बैठकर बातें कर रही थी. वो पूजा को बता रही थी कि कैसे वो रोज मुझे छेद के जरिये मुठ मारते हुए देखती है और अगर वो भी देखना चाहती है तो उसे एक हजार रूपए देने होंगे.

पैसों का नाम सुनकर पूजा ऋतु को हैरानी से देखने लगी.
पर जब ऋतु बोली- अगर तुम्हें लगे कि यह ‘शो’ अच्छा नहीं हैं तो तुम पैसे मत देना.
कुछ सोचने के बाद वो मान गई क्योंकि उसने भी आज तक कोई असली लंड नहीं देखा था.

मैंने घड़ी की तरफ देखा तो चार बजने वाले थे. मैं अपने बेड पर आकर बैठ गया और संकुचाते हुए अपनी जींस और चड्डी को उतार दिया और मुठ मारना शुरू किया.

दूसरे रूम में से जब ऋतु ने देखा कि मैंने अपनी जींस उतार दी है और मुठ मारना चालू कर दिया है तो उसने पूजा को बुलाया और उसे छेद में से देखने को कहा.
छेद से झाँकने के बाद पूजा ने धीरे से कहा- वाव… ऋतु, तुम्हारे भाई का लंड तो काफी बड़ा है और सुन्दर भी!
ऋतु- हाँ शायद… क्योंकि मैंने कभी और किसी का लंड तो देखा नहीं है… ले दे के सिर्फ अपना डिल्डो ही है जिससे हम भाई के लंड को तौल सकते हैं.
और दोनों हंसने लगी.

मुझे इस बात का आभास हो गया था कि छेद से मेरी बहन और और उसकी सहेली बारी-बारी से मुझे देख रही हैं.

पूजा ने गहरी सांस लेते हुए कहा- ये सच में डिल्डो के मुकाबले कुछ ज्यादा ही है और इसे देखने में भी कितना मजा आ रहा है. लंड के ऊपर की नसें कैसे चमक रही हैं. सच में यह बहुत सुंदर है.

मैं भी अपने रूम में बैठा उत्तेजित होता जा रहा था यह सोच कर कि पूजा और ऋतु मुझे दूसरे रूम से देख रही हैं. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जब मैं झड़ने वाला था तो थोड़ा सा घूम कर अलमारी की तरफ हो गया और खड़े होकर अपनी धारें मारनी शुरू कर दी.

यह देखकर दूसरे रूम में पूजा आश्चर्यचकित रह गई और वो बोली- हाय… वो तो खड़ा हो गया है और अब उसका लंड मेरे बिल्कुल सामने है… वाव… अब उसके लंड में से रस निकल रहा है… कितना सुन्दर दृश्य है… मजा आ गया.

मैंने गहरी साँसें लेते हुए झड़ना बंद किया और बेड पर लेट गया और सोचने लगा ‘काश पूजा मेरे सामने होती तो मैं उसके चेहरे के भाव देख सकता!’

दूसरे रूम में पूजा ने उछलते हुए ऋतु को गले से लगा लिया और उसके होंठों को चूम लिया और बोली- मैंने इससे ज्यादा सुन्दर चीज आज तक नहीं देखी, मेरी तो चूत से पानी निकलने लगा है, निप्पल खड़े हो गए हैं… ये देख!
और उसने ऋतु का एक हाथ अपनी चूची पर और दूसरा सीधे अपनी चूत पर टिका दिया।

ऋतु दोनों चीजें अपने हाथ में लेकर दबाने लगी और पूजा से पूछा- मतलब तुम मानती हो न कि यह शो एक हजार रूपए का था.
पूजा कुछ नहीं बोली और सीधे अपने पर्स में से एक हजार रूपए निकाल कर ऋतु को दे दिए और बोली- बिल्कुल था… ये लो!
और आगे बोली- काश! ये सब मुझे बिल्कुल मेरे सामने देखने को मिल जाए तो मजा ही आ जाए.

मैं अपनी बहन के साथ सेक्स दो बार कर चुका था. वो अपनी सहेली को लाई थी घर मुझे नंगा मुठ मारते दिखाने के लिए.
ऋतु- तो चलो चल कर रोहन से ही पूछ लेती हैं… देखें वो क्या कहता है?
और फिर हँसने लगी.

पूजा- पागल हो गई है क्या… मैं तो सिर्फ बात कर रही हूँ. इसका मतलब यह नहीं कि मैं उससे जाकर बोलूँ कि वो मेरे सामने मुठ मार सकता है या नहीं.
ऋतु- तुम मत जाओ, मैं जाकर उसको बोलती हूँ तुम्हारी तरफ से.. अगर तुम चाहो तो?
पूजा- वो कभी भी नहीं तैयार होगा इस पागलपन के लिए… ये सिर्फ मेरे मन के विचार हैं और कुछ नहीं इन्हें ज्यादा गंभीरता से मत लो.

ऋतु- अरे कोशिश तो करते हैं ना… वो या तो हाँ करेगा या ना… और वो ये बात मोम डैड को भी नहीं बता पायेगा क्योंकि उसे ये बातें उन्हें बताने में बड़ी शर्म आएगी… मैं तो यह सोच रही हूँ कि उसको क्या देना पड़ेगा ये सब करवाने के लिए?
पूजा- क्या मतलब?
ऋतु- मतलब कि वो शायद कर सकता है अगर बदले में हम उसे कुछ ऐसा दें जिसकी उसे जरूरत है.
पूजा- जैसे कि?
ऋतु- मुझे नहीं पता…कुछ भी हो सकता है. ये तो सिर्फ मेरा आईडिया है. चलो एक काम करते हैं, मैं जाकर उससे पूछती हूँ कि क्या वो हमारे सामने मुठ मारने को तैयार है और उसके बदले में क्या चाहिए.
पूजा- तुझ में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि अपने सगे भाई से इस तरह की बात पूछ सके और अगर पूछती भी है तो वो तैयार नहीं होगा.

ऋतु- अगर ऐसी बात है तो मैं अभी जाकर पूछती हूँ!
और यह बोल कर वो दरवाजे की तरफ चल पड़ी.
जाते जाते उसने पूजा से कहा- अगर तुम भी आना चाहो तो आ सकती हो, या फिर छेद में से देख सकती हो.
पूजा- ना बाबा ना..मुझे तो बड़ी शर्म आएगी इस सबमें… तुम ही जाओ.

ऋतु ने आकर मेरे रूम का दरवाजा खड़काया और अन्दर आ गई. मैंने बड़ी हैरानी से उसे देखा.
वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे मुंह पर उंगली रख कर मुझे चुप रहने के लिए कहा और फुसफुसा कर बात करने लगी.

दूसरे रूम से पूजा बड़ी बेसब्री से ये सब देख रही थी. उसने देखा कि ऋतु ने मुझ से कुछ कहा और कुछ मिनट बात करने के बाद ऋतु का भाई झटके से अलग हुआ और अपने हाथ हवा में उठाकर मना करने के स्टाइल में कुछ बोलने लगा.

पूजा सांस रोके ये सब देख रही थी फिर ऋतु दुबारा अपने भाई के पास गई और उसे कुछ और बोला. फिर भाई ने भी आगे से कुछ कहा और ऋतु सोचने के अंदाज में सर खुजाने लगी और फिर कुछ और बातें करने के बाद दोनों एक दूसरे के गले लग गए और ऋतु बाहर निकल गई.

अन्दर आते ही पूजा ने ऋतु से बड़ी अधीरता से पूछा- तुमने उससे क्या कहा? कैसे पूछा?
ऋतु- वही जो हमने तय किया था.
मैंने पूछा- क्या वो हमारे सामने हस्तमैथुन कर सकता है क्योंकि हमने कभी भी असली में ऐसा नहीं देखा.
पूजा- और उसने क्या कहा?

ऋतु- वो तो यह सुनकर काफी भड़क गया था.
पूजा- देखा… मैंने कहा था ना!
ऋतु- पर जब मैंने उससे कहा कि हम इसके लिए उसे कुछ पैसे देंगे या फिर कुछ और भी जो वो चाहे तो बात आगे बढ़ी.

पूजा ने उत्तेजित होकर पूछा- तो उसने क्या कहा?
ऋतु- वो तैयार है और वो इसके लिए दो हज़ार रूपए मांग रहा है.
पूजा ने आश्चर्य के भाव दिए और बोली- क्या सच में… वो सब हमारे सामने करने को तैयार है और उसे सिर्फ रूपए चाहियें?
ऋतु ने धीरे से कहा- हाँ… और साथ ही साथ वो चाहता है कि हमें भी उसके सामने नंगी होना पड़ेगा.

पूजा ने कटाक्ष भरे स्वर में कहा- वाह बहुत बढ़िया… वो हमें नंगी देखना चाहता है, तभी हस्तमैथुन करेगा.
ऋतु ने उसे उकसाते हुए कहा- पर जरा सोचो… उसका लम्बा और खूबसूरत लंड तुम्हारी नाक से सिर्फ कुछ ही दूरी पर होगा.
पूजा कुछ सोचते हुए बोली- चलो वो तो ठीक है, पर क्या तुम अपने भाई के सामने नंगी हो सकती हो?
ऋतु- उसे अपने सामने मुठ मारता हुए देखने के लिए तो मैं ये सब कर ही सकती हूँ… ये कोई बड़ी बात नहीं है और जब हम दोनों करेंगे तो मुझे इसमें ज्यादा शर्म भी नहीं आएगी.

पूजा- हम दोनों से तुम्हारा क्या मतलब है… मैं तो अभी तक इसके लिए तैयार ही नहीं हुई.
ऋतु ने अपनी आवाज में थोड़ी कठोरता लाते हुए कहा- तुम मुझे ये बताओ तुम तैयार हो या नहीं… ये तुम्हारा लास्ट चांस है?
पूजा- ठीक है… जब तुम्हें अपने भाई के सामने नंगी होने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या… वो ये सब कब करेगा?
ऋतु- शायद आज रात को सबके सोने के बाद!

पूजा- मुझे तो बड़ी घबराहट हो रही है… क्या सच में तुम ये सब करना चाहती हो?
ऋतु- अरे हाँ… ये एक नया एडवेंचर होगा… मजा आएगा… और फिर हम बाद में… समझ गई ना?
पूजा- ठीक है… पर सच में तुम बड़ी पागल हो.
ऋतु- पागलपन करने में भी कभी-कभी बड़ा मजा आता है… चलो अब अपना होमवर्क कर लेती हैं, फिर रात को तो कुछ और नहीं कर पायेंगी.

रात को जब सभी डिनर कर रहे थे तो ऋतु ने सारी बातें मेरे कान में बता दी. बीच-बीच में जब मैं पूजा की तरफ देखता था तो वो शरमा कर अपना चेहरा नीचे कर लेती थी.
जब खाना ख़त्म हुआ तो ऋतु और पूजा अपने रूम में चली गई और आखिरकार सारे घर में शांति छा गई. ऋतु और पूजा अपने रूम में गाउन पहनकर मेरा इंतजार कर रही थी.

पूजा ने सोचा कि शायद मैं नहीं आऊँगा और कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था कि उसे दरवाजे पर हल्की सी खटखट सुनाई दी. आवाज सुनते ही ऋतु उछल कर दरवाजे के पास गई और मुझे अन्दर खींच लिया.
मुझे खींचकर वो बेड के पास तक ले गई और वहाँ बैठी पूजा के पास बैठ गई.
मैं उन दोनों के सामने नर्वस सा खड़ा हुआ था.

ऋतु ने पूछा- अरे भाई, किस बात का वेट कर रहे हो… तुम ये करना भी चाहते हो या नहीं?
मैं- मुझे लगा तुम मुझे पहले पैसे दोगी.

ऋतु पूजा की तरफ देखकर- बिल्कुल देंगी, हमने बोला है तो जरूर देंगी.
मैं- तुमने बोला था कि तुम मुझे 2000 रूपए दोगी और नंगी भी होओगी दोनों?
ऋतु- क्या तब तुम हस्तमैथुन करना शुरू करोगे?
मैं संकुचाते हुए- ह्म्म्म हाँ!
ऋतु- ठीक है…

और पूजा की तरफ देखकर उसे कुछ इशारा किया, पूजा ने झट से अपने पर्स में से 2000 रूपए निकाल कर मुझे दिए पर मुझे कुछ न करते देखकर वो समझ गई कि आगे क्या करना है.
ऋतु- पूजा… चलो एक साथ नंगी होती हैं.

फिर पूजा उठी और दूसरी तरफ मुंह करके अपना गाउन खोल कर नीचे गिरा दिया, ऋतु ने भी उसके साथ-साथ वही किया, दोनों की गांड मेरी तरफ थी. मैं तो वो दृश्य देखकर पागल ही हो गया. एक गोरी और दूसरी सांवली… एकदम ताजा माल… भरी हुई जांघें और सुडौल पिंडलियाँ…

फिर दोनों घूम कर मेरी तरफ मुंह करके बेड के किनारे पर बैठ गई. पूजा के चुचे देखकर मेरे मुंह से ‘आह’ निकल गई और मैं अपने लंड को अपने पायजामे के ऊपर से ही मसलने लगा.

यह देखकर ऋतु ने मुझे घूर कर गुस्से के लहजे में देखा और अगले ही पल हंसकर मुझे आँख मार दी.
पर पूजा ये सब नहीं देख पाई… वो तो अपनी नजरें भी नहीं उठा रही थी.

मैंने देखा कि उसके चुचे ऋतु से काफी बड़े हैं. थोड़े लटके हुए… शायद ज्यादा भार की वजह से… और उसके लाल निप्पल इतने बड़े थे कि शायद मेरे पैर की उंगली के बराबर… पेट बिल्कुल गोल मटोल और सुडौल था.

मैं खड़ा हो गया और अब मैं उसकी चूत भी देख पा रहा था. वो बिल्कुल काली थी, बालों से ढकी हुई और बीच में जो चीरा था, उसमें से गुलाबी पंखुड़ियाँ अपनी बाहें फैला कर जैसे मुझे ही बुला रही थी.

ब्रेकअप के बाद मिली मस्त चूत - Breakup Ke Baad Mili Mast Choot

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आकांक्षा से मैं बहुत ज्यादा प्यार किया करता था लेकिन वह कभी भी मेरी बात को समझ ही नहीं पाई और आकांक्षा ने मुझसे अपना पूरा रिश्ता तोड़ लिया। हम दोनों ने अपने रिश्ते को खत्म कर लिया था लेकिन अभी भी आकांक्षा की यादें मेरे दिल में ताजा है मैं हमेशा से ही आकांक्षा की बहुत फिक्र करता था लेकिन आकांक्षा को कभी मेरा प्यार दिखाई नहीं दिया और वह मुझसे दूर चली गई।

हम दोनों साथ में एक वर्ष रहे एक वर्ष हम लोगों ने साथ में बिताया जब आकांक्षा ने मुझसे डिवोर्स ले लिया तो उसके बाद वह अपने माता पिता के साथ रहने लगी। उसने मुझसे अपने सारे रिश्ते खत्म कर लिए उसके बावजूद भी मैंने आकांशा से कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन आकांक्षा अब मुझसे कोई भी संबंध नहीं रखना चाहती थी। एक दिन मुझे आकांक्षा की बहन मिली तो वह मुझे कहने लगी आकांशा दीदी ने अपने लिए कोई लड़का देख लिया है अब आप अपने दिल से दीदी का ख्याल निकाल दो।

मैं मन ही मन सोचने लगा कि आखिर मैंने ऐसी क्या गलती कर दी की आकांक्षा ने मुझे इतनी बड़ी सजा दी मेरी गलती सिर्फ इतनी थी कि मैं आकांशा को समय नहीं दे पा रहा था मुझे इस बात का एहसास था लेकिन यह सब मैं आकांक्षा के लिए ही तो कर रहा था।

आकांक्षा के भी कुछ बड़े सपने थे और उन्हीं सपनों को पूरा करने के लिए उसने मुझसे अलग होने का फैसला कर लिया अब वह मुझसे अलग हो चुकी थी और हम दोनों के बीच कोई भी संबंध नहीं थे। काफी समय बाद मैं आकांक्षा से मिला मैंने कभी भी आकांक्षा के बारे में कुछ गलत नहीं सोचा था लेकिन स्थिति ही कुछ ऐसी बन गई की आकांक्षा को मेरा साथ छोड़ना पड़ा और मैं अकेला हो चुका था।

इसी बीच मेरे साथ ना जाने क्या-क्या दुर्घटना घटित हुई मेरे पिताजी का देहांत हो गया और जब उनका देहांत हुआ तो मैं पूरी तरीके से टूट चुका था लेकिन मुझे काम तो करना ही था क्योंकि मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। मैं अपने काम पर तो लगा हुआ था परंतु मैं यह बात नहीं समझ पा रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए जिससे कि मैं अपने अंदर के दुखों को दूर कर सकूं।

मैं अंदर ही अंदर से बहुत ज्यादा परेशान था लेकिन मैं किसी को भी यह बात नहीं बता पा रहा था। एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाले सागर ने मुझे कहा कि निखिल तुम कुछ ज्यादा ही परेशान नजर आते हो अभी कौन सा तुम्हारी इतनी उम्र हो गई है।

मैंने सागर को कहा देखो दोस्त तुम्हें तो मालूम है ना कि आकांक्षा ने मेरा साथ छोड़ दिया है और जब से वह मुझे छोड़कर गई है तब से मैं अकेला हो चुका हूं और ऊपर से पिताजी की मृत्यु भी हो गई मेरे ऊपर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो लेकिन मैं क्या करूं तुम ही बताओ। सागर मुझे कहने लगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा यदि तुम ऐसे ही सोचते रहोगे तो तुम्हें और भी ज्यादा दुख होगा और तुम इन समस्याओं से बाहर भी नहीं निकल पाओगे। मुझे लगा कि सागर बिल्कुल ठीक कह रहा है और मुझे सागर से बात कर के अच्छा लग रहा था मुझे ऐसा लगा जैसे कि सागर भी मुझे समझ सकता है।

जब भी मुझे कोई ऐसी परेशानी होती तो मैं सागर से बात किया करता सागर को मैं काफी वर्षो से जानता हूं। एक दिन मेरी सारी परेशानी का हल मुझे मिल गया जब मेरी मुलाकात मीनल से हुई, मीनल से मेरी पहली मुलाकात थी मीनल से मुझे सागर ने मिलवाया था और वह सागर की बहुत अच्छी दोस्त थी। मुझे मीनल के रूप में एक अच्छी दोस्त मिल चुकी थी और हम दोनों ही अब एक दूसरे के साथ अच्छे से बात किया करते और एक दूसरे के साथ हम लोग समय बिताया करते हैं।

हम दोनों को एक दूसरे के साथ समय बिताना बड़ा अच्छा लगता है और मैं मीनल के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगा था। सागर को भी यह बात पता चल चुकी थी तो सागर ने मुझसे कहा की तुम मीनल को क्यों अपने दिल की बात नहीं बता देते।

मैंने सागर से कहा हां तुम कह तो ठीक रहे हो लेकिन मुझे इस बात की चिंता है कि कहीं मीनल को मेरे पुराने रिश्ते के बारे में पता चला तो कहीं वह मना ना कर दे। सागर कहने लगा नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें मीनल को बता देना चाहिए यदि तुम मीनल को बताओगे तो उसका भरोसा तुम पर और भी ज्यादा बढ़ेगा तुम्हे उससे आकांक्षा के बारे में बात करनी चाहिए।

मैंने भी सोचा सागर बिल्कुल ठीक कह रहा है आखिरकार झूठ की बुनियाद पर कितने दिन तक बात टिक पाती। मैंने मीनल से आकांक्षा के बारे में बात करने का फैसला कर लिया था जब हम दोनों मिले तो मैंने मीनल से कहा मीनल मुझे तुम्हें कुछ बताना है।

मीनल कहने लगी हां बताओ ना तो मैंने मीनल को अपने और आकांक्षा के रिश्ते के बारे में बताया मिनल कहने लगी तुमने मुझे यह सब पहले क्यों नहीं बताया। मैंने मीनल से कहा शायद मैं डर रहा था लेकिन मीनल ने हम दोनों के रिश्ते को अपना लिया था और हम दोनों अब एक हो चुके थे मैं अपनी पुरानी जिंदगी को धीरे धीरे भुलाने लगा था और मीनल भी मेरा साथ देने लगी थी।

उसी दौरान मीनल की जॉब बेंगलुरु में लग गई जब मीनल की जॉब बेंगलुरु में लगी तो वह जॉब करने के लिए बेंगलुरु चली गई। मीनल अब बेंगलुरु जा चुकी थी और हम दोनों की फोन पर ही बात होती थी मैं चाहता था कि मैं भी बेंगलुरू चले जाऊं और अपनी बूढ़ी मां को भी अपने साथ बेंगलुरु ही लेकर चला जाऊं। मैं मीनल से जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था हम दोनों फोन पर घंटों बात किया करते लेकिन तब भी दूरियां कम कहां हो पाती आखिरकार मैंने भी बेंगलुरु की कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए ट्राई किया और वहां पर मेरा सिलेक्शन भी हो गया।

मैंने मीनल को कुछ भी नहीं बताया था मैं चाहता था कि मैं मीनल को सरप्राइज़ दूँ और मेरी जब उससे मुलाकात हुई तो वह चौक गई उसने मुझे बेंगलुरु में देखा तो वह कहने लगी तुम यहां बेंगलुरु में क्या कर रहे हो। मैंने मीनल से कहा बस अब यह समझो कि मैं भी यहीं आ गया हूं।

मीनल खुश हो गई और कहने लगी चलो तुमने यह हो तो बहुत अच्छा फैसला किया मैंने मीनल को पूरी बात बताई और उसे कहा कि मैं भी अब बेंगलुरु में ही जॉब करने लगा हूं। मीनल कहने लगी इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए कुछ हो ही नहीं सकती मीनल ने मुझे पूरी तरीके से स्वीकार कर लिया था और हम दोनों ही एक दूसरे को बड़े अच्छे से समझते थे।

यह सब सागर की वजह से ही संभव हो पाया था यदि सागर से मैं नहीं मिल पाता तो मैं और मीनल कभी मिल ही नहीं पाते। हम दोनों अब एक हो चुके थे और मैंने मीनल को जब अपनी मां से मिलाया तो वह भी मीनल से मिलकर बहुत खुश हुई। मीनल को उन्होंने अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था और मीनल भी बड़ी खुश थी उसकी खुशी का कारण सिर्फ और सिर्फ मै था।

हम दोनों एक दूसरे को समय देते और मुझे भी बहुत अच्छा लगता क्योंकि मैं मीनल के साथ अच्छा समय बिता पा रहा था मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं बेंगलुरु नौकरी करने के लिए आ जाऊंगा और हम दोनों अपने ऑफिस के बाद हमेशा मिला करते थे। मीनल मुझसे मिलने के लिए घर पर अक्सर आया करती थी और मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।

मीनल और मेरे बीच में प्यार बहुत ज्यादा था हम दोनों ही एक दूसरे को बहुत चाहते थे तभी एक दिन जब मीनल मुझसे बैठ कर बात कर रही थी तो उस दिन ना जाने मुझे मीनल को देखकर ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे मैंने मीनल के होठों को चूमना शुरू किया तो उसकी उत्तेजित जागने लगी।

मुझे अच्छा लगने लगा हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को महसूस करने लगे मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैं मीनल के होंठो को महसूस कर रहा था। मीनल मेरी गर्मी को भी महसूस करने लगी उसके स्तनों को दबाने में मुझे बड़ा अच्छा लगता मैने उसके स्तनों से खून निकाल दिया था।

वह मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कुछ भी तो नहीं लेकिन जैसे ही मैंने मीनल की योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। उसकी योनि से पानी बाहर निकल रहा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने भी मीनल की चूत को अपनी उंगली से को बहुत देर तक सहलाया।

जैसे ही मैंने अपने लंड को मीनल की योनि के अंदर डाला तो वह चिल्ला ऊठी और उसके मुंह से चीख निकली और उसी के साथ वह मुझे कहने लगी मुझे दर्द हो रहा है। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा उसकी योनि से खून निकलने लगा था और उसकी योनि से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था लेकिन मुझको तो उसे धक्के देने में भी मजा आता। मैं

उसे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था मेरे अंदर का जोश और भी ज्यादा बढ़ने लगा था और मीनल भी मुझे कहने लगी मुझे वाकई में मजा आ रहा है। मैंने मीनल से कहा देखो मीनल अपने पैर चौडे कर लो तुम्हारी चूत मे भी मजा आने लगेगा। मीनल ने अपने पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे कहने लगे तुम मुझे और तेजी से धक्के मारो।

मैंने उसे ओर से भी ज्यादा तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। मैं उसे तेज धक्के मार रहा था वह भी उत्तेजित होकर अपने मुंह से मादक आवाज लेने लगी उसकी सिसकियो से मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाती और मुझे बड़ा मजा आता। मैंने काफी देर तक मीनल की योनि के पूरे मजे लिया जैसे ही मीनल की योनि से पानी ज्यादा मात्रा में बाहर निकलने लगा तो मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है मैंने भी मीनल की योनि में अपने वीर्य को गिरा दिया उसकी चूत के अंदर मेरा वीर्य जा चुका था वह मेरी हो चुकी थी। हम दोनों जल्दी शादी करने वाले थे और यह बात मैंने अपनी मां को बता दी थी मेरी मां को भी कोई आपत्ति नहीं थी। मीनल का मुझसे मिलना होता था हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बन ही जाते थे।

जंगल में मुझे मेरी सहेली के साथ चोदा - Jungle Me Mujhe Meri Saheli Ke Sath Choda

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साथियो, यह मेरी जिंदगी की सच्ची कहानी है जो मैं आज आपको बताने जा रही हूँ।
जब मैं बारहवीं कक्षा में थी.. उस वक्त मेरी उम्र करीब 18 वर्ष होगी।

उन्हीं दिनों जब स्कूल की ट्रिप में मैं महाराष्ट्र के कोकण के जंगलों में गई थी। हम वहाँ शाम करीब 6 बजे पहुँचे.. टेंट लग चुके थे।

टीचर ने कहा- अब बाकी लड़के और लड़कियाँ जाकर पानी लेकर आएँ..
तो हम 5 लड़कियाँ और दस लड़के पानी लेने गए।

मेरे साथ में पूनम अंजली.. मुस्कान.. श्वेता और एक और लड़की थी, हम लड़कों के पीछे-पीछे जा रहे थे, हम सब मस्ती में सेक्स की बातें करतें हुए जा रहे थे… पर ये बातें बाक़ी लड़कियों को अच्छी नहीं लग रही थीं। तो मैं और पूनम हम पीछे रह गए.. अंधेरा हो चुका था।

मैं बातें करते-करते पूनम की पीछे से गाण्ड दबा रही थी.. तो वह भी आगे बढ़कर मेरे चूचे दबाने लगी। हमें लगा कि हमें कोई नहीं देख रहा.. पर दो लड़के इरफान और विजय.. हमें देख रहे थे।
इरफान मेरे चाचा का लड़का था।

यहाँ पूनम मेरी गाण्ड दबा रही थी और मैं उसकी मसल रही थी। हम पूरी मस्ती के मूड में थे कि मुझे विजय ने और पूनम को इरफान ने पीछे से पकड़ लिया, पूनम डर के मारे आगे को भाग गई.. और मैं अकेली ही इन दोनों सांडों के बीच फंस गई थी, आगे से इरफान और पीछे से विजय जिसे विजु कहते थे.. ने मेरी पीछे से स्कर्ट ऊपर उठा दी और वो मेरी गाण्ड में उंगली करने लगा था, आगे से इरफान मेरी चूत में उंगली कर रहा था।

वे दोनों मुझे उठाकर घनी झाड़ी में ले गए और उधर ले जाकर मुझे लिटा दिया। विजु ने लौड़ा निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया और इरफान ने मेरी स्कर्ट निकाल दी, उसने मेरी लाल रंग की पैंटी भी निकाल दी और मेरी चूत चाटने लगा था।
मुझे जोरदार मुत्ती लगी थी.. मेरे मुँह में लौड़ा था.. मैं बोल भी नहीं पाई और मैंने इरफान के मुँह में मूत दिया। इरफान को ठरक इस प्रकार की लगी थी.. उसने मेरा मूत पी लिया।
विजु ने लौड़ा मेरे गले तक फंसा दिया था.. मैं बोल भी नहीं पाई।

अब विजु लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा और इरफान विजु के बाजू हो कर अपना लौड़ा हिलाने लगा। विजु का लंड काफी बड़ा था.. विजु ने अब मेरी चूत में उंगली डाली.. मुझे उसका कोई असर नहीं हुआ।
अब वो लंड डालने जा रहा था। उसका लंड काफी मोटा और बड़ा भी था.. तो मुझे अब तकलीफ होने लगी थी, उसका लंड अब तक पूरा अन्दर गया भी नहीं गया कि मैं दर्द के मारे रोने लगी।

तब उसने जेब से हेयर आयल का पाउच निकाला और अपने लंड पर लगाया। उसने इसके साथ ही मेरी चूत पर भी अपना थूक लगा दिया।
इस बार जब उसने लौड़ा पेला तो अब लंड थोड़ा-थोड़ा आराम से चूत में जाने लगा था.. और अब मुझे तकलीफ भी कम हो रही थी।
उसने इस बार पूरा लण्ड मेरी चूत में डाल दिया, मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरी चूत में गर्म सलाख घुसेड़ दी हो।

कुछ पल ठहरने के बाद विजु अब मेरी जोरदार चुदाई कर रहा था.. मैं दर्द के मारे तड़प रही थी। करीब दस मिनट तक विजु ने मेरी भीषण चुदाई की और चूत में ही झड़ गया था। अब इरफान मेरे ऊपर आया.. उसका विजु जितना तो बड़ा नहीं था पर उसने भी मेरी चूत में अपना लौड़ा डालकर थोड़ा ऊपर-नीचे किया और जल्दी ही झड़ गया।

इस चुदाई में मुझे असली मजा तो विजु ने दिया था।

इरफान झड़ने बाद चला गया.. विजु वहीं रुका हुआ था। मैंने कपड़े पहन लिये थे विजय ने मुझे उठाया और चूम लिया। मेरे होंठ इस प्रकार चूमे कि होंठों से खून निकलने लगा।
विजय ने कहा- सोफी मेरी जान… तुझे कल और मस्त चोदूँगा।

मैंने मेरे बाल और कपड़े ठीक किए और कैम्प की तरफ चल दी। मेरे मन में ख्याल आया कि पूनम ने किसी को कुछ बताया तो नहीं होगा। मुझे अब चुदाई का दर्द हो रहा था कैम्प में किसी को कुछ पता नहीं चला।
मैं जब पूनम के पास गई और उसने मुझसे पूछा- क्या हुआ था?
मैंने कहा- मैं भी भाग गई थी।

मैंने खाना खाया और सो गई। मैं इस विषय में बात करने के मूड में नहीं थी।

सुबह उठी और पता चला कि तीन-तीन के ग्रुप में लड़के-लड़कियाँ जायेंगे और कुदरती तस्वीरें खींच कर लाएंगे।
हमें कैमरा दे दिया गया, मेरे ग्रुप में मेरे पास कैमरा दिया, मेरे साथ दो लड़के दीपक और सोनू थे.. मैं उन्हें जानती थी।

हम सभी ने नाश्ता किया और निकल पड़े। हम काफी दूर आ चुके थे.. दीपक ने मेरी गाण्ड पर हाथ मारा और बोला- सोफिया कभी हमसे भी चूत चुदाई करवा के देखो..
तब मुझे पता चला कि रात को विजय ने सब लड़कों को यह बात बता दी थी कि उसने मेरी चुदाई की है।

मैं चुपचाप चलती रही.. आगे जाकर देखा तो बड़े-बड़े पत्थरों से बीच में गुफा जैसी कुछ जगह थी, हम लोग अन्दर चले गए। अंधेरे में कुछ नहीं दिखाई दे रहा था और उतने में मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पर जोर से धक्के देने लगा।
मैंने कहा- कौन है?

दीपक की आवाज़ आगे से आई.. फिर देखा कि वह सोनू था।
दीपक ने टॅार्च जलाई तो सोनू ने मुझे घबरा कर छोड़ दिया, दीपक ने हमें देख लिया था, वह भी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगा।
सोनू नीचे बैठ कर मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत चाटने लगा था और सोनू कह रहा था- साली मूत दे.. मेरे मुँह में..

उसने मेरी पैंटी उतार दी और मैंने उसके मुँह में मूत दिया, उसने पानी समझ कर पी लिया।
दीपक ने मेरा टॅाप निकाल दिया था, अब वह मेरे मम्मे दबा रहा था, अब मैं पूरी तरह नंगी हो गई थी, दीपक हटा और सोनू ने मेरा मु्ँह पत्थर की दीवार की तरफ दबा दिया और मेरे पीछे मेरी गाण्ड में उंगली डालने लगा था।
आज मेरी गाण्ड की चुदाई होने वाली थी।

अब सोनू भी नंगा हो चुका था, उसने मेरी गाण्ड में लंड डालना चाहा मगर लंड जा नहीं पाया। फिर उसने पैंट की जेब से क्रीम की ट्यूब निकाली और मुझे उलटा लिटा कर मेरी गाण्ड पर खाली कर दी।
अब वह लंड डालने लगा, मैंने महसूस किया कि उसका लंड.. जैसे लंड नहीं मानों लठ हो.. पूरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।

अब वह धीरे-धीरे लंड मेरी गाण्ड में डालने लगा। मुझे तकलीफ होने लगी थी.. पर मजा भी आने वाला था। मैं दर्द सहती गई अब लंड मेरी गाण्ड में लगभग पूरा जा चुका था।
दर्द अब बर्दाश्त के बाहर हो रहा था। मैं रोने लगी थी.. क्योंकि सोनू का इतना लंबा और मोटा लंड मेरी गाण्ड में जा रहा था। सोनू अपना लंड जब ऊपर की तरफ उठता था.. तो मेरी गाण्ड भी ऊपर चली जाती थी.. तो सोनू अपने हाथ मेरे कूल्हों पर दबा के मेरी गाण्ड में डालने लगा।

वो लौड़े को ऊपर-नीचे.. ऊपर-नीचे.. कर रहा था।
उफ़्फ़.. अल्लाह कसम.. मुझे उस दिन जो तकलीफ हुई थी.. मैं आज तक भूल नहीं पाई।

अब सोनू झड़ने ही वाला था। उसने लंड बाहर निकाला और मेरे मु्ँह में सफेद पानी डाल दिया, मैंने वो पानी थूक दिया।
अब दीपक की बारी आई। उसने भी मुझे उलटा किया और वह भी मेरी गाण्ड पर चढ़ गया और मेरी गाण्ड में लौड़ा डाल कर ऊपर-नीचे कूदने लगा।
मुझे अब बिलकुल भी असर नहीं हो रहा था।
थोड़ी देर बाद दीपक भी झड़ गया था, उसने तो पानी मेरी गाण्ड में ही छोड़ दिया था।
सोनू ने मेरे नंगे बदन की तस्वीरें खींच ली थीं। इस तरह में पूरी ट्रिप में बार-बार चुदती रही। लगभग हर लण्ड ने मेरी चूत को चोदा होगा।
अगला भाग : जवानी के जलवे रात में बिखेरे (Jawani Ke Jalwe Raat Me Bikhere)

जिसका लंड दमदार स्वीटी उसी की हुई - Jiske Lund Damdaar Sweety Usi Ki Hui

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आज बीना जैन करीब 42 साल की है, उनके पति की जब मौत हुई थी तो उनकी इकलौती बेटी सिर्फ आठ साल की थी। बीना जैन ने अपनी लड़की स्वीटी को लड़के की तरह पाला।

आज स्वीटी 19 साल की हो गई है। बीना के पति एक स्थानीय पार्टी के नेता थे, अपनी मौत के बाद वे इतनी सम्पत्ति छोड़ गए थे कि बीना अपना और स्वीटी का खर्चा आराम से चला रही थी। इसके अलावा बीना एक एन जी ओ और महिलाओं के लिए एक हेल्थ सेण्टर भी चला थी जिससे भी अच्छी कमाई हो जाती थी, नेता की पत्नी होने के कारण बीना के बड़े बड़े अफसरों, पुलिस वालों और नेताओं से अच्छी पहचान थी। बीना अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखती थी इसलिए 42 साल की होने के बावजूद वह सिर्फ 30 साल की लगती थी। बीना ने स्वीटी को भी जूडो कराटे की ट्रेनिंग दे रखी थी, बीना चाहती थी कि उसकी लड़की स्वीटी एक लड़के की तरह निडर और हिम्मत वाली बने।

बीना रोज सवेरे सात बजे अपने बंगले के सामने वाले मैदान में जोगिंग और टहलने के लिए जाती थी, साथ में स्वीटी को भी साथ ले जाती थी। बीना जैन जिससे भी मिल कर बात करती तो स्वीटी की बढ़ चढ़ कर तारीफ़ करती थी, बीना कहती- यह मेरी बेटी नहीं, मेरा बेटा है। अगर कहीं झगड़े की नौबत आयेगी तो स्वीटी एक साथ चार चार लड़कों से निपट सकती है और चारों पर भारी पड़ेगी।

ऐसी बातें सुन सुन कर स्वीटी भी लोगों से बेकार, बिना बात पर पंगे लिया करती थी लेकिन लोग बीना के पुलिस से संबंधों के कारण चुप रह जाते थे। वैसे तो बीना खुद को काफी शरीफ दिखाती थी लेकिन लोग जानते थे कि बीना कई लोगों के लौड़े ले चुकी है, एक औरत को जवान बने रहने के लिए रोज चुदाई करवाना जरूरी है, लण्ड का पानी डाले बिना जवानी का पौधा मुरझा जाता है।

एक दिन शाम के समय बीना के घर के सामने वाले मैदान में एक पेड़ के पास चार लड़के पेशाब कर रहे थे और लम्बे लम्बे लंड निकाल कर पेशाब झटक रहे थे। उस समय स्वीटी अपने मकान के वरांडे में थी। पहले तो उसे बड़े बड़े लंड देख कर मजा आया, वह लड़कों के लंड गौर से देखती रही। लेकिन जब लड़के जाने की तैयारी करने लगे तो अचानक स्वीटी ने अपनी मम्मी को चिल्ला कर बुलाया जो उस समय घर में ही थी।

जैसे ही बीना पास आई तो स्वीटी बोली- देखो मम्मी, ये लड़के मेरी तरफ अपने लंड दिखा कर इशारे कर रहे थे।

बीना स्वीटी को अपने साथ उन लड़कों के करीब गई और गालियाँ देने लगी, बीना बोली- मादरचोदो, अगर तुम्हारे लंड में इतनी जवानी उबल रही है तो अपनी माँ बहन की चूतों में घुसा दो ! अगर किसी ने मेरी लड़की तरफ लंड निकाला तो उसी लंड को पकड़ कर तुम्हारी गांड में घुसा दूँगी।

बेचारे लड़के यह सुन कर सन्न रह गए, फिर भी बीना का का मन नहीं माना। उसने स्वीटी से कहा- स्वीटी उठ, लगा एक एक तमाचा इन हरामियों के गालों पर !

फ़ौरन स्वीटी ने सबके गालों पर ऐसा झन्नाटेदार तमाचा लगाया कि लड़कों के गाल लाल हो गए। धीरे धीरे काफी भीड़ जमा हो गई इसलिए और झगड़ा बढ़ने के भय से लड़कों ने खिसकने में ही अपनी भलाई समझी। लेकिन जाते जाते वे स्वीटी और बीना को गुस्से की नजर से घूरते रहे।

घर जाकर लड़कों ने अपमान का बदला लेने की योजना बनाई, उनके पड़ोस में एक आवारा किस्म का लड़का गुड्डू रहता था। उसके साथ मिलकर कुल चार लड़के इस योजना में शामिल हो गये। उन्हें पता था कि रात को बीना और स्वीटी अकेले सोती हैं। नेता की पत्नी होने से बीना रात को नौ बजे ही दोनों नौकरानियों की छुट्टी कर देती थी, रात को भी चौकीदार उस बंगले पर सिर्फ एक बार गश्त लगाता था।

रात को जब बीना और स्वीटी सो चुके तो गुड्डू एक रस्सी लाया उससे हुक लगा कर पहले गुड्डू फिर उमेश, विजय और मनोज चाट पर चढ़ गए। फिर खिड़की खोलकर बीना के बेडरूम में घुस गए, एक बेड पर बीना और दूसरे पर स्वीटी सो रही थे।

रात को कमरे में नाईट लेम्प जल रहा था, बीना मेक्सी और स्वीटी सलवार-कमीज पहने थी। गुड्डू ने पहले चुपचाप धीरे धीरे बीना की मेक्सी ऊपर खिसका कर उतार दी, फिर स्वीटी की सलवार-कमीज उतार दी। दोनों के शरीर पर सिर्फ पेंटी रह गई, बीना और स्वीटी की चूतें और तने हुए बोबे देख कर सबके लंड सांप की तरह फनफना रहे थे।

गुड्डू ने आराम आराम से बीना की चड्डी भी नीची सरका दी लेकिन बीना को पता नहीं चला। बीना चूत से मस्त खुशबू आ रही थी और चूत से रस जैसा कुछ लगा हुआ था। शायद बीना कही किसी से चुदवा कर आई थी इसलिए बेखबरी से सो रही थी।

उमेश से रहा नहीं गया उसने एक उंगली बीना की चूत में घुसा दी और उसकी चूचियाँ दबाने लगा। बीना को पहले तो मजा आया, उसे सपने में लगा कि वह किसी अपने यार का लंड चूत में ले रही है, जब मनोज ने बीना की गांड में भी उंगली डाली तो बीना जाग गई और चौंक कर पलंग पर बैठ गई, उसने देखा कि सामने चार चार लंड तैयार हैं, डर कर बीना ने पूछा- तुम लोग कौन हो और क्या चाहते हो?

गुड्डू बोला- साली देख कर भी पूछ रही है? सामने लंड और हमारे सामने चूतें हैं, क्या हम भजन करने आये हैं? हम आज तेरी और तेरी बेटी को अपने लंड का स्वाद देने आये हैं। अगर हमारी बात नहीं मानी तो यहीं तुम्हारी लाश छोड़ कर चले जायेंगे, बात मान जाओगी तो तुम्हें मजा आयेगा। जब माँ चुदवायेगी तो बेटी को और मजा आयेगा, तुम फ़िक्र नहीं करो, हम लोग अनुभवी चोदू हैं, तुम्हें हमारे लंड जरूर पसंद आयेंगे। फिर तुम लोग हमसे हमेशा चुदवाती रहोगी। इसलिए हम पहले तुम्हें अपने तरीके चुदाई करेंगे, एक तुम्हारे मुँह में एक गांड में और एक चूत में लंड डालेगा। तुम भी याद करोगी इस नई सुहागरात को ! तब तक एक आदमी स्वीटी की चूत गर्म करेगा। सवेरे तक हमारा कार्यक्रम चलेगा, अगर आप राजीखुशी नहीं मानेगी तो हम मजबूर होकर जबरदस्ती करेंगे। हम तो अपने लंड का पानी तुम्हारी चूतों और गांडों में डाले बिना नही मानेंगे, आप फ़ौरन सारे कपड़े उतार दे। अब हमारे लंड को सब्र नहीं हो रहा है।

बीना खुशी खुशी तुरंत नंगी हो गई, सारे लड़के यह देख कर खुश हो गए कि बीना बड़ी जल्दी आसानी से चुदवाने को राजी हो गई। तीनों ने अपनी अपनी पोजीशन बना ली। मनोज को गांड मारने का बड़ा शौक था इसलिए उसने अपना लंड बीना की चूत में डालने के लिए अपने ऊपर चढ़ा लिया। ताकि नीचे से उमेश उसकी छूट में लंड घुसा सके।

बीना विजय का लंड चूसने लगी, उसे पहली बार स्वर्ग जैसा आनन्द आ रहा था, वह गपागप लंड लेने लगी। मनोज का लंड लंबा होने के कारण बीना की गांड में दर्द होने लगा, वह ओय… ओय… उफ़… उफ़… अरे… अरे… करने लगी।

मनोज बोला- आप चिल्लाना बंद करके मेरे लंड का कमाल देखें.. आज मैं आपकी गांड को गेट बना दूँगा। आप हमेशा मेरे लंड को याद रखेंगी।

विजय ने बीना के मुंह में पेशाब कर दिया जिसे बीना स्वाद लेकर पी गई, फिर तीनों ने बदल बदल कर बीना की चुदाई चालू कर दी।

उस समय जब स्वीटी सो रही थी तो गुड्डू ने स्वीटी की पैंटी निकाल दी। स्वीटी की कुंवारी बिना बाल की चूत देख कर चारों मस्त हो रहे थे।

कमरे में चुदाई की आवाजें ‘फच… फच… फच… फच…’ गूँज रही थीं।

तभी गुड्डू ने स्वीटी को उठा कर पलंग के पास खड़ा कर दिया जहाँ बीना तीन तीन लौड़ों से चुदवा रही थी। स्वीटी को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी मम्मी इतनी बड़ी चुदक्कड़ है। उसका मुंह खुला का खुला रह गया, उसे कुछ समझ में नहीं आया। वह सिर्फ मम्मी की चूत और गांड में आदर बाहर होने वाले लम्बे लम्बे लंड देख कर ताज्जुब मान रही थी और सोचने लगी कि अगर यही लंड मेरी चूत में डाले जायेंगे तो क्या होगा।

चुदते चुदते बीना बोली- स्वीटी, डरो नहीं, ये लोग मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे, ये अच्छे लड़के हैं, अपना काम कर रहे हैं। आज मुझे तुम्हारे पापा की याद आ रही है, वे तो अब नहीं हैं लेकिन इन लोगों ने मुझे खुश कर दिया, ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं मिला। बेटी, चुदाई से बड़ा कोई सुख नहीं है, औरतें तो एक लंड के लिए तरस जाती हैं, यहाँ तो घर में ही चार चार तगड़े लंड मिल गए, इस मौके का पूरा फ़ायदा लेना चाहिए।

स्वीटी बोली- मम्मी, मैं भी आपकी बेटी हूँ, मैं भी आपकी तरह चुदवाना चाहती हूँ। जब शादी के बाद भी चूत में लंड घुसेगा तो आज क्यों नहीं। आप ही तो कहती हैं कि चूत सिर्फ चुदाने के लिए बनी है, चाहे किसी का लंड हो, मजा एक सा आता है।

यह सुन कर गुड्डू बोला- स्वीटी तुम खुद तय करो कि पहला लंड किसका लोगी?

स्वीटी बोली- शायद तुम्हें पता नहीं है कि ‘मेरे बारे में मम्मी सबसे कहती हैं कि मेरी बेटी एक साथ चार चार को निपटा सकती है !’ इसलिए माँ तरह मैं बारी बारी सबसे चुदवाऊँगी और सबका लंड लूंगी।

तब तक बीना का एक दौर हो चुका था, सबने मिल कर स्वीटी को पलंग पर गिरा लिया और पागलों की तरह चोदने लगे। जब स्वीटी की चूत फटी तो वह चिल्लाई, बीना बोली- बेटी, लंड का अपमान नहीं करो, उसे आराम से अपनी चूत और गांड में जाने दो, तभी असली में वही मजा आयेगा जो मैं ले चुकी हूँ।

स्वीटी धक्के पर धक्का सहने लगी, वह मस्त होकर नीचे से अपनी चूत उछाल कर लंड अन्दर लेने लगी।

एक घण्टे के बाद स्वीटी की चूत वीर्य से भर गई, वीर्य बाहर रिसने लगा तो बीना ने अपनी बेटी की चूत से सारा वीर्य चाट लिया।

बीना बोली- मेरी एक दिन की खुराक मिल गई। यही है मेरी जवानी का राज ! अगर तुम लोग हमेशा मेरी इसी तरह से चुदाई करते रहोगे तो स्वीटी तुम में से जिस का लंड पसंद करेगी, तो मैं उसी से स्वीटी की शादी करवा दूंगी।

लेकिन एक शर्त है कि शादी के बाद भी तुम सब स्वीटी के साथ मुझे भी अपने लंड का मजा देते रहोगे।

स्वीटी को उमेश का लण्ड पसन्द आया क्योंकि उसके वीर्य से स्वीटी की चूत भर गई थी, वह बोली- मुझे भी वीर्य पीने के फायदे पता चल गए हैं।

उस रात तीन बार चुदाई का दौर चला, बीना और स्वीटी की चूतें और गांड सूज गई थी। बाद में बीना ने अपना वायदा पूरा किया और स्वीटी की शादी उमेश से करा दी। आज उमेश अपने उन सभी दोस्तों के साथ स्वीटी की जमकर चुदाई कर रहा है। स्वीटी एक तरह से सबकी सांझी पत्नी बन कर रह रही है, उसे लण्डों की कोई कमी नहीं रही !

कभी कभी जब बीना की चूत गर्म हो जाती है तो वह इन्हीं लोगों को बुला कर अपनी गर्मी शांत कर लेती है।
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