सेक्सी आंटी की प्यासी चूत - Sexy Aunty Ki Pyasi Choot Chudai

सेक्सी आंटी की प्यासी चूत - Sexy Aunty Ki Pyasi Choot Chudai , Aunty ko choda , gand bhi mari , lund bhi chusaya , garm chut ki chudai.

मेरा नाम मयंक है, मैं बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में रहता हूं. बात तब की है जब मैं बिलासपुर में कोचिंग क्लास कर रहा था. मेरी सोशल नेटवर्किंग साइट के अकाउंट पर एक कोरबा की आंटी थी जिनसे मैं कभी-कभी बात करता था.
कुछ दिनों तक बात करने के बाद हम दोनों एकदम क्लोज़ हो गए. वो अपने बारे में हर बात मुझे बताने लगी. उसकी 3 बेटियाँ थीं जो अभी कम उम्र की ही थीं.

एक बार आंटी ने मुझे कोरबा मिलने के लिये बुलाया तो मैं उनके घर जाने के लिए राज़ी हो गया.
जब मैं उससे पहली बार मिलने गया तो उसने मुझे एक रेस्तराँ में बुलाया. उसे देख कर मैं हैरान रह गया. उसको देख कर लगा ही नहीं कि वो तीन बच्चों की माँ है. देखने में वह केवल 25-26 साल की लग रही थी. वो जीन्स और टॉप पहन कर आई थी.

रेस्तराँ में हम दोनों ने कॉफी पी. फिर वह मुझसे यह कहकर चली गई कि तुम कुछ देर इंतजार करो, मैं थोड़ी देर के बाद तुम्हें फोन करूंगी. मैं वहीं पर होटल में उसका इंतजार करने लगा. दस मिनट के बाद उसका फोन आया और उस लेडी ने मुझे अपने घर बुला लिया.

पहले तो मैं थोड़ा घबरा रहा था क्योंकि मैं इससे पहले कभी किसी शादीशुदा औरत से नहीं मिला था. मैं सोच रहा था कि जाऊं या न जाऊं. उसके बाद मैंने हिम्मत करके उसको आने के लिए हाँ कर दी. उसने अपने घर की लोकेशन मुझे इंटरनेट के जरिये फोन पर भेज दी.

उसकी बताई जगह पर पहुंचकर मैंने उसको फोन किया तो उसने अपना क्वार्टर नम्बर बता दिया. उसके बाद मैं उसके घर पर पहुंच गया और जाकर डोर बेल बजाई. जब अंदर से दरवाजा खुला तो वह नाइट ड्रेस में थी. जब तक मैं कुछ समझ पाता उसने मुझे अंदर खींच लिया और घर का दरवाजा बंद कर दिया. अंदर आते ही वह मुझे अपने बेडरूम में ले गयी.

हम दोनों बेड पर जाकर बैठ गये और कुछ बातें करने लगे. उसने बताया कि उसके पति सरकारी नौकरी करते हैं. उसको पता नहीं क्या हुआ कि कहते-कहते वो रोने लगी कि उसके पति उसको टाइम ही नहीं देते हैं.
मैंने उससे चुप होने के लिए कहा. मगर वह नहीं रुकी. फिर मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया. वह मुझसे लिपट गई और सुबकने लगी.

मैंने उससे कहा- ऐसे नहीं रोते, आपको जो चाहिए वो मैं आपका दूंगा. लेकिन आप दिल छोटा मत करो.
मेरा हाथ उसकी चूची पर टच हो गया. उसकी चूची का स्पर्श पाते ही मेरा ध्यान उसके बूब्स पर चला गया. अब मैंने जान-बूझकर उसको सांत्वना देने के बहाने से उसकी चूचियों को दो बार और टच कर दिया. उसकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं हो रहा था. वह चुप हो गई थी. उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया. मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उसकी चूची को अपने हाथ में भर लिया और उसको दबाने लगा.

मेरी इस हरकत पर वह थोड़ी सहम सी गई और उसने मुझे अपने से अलग कर दिया.
वह बोली- मैं जानती हूँ कि तुम्हारा मन कर रहा है. लेकिन तुम इस बात के बारे में किसी को नहीं बताओगे, मुझसे वादा करो.
मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुमको मुझ पर भरोसा नहीं हो जाता मैं तुम्हारी तरफ देखूंगा भी नहीं.

मैं उठ कर बेडरूम से बाहर जाने लगा और उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया. मैंने पीछे पलट कर देखा तो वह खड़ी हो गयी और एकदम से मुझे अपनी बांहों में भर कर मुझसे लिपट गई.
वह बोली- तुम मुझे छोड़ कर मत जाओ प्लीज.
कहकर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया.
मैंने कहा- तो अब तुमको मुझ पर विश्वास हो गया या नहीं?
वह बोली- हाँ, मुझे तुम पर विश्वास है.

उसके बाद मैंने भी उसको अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को वहीं खड़े होकर चूसने लगे. मैंने उसके होंठों को चूसते हुए उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया. मेरा लंड मेरी पैंट में तन गया था और उसके शरीर से रगड़ खा रहा था. मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में घुस जाना चाहता था मगर बीच में उसकी नाइटी आ रही थी.
मैं उसको जल्दी से नंगी कर देना चाहता था ताकि उसकी चूत में अपने लंड को डाल सकूं लेकिन मैंने सब कुछ धीरे-धीरे करना ही ठीक समझा ताकि उसका विश्वास मुझ पर बना रहे.

कई मिनट तक ऐसे ही किस करने के बाद वह बोली- मयंक, मेरे पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते.
मैंने कहा- तो क्या हुआ, मैं हूँ न. मुझे अपना पति मान सकती हो तुम.

कहकर मैंने उसकी नाइटी को निकलवा दिया और अब वह मेरे सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी थी. उसके बदन को देखकर मेरी हवस जाग गई. मैंने उसकी ब्रा को किस किया और फिर उसकी गर्दन पर चूमने लगा. वह भी गर्म होने लगी. उसने मुझे अपने से लिपटा लिया और मुझे बांहों में लेकर मेरी गर्दन पर किस करने लगी.

उसके बाद मैंने उसको पलटा कर उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसकी ब्रा को निकाल कर बेड पर फेंक दिया. उसके लम्बे बाल उसकी कमर पर बिखरे हुए थे. पीछे से उसकी कमर नंगी हो गई थी. उसकी गोरी, नंगी पीठ, जो काले बालों के नीचे ढकी हुई थी, को देख लग रहा था जैसे किसी फिल्म की हिरोइन हॉट सीन देने के लिए तैयार खड़ी हो.
मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और उसके चूचों को देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा. मैंने उसके चूचों को सीधा मुंह में भर लिया और उसकी गांड को दबाते हुए मैं उसके चूचों को चूसने लगा. बहुत मजा आ रहा था दोस्तो. वह खूबसूरत तो थी ही, साथ ही उसका बदन भी सुडौल था.

मेरा लंड मेरी पैंट में तन कर फटने को हो रहा था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो मेरे लंड ने मेरी पैंट पर पानी का निशान बना दिया था. मैंने उस लेडी को नीचे बैठा दिया और वह घुटनों पर मेरे सामने बैठ गई. मैंने अपनी पैंट को खोल दिया और अंडरवियर समेत उसको नीचे गिरा दिया. मेरा लौड़ा तन कर उसके मुंह के सामने आ गया.

वह भी समझ गई कि मैं उसको अपना लंड चुसवाना चाहता हूँ. उसने मेरे लंड को हाथ में लिया तो मेरी आह्ह … निकल गई. बड़े ही नर्म हाथ थे उसके. फिर उसने एक दो बार मेरे लंड की मुट्ठ मारी और उसको मुंह में लेकर चूसने लगी. उसके मुंह में लंड गया तो मुझे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना होने लगी. मैंने उसके सिर को हल्के से पकड़ कर अपने लंड को उसके मुंह में धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

वह पूरी तबियत के साथ मेरे लंड को चूस रही थी. बीच-बीच में वह मेरी गोलियों को किस कर लेती थी और कभी पूरी की पूरी मुंह में भर लेती थी. वह मुझे पागल बना रही थी. मेरा जोश बढ़ता ही जा रहा था.

कुछ देर चूसने के बाद मेरा जोश पूरा भर गया और उसने मेरे लंड को सही वक्त पर बाहर निकाल दिया नहीं तो मैं उसके मुंह में ही झड़ जाता. उसके बाद मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसके चूचों के बीच में तने हुए निप्पलों को चूसने लगा. उसके मुंह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैं नीचे से नंगा था लेकिन ऊपर मैंने शर्ट पहनी हुई थी.

वो उठ कर मेरी शर्ट उतारने लगी और मुझे भी पूरा नंगा कर दिया. उसने मेरी छाती पर चूमना शुरू कर दिया और मैंने नीचे से हाथ ले जा कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर फिराना शुरू कर दिया.

मैं फिर से उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूसते हुए उसके चूचों से होते हुए उसके पेट पर चूमने लगा. वो तड़प सी जाती थी मेरे चुम्बन पर. उसके बाद मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिराना शुरू कर दिया. उसकी टांगें मचलने लगी.

मैंने उसकी टांगों को रोका और उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गई. उसकी चूत पर काफी बाल थे जो गहरे काले रंग के थे. मगर उसकी जांघें बिल्कुल गोरी थी जिनके बीच में उसकी चूत गजब की लग रही थी. उसकी चूत से चिकना सा पदार्थ निकल कर उसकी पूरी चूत को चिकना कर रहा था.

उसके बाद मैंने उसकी टांगों को चौड़ी कर दिया और उसकी चूत पर हथेली से रगड़ने लगा. उसने मुझे पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को किस करने लगी. मेरा लंड उसकी चूत से टच होने लगा. मन कर रहा था कि उसकी चूत को फाड़ दूं चोद-चोद कर. मगर अभी मैं उसको और तड़पना चाहता था.

मैंने दोबारा से उसकी चूत के पास अपने होंठ ले जाकर उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया और वो तड़प उठी, बोली- बस, अब और नहीं रुका जा रहा मयंक. मेरी चूत बहुत दिनों से प्यासी है. इसकी प्यास बुझा दो.
मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी और चीख पड़ी- आह्ह … मर जाऊंगी मैं. क्या कर रहे हो! जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो प्लीज!

मैं उसकी चूत में जीभ डालकर उसकी चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगा. उसकी हालत खराब होने लगी जिसका अंदाजा मुझे उसकी चूत से निकल रहे पानी से हो रहा था. उसने मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबा लिया था. वह अपनी गांड को उठा-उठा कर मेरी जीभ से अपनी चूत को चुदवा रही थी. उसकी आवाजें बहुत तेज हो गई थीं.

मैंने सोचा कि अब यह पूरी तरह से गर्म हो चुकी है. मेरे लंड ने पानी छोड़-छोड़ कर बिस्तर की चादर को गीला कर दिया था. मैंने अपने लंड को हाथ में लिया और उसकी चूत पर लगा कर रगड़ने लगा.

उस आंटी ने … वैसे उसको आंटी कहने में अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि वह बिल्कुल जवान लग रही थी. किसी लड़की की तरह. उसने मुझे फिर से अपने ऊपर खींच लिया और मेरी छाती के नीचे उसके चूचे दब गये. वह मुझे अपनी बांहों में पकड़ कर बुरी तरह से चूमने-काटने लगी. उसके हाथ मेरी पीठ को सहला रहे थे. मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था.

दो मिनट तक मेरे होंठों को चूसने के बाद उसने अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट दिया. फिर उसने नीचे हाथ ले जाकर खुद ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट कर लिया और मुझे अपने ऊपर लेटा लिया. मेरा लंड उसकी चिकनी हो चुकी चूत में अंदर घुसने लगा. उसके मुंह से कामुक सीत्कार बाहर आने लगे. उम्म्ह… अहह… हय… याह… करते हुए सेक्सी आंटी ने गांड को हिला-हिला कर उसने पूरा लंड अपनी चूत में समा लिया. मेरा पूरा लंड जब उसकी चूत में उतर गया तो वह मुझे फिर से चूमने और चूसने लगी.

उसने नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिये. मैं समझ गया कि अब यह और इंतजार नहीं कर सकती. मैंने उसकी चूत में अपनी तरफ से धक्के लगाने शुरू कर दिये. नीचे से वह भी अपनी गांड को उकसा कर मेरा साथ देने की पूरी कोशिश कर रही थी. उसको चुदाई का बहुत तजुरबा था.
जब मेरा धक्का लगता तो वह रुक जाती और जब मैं रुक जाता तो वह धक्का लगा देती. इस तरह से वह पूरे ताल-मेल के साथ मेरे लंड से चुदने लगी. मैंने अपने हाथ बेड पर उसकी बगल में टिका लिये और उसकी चूत में जोर से अपने लंड को पेलने लगा. उसके मुंह आह-आह-आह की आवाजें और तेज निकलने लगीं.

वह अपने चूचों को अपने हाथ में लेकर दबा रही थी. बीच-बीच में मैं भी उसके निप्पलों को काट लेता था. उसकी चुदाई करते हुए मुझे भी गजब का मजा आ रहा था. उसकी चूत में मेरा लंड गपागप अंदर जा रहा था. कुछ मिनटों तक मैं उसके ऊपर लेट कर उसकी चूत को चोदता रहा.
फिर मेरा जोश और बढ़ा तो मैंने उसको उठा कर घोड़ी बना दिया. पीछे घुटनों के बल खड़ा होकर मैंने उसकी गोरी और मोटी गांड को पकड़ लिया और उसकी चूत पर लंड को सेट करके एक जोर का धक्का दे मारा. मगर गलती से लंड उसकी चूत में न जाकर उसकी गांड में जा लगा. वह दर्द के मारे चीख पड़ी. मैंने नीचे देखा तो लंड उसकी गांड पर लगा हुआ था.

मैंने दोबारा से उसकी चूत पर लंड को सेट किया और अबकी बार धीरे से लंड को चूत में अंदर कर दिया. लंड को चूत में अंदर करने के बाद मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और उसकी चूत की चुदाई चालू कर दी. वह फिर से कामुक सिसकारियाँ लेने लगी.

उसकी गांड से मेरी जांघें टकरा रही थीं जिससे फट्ट-फट्ट की आवाज पैदा हो रही थी. पूरे कमरे में हम दोनों की सेक्स की गर्माहट से गर्मी भर गई थी और पंखे के नीचे चुदाई करते हुए भी दोनों के बदन पसीने से भीगने लगे थे.

मैंने कुछ देर तक उसकी चूत की पिलाई की और फिर अपने लंड को बाहर निकाल लिया. उसके बाद मैंने उसको करवट के बल लेटा लिया और खुद भी उसके साथ लेट कर उसकी टांग को उठवा दिया. मैंने उसकी टांग को उठवा कर अपना लंड फिर से साइड में से ही उसकी चूत में धकेल दिया. फिर से उसकी चुदाई शुरू की और अबकी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा.

इस पोजीशन में मुझे थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी लेकिन मजा भी दोगुना मिल रहा था. मैंने उसके हिलते-डोलते चूचों को अपने हाथ में बारी-बारी से भर कर दबाना शुरू कर दिया और कुछ ही मिनट के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

उसकी चूत और भी ज्यादा चिकनी हो गई और मैंने ताबड़तोड़ उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी. पांच मिनट के बाद मेरे लंड ने भी उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. मैं थक कर एक तरफ लेट गया. मेरी सांस फूल गई थी और वह भी लेट कर हाँफने लगी.

उसके बाद उसने मेरी छाती पर सिर रख लिया और मेरे सिकुड़ रहे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी. मैंने उसके चूचों को सहलाना शुरू कर दिया. फिर वह उठी और मेरे सोये हुए लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मेरे लंड में गुदगुदी सी होने लगी. मगर मजा भी आ रहा था. पांच-सात मिनट के बाद लंड फिर से खड़ा होना शुरू हो गया. उसके बाद जब लंड पूरा तन गया तो वह खुद आकर मेरे लंड पर बैठ गई.
मेरे लंड पर बैठने के बाद वह उछलने लगी और खुद ही अपनी चूत को चुदवाने लगी. आधे घंटे तक वह ऐसे ही मेरे लंड पर उछलती रही और इस तरह चुदाई के बाद हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उस दिन मैंने उसकी तीन बार चुदाई की. वह मेरी दीवानी हो गई थी. मैं भी उसकी चूत चोद कर सातवें आसमान पर पहुंच गया था. उसके बाद तो जब भी वह घर पर अकेली होती तो वह मुझे फोन करके बुला लेती थी और मैं उस सेक्सी जवान आंटी की चूत चुदाई का पूरा मजा लेता था. वह भी मेरे लंड का पूरा मजा लेती थी.

पोर्न देखकर नौकर से चुदी - Porn Dekhkar Apne Naukar Se Chudi

पोर्न देखकर नौकर से चुदी - Porn Dekhkar Apne Naukar Se Chudi , लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

आकाश ने घर की खिड़की खोली तो वह कहने लगे बाहर से शोर सुनाई दे रहा है हम लोग बाहर गए तो बाहर देखा कुछ लोग आपस में झगड़ रहे थे आकाश कहने लगे मैं जरा नीचे देख कर आता हूं। मैंने आकाश को कहा आप बीच मे मत जाइए रहने दीजिए आकाश कहने लगे शगुन कोई बात नहीं मैं देख कर आता हूं मैंने आकाश से कहा ठीक है आप जल्दी आ जाइएगा।

आकाश भी नीचे चले गए और मैं सब बालकोनी से देख रही थी मैंने देखा वह लोग आपस में कुछ ज्यादा ही झगड़ा कर रहे थे सब लोगों को उनको समझाना पड़ा तब जाकर उन लोगों का समझौता हो पाया। वहां पर पुलिस भी आई हुई थी मामला अब सुलझ चुका था और आकाश जब घर पर आए तो मैंने उनसे पूछा क्या हुआ था। आकाश कहने लगे अरे वही पार्किंग को लेकर झगड़ा तुम्हें तो मालूम ही है कि हर रोज यहां पर पार्किंग को लेकर झगड़े होने लगे हैं।

मैंने आकाश से कहा हां यहां पर कुछ समय से कुछ ज्यादा ही झगड़े होने लगे हैं और तुम तो देख ही रहे हो, ना जाने लोग क्यों इतना झगड़ते रहते हैं। आकाश बहुत ही शांत स्वभाव के है वह कभी भी जल्दी से गुस्सा नहीं होते आकाश से मैने कहा मैं नाश्ता बना देती हूं वह कहने लगे ठीक है तुम मेरे लिए नाश्ता बना दो। मैं नाश्ता बना रही थी तब तक आकाश बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चले गए वह जब बाहर आये तो मैं तब तक नाश्ता तैयार कर चुकी थी।

आकाश और मैं नाश्ता कर रहे थे हम दोनों नाश्ता करते हुए बात कर रहे थे आकाश कहने लगे कि कुछ दिनों के लिए मम्मी पापा यहां आने वाले हैं मैंने आकाश को कहा वह लोग कब आने वाले हैं। आकाश कहने लगे कि वह लोग अगले हफ्ते तक यहां आ जाएंगे मैंने आकाश से कहा चलो यह तो बहुत अच्छी खबर है आकाश कहने लगे वह लोग कुछ समय के लिए आने वाले हैं।

आकाश और मैं मुंबई में रहते हैं और आकाश के माता पिता आकाश के बड़े भैया के साथ जयपुर में रहते हैं हम लोगों को मुंबई में दो वर्ष हो चुके हैं। आकाश की एक बहु अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में जॉब लगी थी तो उसके बाद से हम लोग मुंबई में ही रह रहे हैं आकाश को अपनी कंपनी की तरफ से ही फ्लैट मिला हुआ है।

हम लोग आपस में बात कर रहे थे तो मैंने आकाश से कहा क्यों ना आज हम लोग घर का सामान ले आए आकाश कहने लगे ठीक है हम लोग शाम के वक्त चलते हैं। आकाश मेरी बात मान चुके थे और हम लोग शाम के वक्त घर का सामान लेने के लिए चले गए हम लोग जब अपने पड़ोस में ही डिपार्टमेंटल स्टोर में गए तो वहां पर हम लोग शॉपिंग कर रहे थे।

आकाश और मैं सोच रहे थे कि क्या क्या लिया जाए क्योंकि मेरे सास ससुर लंबे अरसे के लिए आने वाले थे इसलिए घर में सारा सामान रखवाना था। पहले तो हम दो लोग ही थे लेकिन अब पापा मम्मी के आने पर हमें सारी तैयारी करवानी पड़ रही थी आकाश और मैंने सारा घर का सामान ले लिया था ताकि कोई भी परेशानी ना हो। जब हम लोग घर लौटे तो हम लोग काफी थक चुके थे मैंने आकाश से कहा मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूं। आकाश कहने लगे हां मुझे चाय पिला दो लगता है तभी थोड़ा आराम मिल पाएगा और फिर हम दोनों साथ में बैठकर चाय पी रहे थे मुझे भी अच्छा लग रहा था और आकाश को भी अच्छा लग रहा था।

उस दिन हमारा दिन कैसे बीता कुछ पता ही नहीं चला अगले दिन आकाश के लिए मैं नाश्ता बना रही थी उसके बाद आकाश और मैंने नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद आकाश अपने ऑफिस चले गए। ऐसे ही कब एक हफ्ता बीत गया कुछ पता ही नहीं चला एक हफ्ते बाद आकाश के माता पिता आ गए जब वह लोग आए तो आकाश ने उस दिन छुट्टी ले ली थी और उस दिन आकाश ने उन्हीं के साथ समय बिताया। आकाश को ऑफिस चले जाया करते थे लेकिन घर पर मैं ही उनकी देखभाल करती थी।

एक दिन मेरी सहेली बबीता घर पर आई हुई थी जब वह घर पर आई तो मैंने उससे कहा मैं तुम्हें अपने सासू जी से मिलवाती हूं। मैंने जब बबीता को उनसे मिलाया तो वह लोग बहुत ही खुश हुए मेरी सास तो बबीता के साथ काफी देर तक बैठी रही और वह बबीता से बात कर रही थी। एक दिन मैं और मेरी सासू मां बैठे हुए थे तो वह बोल उठी यहां पर तो कोई आस पड़ोस में बात भी नहीं करता है और हमारे शहर में देखो सब लोग एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं और सब आपस में बात करते हैं।

मैंने उनसे कहा माजी यह महानगर है और यहां पर किसी को किसी से मिलने का समय ही नहीं है वह कहने लगी यह फ्लैट ऐसे लगते हैं जैसे कि एक ही घर हो और घर में दरवाजे बीच में लगा दिए गए हो। मैंने उन्हें कहा हां सासु जी आप बिल्कुल ठीक कह रही है हम लोग आपस में बात कर रहे थे तो मेरे ससुर जी अंदर से हंसने लगे मेरी सासू मां भी अंदर चली गई। जब वह अंदर गई तो वह लोग आपस में बात करने लगे मैंने भी सोचा कि आज अपने भैया से बात कर लेती हूं काफी समय हो गया था जब उनसे मेरी बात नहीं हो पाई थी।

मैंने अपने भैया को फोन कर दिया मैंने जब भैया को फोन किया तो भैया कहने लगे शगुन आज तुमने कैसे फोन कर दिया। मैंने भैया से कहा बस भैया सोच रही थी कि काफी दिनों से आप लोगों से बात नहीं हो पाई है तो आज बात कर लेती हूं वैसे आप लोग कैसे हैं।

भैया कहने लगे मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम बताओ तुम कैसी हो मैंने भैया से कहा मैं भी ठीक हूं। भैया कहने लगे तुम घर कब आ रही हो मैंने उन्हें कहा भैया अभी तो कुछ कह नहीं सकती लेकिन देखती हूं जब आकाश फ्री हो जाएंगे तो तब हम लोग आ जाएंगे। भैया कहने लगे अभी तो मैं ऑफिस में हूं लेकिन जब घर जाऊंगा तो तुम्हारी मम्मी पापा से बात करवाता हूं।

मैंने भैया से कहा ठीक है भैया उसके बाद मैंने फोन रख दिया था और मैं रसोई में खाना बनाने के लिए चली गई। जब मैं रसोई में खाना बना रही थी तो मेरे हाथ पर तेल गिर पड़ा तेल इतना ज्यादा गर्म था कि वह जैसे ही मेरे हाथ में गिरा तो मैं चिल्ला उठी मेरी सासू मां दौड़ती हुई आई और कहने लगी शगुन बेटा क्या हुआ। मैंने उन्हें बताया गर्म तेल मेरे हाथ में गिर गया है वह कहने लगे रुको मैं अभी तुम्हारी मरहम पट्टी कर देती हूं।

उन्होंने मेरे हाथ पर थोड़ा सा डेटॉल लगाया उसके बाद मुझे थोड़ा आराम मिला लेकिन मेरे हाथ में जलन हो रही थी। वह कहने लगी कि खाना मैं ही बना देती हूं, उन्होंने मेरी मदद की और उन्होंने ही खाना बनाया। वहीं अब खाना बनाया करती थी और मुझे बहुत बुरा लग रहा था क्योंकि मेरा हाथ बहुत ज्यादा जल चुका था।

आकाश ने भी मेरी बड़ी देखभाल की और आकाश मुझसे कहते कि तुम अपना ध्यान रखा करो वह चाहते थे कि हम घर में किसी नौकर को रख ले। उन्होंने घर में एक नौकर को रख लिया क्योंकि वह बिल्कुल भी नहीं चाहते थे की मां काम करें इसलिए उन्होंने नौकर को रखा नौकर का नाम रामू है रामू अच्छा काम किया करता। रामू मुझे कहता भाभी आप चिंता मत किया कीजिए मैं सारा काम कर लूंगा।

उसके काम में कोई भी दिक्कत नहीं थी और वह बड़े अच्छे से काम किया करता घर की साफ सफाई से लेकर खाना बनाने तक का काम किया करता था। एक दिन मैंने अपने मोबाइल में पोर्न मूवी देख ली मेरे अंदर बड़ी गर्मी पैदा हो गई मैं समझ नहीं पा रही थी कि गर्मी को कैसे बुझाया जाए तभी मुझे रामू दिखा मैंने उसे अपने पास बुला लिया।

रामू को मैं अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी और वह भी मेरी तरफ देखे जा रहा था। उसकी नजरें मेरे स्तनों से हट ही नहीं रही थी मैं भी पूरी तरीके से मचलने लगी थी। मैंने जैसे ही रामू के लंड पर हाथ लगाया तो वह कहने लगा आप यह क्या कर रही है लेकिन मैं उसके लंड को हिलाने लगी थी और वह मुझे कहने लगा आप ऐसा मत कीजिए।

देखते ही देखते मैंने उसके काले और मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और उसे चूसने लगा। मैं बड़े ही अच्छे तरीके से उसके लंड को मुंह के अंदर बाहर कर रही थी और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया। जब मैंने रामू के लंड से पानी बाहर निकाल दिया तो उसकी उत्तेजना जाग चुकी थी और उसने मेरे साड़ी के ऊपर करते हुए मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया।

वह मेरी चूत को बढ़िया तरीके से चाट रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था काफी देर तक उसने ऐसा ही किया। जब मेरी योनि से पानी बाहर निकलने लगा तो वह अपने आप को नहीं रोक पाया। वह मुझे कहने लगा आपकी योनि बहुत ही ज्यादा गरम हो चुकी है मैंने उसे कहा तो फिर तुम अपने लंड को डालकर ठंडा कर दो।

वह कहने लगा अभी डाल देता हूं उसने अपने मोटे लंड को बाहर निकाल लिया और जैसे ही उसने मेरी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू किया तो मैं मचलने लगी। मेरी चूत के अंदर से पानी निकल रहा था मुझे क्या मालूम था कि वह इतना ज्यादा चोदू किस्म का होगा।

वह मुझे तेजी से धक्के मार रहा था मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया मैंने अपने पैरों को चौड़ा किया तो वह मुझे कहने लगा काफी मजा आ रहा है। रामू का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था अब मैं उसके लंड को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

मैंने उसे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ते हुए कहा तुम मेरी इच्छा को पूरा कर दो उसने भी अपनी गति को पकड़ लिया और इतनी तेज गति से मुझे धक्के देने लगा मेरी योनि का बुरा हाल हो चुका था और मेरी योनि का भोसडा बन चुका था। मैंने रामू से कहा तुमने मेरा बुरा हाल कर दिया है वह कहने लगा भाभी बस रुक जाओ कुछ ही देर बाद उसने अपने वीर्य की पिचकारी से मेरे तन बदन को भिगा दिया।

फैमली डॉक्टर से चुद ही गयी - Family Doctor Se Chut Chudai Karwayi

फैमली डॉक्टर से चुद ही गयी - Family Doctor Se Chut Chudai Karwayi , लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

घर के आंगन में सारे बच्चे खेल रहे थे और सब लोग बड़े ही खुश थे उनके खेल की आहट से घर का आंगन गूंज रहा था और माहौल रंगीन बना हुआ था मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं बच्चों की तरफ देख रही थी बच्चों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि हमारा बचपन लौट आया हो तभी मैंने अपनी जेठानी से कहा दीदी देख रही हो बच्चे कितनी खुशी से खेल रहे हैं और उनकी खुशी का अंदाजा लगा पाना इस वक्त मुमकिन नहीं है।

मेरी जेठानी कहने लगी हां पायल तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो मैंने उनसे कहा दीदी हम लोग भी बचपन में ऐसे ही खेला करते थे और बचपन में हमें काफी खुशी होती थी मुझे तो बच्चों को देखकर अपने पुराने दिन याद आ गए। दीदी कहने लगी हां मुझे भी तो अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं हम लोग भी तो लुका छुपी खेला करते थे।

मैं और मेरी जेठानी आपस में बात कर रहे थे तभी मेरी सासू मां भी आ गई और वह कहने लगी कि चलो तुम लोग दोपहर का खाना बना लो पता है ना आज घर में मेहमान आने वाले हैं। अपनी कड़क आवाज से उन्होंने हमें यह एहसास दिलाया कि वह घर की मुखिया हैं और हम लोग भी चुपचाप रसोई में चले गए और रसोई का काम करने लगे।

हम लोग अब खाना बनाने में लगे हुए थे और आपस में बातें कर रहे थे करीब दो घंटे बाद हमारे घर पर जो मेहमान आने वाले थे वह भी आ चुके थे और उनका अतिथि सत्कार बड़े ही अच्छे तरीके से मेरी सासू मां ने किया। वह लोग मेरी सासू मां के पक्ष से ही ताल्लुक रखते थे इसलिए उन्होंने उनका स्वागत बड़े ही अच्छे तरीके से किया और जब हम लोग उनसे मिले तो उन्होंने हमारा परिचय भी करवाया।

हम लोगों ने रसोई से खाना लाकर बाहर बैठक में लगा दिया था सब लोगों ने साथ में बैठकर भोजन किया बच्चों की छुट्टी थी तो बच्चे भी हमारे साथ ही खा रहे थे। उसके बाद रसोई की साफ-सफाई का काम शुरू हुआ जो कि लगभग 4:00 बजे तक चला 4:00 बजे हम लोग पूरी तरीके से फ्री हो चुके थे लेकिन अभी वह मेहमान घर पर ही थे और शाम के करीब 5:00 बजे वह लोग चले गए। मैं और मेरी सासू मां आपस में बात कर रहे थे तो उन्होंने मुझे बताया कि वह मेरे मायके की तरफ से हैं और उनसे काफी सालों बाद मेरी मुलाकात हो रही है।

मेरी सासू मां का भी अपने मायके से पूरा लगाओ है हालांकि उनका कोई भाई नहीं था लेकिन उसके बावजूद भी वह हमेशा ही अपने मायके जाती रहती थी अब उनके परिवार में कोई भी नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने अपने पुराने लोगों से मेलजोल बनाकर रखा हुआ है।

शाम के वक्त जैसे ही अजय घर लौटे तो अजय कहने लगे पायल मेरे लिए कुछ ठंडा बना दो मैंने उन्हें कहा कि मैं आपके लिए लस्सी बनाकर लाती हूं। मैंने अजय को लस्सी दी तो उन्होंने लस्सी पीते हुए कहा सही में आज तो मजा आ गया और इतनी गर्मी में काफी राहत मिल रही है। मैंने उन्हें कहा लेकिन आप इतने पसीना पसीना हो रखे हैं वह कहने लगे बाहर देखो कितनी ज्यादा गर्मी हो रही है और वह जब मुझे अपने ऑफिस के बारे में बताने लगे तो वह मुझे कहने लगे कि मेरा प्रमोशन भी कुछ दिनों बाद शायद हो जाएगा।

मैंने उन्हें कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है वैसे भी इस महंगाई के दौर में इतना बड़ा परिवार चला पाना मुश्किल ही है। हम लोग संयुक्त परिवार में रहते है और सयुंक्त परिवार में रहने के कुछ फायदे तो हैं लेकिन कुछ नुकसान भी हैं हम लोगों को अपने मर्जी से कुछ करने को नहीं मिल पा रहा था और हर चीज के लिए मुझे सासू मां से पूछना पड़ता था जिस वजह से मुझे कई बार लगता कि जैसे हम उनके हाथ की कठपुतली हैं और वह हमेशा ही हम पर रौब जताती रहती थी।

मैंने और अजय ने तो कई बार सोचा कि हम लोग अलग रहने के लिए चले जाएं लेकिन माजी के होते हुए ऐसा संभव ना हो सका और हम लोग अभी सब साथ में ही रहते हैं। मैंने अजय से कहा कि अजय बच्चों की फीस भरनी है वह कहने लगे ठीक है तुम मुझे बता देना की कितनी फीस भरनी है कल मैं पैसे ले आऊंगा।

मैंने अजय से कहा ठीक है आप कल पैसे ले आइएगा मैं आपको बता दूंगी की कितनी फीस भरनी है क्योंकि बच्चों की फीस हर महीने बदलती रहती थी इस वजह से अभी तक कुछ सही तरीके से पता नहीं चल पाया था कि इस बार कितनी फीस हुई है। मैं और अजय एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार भी करते हैं हमारे प्यार की वजह सिर्फ हम दोनों के बीच का विश्वास है हम दोनों एक दूसरे पर बहुत भरोसा करते हैं।

अजय ने कभी मेरे भरोसे को टूटने नहीं दिया और ना ही मैंने अजय के भरोसे को कभी टूटने दिया हम दोनों की शादी को आज 8 वर्ष होने आए हैं लेकिन आज भी हम दोनों के बीच वैसा ही प्यार है जैसा कि पहले था। मेरी सासू मां अजय पर बहुत ही भरोसा करती थी और अजय ही तो घर के लिए ज्यादा पैसे दिया करते थे घर का खर्चा वही चलाया करते थे मेरे जेठ जी की इतनी तनख्वाह नहीं थी इसलिए उनसे ज्यादा उम्मीद कर पाना मुश्किल होता था।

अजय एक अच्छी नौकरी थे अजय पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी लग गए थे और उसके बाद से ही उन्होंने घर की जिम्मेदारी का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया था और मुझे भी इस चीज की खुशी की थी कि अजय घर की सारी जिम्मेदारियों को अपना मानते हैं। उन्हें बच्चों से बड़ा लगाव था और एक बार अजय अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए अंबाला जाने वाले थे अजय ने मुझे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए अंबाला जा रहा हूं यदि कोई भी समस्या हो तो तुम मुझे फोन कर के बता देना।

मैंने अजय ने कहा हां यदि कोई समस्या या परेशानी होगी तो मैं तुम्हें जरूर फोन कर दूंगी। अजय को घर की चिंता हमेशा ही रहती थी इसलिए वह घर को लेकर चिंतित रहते थे और हमेशा ही घर के बारे में वह बहुत सोचते थे।

अजय भी अपने काम के लिए अंबाला जा चुके थे और उसी दौरान मेरी बच्ची की तबीयत खराब हो गई मैंने अजय को फोन किया तो अजय कहने लगे मैं अभी आ जाता हूं फिर मैंने सोचा अजय को बुलाना ठीक नहीं रहेगा वह अपने काम के सिलसिले में गए हुए हैं। हमारे पड़ोस में ही रहने वाले भाई साहब हैं उनका नाम गौतम मिश्रा है उनकी अजय के साथ अच्छी बातचीत है तो मैंने उन्हें जब इस बारे में बताया तो वह कहने लगे अरे भाभी जी कैसी बात कर रही है मैं अभी बच्ची को ले चलता हूं।

उन्होंने अपनी कार मे मुझे और मेरी बच्ची को अस्पताल तक पहुंचाया उसके बाद हमने बच्ची को डॉक्टरों को दिखाया डॉक्टर ने कहा कि आज बच्ची को यहीं रखना पड़ेगा। उस दिन रात को उसे वहीं एडमिट करवाना पड़ा और अगले दिन सुबह मैं उसे लेकर घर लौट आई अजय का भी मुझे बार-बार फोन आ रहा था मैंने अजय से कहा तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक है। उन्होंने गौतम जी से भी बात की तो वह कहने लगे कोई बात नहीं यह तो मेरा फर्ज था हम लोग एक दूसरे के सुख दुख में काम तो आएंगे ही ना।

गौतम जी ने मेरी बहुत मदद की और उसके बाद भी हमारी कई बार मदद कर दिया करते थे। अजय अपने काम के सिलसिले मे ज्यादा ही बाहर रहने लगे थे और उन्हें बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था मैं इस बात को समझ सकती थी कि वह कितने ज्यादा बिजी रहने लगे हैं लेकिन मुझे भी यह लग रहा कि उन्हें थोड़ा बहुत समय तो मेरे लिए निकालना चाहिए।

मैंने अजय से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगे पायल बस कुछ समय की बात है उसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन मुझे नहीं लगता था कि यह कुछ समय की बात है क्योंकि अजय के पास बिल्कुल भी टाइम नहीं था और हम दोनों के बीच में दूरियां बढ़ती जा रही थी।

मेरे अंदर भी कुछ फीलिंग थी जो अधूरी रह गई थी मैं अपनी गर्मी को बुझा नहीं पा रही थी एक दिन मैं घर पर ही थी और गौतम जी आए हुए थे गौतम जी आए थे तो मेरा पैर अचानक से फिसला और मेरे स्तन उनके मुंह से जा टकराए यह बड़ा ही अजीब था लेकिन इस वाक्या के बाद गौतम की धारणा मेरे लिए पूरी तरीके से बदलने लगी और मैं भी गौतम को चाहने लगी थी।

हम दोनों के दिलों में एक दूसरे को लेकर सेक्स करने की इच्छा जाग उठी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे। जब हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हम दोनों की नज़रे टकराती और आखिरकार हम दोनों की सहमति बनी गई जब पहली बार में गौतम के साथ अपने अंतर्वस्त्रों में थी तो मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था लेकिन गौतम ने मेरे कपडो को उतारते हुए अपनी जीभ से मेरी चूत को चटना शुरू किया तो मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी थी। गौतम भी रह नहीं पा रहे थे गौतम ने अपने लंड को बाहर निकाला और मैंने उसे अपने मुंह में समा लिया मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया था।

जिस प्रकार से मै गौतम के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उससे मेरे अंदर की बेचैनी और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी और मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरी योनि से लगातार पानी निकल रहा था और गौतम ने भी अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बड़े ही अच्छे से महसूस कर रहे थे।

यह पहला मौका था जब मैंने किसी गैर के साथ संबंध बनाए थे लेकिन मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और गौतम ने भी अपने लंड को मेरी योनि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था। जब गौतम ने मुझे घोड़ी बनाकर धक्के देने शुरू किए तो मैं और भी ज्यादा बेचैन होने लगी थी और मेरी योनि से पानी निकलने लगा।

मैं अपनी चूतडो को गौतम के लंड से मिलाने लगी थी और मेरी योनि से भी लगातार पानी बाहर की तरफ निकल रहा था और जैसे ही मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही गरम पानी बाहर निकलने लगा तो गौतम ने अपने वीर्य को मेरी योनि में गिरा दिया और मेरी गर्मी को शांत कर दिया।

पड़ोसन भाभी को लंड का दीवाना बनाया - Padosan Bhabhi Ki Lund Ka Deewana Banaya

पड़ोसन भाभी को लंड का दीवाना बनाया - Padosan Bhabhi Ki Lund Ka Deewana Banaya , भाभी की चुदाई , भाभी की चूत का बाजा बजाया , भाभी की गांड मारी , भाभी ने लंड चूसा.

एक पुरानी भाभी की याद आ गई… तब मैं करीब 24 साल का था, अविवाहित था, अपने पैतृक निवास से दूर एक छोटा सा घर किराये पर लेकर नौकरी कर रहा था।
स्कूल के जमाने से मैं हारमोनियम बज़ाया करता था। शहर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुझे सादर निमन्त्रण मिलता था।

गरमी के दिन थे, मैं ऑफिस से घर में आकर अपने कपड़े निकाल कर सिर्फ अंडरवियर और बनियान में ही बिस्तर पर पड़ा आराम कर रहा था। खुला हुआ था इसलिए मेरे लंड में कुछ-कुछ सेक्स की उत्तेजना महसूस हो रही थी। मुझे बिस्तर पर आराम करते हुए लगभग दस मिनट हो गए होंगे.. इतने में किसी ने दरवाजे पर खटखटाया।

‘इस वक्त कौन आया होगा?’ सोचते हुए मैंने दरवाजा खोला और शर्म के मारे लज्जित सा गया।

सामने प्रभा भाभी खड़ी थीं, प्रभा भाभी हमारी ही कालोनी में से मेरे अच्छे दोस्त की बीवी थी, उनकी उम्र लगभग 35 होगी.. वो शरीर से बड़ी ही मस्त और आकर्षक थी।

‘आईए ना अन्दर..’ दरवाजे से हटते हुए मैंने बोला।
वो कमर लचकाती हुई अन्दर आकर बिस्तर पर बैठ गई।
मैंने झट से लुंगी पहन ली और कहा- कैसे आना हुआ?

‘वैसे तो मैं आपको बधाई देने आई हूँ..’
मैंने थोड़ा आश्चर्य से पूछा- बधाई? वो किस बात की?
‘कल आपने हारमोनियम बहुत अच्छी बजाई.. अभी भी वो स्वर मेरे कान में गूँज रहे हैं।’

उसकी बात सही थी क्योंकि मैं एक कार्यक्रम में हारमोनियम बजा रहा था।
मैंने कहा- मैं ऐसे ही बजा रहा था.. पहले से ही मुझे संगीत का शौक है।
‘इसीलिए मैं आपसे मिलने के लिए आई हूँ।’

मुझे उसकी यह बात कुछ समझ में नहीं आई.. मैं शांत ही रह गया।
वो फिर से बोली- एक विनती है आपसे.. सुनेंगे क्या?
‘आप जो कहेंगी.. वो करूँगा.. इसमें विनती कैसी..’ मैंने सहजता से कहा।
‘मुझे भी संगीत का शौक है.. पहले से ही मुझे हारमोनियम सीखने की इच्छा थी.. पर कभी वक्त ही नहीं मिला… आप अगर मेरे लिए थोड़ा कष्ट उठाकर मुझे सिखायेंगे.. तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा.. हमारे घर में हारमोनियम भी है। हमारे उनसे भी मैंने इजाजत ले ली है.. और रात का खाना होने के बाद हम तालीम शुरू कर देंगे।’
मुझे उन्हें ‘ना’ कहना मुश्किल हो गया.. मैंने कहा- चलेगा.. रोज रात को हम नौ से दस तालीम करेंगे।

ऐसा सुनते ही उसका चेहरा खिल उठा.. ‘दो-तीन दिन में तालीम शुरू करेंगे।’ ऐसा तय करवा के वो चली गई।

तीसरे दिन मैं रात को साढ़े नौ बजे उसके घर पहुँच गया।
‘आनन्द कहाँ है..?’ मैंने अन्दर आते ही पूछा।
‘आपकी राह देखते-देखते वो सो गए हैं.. आप कहें तो मैं उन्हें उठा दूँ?’
मैंने कहा- नहीं.. रहने दो।

मैं प्रभा भाभी के साथ एक कमरे में चला गया, यह जगह तालीम के लिए बहुत अच्छी है।
प्रभा भाभी ने सब खिड़कियाँ बंद की.. और कहा- यह कमरा हमारे लिए रहेगा..

एक पराई औरत के साथ कमरे में अकेले रह कर मैं कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था। प्रभा भाभी को देख मेरे लंड में हलचल पैदा होने लगती थी।
उस दिन उसको बेसिक चीजें सिखाईं और मैं अपने घर के लिए चल पड़ा।

उसके बाद कुछ दिनों में तालीम में रंग चढ़ने लगा। प्रभा भाभी मेरा बहुत अच्छी तरह से खयाल रखती थीं, चाय तो हर रोज मुझे मिलती थी.. कभी-कभी आनन्द भी आ जाता.. पर ज्यादा देर नहीं रूकता.. लगता था उसका और संगीत का कुछ 36 का आंकड़ा था।

उस दिन शनिवार था.. कुछ काम की वजह से मुझे तालीम के लिए जाने के लिए देरी हो गई थी, दस बजे मैं प्रभा भाभी के घर गया।
‘आज तालीम रहने दो..’ ऐसा कहने के लिए मैं गया था.. पर मैंने देखा.. प्रभा भाभी बहुत सजधज के बैठी थीं।

मुझे देखते ही उसका चेहरा खिल उठा, मैं उसकी तरफ देखता ही रह गया, बहुत ही आकर्षक साड़ी पहने उसकी आँखों में अजब सी चमक थी।

‘आज तालीम रहने दो.. आज सिर्फ हम तुम्हारी मेहमान नवाजी करेंगे।’
‘मेहमान नवाजी..?’ मैंने खुलकर पूछा।
‘आज ‘वो’ अपने मौसी के यहाँ गए हैं.. वैसे तो मैं आपको खाने पर बुलाने वाली थी.. लेकिन अकेली थी.. इसलिए नहीं आ सकी।’

उन्होंने दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करते हुए कहा.. उन्होंने मेरे लिए ऑमलेट और पाव लाकर दिया। मैंने ऑमलेट खाना शुरू कर दिया..
कि तभी उसने अपने कपड़े बदलने शुरू किए, मैं भी चोर नजरों से उसे देखने लगा, उसने अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज भी निकाल डाला और अन्दर के साए की डोरी भी छोड़ डाली..

मेरे तो कलेजे में ‘धक-धक’ सी होने लगी।
प्रभा भाभी के शरीर पर सफेद ब्रा और छपकेदार कच्छी थी।

उसकी छाती के ऊपर बड़े-बड़े मम्मे ब्रा से उभर कर बाहर को आ गए थे। ये नज़ारा देख कर तो मेरा लंड फड़फड़ाने लगा, उसके गोरे-गोरे पैर देख कर मेरा मन मचलने लगा।
सामने जैसे जन्नत की अप्सरा ही नंगी खड़ी हो गई हो.. ऐसे लग रहा था, कामुकता से मेरा अंग-अंग उत्तेजनावश कांपने लगा।
फिर उसने एक झीना सा गाउन लटका लिया।

‘आज तुम नहीं जाओगे.. आज मैं अकेली हूँ..’
और वो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर बेडरूम में लेकर गई, मानो मुझसे ज्यादा उसको ही बहुत जल्दी थी।
उसके मेकअप के साथ लगे हुए इत्र की महक पूरे कमरे में छा सी गई थी।

मेरी ‘हाँ’ या ‘ना’ का उन्होंने विचार न करते हुए मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसके स्पर्श से मेरा अंग-अंग खिल उठा.. कुछ ही देर में भाभी ने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
मेरी दोनों जाँघों के बीच में खड़ा हुआ बहुत ही लम्बा मेरा लंड प्रभा भाभी देखती ही रह गई… और अपना गाऊन निकालने लगी..

‘तुम्हारी होने वाली बीवी बहुत ही भाग्यशाली होगी..’ गाऊन निकालते हुए उसने कहा।
‘वो कैसे?’ मैंने उसके गोरे-गोरे पेट को देखते हुए कहा।
‘इतना बड़ा लंड’ जिस औरत को मिलेगा.. वो तो भाग्यवान ही होगी ना.. मैं भी भाग्यवान हूँ.. क्योंकि अबसे मुझे तुम्हारा सहवास मिलेगा।’

उसने पीछे हाथ लेते हुए अपनी ब्रा निकाली।
मुझे उसके साहस का आश्चर्य हुआ।
झट से उसके तरबूज जैसे मम्मे बाहर आ गए।

उसके बाद झुक कर अपनी पैन्टी भी निकाल दी.. दूध सा गोरा जिस्म है भाभी का… पूरी नंगी.. मेरे सामने खड़ी थी.. मेरा लंड फड़फड़ाने लगा।
वो झट से मेरे पास आ गई और मेरे गालों पर चुम्बन लेने लगी.. उसने मुझे कस के पकड़ा.. वो तो मदहोश होने लगी थी। उसने अपने नाजुक हाथों से मेरा लंड हिलाना शुरू किया और झुक कर अपने होंठों से चूमने लग गई..

मेरे दिल में हलचल सी पैदा हो गई.. भाभी की ये हरकत बहुत ही अच्छी लग रही थी।
वो मेरा लंड वो ख़ुशी के मारे चाट रही थी, मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ रखकर दबाना शुरू किया। उसके बड़े-बड़े मुलायम नितम्ब.. हाथों को बहुत ही अच्छे लग रहे थे। मैं बीच-बीच में उसकी चूत में उंगलियाँ डालने लगा… उसकी चूत गीली हो रही थी।

भाभी तो मुझसे चुदवाने के लिये दीवानी हो रही थी।

मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी टांगें फैलाकर मैं उसकी चूत चाटने लगा। ऐसा करते ही वो मुँह से ख़ुशी के स्वर बाहर निकालने लगी।
मैंने भी जोर-जोर से उसकी चूत चाटने को शुरू कर दिया… उसकी टांगें फैलाकर अपना मूसल सा मोटा लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर घुसाने लगा।

उसको मेरा लंड अन्दर जाते समय बहुत ही मजा आ रहा था। वो जोर-जोर से चिल्ला कर बोल रही थी- डालो.. पूरा अन्दर डालो.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मेरा लंड अब सटासट उसकी चूत में जा रहा था.. मेरी रफ्तार बढ़ गई.. मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा रहा था..
भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया था, मैंने भी उसके मोटे-मोटे मम्मों को दबाते हुए उसको चोदना चालू किया।

बहुत ही मजा आ रहा था… बीच-बीच में उसके होंठों में होंठ डाल के नीचे से जोर-जोर से लंड अन्दर घुसा रहा था, नीचे से दिए धक्कों से उसके मम्मे जोर-जोर से हिल रहे थे, उसकी सुंदर काया बहुत ही आकर्षक दिख रही थी, उसको चोदने में बहुत ही आनन्द मिल रहा था, मेरी रफ्तार इतनी बढ़ गई कि बिस्तर की आवाज गूँजने लगी।

दोनों ही चुदाई के रंग में पूरे रंगे जा रहे थे। मैं अपना लंड जितना उसकी चूत में घुसा सकता था.. उतना जोर-जोर से घुसा रहा था। इतनी ताकत से उसे चोदना चालू किया कि उसने भी मुझे जोर से पकड़ लिया।

मेरा वीर्य अब बाहर आने का समय हो गया था, जोर से चूत में दबा कर मैंने सारा वीर्य उसकी मरमरी चूत में ही छोड़ दिया और थोड़ी देर उसके शरीर पर ही पड़ा रहा।

‘वाह मुझे आज क्या मस्त चोदा है तुमने.. मेरे पति ने भी मुझे आज तक ऐसा आनन्द नहीं दिया है.. जो आज तुमने मुझे दिया है.. आह्ह.. तृप्त हो गई.. प्लीज मुझे जब भी वक्त मिले.. मुझे चोदने जरूर आ जाना..’
मैंने कहा- मुझे भी तुम्हें चोदने में बहुत मजा आ गया प्रभा..
मैं तो उसे अब नाम से पुकारने लगा।

‘तुम्हें जब भी चुदवाने की इच्छा हो.. तब मुझे बताना.. मैं कुछ भी काम हो.. सब छोड़कर तुम्हारे पास आ जाऊँगा.. तुम्हें चोदने के लिए..’

प्रभा तो मेरे लंड की जैसे दीवानी हो गई थी।

मित्रो.. आपको भाभी की लंड की दीवानगी कैसी लगी.. कमेन्ट लिख भेजें..

अमीर भाभी की मस्त चूत का मजा लिया - Ameer Bhabhi Ki Mast Choot Ka Maja Liya

अमीर भाभी की मस्त चूत का मजा लिया - Ameer Bhabhi Ki Mast Choot Ka Maja Liya , पैसों वाली महिला को चोदा , धनी भाभी की चुदाई , अमीर औरत की गांड मारी , धनवान स्त्री से सेक्स किया.

नमस्ते मित्रो, मेरा नाम सौरभ है, मैं जब स्कूल में पढ़ता था, तब से हिंदी सेक्स कहानियाँ पड़ता हूँ।
मैं लखनऊ शहर उत्तर प्रदेश में रहता हूँ।

यह मेरी पहली सेक्सी कहानी है एक प्यासी भाभी की… अगर कुछ कमी हो तो माफ़ करना।

कहानी मेरी और एक 28 साल की विवाहिता स्त्री की है जिसका नाम विद्या है, यह काल्पनिक नाम है।

विद्या एक 28 साल सुन्दर मनमोहक, गोरी, हाइट 5’6″ के लगभग जवानी से भरपूर भाभी है, पतली सी पर उसके वक्ष मस्त सुडौल 32 साइज़ के हैं।
कमर तो पूछो मत इतनी नाजुक कि कोई देखे तो पागल हो जाए, चूतड़ वो मोटे मोटे…

उसका पति एक कम्पनी का मालिक है।

मैं हमेशा एक नेटवर्किंग साईट पे लखनऊ बॉय के नाम से कमेन्ट करता था कि किसी भाभी, आंटी, डिवोर्सी, विधवा को सेक्स या अच्छी फ्रेंडशिप की जरूरत हो तो लखनऊ बॉय से संपर्क करें।
और आगे मैं मेरा मोबाइल नंबर डालता था।

शुरुआत में मुझे बहुत दूर से मिस कॉल या मैसेज आते थे भाभी और लड़कियों के।

एक दिन मुझे रात को 9:30 को एक कॉल आई।
मैं समझ गया कि यह किसी लड़की या भाभी का होगा।
मैंने रिसीव किया।

उधर से एक महिला की आवाज आई, उसने पूछा- क्या मैं लखनऊ बॉय से बात कर सकती हूँ?
मैंने कहा- मैं क्या मदद कर सकता हूँ आपकी?

वो- जी मैंने आपका नंबर नेट से लिया है, क्या मेरे साथ आप फ्रेंडशिप करोगे?
मैं- जी बिल्कुल… जरूर करूँगा… आपका नाम और सिटी?

वो- जी मेरा नाम विद्या है और मैं लखनऊ की ही रहने वाली हूँ।
मैं- वाह… मैं भी लखनऊ का हूँ।

मैं बहुत खुश था क्यूँकि यह पहली महिला थी लखनऊ से…
मैं बोला- कहिये आपकी किस तरह सेवा करूँ?

विद्या और मैं उस रात बहुत देर तक बातें करते रहे।

उसने बताया कि उसका पति हमेशा काम की वजह से बाहर रहता है।
और आजकल वो अकेलापन महसूस करती है।

फिर हमारी रोज बातें होने लगी और कुछ दिनों में हम सेक्स की बाते करने लगे।

एक दिन उसने कहा- क्या तुम मुझे सेक्स का सुख दोगे?
मैंने हाँ कहा।

फिर उसने मुझे अपने घर का पता दिया जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं था, मस्त लखनऊ का पोश एरिया था।

मैं अगले ही दिन उसके घर पहुँचा, बेल बजाई।

जैसे ही दरवाजा खुला, मैं उसे देखत़ा रह गया।
क्या सुन्दर थी वो…

उसने मुझे अन्दर बुलाया।
उसका घर अन्दर से बहुत खूबसूरत और कीमती बनावट का था।

और विद्या को तो मैं देखता ही रहा।
उसका गोरा रंग, पतली कमर, मस्त टाईट बूब्स।
हे भगवान… मैं तो पागल हो गया।

फिर उसने मुझे जूस पिलाया, बातों बातों में घर दिखाया और आखिर में हम बेडरूम में आ गये।

वो मेरे पास आई, मैंने देर ना करते हुए उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया, उसके होटों को चूमने लगा, वो भी मेरा सहयोग दे रही थी।

पन्द्रह मिनट की चूमाचाटी के बाद मैंने उसके बूब्स दबाने शुरु किये।
क्या कड़क थे उसके बूब्स मस्त गोल…

हम दोनों का पूरा शरीर एक दूसरे पे घिस रहा था।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और अपने कपड़े निकाल दिए। उसने भी अपनी साड़ी ब्लाउज़ पेटीकोट निकाल दिया और अब वो सिर्फ लाल ब्रा और सफ़ेद पेंटी में थी। उसकी चमकदार जांघें, मस्त सपाट पेट, पेंटी जैसे सिर्फ उसकी चूत को ढके हुये थी।

उसका चहेरा लाल हो चुका था।

मैंने झट से उसकी पेंटी उतार फेंकी और मस्त छोटी दो इंच की चूत के साथ हाथ से खेलने लगा और फ़िर चाटने लगा।
उसकी चूत चाटने में मस्त खारी लग रही थी। बीस मिनट मैं विद्या की चूत चाटता रहा।

प्यासी विद्या भाभी अपने बूब्स खुद ही दबाती रही।
फिर वो झड़ गई।
मैं उसका सारा पानी साफ कर गया।

मैंने मेरा लंड इतना बड़ा कभी नहीं देखा था, फ़ूल के 7 इंच का हो गया था।

विद्या ने उसे कुछ देर मसला, चूमा, हिलाया और झट से मुख में लेकर चूसने लगी। वो चूसने में इतनी माहिर तो नहीं लग रही थी पर पूरी तरह खो चुकी थी लंड चूसने में…

मैं भी इतना एक्साईट हो चुका था कि कब उसके मुँह में पानी निकाल दिया, पता नहीं चला।

विद्या भाभी इतनी प्यासी थी कि वो पूरा पानी पी गई।
पूरा लंड साफ कर दिया।

कुछ देर बाद मेरा लंड टाईट हो गया था।

उसने अपने पैर फ़ैला करके मेरा लंड अपनी छोटी चूत पे रखा, मैंने धीरे धीरे अपना आधा लंड अन्दर घुसाया, थोड़ा अन्दर जाने के बाद अब नहीं जा रहा था आगे।

मैंने फिर लंड थोड़ा पीछे खींचा और आगे झटका दिया। वो चीख उठी और उसकी आँखों से आँसू आने लगे।
मैं थोड़ा रुका और धीरे धीरे झटके लगाने लगा।

उसकी चूत मस्त टाइट थी।

मैं उसे 20 मिनट तक चोदता रहा और बाद में पानी उसकी चूत में निकाल दिया।
उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे।

फिर एक घंटा हम चिपक कर सो गये।

बाद में उसने मुझे उठाया और एक ग्लास दूध दिया पीने को।

दूध पीने के बाद मैंने कपड़े पहने और उसके लबों पर चुम्बन किया और आने लगा।

उसने जाते जाते मुझे पांच हजार रुपये दिए जो मैंने वापस कर दिए।

और फिर हम दोनों जब भी वक्त मिलता, मस्त चुदाई करते।

तू मेरे पति से चुद ले मैं तेरे पति से चुद लुंगी - Tu Mere Pati Se Chud Le Main Tere Pati Se Chud Lungi

तू मेरे पति से चुद ले मैं तेरे पति से चुद लुंगी - Tu Mere Pati Se Chud Le Main Tere Pati Se Chud Lungi , पति बदलकर चुदाई , पत्नियों की अदला बदली में चोदा चादी.

मेरा नाम संगीता जैन है, मैं तेईस वर्षीया खूबसूरत और मांसल बदन की लड़की हूँ, मैं आधुनिक विचारों की हूँ और फैशनेबल तरीके से रहना मुझे अच्छा लगता है।
हम लोग चण्डीगढ़ शहर में अभी नए आए हैं, मेरे पति ॠषभ जैन एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं और महीने में पंद्रह-बीस दिन बाहर के दौरे पर रहते हैं।

मेरे पति ॠषभ काफी खुले विचारों के इन्सान हैं, वे न केवल मेरे लिये सेक्सी और रोमांटिक किताबें खरीद कर लाते हैं बल्कि ब्ल्यू फिल्में भी मुझे दिखाते हैं, चुदाई के खेल में नये नये तरीके अपनाने के लिये उकसाते हैं, उनके कहने पर मैंने कई बार चुदाई के मामले में काफी मौज मस्ती की है, वे मेरी इस आदत का कभी बुरा नहीं मानते बल्कि खुश होते हैं।

हमने इस शहर में जो घर लिया है, इसके दो हिस्से हैं, जिसमें से एक में हम लोग रहते हैं और दूसरे हिस्से में एक अन्य नव दम्पति रहते हैं, उन दोनों के नाम नवीन और शीनू है, नवीन किसी ऑफिस में काम करते हैं, वे सुबह दस बजे घर से निकलते हैं और शाम को पाँच साढ़े पांच बजे के बीच वापस आते हैं, हाँ.. कभी कभी उन्हें भी दौरे पर बाहर भी जाना पड़ता है।

शीनू काफी सीधी-सादी युवती है, उसके साथ कुछ ही दिनों में मेरी अच्छी दोस्ती हो गई, हम लोग आपस में हर तरह की बातें कर लेती हैं, शीनू वैसे तो काफी संकोची स्वभाव की है लेकिन लड़कियाँ एक दूसरे को घर-बाहर की हर बात बता देती हैं, यही हाल शीनू का है, वह मुझे अपने परिवार की सारी बातें बता देती है, यहाँ तक कि हम दोनों अपनी सेक्स लाइफ के बारे में भी खुल कर बातें कर लेती हैं।

एक दिन शीनू ने मुझे बताया कि उसके पति नवीन को व्हिस्की पीने का शौक है और नशे में होने के बाद वे उसे काफी रात तक परेशान करते रहते हैं।

यह बात सुन कर मुझे उत्सुकता हुई, मैं उसे कुरेदने लगी कि वह इस बारे में और खुल कर बताए।

काफी कहने के बाद आखिरकार शीनू बताने को तैयार हुई, वह बोली- ये चाहते हैं कि हम लोग कमरे की लाईट जला कर पूरे नंगे होकर चुदाई करें, इतना ही नहीं, वे मुझे भी शराब पीने की भी जिद करते हैं, ताकि मैं भी उनकी तरह बेशर्म हो जाऊँ, कई बार ये मुझसे अपना लौड़ा चूसने को भी कहते हैं, लेकिन लौड़ा चूसना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, लौड़ा चूसने में मुझे कई बार उबकाई आ जाती है।

शीनू ने बातों बातों में यह भी बताया कि नवीन का लौड़ा काफी मोटा और लम्बा है, चुदाई के दौरान वे काफी देर से झड़ते हैं, जितनी देर में वे एक बार झड़ते हैं, उतनी देर में शीनू दो बार झड़ जाती है।

‘मेरे पति ॠषभ की आदत उलटी है!’ शीनू की देखादेखी मैं भी बताने लगी- उन्हें अपना लौड़ा पिलाने में उतना मजा नहीं आता जितना की मेरी चूत चूसने में आता है, मुझे चित लिटा कर जब वे मेरी चूत पर जीभ फ़ेरते हैं और मेरी फांकों को अपने होंठों में दबा कर चूसते हैं तो मेरा पूरा बदन गर्म हो जाता है, यदि मर्द चूत को मुँह में रख कर औरत के साथ मुख मैथुन करे तो वाकई उसे बहूत मजा आता है।

शीनू बोली- संगीता तू कितनी खुश किस्मत है कि तेरा पति तेरी चूत को मुँह से चाटता और प्यार करता है, काश मेरे पति भी ऐसे होते, लेकिन उनकी निगाह में तो बीवी की चूत की सिर्फ इतनी ही अहमियत है कि उसे अपने डण्डे जैसे लौड़े से बुरी तरह ठोका पीटा जाये!

‘तू इतना निराश क्यों हो रही है शीनू?’ मैंने शीनू के गले में अपनी बाँहें डाल कर उसे अपने से चिपटाते हुए कहा- तेरी चूत चटवाने की ज्यादा इच्छा हो तो किसी दिन अपने ॠषभ से तेरी यह इच्छा पूरी करवा दूँ, बोल?

मेरी बात पर शीनू हंस कर रह गई।

लेकिन मैंने जब से उसके मुँह से यह सुना था कि उसके पति का लौड़ा काफी मोटा और लम्बा है और वह काफी देर से झड़ता है तब से मेरे मन में बार बार यह विचार पैदा हो रहा था कि काश एक बार किसी तरह मुझे नवीन का लौड़ा देखने को मिल जाये।

संयोग से कुछ दिन बाद ही मेरी यह इच्छा पूरी हो गई, शीनू ने एक दिन मुझे बताया कि उसकी शादी कि सालगिरह है और नवीन एक स्कॉच की बोतल लेकर आया है, वह रात में लाईट जला कर चुदाई भी करना चाहता है।

यह सुन कर मैंने शीनू को समझाया कि एक अच्छी बीवी की तरह आज की रात उसे यह सब करना चाहिये, जो कि उसका पति चाहता है।

मेरी बात शीनू की समझ में आ गई, वह बोली- तू ठीक कह रही है संगीता, पति को जिस चीज में ख़ुशी मिले औरत को वही काम करना चाहिये, मैंने सोच लिया है कि आज मैं स्कॉच भी पीऊँगी और इनके साथ खुल कर चुदाई भी करुँगी, आज मैं इनको पूरी तरह खुश कर देना चाहती हूँ।

शीनू की बात सुन कर मेरा दिमाग दौड़ने लगा, मैंने सोचा कि आज नवीन और शीनू अपने कमरे में लाईट जला कर चुदाई करेंगे, तो आज नवीन का लौड़ा देखने का काफी अच्छा मौका है।
यह इच्छा काफी दिन से मेरे मन में अंगडाई ले रही थी, लेकिन उसके पूरा होने का वक्त आज आया था।
शा
म को शीनू और नवीन घूमने चले गए, बाहर से पिक्चर और खाना खाने के बाद लगभग दस बजे वे लोग वापस आए, मैं उनके इन्तजार में अभी तक जाग रही थी।

शीनू और मेरे बैडरूम के बीच में सिर्फ एक खिड़की थी, जो बंद रहती थी लेकिन दूसरी तरफ लाईट जलती हो तो खिड़की की दरार से दूसरी और दिख जाता था, मैंने सोच लिया था कि मैं इसी दरार का फायदा उठाऊँगी।

करीब साढ़े दस बजे मैंने अपने कमरे की बत्ती बुझा दी और खिड़की के पास जम गई।

जैसे ही मैंने दरार से झाँका तो पता चला कि शीनू और नवीन के प्यार का खेल शुरू हो चुका है।
शीनू ने पूरा मेकअप कर रखा था और वह काफी सुन्दर लग रही थी, इस समय वह अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी और केवल लाल रंग का पेटीकोट और काले रंग की डिजाइनर ब्रा उसके बदन पर शेष थी।

उधर नवीन के जिस्म पर केवल अंडरवीयर था, उसका विशाल सीना और जाँघों के जोड़ पर उसका उठा हुआ अंडरवीयर साफ़ चमक रहा था।

नवीन ने पहले शीनू को अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठों को चूसने लगा, जवाब में शीनू भी उसे चूमने लगी।

कुछ देर बाद वे पूरी तरह नंगे हो कर चुदाई में लग गये।

मैं हैरानी से नवीन के बदन की मजबूती देखती रह गई।
शीनू का कहना बिल्कुल सच था कि उसका पति देर से झड़ता है, उसके जबरदस्त धक्कों से शीनू तो थोडी देर में ही झड़ गई थी, लेकिन नवीन फिर भी उसकी चूत में लौड़ा डाले पड़ा रहा और अपनी बीवी की चूचियों को मसलता रहा और उसके होंठों को चूसता रहा।

कुछ ही देर में शीनू दोबारा गर्म हो गई और अपने पति के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी, नवीन जोर जोर से लौड़ा उसकी चूत में अन्दर बाहर करता रहा।

करीब बीस मिनट की रगड़ाई के बाद दोनों बारी बारी से झड़ गये।
अब शीनू के साथ साथ नवीन भी पूरा संतुष्ट नजर आ रहा था।

नवीन का दमदार लौड़ा देख कर मेरा मन लालच में पड़ गया, दूसरे मर्दों के प्रति मेरे विचार काफी खुले हुए थे, क्योंकि मेरे पति ॠषभ जैन ने शादी के तुरन्त बाद से ही मुझे अपने दोस्तों से मिलवाना शुरु कर दिया था।
वे लोग ना केवल मेरे साथ हंसी मजाक करते थे बल्कि कई बार तो मेरे बदन से भी छेड़छाड़ कर लेते थे, यह सब चोरी छिपे नहीं होता था बल्कि खुले आम होता था और मेरे पति भी उस वक्त मौजूद रहते थे।
मेरे पति की तरह उनके सारे दोस्त भी काफी खुले दिमाग थे, ॠषभ उन लोगों की बीवियों के बदन पर खुलम-खुल्ला हाथ डाल देते थे, पर वे लोग बुरा नहीं मानते थे।

चूँकि मैं अपने पति ॠषभ का स्वभाव जानती थी, इसलिए नवीन के लौड़ा को देखने के बाद मैंने मन में ठान लिया था कि मैं ॠषभ को सब कुछ बता कर नवीन से चुदवाऊँगी।
मैंने यह भी सोच लिया था कि मैं किसी ना किसी बहाने शीनू को ॠषभ से चुदवाने के लिए राजी कर लूँगी, ताकि ॠषभ को यह सारा खेल एक तरफा ना लगे।

अपनी योजना पर चलते हुए मैंने शीनू के साथ सेक्सी मैगजीनों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया। बीच बीच में मैं उसे बताती रहती कि मेरे पति ॠषभ उसे बहुत पसन्द करते हैं और मुझसे कहते रहते हैं कि शीनू कितनी सेक्सी औरत है।

यह सब सुन कर शीनू काफी खुश हो जाती थी, कई बार वह मजाक में कहती- संगीता, अगर मैं तेरे पति ॠषभ को फांस लूँ तो तू क्या करेगी?

‘करना क्या है, मेरी जान?’ मैं भी हंस कर बोल देती- तू ॠषभ को फंसाएगी तो मैं तेरे पति नवीन को फंसा लूँगी, कितना मोटा और सख्त लौड़ा है नवीन का, कितना मजा आयेगा जब तेरे पति मुझे अपनी जाँघों के बीच दबायेंगे और मेरे पति तेरी चुसवाने को बैचैन चूत को जम कर चूसने के बाद जम कर चोदेंगे। समझ ले, उसके बाद तो हम लोगों की दोस्ती और भी पक्की हो जायेगी।

इतना कह कर मैं और शीनू एक दूसरे से लिपट जाती।

चूँकि मैं अपने पति ॠषभ का स्वभाव जानती थी, इसलिए नवीन के लौड़ा को देखने के बाद मैंने मन में ठान लिया था कि मैं ॠषभ को सब कुछ बता कर नवीन से चुदवाऊँगी।
मैंने यह भी सोच लिया था कि मैं किसी ना किसी बहाने शीनू को ॠषभ से चुदवाने के लिए राजी कर लूँगी, ताकि ॠषभ को यह सारा खेल एक तरफा ना लगे।

अपनी योजना पर चलते हुए मैंने शीनू के साथ सेक्सी मैगजीनों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया। बीच बीच में मैं उसे बताती रहती कि मेरे पति ॠषभ उसे बहुत पसन्द करते हैं और मुझसे कहते रहते हैं कि शीनू कितनी सेक्सी औरत है।

यह सब सुन कर शीनू काफी खुश हो जाती थी, कई बार वह मजाक में कहती- संगीता, अगर मैं तेरे पति ॠषभ को फांस लूँ तो तू क्या करेगी?

‘करना क्या है, मेरी जान?’ मैं भी हंस कर बोल देती- तू ॠषभ को फंसाएगी तो मैं तेरे पति नवीन को फंसा लूँगी, कितना मोटा और सख्त लौड़ा है नवीन का, कितना मजा आयेगा जब तेरे पति मुझे अपनी जाँघों के बीच दबायेंगे और मेरे पति तेरी चुसवाने को बैचैन चूत को जम कर चूसने के बाद जम कर चोदेंगे। समझ ले, उसके बाद तो हम लोगों की दोस्ती और भी पक्की हो जायेगी।

इतना कह कर मैं और शीनू एक दूसरे से लिपट जाती।

इसी बीच मेरे पति घर आये, मैंने उन्हें भी बताया की शीनू उन्हें बहुत पसंद करती है और जब भी मैं उसे बताती हूँ कि चुदाई के समय आप किस तरह से मेरी चूत को चूसते हैं तो वह बुरी तरह उत्तेजित हो जाती है।

ये बातें सुन कर ॠषभ बहुत खुश हुए और कहने लगे- डार्लिंग, शीनू है तो काफी खूबसूरत, किसी रोज उसे पटा कर बैडरूम में ले आओ तो उसे अपने लौड़ा का मजा चखा दूँ!

‘शीनू तो कब से बैचैन है डार्लिंग!’ मैंने अपने पति से झूठमूठ कहा- वह कई बार कह चुकी है कि किसी रोज अपने हसबेंड से मेरा क्रॉस करवा दो, लेकिन मैंने हामी नहीं भरी, आखिर तुमसे पूछना भी तो जरूरी था।

‘कमाल करती हो डार्लिंग!’ ॠषभ बोले- ऐसे कामों के लिये भी पूछने की जरूरत होती है क्या? अरे यार, शीनू जैसी मांसल और गठीली औरत को चोदने के लिये तो मैं आधी रात को घने जंगल तक में जा सकता हूँ।

‘तो फिर ठीक है, मैं आज ही शीनू को हरा सिगनल दे देती हूँ!’ मैंने कहा- लेकिन डीयर, मेरी भी एक शर्त है, अगर तुम शीनू के साथ धक्कम धक्का करोगे तो मैं भी उसके हसबेंड नवीन के साथ चुदाई का मजा लूँगी, तुम्हें इसमें कोई आपत्ति तो नहीं?

‘कमाल करती हो संगीता, यह भी कोई आपत्ति करने लायक बात है? अरे यार, हम पढ़े लिखे और मॉडर्न लोग हैं, हमें अपना जीवन पूरी आज़ादी के साथ गुजारने का हक़ है, मेरी तरफ से तुम्हें पूरी आज़ादी है कि तुम नवीन के साथ जम कर चुदाई का मजा लूटो, चार दिन की यह जवानी है, हमें इसका भरपूर मजा लेना चाहिये।’ ॠषभ बोले।

फ़िर तो मैं नवीन को फंसाने को पूरी तरह तैयार हो गई, नवीन दो तीन दिन बाद ही दौरे पर चले गये, संयोग से इसी बीच शीनू की माँ की बिमारी का फोन आ गया, उसे फौरन अपने मायके जाना पड़ा, जाते जाते वह अपने पति के खाने पीने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर डाल गई जिसे मैंने ख़ुशी ख़ुशी मान ली।

अगले दिन मैंने अपनी कामवाली को पूरे दिन कि छुट्टी दे दी, वह रविवार का दिन था, नहा धोकर मैंने जींस और स्लीवलेस शर्ट पहनी और होंठों पर कॉफी कलर की लिपिस्टिक लगा ली।

दोपहर में नवीन को मैंने अपने घर पर बुला कर खाना खिलाया, खाना खाते समय वह बार बार कनखियों से मुझे देख रहा था, मैं समझ गई मेरी खूबसूरती उसे घायल कर दे रही है।

जब वह खाना खाकर जाने लगा तो मैं उससे लिपट गई और बोली- मेरा जी बहुत घबरा रहा है नवीन, प्लीज, इस वक्त मुझे छोड़ कर मत जाओ।

उससे लिपटते वक्त मैंने इस बात का खास ध्यान रखा था कि ब्रा में तनी हुई मेरी गोल गोल चूचियाँ नवीन के सीने से अच्छी तरह सट जायें।

मेरी बात मान कर नवीन वहीं बैठ गया, उसने इस समय केवल बनियान और लुंगी पहन रखी थी।
मेरा मन हो रहा था कि उसके ये दोनों कपड़े हटा कर उसके लौड़े को बाहर निकाल लूँ और उसे जी भर कर प्यार करूँ।

नवीन मुझे एकटक देख रहा था, मैंने उसकी ओर मादक निगाहों से देख कर अपनी आँख मार दी।
अब तो नवीन को जोश आ गया, शायद उसे मेरे मनोभावों का अंदाज हो गया था, उसने अपनी बनियान उतार दी और मेरे पास आकर बैठ गया, मैं अपनी हथेली उसके सीने पर फिराने लगी, फ़िर अचानक मैंने उसे चूम लिया।

फिर तो नवीन पूरा मर्द बन गया, उसने मेरी शर्ट जींस ब्रा और पेंटी तक उतार डाली और अपनी लुंगी भी खोल फेंकी।
मैंने जैसे ही उसकी दोनों जाँघों के बीच लटकते उसके लण्ड को देखा तो अपने नंगेपन का ख्याल छोड़ कर मैं उस पर झपट पड़ी और अपने हाथों से उसे दबोच लिया, फिर उसे अपने होंठों से चूमती चाटती हुई मैं चटखारे लेने लगी।

फ़िर हम दोनों जोरदार धक्का मुक्की में लग गए, कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन नवीन अभी भी पूरी तरह मजबूती से मैदान में डटा हुआ था, वह मेरा पानी छुट जाने के बाद भी मेरी चूचियों को प्यार से सहलाता रहा और मेरी जाँघों और मेरी चूत को हौले हौले मसलता रहा।
कुछ देर में मेरे बदन में दोबारा आग लग गई, मैं भी नवीन के लण्ड से खेलने लगी।

फिर तो नवीन ने मुझे दोबारा चित कर दिया और मेरी चूत में अपना लौड़ा डाल दिया।
मैं उछल उछल कर उसका उत्साह बढ़ाने लगी और वह कमर हिला हिला कर मेरी चूत पर जोरदार धक्के मारने लगा, मैंने अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन नवीन के लौड़ा ने मेरी कसी हुई चूत में ऐसी खलबली मचा दी थी की थोडी ही देर में मैं दोबारा झड़ गई,

इस बार नवीन ने मेरा पानी छूटने के बाद भी मुझे छोड़ा नहीं और मेरी चूत पर जोर जोर से धक्के मारता चला गया। शायद वह भी झड़ने के करीब आ चुका था, कई जोरदार धक्के मारने के बाद वह अपने आठ इंच के लौड़ा को जड़ तक मेरी चूत में घुसा कर मेरे ऊपर औंधा पड़ गया, उसके बदन में काफी जोर की सिहरन हुई और उसके साथ ही उसके लौड़े ने मेरी चूत में गर्मागर्म लावा उगल दिया।
मैंने खुशी में उसको अपनी मांसल बाँहों में बाँध लिया और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार कर दी।

अब मेरा मकसद तो पुरा हुआ, लेकिन मुझे अब अपने पति से किया वायदा पूरा करना था।
इसलिए कुछ दिन के बाद जब नवीन घर में नहीं था, मैंने उसकी बीबी शीनू को अपने घर बुला कर ॠषभ के हवाले कर दिया, हालांकि काफी दिनों से शीनू का मन ॠषभ के साथ चुदाई का आनन्द लेने का था क्योंकि मैंने उसे बता रक्खा था कि ॠषभ को औरत की चूत चूसने और चाटने का महारत हासिल है।
लेकिन कुछ तो वह शर्माती थी और कुछ वह अपने पति से डरती थी, इसलिए मैंने नवीन के बाहर ज़ाने पर ही रंगारंग कार्यक्रम का प्रोग्राम रखा था और शीनू की शर्म दूर करने के लिये मैंने उससे वायदा किया था कि जिस वक्त ॠषभ उसके साथ चुदाई करेगा, मैं उसके करीब मौजूद रहूँगी।

आपने कभी किसी औरत के बारे में नहीं पढ़ा या सुना होगा कि कोई औरत खुद किसी पराई औरत को अपने पति के बिस्तर पर ले जाकर उन दोनों का यौन सम्बन्ध कराया हो?
लेकिन मैंने खुद इस काम को अंजाम दिया, अपनी पड़ोसन शीनू को ॠषभ के बिस्तर पर ले जाकर मैंने खुद अपने हाथों से बारी बारी उन दोनों के कपड़े खोले, फिर मैं अपने कपड़े भी उतारने लगी।

चूँकि मैंने ॠषभ को बता रखा था कि शीनू को अपनी चूत चुसवाने का काफी शौक है,लेकिन उसका पति नवीन उसकी चूत चाट कर उसे वह सुख नहीं देता, अतः शीनू के नंगे होते ही ॠषभ उसकी कमर की ओर चेहरा करके लेट गया और दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर जमा कर उसकी चूत चूसने लगा, फिर उसने अपनी जुबान बाहर निकाली और शीनू की मलाई जैसी त्वचा पर फिराने लगा।

चूत पर ॠषभ की जुबान लगते ही शीनू बेचैन हो गई, वह दोनों हाथों से ॠषभ के सिर और चेहरे को सहलाने लगी और गांड उचका कर अपनी चूत उसके होंठ पर छुआने लगी। इससे ॠषभ का जोश बढ़ता चला गया, उसने शीनू की चूत की सुडौल मोटी मोटी फांकों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चोकलेट की तरह चबाने लगा।

शीनू का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया, वह अपने पूरे बदन को बुरी तरह तोड़ने मरोड़ने लगी।
मैं औरत होने के नाते उसकी बैचैनी को समझ सकती थी, इस वक्त तक मैंने खुद को भी पूरी तरह नंगा कर लिया था, उसी हालत में मैं शीनू के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गई और उसकी चूचियों को हाथ से धीमे धीमे सहलाने लगी।

शीनू की चूचियाँ उत्तेजना के कारण पूरी तरह तन गई थी और उसके दोनों निप्पल भी सख्त हो गये थे, मैं झुक कर उसकी चूचियों पर जुबान फिराने लगी, फिर उसके एक निप्पल कों दांतों के बीच रख कर काटने लगी।

‘हाय संगीता, कितनी अच्छी है तू!’ शीनू ने सिसिया कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया- तेरे जैसी प्यारी सहेली मुझे पहले क्यों नहीं मिली?

तभी ॠषभ का हाथ मेरे कूल्हों पर आ गया और गांड को टटोलते टटोलते उन्होंने एक अंगुली मेरी चूत में घुसेड़ दी, उनकी इस हरकत से मैं भी उत्तेजित हो गई और पलट कर उन्हें देखती हुई बोली- अंगुली से काम नहीं चलेगा डार्लिंग, मुझे तो तुम्हारी तीसरी टांग चहिये, यही मेरी प्यास बुझा पायेगी।

‘सॉरी, डार्लिंग, मेरी तीसरी टांग की बुकिंग तो आज शीनू ने करवा रखी है, अगर तीसरी टांग से मैंने तुम्हारी सेवा की तो बेचारी शीनू प्यासी रह जायेगी, मैं नवीन तो हूँ नहीं जो की खुद झड़ने के पहले औरत को दो दो बार झडवा दूँ।’ ॠषभ बोले और मेरी ओर देख कर मुस्कुराने लगे।

मैं ॠषभ का यह कहने का मतलब तुरन्त समझ गई, दरअसल नवीन के साथ चुदाई करने के बाद अपने पति से उसकी मर्दानगी और मजबूती की काफी तारीफ़ की थी, इसी लिये उन्होंने इस समय यह बात मजाक में कही थी लेकिन उनके इस नहले का जवाब मैंने दहले से दिया, मैं बोली- डार्लिंग, तुम नवीन भले ना हो, लेकिन उससे कम भी नहीं हो, मैं जानती हूँ कि तुम अपनी पर उतर जाओ तो दो क्या, चार चार औरतों को पानी पिला सकते हो।

‘थेंक यू, मेरी जान, तुम्हारी इस बात ने मेरा जोश दस गुना बढ़ा दिया है।’ ॠषभ बोले।

‘अब तुम मेरा कमाल देखो, मैं पहले शीनू को चोदूँगा, फिर तुम्हारी चूत की आग ठंडी करूँगा।’ इतना कह कर उन्होंने शीनू की दोनों टांगों को उपर की ओर मोड़ दिया और उसकी चूत को चुटकियों से मसलने लगे।

ॠषभ के मुँह से चूत चटवाने का स्वाद ले चुकने के कारण उसकी चूत पहले ही गीली हो चुकी थी अतः कुछ देर हाथ से मसलने के बाद ज्यों ही अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल कर चोदना शुरू किया, वह बार बार काँपने लगी।
उसकी हालत देख कर मैं समझ गई कि वह ज्यादा देर तक ॠषभ की मर्दानगी का सामना नहीं कर पायेगी और आखिरकार यही हुआ, ॠषभ ने मुश्किल से बारह चौदह धक्के ही मारे होंगे की शीनू बुरी तरह सिसियाती हुई उनसे चिपक गई, उसकी हालत दीवार पर चिपकी छिपकली जैसी दिख रही थी।

शीनू को अपने से अलग करने के बाद ॠषभ ने मेरी जाँघों के बीच आसन लगा लिया, काफी देर तक लौड़ा चूत की आपस की लड़ाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये।

उस दिन के बाद से शीनू और मेरा एक दूसरे के पतियों के साथ चुदाई का सम्बन्ध बराबर बना हुआ है, जब भी हम में से किसी का पति किसी काम से बाहर जाता है तो उसकी बीवी दूसरे के पति से अपनी चूत की गर्मी शांत करती है, आपसी सहमति का यह खेल पिछले दो सालों से चल रहा है, केवल शीनू के पति नवीन इस पूरी हकीकत से अनजान है, वह यही समझता है कि मैंने उसके साथ सम्बन्ध बना रखे हैं, लेकिन उसकी बीवी शीनू बिल्कुल सीधी सादी और शरीफ है।

अभी हमने नवीन को हकीकत बताया नहीं है, शीनू डरती है उसके बताने से कोई गड़बड़ ना हो जाये।

पति के सामने गैर मर्द से चुदने का सुख - Pati Ke Saamne Gair Mard Se Chudne Ka Sukh

पति के सामने गैर मर्द से चुदने का सुख - Pati Ke Saamne Gair Mard Se Chudne Ka Sukh , मियां के सामने चुदाई , पति के सामने ही चोदा , पति ने खूब अपनी पत्नी को चुदवाया.

मैं शरद अग्रवाल, उम्र 24 साल, दिल्ली आए मुझे एक अरसा गुजर चुका था… यहाँ नौकरी भी अच्छी है, अब वेतन भी अच्छा है, देखने में भी अच्छा खासा ही हूँ, ऐसा मेरे दोस्त कहते हैं।

खैर मैंने किसी अच्छे घर में शिफ्ट करने की सोची और एक पॉश सेक्टर में एक कमरा किराए पर ले लिया था। ब्रोकर ने कई कमरे दिखाए और उनमें से जो बेहतर था वो मैंने अपने लिए चुन लिया।

मेरी दिनचर्या बहुत ही टाईट रहती है, दिन भर दम भरने की भी फुरसत नहीं, मैं मीडिया से जुड़ा हूँ इसलिए एक एक बात का ध्यान रखना होता है।

कई बार मीटिंग में भी देरी हो जाया करती है।

खैर मैं अपनी जॉब को काफी एन्जॉय भी करता हूँ। इस काम में कई लड़कियों की नौकरी मेरे दम पर चलती है मगर आज तक मैंने किसी का कोई नाजायज फायदा नहीं उठाया, हर काम प्रोफेशनल की तरह करता हूँ, औऱ रात को अपने कमरे में लौट आता हूँ।

कई बार इतवार को भी मेरी जरूरत पड़ जाती है, इस बार मैं इतवार को ऑफ़िस से जल्दी अपने कमरे में लौट आया था और आराम करने के लिए लेटा ही था कि दरवाजे पर मैंने दस्तक सुनी।

मैं- पता नहीं साला, इस वक्त कौन आ गया?

मैंने बड़बड़ाते हुए दरवाजा खोला, मेरे सामने मकान मालिक मिस्टर रवीन्द्र जैन खड़े थे, वो एक निजी बैंक में मैंनेजर की पोस्ट पर हैं।

मैं- अरे सर आप… आइए ना, अन्दर आइए!

मैंने उन्हें आदरपूर्वक अन्दर बुलाया और बिठाया।

मिस्टर जैन बैठते हुए– और भई कैसे हैं आप… आप से तो भेंट ही नहीं होती… आप बीजी ही इतना रहते हैं।
मैं- जी हाँ, काम ही ऐसा है कि अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाता मैं… क्या लेंगे आप कुछ ठंडा या…
मिस्टर जैन– यही पूछने तो मैं आपके पास आया हूँ।
मैं- मतलब?

मिस्टर जैन- अरे भाई ना मिलते हो न जुलते हो… क्यों न हम लोग आज शाम बैठें, कुछ तुम अपनी सुनाना, कुछ हमारी सुनना !
मैं- जरूर जरूर क्यों नहीं!
मिस्टर जैन- तो आज शाम 6 बजे का पक्का रहा, मैं तुम्हारा इन्तजार करुँगा… आना जरूर!

इतना कह कर मिस्टर जैन चले गए।

मिस्टर जैन 40-42 साल के हैं उनकी पत्नी रेखा जैन 36-37 साल की एक हाउसवाईफ, उनके दो बच्चे, एक लड़का और लड़की दोनों ही कहीं बाहर में पढ़ते हैं और सिर्फ छुट्टियों में ही घर आते हैं। उनका बड़ा घर है लेकिन सिर्फ छत पर एक कमरा था जिसको उन्होंने किराया पर दिया हुआ है।

मैंने टीवी ऑन किया, एक सिगरेट जला ली और अनमने ढंग से मैंने चैनल बदलना शुरु कर दिया। मेरा मन नहीं लगा तो एक मूवी चैनेल लगा कर छोड़ दिया और वहीं सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा।

अब शाम के छः बजने वाले थे मैं सीधे फ्रेश होने चला गया।

तैयार होकर मैंने जैन साब के दरवाजे की घंटी बजाई मिस्टर जैन ने दरवाजा खोला।

वो गाउन में थे।

मिस्टर जैन- अरे आओ आओ, तुम्हारा ही इन्तजार कर रहे थे हम लोग… कम इन..
मैं उनके पीछे पीछे अन्दर चला गया, क्या आलीशान ड्राईंग रूम था उनका।

मैं वहीं बैठ गया।

मैं अभी बैठा ही था कि उनकी पत्नी रेखा जैन ने वहाँ आई।
इस उम्र में अक्सर हमारे देश की महिलाओं की उम्र दिखने लगती है मगर रेखा जैन अपनी उम्र से कम से कम दस साल कम लग रही थी, बला की खूबसूरत!

मिस्टर जैन- इनसे तो तुम पहले मिल ही चुके होंगे, फिर भी यह मेरी पत्नी है रेखा!
मैं- हाँ सर, मिल तो चुका हूँ पर जल्दी जल्दी में और तब जब मैं यहाँ पहली बार चाबी लेने आया था।
मिस्टर जैन- रेखा, दिस हैन्डसम यंग मैन हियर इस मिस्टर शरद..

‘तो शरद क्या लोगे? समथिंग हॉट आई बीलीव…?’

यह कहकर वो हंस पड़े और रेखा जैन भी मुस्कुरा दी।

मैंने भी मजाक समझा और हंस पड़ा।
मिस्टर जैन- अरे डार्लिंग, इतना हैंडसम आदमी यहाँ बैठा है, कुछ ड्रिंक सर्व करवाओ भई!

मैं मुस्कुरा दिया।

मिस्टर जैन- और सुनाओ, कैसी चल रही है?
मैं- बस सर, ठीक चल रही है।
मिस्टर जैन- क्या खाक ठीक है… पूरी जवानी तो तुम काम में ही लगा देते हो।

मैं- वेल मिस्टर जैन, औऱ कुछ करने के लिए मेरे पास है ही नहीं, यहाँ अकेला रहता हूँ तो क्या करूँगा?

मिस्टर जैन- और जाहिर है गर्ल फ्रेन्ड भी नहीं होंगी… मैं जानता हूँ तुम जैसे लड़कों को वरकोहलिक टाईप…

मैं चुपचाप उनकी बातें सुन रहा था और मुस्कुरा रहा था

मिस्टर जैन- दरअसल तुम्हारे बॉस मिस्टर किशनलाल हमारे कलाएन्ट भी हैं और काफी अच्छे दोस्त भी हैं वो, उनसे तुम्हारे बारे में एक आध बार चर्चा हुई है, वो तुम्हारी तारीफ बहुत करते हैं… कहते हैं आजकल के जमाने में तुम्हारे जैसे लोग कम ही मिलते हैं।

इतने में रेखा ड्रिंक सर्व करने लगीं।

रेखा जैन- अरे तुम भी ना, रवीन्द्र, आते ही क्लास लेने लगते हो!
मैं- अर्…रे नहीं नहीं मैम, इट्स ऑल राईट।

हम अपनी अपनी ड्रिन्क की चुस्की लेने लगे।

मिस्टर जैन- शरद तुम दिल्ली में कब से हो?
मैं- सर, मैं यहाँ 1995 में ही आ गया था… कॉलेज यहीं से किया और अब नौकरी!
मिस्टर जैन- ओह वाओ… और तुम तो उत्तरप्रदेश के रहने वाले हो ना?

मैंने हाँ कहा।

मिस्टर जैन- औऱ घर में कौन कौन हैं?

मैं- सभी लोग तो हैं माँ-पिताजी हैं, एक भाई है, मुझसे बड़े लखनऊ में हैं, एक मोबाईल कम्पनी में मैंनेजर… पिताजी रिटायर हो चुके हैं अब खेती करते हैं औऱ माँ मेरे लिए आए दिन लड़की ढूंढती रहती हैं जिसे मैं अक्सर नामंजूर कर देता हूँ।

सब हंस पड़े।

मिसेज़ जैन तब तक कुछ खाने का भी लेकर आ गई थी, उन्होंने वहीं सेन्टर टेबल पर खाने का सामान रखा और पास के सोफे पर बैठ गईं।

मिस्टर जैन- गुड… अच्छे परिवार के लड़के हो।

मिसेज़ जैन- तो शरद, समय कैसे गुजरता है तुम्हारा? सिर्फ काम ही करते हो या फिर दिल्ली का मजा भी लेते हो?
मै- मैम, मैं कुछ समझा नहीं?
मिसेज़ जैन- देखो, मेरे कहने का मतलब है कि हम सब मेच्योर लोग हैं और इस भागती दौड़ती जिन्दगी में तुम्हें अपने लिए वक्त निकालना चाहिए।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैडम जैन कहना क्या चाह रही थी, बार बार मेरी जिन्दगी के बारे क्यों बात कर रहे हैं.. फिर भी मैं चुप ही रहा, मैं चाहता था कि वो ही अपनी बात पूरी करें।

मिसेज़ जैन- देखो मिस्टर जैन भी बहुत बीजी रहते हैं मगर हम सप्ताह में एक दिन ही सही अपने लिए समय निकाल ही लेते हैं… हम लोग मस्ती करने वाले लोग हैं, खुश रहने वाले लोग हैं।

मिस्टर जैन ने रेखा की बात को काटते हुए कहा- देखो यार, एक समय था जब हमारे बीच का रिश्ता खत्म सा हो गया था, मैं हमेशा काम में ही उलझा रहता था। एक टाईम ऐसा भी आया जब हम अलग होने की सोचने लगे थे।

मैं उनकी बातों को गौर से सुन रहा था, मेरी समझ नहीं आ रहा था कि वे कहना क्या चाह रहे थे।

मिस्टर जैन- लेकिन हमने अपने आपको संभाला और फिर से जिन्दगी की शुरुआत की, आज हम सुखी हैं। हमारा एक क्लब है और इस क्लब में कई लोग शामिल हैं, हम चाहेंगे तुम इस क्लब में शामिल हो जाओ !

मैं- हाँ, पर मुझे करना क्या होगा और इस क्लब में होता क्या है?
मिसेज़ जैन ने मेरी बात को काटते हुए कहा- यह एक स्वॉप क्लब है जहाँ हम पार्टनर्स एक्सचेन्ज करते हैं और जिन्दगी का लुत्फ उठाते हैं।
मैं चौंक गया मैंने कहा- व्हाट… स्वॉप क्लब? पर… पर…!!!
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूँ!

मिस्टर जैन मेरी इस उहापोह को समझ गए और उन्होंने कहा- देखो शरद… तुम्हारे लिए चौंकना स्वाभाविक है, लेकिन यह सच है, एक बार हमारे साथ रिश्ता कायम करके देखो, कितना मजा आएगा औऱ तुम कितना आगे जाओगे !

मैं सोच में पड़ गया कि क्या करूँ।

तभी मिसेज़ रेखा उठकर मेरे पास पहुँची मेरे पास सटकर बैंठ गईं… उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- शरद मेरी ओर देखो, इस क्लब में कई ऐसे लोग हैं जिनके बारे वहाँ जाने पर तुम्हें पता लगेगा औऱ उनके हमारे बीच का डोर बहुत मजबूत है।

उनके कहने पर मैं मान गया औऱ मेम्बर बना दिया गया।

अब रात के नौ बज चुके थे मिसेज़ जैन डिनर सर्व करने के लिए चली गई।

मिस्टर जैन ने अपनी ड्रिन्क खत्म करते हुए कहा- इस क्लब के कुछ नियम हैं शरद… इस क्लब के मेम्बर्स बाहर के लोगों के साथ क्लब को डिसकस नहीं करते, दूसरी बात यह कि कोई किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता… बाकी की बातें तुम्हें तुम्हारे ईमेल पर भेज दी जाएगी, अच्छे से पढ़ लेना !

मैं- ओ के सर…

मैंने ओके कह तो दिया था लेकिन मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।

खैर किसी तरह से डिनर खत्म करके मैं वहाँ से निकलना चाहता था।

डिनर के बाद मिसेज़ जैन ने मुझसे कहा- तुम्हें कोई जल्दी तो नहीं है ना सोने की… डिनर के बाद? हम सब थोड़ी और बातचीत करते हैं।

मैं अनमने ढंग से मान गया और फिर हम सब लिविंग रूम में चले गए।

रेखा ने वहीं म्यूज़िक सिस्टम पर एक अच्छी सी धुन लगाई और डांस करना शुरु कर दिया।

मिस्टर जैन भी उठकर डांस करने लगे।

रेखा जैन डांस करती हुई मेरे पास पहुँची और मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया।

मेरे लिए यह सब कुछ बिल्कुल नया था… मैं संकोच कर रहा था लेकिन मिसेज़ जैन के जबरदस्ती करने पर मैं उठ खड़ा हुआ और उनका साथ देने लगा।

अब कमरे में हम तीनों ही डांस कर रहे थे, मिसेज़ जैन कभी मिस्टर जैन के साथ डांस करती तो कभी घूमकर मेरे साथ डांस करने लगती।
कभी वो अपने आप को मेरे इतना करीब ले आती कि मेरी सांस ही रुक जाती।

इन सब से मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, मेरी पैन्ट में हलचल मचने लगी थी लेकिन मिसेज़ जैन ये सब कुछ इतने सलीके से कर रही थी कि माहौल खुशनुमा बना रहे।

अचानक मैंने देखा कि मिस्टर जैन मिसेज़ जैन को चूम रहे हैं, उन दोनों के होंठ एक दूसरे से टकरा रहे थे।

मिस्टर जैन ने चुम्बन करते करते रेखा जैन की चूचियों को बाहर निकाल लिया।

मेरी नजर रेखा जैन की चूचियों पर ही गड़ गई थी और यह बात मिसेज़ जैन और मिस्टर जैन ने ताड़ ली… मिसेज़ जैन ने भी आगे बढ़ते हुए मिस्टर जैन का पूरा लंड बाहर निकाल लिया था और उसके साथ खेलने लगी।

मैं ये सब देखकर बेकाबू हुआ जा रहा था।

मिसेज़ जैन ने अपनी नशीली आँखों से मुझे घूरा और इशारा करके अपनी तरफ बुलाया।

मैं भी अपने आपको रोक नहीं पाया, उनके करीब पहुँच गया।

मिसेज़ जैन मिस्टर जैन को छोड़कर मेरे करीब आने लगी और अपनी होठों को मेरे होठों से चिपका दिया।

क्या बला की सेक्सी लग रही थी रेखा जैन…
मैडम जैन मेरे सीने को सहलाने लगी थी और इन सब का असर मेरे लंड पर हो रहा था, मेरी सांसें तेज चल रही थी।

उन्होंने अपना एक हाथ बढ़ा कर मेरे जीन्स की जिप खोल दी और मेरे लंड को पहले तो सहलाया और फिर उसे बाहर निकाल लिया।

मेरा लंड अब पूरी तरह से तनकर बाहर आ गया था।

मिसेज़ जैन- वाह.. क्या लंड है तुम्हारा शरद… लगता है इस पर बहुत मेहनत की है तुमने!

मैं उनकी इस बात पर घबराते हुए मुस्कुरा दिया।

मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी, किसी औरत ने पहली बार मेरे लंड को छुआ था।

मिसेज़ जैन- अरे यार जैन, देखो तो क्या मस्त लंड है इसका?

मिस्टर जैन- क्या गुरु, कभी इसका इस्तमाल किया है सिर्फ मूतने के काम में ही लाते हो?

मिस्टर जैन की इस बात से हम सब एक साथ हंस पड़े।

मिसेज़ जैन मेरे लंड से लगातार खेल रही थी।

मैं- न..नहीं…मैम… आज तक कभी मौका ही नहीं लगा।

मैंने हकलाते हुए यह बात कही।

मैं और कुछ कह पाता, तब तक रेखा जैन अपने घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को बड़ी अदा से चूम लिया।
मेरे पूरे बदन में करन्ट दौड़ गया।
मैंने अपनी नजर नीचे की लेकिन मेरा खुद का काबू अब मेरे ऊपर नहीं था।

मिस्टर जैन ने ताली बजा कर मिसेज़ जैन के इस काम का स्वागत किया।

मिसेज़ जैन ने अब मेरा आधा लंड अपने मुख में ले लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी। उन्होंने तेजी से मेरे लंड को चूसना शुरु कर दिया था, मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मिस्टर जैन अपने जगह से उठे और रेखा जैन के पीछे आकर खड़े हो गए। उन्होंने रेखा के आगे अपनी लंड कर दिया, उनके सिर को पकड़ अपने लंड की ओर घुमाते हुए कहा- डार्लिंग, जरा मेरा भी कुछ करो न…

रेखा जैन ने मेरे लंड छोड़ कर अब मिस्टर जैन के लंड को चूसना शुरु कर दिया।

मिसेज़ जैन उठकर खड़ी हो गई, मुझसे चिपक गई और मुझे चुम्बन करना शुरु कर दिया, उन्होंने अपने हाथ को बढ़ा कर मेरे लंड से खेलना शुरु कर दिया।

मेरा भी अब संकोच कुछ कम होता जा रहा था और मैंने अब उनके चूचियों को सहलाना शुरु कर दिया, फिर उनकी चूचियों के चुचूकों को घुमाना शुरु कर दिया।

मिस्टर जैन- एक्सक्यूज मी एवरी बडी… हम एक काम करते हैं, हम अपने अपने कपड़े उतार देते हैं क्योंकि ये कपड़े हमारे मौज-मस्ती के बीच रोड़ा अटका रहे हैं।

मैंने अपनी टी शर्ट उतारनी चाही तो मिसेज़ जैन ने हाथ पकड़ लिया और कहा- यार शरद, तुम्हारे कपड़े मैं उतारूँगी।

उन्होंने इतना कह कर बड़ी अदा से पहले मेरी टीशर्ट को उतारा और फिर मेरी छाती को चूमने लगीं, उन्होंने पहले मेरी गर्दन को चूमना शुरु किया फिर धीरे धीरे वो मेरे सीने तक पहुँची और मेरी दोनों घुण्डियों को बारी बारी चूमना शुरु कर दिया और फिर वो चूमते चूमते मेरे पेट तक पहुँच गई, मेरी नाभि के आसपास चूमना शुरु कर दिया।

औऱ फिर उन्होंने बड़े आराम से मुझे वहीं सोफे पर धकेल दिया, मैं उस बड़े से सोफे पर लगभग आधा लेट गया और अब मिसेज़ जैन ने मेरे जीन्स को मेरी टांगों से खींचकर अलग कर दिया।

मेरा लंड फनफना रहा था।

उन्होने मेरे बचे-खुचे अंडरवियर को भी मुझसे अलग कर दिया, मैं अब पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था और मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा था… मुझे इस अवस्था में देखकर मिसेज़ जैन की आँखों में अजीब सी चमक आई, वो खड़ी होकर अपने कपड़े भी खोलने लगीं और इधर मिस्टर जैन भी अपने कपड़ों को अपने जिस्म से अलग कर चुके थे।

मिसेज़ जैन भी पूरी तरह से नंगी खड़ी थी, मैंने एक सरसरी नजर मिसेज़ जैन पर डाली… वाह क्या तराशा हुआ जिस्म था उनका… मुलायम मगर उठी हुए चूचियाँ, भूरे निप्पल… सुराहीदार गर्दन, कटीले नयन नक्श और पेट भी काफी सेक्सी लग रहा था, कहीं कोई चर्बी नहीं थी, नाभि भी काफी सेक्सी लग रही थी।

नाभि के नीचे के हिस्से भी कम दिलचस्प नहीं थे, बिल्कुल चिकनी चूत, जरा भी बाल नहीं थे उस पर, एकदम रसीली लग रही थी और दो चिकनी जांघों ने उस चूत पर चार चांद लगा दिए थे।

मैं रेखा जैन के जिस्म को अपने आँखों से लगातार पिए जा रहा था और मिस्टर जैन मेरी इस हरकत को देखकर मुस्कुराए जा रहे थे।

मिस्टर जैन अपनी नंग धडंग पत्नी की ओर आए उसे वहीं दीवान पर लेटा दिया।

मैं इधर सोफे पर पड़े पड़े यह तमाशा देख रहा था।

उन्होंने मिसेज़ जैन को लेटाते हुए उनकी जांघों को अलग किया और मेरी ओर देखकर आँख मार दी।

उन्होंने अपने होठों को उस चिकनी मादक चूत पर रख दिया और उसे चाटने लगे।

रेखा जैन चिहुंक उठी और मस्ती में सिसकारने लगी।

मैं भी अब उठ खड़ा हुआ और उनके करीब पहुँच गया।

मिसेज़ जैन ने मेरे लंड को अपने मुख में ले लिया और उसे चूसने लगी।

मिस्टर जैन उनकी चूत चाट रहे थे और मिसेज़ जैन मेरा लंड चूस रही थी।

अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा, मैंने अपने आपको अलग कर लिया। मिसेज़ जैन और मिस्टर जैन यह बात समझ गए।

मिसेज़ जैन- अरे शरद… आओ ना… मेरी चूत देखो न तुम्हारे लंड को देखकर कैसे लार टपका रही है… देर न करो, अपने लंड को मेरी इस रसदार जैन चूत में डाल कर खूब चोदो।

मैं उनकी इस तरह की भाषा को सुनकर हैरान रह गया लेकिन उनकी ये बातें कामोत्तेजक लग रही थी।

मिस्टर जैन- अरे आओ भी ! तुम तो लड़कियों की तरह शर्माते हो?

मैं उनकी ओर बढ़ा और मिसेज़ जैन की जांघों के बीच जाकर खड़ा हो गया, मिसेज़ जैन ने मेरे लंड को अपनी चूत के छेद पर टिका कर कहा- शरद एक हल्का सा धक्का देना!

मैंने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चूत के अन्दर बड़े आराम से घुस गया। मैं भी मस्ती में झूम उठा, इस तरह की मस्ती की अनुभूति मुझे पहले कभी नहीं हुई थी।

मैंने हल्का सा धक्का और मारा तो अब मेरा आधा लौड़ा रेखा जैन की रसदार चूत के अन्दर था।
मैं अब उसे धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा… रेखा जैन ने मस्ती में आहे भरकर बड़बड़ाने लगी- आह… ओह, क्या मस्त लंड है तुम्हारा… ओह बहुत अच्छा लग रहा है यार… हाँ हाँ ऐसे ही, ऐसे ही यार… हाँ हाँ और अन्दर डालो जोर से जोर… खूब चोदो मुझे शरद आज पूरा निचोड़ दो मुझे… इतना जवान कुंवारा लंड… इतना कड़क लंड बहुत दिनों के बाद मिला है मुझे… रवीन्द्र देखो न, यह शरद का लंड कितना अच्छा है… तुम भी आओ न, मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ, आओ ना यार जैन डार्लिंग, आ जाओ न… उफ क्या लंड है शरद तुम्हारा…

मैं रेखा जैन की इन बातों से और उत्तेजित होकर उन्हें तेजी में चोदने लगा।

मिसेज़ जैन अब मिस्टर जैन का लंड लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और मैं चुदाई कर रहा था।

इसी क्रम में मिसेज़ जैन ने अपना मुंह मिस्टर जैन के लंड से अलग किया और मुझसे कहा- शरद अब मुझे डॉगी स्टाईल से चोदो ना… मैं तुम्हारी कुतिया हूँ मैं तुम्हारी राण्ड हूँ, मेरे खसम के सामने मुझे चोदो शरद !

यह कहकर वो मुझसे भी अलग हो गई और घुटनों के बल झुक गई और मैं पीछे से अपना लंड उनकी चूत में घुसाने लगा।

इधर मिस्टर जैन भी अपने लंड से रेखा जैन के मुख को चोदने लगे।

कमरे में अजीब नज़ारा था, मिस्टर जैन अपना लंड रेखा जैन के मुंह में लगातार पेल रहे थे और मैं उनकी चूत को!

अचानक मिस्टर जैन के बदन में अकड़न आने लगी और वो जोर जोर से अपनी कमर हिलाने लगे और थोड़ी देर में उनके लंड से सफेद पिचकारी छुटी और रेखा जैन के होठों के बीच से मिस्टर जैन सफेद वीर्य बाहर आने लगा।

मिसेज़ जैन ने मिस्टर जैन के लंड का पूरा पानी पी लिया, उनके लौड़े पर लगा माल भी चाट लिया और मिस्टर जैन वहीं पास की कुर्सी पर बैठकर हाँफने लगे।
इधर मैं दनादन रेखा जैन की चुदाई कर रहा था… मैं बीच बीच में रेखा जैन के हिलते गांड को भी निहारे जा रहा था… क्या गाण्ड थी मिसेज़ जैन की…

मैं- मैम, आपकी चूत काफी रसदार है… बहुत गर्म भी और गाण्ड भी आपकी बहुत प्यारी है।

मिसेज़ जैन- वाह रे मेरे शेर… तुम तो बहुत छुपे रुस्तम निकले… हाँ… देखो तुम्हारा लंड बहुत प्यारा है। मैं बहुत ज्यादा देर तक अब ठहर नहीं पाऊँगी… मेरा अब छुटने वाला है शरद… और तेजी से चोदो मुझे !

मैं भी अब चरम पर पहुँचता जा रहा था।

अचानक रेखा जैन जोर जोर से हाँफने लगी और कहने लगी- रुकना मत, रुकना मत मेरे चोदू, मत रुकना, मैं झड़ रही हूँ शरद, मैं झड़ रही हूँ! ओह हाँ हाँ… ऐसे ही… ऐसे… रुकना मत… रुकना मत!

और यह कहते कहते रेखा जैन का पूरा शरीर थरथराने लगा और झड़ने लगी। इधर मैं भी अब कांपने लगा, मेरे लंड से वीर्य का ज्वालामुखी फ़ूट पड़ा और रेखा जैन की पीठ पर ही औंधे मुंह लेट गया।
हम दोनों बुरी तरह से हाँफ रहे थे।

थोड़ी देर में जब होश आया तो हम लोग उठकर बैठे, मिस्टर जैन वहीं पास में बैठे थे।

हम तीनों नंगे वहाँ बैठे थे।

मिस्टर जैन- तो शरद, मजा आया?

मैंने हाँ में गर्दन हिला दी।

मिस्टर जैन- देखो लाईफ कितनी मस्त है और इसमें कितना मजा है… वेलकम टु द क्लब!

यह कहते हुए मिस्टर जैन और मिसेज़ जैन हंसते हुए ताली बजाई और मैंने खड़े होकर उन्हें झुककर सलाम किया।

मिस्टर जैन- इसी बात पर एक एक ड्रिंक हो जाए।

मिसेज़ जैन उठी और तीन ग्लास में स्कॉच लेकर आईं… इम तीनों ने टोस्ट किया और ड्रिंक को बॉटम्स अप मारा।

अब रात के करीब 12 बज चुके थे, मैंने उनसे कहा- मिस्टर जैन… मैम, रात बहुत हो गई है अब मुझे चलना चाहिए।

मिसेज़ जैन- ओह यस… रात बहुत हो गई है… अब हमें सोना चाहिए लेकिन वी स्पेन्ट अ वन्डरफुल सन्डे टुडे… थैक्स शरद फॉर कमिंग एण्ड दिस वॉन्डरफुल इवनिंग…

मिस्टर जैन- हाँ डार्लिंग, शाम तो अच्छी गुजरी है लेकिन शरद तो हमारे घर के सदस्य जैसा ही है… शरद यू आर ए नाईस बॉय… मैं जल्द तुम्हें और लोगों से भी इन्ट्रोडयूस करुँगा।

मैं- शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए आप लोगों का जिन्होंने मुझे स्वर्ग जैसी अनुभूति करवाई… गुड नाईट सर… सी यू सून!

यह कह कर मैं अपने कमरे में चला आया और कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगा।
मैं बहुत हल्का महसूस कर रहा था… चुदाई पहली बार मैंने की थी और थकान भी महसूस हो रही थी, मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।
© Copyright 2013-2019 - Hindi Blog - ALL RIGHTS RESERVED - POWERED BY BLOGGER.COM