सेक्सी आंटी की प्यासी चूत - Sexy Aunty Ki Pyasi Choot Chudai

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मेरा नाम मयंक है, मैं बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में रहता हूं. बात तब की है जब मैं बिलासपुर में कोचिंग क्लास कर रहा था. मेरी सोशल नेटवर्किंग साइट के अकाउंट पर एक कोरबा की आंटी थी जिनसे मैं कभी-कभी बात करता था.
कुछ दिनों तक बात करने के बाद हम दोनों एकदम क्लोज़ हो गए. वो अपने बारे में हर बात मुझे बताने लगी. उसकी 3 बेटियाँ थीं जो अभी कम उम्र की ही थीं.

एक बार आंटी ने मुझे कोरबा मिलने के लिये बुलाया तो मैं उनके घर जाने के लिए राज़ी हो गया.
जब मैं उससे पहली बार मिलने गया तो उसने मुझे एक रेस्तराँ में बुलाया. उसे देख कर मैं हैरान रह गया. उसको देख कर लगा ही नहीं कि वो तीन बच्चों की माँ है. देखने में वह केवल 25-26 साल की लग रही थी. वो जीन्स और टॉप पहन कर आई थी.

रेस्तराँ में हम दोनों ने कॉफी पी. फिर वह मुझसे यह कहकर चली गई कि तुम कुछ देर इंतजार करो, मैं थोड़ी देर के बाद तुम्हें फोन करूंगी. मैं वहीं पर होटल में उसका इंतजार करने लगा. दस मिनट के बाद उसका फोन आया और उस लेडी ने मुझे अपने घर बुला लिया.

पहले तो मैं थोड़ा घबरा रहा था क्योंकि मैं इससे पहले कभी किसी शादीशुदा औरत से नहीं मिला था. मैं सोच रहा था कि जाऊं या न जाऊं. उसके बाद मैंने हिम्मत करके उसको आने के लिए हाँ कर दी. उसने अपने घर की लोकेशन मुझे इंटरनेट के जरिये फोन पर भेज दी.

उसकी बताई जगह पर पहुंचकर मैंने उसको फोन किया तो उसने अपना क्वार्टर नम्बर बता दिया. उसके बाद मैं उसके घर पर पहुंच गया और जाकर डोर बेल बजाई. जब अंदर से दरवाजा खुला तो वह नाइट ड्रेस में थी. जब तक मैं कुछ समझ पाता उसने मुझे अंदर खींच लिया और घर का दरवाजा बंद कर दिया. अंदर आते ही वह मुझे अपने बेडरूम में ले गयी.

हम दोनों बेड पर जाकर बैठ गये और कुछ बातें करने लगे. उसने बताया कि उसके पति सरकारी नौकरी करते हैं. उसको पता नहीं क्या हुआ कि कहते-कहते वो रोने लगी कि उसके पति उसको टाइम ही नहीं देते हैं.
मैंने उससे चुप होने के लिए कहा. मगर वह नहीं रुकी. फिर मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया. वह मुझसे लिपट गई और सुबकने लगी.

मैंने उससे कहा- ऐसे नहीं रोते, आपको जो चाहिए वो मैं आपका दूंगा. लेकिन आप दिल छोटा मत करो.
मेरा हाथ उसकी चूची पर टच हो गया. उसकी चूची का स्पर्श पाते ही मेरा ध्यान उसके बूब्स पर चला गया. अब मैंने जान-बूझकर उसको सांत्वना देने के बहाने से उसकी चूचियों को दो बार और टच कर दिया. उसकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं हो रहा था. वह चुप हो गई थी. उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया. मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उसकी चूची को अपने हाथ में भर लिया और उसको दबाने लगा.

मेरी इस हरकत पर वह थोड़ी सहम सी गई और उसने मुझे अपने से अलग कर दिया.
वह बोली- मैं जानती हूँ कि तुम्हारा मन कर रहा है. लेकिन तुम इस बात के बारे में किसी को नहीं बताओगे, मुझसे वादा करो.
मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुमको मुझ पर भरोसा नहीं हो जाता मैं तुम्हारी तरफ देखूंगा भी नहीं.

मैं उठ कर बेडरूम से बाहर जाने लगा और उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया. मैंने पीछे पलट कर देखा तो वह खड़ी हो गयी और एकदम से मुझे अपनी बांहों में भर कर मुझसे लिपट गई.
वह बोली- तुम मुझे छोड़ कर मत जाओ प्लीज.
कहकर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया.
मैंने कहा- तो अब तुमको मुझ पर विश्वास हो गया या नहीं?
वह बोली- हाँ, मुझे तुम पर विश्वास है.

उसके बाद मैंने भी उसको अपनी बांहों में भर लिया और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को वहीं खड़े होकर चूसने लगे. मैंने उसके होंठों को चूसते हुए उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया. मेरा लंड मेरी पैंट में तन गया था और उसके शरीर से रगड़ खा रहा था. मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में घुस जाना चाहता था मगर बीच में उसकी नाइटी आ रही थी.
मैं उसको जल्दी से नंगी कर देना चाहता था ताकि उसकी चूत में अपने लंड को डाल सकूं लेकिन मैंने सब कुछ धीरे-धीरे करना ही ठीक समझा ताकि उसका विश्वास मुझ पर बना रहे.

कई मिनट तक ऐसे ही किस करने के बाद वह बोली- मयंक, मेरे पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते.
मैंने कहा- तो क्या हुआ, मैं हूँ न. मुझे अपना पति मान सकती हो तुम.

कहकर मैंने उसकी नाइटी को निकलवा दिया और अब वह मेरे सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी थी. उसके बदन को देखकर मेरी हवस जाग गई. मैंने उसकी ब्रा को किस किया और फिर उसकी गर्दन पर चूमने लगा. वह भी गर्म होने लगी. उसने मुझे अपने से लिपटा लिया और मुझे बांहों में लेकर मेरी गर्दन पर किस करने लगी.

उसके बाद मैंने उसको पलटा कर उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसकी ब्रा को निकाल कर बेड पर फेंक दिया. उसके लम्बे बाल उसकी कमर पर बिखरे हुए थे. पीछे से उसकी कमर नंगी हो गई थी. उसकी गोरी, नंगी पीठ, जो काले बालों के नीचे ढकी हुई थी, को देख लग रहा था जैसे किसी फिल्म की हिरोइन हॉट सीन देने के लिए तैयार खड़ी हो.
मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया और उसके चूचों को देखते ही मैं उन पर टूट पड़ा. मैंने उसके चूचों को सीधा मुंह में भर लिया और उसकी गांड को दबाते हुए मैं उसके चूचों को चूसने लगा. बहुत मजा आ रहा था दोस्तो. वह खूबसूरत तो थी ही, साथ ही उसका बदन भी सुडौल था.

मेरा लंड मेरी पैंट में तन कर फटने को हो रहा था. जब मैंने नीचे झांक कर देखा तो मेरे लंड ने मेरी पैंट पर पानी का निशान बना दिया था. मैंने उस लेडी को नीचे बैठा दिया और वह घुटनों पर मेरे सामने बैठ गई. मैंने अपनी पैंट को खोल दिया और अंडरवियर समेत उसको नीचे गिरा दिया. मेरा लौड़ा तन कर उसके मुंह के सामने आ गया.

वह भी समझ गई कि मैं उसको अपना लंड चुसवाना चाहता हूँ. उसने मेरे लंड को हाथ में लिया तो मेरी आह्ह … निकल गई. बड़े ही नर्म हाथ थे उसके. फिर उसने एक दो बार मेरे लंड की मुट्ठ मारी और उसको मुंह में लेकर चूसने लगी. उसके मुंह में लंड गया तो मुझे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना होने लगी. मैंने उसके सिर को हल्के से पकड़ कर अपने लंड को उसके मुंह में धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

वह पूरी तबियत के साथ मेरे लंड को चूस रही थी. बीच-बीच में वह मेरी गोलियों को किस कर लेती थी और कभी पूरी की पूरी मुंह में भर लेती थी. वह मुझे पागल बना रही थी. मेरा जोश बढ़ता ही जा रहा था.

कुछ देर चूसने के बाद मेरा जोश पूरा भर गया और उसने मेरे लंड को सही वक्त पर बाहर निकाल दिया नहीं तो मैं उसके मुंह में ही झड़ जाता. उसके बाद मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसके चूचों के बीच में तने हुए निप्पलों को चूसने लगा. उसके मुंह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैं नीचे से नंगा था लेकिन ऊपर मैंने शर्ट पहनी हुई थी.

वो उठ कर मेरी शर्ट उतारने लगी और मुझे भी पूरा नंगा कर दिया. उसने मेरी छाती पर चूमना शुरू कर दिया और मैंने नीचे से हाथ ले जा कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर फिराना शुरू कर दिया.

मैं फिर से उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूसते हुए उसके चूचों से होते हुए उसके पेट पर चूमने लगा. वो तड़प सी जाती थी मेरे चुम्बन पर. उसके बाद मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिराना शुरू कर दिया. उसकी टांगें मचलने लगी.

मैंने उसकी टांगों को रोका और उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गई. उसकी चूत पर काफी बाल थे जो गहरे काले रंग के थे. मगर उसकी जांघें बिल्कुल गोरी थी जिनके बीच में उसकी चूत गजब की लग रही थी. उसकी चूत से चिकना सा पदार्थ निकल कर उसकी पूरी चूत को चिकना कर रहा था.

उसके बाद मैंने उसकी टांगों को चौड़ी कर दिया और उसकी चूत पर हथेली से रगड़ने लगा. उसने मुझे पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को किस करने लगी. मेरा लंड उसकी चूत से टच होने लगा. मन कर रहा था कि उसकी चूत को फाड़ दूं चोद-चोद कर. मगर अभी मैं उसको और तड़पना चाहता था.

मैंने दोबारा से उसकी चूत के पास अपने होंठ ले जाकर उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया और वो तड़प उठी, बोली- बस, अब और नहीं रुका जा रहा मयंक. मेरी चूत बहुत दिनों से प्यासी है. इसकी प्यास बुझा दो.
मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी और चीख पड़ी- आह्ह … मर जाऊंगी मैं. क्या कर रहे हो! जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो प्लीज!

मैं उसकी चूत में जीभ डालकर उसकी चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगा. उसकी हालत खराब होने लगी जिसका अंदाजा मुझे उसकी चूत से निकल रहे पानी से हो रहा था. उसने मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबा लिया था. वह अपनी गांड को उठा-उठा कर मेरी जीभ से अपनी चूत को चुदवा रही थी. उसकी आवाजें बहुत तेज हो गई थीं.

मैंने सोचा कि अब यह पूरी तरह से गर्म हो चुकी है. मेरे लंड ने पानी छोड़-छोड़ कर बिस्तर की चादर को गीला कर दिया था. मैंने अपने लंड को हाथ में लिया और उसकी चूत पर लगा कर रगड़ने लगा.

उस आंटी ने … वैसे उसको आंटी कहने में अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि वह बिल्कुल जवान लग रही थी. किसी लड़की की तरह. उसने मुझे फिर से अपने ऊपर खींच लिया और मेरी छाती के नीचे उसके चूचे दब गये. वह मुझे अपनी बांहों में पकड़ कर बुरी तरह से चूमने-काटने लगी. उसके हाथ मेरी पीठ को सहला रहे थे. मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था.

दो मिनट तक मेरे होंठों को चूसने के बाद उसने अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट दिया. फिर उसने नीचे हाथ ले जाकर खुद ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट कर लिया और मुझे अपने ऊपर लेटा लिया. मेरा लंड उसकी चिकनी हो चुकी चूत में अंदर घुसने लगा. उसके मुंह से कामुक सीत्कार बाहर आने लगे. उम्म्ह… अहह… हय… याह… करते हुए सेक्सी आंटी ने गांड को हिला-हिला कर उसने पूरा लंड अपनी चूत में समा लिया. मेरा पूरा लंड जब उसकी चूत में उतर गया तो वह मुझे फिर से चूमने और चूसने लगी.

उसने नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिये. मैं समझ गया कि अब यह और इंतजार नहीं कर सकती. मैंने उसकी चूत में अपनी तरफ से धक्के लगाने शुरू कर दिये. नीचे से वह भी अपनी गांड को उकसा कर मेरा साथ देने की पूरी कोशिश कर रही थी. उसको चुदाई का बहुत तजुरबा था.
जब मेरा धक्का लगता तो वह रुक जाती और जब मैं रुक जाता तो वह धक्का लगा देती. इस तरह से वह पूरे ताल-मेल के साथ मेरे लंड से चुदने लगी. मैंने अपने हाथ बेड पर उसकी बगल में टिका लिये और उसकी चूत में जोर से अपने लंड को पेलने लगा. उसके मुंह आह-आह-आह की आवाजें और तेज निकलने लगीं.

वह अपने चूचों को अपने हाथ में लेकर दबा रही थी. बीच-बीच में मैं भी उसके निप्पलों को काट लेता था. उसकी चुदाई करते हुए मुझे भी गजब का मजा आ रहा था. उसकी चूत में मेरा लंड गपागप अंदर जा रहा था. कुछ मिनटों तक मैं उसके ऊपर लेट कर उसकी चूत को चोदता रहा.
फिर मेरा जोश और बढ़ा तो मैंने उसको उठा कर घोड़ी बना दिया. पीछे घुटनों के बल खड़ा होकर मैंने उसकी गोरी और मोटी गांड को पकड़ लिया और उसकी चूत पर लंड को सेट करके एक जोर का धक्का दे मारा. मगर गलती से लंड उसकी चूत में न जाकर उसकी गांड में जा लगा. वह दर्द के मारे चीख पड़ी. मैंने नीचे देखा तो लंड उसकी गांड पर लगा हुआ था.

मैंने दोबारा से उसकी चूत पर लंड को सेट किया और अबकी बार धीरे से लंड को चूत में अंदर कर दिया. लंड को चूत में अंदर करने के बाद मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और उसकी चूत की चुदाई चालू कर दी. वह फिर से कामुक सिसकारियाँ लेने लगी.

उसकी गांड से मेरी जांघें टकरा रही थीं जिससे फट्ट-फट्ट की आवाज पैदा हो रही थी. पूरे कमरे में हम दोनों की सेक्स की गर्माहट से गर्मी भर गई थी और पंखे के नीचे चुदाई करते हुए भी दोनों के बदन पसीने से भीगने लगे थे.

मैंने कुछ देर तक उसकी चूत की पिलाई की और फिर अपने लंड को बाहर निकाल लिया. उसके बाद मैंने उसको करवट के बल लेटा लिया और खुद भी उसके साथ लेट कर उसकी टांग को उठवा दिया. मैंने उसकी टांग को उठवा कर अपना लंड फिर से साइड में से ही उसकी चूत में धकेल दिया. फिर से उसकी चुदाई शुरू की और अबकी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा.

इस पोजीशन में मुझे थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही थी लेकिन मजा भी दोगुना मिल रहा था. मैंने उसके हिलते-डोलते चूचों को अपने हाथ में बारी-बारी से भर कर दबाना शुरू कर दिया और कुछ ही मिनट के बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

उसकी चूत और भी ज्यादा चिकनी हो गई और मैंने ताबड़तोड़ उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी. पांच मिनट के बाद मेरे लंड ने भी उसकी चूत में वीर्य छोड़ दिया. मैं थक कर एक तरफ लेट गया. मेरी सांस फूल गई थी और वह भी लेट कर हाँफने लगी.

उसके बाद उसने मेरी छाती पर सिर रख लिया और मेरे सिकुड़ रहे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी. मैंने उसके चूचों को सहलाना शुरू कर दिया. फिर वह उठी और मेरे सोये हुए लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मेरे लंड में गुदगुदी सी होने लगी. मगर मजा भी आ रहा था. पांच-सात मिनट के बाद लंड फिर से खड़ा होना शुरू हो गया. उसके बाद जब लंड पूरा तन गया तो वह खुद आकर मेरे लंड पर बैठ गई.
मेरे लंड पर बैठने के बाद वह उछलने लगी और खुद ही अपनी चूत को चुदवाने लगी. आधे घंटे तक वह ऐसे ही मेरे लंड पर उछलती रही और इस तरह चुदाई के बाद हम दोनों साथ में ही झड़ गये.

उस दिन मैंने उसकी तीन बार चुदाई की. वह मेरी दीवानी हो गई थी. मैं भी उसकी चूत चोद कर सातवें आसमान पर पहुंच गया था. उसके बाद तो जब भी वह घर पर अकेली होती तो वह मुझे फोन करके बुला लेती थी और मैं उस सेक्सी जवान आंटी की चूत चुदाई का पूरा मजा लेता था. वह भी मेरे लंड का पूरा मजा लेती थी.

तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ - Mujhe jor se chodo

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मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।

मम्मी ने बेड से उठते हुए कहा- ये कुछ ज्यादा ही हो गया।
ऋतु ने उनसे पूछा- क्या आपको ये सब अच्छा नहीं लगा मम्मी?
मम्मी ने धीरे से कहा- हम्म्म्म हाँ अच्छा तो लगा… पर ये सब एकदम से हुआ… मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.
ऋतु ने उनसे सवाल किया- पर हमें तो बड़ा मजा आया, क्या आपको मेरी चूत को चूसना अच्छा नहीं लगा… मेरी तो इतने दिनों की इच्छा पूरी हो गयी पापा के लंड से अपनी चूत मरवा कर… कितना मजा आया उनका मोटा लंड लेने में… क्या आपको नहीं आया भैया का लंड अपनी चूत में लेने में… बोलो??

सब की नजरें मम्मी की तरफ उठ गयी।
ऋतु ने पापा से पूछा- और पापा क्या आपको मेरी चूत पसंद नहीं आई??
उन दोनों को चुप देख कर चाची ने कहा- अरे… अब आप दोनों ऐसे क्यों शर्मा रहे हैं… आप दोनों को अपने बच्चों के साथ सेक्स करने में मजा आया है तो इस बात को कबूल करने में इतना झिझक क्यों रहे हो?? हमने भी तो अपनी बेटी नेहा को इस खेल में शामिल किया है और उसकी चूत चूसने में मुझे तो बड़ा मजा आता है, उसके पापा भी कल से अपनी बेटी की कसी हुई चूत की बार बार तारीफ़ कर रहे हैं.
मम्मी ने कहा- चलो ठीक है… अब हमें अपने कमरे में चलना चाहिए।

चाची ने कहा- अरे भाभी… मूड मत खराब करो… अभी तो मजा आना शुरू हुआ है… अभी तो पूरी रात पड़ी है।
मैंने मन ही मन सोचा- साली, इस चाची के बदन में आग लगी है, पूरी रात चुदवाने की तैयारी से आई थी हरामजादी।
मम्मी ने कहा- नहीं… अब और नहीं… चलो तुम दोनों अब चुपचाप सो जाओ… और आरती अजय… प्लीज… आप भी चलो यहाँ से!

हम सबने उनकी बात को मानना उचित समझा और अपने बेड पर जाकर रजाई के अन्दर घुस गए।

चाची- चलो ठीक है… तुम कहती हो तो चलते हैं। चलो अजय… अपने रूम में जाकर हम दोनों ही आपस में चुदाई करते हैं.
और चाची हमारे पास आकर हमें गुड नाईट बोली और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल दिया और बोली- काफी मजा आया… कल मिलते हैं।

सब के जाने के बाद हम तीनों अपने बेड पर नंगे रजाई में बैठे हंस रहे थे।
ऋतु- मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि हमने अपने मम्मी पापा के साथ भी चुदाई की. और इतना सब होने के बाद भी उन लोगों ने हमें फिर से इस कमरे में छोड़ दिया… हा हा हा!

नेहा ने अपनी चूत को मेरी टांगों पर दबाते हुए कहा- और मैं सच कहूं तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी काफी मजा आया होगा। वो अभी खुल कर नहीं बता रहे हैं पर तुम दोनों से सेक्स करके वो भी कम खुश नहीं थे।

ऋतु ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर कहा- तो तुम्हारा ये लंड अभी भी कुछ कर दिखाने के मूड में है क्या?
मैंने उन्हें उकसाया- मेरे लंड के कारनामे देखना चाहते हो तो उसे तैयार करो और फिर मैं तुम दोनों को दिखाता हूँ की चुदाई क्या होती है।
ऋतु ने अपनी आँखें मटकाते हुए नेहा की तरफ देखा- ओह… माय माय… लगता है किसी को अपने लंड पर कुछ ज्यादा ही गुरुर हो गया है…
और फिर वो दोनों एक साथ बोली- लगता है गुरुर तोड़ना पड़ेगा… हा हा हा…

उसके बाद जो चुदाई का खेल शुरू हुआ तो उनकी चूत के परखचे ही उड़ गए। उस रात मैंने ऋतु और नेहा की कितनी बार चुदाई की… मुझे खुद ही नहीं मालूम और वो दोनों बेचारी अपनी सूजी हुई चूत लेकर नंगी ही मुझ से लिपट कर सो गयी।

उधर अपने कमरे में पहुंचकर चाची ने शीशे वाली जगह पर ही खड़े होकर दूसरे कमरे में अपनी बेटी और अपनी भतीजी को मुझसे चुदते हुए देखकर चाचू से लगभग तीन या चार बार अपनी चूत मरवाई।

अगली सुबह मैंने अपने लंड के चारो तरफ गीलेपन का एहसास पाया, कोई मेरा लंड चूस रहा था। मैंने अपने दोनों तरफ देखा ऋतु और नेहा दोनों अपने मोटे मोटे चुचे मुझ में घुसेड़े आराम से सो रही थी।
मैंने नीचे देखा तो पाया कि आरती चाची मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही है। मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो मुस्कुरा दी और मुझे गुड मोर्निंग बोलकर फिर से मेरा लंड चाटने लगी।

मेरे शरीर की हलचल पाकर ऋतु भी जाग गयी और जब उसने देखा कि चाची मेरे लंड से ब्रुश कर रही है तो उसकी चूत भी सुबह की खुमारी में रस से सराबोर हो गयी। उसने थोड़ी जगह बना कर चाची को बेड पर आने को कहा।
चाची ऊपर आई और अपनी टांगें ऋतु के चेहरे के ऊपर करके वापिस मेरा लंड चाटने लगी।

नेहा भी अब जाग चुकी थी, अपनी माँ को सुबह सुबह नंगी लंड चूसते देख कर उसके बदन में भी आग लग गयी और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने अपने हाथ नेहा के उभारों पर रख दिए और उन्हें दबा दबाकर उन्हें और बड़ा करने लगा।

नेहा के चुचों के बारे में एक बात कहना चाहता हूँ, वो बड़े ही मुलायम है पर उसके एरोला और निप्पल उतने ही कठोर, वो किसी कील की तरह मेरे हाथों में चुभ रहे थे। मैंने उन्हें और जोर से दबाना शुरू कर दिया और उतनी ही बेदर्दी से उसके नाजुक होंठों को भी चूसना जारी रखा।

तभी दरवाजा खुला और हमारे पापा अन्दर आ गए। उन्होंने जब देखा कि अन्दर सुबह की चुदाई की तैयारी चल रही है तो वो चुपचाप अन्दर आये और अपने कपड़े उतार कर वो भी ऊपर चढ़ गए। चाची की चूत तो वो कई बार मार चुके थे और कल रात उन्होंने ऋतु की भी जम कर चुदाई करी थी।

इसलिए आज उनकी नजर नेहा के कमसिन जिस्म पर थी। नेहा जो मेरे मुंह में घुसी हुई कुछ ढूँढ रही थी, उसकी टांगें चौड़ी करके पापा ने अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे।
नेहा ने जब अपनी चूत पर अपने ताऊ जी की गर्म जीभ को पाया तो उसकी रस बरसाती चूत से एक कंपकपी सी छूट गयी- आआ आआआ आअह्ह्ह्ह… म्म्मम्म म्म… हाआआ अन्न्न… ऐसे ही… जोर से…
और वो पापा को और जोर से अपनी चूत को चूसने के लिए प्रोत्साहित करने लगी।

जवान लड़की की चूत पाकर पापा भी दुगने जोश से अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए नेहा की चूत की तलाशी लेने लगे।

वहां अजय चाचू की जब नींद खुली तो चाची को बगल में ना पाकर उन्होंने भाग कर शीशे वाली जगह देखा और वहां का नजारा देखकर वो नंगे ही हमारे कमरे में दौड़ कर चले आये। उनकी पत्नी मेरा लंड चूस रही थी और उनके बड़े भाई उनकी बेटी की चूत चाट रहे थे और उनकी पत्नी की चूत को उनकी भतीजी साफ़ कर रही थी।

कमरे में अब सिर्फ ऋतु की चूत ही बची थी जो खाली थी। चाचू झट से उसकी तरफ चल पड़े और वहां पहुंच कर अपनी लम्बी जीभ का इस्तेमाल करके ऋतु की चूत और गांड बारी बारी से चाटने लगे, पूरे कमरे में सिसकारियां गूंज रही थी।

पापा का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, वो नेहा को बेड पर लिटा कर खुद जमीन पर उठ खड़े हुए और नेहा की एक टांग को हवा में उठा कर अपना लंड उसकी छोटी सी चूत पर टिका दिया। उनका टोपा काफी बड़ा था, नेहा की छोटी सी चूत के सिरे पर वो फंस सा रहा था।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया तो नेहा दर्द से बिलबिला उठी- आआ आआआ आआआह्ह्ह्ह… धीरे डालो… बड़े पापा… धीरे…
लंड का टोपा अन्दर जाते ही बाकी का काम उसकी चूत की चिकनाई ने कर दिया। पापा का लौड़ा उस पतली सुरंग में फिसलता चला गया.
“अयीईईई ईईईई ईईई… मर… गयी.. अह..अह.. अह..अह.. अह.. अह…”
और पापा ने तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।

नेहा की छाती मेरे सीने पर रखी हुई थी, नेहा के मोटे चूचे मेरे सीने से टकरा रहे थे और उसके खुले मुंह से निकलती लार मेरी छाती पर टपक रही थी।

चाची भी उठ खड़ी हुई और मेरे दोनों तरफ टांगें करके अपनी चूत को मेरे लंड पर टिकाया और मेरी टाँगों पर बैठ गयी। अब उनके मोटे तरबूज भी मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे। मैंने हाथ बढ़ा कर उन्हें भी सहलाना शुरू कर दिया। चाची थोड़ा और आगे हुई और मेरे सीने पर लेटी हुई अपनी बेटी नेहा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी।

ऋतु जो अब तक अपनी चूत चटवा कर काफी गर्म हो चुकी थी।, उसने चाचू के मुंह से बड़ी मुश्किल से अपनी चूत छुड़वाई और उनके लम्बे लंड को एक किस करके उनके ऊपर चढ़ बैठी। बाकी काम चाचू ने कर दिया अपना खड़ा हुआ लंड उसकी रस टपकाती चूत में डाल कर।

अब हमारे कमरे में तीन चुदाई चल रही थी और सभी बड़े जोरो से आवाजें निकाल निकाल कर चुदाई कर रहे थे।

ऋतु चिल्लाई- आआआ आआआह्ह्ह… चाअचूऊऊऊऊऊ… चोदो मुझे… और जोर से… अह…
नेहा भी बोली- बड़े पापा… डालो अन्दर तक अपना मोटा लंड… आआआआह्ह… और तेज… चोदो… अपनी नेहा को बड़े पापा।
चाची भी कहाँ पीछे रहने वाली थी- आआआआअह्ह… रोहण… डाल बेटा… अपनी चाची की चूत कैसी लगी… बता ना?

मैंने चाची की आँखों में देखा और कहा- भेनचोद… कुतिया… कितने लोगों से मरवा चुकी है… तेरी माँ की चूत… साली… कमीनी.. बता मुझे?
चाची ने उखड़ती साँसों से कहा- बड़े लंड लिए है अपनी चूत में… पर अपनों का लेने में जो मजा है वो कहीं नहीं है… चोदो मुझे… दुनिया की हर चाची को तेरे जैसा भतीजा मिले जिसका इतना मोटा लंड हो तो मजा ही आ जाए… बिना पूछे डाल दिया कर अपना लंड मेरी चूत में कभी भी… कहीं भी… आआआ आआआह्ह्ह्ह…
लगता है चाची मेरे लंड से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो गयी थी।
मैंने उनके होर्न अपने हाथों में पकड़े और अपने इंजिन की स्पीड बढ़ा दी।

तभी दरवाजा दुबारा खुला और मम्मी वहां खड़ी थी, मम्मी ने अन्दर आकर पूछा- तुम लोगों को कोई शर्म है या नहीं?
मैंने उनसे कहा- हाय मॉम… गुड मोर्निंग!
मम्मी ने पापा की तरफ देखा और कहा- आप तो कम से कम इन्हें रोकते, पर आप तो खुद ही यहाँ लगे हैं अपनी भतीजी की चूत मारने में!
पापा ने जवाब दिया- पूर्णिमा, अब ये लोग हमारे कहने से रुकने वाले तो हैं नहीं और कल जब सब कुछ हो ही चुका है तो आज इन्कार करने से क्या फायदा… आओ तुम भी आ जाओ ऊपर और खा जाओ घर के लौड़े!

मैंने अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराते हुए कहा- हाँ मम्मी, आप यहाँ आओ, मेरे मुंह के ऊपर मैं आपकी चूत चूसना चाहता हूँ… बड़ी प्यास लगी है मुझे…
चाचू ने भी जोर दिया- हाँ भाभी… आ जाओ ऊपर!

मम्मी ने सभी की बात सुनी और अपना सर हिलाते हुए उन्होंने अपनी हार मान ली और उन्होंने अपना गाउन वहीं जमीन पर गिरा दिया और नंगी ऊपर बेड पर चढ़ गयी और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गई।
मेरी लम्बी जीभ उनकी चूत का इन्तजार कर रही थी।
जैसे जैसे मम्मी नीचे हुई, मेरी पैनी जीभ उनकी चूत में उतरती चली गयी.
“आआ आआआ आअह्ह्ह्ह…” मम्मी ने एक लम्बी सिसकारी मारी और मैंने अपनी जीभ से उनकी क्लिट को दबाना और चुबलाना शुरू कर दिया।

मम्मी का मुंह मेरे लंड की तरफ था जहाँ चाची मेरे लंड की सवारी करने में लगी हुई थी। चाची ने आगे बढ़ कर मम्मी के मोटे चूचों को पकड़ा और उन्हें फ्रेंच किस करने लगी। मम्मी अपनी चूत मेरे मुंह पर बड़ी तेजी से रगड़ रही थी।
मैं जिस तरह से मम्मी की चूत चाट और चबा रहा था, उन्हें काफी मजा आ रहा था। आज अपने बीच तीनों बच्चो को शामिल करके सेक्स करने का मजा लेने में लगे थे सभी बड़े लोग।

मम्मी ने अपनी दायीं तरफ देखा जहाँ उनके पति अपनी भतीजी की चूत का तिया पांचा करने में लगे थे और बायीं तरफ उनकी लाड़ली बेटी अपने चाचू के लंड को आँखें बंद किये मजे से उछल उछल कर ले रही थी और उनके नीचे लेटा उनका बेटा उनकी चूत चाटने के साथ साथ अपनी चाची को भी चोद रहा था.
इतनी कामुकता फैली है इस छोटे से कमरे में।

तभी चाची ने एक तेज आवाज करते हुए झड़ना शुरू कर दिया और वो निढाल होकर नीचे लुढ़क गयी। मेरा लंड उनकी गीली चूत से निकल कर तन कर खड़ा हुआ था। मम्मी ने जब अपने सामने अपने बेटे का चमकता हुआ लंड देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया।
मम्मी ने नीचे झुक कर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूस चूस कर साफ़ करने लगी। मैंने पलट कर मम्मी को नीचे किया और घूम कर उनकी चूत की तरफ आया और अपना साफ़ सुथरा लंड उनकी फूली हुई चूत पर टिका दिया। मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा- आई लव यू मॉम!
और अपना लंड उनकी लार टपकाती चूत में उतार दिया।

मम्मी ने लम्बी सिसकारी भरी- आआ आआआ आह्ह्ह्ह… म्म्म्म म्म…
मम्मी ने मेरा लंड पूरा निगल लिया और मेरी कमर पर अपनी टांगों का कसाव बना कर मुझे बाँध लिया और बोली- बस थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहो… मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ।

मैं मम्मी की छाती पर लेटा रहा और उनके अधखुले होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। धीरे धीरे उन्होंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैंने उनकी टांगों का जाल खोला और उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उनकी टांगों को और भी चौड़ा कर दिया और लगा धक्के पे धक्के मारने अपनी माँ की चूत में।

मम्मी के मुंह से बरबस ही बोल फूट पड़े- आआआ आअह्ह्ह… चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल अपना लंड… मादरचोद… चोद मुझे… बहन चोद… चोद मुझे… आआआ आआह्ह्ह… डाल अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत में… आआह… ह्ह्ह्हहाहा… आहा… ह्ह्ह.. हा.. अह्ह्ह्ह ह्ह…
मैंने भी मम्मी की चूत मारते हुए कहा- ले साली रंडी… बड़ी सती सावित्री बनती है… अपने देवर से चुदवाती है और मुझसे शर्मा रही थी… और अब लंड डाला है तो दुगने मजे ले रही है… कुतिया कहीं की… साली रंडी…

मम्मी ने अपनी गांड उठा कर चुदते हुए कहा- हाँ मैं रंडी हूँ… तेरी रंडी हूँ मैं आज से… चोद मुझे… घर पर जब भी तेरा मन करे चोद देना मुझे… अपने दोस्तों से भी चुदवाना अपनी रंडी माँ को… शाबाश बेटा चोद मुझे!
मम्मी पहले जितना शरमा रही थी उतनी ही खुल गयी थी अब।

पापा ने अपनी भतीजी की कसी चूत जैसी चूत आज तक नहीं मारी थी। नेहा के कसाव के आगे उनके लंड के पसीने छुट गए और उन्होंने अपनी बाल्टी नेहा की चूत में खाली कर दी पर नेहा अभी भी नहीं झड़ी थी।
चाचू के लंड को ऋतु अजीब तरीके से दबा रही थी अपनी चूत से। उन्होंने भी अपनी जवान भतीजी के आगे घुटने टेक दिए और झड़ने लगे उसकी चूत के अन्दर।

ऋतु भी बिना झड़े रह गयी, उसने नेहा को इशारा किया और उसे अपने पास बुला कर उसकी टांगों के बीच अपनी टांगें फंसा कर अपनी चूत से उसकी चूत को रगड़ने लगी।
दोनों की चूत जल रही थी और जल्दी ही उन्होंने एक दूसरे की चूत को अपने रस से नहलाना शुरू कर दिया- आआआ आआह्ह्ह… येस्स स्सस्स… बेबी… ओह… फक्क… आआआह्ह्ह!

इधर मम्मी भी मेरे लंड की सवारी को ज्यादा नहीं कर पायी और उन्होंने एक दो झटके मारे और झड़ने लगी- आआस्स आआअह्ह्ह्ह… मैं तो गयी… आआअह्ह्ह… मजा आआअ… गयाआआ… आआआ आआ आआअह्ह्ह्ह!
मैंने मम्मी की चूत की गर्मी महसूस करी और मैंने भी अपना रस अपनी जननी की चूत में उतार दिया।

चारों तरफ वीर्य और चूत के रस की गंध फैली हुई थी. सबने एक दूसरे को चूमना और सहलाना शुरु किया और बारी बारी से सब की चूत और लंड साफ़ किये और फिर सभी उठ खड़े हुए और फिर सब लोग तैयार होकर नाश्ता करने चले गए।

सुबह नाश्ता करने के बाद हम सब लोग घूमने निकल गए। आज हम पूरे परिवार के साथ घूमने निकले थे तो बड़े लोगो के साथ खुले में चुदाई नहीं कर सकते थे। कुछ देर बाद हम वापस अपने केबिन में आ गए। चाचा चाची, नेहा के साथ अपने रूम में चले गए और मैं, ऋतु और मम्मी पापा के साथ उनके रूम में चले गए।

आते ही ऋतु हरकत में आई और उसने पापा का लंड पकड़ा और उन्हें लंड से घसीटते हुए बेड पर जाकर लेट गयी और उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। पापा का खड़ा हुआ लंड सीधा ऋतु की फड़कती हुई चूत में घुस गया और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर में लपेट कर उसे पूरा अन्दर ले लिया और सिसकारने लगी- आआ आआह आअह्ह… पाआअपाआअ… म्मम्मम्मम!

मम्मी ने भी मुझे बेड पर धक्का दिया और अपनी चूत को मेरे लंड पर टिका कर नीचे बैठ गयी और मेरा पूरा लंड हड़प कर गयी अपनी चूत में!
“उयीईईई ईईईईई… अह्ह्ह- उनके मुंह से एक लम्बी सी सिसकारी निकली।

पापा ने भी चोदते हुए अपने होंठों को ऋतु के होंठों पर रख दिया। पापा के गीले होंठों के स्पर्श से ऋतु का शरीर सिहर रहा था। उसके लरजते हुए होंठों से अजीब अजीब सी आवाजें आ रही थी। अपनी पतली उंगलियाँ वो पापा के घने बालों में घुमा कर उन्हें और उत्तेजित कर रही थी। पापा के होंठ जब उसके खड़े हुए उरोजों तक पहुंचे तो उसकी सिहरन और भी बढ़ गयी, उसके मुंह से अपने आप एक मादक चीख निकल गयी- अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह… पाआआ..पाआ… म्म्म्मम्म…

ऋतु ने अपनी आँखें खोलकर देखा तो पापा अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसके निप्पल के चारों तरफ घुमा रहे थे, उसके कठोर निप्पल और एरोला पर उभरे हुए छोटे छोटे दाने पापा की कठोर जीभ से टकरा कर उसे और भी उत्तेजित कर रहे थे।
ऋतु चाहती थी कि पापा उन्हें और जोर से काटें, बुरी तरह से दबायें। वो अपने साथ उनसे वहशी जैसा बर्ताव करवाना चाहती थी पर पापा तो उसे बड़े प्यार से सहला और चूस रहे थे।

तभी पापा ने उसे जोर से चोदने लगे।
ऋतु चीखी- आआआआह… पपाआआअ… जोर से… चूसो… नाआआआअ.. अपनी बेटी को… हां.. ऐसे… हीईईई… आआआआआह्ह… काटो मेरे निप्पल को दांतों से… आआ आआअह्ह्ह्ह… दबाओ इन्हें अपने हाथों सेईईईईई… आआआआह्ह्ह्ह… चबा डालो… इन्हें ईईए… मत तड़पाओ… ना पपाआआआ… प्लीज…
ऋतु की बातें सुन कर पापा समझ गये कि वो जंगली प्यार चाहती है इसलिए उन्होंने अपनी फूल सी बेटी के जिस्म को जोर से मसलना और दबाना, चूसना और काटना शुरू कर दिया।

मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था। आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे मोटे चुचे मेरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे। मैं उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एड़ियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था।

मम्मी के मुंह में सिसकारियों की झड़ी लगी हुई थी- उफ्फ्फ… ओफ्फ्फ.. ओफ्फ्फ्फ़.. अआः अह अह अह अह अह अहोफ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… फक्क.. मीई… अह्ह्ह्ह्ह… हाआआआन…
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया- आआ आआअह्ह्ह्ह… मैं… गयीईइ… ओह्ह्ह्… गॉड…

मैंने मम्मी को नीचे लिटाया और अपना लंड निकाल कर उनकी दोनों टांगें उठा कर अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया। उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयी। मैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोटी और फूली हुई गांड मारना चाहता था। आज मौका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड पर और एक तेज धक्का मारा।
वो चिल्ला पड़ी- आआआ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआ आआआह्ह्ह्ह…
मॉम की गांड का कसाव सही में लाजवाब था।

मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये। गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था। मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी। मम्मी ने अपनी चूचों को पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिसकारियां सी भरने लगी- आआ आआआ आअह्ह्ह… म्मम्मम्म… ओफ्फ्फ… ओफ्फ्फ… अह्ह्ह्ह… शाबाश बेटा… और तेज करो… हाँ ऐसे ही… आआ आह्ह्ह्ह…
मम्मी अब दोबारा उत्तेजित हो रही थी, मेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी.

और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया- आआआआह्ह… मॉम्म्म… मैं… आआया… आआआआ … आअह्ह्ह…
मम्मी ने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली- आजा… आआआ… मेरे…लाल्ल… आआआअह्ह्ह
और वो भी झड़ने लगी।
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये मेरे लंड को अपनी गांड में लिए लेटी रही।

पापा भी आज काफी खूंखार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतु की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्कों से।
ऋतु तो जैसे भूल ही गयी थी कि वो कहाँ है। अपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी- आआआआआह्ह्ह… पपाआआआ और तेज मार साले… बेटी चोद… मार अपनी बेटी की चूत… आआआह… माआअर… कुत्ते… ओफ्फफ्फ्फ़… अयीईईईई…

वो बड़बड़ा भी रही थी और सिसकारियां भी मार रही थी। जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लपेट ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबा कर और उनके होंठों को अपने होंठों में फंसा कर वो झड़ने लगी।
अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही पापाके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए और वो भी झड़ते हुए ऋतु के नर्म और मुलायम होंठों को काटने लगे… और उसके ऊपर ही ढेर हो गए।

थोड़ी देर बाद हम सभी चाचू कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए। अन्दर अजय चाचू और आरती चाची, नेहा के साथ थ्रीसम कर रहे थे।

अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी आरती चाची की चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल रहे थे और वो चुदक्कड़ आरती चाची तो लंड को देख कर बिफर सी गयी और चाचू के मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी।

नेहा भी अपनी माँ की कमर पर गांड रखकर लेटी हुई थी और अपनी माँ के होंठों और उनके चूचों को चूस रही थी। चाचू भी पीछे से नेहा की चूत और गांड चाट रहे थे।

हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए। मैंने देखा कि चाची ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी। उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था। उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे और उसकी टांगें हवा में थी।

आरती चाची हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोली- आओ भाभी… यहाँ आ जाओ… बड़ा ही मजा आ रहा है… आआ आ आआ आआअह्ह्ह्ह…

हम सभी अभी अभी चुदाई करके आये थे इसलिए थोड़ा थक गए थे। हमने ये बात चाचू को बताई और कहा- आप लोग मजे लो, हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे और फिर शामिल भी हो जायेंगे।
और वो तीनों फिर से अपनी चुदाई में लग गए।

मम्मी, ऋतु और मैं बड़े ही गौर से चाचा को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा भी उन्हें देख कर फिर से ताव में आने लगे थे। चाची के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे।
चाची तो पहले से ही पापा के लंड की दीवानी थी पर आज उसकी चूत में पापा का लंड भी नहीं गया था। इसलिए वो आगे गए और चाची के पास जा कर खड़े हो गए।
आरती चाची ने जब देखा कि उनके जेठ बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रहे है तो उसने पापा पुचकार कर अपने पास बुला लिया और नेहा को उठा कर, पापा को अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल डाल दिया।

पापा ने अपने दांतों से चाची के दाने को चूसना शुरू कर दिया… नीचे से चाचा का लंड और ऊपर से अपने दाने पर जेठ के होंठों का दबाव पाकर आरती चाची लंड पर नाचने सी लगी। पापा तो जैसे चाची के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे। वो अपने छोटे भाई को उसकी पत्नी की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए।

चाची ने जब देखा कि मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा, मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी। उसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर पापा का लंड पकड़ लिया। फिर चाची ने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पूरे शवाब पर आ गया।

चाचू ने जब देखा कि पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने चाची की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले- भैय्या आप आ जाओ… आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत!
पापा ने कहा- अरे नहीं अजय… ऐसे कैसे… तुम एक काम करो… तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मारूँगा।

चाची भी खुशी खुशी यह मान गयी। पापा का लण्ड बिल्कुल सूखा था तो उन्होंने चाची से कहा- तुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ, वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से तुम्हारी चूत में डाल दूंगा जिससे मेरा लौड़ा चिकना हो जाए।
चाची ने उनकी बात समझते हुए हाँ बोल दिया।

उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी। नेहा भी उठकर हमारे पास आ गयी थी। ऋतु भी अपने होंठों पर जीभ फिरा कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी।

अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने चाची को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया। नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था।
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी पर और एक करार झटका मारा।

चाची- अयीईईई ईईई… मररर… गयीईईई… अह्ह्ह्हह्ह!
करते हुए लुढ़क कर चाचू के ऊपर गिर गयी।

पापा का मोटा लंड चाची की चूत के अन्दर घुस गया था। उसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे, उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दिया। पीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा चाची के मोटे चूतड़ों को थामे जोर जोर से धक्के मारने लगे।

चाची की सिसकारियां गूंजने लगी मजे के मारे ‘हम्म्म्म… अ हा हा अ अह अह.. आ… ऊओफ उफ ओफ्फोफ़… ऑफ़… ऑफ़ ऑफ़.. उफ.. ऑफ… ऑफ.. फ़… आह… आह्ह… म्मम्मम जोर से करो ना… भाई साब… प्लीज… और तेज मारो…

तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया चाची की चूत से क्योंकि अब चाचू की बारी जो थी। वो परेशान सी हो गई लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड डाल दिया और वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में।
पापा ने भी अपना गीला लंड चाची की गांड के छेद पर रख दिया। वो समझ गयी और अपने दोनों हाथों से अपनी गांड के छेद को फैलाने लगी।

पापा के एक झटके ने उन्हें चाचू के ऊपर फिर से गिरा दिया और इस बार पापा का लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर जा धंसा.
वो चीखी- आआआआअह्ह्ह्ह… मररर… गयीईईई… अह्ह्हह्ह्ह…

पापा ने अगले दो चार और तेज झटकों ने अपना पूरा आठ इंच लंड चाची की गांड में घुसा दिया था। नीचे से चाचू ने फिर से चाची के दूध पीना शुरू कर दिया। वो हिल भी नहीं पा रही थी। अब दोनों भाई चाची की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे… बड़ा ही कामुक दृश्य था।

ऋतु भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुग्ध सी उन्हें देख रही थी। उसने अपने पूरे कपड़े उतार फैंके और मेरे से लिपट गयी। मेरे कपड़े भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे।
दो लंड से चुद रही आरती चाची अचानक जोर जोर से चिल्लाने लगी- आआआ आआआह्ह… अह.. अह.. अह.. अ हा.. आह.. आह. आह.. आह… उफ.. उफ..उफ.. आआ आआ आअह्ह और तेज मारो… आआआ आअह्ह मजा आ गया!
और चाची ने अपना रस छोड़ दिया चाचा के लंड के ऊपर।
पर अभी भी उनके दोनों छेदों की बराबरी से चुदाई चल रही थी।

तभी ऋतु ने मुझे धक्का देकर नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टिका कर उसके ऊपर बैठ गयी और धक्के मारने लगी। मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा।
मम्मी भी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी भतीजी नेहा की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगी। नेहा ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए और दोनों 69 की अवस्था में एक दूसरी को चूसने लगी।

मैंने अपनी बहन की चूत को ऐसे चोदा कि उसकी चीखें निकल गयी और वो भी झड़ने लगी- आआआ आअह्ह्ह्ह… रोहाआआन्न.. मैं तो गयीईई…
और वो भी गहरी साँसें लेने लगी।

मैंने भी चारों तरफ देखा, चाची को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थे। मम्मी और नेहा भी एक दूसरे की चूत चाट रही थी।

मैंने भी ऋतु को पीछे घुमाया और अपना लंड ऋतु की गांड के छेद में फंसा दिया। ऋतु को जैसे ही मेरे मोटे लंड का अहसास अपनी गांड के छेद में हुआ, वो सिहर उठी, उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और मैंने भी एक तेज शोट मारकर अपना लंड उसकी गांड में धकेल दिया।
वो चिल्ला उठी- आआ आआ आआ आआह्ह्ह…

मैं ऋतु की गांड मैं अपना लण्ड पेल रहा था और मम्मी और नेहा एक दूसरी की चूत को चाटकर झड़ने लगी औऱ फिर उन दोनों ने एक दूसरी के रस को चाट कर साफ कर दिया। नेहा अब मम्मी के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ी।

तभी पापा ने अपना लण्ड चाची की गांड से बाहर निकाल दिया। चाची ने हैरानी से पीछे मुड़ कर देखा और फिर पापा ने अपना लंड उनकी चूत पर टिका दिया। चाचू का लंड पहले से ही वहां पर था।

पापा के मोटे लंड का अहसास पाकर चाचू ने अपना लंड बाहर निकलना चाहा पर पापा ने दबाव डाल कर चाचू के लंड को बाहर नहीं आने दिया और अपना लंड चाची की चूत में फंसा कर एक तेज झटका मारा।

चाची की चूत के धागे खुल गए, उनका मुंह खुला का खुला रह गया- अयीईईई ईईईईईई… मर… गयीईई…साले कुत्ते… भेन के लंड… निकाल अपना लौड़ा मेरी चूत से… फट गयी… आआआ आआआह्ह्ह्ह!
चाची की आँखों से आंसू आने लगे, उनकी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे। चाची की चूत में तेज दर्द हो रहा था। शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा था। पर पापा नहीं रुके और उन्होंने एक और शोट मार कर अपना लंड पूरा उनकी चूत में डाल दिया।

चाचू के लंड के साथ अब उनका लंड भी चाची की चूत में था। उन दोनों का लंड एक दूसरे की घिसाई कर रहा था और दोनों की गोलियां एक दूसरे के गले मिल रही थी। चाची के लिए ये एक नया अहसास था, उनकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए, ये सोच कर पापा ने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। चाचू ने भी पापा के साथ ताल मिलायी और वो दोनों चाची की चूत में अपने अपने लंड पेल रहे थे।

दो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखाने लगे और चाची की दर्द भरी चीखें मीठी सिसकारियों में बदल गयी- आआआ आआह आआह्ह्ह्ह… म्मम्मम्म… साले कुत्तो… तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली… आआआ आअह्ह्ह पर जो भी है… म्मम्मम्म… मजा आ रहा है… मारो अब दोनों… मेरी चूत को… आआआआह्ह्ह्ह…
और फिर तो पापा और चाचू ने चाची जो रेल बनायी… जो रेल बनायी… वो देखते ही बनती थी।
आरती चाची की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी।

सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोड़ा, वो चिल्लाए- आआआ आअह्ह्ह्ह… वाह… मजा आ… गयाआआ!
चाची भी अपनी चूत में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसा कर कूदने लगी। जल्दी ही चाचू और चाची भी एक साथ झड़ने लगे. आआआ आअयीईई ईईई… म्मम्मम्म… मैं तो गयी…आआह आआअह्ह्ह्ह… ऊऊओफ़ गॉड!

मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब था, ऋतु तो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी, वो फिर से झड़ने लगी तो मैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया। हम दोनों का पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा।
ऋतु उठी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया। सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा और हम सभी की हंसी निकल गयी।

अगले तीन दिनों तक हम सभी ने हर तरीके से एक दूसरे को कितनी बार चोदा, बता नहीं सकता और अंत में वो दिन भी आ गया जब हमें वापिस जाना था।

मुझे इतना मजा आज तक नहीं आया था। मैंने इस टूर पर ना जाने कितनी चूतें चोदी थी और कितनी बार चोदी, मैं गिनती भी नहीं कर पा रहा था।
चाचा चाची, नेहा के साथ अपनी कार में सवार हो कर घर के लिए निकल गए और हम लोग भी अपने घर चल दिये थे।

वापिस जाते हुए मैं कार में बैठा सोच रहा था कि कैसे विकास और सन्नी को ऋतु की चूत दिलाई जाए और इसके लिए कितना चार्ज किया जाए। मैं तो ये भी सोच रहा था कि मम्मी को भी इसमें शामिल कर लेना चाहिए.
देखते हैं।

तभी मम्मी के फोन की घंटी बज उठी और उन्होंने कहा- अरे… दीपा का फोन है.
और ये कहते हुए उन्होंने फोन उठा लिया और बातें करने लगी।
दीपा मम्मी की छोटी बहन है यानी हमारी मौसी! वो मम्मी की तरह ही गोरी चिट्टी हैं, बाल कटे हुए, दुबली पतली। पर उनके चुचे देख कर मेरे मुंह में हमेशा से पानी आ जाता था। वो गुजरात में रहती हैं और उनके पति सरकारी जॉब करते हैं। उनके दो बच्चे हैं अयान और सुरभि, दोनों लगभग हमारी ही उम्र के हैं।

मैं गोर से उनकी बातें सुनने लगा। बात ख़त्म होने के बाद मम्मी ने खुश होते हुए कहा- अरे सुनो… दीपा आ रही है अपने परिवार के साथ। वो लोग भी छुट्टियों में घुमने के लिए शिमला गए थे और वापसी में वो लोग कुछ दिन हमारे पास रुकना चाहते हैं।

मम्मी की बात सुनकर पापा बड़े खुश हुए, उनकी नजर हमेशा अपनी साली पर रहती थी, ये मैंने कई बार नोट किया था पर दीपा मौसी बड़े नकचढ़े स्वभाव की थी। वो पापा की हरकतों पर उन्हें डांट भी देती थी इसलिए पापा की ज्यादा हिम्मत नहीं होती थी पर अब बात कुछ और थी। मम्मी पापा हमारे साथ खुल चुके थे इसलिए वो खुल कर बात कर रहे थे हमारे सामने।

पापा बोले- इस बार तो मैं इस दीपा की बच्ची की चूत मार कर रहूँगा। बड़े सालों से ट्राई कर रहा हूँ, भाव ही नहीं देती साली।
मम्मी ने कहा- अजी सुनो… तुम ऐसा कुछ मत करना। वो पहले भी कई बार मुझसे तुम्हारे बारे में बोल चुकी है और इस बार तो उसके साथ सभी होंगे। उसके बच्चे और उसका पति हरीश भी। तुम ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे उसे कोई परेशानी हो… समझे?
“देखेंगे…” पापा ने कहा और ड्राइव करने लगे।

जल्दी ही हम सभी घर पहुँच गए और सीधे अपने कमरे में जाकर बेसुध होकर सो गए। ऋतु मेरे साथ मेरे कमरे में ही सो रही थी वो भी नंगी पर हमारे में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि चुदाई कर सकें, सफ़र में काफी थक चुके थे।

मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी - Mummy ki chut me aag jalne lagi

मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी - Munny ki chut me aag jalne lagi , लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

चाचू ने अपना लंड बाहर निकला और ऋतु के चेहरे के सामने कर दिया। ऋतु ने बिना कुछ सोचे उन का रस से भीगा लंड मुंह में लिया और चूस चूस कर साफ़ करने लगी।

चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी, चाची की चूत में से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था। वो थोड़ा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका दिया। फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी।

ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली और चाचू का रस इकट्ठा कर के चाट गयी।

तभी दरवाजे की तरफ से आवाज आई- ये क्या हो रहा है?
हमने देखा तो नेहा वहां खड़ी थी अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लिए…
हम सभी की नजर दरवाजे पर खड़ी नेहा पर चिपक सी गयी। मैं, ऋतु, आरती चाची और अजय चाचू सब नंगे हुए एक दूसरे को चाट और चूस रहे थे और थोड़ी ही देर पहले हम सबने चुदाई भी की थी.. ना जाने कब से नेहा ये सब देख रही थी।

मेरी और ऋतु की तो कोई बात नहीं… पर चाचू और चाची की शक्ल देखने वाली थी, उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी उन्हें ‘नंगे’ हाथों पकड़ लेगी।
मैंने गौर से देखा तो नेहा का ध्यान चाचू के लंड पर ही था और उस के चेहरे पर अजीब तरह के भाव थे।
मैं समझ गया और उठ खड़ा हुआ- देखो नेहा, तुमने तो वैसे भी अपने मम्मी पापा को हमारे मम्मी पापा के साथ नंगा देख ही लिया है उस शीशे वाली जगह से और आज हालात कुछ ऐसे हुए कि हमें चाचू चाची को अपने राज में शामिल करना पड़ा!

और फिर मैंने सारी बात विस्तार से बता दी नेहा को।

चाचू और चाची ने जब ये सुना कि नेहा ने भी उन्हें दूसरे कमरे में रंगरेलियां मनाते हुए देखा है तो वो थोड़ा शर्मिंदा हो गए। पर फिर उन्होंने सोचा की जब उसे पता चल ही गया है तो क्यों न उसे भी इसमें शामिल कर लिया जाए।

आरती चाची जानती थी कि नेहा अपने स्कूल में लड़कों को काफी लिफ्ट देती है और उसने कई बार नेहा को उस के रूम में एक साथ पढ़ाई कर रहे लड़कों के साथ चूमते चाटते भी देखा था। उन्होंने अजय चाचा की तरफ देखा और आँखों आँखों में कुछ इशारे करे।
फिर वो आगे आई और नेहा का हाथ पकड़ कर वही बेड पर बिठा लिया।

नेहा आँखें फाड़े हम सभी नंगे लोगों को देख रही थी। दरअसल उस का भी प्रोग्राम में दिल नहीं लग रहा था और जब वो वापिस आई तो उसने अपने मम्मी पापा को हमारे रूम में घुसते हुए देखा, वो भी पूरे नंगे… वो समझ गयी कि अन्दर क्या होने वाला है पर अपने मम्मी पापा के सामने वो एकदम से ये नहीं दर्शाना चाहती थी कि वो भी मेरे और ऋतु के साथ चुदाई के खेल में शामिल है, इसलिए उसने खिड़की से अन्दर का सारा प्रोग्राम देखा।

अपने पापा के द्वारा ऋतु की चुदाई करते देख कर उस की छोटी सी चूत में आग लग गयी थी और जब मैंने उस की माँ की चुदाई की तो उस के बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसने वही खिड़की पर खड़े खड़े अपनी चूत में उंगलियाँ डाल कर उस की अग्नि को शांत किया… पर अन्दर के खेल को देख कर उस की चूत अभी भी खुजला रही थी। इसलिए उसने तय किया कि वो भी अन्दर जायेगी और इसमें शामिल हो जाएगी।

आरती चाची ने नेहा की टी शर्ट उतार दी। नेहा किसी बुत की तरह बैठी थी।
फिर ऋतु आगे आई और उसने उस की जींस के बटन खोल कर उसे भी नीचे कर दिया। अब नेहा सिर्फ पर्पल कलर की पेंटी और ब्रा में बैठी थी। उस का बाप यानी अजय चाचू तो उस के ब्रा में कैद मोटे मोटे और गोल चुचे देख कर अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया… वो मुंह फाड़े अपनी कमसिन सी बेटी के अर्धनग्न जिस्म को निहार रहा था और अपनी जीभ अपने सूखे होंठों पर फिरा रहा था।
मैं एक कोने मैं बैठा सबकी हरकतें नोट कर रहा था।

चाची उठी और अपने चुचे को नेहा के होंठों से चिपका दिए, नेहा ने कुछ नहीं किया। शायद वो अभी भी दर्शाना चाह रही थी कि वो ये सब नहीं करना चाहती पर अन्दर ही अन्दर उस की चूत में ऐसी खुजली हो रही थी कि अपनी माँ को वही पटके और उस के मुंह में अपनी चूत से ऐसी रगड़ाई करे कि उस की सारी खुजली मिट जाए।

थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोले और अपनी आँखें बंद करके अपनी माँ का दूध पीने लगी। ऋतु ने उस की ब्रा खोल दी और नीचे से हाथ डाल कर उस की पेंटी भी उतार दी।
ब्रा के खुलते ही नेहा के दोनों पंछी आजाद हो गए। मैंने देखा उस के निप्प्ल्स एक दम खड़े हो चुके हैं और चूत से भी रस टपक कर चादर को गीला कर रहा है यानि वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी। अजय चाचू ने अपनी बेटी को नंगी देखा तो उनकी साँसें रुक सी गयी।

चाची ने इशारे से चाचू को आगे बुलाया, वो तो जैसे इसी इन्तजार में बैठे थे, वो लपक कर आगे आये और अपनी बेटी के दायें चुचे को अपने मुंह में भर कर लगे चूसने किसी बच्चे की तरह। उन्होंने उत्तेजना के मारे उस के दाने पर जोर से काट मारा।

नेहा चिल्लाई- आआआ आआह्ह्ह…. पाआआ… पाआआआ… स्स्सस्स सस्स्स… अयीईईई ईईईई…
नेहा ने अपने पापा के सर को किसी जंगली की तरह पकड़ा और उनकी आँखों में देख कर अपने थूक से गीले हुए होंठ उनसे भिड़ा दिए, नेहा के पापा के तो मजे आ गए। अपनी बेटी के इस जंगलीपन को देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया।
खड़ा तो मेरा भी हो गया था पर लगातार 3-4 बार झड़ने के बाद मैं अपने लंड को थोड़ा आराम देना चाहता था।

बाप बेटी एक दूसरे को ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई गेम चल रही हो और दोनों एक दूसरे से ज्यादा पॉइंट्स लेने के लिए ज्यादा चूसने वाली गेम खेल रहे हैं।
चाचू ने अपने हाथ नेहा की गोलाइयों पर टिका दिए और उन्हें मसलने लगे.
नेहा की सिसकारी निकलने लगी- आआह आआअह्ह दबाओ ऊऊऊ इन्हीईए.. पाआआ… पाआआ…

आरती चाची ने अपनी बेटी नेहा को बेड पर लिटा दिया और उस की रस टपकती चूत पर हमला बोल दिया। ऋतु ने भी अपनी चाची का साथ दिया और वो दोनों नेहा की चूत के दोनों तरफ आधे लेट गई और बारी बारी से नेहा की चूत चाटने लगी।

ऊपर चाचू अपनी जवान सेक्सी बेटी के मुंह के अन्दर घुसे हुए उस का रसपान कर रहे थे। उन्होंने किस तोड़ी और थोड़ा नीचे खिसक कर अपने होंठ से नेहा के चुचे चूसने लगे। नेहा बेटी ने हाथ बड़ा कर अपने पापा का लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी, फिर उसने लंड को थोड़ा और खींच कर अपने मुंह के पास खींच लिया।

चाचू समझ गए और अपना चेहरा उस की चूत की तरफ घुमा कर उस के मुंह पर बैठ गए और नेहा ने अपने पापा का लंड अपने कोमल मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
चाचू का चेहरा देखने लायक था, उनके आनंद की कोई सीमा नहीं थी। आज अपनी भाभी से और फिर अपनी भतीजी से चुसवाने के बाद अब वो अपना लंड अपनी ही बेटी के मुंह में डाले मजे ले रहे थे।

चाचू थोड़ा झुके और ऋतु और आरती को हटा कर अपना मुंह अपनी बेटी की चूत पर रख कर चाटने लगे उस की रसीली चूत को। बीच बीच में वो सांस लेने के लिए ऊपर आते और ये मौका ऋतु और आरती ले लेती और उस की चूत चाटने लगती।
कुल मिला कर नेहा की चूत तीन लोग चाट रहे थे और वो अपने पापा का लंड चूस रही थी।

चाचू जब झड़ने वाले थे तो उन्होंने एकदम से अपना लंड नेहा के मुख से निकाल लिया और वापिस ऊपर आ कर उस को चूमने लगे। नेहा से भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने अपने पापा को धक्का दिया और उछल कर उन के ऊपर बैठ गयी।
अजय चाचू का फड़कता हुआ लंड नेहा की चूत के नीचे था। नेहा ने अपने पापा के दोनों हाथों में अपनी उंगलियाँ फंसाई और अपनी गांड और अपना सर नीचे झुका दिया। उस के होंठ अपने पापा के होंठों से जुड़े थे और चूत उनके लंड से।

पीछे से आरती चाची ने अपने पति का लंड पकड़ा और अपनी बेटी की चूत में फंसा दिया और उसे नीचे की तरफ दबा दिया। नेहा की कसी चूत में उस के पापा का लंड उतरता चला गया।
“आआ आआअ आआआह्ह…. आआस्स… आआअह्ह्ह… पाआआ… पाआआ… म्म्म्म म्म्म्म म्म…” नेहा ने थोड़ा ऊपर होकर लम्बी सिसकारी निकाली… और अपने चुचे को अजय चाचू के मुंह में ठूँस दिया।
अब चाचू का पूरा लंड उनकी बेटी की चूत के अन्दर था।

नेहा ने उछलना शुरू किया और चाचू का लंड अपनी चूत में अन्दर बाहर करने लगी। चाची और ऋतु नीचे बैठी बड़े गौर से इस चुदाई को देख रही थी। चाची ने हाथ आगे करके अपनी उंगलियाँ ऋतु की चूत में डाल दी और ऋतु ने आरती चाची की चूत में। फिर उन्होंने अपनी टाँगें एक दूसरे में ऐसी फंसाई कि दोनों की चूत आपस में रगड़ खाने लगी और उन्होंने बैठे बैठे ही एक दूसरी की चूत को अपनी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया।

“आआम्म आआह… अह्ह्ह ह्ह्ह्हह… अहहहः… आहाहाहा.. हा.. हा हा.. हा.. अहा.. हह्ह्ह.. म्मम्म…” ऋतु और चाची अजीब तरह से हुंकार रही थी।
पूरे कमरे में सेक्स का नया दौर शुरू हो चुका था। मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो चुका था पर इतनी चुदाई के कारण वो दर्द भी कर रहा था इसलिए मैंने दूर बैठे रहना ही उचित समझा।

चाचू ने नेहा के गोल चूतड़ों को पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए। नेहा की सिसकारियां चीखों में बदल गयी और जल्दी ही वो झड़ने लगी- आआआअह्ह… अह्ह्ह.. अहः अहः अ अहः अ आहा हा… हा… पपाआआआ… मैं… आयीईईईइ… ऊऊओ… ऊऊऊ… ऊऊऊऊ… आआआह्ह.. और उसने अपने रस से पापा के लंड को नहला दिया और अपने मोटे मोटे चूचों को उनके मुंह पर दबा कर वही निढाल हो कर गिर पड़ी।

चाचू ने उसे नीचे उतारा और उस की टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया और अपना लंड उस की चूत में फिर से डाल दिया और धक्के देने लगे। चाचू का भी तीसरा मौका था इसलिए झड़ने में काफी समय लग रहा था। पर जल्दी ही अपने नीचे पड़ी अपनी बेटी के मोटे मोटे मम्मे हिलते देख कर वो भी झड़ने लगे और अपना रस उस की चूत के अन्दर उड़ेल दिया वो अपनी बेटी की चूत में झड़ गये, और उस की छाती के ऊपर गिर कर हांफने लगे।
नेहा ने उनके चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और सर पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगी।

चाची और ऋतु की चूत भी आपसी घर्षण की वजह से जल उठी और उन का लावा भी निकल पड़ा और उन्होंने झड़ते हुए एक दूसरी को चूम लिया।
मैं ये सब देख कर बेड के एक कोने में बैठा मुस्कुरा रहा था।

थोड़ी देर लेटने के बाद चाचू और चाची चले गए। उन के जाते ही ऋतु और नेहा ने एक दूसरे की चूत चाट कर साफ़ कर दी और हम तीनों वही नंगे लेट गए।
दूसरे कमरे में जाकर चाची ने शीशा हटा कर देखा और अपनी नंगी बेटी को मेरी बगल में लेटते हुए देख कर वो मुस्कुरा दी। अगले दिन सुबह हम तीनों, यानि मैं, ऋतु और नेहा नाश्ता करने के बाद पहाड़ी की तरफ चल दिए। ऋतु आगे चल रही थी। वो वही कल वाली जगह पर जा रही थी, उस ऊँची चट्टान पर।

मैं और नेहा उसके पीछे थे। नेहा ने अपने हाथ मेरी कमर पर लपेट रखे थे और मैंने उसकी कमर पर। बीच बीच में हम एक दूसरे को किस भी कर लेते थे। बड़ा ही सुहाना मौसम था, आज धूप भी निकली हुई थी।

नेहा थोड़ा थक गयी और सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। मैं भी उसके साथ बैठ गया। ऋतु आगे निकल गयी और हमारी आँखों से ओझल हो गयी।

नेहा ने अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिए और मैं उन्हें चूसने लगा। मैंने हाथ बड़ा कर उसके सेब अपने हाथों में ले लिए और उनके साथ खेलने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था।

मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, पर तभी मेरा ध्यान ऋतु की तरफ गया और मैं जल्दी से खड़ा हुआ और नेहा को चलने को कहा। क्योंकि वो जंगली इलाका था और मुझे अपनी बहन की चिंता हो रही थी।
हम जल्दी जल्दी चलते हुए चट्टान के पास पहुंचे और वहां देखा तो ऋतु अपने उसी पोज में बैठी थी अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी।

ऋतु ने हमसे शिकायती लहजे से पूछा- तुम क्या रास्ते में ही शुरू हो गए थे, इतनी देर क्यों लगा दी?
नेहा ने जब देखा कि ऋतु नंगी है तो उसने भी अपनी लोन्ग फ्रोक को नीचे से पकड़ा और अपने सर से उठा कर उसे उतार दिया। वो नीचे से बिल्कुल नंगी थी और वो भी जाकर अपनी बहन के साथ चट्टान पर लेट गयी।
अब मेरे सामने दो हंसती खेलती नंगी जवान लड़कियां बैठी थी, मेरा लंड मचल उठा और मैंने भी अपने कपड़े बिजली की फुर्ती से उतार डाले।

नेहा ने मेरा लंड देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी, वो आगे बड़ी तभी ऋतु ने उसे पीछे करते हुए कहा- चल कुतिया पीछे हो जा, पहले मैं चूसूंगी अपने भाई का लंड!
नेहा को विश्वास नहीं हुआ कि ऋतु ने उसे गाली दी। पर जब हम दोनों को मुस्कुराते हुए देखा तो वो समझ गयी कि आज गाली देकर चुदाई करनी है… तो वो भी चिल्लाई- तू हट हरामजादी, अपने भाई का लंड चूसते हुए तुझे शर्म नहीं आती… कमीनी कहीं की…
और उसने ऋतु के बाल हल्के से पकड़ कर पीछे किया और झुक कर मेरे लम्बे लंड को मुंह में भर लिया।

ठन्डे मौसम में मेरा लंड उसके गर्म मुंह में जाते ही मैं सिहर उठा।
ऋतु- अच्छा तो तू इसे चूसना चाहती है, ठहर मैं तुझे बताती हूँ…
और ये कहते ही उसने नेहा की गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी जीभ रख दी उसके गांड के छेद पर!
नेहा चिल्ला उठी… और इतने में ऋतु ने एक जोरदार हाथ उसके गोल चूतड़ पर दे मारा… और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी.
“आआ आआह्ह्ह्ह… नहीईई ईईईईईई… वहान्न्न न्न्न्न.. नहीईई ईईई… ”
पर ऋतु ने नहीं सुना और अपनी छोटी बहन की गांड में दूसरी उंगली भी घुसेड़ दी… उसकी आँखें बाहर निकल आई पर उसने मेरा लंड चूसना नहीं छोड़ा।

उन दोनो की लड़ाई में मेरे लंड का बुरा हाल था क्योंकि अपने ऊपर हुए हमले का बदला नेहा मेरे लंड को उतनी ही जोर से चूस कर और काट कर ले रही थी।
मैंने नेहा के बाल वहशी तरीके से पकड़े और उसका चेहरा ऊपर करके उसके होंठ काट डाले।
वो दर्द से बिलबिला उठी- छोड़… कुत्ते… आआआ आयीईईईई… भेन चोद… भूतनी के… आआआआआह…
वो चिल्लाती जा रही थी क्योंकि उसकी गांड में ऋतु की उंगलियाँ थी जिससे उसकी गांड फट रही थी और ऊपर से मैं उसके होंठ काट काट कर उसकी फाड़ रहा था।

नेहा के मुंह से लार गिर रही थी और उसके पेट पर गिर कर उसे चिकना बना रही थी। अचानक ऋतु ने अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी गांड में एक उंगली डाल दी। मेरे तन बदन में बिजली दौड़ गयी। मैं उछल पड़ा, पर मैंने नेहा को चूसना नहीं छोड़ा।

मैंने अपनी बलशाली भुजाओं का प्रयोग किया और नेहा को किसी बच्चे की तरह उसकी जांघों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और उसने अपनी टाँगें मेरे मुंह के दोनों तरफ रख दी और अपनी चूत का द्वार मेरे मुंह पर टिका दिया।

ऋतु ने चूस कर उसकी चूत को काफी गीला कर दिया था। मेरे मुंह में उसका रस और ऋतु के मुंह की लार आई और मैं सपड़ सपड़ करके उसे चाटने लगा। नेहा ने मेरे बालों को जोर से पकड़ रखा था और मैं चट्टान पर अपनी गांड टिकाये जमीन पर खड़ा था। नेहा मेरे मुंह पर चूत टिकाये चट्टान पर हवा में खड़ी थी और ऋतु नीचे जमीन पर किसी कुतिया की तरह अब मेरे गांड के छेद को चाट रही थी।

पूरी वादियों में हम तीनों की सिसकारियां गूंज रही थी। मैंने अपना हाथ पीछे करके नेहा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड के छेद में एक साथ दो उंगलियाँ घुसा दी। अब उसे भी अपनी गांड के छेद के द्वारा मजा आ रहा था।
पिछले दो दिनों में वो मुझ से और अपने बाप से चुद चुकी थी… पर आज उसके मन में गांड मरवाने का भी विचार आने लगा।

अपनी गांड में हुए उत्तेजक हमले और चूत पर मेरे दांतों के प्रहार से नेहा और भड़क उठी और वो अपनी चूत को ओर तेजी से मेरे मुंह पर घिसने लगी और झड़ने लगी- आआहह आआआअह्ह्ह… ले कुत्ते… भेन के लोड़े… पी जा मेरा रस… आआह्ह…
उसकी चूत आज काफी पानी छोड़ रही थी। मेरे मुंह से निकल कर नेहा की चूत के पानी की बूंदें नीचे गिर रही थी और वहां बैठी हमारी कुतिया ऋतु अपना मुंह ऊपर फाड़े उसे कैच करने में लगी हुई थी।

झड़ने के बाद नेहा मेरे मुंह से नीचे उतर आई और चट्टान पर अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी। मैंने अपना फड़कता हुआ लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा ही था कि उसने मुझे रोक दिया और बोली- बहन चोद, आज मेरी गांड में डाल…
मैंने हैरानी से उसकी आँखों में देखा और उसने आश्वासन के साथ मुझे फिर कहा- हां… बाबा… चलो मेरी गांड मारो… प्लीज…

मैंने अपनी वही पुरानी तरकीब अपनाई ओर एक तेज झटका मारकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया.
वो चिल्लाई- अबे… भेन चोद… समझ नहीं आती क्या… गांड मार मेरी… चूत नहीं कुत्ते…
पर मैं नहीं रुका और उसकी चूत में अपना लंड अन्दर तक पेल दिया ओर तेजी से झटके मारने लगा।

अब मेरा लंड नेहा की चूत के रस से अच्छी तरह सराबोर हो चुका था, मैंने अपना लण्ड निकाला… नेहा की आँखों में विस्मय के भाव थे कि मैंने उसकी चूत में से अपना डंडा क्यों निकाल लिया। मैंने उसे उल्टी लेटने को कहा, कुतिया वाले पोज में। वो समझ गयी और अपनी मोटी गांड उठा कर चट्टान पर अपना सर टिका दिया।

ऋतु जो अब तक खामोश बैठी अपनी चूत में उँगलियाँ चला रही थी, उछल कर चट्टान पर चढ़ गयी और अपनी टाँगें फैला कर नेहा के मुंह के नीचे लेट गयी। नेहा समझ गयी और अपना मुंह उसकी नर्म और गर्म चूत पर रख दिया और चाटने लगी।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली ओर चटवाने के मजे लेने लगी। वो नेहा के सर को अपनी चूत पर तेजी से दबा रही थी- चाट कुतिया… मेरी चूत से सारा पानी चाट ले… आआहह आआअह्ह… भेन चोद… हरामजादी… चूस मेरी चूत को… आआआह्ह्ह्ह!

नेहा ने उसकी चूत को खोल कर उसकी क्लिट को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। ऋतु तो पागल ही हो गयी- ओह.. ओह.. ओह.. ओह.. ओ.. ओह.. ओह.. ओह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह…
वो बुदबुदाये जा रही थी और चुसवाती जा रही थी।

पीछे से मैंने नेहा की गांड की बनावट देखी तो देखता ही रह गया। उसके उठे हुए कूल्हे किसी बड़े से गुब्बारे से बने दिल की आकृति सा लग रहा था। मैंने उसे प्यार से सहलाया और अपने एक हाथ से उसे दबाने लगा।

नेहा ने ऋतु की चूत चाटना छोड़ा और पीछे सर करके बोली- अबे भेन चोद… क्या अपना लंड हिला रहा है पीछे खड़ा हुआ… कमीने, मेरी गांड मसलना छोड़ और डाल दे अपना हथियार मेरी कुंवारी गांड में… डाल कुत्ते…
वो लगभग चिल्ला ही रही थी।

मैंने अपना लंड थूक से गीला किया और उसकी गांड के छेद पर टिकाया, थोड़ा सा धक्का मारा- अयीईईई… मर… गयीईई… अह्ह्ह ह्ह्ह्ह… नहींईईईईइ…
मेरे लंड का टॉप उसकी गांड के रिंग में फंस गया था।

मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड को निशाना बनाकर थूका… जो सही निशाने पर लगी, लंड गीला हो गया। मैंने एक और धक्का मारा- आआआ आआआ आआअह्ह्ह…
मेरी चचेरी बहन की ये चीख काफी लम्बी थी… उसने अपने दांत ऋतु की चूत में गाड़ दिए।
ऋतु भी बिलबिला उठी- हटट… कुतियाआ… अपनी गांड फटने का बदला मेरी चूत से ले रही है… आआआ आआह्ह्ह्ह… धीरे चाट… नहीं तो तेरी चूत में लकड़ी का तना डाल दूंगी…
ऋतु ने नेहा को धमकी दी।

मेरा लंड आधा उसकी गांड में घुस चुका था… मैंने उसे निकाला और थोड़ी और थूक लगाकर फिर से अन्दर डाला। अब मैं सिर्फ आधा लंड ही डाल रहा था। नेहा भी अपनी गांड धीरे धीरे मटका कर घुमाने लगी। मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है।

नेहा की गांड मोटी होने के साथ साथ काफी टाईट भी थी। आठ दस धक्के लगाने के बाद मैंने फिर से आगे की तरफ झटका मारा… तो नेहा फिर से चिल्लाई- माँ के लौड़े… तेरी माँ की चूत… भोंसड़ी के… कमीने… कुते… फाड़ डाली मेरी गांड… आआ आआह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह…
वो चिल्लाती जा रही थी और अपनी गांड मटकाए जा रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे मजा आ रहा है या दर्द हो रहा है।

उधर ऋतु का बुरा हाल था, चटवाने से पहले उसे बड़े जोर से पेशाब आ रहा था पर चटवाने के लालच में वो कर नहीं पायी थी। अब जब नेहा उसकी चूत का ताना बाना अलग कर रही थी तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपने तेज पेशाब की धार सीधे नेहा के मुंह में दे मारी।

पहले तो नेहा को लगा कि ऋतु झड़ गयी है पर जब पेशाब की बदबू उसके नथुनों में समायी तो उसने झटके से अपना मुंह पीछे किया और ऋतु की चूत पर थूक दिया।
ऋतु की चूत का फव्वारा बड़ी तेजी से उछला और नेहा के सर के ऊपर से होता हुआ नेहा की पीठ पर गिरा। मेरे सामने ऋतु अपनी चूत खोले अपने पेशाब से नेहा की कमर भिगो रही थी। नेहा की कमर से होता हुआ ऋतु का पेशाब, मेरे गांड मारते लंड तक फिसल कर आ गया और उसे और लसीला बना दिया और मैं और तेजी से नेहा की गांड मारने लगा।

नेहा ने अपना मुंह तो हटा लिया था पर उसके गले से कुछ बूँदें उसके पेट में भी चली गयी थी। उसका स्वाद थोड़ा कसैला था.. पर उसे पसंद आया। आज नेहा किसी जंगली की तरह बर्ताव कर रही थी। उसने उसी जंगलीपन के आवेश में अपना मुंह वापिस बारिश कर रहे फव्वारे पर टिका दिया और जलपान करने लगी।

ऋतु ने जब देखा कि उसकी बहन उसका पेशाब पी रही है तो वो और तेजी से झटके दे देकर अपनी चूत नेहा के मुंह में धकेलने लगी। मेरा लंड भी अब काफी गीला हो चुका था… थूक, पेशाब और नेहा की चूत के रस में डूब कर… मेरा लौड़ा किसी पिस्टन की तरह नेहा की गांड में अन्दर बाहर हो रहा था। नेहा की गांड का कसाव मेरे लंड पर हावी हो रहा था।
मेरे लंड ने जवाब दे दिया और उसने नेहा की गांड में उल्टी कर दी।

नेहा ने भी अपनी गांड में गर्म वाला महसूस करते ही झड़ना शुरू कर दिया और वहां ऋतु की चूत ने भी जवाब दे दिया और वो भी रस टपकाने लगी।

नेहा ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपना मुंह ऋतु की चूत की तरफ घुमा कर अपनी गांड उसके मुंह पर टिका दी। ऋतु उसकी गांड से बहते हुए मेरे लावे को चाटने लगी और अपना रस नेहा को चटवाने लगी।
मैं जमीन पर खड़ा हुआ अपने मुरझाते हुए लंड को देख रहा था और उन दोनों कुतियों को एक दूसरे की चूत चाटते हुए देख रहा था।

सारी चुदाई की कथा ख़त्म होने के बाद हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और नीचे की तरफ चल दिए। नेहा थोड़ा धीरे चल रही थी… चले भी क्यों न… मेरी बहन की गांड जो फट गयी थी आज!
हम को काफी समय हो गया था, हम भागते हुए अपने केबिन पहुंचे तो हमारे मम्मी पापा नंगे अजय चाचू के कमरे से निकल रहे थे। हम दोनों को सामने पाकर वो दोनों ठिठक कर वहीं खड़े हो गए।

हमें सामने पाकर पापा ने अपने लण्ड को हाथों से छुपा लिया औऱ मम्मी भी अपने बदन को ढकने के लिए अपने छोटे से हाथो का सहारा ले रही थी पर उनसे कुछ छुप नहीं पा रहा था।
हड़बड़ाहट में मम्मी ने हम से पूछा- तुम इतनी देर तक कहाँ थे?? क्या करके आ रहे हो??
वो पूरी नंगी हमारे सामने खड़ी थी इसलिए थोड़ा शर्मा भी रही थी अपनी हालत पर।

ऋतु ने अपने पापा के आधे खड़े हुए लंड को घूरते हुए कहा- हम सब बस घूम कर आ रहे हैं।
मैंने मम्मी की तरफ देखते हुए पूछा- क्या आप दोनों चाचू के कमरे से आ रहे हैं?
मम्मी ने हड़बड़ा कर कहा- ह्म्म्म… हम उन्हें गुड नाइट बोलने गए थे… उनके निप्प्ल्स तन कर खड़े हो चुके थे।
मैंने कहा- ठीक है… गुड नाइट.
और हम सब अपने कमरे में चले गए।

अन्दर जाते हुए हम तीनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी। हम जानते थे कि हमने मम्मी पापा को रंगे हाथों पकड़ लिया है, उनकी शक्ल देखते ही बनती थी।
अन्दर आकर नेहा सीधे बाथरूम में चली गयी, ऋतु ने भी अपने कपड़े बड़ी फुर्ती से उतार फैंके और बेड पर जाकर लेट गयी।

दूसरे कमरे में चाचू और चाची ने जब हमारी बात सुनी और बाद में हमें अन्दर आते देखा तो उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर झाँका और ऋतु को नंगी लेटे देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगे।

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और बेड पर कूद कर ऋतु की रसीली रसमलाई जैसी चूत पर मुंह टिका दिया। ऋतु ने अपने चूतड़ ऊपर हवा में उठा दिए और मेरे मुंह में अपनी चूत से ठोकरें मारने लगी।

दूसरे कमरे में आरती चाची ने मेरा लंड मेरी टांगों के बीच से लटकता हुआ देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और वो दोनों नंगे ही अपने कमरे से निकल कर हमारे कमरे में आ गए। चाची ने आते ही मेरी टांगो के बीच लेटकर मेरे लटकते हुए खीरे को अपने मुंह में भर लिया। मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी… “आआआ आअह्ह्ह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

चाचू भी अपना फड़कता हुआ लंड लेकर आगे आये और मेरे सामने लेटी हुई ऋतु के मुंह के पास जाकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। ऋतु ने उसे भूखी शेरनी की तरह लपका और उसका रस चुसना शुरू कर दिया।

चाची बड़ी आतुरता से मेरा लंड चूस रही थी। उनके और ऋतु के मुंह से सपड़ सपड़ की आवाजें आ रही थी। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और नेहा अन्दर आ गयी। वो अन्दर का नजारा देखकर बोली- मुझे तुम लोग वहां छोड़ कर यहाँ मजे ले रहे हो..
ये कह कर उसने भी अपने कपड़े उतारे और कूद गयी वो भी बेड पर।

नेहा भी ऊपर आकर अपने पापा के पास गयी और अपने नन्हे होंठों से उनके मोटे मोटे होंठ चूसने लगी। चाचू ने हाथ आगे करके अपनी बेटी के मोटे मोटे चुचे थाम लिए और उन्हें जोर से दबा डाला।
नेहा चाचू के आगे आ कर ऋतु के मुंह के ऊपर जाकर बैठ गयी। ऋतु ने चाचू का लंड चुसना छोड़ दिया और नेहा की चूत को चाटने लगी। चाचू का लंड अब नेहा के पेट से टकरा रहा था। नेहा काफी उत्तेजित हो गई थी और उससे सहन नहीं हुआ और उसने अपने पापा का लंड पकड़ कर अपनी रस उगलती चूत पर टिका दिया और उसे अन्दर समाती चली गयी.
“आआ आआआईईईई ईईईई… पपाआआ आआ…”
नीचे लेटी ऋतु ने इस काम को बड़ी खूबी से अंजाम दिया… लंड को चूत में धकेलने के लिए।

ऋतु अब नेहा की गांड के छेद को चूस रही थी। उधर अपने कमरे में जाने के बाद मम्मी को इस बात की बड़ी चिंता हो रही थी की आज वो चाचू के कमरे से नंगे बाहर निकलते हुए पकडे गए।
मम्मी इस बात को चाचू को भी बताना चाहती थी ताकि अगर हम उनसे भी पूछें हमारे मम्मी पापा रात के समय नंगे उनके कमरे से क्यों निकल रहे थे तो वो भी वो ही जवाब दें जो मम्मी ने दिया था।

यह सोच कर मम्मी अपने कमरे से निकली और चाचू के कमरे में चली गयी। वहां जाकर उन्होंने देखा कि कमरा तो बिल्कुल खाली था। तभी उनकी नजर दीवार पर गयी, शीशा नीचे पड़ा हुआ था और उस जगह एक बड़ा सा छेद था।

मम्मी आगे गयी और अन्दर झाँका। वहां का नजारा देखकर पूर्णिमा मैडम यानि मेरी माम के दिमाग के परखच्चे उड़ गए। उनका बेटा नंगा अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था और नीचे लेटी उनकी देवरानी उनके बेटे का लंड चूस रही थी और ऊपर उनका देवर अपनी ही बेटी को चोद रहा था और नीचे से उनकी बेटी नेहा अपनी जीभ से अपनी बहन ऋतु की गांड चाट रही थी।
उनकी आँखें घूम गयी ये सब देख कर।

मम्मी जल्दी से भाग कर वापिस गयी और अपने कमरे से पापा को बुला कर लायी। तब तक मैं अपने लण्ड को ऋतु की चूत में डाल कर चुदाई करने लगा था। मम्मी ने शीशे वाली जगह से पापा को अन्दर देखने को कहा।
जब पापा ने अन्दर का नजारा देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी। उनका छोटा भाई अपनी बेटी को चोद रहा था और उनका बेटा अपनी सगी बहन की चुदाई कर रहा था। ये देखकर वो आग बबूला हो गए और मम्मी को साथ लेकर वो दनदनाते हुए हमारे कमरे में आये और चिल्लाये- ये सब हो क्या रहा है!?!

पापा की आवाज सुन कर मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मैं स्तब्ध रह गया। पर मेरा लंड जो झटके मार मार कर अपनी बहन को चोद रहा था, वो नहीं रुका। मैंने धक्के देते हुए हैरानी से उनकी तरफ देखा और बोला- मम्मी.. पापा.. आप..?
उधर नेहा की चूत में उसके पापा का लंड अपनी आखिरी साँसें ले रहा था, चाचू से सहन नहीं हुआ और उन्होंने अपना रस अपनी बेटी की चूत में उगलना शुरू कर दिया। नेहा ने भी आँखें बंद करके अपने पापा के गले में अपनी बाहें डाल कर एक लम्बी चीख मारी- आआआआ अयीईईईइ… पपाआआ आआआ…
और वो भी झड़ने लगी। उनका मिला जुला रस नीचे लेटी ऋतु बड़े चटखारे ले ले कर पी रही थी।

ऋतु को मालूम तो चल गया था कि उसके मम्मी पापा कमरे में आ गए हैं पर अपनी चूत में अपने भाई के लंड के धक्के और अपने मुंह पर बरसते गर्म रस का मजा लेने से उसे कोई नहीं रोक सका।
ऋतु ने भी अपनी उखड़ी साँसों से उन्हें देखा और पूछा- मोम… डैड… आप यहाँ क्या कर रहे हैं?
मम्मी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए कहा- रोहण… क्या तुम ये करना बंद करोगे?
वो एक तरह से मुझे अपनी बहन की चूत मारने से रोक रही थी।

मैं अपने आखिरी पलों में था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला उसका विकराल रूप जो मेरी बहन की चूत के रंग में डूब कर गीला हो चुका था और उस पर चमकती नसे देख कर मेरी माँ की आँखें फटी की फटी रह गयी।
मेरे लंड ने बाहर निकलते ही झड़ना शुरू कर दिया और मेरी पिचकारी सीधे ऋतु की खुली हुई चूत से जा टकराई। चाची जल्दी से आगे आई और मेरे लंड पर अपना मुंह टिका दिया और मेरा सारा रस पी गयी।

चाची ने फिर ऋतु की चूत के ऊपर अपना मुंह टिकाया और वहां से भी मलाई इकट्ठी करके खा गयी और मेरी माँ की तरफ देखकर बोली- भाभी, आपके बच्चे बड़े टेस्टी हैं।

मम्मी ने चाची को डांटते हुए कहा- आरती… तुम ये सब कैसे कर सकती हो?
चाची ने सपाट लहजे में कहा- हमें तो इन्होंने ही बुलाया था।
मेरी माँ का मुंह खुला का खुला रह गया- क्या???

और फिर चाची ने सारी कहानी हमारे मम्मी पापा को सुना दी। वो अपना मुंह फाड़े सब बातें सुन रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि हम दोनों उनके कमरे में देखते हैं और हमें उनके बारे में सब पता है कि कैसे वो चारों लोग ग्रुप सेक्स करते हैं।
मम्मी-पापा ये सारी बात सुन कर शर्मिंदा हो गए पर फिर भी मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- तुम दोनों ने ये सब क्यों किया??
मैंने मम्मी को सीधे शब्दों में बताया- हम भी आपके और पापा की तरह बनना चाहते थे। जब हमने देखा कि आप और पापा, चाचू और चाची के साथ मिल कर सेक्स कर रहे हो और एन्जॉय भी कर रहे हो तो हमने भी ठान लिया की हम भी ये करेंगे। हमने यहाँ और लोगों को भी ग्रुप सेक्स करते देखा है और वो सब भी खूब एन्जॉय करते हैं।
मम्मी ने मुझसे रुंधी आवाज में कहा- लेकिन तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए।

अब ऋतु भी मेरे पक्ष में बोल पड़ी- क्यों नहीं करना चाहिए… मेरी चूत में हर तरह का लंड चला जाता है और मुझे उन्हें चूसने में भी मजा आता है… तो फिर ये सब क्यों नहीं करना चाहिए?
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये सब गलत है, भाई बहन को आपस में ये सब नहीं करना चाहिए।
ऋतु ने अपने शब्दों को पीसते हुए मम्मी से कहा- अच्छा… तो आप लोग जो करते हो वो गलत नहीं है क्या??

चाची जो बड़े देर से ये सब देख रही थी, वो मम्मी की तरफ हँसते हुए बोली- देखो भाभी, ये जो कह रहे हैं, वो सही है। हम लोग भी कहाँ रिश्तेदारी का ख्याल रखते हैं। हमें भी तो सिर्फ सेक्स करने में मजा आता है, अगर ये भी वो ही कर रहे है तो बुरा क्या है।
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये हमारे बच्चे हैं।

अब की बार चाचू ने कहा- हाँ हैं… और तभी इनके साथ ये सब करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है.
और उन्होंने अपनी बाँहों में पकड़ी नंगी नेहा को अपने सीने से दबा दिया और आगे बोले- और मुझे लगता है… कि आपको भी एक बार ये सब करना चाहिए।
मम्मी ने अपने सर को एक झटका दिया और कहा- मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं सोने जा रही हूँ, इस बारे में कल बात करेंगे।
चाची ने उनसे कहा- ठीक है बाय…

मम्मी ने हैरानी से पूछा- बाय का क्या मतलब है… तुम लोग नहीं जा रहे क्या अपने कमरे में?
चाची- नहीं, अभी मुझे कुछ और भी काम है.
और चाची ने हाथ बढाकर मेरे लंड को थाम लिया और दूसरे हाथ से अपनी चूत मसलने लगी।

मम्मी चिल्लाई- आरती… बंद करो ये सब!
चाचू आगे आये और मम्मी का हाथ पकड़ कर बेड पर बिठा दिया और कहा- अरे भाभी, आप यहाँ आओ और थोड़ा आराम करो.
चाचू का झूलता हुआ लंड मम्मी की आँखों के सामने लटक रहा था।

चाचू ने मम्मी का मुंह पकड़ा और अपना लंड उनके मुंह में ठूस दिया और उन्हें नीचे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उनकी छाती पर चढ़ बैठे।

चाचू ने मम्मी की आँखों में देख कर कहा- अब चुपचाप लेटी रहो और मेरा लंड चूसो भाभी!
और आरती की तरफ देख कर बोले- डार्लिंग… मेरी थोड़ी मदद करो न…
चाची- हाँ… हाँ… क्यों नहीं..
और चाची अपनी जगह से उठी और बेड के किनारे आकर मम्मी के गाउन को खींच कर बीच में से खोल दिया। मम्मी ने नीचे कुछ नहीं पहना था और चाची ने उनकी मोटी जांघें पकड़ कर उनकी रसीली चूत पर अपना मुंह रख दिया।

मम्मी के मुंह में चाचू का लंड था पर फिर भी उनके मुंह से घुटी हुई सी सिसकारी निकल गयी- आआआ आअह्ह्ह्ह…
चाचू का लम्बा लंड मम्मी के मुंह में किसी पिस्टन की तरह आ जा रहा था। नीचे बैठी चाची भी अपनी लम्बी जीभ के झाड़ू से मम्मी की चूत की सफाई करने में लगी हुई थी। चाचू ने मम्मी के ऊपर बैठे हुए उनके गाउन के बटन खोल दिए और मम्मी के मोटे चुचे ढलक कर दोनों तरफ झूल गए।

चाचू ने मम्मी के गाउन को कंधों से थोड़ी मुश्किल से उतारा और बाकी काम नीचे बैठी चाची ने कर दिया। चाची ने उनकी गांड ऊपर करके उसे नीचे से बाहर खींच दिया और इस तरह मम्मी हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी।

मम्मी को इतनी पास से नंगी देखने का ये मेरा पहला अवसर था। वो किसी अनुभवी की तरह चाचू के लंड को आँखें बंद किये चूस रही थी। मम्मी की चूत से इतना रस बह रहा था कि चाची उसे पी ही नहीं पा रही थी और वो बह कर मम्मी की गांड को भी गीला कर रहा था।

मम्मी के मोटे मोटे चुचे देख कर मेरे मुंह में भी पानी आ गया। मैंने उनके चुचे हमेशा अपने मुंह में लेने चाहे थे। घर में भी जब वो बिना चुन्नी के घूमती थी तो मेरा मन उनकी गोलाइयाँ देख कर पागल हो जाता था और अब जब वो मेरे सामने नंगे पड़े थे… मेरा लंड उन्हें देख कर तन कर खड़ा हो गया था, मैंने अपने हाथ से लण्ड को मसलना शुरू कर दिया।

ऋतु ने इशारा करके पापा को अपनी तरफ बुलाया। वो थोड़ा झिझकते हुए ऋतु के पास आये और हम सबके साथ आकर खड़े हो गए। ऋतु ने अपना हाथ उनकी कमर में लपेट दिया और उनसे सट कर खड़ी हो गयी।
पापा थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे.. हो भी क्यों न उनकी जवान लड़की नंगी जो खड़ी थी उनसे चिपक कर…

हम सभी की नजर मम्मी पर गड़ी हुई थी। मेरी देखा देखी पापा ने भी अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपनी पत्नी को अपने भाई और उसकी पत्नी के द्वारा चुदता हुआ देखकर वो भी अपना लंड हिलाने लगे।
पापा का मोटा लंड देखकर ऋतु की आँखों में एक चमक आ गयी। वो अपने पापा के लंड को काफी दिनों से देख रही थी और मन ही मन उनसे चुदना भी चाहती थी। आज उन्हें अपने साथ खड़ा होकर हिलाते देखकर उससे सहन नहीं हुआ और उसने झुक कर अपने पापा का लंड अपने मुंह में भर लिया।

पापा के मुंह से एक ठंडी सिसकारी निकल गयी- स्स्स स्स्स्स स्स्स… आआआ आअह्ह्ह…
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया।
अपने सामने बैठी अपनी नंगी बेटी को देख कर उनका लंड फुफकारने लगा और वो तेजी से उसका मुंह चोदने लगे।

“आआआ आआआ आह्ह्ह…” पापा ने अपनी आँखें बंद करी और एक तेज आवाज निकाली। ऋतु उठ खड़ी हुई और पापा के लंड को पकड़ कर आगे की तरफ चल पड़ी। बेड पर पहुंचकर उसने पापा को नीचे लिटाया और उनकी कमर के दोनों तरफ टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी और उनकी आँखों में देखकर अपनी चूत का निशाना उनके लंड पर लगाया और बोली- पापा प्लीज… चोदो मुझे… और उसने अपने मोटे चूतड़ों का बोझ पापा के लंड के ऊपर डाल दिया।

पापा का मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में ऐसे गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.
“आआ आआआआ आआअह्ह…” ऋतु ने एक तेज सीत्कार ली.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी ने अपनी आँखें खोली और पास लेटे अपने पति को अपनी बेटी की चूत मारते हुए देखा और फिर उन्होंने भी मौके की नजाकत समझी और अपनी आँखें बंद करके चाचू का लंड चूसने में मस्त हो गयी।

पापा और मम्मी ने जब एक दूसरे को देखा तो वो समझ गए कि अब अपने आपको रोकना व्यर्थ है इसलिए इन हसीं पलों के मजे लो और जब मम्मी ने आँखें बंद कर ली तो पापा ने अपना ध्यान ऋतु की तरफ लगा दिया।

पापा ने अपने हाथ ऊपर उठाये और ऋतु के झूलते हुए मम्मे अपने हाथों में भर लिए। वो हमेशा घर पर अपनी बेटी के ब्रा में कैद और टाइट टी-शर्ट में बंद इन्ही कबूतरों को देख कर मचलते रहते थे। आज ये दोनों रस कलश उनके हाथ में थे। उन्होंने अपना मुंह ऊपर उठाया और उन कलशों से रस का पान करने लगे। उनके मोटे मोटे होंठ और मूंछें ऋतु के नाजुक निप्पलों पर चुभ रही थी पर उनका एहसास बड़ा ही मजेदार था।

ऋतु ने अपने पापा के सर के नीचे हाथ करके अपनी छाती पर दबा दिया और अपना चुचा उनके मुंह में ठूँसने की कोशिश करने लगी। पापा ने अपना मुंह पूरा खोल दिया और ऋतु का आधे से ज्यादा स्तन उनके मुंह के अन्दर चला गया।
पापा का मुंह अपनी बेटी के चुचे से पूरा भर गया और फिर जब उन्होंने अपनी जीभ अन्दर से ऋतु के चूचों पर घुमानी शुरू की तो ऋतु तो जैसे पागल ही हो गयी। इतना मजा आज तक उसे नहीं आया था। नीचे से पापा का लम्बा लंड उसकी चूत की प्यास बुझा रहा था और ऊपर से पापा उसका दूध पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे।

चाची अपनी जगह से उठी और अपनी चूत को मम्मी के मुंह के ऊपर ले जाकर रगड़ने लगी। चाचू मम्मी के मुंह से नीचे उतर गए और उनके उतरते ही अपनी जवानी की आग में तड़पती हुई नेहा उन पर झपट पड़ी और चाचू के होंठ अपने मुंह में दबाकर नीचे चित लिटा दिया और चाचा का मोटा लंड अपनी चूत पर टिका कर उसे अन्दर ले लिया।
मैंने मम्मी की चूत के ऊपर अपना मुंह रखा और उसे चाटने लगा। मम्मी को शायद पता चल गया था कि मैं उनकी चूत चूस रहा हूँ। उन्होंने उत्तेजना के मारे अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये। मैंने नीचे हाथ करके उनके चौड़े पुट्ठे पकड़े और अपनी दो उँगलियाँ उनकी गांड के अन्दर डाल दी और अपनी लम्बी जीभ उनकी चूत के अन्दर।

मम्मी मचल उठी इस दोहरे हमले से…”आआआ आआआ आआआ आआआ आआह्ह्ह्ह..”
मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत के छेद पर टिका दिया।

आज मैं मम्मी की चूत चुदाई कर रहा था, उसी छेद के अन्दर अपना लंड डाल रहा था जहाँ से मैं निकला था। मेरे लंड का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर मम्मी तो बिफर ही पड़ी। उन्होंने अपने चूतड़ फिर से ऊपर उठा लिये और मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर समाता चला गया।
“आआआ आअह…” मम्मी के मोअन की हल्की आवाजें चाची की चूत से छन कर मुझे सुनाई दे रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैं तेजी से अपनी माँ की चूत मारने लगा।

उधर ऋतु अपने आखिरी पड़ाव पर थी, वो पापा के लंड के ऊपर उछलती हुई बडबडा रही थी- आआआअह्ह्ह… चोदो मुझे पापा… अपने प्यारे लंड से… फाड़ डालो अपनी बेटी की चूत इस डंडे से… चोदो न… जोर से… आआआह्ह्ह… बेटी चोद… सुनता नहीं क्या तेज मार… कुत्ते… बेटिचोद… चोद जल्दी जल्दी… आआआ आआह्ह… डाल अपना मुसल मेरी चूत के अन्दर तक… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह… और तेज और तेज और तेज… आआआअह्ह्ह… हाँ… ऐसे..ही… भेन्चोद… चोद… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह!

पापा से अपनी बेटी के ये प्यारे शब्द बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने अपना रस अपनी छोटी सी बेटी की चूत के अन्दर उड़ेल दिया। ऋतु भी पापा के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु को देखकर नेहा को भी जोश आ गया… वो भी चिल्लाने लगी चाचू के लंड पर कूद कर- हननं… डेडी…चोदो अपनी बेटी को… देखो ऋतु को ताऊ जी कैसे चोद रहे है… वैसे ही चोदो अपनी लाडली को… डालो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर तक… आआहहह… डाआल ऊऊऊऊओ…
और वो भी चाचू के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु पापा के लंड से नीचे उतरी और पापा के लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। चाची जो अपनी चूत मम्मी से चुसवा रही थी, उन्होंने अपना सर आगे किया और ऋतु की चूत से टपकते पापा के रस को पीने लगी।

मेरे लिए भी अब सब्र करना कठिन हो गया था। मैंने भी एक दो तेज झटके मारे और अपना पानी मम्मी की चूत के अन्दर छोड़ दिया। मम्मी ने अपने अन्दर मेरे गर्म पानी के बहाव को महसूस किया और वो भी जोर से चिल्ला कर झड़ने लगी- आआह आआ आअह्ह्ह्ह… आआआ… अह.. अह.. अ..अ..हहा.. ह..अ..ह.. हा..हा.. हा…!
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।

फैमली डॉक्टर से चुद ही गयी - Family Doctor Se Chut Chudai Karwayi

फैमली डॉक्टर से चुद ही गयी - Family Doctor Se Chut Chudai Karwayi , लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

घर के आंगन में सारे बच्चे खेल रहे थे और सब लोग बड़े ही खुश थे उनके खेल की आहट से घर का आंगन गूंज रहा था और माहौल रंगीन बना हुआ था मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं बच्चों की तरफ देख रही थी बच्चों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि हमारा बचपन लौट आया हो तभी मैंने अपनी जेठानी से कहा दीदी देख रही हो बच्चे कितनी खुशी से खेल रहे हैं और उनकी खुशी का अंदाजा लगा पाना इस वक्त मुमकिन नहीं है।

मेरी जेठानी कहने लगी हां पायल तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो मैंने उनसे कहा दीदी हम लोग भी बचपन में ऐसे ही खेला करते थे और बचपन में हमें काफी खुशी होती थी मुझे तो बच्चों को देखकर अपने पुराने दिन याद आ गए। दीदी कहने लगी हां मुझे भी तो अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं हम लोग भी तो लुका छुपी खेला करते थे।

मैं और मेरी जेठानी आपस में बात कर रहे थे तभी मेरी सासू मां भी आ गई और वह कहने लगी कि चलो तुम लोग दोपहर का खाना बना लो पता है ना आज घर में मेहमान आने वाले हैं। अपनी कड़क आवाज से उन्होंने हमें यह एहसास दिलाया कि वह घर की मुखिया हैं और हम लोग भी चुपचाप रसोई में चले गए और रसोई का काम करने लगे।

हम लोग अब खाना बनाने में लगे हुए थे और आपस में बातें कर रहे थे करीब दो घंटे बाद हमारे घर पर जो मेहमान आने वाले थे वह भी आ चुके थे और उनका अतिथि सत्कार बड़े ही अच्छे तरीके से मेरी सासू मां ने किया। वह लोग मेरी सासू मां के पक्ष से ही ताल्लुक रखते थे इसलिए उन्होंने उनका स्वागत बड़े ही अच्छे तरीके से किया और जब हम लोग उनसे मिले तो उन्होंने हमारा परिचय भी करवाया।

हम लोगों ने रसोई से खाना लाकर बाहर बैठक में लगा दिया था सब लोगों ने साथ में बैठकर भोजन किया बच्चों की छुट्टी थी तो बच्चे भी हमारे साथ ही खा रहे थे। उसके बाद रसोई की साफ-सफाई का काम शुरू हुआ जो कि लगभग 4:00 बजे तक चला 4:00 बजे हम लोग पूरी तरीके से फ्री हो चुके थे लेकिन अभी वह मेहमान घर पर ही थे और शाम के करीब 5:00 बजे वह लोग चले गए। मैं और मेरी सासू मां आपस में बात कर रहे थे तो उन्होंने मुझे बताया कि वह मेरे मायके की तरफ से हैं और उनसे काफी सालों बाद मेरी मुलाकात हो रही है।

मेरी सासू मां का भी अपने मायके से पूरा लगाओ है हालांकि उनका कोई भाई नहीं था लेकिन उसके बावजूद भी वह हमेशा ही अपने मायके जाती रहती थी अब उनके परिवार में कोई भी नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी उन्होंने अपने पुराने लोगों से मेलजोल बनाकर रखा हुआ है।

शाम के वक्त जैसे ही अजय घर लौटे तो अजय कहने लगे पायल मेरे लिए कुछ ठंडा बना दो मैंने उन्हें कहा कि मैं आपके लिए लस्सी बनाकर लाती हूं। मैंने अजय को लस्सी दी तो उन्होंने लस्सी पीते हुए कहा सही में आज तो मजा आ गया और इतनी गर्मी में काफी राहत मिल रही है। मैंने उन्हें कहा लेकिन आप इतने पसीना पसीना हो रखे हैं वह कहने लगे बाहर देखो कितनी ज्यादा गर्मी हो रही है और वह जब मुझे अपने ऑफिस के बारे में बताने लगे तो वह मुझे कहने लगे कि मेरा प्रमोशन भी कुछ दिनों बाद शायद हो जाएगा।

मैंने उन्हें कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है वैसे भी इस महंगाई के दौर में इतना बड़ा परिवार चला पाना मुश्किल ही है। हम लोग संयुक्त परिवार में रहते है और सयुंक्त परिवार में रहने के कुछ फायदे तो हैं लेकिन कुछ नुकसान भी हैं हम लोगों को अपने मर्जी से कुछ करने को नहीं मिल पा रहा था और हर चीज के लिए मुझे सासू मां से पूछना पड़ता था जिस वजह से मुझे कई बार लगता कि जैसे हम उनके हाथ की कठपुतली हैं और वह हमेशा ही हम पर रौब जताती रहती थी।

मैंने और अजय ने तो कई बार सोचा कि हम लोग अलग रहने के लिए चले जाएं लेकिन माजी के होते हुए ऐसा संभव ना हो सका और हम लोग अभी सब साथ में ही रहते हैं। मैंने अजय से कहा कि अजय बच्चों की फीस भरनी है वह कहने लगे ठीक है तुम मुझे बता देना की कितनी फीस भरनी है कल मैं पैसे ले आऊंगा।

मैंने अजय से कहा ठीक है आप कल पैसे ले आइएगा मैं आपको बता दूंगी की कितनी फीस भरनी है क्योंकि बच्चों की फीस हर महीने बदलती रहती थी इस वजह से अभी तक कुछ सही तरीके से पता नहीं चल पाया था कि इस बार कितनी फीस हुई है। मैं और अजय एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझते हैं और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार भी करते हैं हमारे प्यार की वजह सिर्फ हम दोनों के बीच का विश्वास है हम दोनों एक दूसरे पर बहुत भरोसा करते हैं।

अजय ने कभी मेरे भरोसे को टूटने नहीं दिया और ना ही मैंने अजय के भरोसे को कभी टूटने दिया हम दोनों की शादी को आज 8 वर्ष होने आए हैं लेकिन आज भी हम दोनों के बीच वैसा ही प्यार है जैसा कि पहले था। मेरी सासू मां अजय पर बहुत ही भरोसा करती थी और अजय ही तो घर के लिए ज्यादा पैसे दिया करते थे घर का खर्चा वही चलाया करते थे मेरे जेठ जी की इतनी तनख्वाह नहीं थी इसलिए उनसे ज्यादा उम्मीद कर पाना मुश्किल होता था।

अजय एक अच्छी नौकरी थे अजय पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी लग गए थे और उसके बाद से ही उन्होंने घर की जिम्मेदारी का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया था और मुझे भी इस चीज की खुशी की थी कि अजय घर की सारी जिम्मेदारियों को अपना मानते हैं। उन्हें बच्चों से बड़ा लगाव था और एक बार अजय अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए अंबाला जाने वाले थे अजय ने मुझे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए अंबाला जा रहा हूं यदि कोई भी समस्या हो तो तुम मुझे फोन कर के बता देना।

मैंने अजय ने कहा हां यदि कोई समस्या या परेशानी होगी तो मैं तुम्हें जरूर फोन कर दूंगी। अजय को घर की चिंता हमेशा ही रहती थी इसलिए वह घर को लेकर चिंतित रहते थे और हमेशा ही घर के बारे में वह बहुत सोचते थे।

अजय भी अपने काम के लिए अंबाला जा चुके थे और उसी दौरान मेरी बच्ची की तबीयत खराब हो गई मैंने अजय को फोन किया तो अजय कहने लगे मैं अभी आ जाता हूं फिर मैंने सोचा अजय को बुलाना ठीक नहीं रहेगा वह अपने काम के सिलसिले में गए हुए हैं। हमारे पड़ोस में ही रहने वाले भाई साहब हैं उनका नाम गौतम मिश्रा है उनकी अजय के साथ अच्छी बातचीत है तो मैंने उन्हें जब इस बारे में बताया तो वह कहने लगे अरे भाभी जी कैसी बात कर रही है मैं अभी बच्ची को ले चलता हूं।

उन्होंने अपनी कार मे मुझे और मेरी बच्ची को अस्पताल तक पहुंचाया उसके बाद हमने बच्ची को डॉक्टरों को दिखाया डॉक्टर ने कहा कि आज बच्ची को यहीं रखना पड़ेगा। उस दिन रात को उसे वहीं एडमिट करवाना पड़ा और अगले दिन सुबह मैं उसे लेकर घर लौट आई अजय का भी मुझे बार-बार फोन आ रहा था मैंने अजय से कहा तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक है। उन्होंने गौतम जी से भी बात की तो वह कहने लगे कोई बात नहीं यह तो मेरा फर्ज था हम लोग एक दूसरे के सुख दुख में काम तो आएंगे ही ना।

गौतम जी ने मेरी बहुत मदद की और उसके बाद भी हमारी कई बार मदद कर दिया करते थे। अजय अपने काम के सिलसिले मे ज्यादा ही बाहर रहने लगे थे और उन्हें बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था मैं इस बात को समझ सकती थी कि वह कितने ज्यादा बिजी रहने लगे हैं लेकिन मुझे भी यह लग रहा कि उन्हें थोड़ा बहुत समय तो मेरे लिए निकालना चाहिए।

मैंने अजय से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगे पायल बस कुछ समय की बात है उसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन मुझे नहीं लगता था कि यह कुछ समय की बात है क्योंकि अजय के पास बिल्कुल भी टाइम नहीं था और हम दोनों के बीच में दूरियां बढ़ती जा रही थी।

मेरे अंदर भी कुछ फीलिंग थी जो अधूरी रह गई थी मैं अपनी गर्मी को बुझा नहीं पा रही थी एक दिन मैं घर पर ही थी और गौतम जी आए हुए थे गौतम जी आए थे तो मेरा पैर अचानक से फिसला और मेरे स्तन उनके मुंह से जा टकराए यह बड़ा ही अजीब था लेकिन इस वाक्या के बाद गौतम की धारणा मेरे लिए पूरी तरीके से बदलने लगी और मैं भी गौतम को चाहने लगी थी।

हम दोनों के दिलों में एक दूसरे को लेकर सेक्स करने की इच्छा जाग उठी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहते थे। जब हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो हम दोनों की नज़रे टकराती और आखिरकार हम दोनों की सहमति बनी गई जब पहली बार में गौतम के साथ अपने अंतर्वस्त्रों में थी तो मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था लेकिन गौतम ने मेरे कपडो को उतारते हुए अपनी जीभ से मेरी चूत को चटना शुरू किया तो मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी थी। गौतम भी रह नहीं पा रहे थे गौतम ने अपने लंड को बाहर निकाला और मैंने उसे अपने मुंह में समा लिया मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया था।

जिस प्रकार से मै गौतम के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उससे मेरे अंदर की बेचैनी और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी और मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरी योनि से लगातार पानी निकल रहा था और गौतम ने भी अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बड़े ही अच्छे से महसूस कर रहे थे।

यह पहला मौका था जब मैंने किसी गैर के साथ संबंध बनाए थे लेकिन मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और गौतम ने भी अपने लंड को मेरी योनि के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था। जब गौतम ने मुझे घोड़ी बनाकर धक्के देने शुरू किए तो मैं और भी ज्यादा बेचैन होने लगी थी और मेरी योनि से पानी निकलने लगा।

मैं अपनी चूतडो को गौतम के लंड से मिलाने लगी थी और मेरी योनि से भी लगातार पानी बाहर की तरफ निकल रहा था और जैसे ही मेरी योनि से कुछ ज्यादा ही गरम पानी बाहर निकलने लगा तो गौतम ने अपने वीर्य को मेरी योनि में गिरा दिया और मेरी गर्मी को शांत कर दिया।

पति के सामने गैर मर्द से चुदने का सुख - Pati Ke Saamne Gair Mard Se Chudne Ka Sukh

पति के सामने गैर मर्द से चुदने का सुख - Pati Ke Saamne Gair Mard Se Chudne Ka Sukh , मियां के सामने चुदाई , पति के सामने ही चोदा , पति ने खूब अपनी पत्नी को चुदवाया.

मैं शरद अग्रवाल, उम्र 24 साल, दिल्ली आए मुझे एक अरसा गुजर चुका था… यहाँ नौकरी भी अच्छी है, अब वेतन भी अच्छा है, देखने में भी अच्छा खासा ही हूँ, ऐसा मेरे दोस्त कहते हैं।

खैर मैंने किसी अच्छे घर में शिफ्ट करने की सोची और एक पॉश सेक्टर में एक कमरा किराए पर ले लिया था। ब्रोकर ने कई कमरे दिखाए और उनमें से जो बेहतर था वो मैंने अपने लिए चुन लिया।

मेरी दिनचर्या बहुत ही टाईट रहती है, दिन भर दम भरने की भी फुरसत नहीं, मैं मीडिया से जुड़ा हूँ इसलिए एक एक बात का ध्यान रखना होता है।

कई बार मीटिंग में भी देरी हो जाया करती है।

खैर मैं अपनी जॉब को काफी एन्जॉय भी करता हूँ। इस काम में कई लड़कियों की नौकरी मेरे दम पर चलती है मगर आज तक मैंने किसी का कोई नाजायज फायदा नहीं उठाया, हर काम प्रोफेशनल की तरह करता हूँ, औऱ रात को अपने कमरे में लौट आता हूँ।

कई बार इतवार को भी मेरी जरूरत पड़ जाती है, इस बार मैं इतवार को ऑफ़िस से जल्दी अपने कमरे में लौट आया था और आराम करने के लिए लेटा ही था कि दरवाजे पर मैंने दस्तक सुनी।

मैं- पता नहीं साला, इस वक्त कौन आ गया?

मैंने बड़बड़ाते हुए दरवाजा खोला, मेरे सामने मकान मालिक मिस्टर रवीन्द्र जैन खड़े थे, वो एक निजी बैंक में मैंनेजर की पोस्ट पर हैं।

मैं- अरे सर आप… आइए ना, अन्दर आइए!

मैंने उन्हें आदरपूर्वक अन्दर बुलाया और बिठाया।

मिस्टर जैन बैठते हुए– और भई कैसे हैं आप… आप से तो भेंट ही नहीं होती… आप बीजी ही इतना रहते हैं।
मैं- जी हाँ, काम ही ऐसा है कि अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाता मैं… क्या लेंगे आप कुछ ठंडा या…
मिस्टर जैन– यही पूछने तो मैं आपके पास आया हूँ।
मैं- मतलब?

मिस्टर जैन- अरे भाई ना मिलते हो न जुलते हो… क्यों न हम लोग आज शाम बैठें, कुछ तुम अपनी सुनाना, कुछ हमारी सुनना !
मैं- जरूर जरूर क्यों नहीं!
मिस्टर जैन- तो आज शाम 6 बजे का पक्का रहा, मैं तुम्हारा इन्तजार करुँगा… आना जरूर!

इतना कह कर मिस्टर जैन चले गए।

मिस्टर जैन 40-42 साल के हैं उनकी पत्नी रेखा जैन 36-37 साल की एक हाउसवाईफ, उनके दो बच्चे, एक लड़का और लड़की दोनों ही कहीं बाहर में पढ़ते हैं और सिर्फ छुट्टियों में ही घर आते हैं। उनका बड़ा घर है लेकिन सिर्फ छत पर एक कमरा था जिसको उन्होंने किराया पर दिया हुआ है।

मैंने टीवी ऑन किया, एक सिगरेट जला ली और अनमने ढंग से मैंने चैनल बदलना शुरु कर दिया। मेरा मन नहीं लगा तो एक मूवी चैनेल लगा कर छोड़ दिया और वहीं सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा।

अब शाम के छः बजने वाले थे मैं सीधे फ्रेश होने चला गया।

तैयार होकर मैंने जैन साब के दरवाजे की घंटी बजाई मिस्टर जैन ने दरवाजा खोला।

वो गाउन में थे।

मिस्टर जैन- अरे आओ आओ, तुम्हारा ही इन्तजार कर रहे थे हम लोग… कम इन..
मैं उनके पीछे पीछे अन्दर चला गया, क्या आलीशान ड्राईंग रूम था उनका।

मैं वहीं बैठ गया।

मैं अभी बैठा ही था कि उनकी पत्नी रेखा जैन ने वहाँ आई।
इस उम्र में अक्सर हमारे देश की महिलाओं की उम्र दिखने लगती है मगर रेखा जैन अपनी उम्र से कम से कम दस साल कम लग रही थी, बला की खूबसूरत!

मिस्टर जैन- इनसे तो तुम पहले मिल ही चुके होंगे, फिर भी यह मेरी पत्नी है रेखा!
मैं- हाँ सर, मिल तो चुका हूँ पर जल्दी जल्दी में और तब जब मैं यहाँ पहली बार चाबी लेने आया था।
मिस्टर जैन- रेखा, दिस हैन्डसम यंग मैन हियर इस मिस्टर शरद..

‘तो शरद क्या लोगे? समथिंग हॉट आई बीलीव…?’

यह कहकर वो हंस पड़े और रेखा जैन भी मुस्कुरा दी।

मैंने भी मजाक समझा और हंस पड़ा।
मिस्टर जैन- अरे डार्लिंग, इतना हैंडसम आदमी यहाँ बैठा है, कुछ ड्रिंक सर्व करवाओ भई!

मैं मुस्कुरा दिया।

मिस्टर जैन- और सुनाओ, कैसी चल रही है?
मैं- बस सर, ठीक चल रही है।
मिस्टर जैन- क्या खाक ठीक है… पूरी जवानी तो तुम काम में ही लगा देते हो।

मैं- वेल मिस्टर जैन, औऱ कुछ करने के लिए मेरे पास है ही नहीं, यहाँ अकेला रहता हूँ तो क्या करूँगा?

मिस्टर जैन- और जाहिर है गर्ल फ्रेन्ड भी नहीं होंगी… मैं जानता हूँ तुम जैसे लड़कों को वरकोहलिक टाईप…

मैं चुपचाप उनकी बातें सुन रहा था और मुस्कुरा रहा था

मिस्टर जैन- दरअसल तुम्हारे बॉस मिस्टर किशनलाल हमारे कलाएन्ट भी हैं और काफी अच्छे दोस्त भी हैं वो, उनसे तुम्हारे बारे में एक आध बार चर्चा हुई है, वो तुम्हारी तारीफ बहुत करते हैं… कहते हैं आजकल के जमाने में तुम्हारे जैसे लोग कम ही मिलते हैं।

इतने में रेखा ड्रिंक सर्व करने लगीं।

रेखा जैन- अरे तुम भी ना, रवीन्द्र, आते ही क्लास लेने लगते हो!
मैं- अर्…रे नहीं नहीं मैम, इट्स ऑल राईट।

हम अपनी अपनी ड्रिन्क की चुस्की लेने लगे।

मिस्टर जैन- शरद तुम दिल्ली में कब से हो?
मैं- सर, मैं यहाँ 1995 में ही आ गया था… कॉलेज यहीं से किया और अब नौकरी!
मिस्टर जैन- ओह वाओ… और तुम तो उत्तरप्रदेश के रहने वाले हो ना?

मैंने हाँ कहा।

मिस्टर जैन- औऱ घर में कौन कौन हैं?

मैं- सभी लोग तो हैं माँ-पिताजी हैं, एक भाई है, मुझसे बड़े लखनऊ में हैं, एक मोबाईल कम्पनी में मैंनेजर… पिताजी रिटायर हो चुके हैं अब खेती करते हैं औऱ माँ मेरे लिए आए दिन लड़की ढूंढती रहती हैं जिसे मैं अक्सर नामंजूर कर देता हूँ।

सब हंस पड़े।

मिसेज़ जैन तब तक कुछ खाने का भी लेकर आ गई थी, उन्होंने वहीं सेन्टर टेबल पर खाने का सामान रखा और पास के सोफे पर बैठ गईं।

मिस्टर जैन- गुड… अच्छे परिवार के लड़के हो।

मिसेज़ जैन- तो शरद, समय कैसे गुजरता है तुम्हारा? सिर्फ काम ही करते हो या फिर दिल्ली का मजा भी लेते हो?
मै- मैम, मैं कुछ समझा नहीं?
मिसेज़ जैन- देखो, मेरे कहने का मतलब है कि हम सब मेच्योर लोग हैं और इस भागती दौड़ती जिन्दगी में तुम्हें अपने लिए वक्त निकालना चाहिए।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैडम जैन कहना क्या चाह रही थी, बार बार मेरी जिन्दगी के बारे क्यों बात कर रहे हैं.. फिर भी मैं चुप ही रहा, मैं चाहता था कि वो ही अपनी बात पूरी करें।

मिसेज़ जैन- देखो मिस्टर जैन भी बहुत बीजी रहते हैं मगर हम सप्ताह में एक दिन ही सही अपने लिए समय निकाल ही लेते हैं… हम लोग मस्ती करने वाले लोग हैं, खुश रहने वाले लोग हैं।

मिस्टर जैन ने रेखा की बात को काटते हुए कहा- देखो यार, एक समय था जब हमारे बीच का रिश्ता खत्म सा हो गया था, मैं हमेशा काम में ही उलझा रहता था। एक टाईम ऐसा भी आया जब हम अलग होने की सोचने लगे थे।

मैं उनकी बातों को गौर से सुन रहा था, मेरी समझ नहीं आ रहा था कि वे कहना क्या चाह रहे थे।

मिस्टर जैन- लेकिन हमने अपने आपको संभाला और फिर से जिन्दगी की शुरुआत की, आज हम सुखी हैं। हमारा एक क्लब है और इस क्लब में कई लोग शामिल हैं, हम चाहेंगे तुम इस क्लब में शामिल हो जाओ !

मैं- हाँ, पर मुझे करना क्या होगा और इस क्लब में होता क्या है?
मिसेज़ जैन ने मेरी बात को काटते हुए कहा- यह एक स्वॉप क्लब है जहाँ हम पार्टनर्स एक्सचेन्ज करते हैं और जिन्दगी का लुत्फ उठाते हैं।
मैं चौंक गया मैंने कहा- व्हाट… स्वॉप क्लब? पर… पर…!!!
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूँ!

मिस्टर जैन मेरी इस उहापोह को समझ गए और उन्होंने कहा- देखो शरद… तुम्हारे लिए चौंकना स्वाभाविक है, लेकिन यह सच है, एक बार हमारे साथ रिश्ता कायम करके देखो, कितना मजा आएगा औऱ तुम कितना आगे जाओगे !

मैं सोच में पड़ गया कि क्या करूँ।

तभी मिसेज़ रेखा उठकर मेरे पास पहुँची मेरे पास सटकर बैंठ गईं… उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- शरद मेरी ओर देखो, इस क्लब में कई ऐसे लोग हैं जिनके बारे वहाँ जाने पर तुम्हें पता लगेगा औऱ उनके हमारे बीच का डोर बहुत मजबूत है।

उनके कहने पर मैं मान गया औऱ मेम्बर बना दिया गया।

अब रात के नौ बज चुके थे मिसेज़ जैन डिनर सर्व करने के लिए चली गई।

मिस्टर जैन ने अपनी ड्रिन्क खत्म करते हुए कहा- इस क्लब के कुछ नियम हैं शरद… इस क्लब के मेम्बर्स बाहर के लोगों के साथ क्लब को डिसकस नहीं करते, दूसरी बात यह कि कोई किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता… बाकी की बातें तुम्हें तुम्हारे ईमेल पर भेज दी जाएगी, अच्छे से पढ़ लेना !

मैं- ओ के सर…

मैंने ओके कह तो दिया था लेकिन मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।

खैर किसी तरह से डिनर खत्म करके मैं वहाँ से निकलना चाहता था।

डिनर के बाद मिसेज़ जैन ने मुझसे कहा- तुम्हें कोई जल्दी तो नहीं है ना सोने की… डिनर के बाद? हम सब थोड़ी और बातचीत करते हैं।

मैं अनमने ढंग से मान गया और फिर हम सब लिविंग रूम में चले गए।

रेखा ने वहीं म्यूज़िक सिस्टम पर एक अच्छी सी धुन लगाई और डांस करना शुरु कर दिया।

मिस्टर जैन भी उठकर डांस करने लगे।

रेखा जैन डांस करती हुई मेरे पास पहुँची और मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया।

मेरे लिए यह सब कुछ बिल्कुल नया था… मैं संकोच कर रहा था लेकिन मिसेज़ जैन के जबरदस्ती करने पर मैं उठ खड़ा हुआ और उनका साथ देने लगा।

अब कमरे में हम तीनों ही डांस कर रहे थे, मिसेज़ जैन कभी मिस्टर जैन के साथ डांस करती तो कभी घूमकर मेरे साथ डांस करने लगती।
कभी वो अपने आप को मेरे इतना करीब ले आती कि मेरी सांस ही रुक जाती।

इन सब से मेरी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, मेरी पैन्ट में हलचल मचने लगी थी लेकिन मिसेज़ जैन ये सब कुछ इतने सलीके से कर रही थी कि माहौल खुशनुमा बना रहे।

अचानक मैंने देखा कि मिस्टर जैन मिसेज़ जैन को चूम रहे हैं, उन दोनों के होंठ एक दूसरे से टकरा रहे थे।

मिस्टर जैन ने चुम्बन करते करते रेखा जैन की चूचियों को बाहर निकाल लिया।

मेरी नजर रेखा जैन की चूचियों पर ही गड़ गई थी और यह बात मिसेज़ जैन और मिस्टर जैन ने ताड़ ली… मिसेज़ जैन ने भी आगे बढ़ते हुए मिस्टर जैन का पूरा लंड बाहर निकाल लिया था और उसके साथ खेलने लगी।

मैं ये सब देखकर बेकाबू हुआ जा रहा था।

मिसेज़ जैन ने अपनी नशीली आँखों से मुझे घूरा और इशारा करके अपनी तरफ बुलाया।

मैं भी अपने आपको रोक नहीं पाया, उनके करीब पहुँच गया।

मिसेज़ जैन मिस्टर जैन को छोड़कर मेरे करीब आने लगी और अपनी होठों को मेरे होठों से चिपका दिया।

क्या बला की सेक्सी लग रही थी रेखा जैन…
मैडम जैन मेरे सीने को सहलाने लगी थी और इन सब का असर मेरे लंड पर हो रहा था, मेरी सांसें तेज चल रही थी।

उन्होंने अपना एक हाथ बढ़ा कर मेरे जीन्स की जिप खोल दी और मेरे लंड को पहले तो सहलाया और फिर उसे बाहर निकाल लिया।

मेरा लंड अब पूरी तरह से तनकर बाहर आ गया था।

मिसेज़ जैन- वाह.. क्या लंड है तुम्हारा शरद… लगता है इस पर बहुत मेहनत की है तुमने!

मैं उनकी इस बात पर घबराते हुए मुस्कुरा दिया।

मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी, किसी औरत ने पहली बार मेरे लंड को छुआ था।

मिसेज़ जैन- अरे यार जैन, देखो तो क्या मस्त लंड है इसका?

मिस्टर जैन- क्या गुरु, कभी इसका इस्तमाल किया है सिर्फ मूतने के काम में ही लाते हो?

मिस्टर जैन की इस बात से हम सब एक साथ हंस पड़े।

मिसेज़ जैन मेरे लंड से लगातार खेल रही थी।

मैं- न..नहीं…मैम… आज तक कभी मौका ही नहीं लगा।

मैंने हकलाते हुए यह बात कही।

मैं और कुछ कह पाता, तब तक रेखा जैन अपने घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लंड को बड़ी अदा से चूम लिया।
मेरे पूरे बदन में करन्ट दौड़ गया।
मैंने अपनी नजर नीचे की लेकिन मेरा खुद का काबू अब मेरे ऊपर नहीं था।

मिस्टर जैन ने ताली बजा कर मिसेज़ जैन के इस काम का स्वागत किया।

मिसेज़ जैन ने अब मेरा आधा लंड अपने मुख में ले लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी। उन्होंने तेजी से मेरे लंड को चूसना शुरु कर दिया था, मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मिस्टर जैन अपने जगह से उठे और रेखा जैन के पीछे आकर खड़े हो गए। उन्होंने रेखा के आगे अपनी लंड कर दिया, उनके सिर को पकड़ अपने लंड की ओर घुमाते हुए कहा- डार्लिंग, जरा मेरा भी कुछ करो न…

रेखा जैन ने मेरे लंड छोड़ कर अब मिस्टर जैन के लंड को चूसना शुरु कर दिया।

मिसेज़ जैन उठकर खड़ी हो गई, मुझसे चिपक गई और मुझे चुम्बन करना शुरु कर दिया, उन्होंने अपने हाथ को बढ़ा कर मेरे लंड से खेलना शुरु कर दिया।

मेरा भी अब संकोच कुछ कम होता जा रहा था और मैंने अब उनके चूचियों को सहलाना शुरु कर दिया, फिर उनकी चूचियों के चुचूकों को घुमाना शुरु कर दिया।

मिस्टर जैन- एक्सक्यूज मी एवरी बडी… हम एक काम करते हैं, हम अपने अपने कपड़े उतार देते हैं क्योंकि ये कपड़े हमारे मौज-मस्ती के बीच रोड़ा अटका रहे हैं।

मैंने अपनी टी शर्ट उतारनी चाही तो मिसेज़ जैन ने हाथ पकड़ लिया और कहा- यार शरद, तुम्हारे कपड़े मैं उतारूँगी।

उन्होंने इतना कह कर बड़ी अदा से पहले मेरी टीशर्ट को उतारा और फिर मेरी छाती को चूमने लगीं, उन्होंने पहले मेरी गर्दन को चूमना शुरु किया फिर धीरे धीरे वो मेरे सीने तक पहुँची और मेरी दोनों घुण्डियों को बारी बारी चूमना शुरु कर दिया और फिर वो चूमते चूमते मेरे पेट तक पहुँच गई, मेरी नाभि के आसपास चूमना शुरु कर दिया।

औऱ फिर उन्होंने बड़े आराम से मुझे वहीं सोफे पर धकेल दिया, मैं उस बड़े से सोफे पर लगभग आधा लेट गया और अब मिसेज़ जैन ने मेरे जीन्स को मेरी टांगों से खींचकर अलग कर दिया।

मेरा लंड फनफना रहा था।

उन्होने मेरे बचे-खुचे अंडरवियर को भी मुझसे अलग कर दिया, मैं अब पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था और मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा था… मुझे इस अवस्था में देखकर मिसेज़ जैन की आँखों में अजीब सी चमक आई, वो खड़ी होकर अपने कपड़े भी खोलने लगीं और इधर मिस्टर जैन भी अपने कपड़ों को अपने जिस्म से अलग कर चुके थे।

मिसेज़ जैन भी पूरी तरह से नंगी खड़ी थी, मैंने एक सरसरी नजर मिसेज़ जैन पर डाली… वाह क्या तराशा हुआ जिस्म था उनका… मुलायम मगर उठी हुए चूचियाँ, भूरे निप्पल… सुराहीदार गर्दन, कटीले नयन नक्श और पेट भी काफी सेक्सी लग रहा था, कहीं कोई चर्बी नहीं थी, नाभि भी काफी सेक्सी लग रही थी।

नाभि के नीचे के हिस्से भी कम दिलचस्प नहीं थे, बिल्कुल चिकनी चूत, जरा भी बाल नहीं थे उस पर, एकदम रसीली लग रही थी और दो चिकनी जांघों ने उस चूत पर चार चांद लगा दिए थे।

मैं रेखा जैन के जिस्म को अपने आँखों से लगातार पिए जा रहा था और मिस्टर जैन मेरी इस हरकत को देखकर मुस्कुराए जा रहे थे।

मिस्टर जैन अपनी नंग धडंग पत्नी की ओर आए उसे वहीं दीवान पर लेटा दिया।

मैं इधर सोफे पर पड़े पड़े यह तमाशा देख रहा था।

उन्होंने मिसेज़ जैन को लेटाते हुए उनकी जांघों को अलग किया और मेरी ओर देखकर आँख मार दी।

उन्होंने अपने होठों को उस चिकनी मादक चूत पर रख दिया और उसे चाटने लगे।

रेखा जैन चिहुंक उठी और मस्ती में सिसकारने लगी।

मैं भी अब उठ खड़ा हुआ और उनके करीब पहुँच गया।

मिसेज़ जैन ने मेरे लंड को अपने मुख में ले लिया और उसे चूसने लगी।

मिस्टर जैन उनकी चूत चाट रहे थे और मिसेज़ जैन मेरा लंड चूस रही थी।

अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा, मैंने अपने आपको अलग कर लिया। मिसेज़ जैन और मिस्टर जैन यह बात समझ गए।

मिसेज़ जैन- अरे शरद… आओ ना… मेरी चूत देखो न तुम्हारे लंड को देखकर कैसे लार टपका रही है… देर न करो, अपने लंड को मेरी इस रसदार जैन चूत में डाल कर खूब चोदो।

मैं उनकी इस तरह की भाषा को सुनकर हैरान रह गया लेकिन उनकी ये बातें कामोत्तेजक लग रही थी।

मिस्टर जैन- अरे आओ भी ! तुम तो लड़कियों की तरह शर्माते हो?

मैं उनकी ओर बढ़ा और मिसेज़ जैन की जांघों के बीच जाकर खड़ा हो गया, मिसेज़ जैन ने मेरे लंड को अपनी चूत के छेद पर टिका कर कहा- शरद एक हल्का सा धक्का देना!

मैंने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चूत के अन्दर बड़े आराम से घुस गया। मैं भी मस्ती में झूम उठा, इस तरह की मस्ती की अनुभूति मुझे पहले कभी नहीं हुई थी।

मैंने हल्का सा धक्का और मारा तो अब मेरा आधा लौड़ा रेखा जैन की रसदार चूत के अन्दर था।
मैं अब उसे धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा… रेखा जैन ने मस्ती में आहे भरकर बड़बड़ाने लगी- आह… ओह, क्या मस्त लंड है तुम्हारा… ओह बहुत अच्छा लग रहा है यार… हाँ हाँ ऐसे ही, ऐसे ही यार… हाँ हाँ और अन्दर डालो जोर से जोर… खूब चोदो मुझे शरद आज पूरा निचोड़ दो मुझे… इतना जवान कुंवारा लंड… इतना कड़क लंड बहुत दिनों के बाद मिला है मुझे… रवीन्द्र देखो न, यह शरद का लंड कितना अच्छा है… तुम भी आओ न, मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ, आओ ना यार जैन डार्लिंग, आ जाओ न… उफ क्या लंड है शरद तुम्हारा…

मैं रेखा जैन की इन बातों से और उत्तेजित होकर उन्हें तेजी में चोदने लगा।

मिसेज़ जैन अब मिस्टर जैन का लंड लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और मैं चुदाई कर रहा था।

इसी क्रम में मिसेज़ जैन ने अपना मुंह मिस्टर जैन के लंड से अलग किया और मुझसे कहा- शरद अब मुझे डॉगी स्टाईल से चोदो ना… मैं तुम्हारी कुतिया हूँ मैं तुम्हारी राण्ड हूँ, मेरे खसम के सामने मुझे चोदो शरद !

यह कहकर वो मुझसे भी अलग हो गई और घुटनों के बल झुक गई और मैं पीछे से अपना लंड उनकी चूत में घुसाने लगा।

इधर मिस्टर जैन भी अपने लंड से रेखा जैन के मुख को चोदने लगे।

कमरे में अजीब नज़ारा था, मिस्टर जैन अपना लंड रेखा जैन के मुंह में लगातार पेल रहे थे और मैं उनकी चूत को!

अचानक मिस्टर जैन के बदन में अकड़न आने लगी और वो जोर जोर से अपनी कमर हिलाने लगे और थोड़ी देर में उनके लंड से सफेद पिचकारी छुटी और रेखा जैन के होठों के बीच से मिस्टर जैन सफेद वीर्य बाहर आने लगा।

मिसेज़ जैन ने मिस्टर जैन के लंड का पूरा पानी पी लिया, उनके लौड़े पर लगा माल भी चाट लिया और मिस्टर जैन वहीं पास की कुर्सी पर बैठकर हाँफने लगे।
इधर मैं दनादन रेखा जैन की चुदाई कर रहा था… मैं बीच बीच में रेखा जैन के हिलते गांड को भी निहारे जा रहा था… क्या गाण्ड थी मिसेज़ जैन की…

मैं- मैम, आपकी चूत काफी रसदार है… बहुत गर्म भी और गाण्ड भी आपकी बहुत प्यारी है।

मिसेज़ जैन- वाह रे मेरे शेर… तुम तो बहुत छुपे रुस्तम निकले… हाँ… देखो तुम्हारा लंड बहुत प्यारा है। मैं बहुत ज्यादा देर तक अब ठहर नहीं पाऊँगी… मेरा अब छुटने वाला है शरद… और तेजी से चोदो मुझे !

मैं भी अब चरम पर पहुँचता जा रहा था।

अचानक रेखा जैन जोर जोर से हाँफने लगी और कहने लगी- रुकना मत, रुकना मत मेरे चोदू, मत रुकना, मैं झड़ रही हूँ शरद, मैं झड़ रही हूँ! ओह हाँ हाँ… ऐसे ही… ऐसे… रुकना मत… रुकना मत!

और यह कहते कहते रेखा जैन का पूरा शरीर थरथराने लगा और झड़ने लगी। इधर मैं भी अब कांपने लगा, मेरे लंड से वीर्य का ज्वालामुखी फ़ूट पड़ा और रेखा जैन की पीठ पर ही औंधे मुंह लेट गया।
हम दोनों बुरी तरह से हाँफ रहे थे।

थोड़ी देर में जब होश आया तो हम लोग उठकर बैठे, मिस्टर जैन वहीं पास में बैठे थे।

हम तीनों नंगे वहाँ बैठे थे।

मिस्टर जैन- तो शरद, मजा आया?

मैंने हाँ में गर्दन हिला दी।

मिस्टर जैन- देखो लाईफ कितनी मस्त है और इसमें कितना मजा है… वेलकम टु द क्लब!

यह कहते हुए मिस्टर जैन और मिसेज़ जैन हंसते हुए ताली बजाई और मैंने खड़े होकर उन्हें झुककर सलाम किया।

मिस्टर जैन- इसी बात पर एक एक ड्रिंक हो जाए।

मिसेज़ जैन उठी और तीन ग्लास में स्कॉच लेकर आईं… इम तीनों ने टोस्ट किया और ड्रिंक को बॉटम्स अप मारा।

अब रात के करीब 12 बज चुके थे, मैंने उनसे कहा- मिस्टर जैन… मैम, रात बहुत हो गई है अब मुझे चलना चाहिए।

मिसेज़ जैन- ओह यस… रात बहुत हो गई है… अब हमें सोना चाहिए लेकिन वी स्पेन्ट अ वन्डरफुल सन्डे टुडे… थैक्स शरद फॉर कमिंग एण्ड दिस वॉन्डरफुल इवनिंग…

मिस्टर जैन- हाँ डार्लिंग, शाम तो अच्छी गुजरी है लेकिन शरद तो हमारे घर के सदस्य जैसा ही है… शरद यू आर ए नाईस बॉय… मैं जल्द तुम्हें और लोगों से भी इन्ट्रोडयूस करुँगा।

मैं- शुक्रिया तो मुझे कहना चाहिए आप लोगों का जिन्होंने मुझे स्वर्ग जैसी अनुभूति करवाई… गुड नाईट सर… सी यू सून!

यह कह कर मैं अपने कमरे में चला आया और कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगा।
मैं बहुत हल्का महसूस कर रहा था… चुदाई पहली बार मैंने की थी और थकान भी महसूस हो रही थी, मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।
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