खेत में माँ को चुदते देखा - Khet Me Maa Ko Chudte Dekha

खेत में माँ को चुदते देखा - Khet Me Maa Ko Chudte Dekha - Maa ki chudai , Tau ne Meri man chod di. मम्मी और ताऊ की अन्तर्वासना कहानी.

मेरा नाम राज है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।

वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे ताऊ जी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम नवरात्रि में गाँव जाने वाले थे। पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा।

माँ ने कहा- ठीक है।

तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ ताऊ जी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और ताऊ जी भी खुश हुए, उन्होंने पूछा- परिमल नहीं आया?

माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे।

और ताऊ जी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया…

हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और ताऊ जी ने मुझे कहा- तुम चलाओ।

मैंने कहा- ठीक है।

माँ और ताऊ जी पीछे बैठ गये। थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने माँ की आवाज़ सुनी, पीछे देखा तो ताऊ जी का पैर माँ के साये में था और माँ ने मुझ से कहा कि सामने देख कर चलो।

हमें लोग घर पहुंचे तब माँ बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई…

ताऊ जी ने कहा- चलो, तुमको खेत में ले चलता हूँ।

माँ मुस्कुराते हुए बोली- हाँ चलिये।

मैं भी साथ था। हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने ताऊ को जी माँ की गाण्ड पर हाथ फिराते हुए देखा।

तब माँ ने कहा- लड़का इधर है, वो देख लेगा।

उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था।

तब ताऊ जी ने मुझसे कहा- बेटा, तुम दूर जा कर खेलो। मुझे तुम्हारी माँ से बातें करनी हैं।

तो मैंने माँ को देखा तो माँ ताऊ जी के सामने देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझे कहा कि तुम यहाँ से जाओ…

मैं वहाँ से चलने लगा और माँ-ताऊ जी भी खेत के अन्दर दूर जाने लगे। मुझे दाल में काला नज़र आया। मैं भी उनके पीछे पीछे गया तो देखा कि ताऊ जी माँ की दोनों एक पेड़ की आड़ में चले गये और माँ पेड़ से लग कर खड़ी हो गई। अब ताऊ जी अपना हाथ माँ के साये में डालने लगे और माँ भी अपना साया उठा कर उनका साथ देने लगी। लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी, इसलिये मैं और नज़दीक गया और सुनने लगा। तब वो दोनों पापा की बातें कर रहे थे।

माँ कह रही थी- कितने दिन बाद मुझे यह तगड़ा लौड़ा मिल रहा है, वरना परिमल का लौड़ा तो बेकार है।

अब माँ के बुर को दोनों हाथ से फैलाया। माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थी लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रहा थी। इसके बाद ताऊ जी माँ के बुर पर लण्ड सटा कर हलका सा कमर को धक्का लगाया। माँ के मुँह से अह्हहह की आवाज निकल गई।

मैं समझ गया कि माँ के बुर में ताऊ जी का लण्ड चला गया है। ताऊ जी ने कमर को झटका देना शुरू किया। ताऊ जी जब जब जोर से झटका लगाते थे माँ के मुँह से आआअहह की आवाज सुनाई पड़ती थी। कुछ देर के बाद जब ताऊ जी ने माँ की चूचियों को मसलना शुरु किया तो उनका जोश और भी बढ़ गया। एक तरफ़ ताऊ जी बुर में जोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को जोर जोर से मसलने लगे।

अब माँ की बुर में लण्ड जब आधे से ज्यादा चला गया तो माँ के मुंह से आआहह्ह नहीं आआ आह्हह की आवाज आने लगी। ताऊ जी ने माँ के होठों को चूसना शुरु कर दिया। लगभग आधे घण्टे चोदने के बाद ताऊ जी का बीज माँ की चूत में गिरा। माँ भी बहुत ही खुश थी। कुछ देर के बाद ताऊ जी ने लण्ड निकल लिया। माँ पांच मिनट तक लेटी रही।

माँ तब उठ कर जाना चाहती थी। ताऊ जी ने उनको रोक लिया, उन्होंने माँ से कहा- कहाँ जा रही हो?

तब माँ ने कहा- आज के लिये इतना बस!

ताऊ जी ने कहा- अभी तो और चुदाई बाकी है, रुक जाओ तुम।

तब ताऊ जी ने माँ के पीछे जा कर माँ की गाण्ड पर लण्ड रखा और कमर को पकड़ कर एक जोरदार झटका मारा। माँ के मुँह से आआ आअह्हह हह्ह की आवाज निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में लण्ड चला गया। अब ताऊ जी ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लण्ड को माँ के गाण्ड में घुसा दिया। ताऊ जी माँ के गाण्ड को लगभद दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे धीरे शान्त पड़ गये तो मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में बीज गिर गया है।

ताऊ जी ने लण्ड को निकाल लिया तब माँ के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ ने दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। ताऊ जी ने माँ की बुर को देखा, माँ से पूछा- पेशाब नहीं करोगी?

माँ ने गरदन हिला कर कहा- नहीं।

अब ताऊ जी ने जैसे ही लण्ड को माँ की बुर के ऊपर सटाया माँ ने अपने दोनों हाथों से अपनी बुर को फैला दिया। ताऊ जी ने लण्ड के अगले भाग को माँ की बुर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लण्ड को अन्दर घुसा दिया।

माँ मुँह से आआह्ह फ़्फ़फ़ईई रीईई धीईई आआह्हह्स इस्सस्स स्सस्हह्हह कर रही थी। ताऊ जी पर उनके इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार पांच छोटे झटके के बाद एक जोर का झटका दे रहे थे। उनका लण्ड जब आधे से ज्यादा अन्दर चला गया तो माँ ने ताऊ जी से कहा- अब और अन्दर नहीं डालियेगा वरना मेरी बुर फट जायेगी।

ताऊ जी ने कहा- अभी तो आधा बाहर ही है।

माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए ताऊ जी माँ के चूत में अपने लण्ड को अन्दर ले जा रहे थे। माँ ने जब देखा कि अब बरदाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने ताऊ जी से कहा- मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आआह पल्लीईज़ आआह्हह… नहीईई उई आआअह्ह्ह ह्हह…

ताऊ जी ने लगातार कई जोरदार झटके मार कर पूरे लण्ड को माँ के बुर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसला। अब माँ को भी मजा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इन्तजार था। ताऊ जी ने अपने झांट को माँ की झाँट में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उन्होंने पूरे बीस मिनट तक माँ की चुदाई की। इसके बाद माँ और ताऊ जी शान्त पड़ गये तब मैं समझ गया कि माँ की बुर में ताऊ जी का बीज गिर गया है। वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे। अब ताऊ जी ने लण्ड को निकाल दिया और माँ की बगल में लेट गये। फ़िर दोनों ने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। तब मैं भी वहाँ से हट गया ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देख लिया है। हम तीनों घर वापस आ गये।

ताऊ जी माँ को देख कर मुस्कुराने लगे कि तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं पता चला। लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है।

मुझे चुदते हुए आज 4 साल हो गए हैं - 4 saal se meri chudai ho rahi hai

मुझे चुदते हुए आज 4 साल हो गए हैं - 4 saal se meri chudai ho rahi hai घर की लाडो की कमसिन चूत भाग -4 - Ghar Ki Lado Ki Kamsin Choot Part -4, अपनी ही बेटी को गैर आदमियों से चुदवा दिया, दोस्तों से खुद की लड़की को चुदवाया, छोटी लड़की को बुड्ढों ने चोदा.

पापा- अरे वाहह.. मेरी रानी आज तो एकदम गुड़िया जैसी लग रही हो.. कसम से आज मज़ा आ जाएगा.. मगर मेरी एक बात गौर से सुन.. वहाँ किसी को पता ना चले कि तू मेरी बेटी है.. मुझे बस अंकल बोलना वहाँ.. ओके.. आज से तेरा नया जीवन शुरू होने जा रहा है। अब तू फ्री में नहीं चुदेगी.. हम पैसे कमाएँगे तेरी चूत से.. बस तू उनकी हर बात मान लेना.. थोड़े पागल किस्म के लोग हैं वो लोग चुदाई की हर हद पार कर चुके हैं मगर पैसे भी खूब देंगे…

पापा की बात सुनकर मैं एकदम सन्न रह गई क्योंकि चुदाई के चक्कर में अब ना जाने मेरे साथ क्या-क्या होने वाला था। पापा ने तो मुझे सचमुच की रंडी बना दिया था।

रानी- म..म..मगर पापा आपने तो कहा था कि आपके दोस्त हैं और मैंने बस मज़ा लेने ले लिए ‘हाँ’ की थी.. ये पैसे किस बात के लिए?

पापा- अरे रानी वो दोस्त ही हैं और मज़े तो हम करेंगे ही.. अब पैसे तो वो लोग अपनी ख़ुशी से दे रहे हैं समझी.. चल अब ज़्यादा सवाल मत कर.. वहाँ जाकर सब समझ जाएगी।

पापा मुझे टैक्सी में बिठा कर घर से ले गए। हम करीब 25 मिनट तक चलते रहे उसके बाद हम एक फार्म-हाउस पर पहुँचे, जो दिखने में काफ़ी आलीशान लग रहा था।

दरवाजे के अन्दर जाते ही दरबान ने हमें सलाम किया और हम अन्दर चले गए।

दोस्तो, अन्दर एक बहुत ही बड़ा घर था मैं तो बस देखते ही रह गई।

पापा- देखो रानी कोई गड़बड़ मत करना.. बस चुपचाप मज़े लेना.. समझी, ये बड़े लोग हैं इनको ‘ना’ सुनना पसन्द नहीं है। चलो अब ऊपर वो लोग इंतजार कर रहे होंगे।

मैं बोल भी क्या सकती थी.. चुपचाप पापा के पीछे हो गई।

पापा ने कमरे का दरवाजा खोला तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं.. अन्दर काफ़ी आलीशान सजावट थी और चार आदमी जो 50 या 60 साल से कम के नहीं थे.. मुझे घूरने लगे।

उनमें से एक खड़ा हो गया जिसका नाम राजन था।

राजन- आओ आओ.. किशोरी लाल.. बड़ी देर कर दी आने में और ये कौन है.. तेरे साथ?

दोस्तो, मैंने शायद आपको बताया नहीं मेरे पापा का नाम किशोरी लाल है।

चलो अब आगे का हाल सुनाती हूँ।

पापा- सर जी.. मैंने बताया था ना आपको.. यह वही है…

राजन- दिमाग़ तो ठीक है.. ना तुम्हारा.. ये छोटी सी लड़की के बारे में बता रहे थे तुम.. विश्रान्त भाई.. सब सुना आपने?

विश्रान्त- हाँ सुन रहा हूँ.. किशोरी लाल तूने कहा था.. लड़की छोटी है खूब मज़ा देगी.. मगर इतनी छोटी है ये नहीं बताया था.. इसके साथ चुदाई करेंगे.. साली कहीं मर-वर गई तो.. ना बाबा हम ये रिस्क नहीं लेंगे.. तू इसको वापस ले जा.. हमारे पैसे वापस कर दे।

पापा- अरे विश्रान्त साब.. आप मेरी बात तो सुनो.. मैंने साफ-साफ कहा था लड़की छोटी है.. खूब मज़ा देगी और गुप्ता जी और दयाल साब भी तो वहीं थे.. आप भरोसा करो इसको कुछ नहीं होगा…

गुप्ता जी- भाई एक बात तो है.. साला किशोरी माल तो तगड़ा लाया है.. इतनी कमसिन कली को ऐसे ही मत जाने दो यार कुछ तो मज़ा करो…

दयाल साब- अरे राजन.. इसकी पूरी बात तो सुन लो.. क्या पता लड़की पहले से खेली-खाई हो.. तभी किशोरी यहाँ लाया है.. वरना इतना भी पागल नहीं है ये.. कि सील पैक लड़की हम शैतानों के हाथ सौंप दे…

पापा- हाँ राजन साब, यही बात है.. आप सुन ही नहीं रहे हो.. लड़की के तीनों छेद अच्छे से खुले हुए हैं.. हाँ बस फ़र्क इतना है कि थोड़ी जल्दी ही ये लड़की चुद गई वरना इस उमर में तो इसके खेलने के दिन हैं.. जवान लौंडों से चुदी है.. जिनको कुछ समझ ही नहीं.. अब आप लोगों के पास आ गई है तो सब सीख जाएगी।

दोस्तों पापा ऐसे बात कर रहे थे जैसे मैं कोई चीज हूँ और बाजार में मुझे बेचने गए हों और वो सब भी मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे।

गुप्ता जी- नाम क्या है तेरा?

रानी- ज्ज..जी रानी।

गुप्ता जी- वाहह.. क्या नाम है तेरा.. रानी.. मज़ा आएगा, यहाँ आओ रानी.. तेरे चूचे तो देखूँ.. देखने में तो छोटे-छोटे अमरूद से लग रहे हैं।

विश्रान्त- छोटे हैं तो क्या हुआ.. हम हैं ना.. बड़े कर देंगे.. आजा रानी डर मत आ जा…

मैं एकदम सहम गई थी और पापा की तरफ़ देखने लगी.. मगर पापा तो हरामी थे, मुझे ऐसे घूर कर देखा कि मैं डर गई।

पापा- जाओ रानी ये बड़े सेठ हैं तेरी जिंदगी बना देंगे.. मैं अब चलता हूँ.. हाँ शाम तक तू इनको खुश कर दे.. मैं आकर तुझे ले जाउंगा.. ठीक है ना…

रानी- पा…. अंकल आपने तो कहा था आप साथ में रहोगे.. मगर आप तो जा रहे हो।

पापा- अरे मैं क्या करूँगा.. चार तो हैं अब मेरा यहाँ क्या काम, अब चुपचाप जा.. बाकी की बात शाम को करेंगे..

मेरी पीठ को सहला कर पापा मुझे उन भूखे भेड़ियों के सामने खड़ा करके वहाँ से चले गए।

गुप्ता जी- अब आ भी जा रानी.. क्यों तड़पा रही है.. आ देख सब कैसे तेरा इंतजार कर रहे हैं।

मैं धीरे-धीरे चलते हुए उनके पास गई।

एक बड़े से बिस्तर पर चारों बैठे बस मेरे करीब आने का इंतजार कर रहे थे।

जैसे ही मैं उनके नज़दीक गई, विश्रान्त ने मुझे खींच कर बिस्तर पर ले लिया।

यह एक रबड़ के गद्दे वाला पलँग था जिसके गद्दे में पानी भरा हुआ था। बड़ा ही लचीला बिस्तर था। मैं ऊपर गिरते ही उछल गई।

चारों मुझे वासना की नज़रों से घूरने लगे, कोई मेरे चूचे दबा रहा था तो कोई मेरी जाँघों को चूसने लगा।

मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि अचानक ये क्या हो गया। बस बिना कुछ बोले सब के सब मुझ पर टूट पड़े।

गुप्ता जी- यारों कुछ भी कहो किशोरी लड़की बहुत मस्त लाया है.. साली के चूचे छोटे से हैं.. मगर हैं बड़े रसीले.. उफ्फ.. क्या मज़ा आ रहा है।

दोस्तों उन चारों को मुझे नंगा करने में एक मिनट भी नहीं लगा।

अब मैं नग्न उनके सामने पड़ी थी और वो मेरे चूचुकों को चूस रहे थे।

विश्रान्त मेरी चूत को चाट रहा था, पहले उसने अपनी उंगली से मेरी चूत का मुआयना किया था कि कहीं सील पैक तो नहीं हूँ ना.. पहले एक उंगली डाली.. उसके बाद दो और फिर तीन उंगलियाँ ठूंस कर मेरी चूत की सील चैक की और मेरी चूत के रस से सनी अपनी उंगलियों को अपने मुँह में डाल कर चूसा।

राजन- क्यों विश्रान्त चूत चैक कर ली है क्या हुआ कैसी है.. और चूत का स्वाद कैसा है?

विश्रान्त- अरे क्या बताऊँ यार.. चूत तो एकदम मस्त कसी हुई है.. हाँ साली चुदी-चुदाई है.. मगर अभी ज़्यादा नहीं चुदी.. इसका पानी तो बड़ा स्वादिष्ट है।

सब एक से बढ़कर एक मादरचोद और हरामी थे, आधे घंटे तक मुझे ऐसे चूसते और चाटते रहे कि मेरी हालत खराब कर दी और हाँ एक बार तो मैं झड़ भी गई थी।

राजन- बस भाई इसको तो बहुत चूस लिया.. अब इसको अपने लौड़े चुसवाओ.. इसकी चूत और गाण्ड के मज़े लो.. अब बर्दाश्त नहीं होता।

चारों ने अपने कपड़े निकाल दिए.. मेरी नज़र उनके लौड़े पर गई जो तन कर एकदम फुंफकार रहे थे।

दोस्तों उनकी उमर के हिसाब से मुझे लगा.. सालों के लौड़ों में इतनी कहाँ जान होगी.. मगर उनको देख कर मेरी हालत पतली हो गई।

दयाल का लौड़ा कोई 8 इन्च का होगा पापा के लंड से मिलता-जुलता, गुप्ता जी का लंड एकदम काला.. किसी घोड़े जैसा वो कोई 9 इन्च का होगा और मोटा भी काफ़ी था।

अजय और विजय दोनों के लंड को जोड़ लो.. उतना अकेला तो उसका था। राजन का लौड़ा भी कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही बड़ा था.. वो भी मोटा था।

आखिर में विश्रान्त के लंड पर नज़र गई तो वो भी करीब 9 इन्च का थोड़ा टेढ़ा लौड़ा था बिल्कुल केला जैसा घुमावदार लौड़ा था।

मेरे तो पसीने छूटने लगे, मगर मैं चुपचाप पड़ी रही।

दयाल- अबे गुड़िया.. अभी भी यूँ ही पड़ी रहेगी क्या.. चल आ जा.. अब लौड़े चूस.. उसके बाद देखते हैं तुझमें कितना दम है, आज तू शाम तक हम लोगों की है, कसम से आज तुझे इतना चोदेंगे कि सारी जिंदगी तुझे सपने में भी लौड़े ही दिखेंगे।

सारे कुत्ते मेरे आजू-बाजू खड़े हो गए, मैं उनके बीच बैठ गई और विश्रान्त का लौड़ा चूसने लगी, कभी राजन मेरे बाल खींच कर मुझे अपना लौड़ा चुसवाता तो कभी दयाल.. बस मैं तो उनके बीच कठपुतली बनकर रह गई थी।

रानी- आहह.. ऑऊच ये आप क्या कर रहे हो.. दुखता है ना…

राजन- चुप साली रंडी.. अगर इतना ही दर्द होता है, तो यहाँ क्या अपनी माँ चुदवाने आई है.. साली पैसे दिए है तेरे दलाल को.. शाम को तुझे तेरा हिस्सा भी मिल जाएगा.. वैसे एक बात तो बता, किशोरी को तू कहाँ से मिल गई.. साला कल तक तो हमसे कर्जे लेता था मगर आज सेठ बन गया.. पता है उसने तेरी एडवाँस बुकिंग कर दी है.. ये महीना पूरा तू बस चुदती ही रहेगी.. साला बड़ा हरामी है, एक ही दिन में लाखों कमा गया है वो।

उनकी यह बात सुनकर सोचने लगी.. जिस बाप के प्यार के लिए मैंने उसे अपना जिस्म सौंपा था वो ही कमीना मेरा दलाल बन गया।

उसे मुझसे कोई प्यार नहीं था, बस अपना काम निकाल कर अब मुझे बेच दिया उसने, पर मुझे भी बड़े लौड़ों से चुदवाने की चाह थी और पापा की चुदाई से मुझे लगने लगा था कि कम उम्र के लौंडों से ज्यादा अच्छी चुदाई उम्रदराज अनुभवी लौड़ों से मिलती है और मुझे इस नजर से ये चारों बहुत ठीक लग रहे थे।

वो सभी कुत्ते मुझ पर टूट पड़े, सबसे पहले विश्रान्त ने मुझे घोड़ी बना कर अपना लंबा लौड़ा मेरी चूत में एक बार में ही घुसा दिया, मैं ज़ोर से चीखी। राजन- वाहह.. भाई मान गए विश्रान्त साहब.. क्या शॉट मारा है आपने.. एक ही झटके में पूरा लौड़ा अन्दर कर दिया।

दयाल- चीख साली.. इसी बात के तो तुझे पैसे मिलेंगे.. तू जितना चिल्लाएगी हमें उतना ही मज़ा आएगा.. विश्रान्त साहब.. जरा एक और शॉट मारो ना.. साली की गाण्ड बड़ी मस्त है.. इसका भी उद्घाटन आप ही कर दो।

मैं भी समझ चुकी थी कि भले मुझे मजा आए पर मुझे ज्यादा चिल्लाना है ताकि इनको अधिक मजा आए।

विश्रान्त ने झटके के साथ लौड़ा चूत से निकाल लिया और गाण्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से धक्का मारा.. साला हरामी बड़ा ही एक्सपर्ट था..

एक ही बार में पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया।

मैं तो चूत के दर्द से अभी उबरी भी नहीं थी कि मेरी गाण्ड में भी दर्द हो गया। मेरी चीखें बदस्तूर जारी रहीं और विश्रान्त गाण्ड मारता रहा।

राजन- बस भी करो.. पहले सब को मुहूर्त करने दो.. उसके बाद इसकी चुदाई शुरू करेंगे.. रानी घबराओ मत.. यह तो बस हम टेस्ट ले रहे हैं.. उसके बाद आराम से चारों एक साथ तुझे चोदेंगे.. तू सोच भी नहीं सकती कि चार लौड़े एक साथ तू कैसे लेगी हा हा हा हा हा…

सब के सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे और बारी-बारी से जैसा विश्रान्त ने किया था सबने पांच मिनट तक मेरी चूत और गाण्ड का टेस्ट-ड्राइव लिया।

मैं अब भी यही सोच रही थी कि तीन तो समझ में आ रहे थे पर चौथा लौड़ा कहाँ डाला जाएगा.. बस इसी सोच में घोड़ी बनी हुई अपना इम्तिहान दे रही थी और इस टेस्ट के दौरान ही मैं झड़ गई।

विश्रान्त- बस अब टेस्ट पूरा हो गया.. साली रंडी तुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.. टेस्ट में कैसे कूल्हे हिला-हिला कर झड़ रही थी.. आजा.. आज पहले तेरी चूत को मैं ही चोदूँगा.. आ जा मेरे लौड़े पर बैठ जा.. राजन तू पीछे से गाण्ड मार ले.. बाकी ये दोनों मुँह को संभाल लेंगे।

दोस्तो, अब वो लम्हा मेरी जिंदगी में कैसा था.. आपको शब्दों में नहीं बता सकती हूँ।

विश्रान्त का लौड़ा मेरी चूत की दीवारों को सरकाने की कोशिश कर रहा था, राजन मेरी गाण्ड को ठोक रहा था। मैं दर्द के मारे चिल्ला भी नहीं पा रही थी..

वो दोनों कुत्ते एक साथ मेरे मुँह में अपने लौड़े घुसा रहे थे।

अब तो मैं हिल भी नहीं पा रही थी, बस चुदी जा रही थी।

कमीने थे भी बड़े तगड़े.. झपा- झप चोदे जा रहे थे.. बहुत तक दोनों मेरी चूत और गाण्ड मारते रहे.. मेरा दो बार पानी निकल गया, तब जाकर वो दोनों रुके।

अभी भी उनका पानी नहीं निकला था मेरी आँखें बन्द होने लगी थीं।

राजन- आह मज़ा आ गया.. अब पानी निकलने वाला है.. आ जाओ अब तुम दोनों लग जाओ.. हम इसके मुँह में पानी निकालेंगे…

वो दोनों मुँह से हट गए और उसी पोज़ में अब वो आ गए।

राजन का लौड़ा मेरे मुँह में गले तक घुसा हुआ था, मैं बड़ी मुश्किल से उसको चूस पा रही थी।

कोई 5 मिनट बाद वो मेरे मुँह में झड़ गया, सारा पानी मुझे मजबूर होकर पीना पड़ा।

उसके बाद विश्रान्त ने भी वैसे ही मेरे मुँह को चोदा और सारा पानी मुझे पिला दिया।

दयाल- वाहह.. क्या मस्त चूत है तेरी रानी.. मज़ा आ गया.. उह्ह उह्ह ले आह उफ़फ्फ़ आह… उधर गुप्ता मेरी गाण्ड को ऐसे मार रहा था जैसे ये दुनिया की आखरी गाण्ड हो, उसके बाद उसे कभी चोदने का मौका ही नहीं मिलेगा… साला लौड़े को पूरा बाहर निकालता उसके बाद सर्रररर से फिर घुसा देता।

अब मैं एकदम टूट गई थी.. मेरी चूत में अब पानी भी नहीं बचा था.. जो मैं झड़ जाती।

ये दोनों भी 30 मिनट तक मुझे चोदने के बाद मेरे मुँह में ही झड़े थे।

विश्रान्त- वाहह.. रानी तू वाकयी बहुत मस्त चुदवाती है.. अब आ जा मेरे लौड़े को चूस.. अबकी बार मैं तेरी गाण्ड मारूँगा और पानी भी गाण्ड में ही निकालूँगा।

रानी- आआ आह आप पागल हो.. सीसी क्या थोड़ा सांस तो लेने दो.. चार-चार लौड़े मैंने लिए हैं अब क्या मेरी जान लेने का इरादा है?

राजन- साली दो कौड़ी की छोकरी.. विश्रान्त साहब से ज़ुबान लड़ाती है.. अब देख तेरा क्या हाल करता हूँ.. अब तक तो हम प्यार से पेश आ रहे थे.. साली छिनाल इधर आ…

राजन ने मुझे अपनी ओर खींच कर अपना लौड़ा मेरे मुँह में घुसा दिया और ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा, मैं पेट के बल लेटी थी और पीछे से विश्रान्त ने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया और वो भी ज़ोर-ज़ोर से मुझे चोदने लगा।

दोस्तो, माना कि घर में मुझे चुदाई में मज़ा आने लगा था, मगर आज तो मेरी जान पर बन आई थी, वो तो घर के लौड़े थे, उनको मैं सहन कर लेती थी, मगर ये इंसान नहीं जानवर थे, जो बस चोदे ही जा रहे थे।

मेरा जरा भी इनको ख्याल नहीं आ रहा था।

उनसे चुदवाते-चुदवाते ना जाने मैं कब बेहोश हो गई और वो कुत्ते तब भी मुझे चोदने में लगे हुए थे।

शाम को जब मेरी बेहोशी टूटी, मेरी नज़र दीवार घड़ी की ओर गई, अब 6 बज रहे थे और वो चारों अब भी मेरे पास नंगे ही लेटे हुए थे।

राजन- क्यों रानी उठ गई क्या.. साली बड़ी कुत्ती चीज है.. तू बेहोशी में भी गाण्ड हिला-हिला कर मज़े लूट रही थी।

उसकी बात सुनकर मेरा ध्यान मेरी गाण्ड और चूत पर गया.. जो बहुत दर्द कर रही थी। लगता है कुत्तों ने बहुत बुरी तरह से मेरी ठुकाई की होगी।

रानी- आहह.. कमीनों उफ्फ.. मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है.. क्या कर दिया तुम लोगों ने.. उहह.. मेरी चूत और गाण्ड बुरी तरह से दुख रही है.. उफ़फ्फ़ कमर भी अकड़ गई.. मेरी तो…

दयाल- हा हा हा.. साली चार-चार बार तुझे चोद कर भी मन नहीं भरा हमारा.. तू बड़ी मजेदार है.. उफ़फ्फ़ मैंने तो दे दनादन तेरी गाण्ड के ही मज़े लिए हैं और विश्रान्त साहब तेरी चूत के दीवाने हो गए.. साली बड़ा मज़ा दिया तूने आज…

उनकी बात सुनकर मेरे होश उड़ गए यानि 16 बार उन्होंने मुझे चोदा..

उफ्फ तभी मेरा यह हाल हो गया..

बड़ी मुश्किल से मैं उठी, अपने कपड़े लिए और बाथरूम में जाकर टब में गर्म पानी में बैठ कर चूत और गाण्ड को सेंकने लगी।

मेरी अब वहाँ से उठने की हिम्मत नहीं थी।

लगभग 7 बजे के आस-पास पापा वहाँ आ गए, मुझे उनकी आवाज़ सुनाई दी।

पापा- नमस्ते राजन सर, क्या बात है.. बड़े खुश दिखाई दे रहे हो.. लड़की ने कुछ गड़बड़ तो नहीं की ना.. आप लोगों को मज़ा आया या नहीं?

राजन- अरे आओ.. आओ.. किशोरी लाल.. कसम से मज़ा आ गया.. ऐसा माल पहले कभी नहीं मिला हमको यार.. क्या बताऊँ साली बड़ी गजब की लौंडिया है यार.. एक दो दिन बाद दोबारा लाना इसको.. आज तो हमने बस इसको चखा है.. अबकी बार ठीक से मज़ा लेंगे इसका…

मुझे उनकी बातें साफ सुनाई दे रही थीं.. कुत्तों ने चोद-चोद कर मेरी तो हालत खराब कर दी और कहते हैं कि आज बस ‘चखा’ है.. अबकी बार ठीक से चोदेंगे..

मैं जल्दी से उठी और अपने बदन को साफ किया.. अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई।

पापा- अरे वाहह.. रानी.. तुम तो नहा कर तैयार हो गईं.. आ जाओ.. सब तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहे हैं।

मैं कुछ नहीं बोली बस चुपके से पापा के पास आकर खड़ी हो गई।

राजन- ले भाई किशोरी.. 50 तो तुझे पहले दे दिए थे हमने.. बाकी के डेढ़ ये ले… कसम से पैसे वसूल हो गए.. और ये दस हजार मेरी तरफ़ से एक्सट्रा रानी के लिए… अबकी बार और मज़ा देना मेरी जान…

पापा ने खुश होकर उनसे पैसे ले लिए। हमारे निकलते हुए भी उस कुत्ते ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरा एक मम्मा पकड़ कर दबाते हुए मुझे चूम लिया और मेरी गाण्ड को ज़ोर से मसक दिया।

हम लोग उधर से बापस आने लगे, रास्ते में पापा बोलते रहे.. मैं गुस्से की वजह से चुप बैठी रही।

पापा ने होटल से खाना ले लिया आज उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

हम जब घर पहुँचे तब मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

पापा- अरे रानी क्या हुआ तू कुछ बोल क्यों नहीं रही.. पूरे रास्ते भी चुप थी.. देख आज तूने क्या कमाल कर दिया.. एक ही दिन में 2 लाख कमा लिए.. वाहह.. अब तो बहुत जल्दी हम अमीर हो जाएँगे।

रानी- बन्द करो अपनी गंदी ज़ुबान साले.. तू इतना बड़ा हरामी निकलेगा.. मैंने सोचा भी नहीं था.. तूने मुझे रंडी बना दिया और उन कुत्तों के सामने फेंक दिया.. तुम्हें शर्म नहीं आई.. मुझ नन्ही सी जान को चार हरामियों को सौंपते हुए.. मेरी हालत खराब कर दी उन लोगों ने… वे हैवान से कम नहीं थे.. कितना बेरहमी से चोदा मुझे.. मेरी हालत खराब कर दी।

पापा- चुप साली छिनाल की औलाद.. तुझे ही बड़ा शौक चढ़ा था… तीन-तीन से चुदने का.. साली फ्री में चुदवाने से तो अच्छा है ना.. घर में चार पैसे आयें… अब ज़्यादा बात मत कर.. अपनी औकात में रह!

मैंने पापा को खूब सुनाया.. मगर वो कहाँ मानने वाले थे.. उनको तो पैसों से मतलब था और मुझे भी अब समझ आ गया था कि मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है, अब जो भी होगा मुझे ही सहना पड़ेगा.. बस वक़्त और हालत से मैंने समझौता कर लिया..

अजय और विजय को भी सब मालूम हो गया।

वो भी उस हरामी बाप के हरामी बेटे निकले…

अब वो भी अपने दोस्तों से पैसे लेकर मुझे उनसे चुदवाने लगे।

दोस्तो, उन सब के मज़े हो गए.. बड़े लोगों की पार्टी में मुझे अच्छे पैसे मिल जाते और इन टुच्चे लोगों से भी 2-4 हजार मिल ही जाते हैं।

अब तो लंड ही मेरी ज़िंदगी में कमाई का जरिया बन गया है।

मुझे चुदते हुए आज 4 साल हो गए हैं। मेरी चूत का तो भोसड़ा बन गया है, मेरी गाण्ड सबको बेहद पसंद आती है, साले कुत्ते सब मेरी गाण्ड ही मारते हैं।

बस दोस्तो, यही है मेरी बर्बादी की कहानी..

पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था - Papa ka hath meri chut par lag gayaa

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हाय दोस्तो, मैं रानी हूँ, मेरी उम्र 20 साल है मेरा रंग गोरा है और लंबे बाल हैं। मेरे होंठ पतले हैं और ऊपर के होंठ के दाहिनी ओर एक तिल है। मेरी सहेलियां कहती हैं कि उस तिल से मेरी सुंदरता में चार चाँद लग गए हैं।

मेरे चूचे अभी 36 इन्च के हो गए हैं। मेरी कमर 32 इन्च की है और मेरे चूतड़ बहुत ज़्यादा बाहर को आ गए हैं।

क्या करूँ सभी मेरी गाण्ड में ही लौड़ा डालने को मरते हैं, इसलिए मेरी गाण्ड उभर कर बाहर को आ गई है।

आज मेरी ये हालत है कि मेरी चूत और गाण्ड में गधे का लौड़ा भी घुस जाए क्योंकि वक़्त और हालत ने मुझे इतनी बड़ी चुदक्कड़ बना दिया है कि मैं आपको क्या बताऊँ।

मैं एक सीधी-सादी लड़की थी पर जब आप कहानी पढ़ेगे तो सब जान जाएंगे कि कैसे हवस के पुजारियों ने मेरी जिंदगी बर्बाद की है।

अब आपको ज़्यादा बोर नहीं करूँगी, चलो सीधे मेरी बर्बादी की दास्तान आपको सुनाती हूँ।

यह बात 14 जून 2006 की है, जब मैं कमसिन थी, मेरे पापा की बीमारी के कारण मौत हो गई थी तो माँ एकदम टूट सी गई थीं।
उनका बस मैं ही अकेली सहारा थी।
इस हादसे ने हमारी जिंदगी बदल थी, पैसों की तंगी रहने लगी थी, तब हमारे दूर के रिश्तेदारों ने माँ पर दबाव डाला कि वो दूसरी शादी कर लें। मगर माँ न मानी, मगर वक़्त के साथ माँ भी टूट गईं और आख़िर एक साल बाद माँ ने दूसरी शादी कर ली।

मेरे नए सौतेले पापा शराबी थे, उनके दो बेटे थे जो करीब मेरी ही उम्र के थे या शायद मुझसे थोड़े बड़े थे।

शुरू में तो सब ठीक तक चलता रहा मगर साल भर में ही पापा माँ को मारने लगे और वे मुझे भी पसन्द नहीं करते थे सो मेरी पढ़ाई भी बन्द हो गई थी।

मेरे दोनों भाई भी हमेशा मुझे मारते रहते थे, घर का सारा काम हम माँ-बेटी मिल कर करती थे और धीरे-धीरे माँ टूट सी गई और बीमार रहने लगी।
आख़िरकार 12 फरवरी 2010 को माँ भी मुझे छोड़ कर चली गईं। अब तो मुझ पर ज़ुल्म बढ़ने लगे। मैं भी धीरे-धीरे इनकी मार की आदी हो गई।

सॉरी दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि यह तो पका रही है, मगर क्या करूँ ये सब कुछ सत्य है और आपको इसके बारे में बताना जरूरी भी है।

अब आपको मेरी चुदाई की कहानी बताती हूँ।

8 सितम्बर 2010 को मेरा जन्मदिन था अब कौन मेरा जन्मदिन मनाता, कहाँ नए कपड़े थे, कहाँ पार्टी थी और कहाँ प्यार.. बस मैं काम में पिस रही थी।

उस दिन तक मैं पूरी जवान हो गई थी। मेरे सीने के उभार दिखने लगे थे। मेरा सौतेला भाई अजय जो 18 साल का था, अक्सर मुझे मारने के बहाने मेरे चूतड़ों को दबा देता तो कभी मेरे सीने पर हाथ रख देता था।

दोपहर को मैं छत से कपड़े उतारने गई तो अजय वहाँ आ गया और मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उस वक़्त मैंने एक पुरानी सी सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी, दुपट्टा मैंने एक तरफ रख दिया था।
आपको बता दूँ मैं हमेशा दुपट्टा ही अपने सीने पर रखती हूँ।

अजय- अरे रानी, आज ये दुपट्टा तूने एक तरफ क्यों रखा है नहीं तो इसके बिना तू रहती ही नहीं है?

रानी- वो क्या है ना भाई, आज मुझे गर्मी लग रही है इसलिए मैंने सोचा छत पर हवा अच्छी आ रही है, थोड़ी हवा खा लूँ।

अजय- अरे मेरी रानी, बहना आज तो मस्त लग रही हो आओ आज तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ।

अजय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे घूरने लगा।

मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैं घूम गई। तभी वो मेरे पीछे चिपक गया।

रानी- भाई क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे प्लीज़…

मैंने उसको हटाने की लाख कोशिश की, मगर वो माना नहीं और छत पर बने कमरे में मुझे जबरदस्ती ले गया।
वहाँ वो मेरे होंठ चूसने लगा और एक हाथ से मेरी गाण्ड सहलाने लगा।

मैं छटपटा रही थी मगर वो मेरी एक ना सुन रहा था इतने में विजय जो मेरा बड़ा भाई है, वो आ गया, वो करीब 20 साल का था।

विजय- क्या हो रहा है यहाँ?

अजय- क.. क.. कुछ नहीं भाई.. देखो ये रानी है.. मुझसे चिपक रही है.. पता नहीं क्या चाहती है?

रानी- न.. न.. नहीं भाई.. अजय झूठ बोल रहा है।

अजय ने झट से मुझे एक थप्पड़ मारा।

अजय- चुप साली मुझे झूठा बोलती है.. भाई इसने खुद ही मुझे यहाँ बुलाया और मुझसे चिपक गई। मुझसे बोल रही है, मुझे गर्मी लग रही है।

विजय ने मुझसे पूछा- क्या अजय सही बोल रहा है?

रानी- वो तो दुपट्टे की बात पर मैंने कहा था, मगर मेरा मतलब ऐसा कुछ नहीं था।

विजय- अच्छा यह बात है साली छिनाल हमने सोचा तू जैसी भी है हमारी बहन है.. तुझे खाना देते हैं मगर तू तो पता नहीं किसका गंदा खून है.. रुक आज मैं तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा और तेरे सारे मतलब पूरे कर दूँगा।

रानी- भाई प्लीज़.. मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो…
पर असल में तो मैं सब समझ रही थी कि ये दोनों भाई मुझे चोदने के ख्याल से यह नौटंकी कर रहे हैं। जवान तो मैं भी हो चुकी थी, मेरे बदन में भी वासना की अग्नि तो उठती ही रहती थी, कहीं मेरे अन्तर्मन में भी कुछ तमन्ना थी नर-नारी के तन के मिलन का मज़ा लेने की, पर मैंने विरोध तो करना ही था ना अपने सौतेले भाइयों की हरकतों का।

अजय वहाँ खड़ा मुस्कुरा रहा था और विजय से नजरें चुरा कर मुझे चिढ़ा रहा था।

विजय- अजय तू नीचे जा और ऊपर मत आना.. आज मैं इसको बताता हूँ कि मैं क्या चीज हूँ।

अजय वहाँ से चला गया और विजय ने मुझे कपड़े निकालने को कहा।

मेरे मना करने पर विजय ने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं एकदम नंगी हो गई क्योंकि उस वक़्त मुझे कौन ब्रा-पैन्टी लाकर देता.. बस पुराने कपड़े ही नसीब में थे।

अब मैं एकदम नंगी दीवार के पास खड़ी थी, मेरे बेदाग गोरे बदन को देख कर भाई की आँखों में चमक आ गई थी।

मेरे मम्मे उस वक्त कोई 28 इन्च के रहे होंगे।
भाई की पैन्ट में तंबू बन गया था, उनका लौड़ा मेरे जिस्म को देख कर फुंफकार मार रहा था।

विजय- वाह.. साली तू तो बड़ी ‘हॉट-आइटम’ है.. तभी तुझमें गर्मी ज़्यादा है.. आजा आज तेरी सारी गर्मी निकाल देता हूँ।

रानी- नहीं भाई.. प्लीज़ मुझे जाने दो.. मैं आपकी बहन हूँ प्लीज़…

विजय- चुप साली.. छिनाल की औलाद.. तू कहाँ से मेरी बहन हो गई.. हाँ.. आज तुझे अपनी बीवी जरूर बनाऊँगा।

इतना बोलकर भाई मुझ पर टूट पड़ा। मेरे होंठों को चूसने लगा, मेरे मम्मों को दबाने लगा। मुझे बहुत दर्द हो रहा था मगर उस पर भूत सवार था, वो कहाँ मानने वाला था। मैंने उससे छूटने की कोशिश की, उसको गुस्सा आ गया और वो मेरे गाल पर थप्पड़ मारने लगा।

विजय- क्या हुआ.. साली अब आया समझ में.. कुतिया बहुत नाटक कर रही थी।

इतना बोल कर भाई अपने कपड़े निकालने लगा। धीरे-धीरे वो पूरा नंगा हो गया, उसका 6 इन्च का लौड़ा एकदम तना हुआ मेरी आँखों के सामने लहरा रहा था।

मैं घबरा गई और जल्दी से पलट गई यानि पेट के बल लेट गई।

विजय- अरे वाह.. तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. साली आज इसी का मुहूर्त करूँगा।

इतना बोलकर वो बिस्तर पर चढ़ गया और मेरे मम्मे दबाने लगा, अपनी ऊँगली से मेरी गाण्ड के छेद को खोलने लगा।

मैं थोड़ी कसमसाई तो उसने ज़ोर से मेरी गाण्ड पर मार दिया, मैं दर्द के कारण सिहर गई।

अब मुझे समझ आ गया था कि यह हरामी मुझे पीछे से ही चोदने वाला है, इसकी मार खाने से अच्छा है अब चुपचाप पड़ी रहूँ।

भाई ने काफ़ी देर मेरे चूतड़ सहलाए अब मैं चुप पड़ी थी उसने अपने लौड़े पर ढेर सारा थूक लगाया और मेरे छेद पर भी थूक लगाया।

विजय- हाँ.. अब आई ना लाइन पर बस ऐसे ही चुपचाप पड़ी रह.. नहीं तो मार खाएगी.. आहह.. क्या मस्त गाण्ड है। अब अपना बदन ढीला छोड़ दे.. मैं लौड़ा डाल रहा हूँ अगर जरा भी हिली ना तो तेरी खैर नहीं…

भाई ने लंड की टोपी गाण्ड के छेद पर रखी और ज़ोर से एक धक्का मारा.. एक ही बार में आधा लौड़ा मेरी गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया।

रानी- आआ.. उईईई माआ..मर गई.. आआआ आह.. भाई आह.. मेरी जान निकल रही है.. आह निकाल.. लो..

विजय कहाँ मानने वाला था उसने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड की गहराइयों मैं खो गया और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया।

मैं चीखती रही वो झटके मारता रहा.. मज़ा लेता रहा।
विजय- आ उह..साली तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. आह मज़ा आ गया उह ले आह उह उह उफ़ क्या कसी गाण्ड है.. आह आह आह…

मैं चिल्लाती रही.. 20 मिनट तक वो मेरी गाण्ड मारता रहा और आख़िरकार उसके लौड़े ने लावा उगल दिया, जो मेरी गाण्ड के कोने-कोने में समा गया। दो मिनट तक विजय मेरे ऊपर पड़ा रहा, उसके बाद एक तरफ लेट गया।

मैं वैसी की वैसी पड़ी रही, उसका वीर्य मेरी गाण्ड से बह कर बाहर आ रहा था।

मेरी गाण्ड में अब भी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मोटा डंडा घुसा हुआ हो, बड़ी जलन हो रही थी।
विजय उठा और मेरे कपड़ों से अपना लौड़ा साफ किया अपने कपड़े पहनने लगा।

विजय- साली बड़ी कमाल की गाण्ड है तेरी.. मुझे अभी कहीं जाना है.. नहीं तो तेरी और ठुकाई करता। अब ध्यान से सुन अगर किसी को ये बात बताई ना.. तो तेरा वो हाल करूँगा कि ज़िंदगी भर पछताएगी समझी।

विजय वहाँ से चला गया और मैं वैसे ही पड़ी रोती रही कोई 5 मिनट बाद अजय अन्दर आया।

अजय- हरामजादी.. अगर मेरी बात मान लेती तो तेरा ये हाल ना होता.. अब फट गई ना तेरी गाण्ड.. साली कुतिया भाई का लौड़ा लेकर मज़ा नहीं आया तो अब मेरा लेकर देख.. शायद तुझे मज़ा आ जाए।

इतना बोलकर वो भी नंगा हो गया, उसका भी लौड़ा 6 इन्च का ही था, पर विजय के लौड़े से ज़रा मोटा था। मेरी कहाँ हिम्मत बची थी उसको रोकने की, वो भी मुझ पर सवार हो गया और एक ही झटके में पूरा लौड़ा मेरी खुली हुई गाण्ड में घुसा दिया।

मैं फिर दर्द से कराहने लगी और वो मेरी गाण्ड मारता रहा, मज़े लेता रहा।

अजय- आहह.. आह.. मज़ा आ गया.. साली तेरी गाण्ड में तो बड़ी गर्मी है.. आहह.. साला लौड़ा बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहा आहह.. जल्दी ही पानी छोड़ देगा.. आहह.. मन तो तेरी चूत की सील तोड़ने का है.. मगर डर है कहीं साली तू मर-वर गई तो हमें मुफ़्त की नौकरानी कहाँ से मिलेगी.. आह.. उहह.. मेरा निकलने वाला ही है.. आह उहह…

करीब 7-8 मिनट में वो ठंडा हो गया और मेरी गाण्ड को पानी से भर कर चला गया।

मैं काफ़ी देर तक उसी हालत में पड़ी रही और न जाने कब मेरी आँख लग गई।

शाम को 6.30 बजे मेरी आँख खुली.. गाण्ड में अब भी दर्द था।

मैं जल्दी से उठी और गुसलखाने में चली गई, वहाँ से नहा कर कपड़े पहने।

हाँ.. एक बात मैं आपको बता दूँ.. यहाँ पड़ोस के लोग जानते हैं कि इस घर में मेरी क्या हालत है, इसी लिए बेचारे अपने बच्चों के पुराने कपड़े मुझे दे देते हैं बस मेरा गुजारा चल जाता है।

उन्हीं कपड़ों में से एक गुलाबी टी-शर्ट और नीला पजामा मैंने पहना और खाना बनाने की तैयारी में लग गई।

पापा- रानी कहाँ हो.. यहाँ आओ।

दोस्तो, मैं आपको बताना भूल गई, पापा की खुद की दुकान है, तो वो सुबह 8 बजे जाते हैं तो सीधे शाम को 7 बजे ही आते हैं और आने के साथ ही उनको खाना चाहिए।

मैं भाग कर रसोई से बाहर आई और कहा- बस 15 मिनट में खाना बन जाएगा।

पापा- हरामखोर किसी काम की नहीं है तू.. अब तक खाना नहीं बना.. इतनी देर क्या कर रही थी?

रानी- वो वो.. पापा मेरी आँख लग गई थी, इसी लिए…जरा देर हो गई।

मैं आगे कुछ बोल पाती इससे पहले पापा ने एक जोरदार तमाचा मुझे जड़ दिया।

मैं रोने लगी और अपने आप को बचाने के लिए मैंने वो बोल दिया जो शायद मुझे नहीं बोलना चाहिए था।

रानी- उउउ उउउ पापा.. प्लीज़ मेरी बात तो सुनिए.. इसमें मेरी ग़लती नहीं है.. वो वो.. विजय भाई ने मेरे साथ दोपहर को उूउउ उउउ…
पापा- क्या किया विजय ने.. हाँ.. बताओ?

रानी- उउउ.. वो वो.. उन्होंने मेरे साथ गंदा किया उउउ मेरे कपड़े निकाल कर उूउउ.. उसके बाद अजय ने भी उूउउ…
मैंने पूरी दास्तान कह दी।

मेरी बात सुनकर पापा गुस्सा हो गए और मुझे प्यार से चुप करवाया और कहा- आज आने दो दोनों को, उनकी आज खैर नहीं..

आज पहली बार पापा ने मुझसे प्यार से बात की थी, मैं खाना बनाने चली गई।

पापा अपने कमरे में चले गए, उन्होंने कपड़े बदले.. तब तक खाना भी तैयार हो गया था।

आज पापा ने मेरे साथ बैठ कर खाना खाया और मुझे भी अपने हाथ से खाना खिलाया।

खाने के बाद मैं बर्तन धोकर अपने कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट कर रोने लगी। मुझे माँ की बहुत याद आ रही थी, तभी पापा मेरे कमरे में आ गए।

पापा- अरे रानी.. बेटी रो क्यों रही है? उन दोनों का फ़ोन आया था किसी दोस्त की शादी में गए हैं.. कल शाम तक वापस आएँगे, अब फ़ोन पर तो उनको क्या कहता, कल आने दो उनको अच्छा सबक सिखाऊँगा.. तू मेरे कमरे में आ.. कुछ बात पूछनी है।

इतना बोलकर पापा चले गए, मैंने आँसू पौंछे और उनके पीछे चली गई।

पापा- आओ.. यहाँ बैठो.. मेरी रानी बेटी तू रो रही है.. क्या बहुत दर्द हो रहा है? मुझे ठीक से बता हुआ क्या था?

रानी- पापा अब मैं कैसे बताऊँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।

पापा ने बहुत ज़िद की, तब मैंने उनको बताना शुरू किया कि बात कैसे शुरू हुई और मेरी गाण्ड तक कैसे पहुँची। पापा मेरे एकदम करीब चिपक कर बैठे थे, उन्होंने शराब पी हुई थी, उसकी बदबू आ रही थी।

मेरी बात को सुनते-सुनते लुँगी के ऊपर से वो अपना लौड़ा मसल रहे थे और एक हाथ से मेरी पीठ सहला रहे थे।
‘अच्छा ये बात है… कितने कमीने हैं दोनों.. अच्छा ये बता.. यहाँ ज़ोर से दबाया क्या विजय ने?’ मेरे मम्मों को सहलाते हुए पापा ने पूछा।

मेरी तो हालत खराब हो गई.. उनका छूना मेरे लिए ऐसा था जैसे किसी ने जलते हुए अंगारे मेरे मम्मों पर रख दिए हों।

रानी- पापा ये आप क्या कर रहे हो?

पापा- अरे मैं तो पूछ रहा हूँ.. अब तू ठीक से बताएगी तब ही तो पता चलेगा ना.. अब जो पूछूँ.. चुपचाप बता समझी…

इस बार पापा के तेवर एकदम बदल गए थे, उनकी आँखों में गुस्सा आ गया था और पापा का गुस्सा मैं खूब जानती थी कि अगर वो मारने पर आ गए तो हालत खराब कर देंगे।

रानी- हाँ.. पापा यहाँ ज़ोर से दबाया था, अभी भी दर्द हो रहा है।

पापा ने उनको देखने के बहाने से टी-शर्ट ऊपर कर दी, ब्रा तो थी नहीं, उनको मेरे मम्मों के दीदार हो गए।

पापा- अरे अरे.. कुत्तों ने कैसे ज़ोर से दबाए हैं तेरे छोटे-छोटे चूचे.. देखो तो कैसे लाल निशान पड़ गए हैं।

मेरे सौतेला पिता अपनी औकात दिखा रहे थे, मेरे मम्मों को हल्के-हल्के सहला रहे थे। अब पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था और उन्होंने अपनी ऊँगली चूत पर घुमा कर पूछा।

पापा- रानी.. उन दोनों ने पीछे से ही मारी.. या यहाँ भी कोई छेड़छाड़ की?

मैं एकदम कसमसा गई थी और मैंने ‘ना’ मैं सिर हिलाया।

पापा – चलो अच्छा है.. तेरी सील नहीं टूटी वरना मेरा बड़ा नुकसान हो जाता.. बेटी ये पजामा निकाल तो देखूँ तेरी गाण्ड का क्या हाल किया दोनों ने।

पापा की बात सुनकर मेरी अच्छी तरह समझ में आ गया कि ये कुत्ता मेरा बाप नहीं हवस का पुजारी है। उन दो हरामियों ने तो मेरी गाण्ड मारी थी.. ये मादरचोद मेरे चूत को फाड़ने वाला है।

रानी- नहीं पापा.. रहने दो अब दर्द कम है, मुझे जाने दो नींद आ रही है।

पापा- मैंने कहा ना.. दिखाओ कहीं कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो..? चल खड़ी हो जा तुझे शर्म आ रही है तो मैं खुद देख लूँगा।

मैं कर भी क्या सकती थी सो चुपचाप खड़ी हो गई। पापा ने मेरा पजामा नीचे सरकाया और मेरी गोल गाण्ड पर हाथ फेरने लगे।

पापा- आह ह.. क्या कोमल गाण्ड है तेरी.. कमीनों ने कैसे मार कर लाल कर दी है.. देखो सूजन भी आ रही है.. तू पूरे कपड़े निकाल कर लेट जा.. तुझे मालिश की जरूरत है.. तभी तेरा दर्द जाएगा।

मैं ‘ना’ भी करती तो भी पापा नहीं मानते, तो मैंने सोचा अब जो होगा देखा जाएगा.. इसी बहाने पापा मुझे प्यार से तो पेश आएँगे।

मैं चुपचाप नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।
पापा ने पास रखी तेल की बोतल ले ली और मेरी गाण्ड पर मालिश करने लगे।
अपने हाथ चलाते-चलाते वो मेरी चूत पर भी ऊँगली घुमा देते।

वहाँ हल्की-हल्की झांटें थीं जो एकदम रुई की तरह मुलायम थीं।

रानी- आहह.. ककककक पापा उह.. गुदगुदी सी हो रही है।

पापा- अरे रानी बेटी.. ये तो शुरूआत है.. आगे देखना तुझे कितना सुकून मिलेगा.. मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इस उम्र में आकर तेरी जैसी कच्ची कली की मालिश करने का मौका मिलेगा.. रानी अगर तू मेरी बात इसी तरह मानती रहेगी ना.. तो तेरे सारे दु:ख दूर हो जाएँगे.. तुझे मैं सच्ची की रानी बना कर रखूँगा.. मानेगी ना मेरी बात?

रानी- हाँ.. पापा आपका प्यार पाने के लिए मैं आपकी हर बात मानूँगी.. मगर पापा ये गलत है.. मैं आपकी बेटी हूँ।

पापा- अरे कहाँ की बेटी.. तेरी माँ तुझे साथ लाई थी यहाँ और ऐसी कमसिन कली सामने हो तो कौन रिश्ते देखता है.. अगर तू मेरी सग़ी बेटी भी होती ना.. तो भी मैं तुझे नहीं छोड़ता.. भला हो उन दोनों का जो उन्होंने तेरी गाण्ड मार कर मेरा रास्ता आसान कर दिया, वरना मैंने तो ये कभी सोचा ही नहीं था।

रानी- ठीक है.. पापा जैसा आपको अच्छा लगे.. अब मैं कुछ नहीं बोलूँगी।

पापा- ये हुई ना बात.. चल अब सीधी हो जा आज बरसों बाद दोबारा सुहागरात मनाऊँगा तेरे साथ.. अब तू मेरी बीवी बनकर इस घर में राज करेगी.. आज से तेरे दु:ख के दिन ख़त्म हो गए हैं।

अब मुझे किसी बात का डर नहीं था क्योंकि अगर मैं मना भी करती तो भी पापा मुझे छोड़ते नहीं, तो क्यों ना उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला कर कम से कम अपनी आगे की जिंदगी तो ठीक करूँ।

मैं सीधी होकर लेट गई, पापा भी एकदम नंगे हो गए, उनका लौड़ा किसी काले नाग की तरह फुंफकार मार रहा था वो करीब कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही होगा और मोटा इतना कि मेरी हथेली में भी ना समा पाए। रानी- पापा आपका तो अजय और विजय से भी बड़ा है, उन्होंने ही इतना दर्द दिया और आप तो मेरी जान ही निकाल दोगे।

पापा- अरे रानी… बड़ा कैसे नहीं होगा.. मैं उनका बाप हूँ और तू डर मत.. वो तो नए खिलाड़ी थे, उनको क्या पता चुदाई क्या होती है.. तू बस देखती जा.. मैं तुझे कैसे सात आसमानों की सैर करवाता हूँ। वो दोनों गधे थे जो तेरी जैसी कच्ची कली की चूत का स्वाद चखने की बजाए गाण्ड से खुश हो गए। अब तुझे ऐसा चूसूंगा कि तू खुद मुझसे कहेगी कि मेरे राजा जल्दी से लौड़ा चूत में पेल दो..

रानी- हा हा हा हा.. पापा मैं आपको राजा बोलूँगी.. हा हा हा.. मैं रानी.. आप राजा.. मज़ा आएगा…

मेरी बात सुनकर पापा हँसने लगे और मेरे ऊपर आ गए, मेरे होंठ चूसने लगे।

मैं भी उनका साथ देने लगी.. बड़ा मज़ा आ रहा था।

पापा अपनी जीभ मेरे मुँह में दे रहे थे मैं उसको चूस रही थी। पापा मेरे छोटे-छोटे अमरूदों जैसे मम्मों को भी हल्के-हल्के दबा रहे थे, मुझे पता नहीं क्या हो रहा था।

लेकिन ‘हाँ’ इतना जरूर कहूँगी कि मज़ा बहुत आ रहा था।

पापा अब मेरे चूचुकों को चूस रहे थे और अपना हाथ मेरी चूत पर घुमा रहे थे। मेरे जिस्म में न जाने कहाँ से इतनी गर्मी आ गई थी कि मेरी चूत आग की भट्टी की तरह जलने लगी थी।

रानी- आह उईईइ.. उफ़ ककक.. सस्स आह.. पापा आहह.. मज़ा आह रहा है.. आराम से पापा आह.. काटो मत दु:खता है आहह…

पापा- अरे मेरी रानी.. अब पापा नहीं.. राजा बोलो और जितने गंदे शब्द आते हैं.. सब बोलो.. उससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा।

रानी- आहह उईईइ मुझे नहीं समझ आहआह आह रहा है.. क्या बोल रहे हो?

पापा- सीधी सी तो बात है.. तुम मुझे गाली दो.. चूत और लंड की बात करो.. बस जो भी तुम्हें समझ आए.. आह्ह.. जैसे उहह साली रंडी आह्ह.. क्या मस्त दूध हैं तेरे.. आह आज तो तेरी चूत को भोसड़ा बना दूँगा.. आहह…

इतना बोलकर पापा मेरी चूत चाटने लगे.. अब तो मेरा मज़ा दुगुना हो गया था.. मेरी आँखें अपने आप बन्द होने लगी थीं।

रानी- आहह ससस्स उफ़फ्फ़.. मेरे राजा आह.. मज़ा आह रहा है.. आह चाटो मेरी चूत को आह.. और ज़ोर से चाटो उफ़ आह…

पापा- ये लो मेरी रानी बिटिया.. क्यों मज़ा आया ना.. गाली निकाल साली.. और मज़ा आएगा…

रानी- आहह.. अब मज़ा आया तू एक नम्बर का कुत्ता है आह.. हरामी अपनी ही बेटी की चूत चाट रहा है.. आहह पापा आह.. मेरी चूत में कुछ हो रहा है आहह…

पापा- हा हा हा.. ये हुई ना बात.. अब तू झड़ने के करीब है.. झड़ जा बेटी आज तेरा झड़ने का पहला मौका है, भर दे मेरा मुँह अपने रस से.. आह.. क्या मजेदार माल है.. बरसों बाद मेरी जीभ को चूत रस चखने को मिलेगा।

पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा दी थी और जीभ से मुझे चोद रहे थे।

दोस्तो, क्या बताऊँ वो पल ऐसा था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मेरी चूत का फव्वारा फूट पड़ा।
मैं गाण्ड उठा-उठा कर झड़ने लगी और पापा ने मेरा सारा रस पी लिया।
मेरी आँखें बन्द थीं मैं दो मिनट तक झड़ती रही और फिर शान्त पड़ गई.. मेरा बदन ठंडा पड़ गया।

पापा- उफ़ कितना गर्म और स्वादिस्ट रस था.. मज़ा आ.. गया.. क्यों मेरी जान तुमको मज़ा आया ना?

रानी- आहह पापा उफ़फ्फ़.. क्या बताऊँ.. आह.. पता नहीं क्या हुआ.. मेरा बदन एकदम हल्का हो गया.. बहुत मज़ा आया आहह…

पापा- यह तो शुरूआत है.. रानी अब देख आगे क्या होता है.. ले मेरे लौड़े को चूस.. इसमें भी बहुत मज़ा आएगा।

पहले तो मैं थोड़ी झिझकी मगर जैसे ही पापा का सुपारा जीभ से चाटा.. उस पर पानी की बूँदें थीं जो अजीब से स्वाद की थीं, मगर उसको चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था.. अब मैं खुल कर पापा का लौड़ा चूसने लगी थी।

अब तो पापा पूरा लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस कर झटके मार रहे थे।

दस मिनट तक उनका लौड़ा चूसने के बाद मेरी चूत में दोबारा खुजली होने लगी और मैं अपने हाथ से चूत मसलने लगी।

पापा- अच्छा.. तो मेरी रानी बिटिया दोबारा गर्म हो गई.. क्यों लौड़े का स्वाद कैसा लगा?

रानी- उफ़.. पापा बहुत मज़ा आ रहा है.. आपका लंड चूसने में.. पर क्या करूँ मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।

पापा- अच्छा ये बात है.. चल घूम कर मेरे ऊपर आजा, इस तरह तू मेरा लौड़ा चूसना.. मैं तेरी चूत चाटूँगा ताकि दोनों को बराबर मज़ा मिले।

रानी- ओह्ह वाह.. मज़ा आएगा.. ये आइडिया अच्छा है.. पापा आप तो बहुत दिमाग़ वाले हो.. अच्छा एक बात तो बताओ.. आप ये लौड़ा मेरी चूत में कब डालोगे.. विजय ने तो इतना वक्त लिया ही नहीं था.. बस सीधा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया था।

पापा- हा हा हा.. अरे इसमें दिमाग़ की क्या बात है.. तू अभी बच्ची है.. तुझे नहीं पता इसे 69 का आसन कहते हैं और लौड़ा भी डालूँगा.. तेरे जैसी कच्ची कली को पहले पूरा गर्म करना जरूरी है ताकि तू लौड़े को सहन कर सके समझी.. विजय तो खुद बच्चा है उसे क्या पता लौड़ा कब और कैसे डालते हैं?

हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए.. अब मैं पापा के ऊपर लेट कर उनका लौड़ा चूस रही थी और पापा कभी जीभ से तो कभी ऊँगली से मेरी चूत को चोद रहे थे या यूँ कहो कि मेरी कसी चूत को पापा ऊँगली से खोल रहे थे।

करीब दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। अब मैंने पापा के लौड़े को बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया था। मेरा बदन एकदम अंगार उगलने लगा था, मेरी चूत रिसने लगी थी और चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी।

तभी पापा ने मेरी चूत को चाटना बन्द कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे उतार दिया।

रानी- उफ़फ्फ़ पापा प्लीज़ आह.. बीच में क्यों छोड़ दिया.. आह.. अभी तो मज़ा आ रहा था।

पापा- मेरी जान.. अब सही वक्त है लौड़ा तेरी चूत में घुसेड़ने का.. अब तू इसको लेने के लायक हो गई है.. तेरी चूत एकदम रसीली है… और मेरा लौड़ा भी तेरे थूक से सना हुआ है.. चल अब पैरों को मोड़ ले और ले ये तकिया कमर के नीचे रख ले ताकि तेरी चूत का उभार ऊपर आ जाए.. आज तुझे कली से फूल बनाने का वक्त आ गया है।

पापा ने एक हाथ से मेरी चूत को खोला और लौड़ा मेरी चूत पर सैट किया।

पापा- रानी.. अब मैं लौड़ा पेल रहा हूँ.. बस तू अपने दांत भींच लेना.. शुरू में दर्द होगा, उसके बाद हम रोज चुदाई करेंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…

रानी- आहह आहह आहह.. उफ़फ्फ़ पापा डाल दो.. अब जो होगा, देखा जाएगा.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आहअहह…

पापा ने अपने लौड़े की टोपी चूत में फँसाई और धीरे से आगे को धक्का मारा, कोई 2 इन्च लौड़ा मेरी चूत में फँस गया।
मुझे बहुत दर्द हुआ मगर मेरे ऊपर मस्ती सवार थी, मैंने दाँत भींच लिए।
पापा ने कमर को पीछे किया और एक जोरदार झटका मारा, अबकी बार आधा लौड़ा मेरी सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

अबकी बार दर्द की इंतहा हो गई और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकली, जो शायद बाहर तक किसी ना किसी ने जरूर सुनी होगी। पापा ने जल्दी से अपने होंठ मेरे मुँह पर रख दिए और मेरी दूसरी चीख उनके मुँह से दब कर रह गई।
करीब 5 मिनट तक पापा बिना हिले वैसे ही पड़े रहे। अब मुझे भी दर्द कम हो गया था और मेरा शरीर ढीला पड़ गया था, तब पापा ने अपना मुँह हटाया।

रानी- आहह पापा ऊउउहह बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ बस अब निकाल लो… आह मैं मर जाऊँगी ऊउउहह…
पापा- अरे कुछ नहीं होगा.. मेरा जान ये तो आज तेरा कौमार्य भंग हुआ है.. इसलिए इतना दर्द हुआ.. बस आज बर्दाश्त कर ले.. फिर तू खुद मेरे लौड़े पर बैठ कर उछल-उछल कर चुदेगी.. अब जितना लौड़ा अन्दर गया है उसी को आगे-पीछे करूँगा.. थोड़ा दर्द होगा और कुछ नहीं.. जब दर्द कम हो जाए तो बता देना, एक ही बार में पूरा हथियार घुसेड़ दूँगा.. उसके बाद मज़ा ही मज़ा है।

मैं मुँह से कुछ नहीं बोली बस ‘हाँ’ में सर हिला दिया। अब पापा अपने लौड़े को आगे-पीछे करने लगे मुझे दर्द हो रहा था, पर मैं दाँत भींचे पड़ी रही।
कहानी जारी है।

तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ - Mujhe jor se chodo

तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ - Mujhe jor se chodo,  लंड के कारनामे, Apni Chut Ke Liye Mota Lund Pa Liya, चूत ने लंड निचोड़ दिया, मेरे लंड को चुत की कमी नहीं, Hindi Sex Stories, Hindi Porn Stories, मोटा लंड अपनी चूत और गांड की गहराइयो तक.

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।

मम्मी ने बेड से उठते हुए कहा- ये कुछ ज्यादा ही हो गया।
ऋतु ने उनसे पूछा- क्या आपको ये सब अच्छा नहीं लगा मम्मी?
मम्मी ने धीरे से कहा- हम्म्म्म हाँ अच्छा तो लगा… पर ये सब एकदम से हुआ… मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.
ऋतु ने उनसे सवाल किया- पर हमें तो बड़ा मजा आया, क्या आपको मेरी चूत को चूसना अच्छा नहीं लगा… मेरी तो इतने दिनों की इच्छा पूरी हो गयी पापा के लंड से अपनी चूत मरवा कर… कितना मजा आया उनका मोटा लंड लेने में… क्या आपको नहीं आया भैया का लंड अपनी चूत में लेने में… बोलो??

सब की नजरें मम्मी की तरफ उठ गयी।
ऋतु ने पापा से पूछा- और पापा क्या आपको मेरी चूत पसंद नहीं आई??
उन दोनों को चुप देख कर चाची ने कहा- अरे… अब आप दोनों ऐसे क्यों शर्मा रहे हैं… आप दोनों को अपने बच्चों के साथ सेक्स करने में मजा आया है तो इस बात को कबूल करने में इतना झिझक क्यों रहे हो?? हमने भी तो अपनी बेटी नेहा को इस खेल में शामिल किया है और उसकी चूत चूसने में मुझे तो बड़ा मजा आता है, उसके पापा भी कल से अपनी बेटी की कसी हुई चूत की बार बार तारीफ़ कर रहे हैं.
मम्मी ने कहा- चलो ठीक है… अब हमें अपने कमरे में चलना चाहिए।

चाची ने कहा- अरे भाभी… मूड मत खराब करो… अभी तो मजा आना शुरू हुआ है… अभी तो पूरी रात पड़ी है।
मैंने मन ही मन सोचा- साली, इस चाची के बदन में आग लगी है, पूरी रात चुदवाने की तैयारी से आई थी हरामजादी।
मम्मी ने कहा- नहीं… अब और नहीं… चलो तुम दोनों अब चुपचाप सो जाओ… और आरती अजय… प्लीज… आप भी चलो यहाँ से!

हम सबने उनकी बात को मानना उचित समझा और अपने बेड पर जाकर रजाई के अन्दर घुस गए।

चाची- चलो ठीक है… तुम कहती हो तो चलते हैं। चलो अजय… अपने रूम में जाकर हम दोनों ही आपस में चुदाई करते हैं.
और चाची हमारे पास आकर हमें गुड नाईट बोली और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल दिया और बोली- काफी मजा आया… कल मिलते हैं।

सब के जाने के बाद हम तीनों अपने बेड पर नंगे रजाई में बैठे हंस रहे थे।
ऋतु- मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि हमने अपने मम्मी पापा के साथ भी चुदाई की. और इतना सब होने के बाद भी उन लोगों ने हमें फिर से इस कमरे में छोड़ दिया… हा हा हा!

नेहा ने अपनी चूत को मेरी टांगों पर दबाते हुए कहा- और मैं सच कहूं तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी काफी मजा आया होगा। वो अभी खुल कर नहीं बता रहे हैं पर तुम दोनों से सेक्स करके वो भी कम खुश नहीं थे।

ऋतु ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर कहा- तो तुम्हारा ये लंड अभी भी कुछ कर दिखाने के मूड में है क्या?
मैंने उन्हें उकसाया- मेरे लंड के कारनामे देखना चाहते हो तो उसे तैयार करो और फिर मैं तुम दोनों को दिखाता हूँ की चुदाई क्या होती है।
ऋतु ने अपनी आँखें मटकाते हुए नेहा की तरफ देखा- ओह… माय माय… लगता है किसी को अपने लंड पर कुछ ज्यादा ही गुरुर हो गया है…
और फिर वो दोनों एक साथ बोली- लगता है गुरुर तोड़ना पड़ेगा… हा हा हा…

उसके बाद जो चुदाई का खेल शुरू हुआ तो उनकी चूत के परखचे ही उड़ गए। उस रात मैंने ऋतु और नेहा की कितनी बार चुदाई की… मुझे खुद ही नहीं मालूम और वो दोनों बेचारी अपनी सूजी हुई चूत लेकर नंगी ही मुझ से लिपट कर सो गयी।

उधर अपने कमरे में पहुंचकर चाची ने शीशे वाली जगह पर ही खड़े होकर दूसरे कमरे में अपनी बेटी और अपनी भतीजी को मुझसे चुदते हुए देखकर चाचू से लगभग तीन या चार बार अपनी चूत मरवाई।

अगली सुबह मैंने अपने लंड के चारो तरफ गीलेपन का एहसास पाया, कोई मेरा लंड चूस रहा था। मैंने अपने दोनों तरफ देखा ऋतु और नेहा दोनों अपने मोटे मोटे चुचे मुझ में घुसेड़े आराम से सो रही थी।
मैंने नीचे देखा तो पाया कि आरती चाची मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही है। मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो मुस्कुरा दी और मुझे गुड मोर्निंग बोलकर फिर से मेरा लंड चाटने लगी।

मेरे शरीर की हलचल पाकर ऋतु भी जाग गयी और जब उसने देखा कि चाची मेरे लंड से ब्रुश कर रही है तो उसकी चूत भी सुबह की खुमारी में रस से सराबोर हो गयी। उसने थोड़ी जगह बना कर चाची को बेड पर आने को कहा।
चाची ऊपर आई और अपनी टांगें ऋतु के चेहरे के ऊपर करके वापिस मेरा लंड चाटने लगी।

नेहा भी अब जाग चुकी थी, अपनी माँ को सुबह सुबह नंगी लंड चूसते देख कर उसके बदन में भी आग लग गयी और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने अपने हाथ नेहा के उभारों पर रख दिए और उन्हें दबा दबाकर उन्हें और बड़ा करने लगा।

नेहा के चुचों के बारे में एक बात कहना चाहता हूँ, वो बड़े ही मुलायम है पर उसके एरोला और निप्पल उतने ही कठोर, वो किसी कील की तरह मेरे हाथों में चुभ रहे थे। मैंने उन्हें और जोर से दबाना शुरू कर दिया और उतनी ही बेदर्दी से उसके नाजुक होंठों को भी चूसना जारी रखा।

तभी दरवाजा खुला और हमारे पापा अन्दर आ गए। उन्होंने जब देखा कि अन्दर सुबह की चुदाई की तैयारी चल रही है तो वो चुपचाप अन्दर आये और अपने कपड़े उतार कर वो भी ऊपर चढ़ गए। चाची की चूत तो वो कई बार मार चुके थे और कल रात उन्होंने ऋतु की भी जम कर चुदाई करी थी।

इसलिए आज उनकी नजर नेहा के कमसिन जिस्म पर थी। नेहा जो मेरे मुंह में घुसी हुई कुछ ढूँढ रही थी, उसकी टांगें चौड़ी करके पापा ने अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे।
नेहा ने जब अपनी चूत पर अपने ताऊ जी की गर्म जीभ को पाया तो उसकी रस बरसाती चूत से एक कंपकपी सी छूट गयी- आआ आआआ आअह्ह्ह्ह… म्म्मम्म म्म… हाआआ अन्न्न… ऐसे ही… जोर से…
और वो पापा को और जोर से अपनी चूत को चूसने के लिए प्रोत्साहित करने लगी।

जवान लड़की की चूत पाकर पापा भी दुगने जोश से अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए नेहा की चूत की तलाशी लेने लगे।

वहां अजय चाचू की जब नींद खुली तो चाची को बगल में ना पाकर उन्होंने भाग कर शीशे वाली जगह देखा और वहां का नजारा देखकर वो नंगे ही हमारे कमरे में दौड़ कर चले आये। उनकी पत्नी मेरा लंड चूस रही थी और उनके बड़े भाई उनकी बेटी की चूत चाट रहे थे और उनकी पत्नी की चूत को उनकी भतीजी साफ़ कर रही थी।

कमरे में अब सिर्फ ऋतु की चूत ही बची थी जो खाली थी। चाचू झट से उसकी तरफ चल पड़े और वहां पहुंच कर अपनी लम्बी जीभ का इस्तेमाल करके ऋतु की चूत और गांड बारी बारी से चाटने लगे, पूरे कमरे में सिसकारियां गूंज रही थी।

पापा का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, वो नेहा को बेड पर लिटा कर खुद जमीन पर उठ खड़े हुए और नेहा की एक टांग को हवा में उठा कर अपना लंड उसकी छोटी सी चूत पर टिका दिया। उनका टोपा काफी बड़ा था, नेहा की छोटी सी चूत के सिरे पर वो फंस सा रहा था।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया तो नेहा दर्द से बिलबिला उठी- आआ आआआ आआआह्ह्ह्ह… धीरे डालो… बड़े पापा… धीरे…
लंड का टोपा अन्दर जाते ही बाकी का काम उसकी चूत की चिकनाई ने कर दिया। पापा का लौड़ा उस पतली सुरंग में फिसलता चला गया.
“अयीईईई ईईईई ईईई… मर… गयी.. अह..अह.. अह..अह.. अह.. अह…”
और पापा ने तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।

नेहा की छाती मेरे सीने पर रखी हुई थी, नेहा के मोटे चूचे मेरे सीने से टकरा रहे थे और उसके खुले मुंह से निकलती लार मेरी छाती पर टपक रही थी।

चाची भी उठ खड़ी हुई और मेरे दोनों तरफ टांगें करके अपनी चूत को मेरे लंड पर टिकाया और मेरी टाँगों पर बैठ गयी। अब उनके मोटे तरबूज भी मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे। मैंने हाथ बढ़ा कर उन्हें भी सहलाना शुरू कर दिया। चाची थोड़ा और आगे हुई और मेरे सीने पर लेटी हुई अपनी बेटी नेहा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी।

ऋतु जो अब तक अपनी चूत चटवा कर काफी गर्म हो चुकी थी।, उसने चाचू के मुंह से बड़ी मुश्किल से अपनी चूत छुड़वाई और उनके लम्बे लंड को एक किस करके उनके ऊपर चढ़ बैठी। बाकी काम चाचू ने कर दिया अपना खड़ा हुआ लंड उसकी रस टपकाती चूत में डाल कर।

अब हमारे कमरे में तीन चुदाई चल रही थी और सभी बड़े जोरो से आवाजें निकाल निकाल कर चुदाई कर रहे थे।

ऋतु चिल्लाई- आआआ आआआह्ह्ह… चाअचूऊऊऊऊऊ… चोदो मुझे… और जोर से… अह…
नेहा भी बोली- बड़े पापा… डालो अन्दर तक अपना मोटा लंड… आआआआह्ह… और तेज… चोदो… अपनी नेहा को बड़े पापा।
चाची भी कहाँ पीछे रहने वाली थी- आआआआअह्ह… रोहण… डाल बेटा… अपनी चाची की चूत कैसी लगी… बता ना?

मैंने चाची की आँखों में देखा और कहा- भेनचोद… कुतिया… कितने लोगों से मरवा चुकी है… तेरी माँ की चूत… साली… कमीनी.. बता मुझे?
चाची ने उखड़ती साँसों से कहा- बड़े लंड लिए है अपनी चूत में… पर अपनों का लेने में जो मजा है वो कहीं नहीं है… चोदो मुझे… दुनिया की हर चाची को तेरे जैसा भतीजा मिले जिसका इतना मोटा लंड हो तो मजा ही आ जाए… बिना पूछे डाल दिया कर अपना लंड मेरी चूत में कभी भी… कहीं भी… आआआ आआआह्ह्ह्ह…
लगता है चाची मेरे लंड से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो गयी थी।
मैंने उनके होर्न अपने हाथों में पकड़े और अपने इंजिन की स्पीड बढ़ा दी।

तभी दरवाजा दुबारा खुला और मम्मी वहां खड़ी थी, मम्मी ने अन्दर आकर पूछा- तुम लोगों को कोई शर्म है या नहीं?
मैंने उनसे कहा- हाय मॉम… गुड मोर्निंग!
मम्मी ने पापा की तरफ देखा और कहा- आप तो कम से कम इन्हें रोकते, पर आप तो खुद ही यहाँ लगे हैं अपनी भतीजी की चूत मारने में!
पापा ने जवाब दिया- पूर्णिमा, अब ये लोग हमारे कहने से रुकने वाले तो हैं नहीं और कल जब सब कुछ हो ही चुका है तो आज इन्कार करने से क्या फायदा… आओ तुम भी आ जाओ ऊपर और खा जाओ घर के लौड़े!

मैंने अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराते हुए कहा- हाँ मम्मी, आप यहाँ आओ, मेरे मुंह के ऊपर मैं आपकी चूत चूसना चाहता हूँ… बड़ी प्यास लगी है मुझे…
चाचू ने भी जोर दिया- हाँ भाभी… आ जाओ ऊपर!

मम्मी ने सभी की बात सुनी और अपना सर हिलाते हुए उन्होंने अपनी हार मान ली और उन्होंने अपना गाउन वहीं जमीन पर गिरा दिया और नंगी ऊपर बेड पर चढ़ गयी और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गई।
मेरी लम्बी जीभ उनकी चूत का इन्तजार कर रही थी।
जैसे जैसे मम्मी नीचे हुई, मेरी पैनी जीभ उनकी चूत में उतरती चली गयी.
“आआ आआआ आअह्ह्ह्ह…” मम्मी ने एक लम्बी सिसकारी मारी और मैंने अपनी जीभ से उनकी क्लिट को दबाना और चुबलाना शुरू कर दिया।

मम्मी का मुंह मेरे लंड की तरफ था जहाँ चाची मेरे लंड की सवारी करने में लगी हुई थी। चाची ने आगे बढ़ कर मम्मी के मोटे चूचों को पकड़ा और उन्हें फ्रेंच किस करने लगी। मम्मी अपनी चूत मेरे मुंह पर बड़ी तेजी से रगड़ रही थी।
मैं जिस तरह से मम्मी की चूत चाट और चबा रहा था, उन्हें काफी मजा आ रहा था। आज अपने बीच तीनों बच्चो को शामिल करके सेक्स करने का मजा लेने में लगे थे सभी बड़े लोग।

मम्मी ने अपनी दायीं तरफ देखा जहाँ उनके पति अपनी भतीजी की चूत का तिया पांचा करने में लगे थे और बायीं तरफ उनकी लाड़ली बेटी अपने चाचू के लंड को आँखें बंद किये मजे से उछल उछल कर ले रही थी और उनके नीचे लेटा उनका बेटा उनकी चूत चाटने के साथ साथ अपनी चाची को भी चोद रहा था.
इतनी कामुकता फैली है इस छोटे से कमरे में।

तभी चाची ने एक तेज आवाज करते हुए झड़ना शुरू कर दिया और वो निढाल होकर नीचे लुढ़क गयी। मेरा लंड उनकी गीली चूत से निकल कर तन कर खड़ा हुआ था। मम्मी ने जब अपने सामने अपने बेटे का चमकता हुआ लंड देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया।
मम्मी ने नीचे झुक कर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूस चूस कर साफ़ करने लगी। मैंने पलट कर मम्मी को नीचे किया और घूम कर उनकी चूत की तरफ आया और अपना साफ़ सुथरा लंड उनकी फूली हुई चूत पर टिका दिया। मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा- आई लव यू मॉम!
और अपना लंड उनकी लार टपकाती चूत में उतार दिया।

मम्मी ने लम्बी सिसकारी भरी- आआ आआआ आह्ह्ह्ह… म्म्म्म म्म…
मम्मी ने मेरा लंड पूरा निगल लिया और मेरी कमर पर अपनी टांगों का कसाव बना कर मुझे बाँध लिया और बोली- बस थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहो… मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ।

मैं मम्मी की छाती पर लेटा रहा और उनके अधखुले होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। धीरे धीरे उन्होंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैंने उनकी टांगों का जाल खोला और उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उनकी टांगों को और भी चौड़ा कर दिया और लगा धक्के पे धक्के मारने अपनी माँ की चूत में।

मम्मी के मुंह से बरबस ही बोल फूट पड़े- आआआ आअह्ह्ह… चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल अपना लंड… मादरचोद… चोद मुझे… बहन चोद… चोद मुझे… आआआ आआह्ह्ह… डाल अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत में… आआह… ह्ह्ह्हहाहा… आहा… ह्ह्ह.. हा.. अह्ह्ह्ह ह्ह…
मैंने भी मम्मी की चूत मारते हुए कहा- ले साली रंडी… बड़ी सती सावित्री बनती है… अपने देवर से चुदवाती है और मुझसे शर्मा रही थी… और अब लंड डाला है तो दुगने मजे ले रही है… कुतिया कहीं की… साली रंडी…

मम्मी ने अपनी गांड उठा कर चुदते हुए कहा- हाँ मैं रंडी हूँ… तेरी रंडी हूँ मैं आज से… चोद मुझे… घर पर जब भी तेरा मन करे चोद देना मुझे… अपने दोस्तों से भी चुदवाना अपनी रंडी माँ को… शाबाश बेटा चोद मुझे!
मम्मी पहले जितना शरमा रही थी उतनी ही खुल गयी थी अब।

पापा ने अपनी भतीजी की कसी चूत जैसी चूत आज तक नहीं मारी थी। नेहा के कसाव के आगे उनके लंड के पसीने छुट गए और उन्होंने अपनी बाल्टी नेहा की चूत में खाली कर दी पर नेहा अभी भी नहीं झड़ी थी।
चाचू के लंड को ऋतु अजीब तरीके से दबा रही थी अपनी चूत से। उन्होंने भी अपनी जवान भतीजी के आगे घुटने टेक दिए और झड़ने लगे उसकी चूत के अन्दर।

ऋतु भी बिना झड़े रह गयी, उसने नेहा को इशारा किया और उसे अपने पास बुला कर उसकी टांगों के बीच अपनी टांगें फंसा कर अपनी चूत से उसकी चूत को रगड़ने लगी।
दोनों की चूत जल रही थी और जल्दी ही उन्होंने एक दूसरे की चूत को अपने रस से नहलाना शुरू कर दिया- आआआ आआह्ह्ह… येस्स स्सस्स… बेबी… ओह… फक्क… आआआह्ह्ह!

इधर मम्मी भी मेरे लंड की सवारी को ज्यादा नहीं कर पायी और उन्होंने एक दो झटके मारे और झड़ने लगी- आआस्स आआअह्ह्ह्ह… मैं तो गयी… आआअह्ह्ह… मजा आआअ… गयाआआ… आआआ आआ आआअह्ह्ह्ह!
मैंने मम्मी की चूत की गर्मी महसूस करी और मैंने भी अपना रस अपनी जननी की चूत में उतार दिया।

चारों तरफ वीर्य और चूत के रस की गंध फैली हुई थी. सबने एक दूसरे को चूमना और सहलाना शुरु किया और बारी बारी से सब की चूत और लंड साफ़ किये और फिर सभी उठ खड़े हुए और फिर सब लोग तैयार होकर नाश्ता करने चले गए।

सुबह नाश्ता करने के बाद हम सब लोग घूमने निकल गए। आज हम पूरे परिवार के साथ घूमने निकले थे तो बड़े लोगो के साथ खुले में चुदाई नहीं कर सकते थे। कुछ देर बाद हम वापस अपने केबिन में आ गए। चाचा चाची, नेहा के साथ अपने रूम में चले गए और मैं, ऋतु और मम्मी पापा के साथ उनके रूम में चले गए।

आते ही ऋतु हरकत में आई और उसने पापा का लंड पकड़ा और उन्हें लंड से घसीटते हुए बेड पर जाकर लेट गयी और उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। पापा का खड़ा हुआ लंड सीधा ऋतु की फड़कती हुई चूत में घुस गया और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर में लपेट कर उसे पूरा अन्दर ले लिया और सिसकारने लगी- आआ आआह आअह्ह… पाआअपाआअ… म्मम्मम्मम!

मम्मी ने भी मुझे बेड पर धक्का दिया और अपनी चूत को मेरे लंड पर टिका कर नीचे बैठ गयी और मेरा पूरा लंड हड़प कर गयी अपनी चूत में!
“उयीईईई ईईईईई… अह्ह्ह- उनके मुंह से एक लम्बी सी सिसकारी निकली।

पापा ने भी चोदते हुए अपने होंठों को ऋतु के होंठों पर रख दिया। पापा के गीले होंठों के स्पर्श से ऋतु का शरीर सिहर रहा था। उसके लरजते हुए होंठों से अजीब अजीब सी आवाजें आ रही थी। अपनी पतली उंगलियाँ वो पापा के घने बालों में घुमा कर उन्हें और उत्तेजित कर रही थी। पापा के होंठ जब उसके खड़े हुए उरोजों तक पहुंचे तो उसकी सिहरन और भी बढ़ गयी, उसके मुंह से अपने आप एक मादक चीख निकल गयी- अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह… पाआआ..पाआ… म्म्म्मम्म…

ऋतु ने अपनी आँखें खोलकर देखा तो पापा अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसके निप्पल के चारों तरफ घुमा रहे थे, उसके कठोर निप्पल और एरोला पर उभरे हुए छोटे छोटे दाने पापा की कठोर जीभ से टकरा कर उसे और भी उत्तेजित कर रहे थे।
ऋतु चाहती थी कि पापा उन्हें और जोर से काटें, बुरी तरह से दबायें। वो अपने साथ उनसे वहशी जैसा बर्ताव करवाना चाहती थी पर पापा तो उसे बड़े प्यार से सहला और चूस रहे थे।

तभी पापा ने उसे जोर से चोदने लगे।
ऋतु चीखी- आआआआह… पपाआआअ… जोर से… चूसो… नाआआआअ.. अपनी बेटी को… हां.. ऐसे… हीईईई… आआआआआह्ह… काटो मेरे निप्पल को दांतों से… आआ आआअह्ह्ह्ह… दबाओ इन्हें अपने हाथों सेईईईईई… आआआआह्ह्ह्ह… चबा डालो… इन्हें ईईए… मत तड़पाओ… ना पपाआआआ… प्लीज…
ऋतु की बातें सुन कर पापा समझ गये कि वो जंगली प्यार चाहती है इसलिए उन्होंने अपनी फूल सी बेटी के जिस्म को जोर से मसलना और दबाना, चूसना और काटना शुरू कर दिया।

मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था। आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे मोटे चुचे मेरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे। मैं उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एड़ियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था।

मम्मी के मुंह में सिसकारियों की झड़ी लगी हुई थी- उफ्फ्फ… ओफ्फ्फ.. ओफ्फ्फ्फ़.. अआः अह अह अह अह अह अहोफ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… फक्क.. मीई… अह्ह्ह्ह्ह… हाआआआन…
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया- आआ आआअह्ह्ह्ह… मैं… गयीईइ… ओह्ह्ह्… गॉड…

मैंने मम्मी को नीचे लिटाया और अपना लंड निकाल कर उनकी दोनों टांगें उठा कर अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया। उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयी। मैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोटी और फूली हुई गांड मारना चाहता था। आज मौका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड पर और एक तेज धक्का मारा।
वो चिल्ला पड़ी- आआआ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआ आआआह्ह्ह्ह…
मॉम की गांड का कसाव सही में लाजवाब था।

मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये। गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था। मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी। मम्मी ने अपनी चूचों को पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिसकारियां सी भरने लगी- आआ आआआ आअह्ह्ह… म्मम्मम्म… ओफ्फ्फ… ओफ्फ्फ… अह्ह्ह्ह… शाबाश बेटा… और तेज करो… हाँ ऐसे ही… आआ आह्ह्ह्ह…
मम्मी अब दोबारा उत्तेजित हो रही थी, मेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी.

और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया- आआआआह्ह… मॉम्म्म… मैं… आआया… आआआआ … आअह्ह्ह…
मम्मी ने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली- आजा… आआआ… मेरे…लाल्ल… आआआअह्ह्ह
और वो भी झड़ने लगी।
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये मेरे लंड को अपनी गांड में लिए लेटी रही।

पापा भी आज काफी खूंखार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतु की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्कों से।
ऋतु तो जैसे भूल ही गयी थी कि वो कहाँ है। अपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी- आआआआआह्ह्ह… पपाआआआ और तेज मार साले… बेटी चोद… मार अपनी बेटी की चूत… आआआह… माआअर… कुत्ते… ओफ्फफ्फ्फ़… अयीईईईई…

वो बड़बड़ा भी रही थी और सिसकारियां भी मार रही थी। जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लपेट ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबा कर और उनके होंठों को अपने होंठों में फंसा कर वो झड़ने लगी।
अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही पापाके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए और वो भी झड़ते हुए ऋतु के नर्म और मुलायम होंठों को काटने लगे… और उसके ऊपर ही ढेर हो गए।

थोड़ी देर बाद हम सभी चाचू कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए। अन्दर अजय चाचू और आरती चाची, नेहा के साथ थ्रीसम कर रहे थे।

अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी आरती चाची की चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल रहे थे और वो चुदक्कड़ आरती चाची तो लंड को देख कर बिफर सी गयी और चाचू के मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी।

नेहा भी अपनी माँ की कमर पर गांड रखकर लेटी हुई थी और अपनी माँ के होंठों और उनके चूचों को चूस रही थी। चाचू भी पीछे से नेहा की चूत और गांड चाट रहे थे।

हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए। मैंने देखा कि चाची ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी। उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था। उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे और उसकी टांगें हवा में थी।

आरती चाची हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोली- आओ भाभी… यहाँ आ जाओ… बड़ा ही मजा आ रहा है… आआ आ आआ आआअह्ह्ह्ह…

हम सभी अभी अभी चुदाई करके आये थे इसलिए थोड़ा थक गए थे। हमने ये बात चाचू को बताई और कहा- आप लोग मजे लो, हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे और फिर शामिल भी हो जायेंगे।
और वो तीनों फिर से अपनी चुदाई में लग गए।

मम्मी, ऋतु और मैं बड़े ही गौर से चाचा को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा भी उन्हें देख कर फिर से ताव में आने लगे थे। चाची के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे।
चाची तो पहले से ही पापा के लंड की दीवानी थी पर आज उसकी चूत में पापा का लंड भी नहीं गया था। इसलिए वो आगे गए और चाची के पास जा कर खड़े हो गए।
आरती चाची ने जब देखा कि उनके जेठ बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रहे है तो उसने पापा पुचकार कर अपने पास बुला लिया और नेहा को उठा कर, पापा को अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल डाल दिया।

पापा ने अपने दांतों से चाची के दाने को चूसना शुरू कर दिया… नीचे से चाचा का लंड और ऊपर से अपने दाने पर जेठ के होंठों का दबाव पाकर आरती चाची लंड पर नाचने सी लगी। पापा तो जैसे चाची के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे। वो अपने छोटे भाई को उसकी पत्नी की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए।

चाची ने जब देखा कि मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा, मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी। उसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर पापा का लंड पकड़ लिया। फिर चाची ने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पूरे शवाब पर आ गया।

चाचू ने जब देखा कि पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने चाची की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले- भैय्या आप आ जाओ… आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत!
पापा ने कहा- अरे नहीं अजय… ऐसे कैसे… तुम एक काम करो… तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मारूँगा।

चाची भी खुशी खुशी यह मान गयी। पापा का लण्ड बिल्कुल सूखा था तो उन्होंने चाची से कहा- तुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ, वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से तुम्हारी चूत में डाल दूंगा जिससे मेरा लौड़ा चिकना हो जाए।
चाची ने उनकी बात समझते हुए हाँ बोल दिया।

उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी। नेहा भी उठकर हमारे पास आ गयी थी। ऋतु भी अपने होंठों पर जीभ फिरा कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी।

अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने चाची को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया। नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था।
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी पर और एक करार झटका मारा।

चाची- अयीईईई ईईई… मररर… गयीईईई… अह्ह्ह्हह्ह!
करते हुए लुढ़क कर चाचू के ऊपर गिर गयी।

पापा का मोटा लंड चाची की चूत के अन्दर घुस गया था। उसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे, उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दिया। पीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा चाची के मोटे चूतड़ों को थामे जोर जोर से धक्के मारने लगे।

चाची की सिसकारियां गूंजने लगी मजे के मारे ‘हम्म्म्म… अ हा हा अ अह अह.. आ… ऊओफ उफ ओफ्फोफ़… ऑफ़… ऑफ़ ऑफ़.. उफ.. ऑफ… ऑफ.. फ़… आह… आह्ह… म्मम्मम जोर से करो ना… भाई साब… प्लीज… और तेज मारो…

तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया चाची की चूत से क्योंकि अब चाचू की बारी जो थी। वो परेशान सी हो गई लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड डाल दिया और वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में।
पापा ने भी अपना गीला लंड चाची की गांड के छेद पर रख दिया। वो समझ गयी और अपने दोनों हाथों से अपनी गांड के छेद को फैलाने लगी।

पापा के एक झटके ने उन्हें चाचू के ऊपर फिर से गिरा दिया और इस बार पापा का लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर जा धंसा.
वो चीखी- आआआआअह्ह्ह्ह… मररर… गयीईईई… अह्ह्हह्ह्ह…

पापा ने अगले दो चार और तेज झटकों ने अपना पूरा आठ इंच लंड चाची की गांड में घुसा दिया था। नीचे से चाचू ने फिर से चाची के दूध पीना शुरू कर दिया। वो हिल भी नहीं पा रही थी। अब दोनों भाई चाची की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे… बड़ा ही कामुक दृश्य था।

ऋतु भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुग्ध सी उन्हें देख रही थी। उसने अपने पूरे कपड़े उतार फैंके और मेरे से लिपट गयी। मेरे कपड़े भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे।
दो लंड से चुद रही आरती चाची अचानक जोर जोर से चिल्लाने लगी- आआआ आआआह्ह… अह.. अह.. अह.. अ हा.. आह.. आह. आह.. आह… उफ.. उफ..उफ.. आआ आआ आअह्ह और तेज मारो… आआआ आअह्ह मजा आ गया!
और चाची ने अपना रस छोड़ दिया चाचा के लंड के ऊपर।
पर अभी भी उनके दोनों छेदों की बराबरी से चुदाई चल रही थी।

तभी ऋतु ने मुझे धक्का देकर नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टिका कर उसके ऊपर बैठ गयी और धक्के मारने लगी। मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा।
मम्मी भी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी भतीजी नेहा की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगी। नेहा ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए और दोनों 69 की अवस्था में एक दूसरी को चूसने लगी।

मैंने अपनी बहन की चूत को ऐसे चोदा कि उसकी चीखें निकल गयी और वो भी झड़ने लगी- आआआ आअह्ह्ह्ह… रोहाआआन्न.. मैं तो गयीईई…
और वो भी गहरी साँसें लेने लगी।

मैंने भी चारों तरफ देखा, चाची को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थे। मम्मी और नेहा भी एक दूसरे की चूत चाट रही थी।

मैंने भी ऋतु को पीछे घुमाया और अपना लंड ऋतु की गांड के छेद में फंसा दिया। ऋतु को जैसे ही मेरे मोटे लंड का अहसास अपनी गांड के छेद में हुआ, वो सिहर उठी, उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और मैंने भी एक तेज शोट मारकर अपना लंड उसकी गांड में धकेल दिया।
वो चिल्ला उठी- आआ आआ आआ आआह्ह्ह…

मैं ऋतु की गांड मैं अपना लण्ड पेल रहा था और मम्मी और नेहा एक दूसरी की चूत को चाटकर झड़ने लगी औऱ फिर उन दोनों ने एक दूसरी के रस को चाट कर साफ कर दिया। नेहा अब मम्मी के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ी।

तभी पापा ने अपना लण्ड चाची की गांड से बाहर निकाल दिया। चाची ने हैरानी से पीछे मुड़ कर देखा और फिर पापा ने अपना लंड उनकी चूत पर टिका दिया। चाचू का लंड पहले से ही वहां पर था।

पापा के मोटे लंड का अहसास पाकर चाचू ने अपना लंड बाहर निकलना चाहा पर पापा ने दबाव डाल कर चाचू के लंड को बाहर नहीं आने दिया और अपना लंड चाची की चूत में फंसा कर एक तेज झटका मारा।

चाची की चूत के धागे खुल गए, उनका मुंह खुला का खुला रह गया- अयीईईई ईईईईईई… मर… गयीईई…साले कुत्ते… भेन के लंड… निकाल अपना लौड़ा मेरी चूत से… फट गयी… आआआ आआआह्ह्ह्ह!
चाची की आँखों से आंसू आने लगे, उनकी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे। चाची की चूत में तेज दर्द हो रहा था। शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा था। पर पापा नहीं रुके और उन्होंने एक और शोट मार कर अपना लंड पूरा उनकी चूत में डाल दिया।

चाचू के लंड के साथ अब उनका लंड भी चाची की चूत में था। उन दोनों का लंड एक दूसरे की घिसाई कर रहा था और दोनों की गोलियां एक दूसरे के गले मिल रही थी। चाची के लिए ये एक नया अहसास था, उनकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए, ये सोच कर पापा ने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। चाचू ने भी पापा के साथ ताल मिलायी और वो दोनों चाची की चूत में अपने अपने लंड पेल रहे थे।

दो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखाने लगे और चाची की दर्द भरी चीखें मीठी सिसकारियों में बदल गयी- आआआ आआह आआह्ह्ह्ह… म्मम्मम्म… साले कुत्तो… तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली… आआआ आअह्ह्ह पर जो भी है… म्मम्मम्म… मजा आ रहा है… मारो अब दोनों… मेरी चूत को… आआआआह्ह्ह्ह…
और फिर तो पापा और चाचू ने चाची जो रेल बनायी… जो रेल बनायी… वो देखते ही बनती थी।
आरती चाची की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी।

सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोड़ा, वो चिल्लाए- आआआ आअह्ह्ह्ह… वाह… मजा आ… गयाआआ!
चाची भी अपनी चूत में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसा कर कूदने लगी। जल्दी ही चाचू और चाची भी एक साथ झड़ने लगे. आआआ आअयीईई ईईई… म्मम्मम्म… मैं तो गयी…आआह आआअह्ह्ह्ह… ऊऊओफ़ गॉड!

मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब था, ऋतु तो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी, वो फिर से झड़ने लगी तो मैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया। हम दोनों का पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा।
ऋतु उठी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया। सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा और हम सभी की हंसी निकल गयी।

अगले तीन दिनों तक हम सभी ने हर तरीके से एक दूसरे को कितनी बार चोदा, बता नहीं सकता और अंत में वो दिन भी आ गया जब हमें वापिस जाना था।

मुझे इतना मजा आज तक नहीं आया था। मैंने इस टूर पर ना जाने कितनी चूतें चोदी थी और कितनी बार चोदी, मैं गिनती भी नहीं कर पा रहा था।
चाचा चाची, नेहा के साथ अपनी कार में सवार हो कर घर के लिए निकल गए और हम लोग भी अपने घर चल दिये थे।

वापिस जाते हुए मैं कार में बैठा सोच रहा था कि कैसे विकास और सन्नी को ऋतु की चूत दिलाई जाए और इसके लिए कितना चार्ज किया जाए। मैं तो ये भी सोच रहा था कि मम्मी को भी इसमें शामिल कर लेना चाहिए.
देखते हैं।

तभी मम्मी के फोन की घंटी बज उठी और उन्होंने कहा- अरे… दीपा का फोन है.
और ये कहते हुए उन्होंने फोन उठा लिया और बातें करने लगी।
दीपा मम्मी की छोटी बहन है यानी हमारी मौसी! वो मम्मी की तरह ही गोरी चिट्टी हैं, बाल कटे हुए, दुबली पतली। पर उनके चुचे देख कर मेरे मुंह में हमेशा से पानी आ जाता था। वो गुजरात में रहती हैं और उनके पति सरकारी जॉब करते हैं। उनके दो बच्चे हैं अयान और सुरभि, दोनों लगभग हमारी ही उम्र के हैं।

मैं गोर से उनकी बातें सुनने लगा। बात ख़त्म होने के बाद मम्मी ने खुश होते हुए कहा- अरे सुनो… दीपा आ रही है अपने परिवार के साथ। वो लोग भी छुट्टियों में घुमने के लिए शिमला गए थे और वापसी में वो लोग कुछ दिन हमारे पास रुकना चाहते हैं।

मम्मी की बात सुनकर पापा बड़े खुश हुए, उनकी नजर हमेशा अपनी साली पर रहती थी, ये मैंने कई बार नोट किया था पर दीपा मौसी बड़े नकचढ़े स्वभाव की थी। वो पापा की हरकतों पर उन्हें डांट भी देती थी इसलिए पापा की ज्यादा हिम्मत नहीं होती थी पर अब बात कुछ और थी। मम्मी पापा हमारे साथ खुल चुके थे इसलिए वो खुल कर बात कर रहे थे हमारे सामने।

पापा बोले- इस बार तो मैं इस दीपा की बच्ची की चूत मार कर रहूँगा। बड़े सालों से ट्राई कर रहा हूँ, भाव ही नहीं देती साली।
मम्मी ने कहा- अजी सुनो… तुम ऐसा कुछ मत करना। वो पहले भी कई बार मुझसे तुम्हारे बारे में बोल चुकी है और इस बार तो उसके साथ सभी होंगे। उसके बच्चे और उसका पति हरीश भी। तुम ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे उसे कोई परेशानी हो… समझे?
“देखेंगे…” पापा ने कहा और ड्राइव करने लगे।

जल्दी ही हम सभी घर पहुँच गए और सीधे अपने कमरे में जाकर बेसुध होकर सो गए। ऋतु मेरे साथ मेरे कमरे में ही सो रही थी वो भी नंगी पर हमारे में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि चुदाई कर सकें, सफ़र में काफी थक चुके थे।

मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी - Mummy ki chut me aag jalne lagi

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चाचू ने अपना लंड बाहर निकला और ऋतु के चेहरे के सामने कर दिया। ऋतु ने बिना कुछ सोचे उन का रस से भीगा लंड मुंह में लिया और चूस चूस कर साफ़ करने लगी।

चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी, चाची की चूत में से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था। वो थोड़ा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका दिया। फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी।

ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली और चाचू का रस इकट्ठा कर के चाट गयी।

तभी दरवाजे की तरफ से आवाज आई- ये क्या हो रहा है?
हमने देखा तो नेहा वहां खड़ी थी अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लिए…
हम सभी की नजर दरवाजे पर खड़ी नेहा पर चिपक सी गयी। मैं, ऋतु, आरती चाची और अजय चाचू सब नंगे हुए एक दूसरे को चाट और चूस रहे थे और थोड़ी ही देर पहले हम सबने चुदाई भी की थी.. ना जाने कब से नेहा ये सब देख रही थी।

मेरी और ऋतु की तो कोई बात नहीं… पर चाचू और चाची की शक्ल देखने वाली थी, उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी उन्हें ‘नंगे’ हाथों पकड़ लेगी।
मैंने गौर से देखा तो नेहा का ध्यान चाचू के लंड पर ही था और उस के चेहरे पर अजीब तरह के भाव थे।
मैं समझ गया और उठ खड़ा हुआ- देखो नेहा, तुमने तो वैसे भी अपने मम्मी पापा को हमारे मम्मी पापा के साथ नंगा देख ही लिया है उस शीशे वाली जगह से और आज हालात कुछ ऐसे हुए कि हमें चाचू चाची को अपने राज में शामिल करना पड़ा!

और फिर मैंने सारी बात विस्तार से बता दी नेहा को।

चाचू और चाची ने जब ये सुना कि नेहा ने भी उन्हें दूसरे कमरे में रंगरेलियां मनाते हुए देखा है तो वो थोड़ा शर्मिंदा हो गए। पर फिर उन्होंने सोचा की जब उसे पता चल ही गया है तो क्यों न उसे भी इसमें शामिल कर लिया जाए।

आरती चाची जानती थी कि नेहा अपने स्कूल में लड़कों को काफी लिफ्ट देती है और उसने कई बार नेहा को उस के रूम में एक साथ पढ़ाई कर रहे लड़कों के साथ चूमते चाटते भी देखा था। उन्होंने अजय चाचा की तरफ देखा और आँखों आँखों में कुछ इशारे करे।
फिर वो आगे आई और नेहा का हाथ पकड़ कर वही बेड पर बिठा लिया।

नेहा आँखें फाड़े हम सभी नंगे लोगों को देख रही थी। दरअसल उस का भी प्रोग्राम में दिल नहीं लग रहा था और जब वो वापिस आई तो उसने अपने मम्मी पापा को हमारे रूम में घुसते हुए देखा, वो भी पूरे नंगे… वो समझ गयी कि अन्दर क्या होने वाला है पर अपने मम्मी पापा के सामने वो एकदम से ये नहीं दर्शाना चाहती थी कि वो भी मेरे और ऋतु के साथ चुदाई के खेल में शामिल है, इसलिए उसने खिड़की से अन्दर का सारा प्रोग्राम देखा।

अपने पापा के द्वारा ऋतु की चुदाई करते देख कर उस की छोटी सी चूत में आग लग गयी थी और जब मैंने उस की माँ की चुदाई की तो उस के बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसने वही खिड़की पर खड़े खड़े अपनी चूत में उंगलियाँ डाल कर उस की अग्नि को शांत किया… पर अन्दर के खेल को देख कर उस की चूत अभी भी खुजला रही थी। इसलिए उसने तय किया कि वो भी अन्दर जायेगी और इसमें शामिल हो जाएगी।

आरती चाची ने नेहा की टी शर्ट उतार दी। नेहा किसी बुत की तरह बैठी थी।
फिर ऋतु आगे आई और उसने उस की जींस के बटन खोल कर उसे भी नीचे कर दिया। अब नेहा सिर्फ पर्पल कलर की पेंटी और ब्रा में बैठी थी। उस का बाप यानी अजय चाचू तो उस के ब्रा में कैद मोटे मोटे और गोल चुचे देख कर अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया… वो मुंह फाड़े अपनी कमसिन सी बेटी के अर्धनग्न जिस्म को निहार रहा था और अपनी जीभ अपने सूखे होंठों पर फिरा रहा था।
मैं एक कोने मैं बैठा सबकी हरकतें नोट कर रहा था।

चाची उठी और अपने चुचे को नेहा के होंठों से चिपका दिए, नेहा ने कुछ नहीं किया। शायद वो अभी भी दर्शाना चाह रही थी कि वो ये सब नहीं करना चाहती पर अन्दर ही अन्दर उस की चूत में ऐसी खुजली हो रही थी कि अपनी माँ को वही पटके और उस के मुंह में अपनी चूत से ऐसी रगड़ाई करे कि उस की सारी खुजली मिट जाए।

थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोले और अपनी आँखें बंद करके अपनी माँ का दूध पीने लगी। ऋतु ने उस की ब्रा खोल दी और नीचे से हाथ डाल कर उस की पेंटी भी उतार दी।
ब्रा के खुलते ही नेहा के दोनों पंछी आजाद हो गए। मैंने देखा उस के निप्प्ल्स एक दम खड़े हो चुके हैं और चूत से भी रस टपक कर चादर को गीला कर रहा है यानि वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी। अजय चाचू ने अपनी बेटी को नंगी देखा तो उनकी साँसें रुक सी गयी।

चाची ने इशारे से चाचू को आगे बुलाया, वो तो जैसे इसी इन्तजार में बैठे थे, वो लपक कर आगे आये और अपनी बेटी के दायें चुचे को अपने मुंह में भर कर लगे चूसने किसी बच्चे की तरह। उन्होंने उत्तेजना के मारे उस के दाने पर जोर से काट मारा।

नेहा चिल्लाई- आआआ आआह्ह्ह…. पाआआ… पाआआआ… स्स्सस्स सस्स्स… अयीईईई ईईईई…
नेहा ने अपने पापा के सर को किसी जंगली की तरह पकड़ा और उनकी आँखों में देख कर अपने थूक से गीले हुए होंठ उनसे भिड़ा दिए, नेहा के पापा के तो मजे आ गए। अपनी बेटी के इस जंगलीपन को देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया।
खड़ा तो मेरा भी हो गया था पर लगातार 3-4 बार झड़ने के बाद मैं अपने लंड को थोड़ा आराम देना चाहता था।

बाप बेटी एक दूसरे को ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई गेम चल रही हो और दोनों एक दूसरे से ज्यादा पॉइंट्स लेने के लिए ज्यादा चूसने वाली गेम खेल रहे हैं।
चाचू ने अपने हाथ नेहा की गोलाइयों पर टिका दिए और उन्हें मसलने लगे.
नेहा की सिसकारी निकलने लगी- आआह आआअह्ह दबाओ ऊऊऊ इन्हीईए.. पाआआ… पाआआ…

आरती चाची ने अपनी बेटी नेहा को बेड पर लिटा दिया और उस की रस टपकती चूत पर हमला बोल दिया। ऋतु ने भी अपनी चाची का साथ दिया और वो दोनों नेहा की चूत के दोनों तरफ आधे लेट गई और बारी बारी से नेहा की चूत चाटने लगी।

ऊपर चाचू अपनी जवान सेक्सी बेटी के मुंह के अन्दर घुसे हुए उस का रसपान कर रहे थे। उन्होंने किस तोड़ी और थोड़ा नीचे खिसक कर अपने होंठ से नेहा के चुचे चूसने लगे। नेहा बेटी ने हाथ बड़ा कर अपने पापा का लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी, फिर उसने लंड को थोड़ा और खींच कर अपने मुंह के पास खींच लिया।

चाचू समझ गए और अपना चेहरा उस की चूत की तरफ घुमा कर उस के मुंह पर बैठ गए और नेहा ने अपने पापा का लंड अपने कोमल मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
चाचू का चेहरा देखने लायक था, उनके आनंद की कोई सीमा नहीं थी। आज अपनी भाभी से और फिर अपनी भतीजी से चुसवाने के बाद अब वो अपना लंड अपनी ही बेटी के मुंह में डाले मजे ले रहे थे।

चाचू थोड़ा झुके और ऋतु और आरती को हटा कर अपना मुंह अपनी बेटी की चूत पर रख कर चाटने लगे उस की रसीली चूत को। बीच बीच में वो सांस लेने के लिए ऊपर आते और ये मौका ऋतु और आरती ले लेती और उस की चूत चाटने लगती।
कुल मिला कर नेहा की चूत तीन लोग चाट रहे थे और वो अपने पापा का लंड चूस रही थी।

चाचू जब झड़ने वाले थे तो उन्होंने एकदम से अपना लंड नेहा के मुख से निकाल लिया और वापिस ऊपर आ कर उस को चूमने लगे। नेहा से भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने अपने पापा को धक्का दिया और उछल कर उन के ऊपर बैठ गयी।
अजय चाचू का फड़कता हुआ लंड नेहा की चूत के नीचे था। नेहा ने अपने पापा के दोनों हाथों में अपनी उंगलियाँ फंसाई और अपनी गांड और अपना सर नीचे झुका दिया। उस के होंठ अपने पापा के होंठों से जुड़े थे और चूत उनके लंड से।

पीछे से आरती चाची ने अपने पति का लंड पकड़ा और अपनी बेटी की चूत में फंसा दिया और उसे नीचे की तरफ दबा दिया। नेहा की कसी चूत में उस के पापा का लंड उतरता चला गया।
“आआ आआअ आआआह्ह…. आआस्स… आआअह्ह्ह… पाआआ… पाआआ… म्म्म्म म्म्म्म म्म…” नेहा ने थोड़ा ऊपर होकर लम्बी सिसकारी निकाली… और अपने चुचे को अजय चाचू के मुंह में ठूँस दिया।
अब चाचू का पूरा लंड उनकी बेटी की चूत के अन्दर था।

नेहा ने उछलना शुरू किया और चाचू का लंड अपनी चूत में अन्दर बाहर करने लगी। चाची और ऋतु नीचे बैठी बड़े गौर से इस चुदाई को देख रही थी। चाची ने हाथ आगे करके अपनी उंगलियाँ ऋतु की चूत में डाल दी और ऋतु ने आरती चाची की चूत में। फिर उन्होंने अपनी टाँगें एक दूसरे में ऐसी फंसाई कि दोनों की चूत आपस में रगड़ खाने लगी और उन्होंने बैठे बैठे ही एक दूसरी की चूत को अपनी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया।

“आआम्म आआह… अह्ह्ह ह्ह्ह्हह… अहहहः… आहाहाहा.. हा.. हा हा.. हा.. अहा.. हह्ह्ह.. म्मम्म…” ऋतु और चाची अजीब तरह से हुंकार रही थी।
पूरे कमरे में सेक्स का नया दौर शुरू हो चुका था। मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो चुका था पर इतनी चुदाई के कारण वो दर्द भी कर रहा था इसलिए मैंने दूर बैठे रहना ही उचित समझा।

चाचू ने नेहा के गोल चूतड़ों को पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए। नेहा की सिसकारियां चीखों में बदल गयी और जल्दी ही वो झड़ने लगी- आआआअह्ह… अह्ह्ह.. अहः अहः अ अहः अ आहा हा… हा… पपाआआआ… मैं… आयीईईईइ… ऊऊओ… ऊऊऊ… ऊऊऊऊ… आआआह्ह.. और उसने अपने रस से पापा के लंड को नहला दिया और अपने मोटे मोटे चूचों को उनके मुंह पर दबा कर वही निढाल हो कर गिर पड़ी।

चाचू ने उसे नीचे उतारा और उस की टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया और अपना लंड उस की चूत में फिर से डाल दिया और धक्के देने लगे। चाचू का भी तीसरा मौका था इसलिए झड़ने में काफी समय लग रहा था। पर जल्दी ही अपने नीचे पड़ी अपनी बेटी के मोटे मोटे मम्मे हिलते देख कर वो भी झड़ने लगे और अपना रस उस की चूत के अन्दर उड़ेल दिया वो अपनी बेटी की चूत में झड़ गये, और उस की छाती के ऊपर गिर कर हांफने लगे।
नेहा ने उनके चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और सर पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगी।

चाची और ऋतु की चूत भी आपसी घर्षण की वजह से जल उठी और उन का लावा भी निकल पड़ा और उन्होंने झड़ते हुए एक दूसरी को चूम लिया।
मैं ये सब देख कर बेड के एक कोने में बैठा मुस्कुरा रहा था।

थोड़ी देर लेटने के बाद चाचू और चाची चले गए। उन के जाते ही ऋतु और नेहा ने एक दूसरे की चूत चाट कर साफ़ कर दी और हम तीनों वही नंगे लेट गए।
दूसरे कमरे में जाकर चाची ने शीशा हटा कर देखा और अपनी नंगी बेटी को मेरी बगल में लेटते हुए देख कर वो मुस्कुरा दी। अगले दिन सुबह हम तीनों, यानि मैं, ऋतु और नेहा नाश्ता करने के बाद पहाड़ी की तरफ चल दिए। ऋतु आगे चल रही थी। वो वही कल वाली जगह पर जा रही थी, उस ऊँची चट्टान पर।

मैं और नेहा उसके पीछे थे। नेहा ने अपने हाथ मेरी कमर पर लपेट रखे थे और मैंने उसकी कमर पर। बीच बीच में हम एक दूसरे को किस भी कर लेते थे। बड़ा ही सुहाना मौसम था, आज धूप भी निकली हुई थी।

नेहा थोड़ा थक गयी और सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। मैं भी उसके साथ बैठ गया। ऋतु आगे निकल गयी और हमारी आँखों से ओझल हो गयी।

नेहा ने अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिए और मैं उन्हें चूसने लगा। मैंने हाथ बड़ा कर उसके सेब अपने हाथों में ले लिए और उनके साथ खेलने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था।

मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, पर तभी मेरा ध्यान ऋतु की तरफ गया और मैं जल्दी से खड़ा हुआ और नेहा को चलने को कहा। क्योंकि वो जंगली इलाका था और मुझे अपनी बहन की चिंता हो रही थी।
हम जल्दी जल्दी चलते हुए चट्टान के पास पहुंचे और वहां देखा तो ऋतु अपने उसी पोज में बैठी थी अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी।

ऋतु ने हमसे शिकायती लहजे से पूछा- तुम क्या रास्ते में ही शुरू हो गए थे, इतनी देर क्यों लगा दी?
नेहा ने जब देखा कि ऋतु नंगी है तो उसने भी अपनी लोन्ग फ्रोक को नीचे से पकड़ा और अपने सर से उठा कर उसे उतार दिया। वो नीचे से बिल्कुल नंगी थी और वो भी जाकर अपनी बहन के साथ चट्टान पर लेट गयी।
अब मेरे सामने दो हंसती खेलती नंगी जवान लड़कियां बैठी थी, मेरा लंड मचल उठा और मैंने भी अपने कपड़े बिजली की फुर्ती से उतार डाले।

नेहा ने मेरा लंड देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी, वो आगे बड़ी तभी ऋतु ने उसे पीछे करते हुए कहा- चल कुतिया पीछे हो जा, पहले मैं चूसूंगी अपने भाई का लंड!
नेहा को विश्वास नहीं हुआ कि ऋतु ने उसे गाली दी। पर जब हम दोनों को मुस्कुराते हुए देखा तो वो समझ गयी कि आज गाली देकर चुदाई करनी है… तो वो भी चिल्लाई- तू हट हरामजादी, अपने भाई का लंड चूसते हुए तुझे शर्म नहीं आती… कमीनी कहीं की…
और उसने ऋतु के बाल हल्के से पकड़ कर पीछे किया और झुक कर मेरे लम्बे लंड को मुंह में भर लिया।

ठन्डे मौसम में मेरा लंड उसके गर्म मुंह में जाते ही मैं सिहर उठा।
ऋतु- अच्छा तो तू इसे चूसना चाहती है, ठहर मैं तुझे बताती हूँ…
और ये कहते ही उसने नेहा की गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी जीभ रख दी उसके गांड के छेद पर!
नेहा चिल्ला उठी… और इतने में ऋतु ने एक जोरदार हाथ उसके गोल चूतड़ पर दे मारा… और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी.
“आआ आआह्ह्ह्ह… नहीईई ईईईईईई… वहान्न्न न्न्न्न.. नहीईई ईईई… ”
पर ऋतु ने नहीं सुना और अपनी छोटी बहन की गांड में दूसरी उंगली भी घुसेड़ दी… उसकी आँखें बाहर निकल आई पर उसने मेरा लंड चूसना नहीं छोड़ा।

उन दोनो की लड़ाई में मेरे लंड का बुरा हाल था क्योंकि अपने ऊपर हुए हमले का बदला नेहा मेरे लंड को उतनी ही जोर से चूस कर और काट कर ले रही थी।
मैंने नेहा के बाल वहशी तरीके से पकड़े और उसका चेहरा ऊपर करके उसके होंठ काट डाले।
वो दर्द से बिलबिला उठी- छोड़… कुत्ते… आआआ आयीईईईई… भेन चोद… भूतनी के… आआआआआह…
वो चिल्लाती जा रही थी क्योंकि उसकी गांड में ऋतु की उंगलियाँ थी जिससे उसकी गांड फट रही थी और ऊपर से मैं उसके होंठ काट काट कर उसकी फाड़ रहा था।

नेहा के मुंह से लार गिर रही थी और उसके पेट पर गिर कर उसे चिकना बना रही थी। अचानक ऋतु ने अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी गांड में एक उंगली डाल दी। मेरे तन बदन में बिजली दौड़ गयी। मैं उछल पड़ा, पर मैंने नेहा को चूसना नहीं छोड़ा।

मैंने अपनी बलशाली भुजाओं का प्रयोग किया और नेहा को किसी बच्चे की तरह उसकी जांघों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और उसने अपनी टाँगें मेरे मुंह के दोनों तरफ रख दी और अपनी चूत का द्वार मेरे मुंह पर टिका दिया।

ऋतु ने चूस कर उसकी चूत को काफी गीला कर दिया था। मेरे मुंह में उसका रस और ऋतु के मुंह की लार आई और मैं सपड़ सपड़ करके उसे चाटने लगा। नेहा ने मेरे बालों को जोर से पकड़ रखा था और मैं चट्टान पर अपनी गांड टिकाये जमीन पर खड़ा था। नेहा मेरे मुंह पर चूत टिकाये चट्टान पर हवा में खड़ी थी और ऋतु नीचे जमीन पर किसी कुतिया की तरह अब मेरे गांड के छेद को चाट रही थी।

पूरी वादियों में हम तीनों की सिसकारियां गूंज रही थी। मैंने अपना हाथ पीछे करके नेहा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड के छेद में एक साथ दो उंगलियाँ घुसा दी। अब उसे भी अपनी गांड के छेद के द्वारा मजा आ रहा था।
पिछले दो दिनों में वो मुझ से और अपने बाप से चुद चुकी थी… पर आज उसके मन में गांड मरवाने का भी विचार आने लगा।

अपनी गांड में हुए उत्तेजक हमले और चूत पर मेरे दांतों के प्रहार से नेहा और भड़क उठी और वो अपनी चूत को ओर तेजी से मेरे मुंह पर घिसने लगी और झड़ने लगी- आआहह आआआअह्ह्ह… ले कुत्ते… भेन के लोड़े… पी जा मेरा रस… आआह्ह…
उसकी चूत आज काफी पानी छोड़ रही थी। मेरे मुंह से निकल कर नेहा की चूत के पानी की बूंदें नीचे गिर रही थी और वहां बैठी हमारी कुतिया ऋतु अपना मुंह ऊपर फाड़े उसे कैच करने में लगी हुई थी।

झड़ने के बाद नेहा मेरे मुंह से नीचे उतर आई और चट्टान पर अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी। मैंने अपना फड़कता हुआ लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा ही था कि उसने मुझे रोक दिया और बोली- बहन चोद, आज मेरी गांड में डाल…
मैंने हैरानी से उसकी आँखों में देखा और उसने आश्वासन के साथ मुझे फिर कहा- हां… बाबा… चलो मेरी गांड मारो… प्लीज…

मैंने अपनी वही पुरानी तरकीब अपनाई ओर एक तेज झटका मारकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया.
वो चिल्लाई- अबे… भेन चोद… समझ नहीं आती क्या… गांड मार मेरी… चूत नहीं कुत्ते…
पर मैं नहीं रुका और उसकी चूत में अपना लंड अन्दर तक पेल दिया ओर तेजी से झटके मारने लगा।

अब मेरा लंड नेहा की चूत के रस से अच्छी तरह सराबोर हो चुका था, मैंने अपना लण्ड निकाला… नेहा की आँखों में विस्मय के भाव थे कि मैंने उसकी चूत में से अपना डंडा क्यों निकाल लिया। मैंने उसे उल्टी लेटने को कहा, कुतिया वाले पोज में। वो समझ गयी और अपनी मोटी गांड उठा कर चट्टान पर अपना सर टिका दिया।

ऋतु जो अब तक खामोश बैठी अपनी चूत में उँगलियाँ चला रही थी, उछल कर चट्टान पर चढ़ गयी और अपनी टाँगें फैला कर नेहा के मुंह के नीचे लेट गयी। नेहा समझ गयी और अपना मुंह उसकी नर्म और गर्म चूत पर रख दिया और चाटने लगी।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली ओर चटवाने के मजे लेने लगी। वो नेहा के सर को अपनी चूत पर तेजी से दबा रही थी- चाट कुतिया… मेरी चूत से सारा पानी चाट ले… आआहह आआअह्ह… भेन चोद… हरामजादी… चूस मेरी चूत को… आआआह्ह्ह्ह!

नेहा ने उसकी चूत को खोल कर उसकी क्लिट को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। ऋतु तो पागल ही हो गयी- ओह.. ओह.. ओह.. ओह.. ओ.. ओह.. ओह.. ओह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह…
वो बुदबुदाये जा रही थी और चुसवाती जा रही थी।

पीछे से मैंने नेहा की गांड की बनावट देखी तो देखता ही रह गया। उसके उठे हुए कूल्हे किसी बड़े से गुब्बारे से बने दिल की आकृति सा लग रहा था। मैंने उसे प्यार से सहलाया और अपने एक हाथ से उसे दबाने लगा।

नेहा ने ऋतु की चूत चाटना छोड़ा और पीछे सर करके बोली- अबे भेन चोद… क्या अपना लंड हिला रहा है पीछे खड़ा हुआ… कमीने, मेरी गांड मसलना छोड़ और डाल दे अपना हथियार मेरी कुंवारी गांड में… डाल कुत्ते…
वो लगभग चिल्ला ही रही थी।

मैंने अपना लंड थूक से गीला किया और उसकी गांड के छेद पर टिकाया, थोड़ा सा धक्का मारा- अयीईईई… मर… गयीईई… अह्ह्ह ह्ह्ह्ह… नहींईईईईइ…
मेरे लंड का टॉप उसकी गांड के रिंग में फंस गया था।

मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड को निशाना बनाकर थूका… जो सही निशाने पर लगी, लंड गीला हो गया। मैंने एक और धक्का मारा- आआआ आआआ आआअह्ह्ह…
मेरी चचेरी बहन की ये चीख काफी लम्बी थी… उसने अपने दांत ऋतु की चूत में गाड़ दिए।
ऋतु भी बिलबिला उठी- हटट… कुतियाआ… अपनी गांड फटने का बदला मेरी चूत से ले रही है… आआआ आआह्ह्ह्ह… धीरे चाट… नहीं तो तेरी चूत में लकड़ी का तना डाल दूंगी…
ऋतु ने नेहा को धमकी दी।

मेरा लंड आधा उसकी गांड में घुस चुका था… मैंने उसे निकाला और थोड़ी और थूक लगाकर फिर से अन्दर डाला। अब मैं सिर्फ आधा लंड ही डाल रहा था। नेहा भी अपनी गांड धीरे धीरे मटका कर घुमाने लगी। मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है।

नेहा की गांड मोटी होने के साथ साथ काफी टाईट भी थी। आठ दस धक्के लगाने के बाद मैंने फिर से आगे की तरफ झटका मारा… तो नेहा फिर से चिल्लाई- माँ के लौड़े… तेरी माँ की चूत… भोंसड़ी के… कमीने… कुते… फाड़ डाली मेरी गांड… आआ आआह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह…
वो चिल्लाती जा रही थी और अपनी गांड मटकाए जा रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे मजा आ रहा है या दर्द हो रहा है।

उधर ऋतु का बुरा हाल था, चटवाने से पहले उसे बड़े जोर से पेशाब आ रहा था पर चटवाने के लालच में वो कर नहीं पायी थी। अब जब नेहा उसकी चूत का ताना बाना अलग कर रही थी तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपने तेज पेशाब की धार सीधे नेहा के मुंह में दे मारी।

पहले तो नेहा को लगा कि ऋतु झड़ गयी है पर जब पेशाब की बदबू उसके नथुनों में समायी तो उसने झटके से अपना मुंह पीछे किया और ऋतु की चूत पर थूक दिया।
ऋतु की चूत का फव्वारा बड़ी तेजी से उछला और नेहा के सर के ऊपर से होता हुआ नेहा की पीठ पर गिरा। मेरे सामने ऋतु अपनी चूत खोले अपने पेशाब से नेहा की कमर भिगो रही थी। नेहा की कमर से होता हुआ ऋतु का पेशाब, मेरे गांड मारते लंड तक फिसल कर आ गया और उसे और लसीला बना दिया और मैं और तेजी से नेहा की गांड मारने लगा।

नेहा ने अपना मुंह तो हटा लिया था पर उसके गले से कुछ बूँदें उसके पेट में भी चली गयी थी। उसका स्वाद थोड़ा कसैला था.. पर उसे पसंद आया। आज नेहा किसी जंगली की तरह बर्ताव कर रही थी। उसने उसी जंगलीपन के आवेश में अपना मुंह वापिस बारिश कर रहे फव्वारे पर टिका दिया और जलपान करने लगी।

ऋतु ने जब देखा कि उसकी बहन उसका पेशाब पी रही है तो वो और तेजी से झटके दे देकर अपनी चूत नेहा के मुंह में धकेलने लगी। मेरा लंड भी अब काफी गीला हो चुका था… थूक, पेशाब और नेहा की चूत के रस में डूब कर… मेरा लौड़ा किसी पिस्टन की तरह नेहा की गांड में अन्दर बाहर हो रहा था। नेहा की गांड का कसाव मेरे लंड पर हावी हो रहा था।
मेरे लंड ने जवाब दे दिया और उसने नेहा की गांड में उल्टी कर दी।

नेहा ने भी अपनी गांड में गर्म वाला महसूस करते ही झड़ना शुरू कर दिया और वहां ऋतु की चूत ने भी जवाब दे दिया और वो भी रस टपकाने लगी।

नेहा ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपना मुंह ऋतु की चूत की तरफ घुमा कर अपनी गांड उसके मुंह पर टिका दी। ऋतु उसकी गांड से बहते हुए मेरे लावे को चाटने लगी और अपना रस नेहा को चटवाने लगी।
मैं जमीन पर खड़ा हुआ अपने मुरझाते हुए लंड को देख रहा था और उन दोनों कुतियों को एक दूसरे की चूत चाटते हुए देख रहा था।

सारी चुदाई की कथा ख़त्म होने के बाद हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और नीचे की तरफ चल दिए। नेहा थोड़ा धीरे चल रही थी… चले भी क्यों न… मेरी बहन की गांड जो फट गयी थी आज!
हम को काफी समय हो गया था, हम भागते हुए अपने केबिन पहुंचे तो हमारे मम्मी पापा नंगे अजय चाचू के कमरे से निकल रहे थे। हम दोनों को सामने पाकर वो दोनों ठिठक कर वहीं खड़े हो गए।

हमें सामने पाकर पापा ने अपने लण्ड को हाथों से छुपा लिया औऱ मम्मी भी अपने बदन को ढकने के लिए अपने छोटे से हाथो का सहारा ले रही थी पर उनसे कुछ छुप नहीं पा रहा था।
हड़बड़ाहट में मम्मी ने हम से पूछा- तुम इतनी देर तक कहाँ थे?? क्या करके आ रहे हो??
वो पूरी नंगी हमारे सामने खड़ी थी इसलिए थोड़ा शर्मा भी रही थी अपनी हालत पर।

ऋतु ने अपने पापा के आधे खड़े हुए लंड को घूरते हुए कहा- हम सब बस घूम कर आ रहे हैं।
मैंने मम्मी की तरफ देखते हुए पूछा- क्या आप दोनों चाचू के कमरे से आ रहे हैं?
मम्मी ने हड़बड़ा कर कहा- ह्म्म्म… हम उन्हें गुड नाइट बोलने गए थे… उनके निप्प्ल्स तन कर खड़े हो चुके थे।
मैंने कहा- ठीक है… गुड नाइट.
और हम सब अपने कमरे में चले गए।

अन्दर जाते हुए हम तीनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी। हम जानते थे कि हमने मम्मी पापा को रंगे हाथों पकड़ लिया है, उनकी शक्ल देखते ही बनती थी।
अन्दर आकर नेहा सीधे बाथरूम में चली गयी, ऋतु ने भी अपने कपड़े बड़ी फुर्ती से उतार फैंके और बेड पर जाकर लेट गयी।

दूसरे कमरे में चाचू और चाची ने जब हमारी बात सुनी और बाद में हमें अन्दर आते देखा तो उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर झाँका और ऋतु को नंगी लेटे देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगे।

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और बेड पर कूद कर ऋतु की रसीली रसमलाई जैसी चूत पर मुंह टिका दिया। ऋतु ने अपने चूतड़ ऊपर हवा में उठा दिए और मेरे मुंह में अपनी चूत से ठोकरें मारने लगी।

दूसरे कमरे में आरती चाची ने मेरा लंड मेरी टांगों के बीच से लटकता हुआ देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और वो दोनों नंगे ही अपने कमरे से निकल कर हमारे कमरे में आ गए। चाची ने आते ही मेरी टांगो के बीच लेटकर मेरे लटकते हुए खीरे को अपने मुंह में भर लिया। मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी… “आआआ आअह्ह्ह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

चाचू भी अपना फड़कता हुआ लंड लेकर आगे आये और मेरे सामने लेटी हुई ऋतु के मुंह के पास जाकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। ऋतु ने उसे भूखी शेरनी की तरह लपका और उसका रस चुसना शुरू कर दिया।

चाची बड़ी आतुरता से मेरा लंड चूस रही थी। उनके और ऋतु के मुंह से सपड़ सपड़ की आवाजें आ रही थी। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और नेहा अन्दर आ गयी। वो अन्दर का नजारा देखकर बोली- मुझे तुम लोग वहां छोड़ कर यहाँ मजे ले रहे हो..
ये कह कर उसने भी अपने कपड़े उतारे और कूद गयी वो भी बेड पर।

नेहा भी ऊपर आकर अपने पापा के पास गयी और अपने नन्हे होंठों से उनके मोटे मोटे होंठ चूसने लगी। चाचू ने हाथ आगे करके अपनी बेटी के मोटे मोटे चुचे थाम लिए और उन्हें जोर से दबा डाला।
नेहा चाचू के आगे आ कर ऋतु के मुंह के ऊपर जाकर बैठ गयी। ऋतु ने चाचू का लंड चुसना छोड़ दिया और नेहा की चूत को चाटने लगी। चाचू का लंड अब नेहा के पेट से टकरा रहा था। नेहा काफी उत्तेजित हो गई थी और उससे सहन नहीं हुआ और उसने अपने पापा का लंड पकड़ कर अपनी रस उगलती चूत पर टिका दिया और उसे अन्दर समाती चली गयी.
“आआ आआआईईईई ईईईई… पपाआआ आआ…”
नीचे लेटी ऋतु ने इस काम को बड़ी खूबी से अंजाम दिया… लंड को चूत में धकेलने के लिए।

ऋतु अब नेहा की गांड के छेद को चूस रही थी। उधर अपने कमरे में जाने के बाद मम्मी को इस बात की बड़ी चिंता हो रही थी की आज वो चाचू के कमरे से नंगे बाहर निकलते हुए पकडे गए।
मम्मी इस बात को चाचू को भी बताना चाहती थी ताकि अगर हम उनसे भी पूछें हमारे मम्मी पापा रात के समय नंगे उनके कमरे से क्यों निकल रहे थे तो वो भी वो ही जवाब दें जो मम्मी ने दिया था।

यह सोच कर मम्मी अपने कमरे से निकली और चाचू के कमरे में चली गयी। वहां जाकर उन्होंने देखा कि कमरा तो बिल्कुल खाली था। तभी उनकी नजर दीवार पर गयी, शीशा नीचे पड़ा हुआ था और उस जगह एक बड़ा सा छेद था।

मम्मी आगे गयी और अन्दर झाँका। वहां का नजारा देखकर पूर्णिमा मैडम यानि मेरी माम के दिमाग के परखच्चे उड़ गए। उनका बेटा नंगा अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था और नीचे लेटी उनकी देवरानी उनके बेटे का लंड चूस रही थी और ऊपर उनका देवर अपनी ही बेटी को चोद रहा था और नीचे से उनकी बेटी नेहा अपनी जीभ से अपनी बहन ऋतु की गांड चाट रही थी।
उनकी आँखें घूम गयी ये सब देख कर।

मम्मी जल्दी से भाग कर वापिस गयी और अपने कमरे से पापा को बुला कर लायी। तब तक मैं अपने लण्ड को ऋतु की चूत में डाल कर चुदाई करने लगा था। मम्मी ने शीशे वाली जगह से पापा को अन्दर देखने को कहा।
जब पापा ने अन्दर का नजारा देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी। उनका छोटा भाई अपनी बेटी को चोद रहा था और उनका बेटा अपनी सगी बहन की चुदाई कर रहा था। ये देखकर वो आग बबूला हो गए और मम्मी को साथ लेकर वो दनदनाते हुए हमारे कमरे में आये और चिल्लाये- ये सब हो क्या रहा है!?!

पापा की आवाज सुन कर मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मैं स्तब्ध रह गया। पर मेरा लंड जो झटके मार मार कर अपनी बहन को चोद रहा था, वो नहीं रुका। मैंने धक्के देते हुए हैरानी से उनकी तरफ देखा और बोला- मम्मी.. पापा.. आप..?
उधर नेहा की चूत में उसके पापा का लंड अपनी आखिरी साँसें ले रहा था, चाचू से सहन नहीं हुआ और उन्होंने अपना रस अपनी बेटी की चूत में उगलना शुरू कर दिया। नेहा ने भी आँखें बंद करके अपने पापा के गले में अपनी बाहें डाल कर एक लम्बी चीख मारी- आआआआ अयीईईईइ… पपाआआ आआआ…
और वो भी झड़ने लगी। उनका मिला जुला रस नीचे लेटी ऋतु बड़े चटखारे ले ले कर पी रही थी।

ऋतु को मालूम तो चल गया था कि उसके मम्मी पापा कमरे में आ गए हैं पर अपनी चूत में अपने भाई के लंड के धक्के और अपने मुंह पर बरसते गर्म रस का मजा लेने से उसे कोई नहीं रोक सका।
ऋतु ने भी अपनी उखड़ी साँसों से उन्हें देखा और पूछा- मोम… डैड… आप यहाँ क्या कर रहे हैं?
मम्मी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए कहा- रोहण… क्या तुम ये करना बंद करोगे?
वो एक तरह से मुझे अपनी बहन की चूत मारने से रोक रही थी।

मैं अपने आखिरी पलों में था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला उसका विकराल रूप जो मेरी बहन की चूत के रंग में डूब कर गीला हो चुका था और उस पर चमकती नसे देख कर मेरी माँ की आँखें फटी की फटी रह गयी।
मेरे लंड ने बाहर निकलते ही झड़ना शुरू कर दिया और मेरी पिचकारी सीधे ऋतु की खुली हुई चूत से जा टकराई। चाची जल्दी से आगे आई और मेरे लंड पर अपना मुंह टिका दिया और मेरा सारा रस पी गयी।

चाची ने फिर ऋतु की चूत के ऊपर अपना मुंह टिकाया और वहां से भी मलाई इकट्ठी करके खा गयी और मेरी माँ की तरफ देखकर बोली- भाभी, आपके बच्चे बड़े टेस्टी हैं।

मम्मी ने चाची को डांटते हुए कहा- आरती… तुम ये सब कैसे कर सकती हो?
चाची ने सपाट लहजे में कहा- हमें तो इन्होंने ही बुलाया था।
मेरी माँ का मुंह खुला का खुला रह गया- क्या???

और फिर चाची ने सारी कहानी हमारे मम्मी पापा को सुना दी। वो अपना मुंह फाड़े सब बातें सुन रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि हम दोनों उनके कमरे में देखते हैं और हमें उनके बारे में सब पता है कि कैसे वो चारों लोग ग्रुप सेक्स करते हैं।
मम्मी-पापा ये सारी बात सुन कर शर्मिंदा हो गए पर फिर भी मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- तुम दोनों ने ये सब क्यों किया??
मैंने मम्मी को सीधे शब्दों में बताया- हम भी आपके और पापा की तरह बनना चाहते थे। जब हमने देखा कि आप और पापा, चाचू और चाची के साथ मिल कर सेक्स कर रहे हो और एन्जॉय भी कर रहे हो तो हमने भी ठान लिया की हम भी ये करेंगे। हमने यहाँ और लोगों को भी ग्रुप सेक्स करते देखा है और वो सब भी खूब एन्जॉय करते हैं।
मम्मी ने मुझसे रुंधी आवाज में कहा- लेकिन तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए।

अब ऋतु भी मेरे पक्ष में बोल पड़ी- क्यों नहीं करना चाहिए… मेरी चूत में हर तरह का लंड चला जाता है और मुझे उन्हें चूसने में भी मजा आता है… तो फिर ये सब क्यों नहीं करना चाहिए?
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये सब गलत है, भाई बहन को आपस में ये सब नहीं करना चाहिए।
ऋतु ने अपने शब्दों को पीसते हुए मम्मी से कहा- अच्छा… तो आप लोग जो करते हो वो गलत नहीं है क्या??

चाची जो बड़े देर से ये सब देख रही थी, वो मम्मी की तरफ हँसते हुए बोली- देखो भाभी, ये जो कह रहे हैं, वो सही है। हम लोग भी कहाँ रिश्तेदारी का ख्याल रखते हैं। हमें भी तो सिर्फ सेक्स करने में मजा आता है, अगर ये भी वो ही कर रहे है तो बुरा क्या है।
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये हमारे बच्चे हैं।

अब की बार चाचू ने कहा- हाँ हैं… और तभी इनके साथ ये सब करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है.
और उन्होंने अपनी बाँहों में पकड़ी नंगी नेहा को अपने सीने से दबा दिया और आगे बोले- और मुझे लगता है… कि आपको भी एक बार ये सब करना चाहिए।
मम्मी ने अपने सर को एक झटका दिया और कहा- मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं सोने जा रही हूँ, इस बारे में कल बात करेंगे।
चाची ने उनसे कहा- ठीक है बाय…

मम्मी ने हैरानी से पूछा- बाय का क्या मतलब है… तुम लोग नहीं जा रहे क्या अपने कमरे में?
चाची- नहीं, अभी मुझे कुछ और भी काम है.
और चाची ने हाथ बढाकर मेरे लंड को थाम लिया और दूसरे हाथ से अपनी चूत मसलने लगी।

मम्मी चिल्लाई- आरती… बंद करो ये सब!
चाचू आगे आये और मम्मी का हाथ पकड़ कर बेड पर बिठा दिया और कहा- अरे भाभी, आप यहाँ आओ और थोड़ा आराम करो.
चाचू का झूलता हुआ लंड मम्मी की आँखों के सामने लटक रहा था।

चाचू ने मम्मी का मुंह पकड़ा और अपना लंड उनके मुंह में ठूस दिया और उन्हें नीचे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उनकी छाती पर चढ़ बैठे।

चाचू ने मम्मी की आँखों में देख कर कहा- अब चुपचाप लेटी रहो और मेरा लंड चूसो भाभी!
और आरती की तरफ देख कर बोले- डार्लिंग… मेरी थोड़ी मदद करो न…
चाची- हाँ… हाँ… क्यों नहीं..
और चाची अपनी जगह से उठी और बेड के किनारे आकर मम्मी के गाउन को खींच कर बीच में से खोल दिया। मम्मी ने नीचे कुछ नहीं पहना था और चाची ने उनकी मोटी जांघें पकड़ कर उनकी रसीली चूत पर अपना मुंह रख दिया।

मम्मी के मुंह में चाचू का लंड था पर फिर भी उनके मुंह से घुटी हुई सी सिसकारी निकल गयी- आआआ आअह्ह्ह्ह…
चाचू का लम्बा लंड मम्मी के मुंह में किसी पिस्टन की तरह आ जा रहा था। नीचे बैठी चाची भी अपनी लम्बी जीभ के झाड़ू से मम्मी की चूत की सफाई करने में लगी हुई थी। चाचू ने मम्मी के ऊपर बैठे हुए उनके गाउन के बटन खोल दिए और मम्मी के मोटे चुचे ढलक कर दोनों तरफ झूल गए।

चाचू ने मम्मी के गाउन को कंधों से थोड़ी मुश्किल से उतारा और बाकी काम नीचे बैठी चाची ने कर दिया। चाची ने उनकी गांड ऊपर करके उसे नीचे से बाहर खींच दिया और इस तरह मम्मी हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी।

मम्मी को इतनी पास से नंगी देखने का ये मेरा पहला अवसर था। वो किसी अनुभवी की तरह चाचू के लंड को आँखें बंद किये चूस रही थी। मम्मी की चूत से इतना रस बह रहा था कि चाची उसे पी ही नहीं पा रही थी और वो बह कर मम्मी की गांड को भी गीला कर रहा था।

मम्मी के मोटे मोटे चुचे देख कर मेरे मुंह में भी पानी आ गया। मैंने उनके चुचे हमेशा अपने मुंह में लेने चाहे थे। घर में भी जब वो बिना चुन्नी के घूमती थी तो मेरा मन उनकी गोलाइयाँ देख कर पागल हो जाता था और अब जब वो मेरे सामने नंगे पड़े थे… मेरा लंड उन्हें देख कर तन कर खड़ा हो गया था, मैंने अपने हाथ से लण्ड को मसलना शुरू कर दिया।

ऋतु ने इशारा करके पापा को अपनी तरफ बुलाया। वो थोड़ा झिझकते हुए ऋतु के पास आये और हम सबके साथ आकर खड़े हो गए। ऋतु ने अपना हाथ उनकी कमर में लपेट दिया और उनसे सट कर खड़ी हो गयी।
पापा थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे.. हो भी क्यों न उनकी जवान लड़की नंगी जो खड़ी थी उनसे चिपक कर…

हम सभी की नजर मम्मी पर गड़ी हुई थी। मेरी देखा देखी पापा ने भी अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपनी पत्नी को अपने भाई और उसकी पत्नी के द्वारा चुदता हुआ देखकर वो भी अपना लंड हिलाने लगे।
पापा का मोटा लंड देखकर ऋतु की आँखों में एक चमक आ गयी। वो अपने पापा के लंड को काफी दिनों से देख रही थी और मन ही मन उनसे चुदना भी चाहती थी। आज उन्हें अपने साथ खड़ा होकर हिलाते देखकर उससे सहन नहीं हुआ और उसने झुक कर अपने पापा का लंड अपने मुंह में भर लिया।

पापा के मुंह से एक ठंडी सिसकारी निकल गयी- स्स्स स्स्स्स स्स्स… आआआ आअह्ह्ह…
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया।
अपने सामने बैठी अपनी नंगी बेटी को देख कर उनका लंड फुफकारने लगा और वो तेजी से उसका मुंह चोदने लगे।

“आआआ आआआ आह्ह्ह…” पापा ने अपनी आँखें बंद करी और एक तेज आवाज निकाली। ऋतु उठ खड़ी हुई और पापा के लंड को पकड़ कर आगे की तरफ चल पड़ी। बेड पर पहुंचकर उसने पापा को नीचे लिटाया और उनकी कमर के दोनों तरफ टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी और उनकी आँखों में देखकर अपनी चूत का निशाना उनके लंड पर लगाया और बोली- पापा प्लीज… चोदो मुझे… और उसने अपने मोटे चूतड़ों का बोझ पापा के लंड के ऊपर डाल दिया।

पापा का मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में ऐसे गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.
“आआ आआआआ आआअह्ह…” ऋतु ने एक तेज सीत्कार ली.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी ने अपनी आँखें खोली और पास लेटे अपने पति को अपनी बेटी की चूत मारते हुए देखा और फिर उन्होंने भी मौके की नजाकत समझी और अपनी आँखें बंद करके चाचू का लंड चूसने में मस्त हो गयी।

पापा और मम्मी ने जब एक दूसरे को देखा तो वो समझ गए कि अब अपने आपको रोकना व्यर्थ है इसलिए इन हसीं पलों के मजे लो और जब मम्मी ने आँखें बंद कर ली तो पापा ने अपना ध्यान ऋतु की तरफ लगा दिया।

पापा ने अपने हाथ ऊपर उठाये और ऋतु के झूलते हुए मम्मे अपने हाथों में भर लिए। वो हमेशा घर पर अपनी बेटी के ब्रा में कैद और टाइट टी-शर्ट में बंद इन्ही कबूतरों को देख कर मचलते रहते थे। आज ये दोनों रस कलश उनके हाथ में थे। उन्होंने अपना मुंह ऊपर उठाया और उन कलशों से रस का पान करने लगे। उनके मोटे मोटे होंठ और मूंछें ऋतु के नाजुक निप्पलों पर चुभ रही थी पर उनका एहसास बड़ा ही मजेदार था।

ऋतु ने अपने पापा के सर के नीचे हाथ करके अपनी छाती पर दबा दिया और अपना चुचा उनके मुंह में ठूँसने की कोशिश करने लगी। पापा ने अपना मुंह पूरा खोल दिया और ऋतु का आधे से ज्यादा स्तन उनके मुंह के अन्दर चला गया।
पापा का मुंह अपनी बेटी के चुचे से पूरा भर गया और फिर जब उन्होंने अपनी जीभ अन्दर से ऋतु के चूचों पर घुमानी शुरू की तो ऋतु तो जैसे पागल ही हो गयी। इतना मजा आज तक उसे नहीं आया था। नीचे से पापा का लम्बा लंड उसकी चूत की प्यास बुझा रहा था और ऊपर से पापा उसका दूध पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे।

चाची अपनी जगह से उठी और अपनी चूत को मम्मी के मुंह के ऊपर ले जाकर रगड़ने लगी। चाचू मम्मी के मुंह से नीचे उतर गए और उनके उतरते ही अपनी जवानी की आग में तड़पती हुई नेहा उन पर झपट पड़ी और चाचू के होंठ अपने मुंह में दबाकर नीचे चित लिटा दिया और चाचा का मोटा लंड अपनी चूत पर टिका कर उसे अन्दर ले लिया।
मैंने मम्मी की चूत के ऊपर अपना मुंह रखा और उसे चाटने लगा। मम्मी को शायद पता चल गया था कि मैं उनकी चूत चूस रहा हूँ। उन्होंने उत्तेजना के मारे अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये। मैंने नीचे हाथ करके उनके चौड़े पुट्ठे पकड़े और अपनी दो उँगलियाँ उनकी गांड के अन्दर डाल दी और अपनी लम्बी जीभ उनकी चूत के अन्दर।

मम्मी मचल उठी इस दोहरे हमले से…”आआआ आआआ आआआ आआआ आआह्ह्ह्ह..”
मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत के छेद पर टिका दिया।

आज मैं मम्मी की चूत चुदाई कर रहा था, उसी छेद के अन्दर अपना लंड डाल रहा था जहाँ से मैं निकला था। मेरे लंड का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर मम्मी तो बिफर ही पड़ी। उन्होंने अपने चूतड़ फिर से ऊपर उठा लिये और मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर समाता चला गया।
“आआआ आअह…” मम्मी के मोअन की हल्की आवाजें चाची की चूत से छन कर मुझे सुनाई दे रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैं तेजी से अपनी माँ की चूत मारने लगा।

उधर ऋतु अपने आखिरी पड़ाव पर थी, वो पापा के लंड के ऊपर उछलती हुई बडबडा रही थी- आआआअह्ह्ह… चोदो मुझे पापा… अपने प्यारे लंड से… फाड़ डालो अपनी बेटी की चूत इस डंडे से… चोदो न… जोर से… आआआह्ह्ह… बेटी चोद… सुनता नहीं क्या तेज मार… कुत्ते… बेटिचोद… चोद जल्दी जल्दी… आआआ आआह्ह… डाल अपना मुसल मेरी चूत के अन्दर तक… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह… और तेज और तेज और तेज… आआआअह्ह्ह… हाँ… ऐसे..ही… भेन्चोद… चोद… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह!

पापा से अपनी बेटी के ये प्यारे शब्द बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने अपना रस अपनी छोटी सी बेटी की चूत के अन्दर उड़ेल दिया। ऋतु भी पापा के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु को देखकर नेहा को भी जोश आ गया… वो भी चिल्लाने लगी चाचू के लंड पर कूद कर- हननं… डेडी…चोदो अपनी बेटी को… देखो ऋतु को ताऊ जी कैसे चोद रहे है… वैसे ही चोदो अपनी लाडली को… डालो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर तक… आआहहह… डाआल ऊऊऊऊओ…
और वो भी चाचू के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु पापा के लंड से नीचे उतरी और पापा के लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। चाची जो अपनी चूत मम्मी से चुसवा रही थी, उन्होंने अपना सर आगे किया और ऋतु की चूत से टपकते पापा के रस को पीने लगी।

मेरे लिए भी अब सब्र करना कठिन हो गया था। मैंने भी एक दो तेज झटके मारे और अपना पानी मम्मी की चूत के अन्दर छोड़ दिया। मम्मी ने अपने अन्दर मेरे गर्म पानी के बहाव को महसूस किया और वो भी जोर से चिल्ला कर झड़ने लगी- आआह आआ आअह्ह्ह्ह… आआआ… अह.. अह.. अ..अ..हहा.. ह..अ..ह.. हा..हा.. हा…!
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।
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