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चुदाई की भूखी लड़की के साथ सेक्स किया Chudai ki bhukhi ladki ke sath sex kiya

चुदाई की भूखी लड़की के साथ सेक्स किया Chudai ki bhukhi ladki ke sath sex kiya, मस्त और जबरदस्त चुदाई , चुद गई , चुदवा ली , चोद दी , चुदवाती हूँ , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी , Hindi Sex Story , Porn Stories , Chudai ki kahani.

एक लड़की थी निर्जुम उम्र 18 साल उससे बात करके मैने जाना की वो थोड़ी ग़रीब परिवार से है। दिल की अच्छी है। और सेक्स की भूखी है। उसके घर मे माँ, बाप, भाई, भाभी और वो है। मैने उससे बहुत बार सेक्स चैट करी है। और उसको नेट भी ज़्यादा चलाना नही आता था तो मैने उसे समझाया ओर उसके लिए आई-डी बनाई। वो जब भी मुझे सेक्स चैट करती थी तो वो बहुत जज्बाती हो जाती थी। और कहती थी मुझे कुछ डालना है चूत मे ओर कभी बोलती की मोमबती डाल रही हूँ तो कभी बोलती केला डाल रही हूँ।

मुझे तो लगता था झूट बोल रही है। उसने मुझसे कहा की मैं तुमसे जीवन मे एक बार ज़रूर चुद्वाऊगी। फिर धीरे धीरे समय चलता गया। कभी कभी बात होती थी। फिर जब मुझे उस पर विश्वास हुआ तो मैने उसको अपनी फोटो दिखाई। जब तक वो नेट में एक्सपर्ट हो गयी थी। उसको मैं बहुत अच्छा लगा। उसने मुझे कहा की वो मिलना चाहती है। मुझे लगा था की वो घर से नही निकल पाएगी। तो मैने उससे कहा तो उसने कहा की घर से निकालने की क्या ज़रूरत है। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। जब आप मेरे घर पर ही रुकोगे तो उसने मुझे बताया की हम टूरिस्ट लोगो को अपने यहा रेस्ट करने देते है। 
 
पैसे लेकर आप आ जाना और पापा से बात कर लेना। तो वो आपको 1 रात के लिए 400 रु. किराया लेगें। मैने कहा ठीक है। उसने कहा की आप ऐसे दिखावा करना की आप मुझे जानते नही। तो मैने कहा ठीक है। मैं शुक्रवार को निकला और रात 8 बजे पहुचा और उसके पापा को फोन किया और कहा की मेरा दोस्त आपके यहा रुका था तो उसी से नंबर मिला मुझे 3 दिन के लिए रुकना है उन्होने मुझे रूम बताया मैं पहुचा तो निर्जुम मुझे पहली बार दिखी क्या माल थी गोरी नही थी। सावली थी। हाइट 5’5 इंच होगी। और फिगर देखने लायक था। उसका फिगर 34 28 36 था। मैं तो देखते ही खुश हो गया। वो मुझे देख के मुस्कुराई वो आगन मे काम कर रही थी घर का। और वो अपना काम करने लगी। उसने ब्लाउस टाइप का शर्ट पहना था। बॉडी ज़्यादा भी टाइट नही। पर उसका बोब्स दिख रहे थे।

और वो नीचे लोंग स्कर्ट पहनी थी मैं तो मन ही मन बहुत खुश हुआ। और वो चल रही थी तो उसकी गांड क्या हिल रही थी। मुझे लड़कियो की मटकती गांड कुछ ज़्यादा ही पसंद है। मेरा लंड हिलना शुरु हो गया। मैं ज़्यादा नहीं देख पाया क्योंकि उसका बाप वही कुछ और काम कर रहा था। मैं उनसे मिला उन्होने मुझे एक कमरा दिया। मैने खाना खाया वो मुझे नही दिखी उसके बाप ने ही खाना खिलाया। रात के 10 बज गये। खाना खाते खाते फिर सोचने लगा कब मिलेगी ये। मैने लैपटॉप चालू किया और ब्लू फिल्म देखने लगा अपने रूम मे। वहा पर लोग जल्दी सो जाते है। 11 बजे करीब पूरा सुनसान था। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। तो मुझे आगन मे से झूला हिलने की आवाज़ आई। 
 
मैं खुश हुआ देखा तो वो झूला झूल रही थी और मेरे दरवाजे की तरफ ही देख रही थी। वो वही कपड़े पहनी थी। और झूले की वजह से उसके बोब्स मस्त हिल रहे थे। लग रहा था की ब्रा नही पहनी। मैने दरवाजा खोला और उससे अंदर आने का इशारा किया। तो वो इधर उधर देख के दबे पाँव मेरे रूम मे आ गयी मैने दरवाजा बंद किया और उसे देखने लगा। बहुत सुंदर थी और उसकी बड़ी बड़ी लिप्स किस करने लायक थे। वो मेरे पास आई और मेरे गले लग गयी। मैने बनियान पहने हुवे था। वो जब मेरे गले लगी तो उसके बोब्स क्या प्रेस हो रहे थे। तब मुझे लग गया की ब्रा नही पहनी। मैने उसका चेहरा पकड़ा और ढेर सारे होटो पर किस करने लगा। फिर मैं अपना हाथ कमर से लेते हुए। उसकी गांड पे ले गया। उसने पेंटी नही पहनी थी। मैं उसकी गांड को ज़ोर से दबाने लगा। उसको जोश आ गया और मेरा सर के पीछे बॉल पकड़ कर मुझे ज़ोर से किस करने लगी। मेरी जीभ चुस रही थी। और अपनी डाल रही थी। मज़ा ही आ गया।

मैं एक हाथ से उसके गांड दबा रहा था और दूसरा हाथ आगे लाकर स्कर्ट के उपर से चूत पर फेरने लगा। वो गीली हो गयी थी। मेरा तो मन कर रहा था की अभी नीचे जाके चूत चाट लू। और फिर मैने किस रोक दिया। वो तो करे ही जा रही थी। और क्या मुह से आवाजे निकल रही थी। किस करते वक्त। फिर हमने एक दूसरे को देखा और मुस्कुराए। फिर मैने उसका हाथ पकड़ के उल्टा किया और पीछे से उसके बॉल एक तरफ किये। और उसके कंधे को किस करने लगा और मेरा लंड उसके गांड से टच हो रहा था। और एक हाथ से बोब्स दबाने लगा और दूसरे हाथ से स्कर्ट उपर करके चूत धीरे धीरे हाथ फेरने लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। क्या चूत थी। मज़ा आ गया। वो कह रही थी की तडपती हूँ मैं तुमसे मिलने के लिय आज तो खा ही जाना। छोड़ना मत। और सिसकारिया ले रही थी। 
 
जैसे जैसे मैं बोब्स के निप्पल और चूत हाथ फेर रहा था। वैसे वैसे उसकी आवाज़े और सिसकारिया बडती जा रही थी। उसने कहा की मुझे पीछे कुछ चुभ रहा है। और वो अपने आप मेरे लंड को पकड़ने लगी। मेरा लंड लंबा हो गया था। वो उसको अपने हाथ से दबा रही थी, और आवाज़े निकल रही थी। क्या मस्त लंड है। इसको तो मैं खा जाउंगी। कितने दिन से चुदना चाहती थी तुमसे और ना जाने क्या क्या बोल रही थी। मेरा लंड बाहर निकाला और अपनी स्कर्ट उपर करी और गांड के बीच में मूठ मार रही थी। और उसकी आखे बंद थी वो मुझे होटो पे किस करने लगी मदहोश होकर। वो सच मे भूखी शेरनी लग रही थी।

मै उसके बोब्स दबाने लगा और निप्पल को भी दबाने लगा। तो वो कहने लगी और ज़ोर से दबाओ। मैने उसके शर्ट के बटन खोलने लगा। फिर पूरे बटन खोल दिए और उसके बोब्स जो बाहर आये तो देखने लायक थे। उसके निपल्स अच्छे थे और बड़े थे। लग रहा था की खुद इनको रोज मालिश करती है। तभी इतने बड़े है। मैने दोनो बोब्स को हाथ मे लिया। मैने कहा जान क्या बोब्स है। खुद दबाती हो की कोई आता है दबाने इतने बड़े हो गए। उसने कहा की पड़ोस का लड़का कभी कभी दबा देता है। और जब स्कूल जाती थी तो दोस्त और टीचर से दबाते थे। मैने कहा जान पहले तो कभी नही बताया ये सब और कितने राज छुपाए है। वो कहने लगी बस तुम मेरी इस भूख को शांत करो मैं सब बताती हूँ। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैं उसके बोब्स दबाए जा रहा था दोनो हाथो से। 
 
वो स्पंज बॉल की तरह लग रहे थे। सॉफ्ट। मैं उसके पीछे से दबा रहा था और वो एक हाथ मे लंड पकड़ के गांड और चूत मे फेर रही थी और दूसरे हाथ से अपने निपल्स दबा रही थी। और कह रही थी की ऐसे दबाओ और आ…. आ… की सिसकारिया ले रही थी और फिर कहने लगी। आज जम कर चोदना मुझे खा ही जाना सुबह तक चोदते रहना। जब मैने देखा की साली खुद ही अपने निप्पल दबा रही है। तभी इतने बड़े हुए है। उसने कहा ऐसा क्या देख रहे हो। कभी लड़की को खुद से खेलते नही देखा क्या और मुझे आगे कर के मेरा सिर अपने बोब्स मे डाल दिया और कहने लगी खा ले मेरे राजा….चूस डाल…काट ना…..मेरे निप्पल को बारी बारी….कितना मज़ा आ रहा है….भगवान तुमने चुदाई क्या चीज़ बनाई है। शरीफ से शरीफ लड़की भी चुदते वक्त रांड़ बनना चाहती है। मैने उसका शर्ट पूरा निकाल दिया अब वो सिर्फ़ स्कर्ट मे थी।

मेरा हाथ तो उसके गांड मे था। स्कर्ट के कपड़े के उपर से सहलाने मे जो मज़ा आ रहा था वो बता नही सकता। उसने मेरा बनियान निकाला और मेरे निप्पल को चाटने लगी। मुझे तो मज़ा आ रहा था। मैं लंड उसकी चूत लंड से रगड रहा था। लंड रगड करने से वो मुझे और ज़ोर से पकडने लगी और जो आवाज़े निकलती थी उससे तो मदहोश हो रहा था। उसने मुझे छोड़ा और नीचे झुक कर मेरा लंड मुह मे ले लिया। एक बार मे पूरा। मैं तो समझ गया था की ये तो रंडी है। खूब मज़ा आएगा पर वो हमेशा मुझसे कहती थी की वो केला डालती रहती है चूत मे। मैने उससे कहा कितने लंड ले चुकी हो। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। तो उसने लंड को चूसते हुए कहा की एक लंड लिया है बहुत बार एक महीने मे। 
 
मैने कहा कौन तो उसने कहा की छोटे चाचा ने तो मैने उसे उपर उठाया और कहा पहले क्यू नही बताया तो उसने कहा की क्या कहती की चाचा ने चोदा है मुझे मैने उससे बेड पे बैठाया और उसका स्कर्ट उपर करते हुए किस कर रहा था। क्या टाइट थे… मैं उससे प्यार से बाते करता हुआ उसकी चूत पे आया। क्या सुगंद थी यार मज़ा ही आ गया। और मैने कहा की पेंटी क्यू नही पहनी तो उसने कहा की अभी उतार के आई हूँ। तो मैने कहा की मुझे तुम्हारी पेंटी की सुगंद लेनी है तो उसने कहा क्यू मैने कहा की मुझे सुगंद अच्छी लगती है। और तुम्हारी चूत की सुगंद बहुत मस्त है तो उसने कहा ठीक है पर पहले मेरी चूत चूसो और मेरा सर पकड़ के डाल दिया।

मैने उसकी चूत कुत्ते की तरह चाटी और अपनी जीभ से अंदर बाहर करने लगा। वो अपनी गांड हिला के चुसवा रही थी। वो क्या आवाज़े निकाल रही थी और ज़ोर से हिल हिल कर करवाना चाह रही थी उसे और जोश आ रहा था। उसने कहा मुझे लंड चूसना है। मैं नीचे और वो मेरे उपर मैने उससे अपने मुह पर बैठाया पहले और उसकी चूत को खूब मूह लगाया जीभ डाली। वो मेरे उपर बेठ के हिल रही थी और दूसरे हाथ से मेरा लंड उपर नीचे कर रही थी। फिर थोड़ी देर बाद उसे नही रहा गया और उसने मेरे मूह मे बैठे बैठे अपना चूत रस छोड़ दिया। मेने पूरा चाट लिया। और फिर वो नीचे झुकी और लंड चाटने लगी क्या मज़ा आ रहा था। फिर मैने थोड़ी देर लेटा रहा। फिर वो अपनी चूत मेरे मूह मे रगड़ करने लगी तो मैं समझ गया की फिर से आ गयी जोश मे। मैने इस बार उसकी गांड को दबाने लगा। 
 
आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। वो तो उचकने लगी और कहन लगी ये क्या कर रहे हो। । किसी ने आज तक वहा किस नही किया। तुम क्या कर रहे हो। । । और वो सिसकारिया ले रही थी। मैने पूछा तुमको मज़ा आ रहा है की नही तो वो बोलने लगी बहुत आ रहा है। मैने बारी बारी चूत और गांड खूब चाटी और उसने भी लंड खूब प्यार से चाटा। मेरा निकालने वाला था तो मैने पूछा की मेरा निकालने वाला है तो वो और ज़ोर से चूसने लगी। और मैं उसके मूह मे छुट गया। वो लंड घुमा घुमा के चूस रही थी। मज़ा आ गया…मैने चाट चाट के गांड और चूत लाल कर दिए थे। उसको बड़ा मज़ा आया।

फिर उसने मेरा लंड छोड़ा और कहने लगी की मुझे घोड़े की सवारी करनी है। मैं समझ गया आज तो पुरा मज़ा देगी ये। वो सीधी हुई और मेरे मुह मे सीधे आकर बैठ गयी और पलंग को हाथ से पकड़ कर आगे पीछे होने लगी। वो कह रही थी…आ..हा मेरे घोड़े और ज़ोर से भाग और ऐसे कहते कहते झड़ गयी। और मेरे पास मे लेट गयी। ये सब देख के तो मेरा लंड खड़ा हो गया था। उसने मेरा खड़ा लंड देखा और वो बिना कुछ कहे मेरे लंड पर बैठ गयी और उपर नीचे होने लगी और सिसकारिया ले रही थी। आ…आआ…उ.ऊ.. मज़ा आ गया…. यह दिन मैं आज तक नही भूल पाया। क्या गांड हिला हिला के गोल गोल लंड ले रही थी। मैं तो उसको देख कर और जोश मे आ गया, ऐसा लग रहा था की जन्नत यही है। 
 
उसका चेहरा इतना नशीला लग रहा था बताना मुश्किल होगा। वो अपने बोब्स को खुद दबा रही थी और एकदम से उसको पता नही क्या हुआ। कहने लगी…मार भोसड़ी के…आज तो मेरा भुर्ता बना दे। गली के लड़के तो मेरे आगे पीछे घूमते रहते है। मैने कभी उनमे से किसी से नही चुदवाया…मैं खुद भी चाहती हूँ की कोई मुझे निचोड़ के रख दे….इतना प्यार करे की मेरी सारी प्यास भुझ जाए….पर मैने कभी उनको मोका नही दिया बदनामी के वजह से….अब तुम आ गये हो….छोड़ना मत…बस चोदते रहो। मैने उसकी कमर पकड़ी और एक बार मे उसको लेटा दिया लंड डाले रहने दिया। और जो शॉट मारने शुरू किया पलंग हिलने लगा और पूछ पूछ की आवाज़े आने लगी। इतने ज़ोर से मैने कभी किसी की चुदाई नही की होगी। वो बनी ही चुदाई के लिए थी।  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं लगातार 5 मींनट तक शॉट मारता रहा। कभी बोब्स दबाता…निपल्स दबाता….वो मचल उठती। वो जब अपने हाथ से चूत रगड रही थी। और मैं चुदाई मे लगा हुआ था। ये सीन देख कर और जोश आ गया। ये सारा जोश मुझे अपने लंड पे महसूस हो रहा था। में अपनी गांड हिला हिला के चुदाई कर रहा था। फिर जब वो झडने के लिए हुई….तो उसकी आखे बड़ी हो गयी और अपनी गांड ज़ोर से उचकाने लगी। मुझे ये देखकर झडने का मन हुआ तो में भी झड़ गया। क्या आवाज़े निकल रही थी….आआ..आआ.. करते झड़ गये हम दोनो पसीना पसीना हो गये थे। मैं उसके उपर लेट गया और थोरी देर लेटा रहा। उसके बाद हम उठे पानी पिया। वो बाथरूम जा रही थी। उसकी पीछे से गांड देखने लायक थी क्या हिल रही थी। बिल्कुल टाइट थी और मोटी गांड थी। उपर नीचे होते जा रही थी।

पड़ोसन लड़की को चोद कर औरत बना दिया Padosan ladki ko chodkar aurat banaa diya

पड़ोसन लड़की को चोद कर औरत बना दिया Padosan ladki ko chodkar aurat banaa diya, कुँवारी लड़की की प्यासी चूत को मिला बड़ा लंड, झाठों वाली कुँवारी लड़की ने दिया चुदकर मजा, लिंग चूसा, चूमे दिए, होंठ चुसवाए.

यह आज से 6 माह पहले की घटना है.. जब मैंने पटना कॉलेज में दाखिला लिया था और मैं इससे पहले दिल्ली में रहता था और जून या जुलाई में मेरा दाखिला पटना कॉलेज में हो गया था। मैं छपरा का रहने वाला हूँ और मैंने दाखिले के बाद पटना में ही यहीं पर रूम लिया और मैं जहाँ पर रहता हूँ वहीं पर सभी अपनी अपनी फेमिली के साथ रहते है और उसमे मैं ही एक सिंगल लड़का हूँ जो कि एक सिंगल रूम वाला फ्लेट लेकर रह रहा हूँ। मेरा फ्लेट पहली मंजिल पर है और उस मंजिल पर दो और फ्लेट है जिसमे दो फेमिली रहती है.. एक जिनकी अभी नई नई शादी हुई.. मतलब नया शादीशुदा जोड़ा और एक अंकल आंटी है जिनकी एक ही बेटी है जिसका नाम रुनका है। वो एक मस्त माल है.. उसका फिगर 30-28-32 का होगा। वो इतनी मस्त है कि उसे देखने के बाद मुझे मुठ मारनी पड़ती है और उसे मैंने पहली बार अपने मकान की छत पर घूमते हुए देखा था..

जहाँ पर उसने एक पतली सी टॉप एक लोवर पहन रखा था। मैं तो उसके बूब्स का दीवाना हो गया था और मैंने मन ही मन यह सोच लिया था कि इसे मुझे कैसे भी करके इसे चोदना है। मैं बातें बहुत करता हूँ और मेरी इसी आदत के कारण रुनका के पापा से बहुत बनती थी और मैं उनका छोटा मोटा काम कर दिया करता था.. क्योंकि उनके घर में कोई लड़का नहीं था। एक बार रुनका छत पर टहल रही थी तो मैं भी छत पर चला गया और जैसे ही मैंने उसे देखा तो मेरा लंड खड़ा होने लगा और मैं उसे देखकर मुस्कुरा दिया, तो उसने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। तभी मैं समझ गया कि हंसी तो फंसी। मैंने आगे बात बढाकर उससे उसका हाल चाल पूछा। तभी उसने बताया कि वह बिलकुल ठीक है। वो भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मैंने लोवर पहन रखा था इसलिए मेरा तना हुआ लंड उसे साफ साफ दिख रहा था और मैं अपने लंड को दीवार से रग़ड़ रहा था और वो अपनी नजरे झुकाए शरमा कर मुस्कुरा रही थी और फिर इसी तरह हम छत पर हर रोज मिलने लगे। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

तभी मैंने एक दिन उससे उसका मोबाईल नंबर माँगा तो उसने मुझे अपना मोबाईल नंबर दे दिया। फिर हम रोज जब भी मौका मिलता फोन पर घंटो बातें करने लगे। फिर एक दिन मैंने उसे एक फिल्म देखने के लिए कहा लेकिन वो मना करने लगी शायद वो अपने घर वालो के डर से मना कर रही थी और मेरे बहुत समझाने पर वो थोड़ी देर बाद मान गई। फिर वो मेरे साथ फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल गई। मैंने साइड की दो टिकट ली और हम लोग फिल्म देखने चले गये। फिर फिल्म चल रही थी और पूरे हॉल में अंधेरा था और एक बार एक चुंबन का सीन आया तो मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी और रुनका भी अपनी चूत को जीन्स के ऊपर से ही घिस रही थी। मुझसे ये देखकर रहा नहीं गया और मैंने भी अपना लंड सहलाना शुरू किया।

फिर फिल्म में एक और सीन आया जिसमे लड़के ने लड़की को बेड पर लेटा दिया और उसके टॉप को उतार रहा था। तभी मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और मैंने रुनका का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया.. लेकिन वो घबरा गई और उसने अपना हाथ हटा लिया। फिर भी मैं अपने लंड को अपने हाथ से रगड़ता रहा और इंटरवेल हो गया। तभी मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने सिनेमा हॉल के बाथरूम में जाकर मुठ मार ली। फिर हम लोगो ने फिल्म देखी और फिल्म खत्म होने के बाद हम घर की ओर चल दिए.. लेकिन रास्ते में उसने मुझसे बात नहीं की। फिर शाम को हम छत पर फिर से मिले तो मैंने उससे पूछा कि तुमने मुझसे आते समय बात क्यों नहीं की? तो उसने कहा कि तुम हॉल में तो खुद पर कंट्रोल कर लेते और इतना कहकर वापस नीचे चली गई। उसने मेरे फोन करने पर भी कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया ना ही ठीक से बात की। तभी अगले दिन रुनका के पापा मेरे पास आए और मुझसे बोले कि बेटा हम एक दिन के लिए कुछ काम से बाहर जा रहे है तो क्या तुम रुनका का ख़याल रख लोगे? और उसे किसी भी चीज़ की ज़रूरत होगी तो ला देना। 

फिर मैंने कहा कि अंकल आप टेंशन मत लो.. मैं सब संभाल लूँगा और फिर दिन में उनकी ट्रेन थी और उन्हे रेलवे स्टेशन छोड़ने मैं और रुनका भी गये थे और हम उन्हे रेलवे स्टेशन छोड़कर घर पर वापस आ गये और मैंने घर पर पहुंच कर रुनका से कहा कि किसी भी चीज़ की दिक्कत हो तो मुझे कॉल करना और इसी तरह शाम हो गई और मैंने रुनका को फोन किया और कहा कि मैं खाना होटेल से लाकर दे देता हूँ.. तुम खाना मत बनाना। शाम को 7 बजे मैं ख़ाना पेक करवा कर उसके घर गया उसने दरवाजा खोला तभी मैं उसे देखकर दंग रह गया। वो आज कुछ ज़्यादा ही हॉट और सेक्सी लग रही थी और उसे इस तरह से देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा.. उसका लोवर बहुत ही छोटा था जिससे उसकी जाँघ दिख रही थी। मैं तो पागल हो रहा था। फिर हमने साथ में खाना खाया और फिर उसने कहा कि उसे घर में अकेले डर लग रहा है इसलिए मैं आज उसी के यहाँ पर रुक जाऊँ। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

तभी मैंने कहा कि मैं चेंज करके आता हूँ और मैंने एक हॉलीवुड सेक्सी फिल्म की डीवीडी ले ली और उसके घर गया और हम लोग फिल्म देखने लगे और मैं बेड पर लेटकर फिल्म देख रहा था और धीरे धीरे मेरा लंड गरम हो गया और साथ साथ वो भी गरम हो गई और वो अपनी चूत को सहलाने लगी। तभी मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया.. लेकिन पहले तो उसने विरोध किया फिर मेरे कहने पर वो भी मेरा साथ देने लगी और मैं उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और मैंने उस को बेड पर पटक कर उसके कपड़े उतार दिए और मैं उसके काले कलर की ब्रा में सफेद कलर के बूब्स को देखकर पागल हो गया और ब्रा के ऊपर से ही बूब्स पर टूट पड़ा और मैं उसके बूब्स को दबाने और चूसने लगा। वो भी आँहे भरने लगी ऊऊऊऊऊऊ अह्ह्ह्हह और कहने लगी कि और ज़ोर से दबाओ खा जाओ मेरे बूब्स को और मैं पागल की तरह बूब्स को चूस रहा था। तभी मैंने ब्रा को बूब्स के ऊपर से हटा दिया.. लेकिन खोला नहीं। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाया वो बहुत गीली थी। तभी मैंने उसका लोवर उतार दिया लेकिन उसने पेंटी नहीं पहन रखी थी। मैं तो चूत देखकर उसकी चूत का दीवाना हो गया क्योंकि मैंने आज तक कुवारीं लड़की की चूत नहीं देखी थी। 

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगा दी और चूसने लगा। वो जोर जोर से चिल्लाने लगी वो पागल हो रही थी और सिसकियाँ ले रही थी आआआअहह मैं मर जाऊंगी आआआहह आज चोद दो मुझे लड़की से अपनी रंडी बना दो। मैंने लगभग 15 मिनट तक उसकी चूत चूसने के बाद अपनी पेंट उतारी और अपना लंड दिखाया तो वो देखते के साथ ही उसे मुहं में लेकर चूसने लगी और 10 मिनट तक चूसती रही। मैंने अब अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड चूत में 1 इंच अंदर चला गया और वो चीखने लगी.. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी और उसकी चूत में लगातार जोर जोर के धक्के लगाता रहा और फिर 3-4 शॉट के बाद मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर था और वो दर्द से रो रही थी और कह रही थी कि प्लीज छोड़ दो मुझे और उसके बेड पर उसकी चूत से खून निकल कर गिर रहा था। फिर मैं उसका दर्द कम करने के लिए उसके बूब्स चूसने लगा। 10 मिनट बाद उसका दर्द कम हुआ। फिर मैंने दोबारा से धक्के लगाने शुरू किए मैं उसे सीधे लेटा कर चोद रहा था और 20 मिनट की जोरदार चुदाई में वो 2-3 बार झड़ गयी थी और अब मेरे झड़ने की बारी थी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

तभी मैंने उससे कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ। तो उसने कहा कि प्लीज अंदर ही डालकर मेरी चूत की गर्मी को शांत कर दो। फिर जोर जोर के धक्को के साथ ही उसकी चूत में झड़ गया और 10 मिनट तक उसके ऊपर ही लेटा रहा। फिर हम दोनों उठकर बाथरूम गये और उसने मेरा लंड चाट चाटकर साफ किया और अपनी चूत को भी धोकर साफ किया। मेरा लंड फिर से तनकर खड़ा था उसकी चुदाई करने के लिए और मैंने उसकी चूत को फिर से चोदा। उस रात हमने 3 बार चुदाई की और वो एक लड़की से एक औरत बन गई थी। फिर अगले दिन सुबह हम 9 बजे उठे और उसके पापा मम्मी शाम को आने वाले थे तो हम लोग एक साथ नहाए फिर हमने एक बार फिर चुदाई की और बेड को भी अच्छे से साफ़ किया ताकि किसी को कुछ पता ना चले। आज भी हमे जब मौका मिलता है हम चुदाई करते है ।

पति को वो करने का टाइम नहीं मिलता है Pati ko vo karne ka time nahi milta hai

पति को वो करने का टाइम नहीं मिलता है Pati ko vo karne ka time nahi milta hai, मस्त और जबरदस्त चुदाई , चुद गई , चुदवा ली , चोद दी , चुदवाती हूँ , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी , Hindi Sex Story , Porn Stories , Chudai ki kahani.

मै एक इंजिनियर हूँ और मेरा नाम विजय (बदला हुआ नाम) है. ये बात तब की है, जब मैं बंगलौर में था और वहां जब कर रहा था. मेरा ऑफिस और घर थोडा पास में ही था. तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती थी ट्रेवल करने में और मेरा काफी समय सेव हो जाता था. मैं करीब 6:30 PM तक मेरे रूम पर पहुँच जाता था. अपार्टमेंट में, मैने ग्राउंडफ्लोर पर एक 2 BHK ब्लाक रेंट पर लिया था. वो पूरी बिल्डिंग ही नयी बनी हुई थी. जिसमे रहने वाला, मैं पहला रेजिडेंट था.

कुछ दिन के बाद, मेरी ही बिल्डिंग में एक कपल रहने आ गया, बिल्डिंग के 3rd फ्लोर पर. वो लोग राजस्थानी थे और वो दोनों न्यूली मैरिड कपल थे. दोनों स्टेयर (ऊपर जाने की सीढ़िया) मेरे ही फ्लैट के बगल में थे, तो वो मेरे ही ब्लाक से होकर गुज़रते थे. चुकि, पूरी बिल्डिंग में हम दोनों ही लोग थे, हम लोगो की आपस में बातचीत शुरू हो गयी थी और वो मेरे घर भी आने लगे थे. अक्सर सन्डे को या छुट्टी वाले दिन, टाइम मिलने पर वो मेरे घर आ जाते टाइम पास करने के लिए और हम टीवी देखकर या बातें करके अपना टाइम पास करते. ऐसे ही समय बीत रहा था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

थोड़े ही दिनों में, हम लोगो की अच्छी फ्रेंडशिप हो गयी और एक दिन राजेश ने मुझसे से कहा – “अरे विजय तुम तो दिन भर ऑफिस में रहते हो और मैं भी शॉप में ही रहता हूँ और मेरी वाइफ, निकिता पूरा दिन घर अकेली रहती है और पुरे दिन बोर होती है”. तो मैने बोला – “हाँ, तो मै क्या कर सकता हु???” तो राजेश ने बोला – “कुछ नहीं अगर तुम बुरा नहीं मानोगे, तो एक रिक्वेस्ट है”. मैने बोला – “हाँ, बताओ तो सही”. तो उसने पूछा – “तुम्हारे घर की चाबी अगर तुम मेरी वाइफ को दे सकते हो, तो अच्छा रहेगा. जब भी वो बोर होगी, तो वो आके टीवी देख लेगी, तुम्हारे घर पर”. मैने कहा – “ओके, नो प्रॉब्लम. लेकिन, थोडा ध्यान से .. बैचलर का रूम है. हर चीज़ इधर-उधर पड़ी रहती है”.

वैसे ही डेज पास्ड और एक दिन मेरा ऑफिस थोडा जल्दी ख़तम हो गया और मैं 5 बजे ही घर पहुँच गया. उसदिन, निकिता बैठी हुई थी मेरे घर पर और टीवी देख रही थी. जब मैं अन्दर घुसा, तो मुझे शौक लग गया, वो मेरी ब्लूफिल्म की डीवीडी लगा कर देख रही थी. मुझे अचानक देखकर वो डर गयी और उसने डीवीडी प्लेयर बंद कर दिया और नार्मल टीवी चालू कर दिया और अपने घर जाने लगी. मैने उसे रोका और बोला – “बैठो ना, नो प्रॉब्लम. कुछ गलत नहीं है”. फिर वो मेरे कहने पर रुक गयी और डरी हुई सी बैठ गयी और बोली – “विजय, प्लीज ये बात किसी को नहीं बताना और तुम भी इस बात को इग्नोर कर देना प्लीज”. मैने बोला – “ठीक है” और वो चली गयी. वो अगले दिन से रोज़ मैने आने तक मेरे ही घर पर बैठी रहती और जब मैं आता, तो मेरे लिए चाय बनाके लाती और दोनों देर तक बातें करते और फिर मैं सिगरेट पीता और उसको भी उसके स्मोक से कोई प्रॉब्लम नहीं थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

एकदिन, वैसे ही जब मैं आया, तो वो फिर से मेरी वो ब्लूफिल्म वाली डीवीडी लगा कर देख रही थी, तो मैने वो देखा और शौक हो कर पूछा – “क्या हुआ, ब्लूफिल्म देखने का बड़ा शौक चड़ा है तुम्हें”. तो उसने पुरे डेरिंग से बोला – “हाँ कुछ ऐसा ही समझ लो, रियल लाइफ में तो कुछ ज्यादा मिलता नहीं”. तो हमारा कन्वर्सेशन कुछ ऐसे चला.

मैं – “क्यों क्या हुआ?”

निकी – “कुछ नहीं, बस मेरे हँजबेंड को उस काम के लिए टाइम ही नहीं मिलता”.

मैं – क्यों?

निकी – वो आते रात को 11 बजे तक और तब तक मुझे बहुत ही नीद आती है और मैं सोयी रहती हूँ. वो आके खाना खाते ही सो जाते है और मुझे सेक्स करने का बहुत ही इंटरेस्ट है, लेकिन उनके पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है.

मैं – ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तो अब क्या करना चाहती हो?

निकी – कुछ नहीं

मैं – इफ यू डोंट माइंड, मैं तुम्हे सेटइसफाई कर सकता हूँ.

निकी – ये सुनते ही वो बोली – “अरे नहीं, इट्स ओके”

मैं – देख लो गोल्डन ऑफर दे रहा हु, मेरे जैसा जबरदस्त लड़का ढूंढने से भी नहीं मिलेगा, तुम्हें!

(उसें 2 - 3 बार मना किया, फाइनली उसने एक्सेप्ट किया)

निकी – तुम क्या-क्या कर सकते हो, बताओ तो सही?

मैं – बताऊंगा नहीं, सब कुछ करके दिखाऊंगा.

मैने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खीच लिया और उसे अपनी बाहों में जकड कर हग किया, तो वो बोली – “इतनी छोटी सी बात समझने में, इतने दिन लगा दिए, विजय”? मैने उसकी ये बात को सुनते ही फुल टेम्प्ट हो गया और उसको किस करने लगा होठो पर, फुल जोर से किस किया. उसने भी बहुत जोर से और पुरे इंटरेस्ट से कोआपरेट किया. फिर मैने उसके कपडे उतारे. उसके बूब्स ओह माय गॉड! वो तो बहुत गोरे-गोरे और सॉफ्ट जैली की तरह थे. मै उन बूब्स को सक कर रहा था. 5 मिनट के बाद, उसने बोला – “सिर्फ तुम ही चूसते रहोगे, या मुझे भी लोलीपोप चूसने का मौका दोगे?” आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं उठा और उसने मेरे सारे कपडे उतारके मेरा 7.5 इंच का लौड़ा उसके हाथ में लिया और बोला “अरे वाह, ये तो मेरे पति के लंड से काफी बड़ा है. सेम तो सेम, ब्लूफिल्म में रहता है उतना बड़ा”. उसने उसे अपने मुह में लेकर चुसना शुरू कर दिया और उसने मुझे 10 मिनट तक ब्लोजॉब दिया. मेरा आउट हो गया और उसने वो पूरा लिक्विड पी लिया और 2 - 3 मिनट तक और चूसा और मेरा लंड अगेन खड़ा हो गया, तो उसने कहा – “चलो अब रियल गेम शुरू करते है”. मैने कहा – “ मैं तो कब से रेडी हूँ”. तो उसने कहा – “अच्छा है, कब से मैं चूस रही हूँ, तुम मज़े ले रहे थे, तब क्यों नहीं रोका. मैने बोला – “कोई बात नहीं, अब मेरे पास आ जाओ, ये सारी बातें छोड़कर”.

मैने उसको पूरा नंगा किया और उसे बेड पर लिटा दिया. उसने अपने दोनों पैरो को खोलकर मुझे अपनी प्यारी सी चूत का व्यू दिखा दिया, जो उसने अच्छे से शेव कर रखी थी. मैं उसकी तरफ और भी ज्यादा टेम्प्ट हो गया और उसकी क्लीन सेव्ड चूत देखकर, मैने उसकी चूत को 4 मिनट तक चूसा. वो मेरा सिर पकड़कर बोल रही थी. “अह्ह्ह्हह्ह … उम्म्मम्म ….मम्म, विजय तुम कितने अच्छे से चूसते हो”. “अह्ह्ह्हह्ह विजय तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले”. अह़ा अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह विजय आआआह्ह्ह. फिर उसने मुझे मेरा सिर पकड़कर उठाया और मेरे कानो में पास आकर बोला – “प्लीज विजय, मेरी चूत बहुत ही प्यासी है. लौड़े की प्यास है मुझे आज. मुझे चोदो ना … बहुत जोर से चोदो ना”. ये सुनते ही, मैने उसके चूत में अपना लंड डाला और जोर से धक्का लगाया. तो उसकी आह निकल गयी. फिर उसे दर्द हुआ और उसने बोला – “अरे विजय, थोडा धीरे से”. उसदिन, मैने उसको बहुत चोदा और बहुत जोर से चोदा. 10 मिनट तक चोदते ही रहा और उसकी आँखे बंद हो गयी थी

और उसकी जुबान से सिर्फ अहह्ह्ह निकल रही थी और वो बार-बार बोल रही थी – “विजय चोदो..विजय चोदो…मुझे चोदो..आज बहुत चोदो मुझे विजय … मेरी चूत फाड़ दो, विजय … और जोर से चोदो. मेरा हँजबेंड तो मुझे प्यार नहीं करता, तुम मुझे प्यार करो ना, मुझे बहुत प्यार करो. मुझे बहुत प्यार करो और मुझे बहुत चोदो..आज मैं सिर्फ तुम्हारी हु … सिर्फ तुम्हारी … चोदो मुझे ..बहुत जोर से चोदो”. मेरा आउट हो गया और उसने बोला – “तुम मेरे अन्दर ही आउट करो, मुझे बहुत अच्छा लगेगा”. और उस दिन उसका पति घर नहीं आने वाला था. तो वो रात भर मेरे घर पर ही थी. हम दोनों ने रात भर ब्लू फिल्म्स देखि और वही पोजिशन में सेक्स किया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

उस दिन के बाद से तो मेरी लाटरी लग गयी. रोज़ जब मैं घर जाता हूँ, तो मेरे लिए फ्रेश होने के लिए गरम पानी लाती है और एक मस्त सेक्सी चूत अपनी सेक्सी ब्रा और पेंटी में तैयार रहती है, एक गरम और वाइल्ड सेशन के लिए.

मैं उत्तेजित था और उसके मुँह में झड़ गया Main uttejit tha aur uske munh me jhad gayaa

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मैं जामिया, दिल्ली से बीबीए कर चुका हूँ और यह मेरी बीबीए के पहले साल की बात है। मेरे दूर के रिश्ते में एक अंकल थे.. उनका नाम गुर्मी पंका था.. उनके घर में उनकी बीवी के अलावा 2 बेटियाँ थीं.. वो लोग ग्वालियर में रहते हैं। वो लोग पहली बार जब हमारे घर पर आए तो मैं उनसे पहली बार मिला था और फिर मैं अपने कमरे में जाकर पढ़ने लगा। उस समय वो दोनों पति-पत्नी अकेले ही आए थे। उन्होंने शाम को खाना खाया और थोड़ा बहुत उन लोगों ने मेरी पढ़ाई के बारे में पूछा.. फिर मैं सोने चला गया।

काफ़ी दिन बीत गए.. तो एक दिन मेरे पापा ने मुझसे कहा- तेरे इम्तिहान हो गए हैं.. जा कुछ दिन अंकल के यहाँ घूम आ.. मेरी माँ और पापा को कहीं काम से 7-8 दिन के लिए जाना था। पहले तो मैंने मना कर दिया लेकिन फिर सोचा कि चलो कुछ बदलाव हो जाएगा.. घर में पड़ा-पड़ा बोर हो जाऊँगा.. उनके कहने पर मैं ग्वालियर चला गया। मैं सुबह 6 बजे घर से निकला.. सिकोहाबाद से पहले आगरा गया.. फिर आगरा से बस से ग्वालियर गया। मैं 11 बजे ग्वालियर पहुँचा.. अंकल-आंटी दोनों लोग मुझे लेने के लिए बस स्टैंड पर ही आ गए थे। हम घर चल दिए.. घर पहुँचा तब घर में कोई नहीं था। मैं थक गया था.. सो नहाया.. फिर चाय पी.. बाद में सो गया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं जब शाम को सोकर उठा तो 5 बज चुके थे। तब मुझे अपने कानों में एक प्यारी सी आवाज़ सुनाई दी.. पहले तो मुझे लगा कि कोई पड़ोसी वग़ैरह होगा.. लेकिन जब आंटी मेरे कमरे में आईं और प्यार से मेरे बालों में हाथ फिराती हुई बोलीं- बेटा हाथ-मुँह धो कर आ जाओ.. सब तुम्हारा चाय पर इन्तजार कर रहे हैं। मैं उठा और 10 मिनट बाद सबके साथ था। मैं थोड़ा शर्मीले स्वभाव का हूँ। आंटी ने मेरा परिचय अपनी दोनों बेटियों से कराया। बड़ी बेटी रिया.. जो बी.कॉम. सेकण्ड इयर में थी और छोटी बेटी दिया.. जो 12 वीं में थी। दोनों कमाल की सुंदर थीं.. मेरा मन खिल उठा.. लेकिन अपने शर्मीले स्वभाव के वजह से मैं उनसे ज़्यादा कुछ बोल नहीं पाया। छोटी बेटी ने तो ‘भैया-भैया’ बोल कर मेरा दिमाग़ खराब कर दिया था.. लेकिन वो बहुत क्यूट थी।

अगले दिन सुबह की बात है.. बड़ी बेटी रिया कॉलेज जा रही थी.. वो प्रेस्टीज कॉलेज मे थी.. उसकी स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही थी.. और वो कुछ जल्दी में थी। वो अन्दर गई और अपने पापा से कुछ कहा तो अंकल ने मुझे बुलाकर कहा- बेटा मुझे तैयार होने में देर हो जाएगी.. तुम रिया को कॉलेज छोड़ आओ। पांच मिनट बाद मैं बाहर आया.. बाइक निकाली और चल दिया। रिया शायद हमेशा दोनों तरफ पैर करके बैठती थी.. इसलिए मुझे कुछ असहज सा महसूस हुआ। मैंने रिया को एक तरफ पैर करके बैठने को कहा.. तो वो बैठ तो गई.. लेकिन कुछ लड़कियों की आदत होती है.. कसकर पकड़कर बैठने की.. जैसे-तैसे मैं उसे छोड़ कर वापस आ गया.. हमारे बीच में उस समय थोड़ी बहुत बात ही हो पाई थी। शाम को वो आई तो बहुत खुश थी और आते ही मुझे ‘थैंक यू’ बोली और कहा कि शाम को वो मुझे घुमाने ले जाएगी।

शाम को बाइक पर बातों-बातों में रिया से मैंने उससे ब्वॉयफ्रेण्ड के बारे में पूछा.. तो उसने कहा- नहीं है। फिर हम थोड़ा खुल कर बातें करने लगे.. अचानक मेरी बाइक के सामने एक स्कूटर गलत तरफ से आ गया और इस चक्कर में बैलेंस बिगड़ गया और रिया गिर गई। मैंने उसे ‘सॉरी’ कहा.. तब वो बाद में दोनों तरफ पैर करके बैठ गई। उसके मम्मे बार-बार मेरी पीठ पर लग रहे थे.. मेरे लवड़े की हालत खराब हो रही थी। बाद में वापस घर पहुँच कर हम सबने खाना खाया और फिर हम कैरम खेलने बैठ गए। वो बार-बार मेरे पैर में अपना पैर मार रही थी.. थोड़ी देर बार रिया और दिया मेरे साथ छत पर टहलने गए। तभी दिया किसी काम से नीचे आई तो रिया ने मुझे चुम्बन कर लिया.. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं रोमांचित हो उठा.. फिर मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और हम चूमा-चाटी करने लगे और ये भी भूल गए कि दिया भी आ सकती है। तभी दिया आ गई.. उसने ये देखा तो रिया से बोली- ये ग़लत है..। तो रिया ने उसे हड़का कर समझा दिया और कहा- तेरा चक्कर पड़ोस के लड़के से चल रहा है.. मुझे पता है। फिर दिया चुप हो गई और बोली- इट्स ओके.. लेकिन ‘जो’ भी होगा.. मेरे सामने करना होगा। हम फिर नीचे आ गए.. अगले दिन अंकल बाहर चले गए और आंटी अपनी किटी पार्टी में जाने लगीं। आंटी दिया से बोलीं- मैं 11 बजे रात तक आऊँगी.. ध्यान रखना। हम सब खुश हो गए थे। रिया ने तभी अन्दर जाकर अपनी माँ की नाईटी पहन ली.. जो बिल्कुल पारदर्शी थी और उसने अन्दर ब्रा-पैन्टी के सिवा कुछ पहना भी नहीं था…

शायद रिया पिछले दिन कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित हो गई थी। वो मेरे कमरे में आते ही मुझ पर टूट पड़ी। मुझे बेतहाशा चुम्बन करने लगी.. मैं भी सब कुछ भूल कर उसके होंठों का रस पान करने में लग गया। मैंने जल्दीबाजी में उसकी ब्रा भी फाड़ दी.. हम पहले चूमा-चाटी करते रहे.. फिर रिया बोली- अब किस ही करोगे.. या कुछ और भी करोगे? मैं इस खेल में नया था.. तो उसी ने पहल की और मेरा लण्ड पकड़ कर चूसने लगी।
मैं उत्तेजित हो गया और उसके मुँह में ही झड़ गया, फिर मैंने उसे बाँहों में भर लिया और बिस्तर आ गया। उसने अपनी पैन्टी उतार कर फेंक दी.. उसे बिल्कुल नंगी देखकर मैं बौरा सा गया था। रिया बोली- तुम्हारा बहुत बड़ा है.. मेरी जरा सी में.. इतना बड़ा कैसे जाएगा।

मैंने तेल की शीशी उठाई और उसकी चूत पर तेल लगा दिया। उसकी चूत कमाल की थी.. वो एकदम गोरी.. मोम की तरह मुलायम.. मैं तो उसकी चूत के गुलाबीपन पर पागल ही हो गया था.. पहले हम चूमा-चाटी करते रहे.. फिर उसकी चूत पर मैंने अपना लण्ड रख दिया.. धक्का मारा तो पहली बार वो फिसल गया। फिर मैंने उससे कहा- जरा इसको पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर रखो.. उसने मेरा लवड़ा पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिका लिया। मैंने जैसे ही धक्का मारा.. मेरा लण्ड 2 इंच उसकी चूत में घुस गया.. वो सिहर उठी और चीख पड़ी। मैंने झट से उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए.. दो मिनट रुककर मैंने फिर से एक ज़ोर से झटका मारा.. तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए… वो रोने लगी और उसकी चूत से खून भी निकल आया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने उसे सहलाया और प्यार किया। कुछ मिनट बाद वो कुछ जरा नॉर्मल हुई.. फिर उसे मज़ा आने लगा।
अब वो खुल कर चुद रही थी.. मैं उसके आमों को खूब चूस रहा था। कुछ ही मिनट के बाद वो झड़ गई और मैं उसे धकापेल चोदता रहा.. करीब दस मिनट बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ गया। हमने 12 बजे तक 3 बार चुदाई की… मज़ा आ गया। मैं जब तक वहाँ रहा.. मौका मिलते ही उसकी लेता रहा.. अब भी मैं जब ग्वालियर जाता हूँ.. तो हम मज़े करते हैं। बस एक ही मलाल रहा कि दिया की नहीं ले पाया।

मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरी कुवारी चूत फाड़ दी Mere boyfriend ne meri kuvari chut faad di

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हाय दोस्तो, मेरा नाम डॉली शर्मा है.. मैं 26 साल की हूँ आज मेरा फिगर 32-30-34 का है.. बहुत से लड़के मुझ पर आज भी मरते हैं..उस वक्त मेरा गोरा बदन.. 28-24-28 का मोहक फिगर.. उम्र 20 की थी, मेरा पूरा बदन भरा-पूरा था, मेरे काले घने बाल लेकिन छोटे बहुत से लड़के मुझ पर मरते हैं.. बाकी लड़कों के साथ मेरे पड़ोस में ब्यूटी पार्लर वाली आंटी का लड़का भी था। मैं 12वीं क्लास में पढ़ती हूँ और मेरी आंटी का लड़का राजराग भी मेरे साथ मेरे स्कूल में ही 12वीं क्लास में पढ़ता है, स्कूल की बहुत सी लड़कियाँ उस पर मरती हैं। मैं उसे राज कह कर बुलाती हूँ और हम दोनों साथ ही स्कूल जाते हैं, इस तरह लगभग सारा समय इकट्ठे ही बिताते है। हम दोनों अच्छे दोस्त थे.. इस वजह से राज अक्सर हमारे घर आता-जाता था।

एक दिन मेरे-स्कूल में बायो का प्रैक्टिकल चल रहा था। मैं और मेरी फ्रेण्ड रोशनी साथ में ही थे। यह मेरे इम्तिहानों का फाइनल वाला प्रैक्टिकल था। मैं और रोशनी अपनी ही मस्ती में थे, हम दोनों मेंढक के नीचे वाले अंग देख रहे थे। ओहह.. अब आप से क्या छुपाना.. मैं और रोशनी मेंढक के पप्पू महाराज के दीदार कर रहे थे।
तभी रोशनी ने कहा- इतने से लण्ड से क्या करता होगा मेंढक? मेरे मुँह से निकल पड़ा- उसकी मेंढकी से जा कर पूछ.. जिसकी चुनमुनिया में ये जाता है.. वो ही बताएगी। यह बात को उसके ब्वॉय-फ्रेण्ड ने सुन ली और वो हमारे पास आकर बोला- डॉली तुम्हारा तो पता नहीं पर.. रोशनी को सब पता है कि कैसा मज़ा आता है।
मैं यह सुन कर थोड़ी सी भौंचक्की रह गई। बाद में रोशनी ने मुझे बताया कि वो उसके साथ चुदाई का मज़ा ले चुकी है और वो भी स्कूल में ही चुदी थी। मैं उसकी बात सुन कर गर्म हो चुकी थी और मेरा मन कर रहा था कि कोई आकर मेरी भी चुनमुनिया में अपना लण्ड डाल दे.. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

पता नहीं इस ख़याल में मेरा हाथ पता नहीं कब चुनमुनिया पर चला गया.. और मैं उसको सहलाने लगी।
उस वक्त मेरी मुन्नी पर बाल थे.. तभी रोशनी ने मुझको बोला- चल तुझको ठंडी कर देती हूँ। मैं मना किया.. लेकिन वो मानी नहीं और मुझे टॉयलेट में ले गई। उस वक्त वहाँ कोई नहीं था.. क्योंकि स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी। मैं वहाँ गई.. तो उसने जाते ही मेरी पैन्टी और सलवार एक झटके में उतार दिया। मैं हैरान थी कि वो करना क्या वाली है। उसके बाद वो मेरी मुन्नी को सहलाने लगी.. कभी वो अपनी उंगली मेरी चुनमुनिया में अन्दर कर दी.. कभी बाहर.. मैं अपने होश में नहीं थी.. पर मुझे मज़ा आ रहा था। बस 5 मिनट में ही मेरी मुन्नी ने पानी छोड़ दिया और रोशनी ने अपने रूमाल से मेरी मुन्नी को साफ़ किया। उसके बाद बोली- चुनमुनिया की सफाई नहीं करती है क्या?

मैंने कहा- रोज़ तो नहाती हूँ.. और साबुन से रोज चुनमुनिया साफ़ करती हूँ।
वो बोली- पागल बचपन वाली सफाई नहीं.. बड़ी वाली।
मैं समझी नहीं कि वो कहना क्या चाहती है।
उसने बोला- तू ऐसे ही खड़ी रह और अपनी आँखें बंद कर ले।

जैसा वो बोली.. मैंने किया.. तभी मुझे लगा कि मेरी चुनमुनिया पर कुछ चल रहा है.. लेकिन मैं देख नहीं पाई.. क्योंकि उसने मेरी आँखों पर रूमाल बाँध दिया था। मैंने रूमाल हटाया तो देखा.. मेरी मुन्नी का वो आधा मुंडन कर चुकी है।

मैंने उससे बोला- क्या कर रही है..?
बोली- तेरी मुन्नी को बड़ा बना रही हूँ।

कुछ ही देर में उसने मेरी मुन्नी को पूरी तरह से गंजा कर दिया। पहली बार मैंने अपनी चुनमुनिया को बिना बालों के देखा था। बहुत प्यारी लग रही थी। उसके बाद वो और मैं क्लास में वापस आ गए। प्रैक्टिकल हुआ और सब घर जाने को रेडी हो गए.. मैं.. राज.. रोशनी और उस का ब्वॉय-फ्रेण्ड ही रह गए थे।

रोशनी बोली- डॉली तुम जाओ.. मैं थोड़ा सा लेट आऊँगी।
मैं समझ गई.. और बोली - ठीक है..
उसके बाद मैं ओर राज जाने लगे कि तभी राज को कुछ काम याद आ गया, वो बोला- डॉली तुम चलो.. मैं अभी आता हूँ… मुझे कुछ काम है।
मैंने बोला- ठीक है।
मैं चलने लगी.. तभी मुझे रोशनी की याद आई कि देखना चाहिए कि वो वहाँ कर क्या रही है? मैंने सोचा वापस जा कर देखती हूँ कि माज़रा क्या है। मैं वापस स्कूल में गई.. सब जगह देखा.. पर मुझे वो दोनों नहीं दिखे। मैं वापस आने लगी.. तभी कुछ ‘खुस्स फुस्स’ की आवाजें आ रही थी- आराम से डालो.. आह्ह.. मैं मर जाऊँगी.. आह्ह.. मैंने वापस जाकर देखा कि रोशनी पूरी नंगी थी और जय रोशनी का ब्वॉय-फ्रेण्ड भी नंगा था। रोशनी उसकी गोद में बैठी थी.. और पागलों की तरह उछल रही थी। उन दोनों को कुछ भी होश नहीं था कि मैं भी यहाँ हूँ। दस मिनट तक वो उसकी गोद में मज़े ले रही थी। उसके बाद रोशनी उसके कान में कुछ बोली तो जय ने उसको गोद से उतार कर बड़े वाले डेस्क पर ले गया और वहाँ लिटा दिया। उसके बाद जय अपना लौड़ा उसकी चुनमुनिया में डालने लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
इस चुदाई को देख कर मैं भी पागल हो गई थी.. ये क्योंकि पहली बार था जब मैंने किसी लड़के का लौड़ा रियल में देखा था… वो भी अपनी बेस्ट फ्रेण्ड की चुदाई करते हुए। उसके बाद जय रोशनी के ऊपर चढ़ गया और तेज-तेज झटके देने लगा। रोशनी पागलों की तरह.. कभी किस करती.. कभी अपने चुचों को दबाती.. कभी कुछ करती.. जय ने अपना लण्ड आराम से निकाला और एकदम से उसकी गाण्ड में डाल दिया। रोशनी उसके लिए रेडी नहीं थी.. वो चिल्लाई.. लेकिन जय ने उसका मुँह बंद कर दिया और पूरा लौड़ा उसकी गाण्ड में डाल दिया। रोशनी अब भी मज़े ले रही थी.. थोड़ी देर बाद वो दोनों झड़ गए और कपड़े पहनने लगे। मैं भी वापस जाने के लिए जैसे ही मुड़ी.. तो मैंने देखा कि मेरे पीछे राज खड़ा था और उसकी पैन्ट आगे से गीली और ऊपर को उठी हुई थी। मैंने उसको हटाना चाहा.. तो बोला- डॉली.. तुम ऐसी होगी.. मैं सोच नहीं सकता था।

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और उसी कमरे में अन्दर ले गया.. जहाँ रोशनी की चुदाई चल रही थी। थोड़ी देर हमारी बहस हुई तो पता चला कि यह इन तीनों का प्लान था कि मेरी और राज की भी चुदाई करवा ही दी जाए।
मैं ये सुन कर हैरान थी कि मेरी बेस्ट फ्रेण्ड ही मेरी ठुकाई की तैयारी करवा रही थी। मैंने मना कर दिया- मुझको ऐसा कुछ नहीं करना है.. लेकिन राज ने मेरा हाथ पकड़ लिया- आई लव यू.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। मेरे होंठों को चूसने लगा..

तो मैंने कहा- नहीं राज.. ये सब ग़लत है.. तुम मेरे फ्रेंड हो..
राज ने मेरे कंधे हाथ रख दिया और कहने लगा- देखो डॉली मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.. और जैसे-जैसे तुम जवान हो रही हो.. मैं तुम्हें और भी प्यार करना चाहता हूँ।
उसने मेरे गाल पर एक चुम्बन कर दिया.. मैं शर्मा गई और मैंने कहा- राज प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ.. पर अगर किसी को पता चल गया.. तो बहुत बुरा होगा।
राज बोला- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा..
मैं तो वैसे ही रोशनी की चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी… मैंने ज्यादा नाटक नहीं किया। फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे चुचों पर रख दिया और कहा- डॉली मैं इनका रस पीना चाहता हूँ। उसने मेरे शर्ट को ऊपर कर दिया। आगे कुछ और होता.. इससे पहले वहाँ से रोशनी और जय चले गए थे। रोशनी मेरे हाथ में जाने से पहले कन्डोम का पैकेट दे कर हँसते हुई बोली- हैपी फकिंग डे.. मैं भी हँस पड़ी थी। उसके बाद राज ने मेरी कमर में अपना हाथ डाल दिया, अब मैं भी गर्म हो गई थी, राज मेरे चुचों को ब्रा के ऊपर दबाने लगा.. वो बेरहमी से चुचों को मसल रहा था। एक साथ दोनों चुचों को बुरी तरह मसलने से मैं एकदम से चुदासी हो उठी। राज ने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिए और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे। वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगा था। अब उसने मेरे कपड़े उतारना शुरू किए.. पहले मेरी कमीज़ निकाली.. फिर मेरी सलवार खींच दी। अब मैं सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। फिर राज ने मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तने हुए चुचों को चूमने-चाटने लगा।
राज के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था..

मैं अपने दोस्त के साथ नंगी थी, राज मेरे चुचों को मुँह में पूरा भर के चूस रहा था और अपने एक हाथ से मेरी चुनमुनिया को भी सहला रहा था। फिर थोड़ी देर बाद राज ने मेरी अनछुई चिकनी-चिकनी जाँघें चूम लीं.. मैं सिहर उठी। राज पागलों की तरह मेरी जाँघों को अपने मुँह से सहला रहा था और चूम रहा था। फिर हौले से राज ने मेरी पैन्टी भी निकाल दी। मेरी बिना बालों वाली अधखिली गोरी गुलाबी चुनमुनिया को देखते ही वो एकदम से चकित रह गया और बोला- रोशनी शेव अच्छी करती है। मैं हँस दी..
उसने मुझको बोला- रोशनी को मैंने ही बोला था कि तेरी मुन्नी का मुंडन कर दे।

राज ने मेरी पूरी चुनमुनिया हाथ में थाम ली और मेरी पूरी चुनमुनिया को दबा दिया। चुनमुनिया को सहलाता हुआ राज बोला- हाय डॉली.. मेरी जान.. क्या चीज़ है तू.. क्या मस्त माल है.. हहमम्म ससस्स हहा.. राज ने अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया.. अब वो मेरी चुनमुनिया को बुरी तरह मसलने लगा, मुझे बहुत मज़ा आने लगा.. मैं सिसकारी भरने लगी.. राज और जोश में चुनमुनिया को मसलने लगा.. उसने मसल-मसल कर मेरी चुनमुनिया लाल कर दी थी। उसके इस तरह से रगड़ने से मेरी मुन्नी 2-3 बार झड़ चुकी थी, बहुत गीला हो गया था, राज के हाथ भी गीले हो गए थे.. सारा पानी निकल बाहर रहा था, मैं निढाल हो रही थी। फिर राज ने मेरी चुनमुनिया की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चुनमुनिया के होंठों को अपने होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसने लगा।
मैं तो बस कसमसाती रह गई.. मैं तड़पती मचलती हुई ‘आआहह.. आअहह.. राज.. राज.. हाय.. उईईइ.. आहह..’ कहती रही और राज चूस-चूस कर मेरी अधपकी जवानी का रस पीता गया। बड़ी देर तक मेरी चुनमुनिया की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी। तभी राज ने अपने कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गया और उसका लंड फड़फड़ा उठा.. करीब 7 या 8 इंच का लोहे जैसा सरिया था। मैंने कहा- राज.. यह तो बहुत बड़ा और मोटा है.. ये मेरी चुनमुनिया में नहीं जा पाएगा।
तो राज ने कहा- डॉली तू फिकर मत कर.. फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ.. तुझे कुछ नहीं होने दूँगा।
उसने अपना लंड मेरी चुनमुनिया की तरफ बढ़ाया… तभी राज बोला- डॉली.. कन्डोम तो दे.. जो रोशनी ने जाते समय तुमको दिया था। मुझे याद ही नहीं था कि इसकी भी जरूरत पड़ेगी। मैंने अपने हाथों से कन्डोम राज के लण्ड पर लगाया और सहलाने लगी। उसके बाद राज ने मुझको डेस्क पर आराम से लिटा दिया। मैं सोच रही थी जो हालत अभी रोशनी की थी.. अब मेरी होने वाली है। राज के लंड के टच करते ही मेरी चुनमुनिया ने पानी छोड़ दिया। मैं बुरी तरह तड़प रही थी। राज 5 मिनट तक मेरी चुनमुनिया को अपने लंड से सहलाता रहा.. फिर उसने मेरी चुनमुनिया पर हल्का सा ज़ोर लगाया.. तो मेरी चीख निकल गई। उसका लंड अन्दर नहीं जा रहा था।
राज ने कहा- थोड़ा दर्द होगा.. लेकिन फिर ठीक हो जाएगा।
मैंने मंत्रमुग्ध कहा- ओके.. लेकिन राज प्लीज़ आराम से करना।
राज ने ज़ोर से अन्दर डाला.. तो उसका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया।
मेरी आँखों में आँसू आ गए- आह.. मैं मर जाऊँगी राज.. प्लीज़ निकालो.. बहुत दर्द हो रहा है.. आह ओफ… ममाआ..
यह कहते हुए मैं उससे गिड़गिड़ाने लगी.. पर वो नहीं माना और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठों लगा दिए। वो मेरे होंठों को चूसने लगा और अपने लौड़े को मेरी चुनमुनिया में ऐसे ही डाले रखा। मेरी चुनमुनिया से खून निकल रहा था और मैं बुरी तरह तड़प रही थी। वो कहने लगा- तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़।
मैंने हल्के स्वर में कहा- राज आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।
फिर राज ने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चुनमुनिया में जड़ तक घुस गया। मैं सिहर उठी और ‘आह.. ओह्ह.. राज मैं मर गई..’ कहने लगी। राज मुझे तसल्ली देता रहा और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, वो मेरे दूध चूसता रहा। लगभग 5 मिनट बाद उसने धीरे-धीरे झटके मारना शुरू किए।
मैं- आह्ह.. राज.. मज़ा आ रहा है… इस बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी और वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुआ मुझे चोदता रहा। लगभग 10 मिनट बाद राज ने अपना सारा माल मेरी चुनमुनिया में ही छोड़ दिया। हम लेट गए.. मेरी चुनमुनिया पानी और खून छोड़ती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थी, मेरी चुनमुनिया का हाल-बेहाल हो चुका था। कुछ देर बाद राज ने मेरी चुनमुनिया को साफ़ किया और फिर से चूसने लगा। थोड़ी देर में राज का लंड फिर से खड़ा हो गया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
राज ने मुझको लण्ड मुँह में लेने के लिए कहा पर मैंने मुँह में नहीं डाला और उसे किस करने लगी। पर राज के बहुत बार कहने पर मैंने उसको मुँह में ले लिया। मुझे लण्ड का स्वाद कुछ अजीब सा लगा। राज मुझसे कहने लगा- डॉली मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरी फ्रेण्ड मुझसे इतना प्यार करती है। उसके बाद हम ऐसे ही लेटे रहे। इतनी अधिक थकान थी कि मेरी तो उठने की भी हिम्मत नहीं थी। राज ने मेरी टाँगों की मालिश की और मुझको कपड़े पहनाए.. उसके बाद जब मैं पैदल नहीं चल पा रही थी तो उसने मुझको रिक्शे से मेरे घर पर छोड़ा। उस के 1-2 हफ्ते तक मैंने उससे बात नहीं की.. मुझे लाज आ रही थी। उसके बाद सब नॉर्मल हो गया।

पड़ोसी की इकलोती बेटी सोनिया की चुदाई Padosi ki ikloti beti soniya ki chudai

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सोनिया और मैं बचपन से ही एक दुसरे के करीब थे; वो मेरे पड़ोसी की इकलोती बेटी थी. मेरा बड़ा भाई सपन मुझसे 10 साल बड़ा था इसलिए मुझे सोनिया की कम्पनी अच्छी लगती थी. पहले गुडिया से खेलते थे और अब कोलेज की देहलिज पर आ चुके है. वैसे इस हॉट लड़की की फिगर भी काफी अच्छी थी कोलेज के फर्स्ट इयर से ही सब उसके 34-28-32 के बदन के दीवाने बने थे. कोलेज में भी सोनिया मेरे साथ ही रहती थी. उसके भारी स्तन के काफी दीवाने थे और कभी कभी तो जब सोनिया मेरे साथ नहीं होती थी तो मेरे कुछ दोस्त भी मुझे कहते थे की सोनिया तो माल है, यार तू तो इसकी हर रोज लेता होगा. लेकिन मैं उन्हें कुछ नहीं कह पाता था की. खैर ऐसे ही दिन बीत गए और हम दोनों अब कोलेज के दुसरे साल में आ गए.

पहले साल की एक्जाम में सोनिया का पुरे क्लास में तीसरा नंबर आया था और उसने सभी दोस्तों को पार्टी दी थी. हम इसी पार्टी को ख़तम कर के मेरी कार में घर आ रहे थे. पूरी पार्टी में सोनिया के छोटे स्तन और व्हाईट टी-शर्ट मेरे दिल को सताते रहें, मेरा लंड अगिनत बार खड़ा हुआ था, पर पिछले 19 साल की तरह मैं आज भी खामोश ही रहा. गाडी अपनी गति से चल रही थी, और उसमे एक मस्त रोमेंटिक गाना चल रहा था. सोनिया अपनी टांगो को डेशबोर्ड पर रख के बेठी थी और उसकी जांघो तक का भाग खुला था. शर्दी का मौसम था पर इतनी ठंड नहीं थी. सोनिया ने तभी बॉयफ्रेंड बनाने की बात की. मेरा दिल जैसे की कट रहा था और वोह हंस हंस के अलग अलग लड़के जो उसके दिल में थे उनकी अच्छाई बुराई का लिस्ट बता रही थी. मेरे दिल ने मुझे कहाँ “कबीर आज नहीं तो फिर कभी नहीं….अगर सोनिया किसी और के चक्कर में पड़ी तो यह स्तन यह हुशन का धन कोई और लूटेगा”. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने तुंरत गाडी की ब्रेक लगाईं और साइड में गाडी रोक के सोनिया की गर्दन से उसको पकड के अपनी तरफ खिंच लिया. वोह कुछ समझे उसके पहले मैंने उसके गुलाबी लिपस्टिक वाले होंठो से अपने होंठ मिला दिए. वो थोडा इधर उधर हुई और फिर उसने भी मेरे होंठो को चूमना और चुसना चालू कर दिया. मेरा लंड अंदर पड़ा पड़ा एंठने लगा था. मैंने सोनिया को और खिंचा और उसके स्तन पर हाथ रख के इन भारी स्तन को मसलना चालू कर दिया. सोनिया पागलो की तरह मुझे चूस रही थी. मैंने उसे पीछे से पकड के दूर किया. 

वोह बोली - “कबीर अगर आज मैं जूठमुठ में बॉयफ्रेंड की बात ना करती तो तू तो कभी कुछ कहता और करता ही नहीं…डेमेट…आई लव यु एंड आई नीड़ यु….!” मेरे गालो पर लाली आ गई, वैसे सोनिया की बात सही थी..वो एक लड़की थी और वह सब कुछ नहीं कर सकती थी. मैंने आज मनोमन उसके स्तन, चूत सभी पर अपना सिक्का लगा देने के लिए सोच लिया और मैंने कहा, “आई लव यु टू सोनिया, लेकिन तुम इतनी स्मार्ट और गुड लुकिंग हो इसलिए मैं डरता था……कहीं तुम नाराज हो जाती तो…मुझे भी तुम्हारी फिगर खास कर के तुम्हारे स्तन देख के कुछ कुछ होता है….” “तू ना डफर ही रहेगा कबीर, मुझे इशारा तो किया होता कभी…चल अब यहीं सारी रामायण लिखेगा या कहीं ले के जाएगा……! मुझे आईसक्रीम खानी है और फिर जहाँ तू कहेंगा वहां जाएंगे…..!” 

सोनिया ने अपनी तरफ से मुझे छुट दे दी और मेरे उसकी चूत लेने के इरादे और भी मक्कम हो गए. मैंने गाडी बास्किन-रॉबिन्स पे ली और उसे स्वीटहार्ट आइसक्रीम ला के दी. वह आइसक्रीम को मस्त चूस रही थी और मुझे लगा की अगर उसके मुह में ऐसे ही लंड दे के चुसाया हो तो. मेरे दिल में हलचल हो रही थी. मैंने गाडी सीधे अपने घर ले ली क्यूंकि सोनिया के घर पे मोम, डेड, और भैया-भाभी के खाने का प्रोग्राम था और मेरे घर पे कामवाली अनीता के सिवा कोई नहीं था. वैसे भी सोनिया बचपन से घर आती थी इसलिए कोई शक भी नहीं करेगा.

जैसे ही हम मेरे कमरे में दाखिल हुए मैंने दरवाजे को लात मार के बंध कर दिया और मैंने सोनिया को बाहों में भर लिया, सोनिया भी मुझे कस के पकड़ने लगी, उसने मेरे सीने पर और गालो और फिर होंठो पर चूमना चालू किया. मैंने उसकी गांड के ऊपर हाथ घुमाया और उसे पटक दिया पलंग के उपर. उसकी स्कर्ट उठ गई और अंदर पहनी लाल पेंटी के नज़ारे होने लगे. मैंने अपनी शर्ट उतार दी और मैं सीधा उसके उपर आ गया. मैं दोनों हाथों से गर्दाये स्तन दबाने लगा और सोनिया आह आह…कबीर…हो ओह ऐसे बोलने लगी. मैंने स्तन और हाथों के बिच में आती टी-शर्ट को उतार फेंका और उसकी ब्रा भी खिंच डाली…..सोनिया के चुंचे कोई पोर्नस्टार से कम नहीं थे. बड़े बड़े और गोल मटोल. ऊपर से उसने कोई मस्त ब्रांड का बोडी स्प्रे छिड़का हुआ था जो मुझे और भी मदमस्त कर रहा था. मैंने उसके दोनों स्तन को दबाता रहा और चूसता था. सोनिया ने हाथ से मेरा लंड नापा और उसने मेरी जींस की बटन खोल दी. मेरा लंड जोकी के अंदर से उछलता दिख रहा था. सोनिया ने तुरंत मेरी लंगोट निकाली और अब वह सीधे लंड को सहलाने लगी. मेरा इरादा मेरा लंड उसके मुहं में भर देना था लेकिन उसने लंड चूसने से मना कर दिया यह कहते हुए की उसको अच्छा नहीं लगता. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं मनोमन अपने लंड चूस के सपने के टूटने पर थोडा खिन्न हुआ, पर स्तन भी तो अच्छे थे. मैंने सोनिया के निचे एक तकिया रखा और मैं जा के उसके पेट के उपर घुटने बेड पर रख बैठ गया और मैंने उसके निपल्स पर मेरा लंड रगड़ना चालू किया और सोनिया आह आह ऑफ ओह उह…करती जा रही थी. उसके स्तन अकड़ने लगे थे और मेरा लंड भी और उत्तेजित होता जा रहा था. सोनिया ने अपनी आँखे बंध कर दी थी और वह इस ख़ुशी का एक एक लम्हा बंद आंखो से महसूस कर रही थी. मैंने इस देसी लड़की की पेंटी को जांघ पे उतारा और फिर थोडा ऊँचा होकर पूरा खिंच लिया,…..वाऊ क्या चूत थी सोनिया की यारो बिना बाल की और उसके लिप्स गुलाबी गुलाबी थे जिसके अंदर लाल कलर के रंग की चूत से मेरा लंड और भी कामुक हो गया. मैंने स्तन को रगड़ना बंध किया और मैं उठ के सोनिया की दो टांगो के बिच आ के बैठ गया. सोनिया ने आँखे खोली और वोह हंस रही थी.

मैंने सोनिया की चूत पर हाथ फेरा और वो आह आह करने लगी. मैंने ऊँगली अपने मुहं में ली और उसके उपर थोडा थूंक लगाया और दुबारा उसे चूत के उपर रखा. थोडा प्रेशर और ऊँगली चूत की शेर करने लगी. सोनिया जैसे की बेड पर उछल पड़ी. उसकी चूत एकदम टाईट थी, वैसे इसका सबूत तो मैं खुद था की सोनिया वर्जिन है…..मैंने चूत को प्यार से मसला और उसके होंठो को भी चूत रस से गिला किया. सोनिया की चूत से बहुत सारा प्रवाही निकल के चूत की दीवारों को गिला कर रहा था. मैंने अपना लंड हाथ में लिया और उसका सुपाडा चूत के मुख पर रखा. सोनिया को लंड की गर्मी का अहसास हुआ और वह मेरी तरफ प्यार से देखने लगी. मैंने थोडा प्रेशर दिया और लंड का अभी तो सुपाड़ा मात्र अंदर गया था की सोनिया जोर से चीख पड़ी. उस से बिलकुल बर्दास्त नहीं हो रहा था. मैंने सुपाड़े को अंदर रहने दिया और स्तन को एक बार और चुसना और दबाना चालू किया. सोनिया ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और वह अपने आप उसे अंदर करने की कोशिश करने लगी. यह देख मैंने थोडा प्रेशर लगाया और लंड को थोडा झटका दे के अंदर किया. सोनिया की हालत बिगड़ चुकी थी क्यूंकि मेरा आधा लंड उसकी चूत में था. मैंने स्तन मसलना चालू रखा और लंड को ऐसे ही रहने दिया.

सोनिया ने लंड को हाथ से छोड़ा और मुझे मौका मिलते ही मैंने एक बड़ा झटका दे के लंड पूरा उसकी चूत में पेल दिया. सोनिया की आँख से आंसू निकल पड़े और वो मेरे कमर पे नाख़ून मार रही थी. कुछ देर तक तो उसका..अह्ह्ह्हह अहह्हः..मम्मी आह कबीर निकाल दो दर्द हो रहा है…यह रटना चालू रहा लेकिन एकाद मिनिट में उसको भी लंड की मजा आने लगी. उसकी आँखों से मुझे जैसे की हरी झंडी मिली हो, मैंने लंड को चूत के अंदर बहार करना चालू किया. यह चूत बहुत टाईट थी, मुझे चोदते वक्त सोनिया के हिलते स्तन देख के बहुत मजा आ रहा था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं सोनिया को वही स्पीड से लेता रहा और कुछ देर में सोनिया की गांड भी हिलने लगी..वो मेरे झटके का हिसाब गांड हिला के दे रही थी. मैंने कुछ मिनट ही चोदा होगा की मुझे लगा की लंड में एक अजब सा खिंचाव आया हो. मेरे बाल्स पर भी प्रेशर आ गया और लंड से एकदम चिकना और गाढ़ा प्रवाही निकल रहा हो वैसे मुझे जिन्दगी में पहली बार महसुस हुआ. मुझे रात में अक्सर वीर्यस्खलन हुआ था लेकिन जब निकल जाता तब मैं उठता था, लेकिन आज का अनुभव कुछ और ही था. सोनिया मुझे संतोष के भाव से देखने लगी और मैंने उसे स्तन और माथे पर किस कर लिया. सोनिया ने मुझे लंड अंदर रखे हुए ही गले से लगा लिया. मेरी और सोनिया की चुदाई का कार्यक्रम इस दिन के बाद तो नियमित हो गया…वोह जब भी मौका मिलता मुझ से चुदवाने लगी, मैंने अब उसे लंड चूसने पर भी राजी कर लिया है, वैसे मैंने उसे ब्लोजोब की बहुत सारी मूवी दिखाई फिर जा कर ही वो मानी. मैं अब उसे अपने घर, उसके घर या तो फिर हमारे फार्म हाउस पर भी चोद लेता हूँ…..

बुझ गई प्यास जब मिले दो प्यासे बदन Bujh gayi pyas jab mile do pyase badan

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हम लोग शहर की घनी आबादी के एक मध्यम वर्गीय मुहल्ले में रहते थे। वहां लगभग सभी मकान दो मंजिल के और पुराने ढंग के थे और सभी घरों की छतें आपस में मिली हुई थी। मेरे घर में हम मिया बीवी के साथ मेरी बूढ़ी सास भी रहती थी। य्ह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के राज की है जो पिछ्ले 6-7 महीने से हमारे साथ वाले घर में किराये पर रहता था। राज अभी तक कुंवारा ही था और मेरा दिल उस पर आ गया था। मेरे पति की ड्यूटी शिफ़्ट में चलती थी। जब रात की शिफ़्ट होती थी तो मैं छत पर अकेली ही सोती थी क्योंकि गरमी के दिन थे। राज़ और मैं दोनो अक्सर रात को बातें करते रहते थे। रात को छत पर ही सोते थे।

आज भी हम दोनो रात को खाना खा कर रोज की तरह छत पर बातें कर रहे थे। रोज की तरह उसने अपना सफ़ेद पजामा पहन रखा था। वो रात को सोते समय अंडरवियर नहीं पहनता था, ये उसके पजामे में से साफ़ ही पता चल जाता था। उसका झूलता हुए लण्ड का उभार बाहर से ही पता चल जाता था। मैंने भी अब रात को पेंटी और ब्रा पहनना बंद कर दिया था। मेरे मन राज से चुदवाने का बहुत करता था.... क्युंकि शायद वो ही एक जवान लड़का था जो मुझसे बात करता था और मुझे लगता था कि उसे मैं पटा ही लूंगी। वो भी शायद इसी चक्कर में था कि उसे चुदाई का मजा मिले। इसलिये हम दोनों आजकल एक दूसरे में विशेष रुचि लेने लगे थे। वो जब भी मेरे से बात करता था तो उसकी उत्तेजना उसके खड़े हुए लण्ड से जाहिर हो जाती थी, जो उसके पजामे में से साफ़ दिखता था। उसने उसे छिपाने की कोशिश भी कभी नहीं की। उसे देख कर मेरे बदन में भी सिरहन सी दौड़ जाती थी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं जब उसके लण्ड को देखती थी तो वो भी मेरी नजरें भांप लेता था। हम दोनो ही फिर एक दूसरे को देख कर शरमा जाते थे। उसकी नजरें भी जैसे मेरे कपड़ों को भेद कर अन्दर तक का मुआयना करती थी। मौका मिलने पर मैं भी अपने बोबे को हिला कर....या नीचे झुक कर दिखा देती थी या उसके शरीर से अपने अंगों को छुला देती थी। हम दोनो के मन में आग थी। पर पहल कौन करे, कैसे हो....?

मेरी छ्त पर अंधेरा अधिक रहता था इसलिये वो मेरी छत पर आ जाता था, और बहाने से अंधेरेपन का फ़ायदा हम दोनो उठाते थे। आज भी वो मेरी छत पर आ गया था। मैं छत पर नीचे बिस्तर लगा रही थी। वो भी मेरी सहायता कर रहा था। चूंकी मैंने पेंटी और ब्रा नहीं पहन रखी थी इसलिये मेरे ब्लाऊज में से मेरे स्तन, झुकने से उसे साफ़ दिख रहे थे....जिसे मैं बिस्तर लगाने के बहाने झुक झुक कर दिखा रही थी। उसका लण्ड भी खड़ा होता हुआ उसके पज़ामे के उभार से पता चल गया था। मुझे लगता था कि बस मैं उसके मस्त लण्ड को पकड़ कर मसल डालू।

"भाभी.... भैया की आज भी नाईट ड्यूटी है क्या....?"

"हां.... अभी तो कुछ दिन और रहेगी.... क्यों क्या बात है....?"

"और मां जी क्या सो गई हैं....?"

"बड़ी पूछताछ कर रहे हो.... कुछ बताओ तो....!" मैं हंस कर बोली।

" नहीं बस.... ऐसे ही पूछ लिया...." ये रोज़ की तरह मुझसे पूछता था, शायद ये पता लगाता होगा कि कहीं अचानक से मेरे पति ना आ जाएं।

हम दोनो अब छत की बीच की मुंडेर पर बैठ गये.... मुझे पता था अब वो मेरे हाथ छूने की कोशिश करेगा। रोज़ की तरह हाथ हिला हिला कर बात करते हुए वो मुझे छूने लगा। मैं भी मौका पा कर उसे छूती थी।, पर मेरा वार उसके लण्ड पर सीधा होता था। वो उत्तेजना से सिमट जाता था। हम लोग कुछ देर तक तो बाते करते रहे फिर उठ कर टहलने लगे.... ठंडी हवा मेरे पेटीकोट में घुस कर मेरे चूत को और गाण्ड को सहला रही थी.... मुझे धीमी उत्तेजना सी लग रही थी।

जैसी आशा थी वैसा ही हुआ। राज ने आज फिर मुझे कुछ कहने की कोशिश की, मैंने सोच लिया था कि आज यदि उसने थोड़ी भी शुरूआत की तो उसे अपने चक्कर में फंसा लूंगी।

उसने धीरे से झिझकते हुए कहा -"भाभी.... मैं एक बात कहूं.... बुरा तो नहीं मानोगी " मुझे सिरहन सी दौड़ गयी। उसके कहने के अन्दाज से मैं जान गई थी कि वो क्या कहेगा।

"कहो ना.... तुम्हारी किसी बात का बुरा माना है मैंने...." उसे बढ़ावा तो देना ही था, वर्ना आज भी बात अटक जायेगी।

"नहीं.... वो बात ही कुछ ऐसी है...." मेरे दिल दिल की धड़कन बढ़ गई। मैं अधीर हो उठी.... मेरा दिल उछल कर गले में आ रहा था....

"राम कसम.... बोल दो ना...." मैंने उसके चेहरे की तरफ़ बड़ी आशा से देखा।

"भाभी आप मुझे अच्छी लगती हैं...." आखिर उसने बोल ही दिया....और मेरा फ़ंदा कस गया।

"राज....मेरे अच्छे राज .... फिर से कहो....हां.... हां .... कहो.... ना...." मैंने उसे और बढ़ावा दिया।

उसने कांपते हाथों से मेरे हाथ पकड़ लिये। उसकी कंपकंपी मैं महसूस कर रही थी। मैं भी सिहर उठी। उसकी ओर हसरत भरी निगाहों से देखने लगी।

"भाभी.... मैं आपको प्यार करने लगा हूँ....!" लड़खड़ाती जुबान से उसने कहा।

"चल हट.... ये भी कोई बात है.... प्यार तो मैं भी करती हूँ....!" मैंने हंस कर गम्भीरता तोड़ते हुए कहा

" नहीं भाभी.... भाभी वाला प्यार नहीं.... " उसके हाथ मेरे भारी बोबे तक पहुंचने लगे थे। मैंने उसे बढ़ावा देने के लिये अपने बोबे और उभार लिये। पर बदन की कंपकंपी बढ़ रही थी। उसे भी शायद लगा कि मैंने हरी झंडी दिखा दी है। उसके हाथ जैसे ही मेरे उरोज पर पहुंचे....मेरा पूरा शरीर थर्रा गया। मैं सिमट गयी।

"राऽऽऽऽज्.... नहींऽऽऽ........ हाय रे...." मैंने उसके हाथों को अपनी छाती पर ही पकड़ लिया, पर हटाया नहीं। उसके शरीर की कंपकपी भी बढ़ गयी। उसने मेरे चेहरे को देखा और अपने होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ाने लगा। मुझे लगा मेरा सपना अब पूरा होने वाला है। मेरी आंखे बंद होने लगी। मेरा हाथ अचानक ही उसके लण्ड से टकरा गया। उसका तनाव का अहसास पाते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये। मेरे चूत की कुलबुलाहट बढ़ने लगी। उसके हाथ अब मेरे सीने पर रेंगने लगे। मेरी सांसे बढ़ चली। वो भी उत्तेजना में गहरी सांसे भर रहा था। मैं अति उत्तेजना के कारण अपने आप को उससे दूर करने लगी। मुझे पसीना छूटने लगा। मैं एक कदम पीछे हट गयी।

"भाभीऽऽऽ ........ मत जाओ प्लीज्...." वह आगे बढ़ कर मेरी पीठ से चिपक गया। उसका एक हाथ मेरे पेट पर आ गया। मेरा नीचे का हिस्सा कांप गया। मेरा पेट कंपकंपी के मारे थरथराने लगा। मेरी सांसे रुक रुक कर निकल रही थी। उसका हाथ अब मेरी चूत की तरफ़ बढ़ चला। मेरे पेटीकोट के अन्दर हाथ सरकता हुआ मेरी चूत के बालों पर आगया। अब उसने तुरन्त ही मेरी चूत को अपने हाथों से ढांप लिया। मैं दोहरी होती चली गयी। सामने की ओर झुकती चली गयी। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों कि दरार को रगड़ता हुआ गाण्ड के छेद तक घुस गया। मैं अब हर तरफ़ से उसके कब्जे में थी। वह मेरी चूत को दबा रहा था। मेरी चूत गीली होने लगी थी।

"राज्.... हाऽऽऽय रे........ मेरे राम जी.... मैं मर गई !" मैंने उसका हाथ नहीं हटाया और वो ज्यादा उत्तेजित हो गया।

"भाभी.... आप कितनी प्यारी है...." मैंने जब कोई विरोध नहीं किया तो वह खुल गया। उसने मुझे अब जकड़ लिया। मेरे स्तनो को अपने कब्जे में लेकर होले होले सहलाने लगा। उसके प्यार भरे आलिंगन ने और मधुर बातों ने मुझे उत्तेजना से भर दिया। जिस प्यार भरे तरीके से वो ये सब कर रहा था.... मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया। मेरा शरीर वासना के मारे झनझना रहा था। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर दस्तक दे रहा था।

"तुम मुझे प्यार करते हो....!" मैंने वासना में उसे प्यार का इज़हार करने को कहा।

"हां भाभी.... बहुत प्यार करता हूं....तब से जब मैं आपसे पहली बार मिला था !"

"देखो राज........ये बात किसी को नहीं बताना.... मेरी इज्जत तुम्हारे हाथ में है.... मैं बदनाम हो जाऊंगी.... मैं मर जाऊंगी....!" मैंने उस पर अपना जाल फ़ेंका।

"भाभी.... मैं मर जाऊंगा....पर ये भेद किसी को नहीं कहूंगा...." मेरी विनती से उसका दिल पिघल उठा।

"तब देरी क्यूं.... मेरा पेटीकोट उतार दो ना.... अपने पजामे की रुकावट हटा दो...." मुझसे अब बिना चुदे रहा नहीं जा रहा था। उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल डाला और पेटीकोट अपने आप नीचे फ़िसल गया। उसका लण्ड भी अब स्वतन्त्र हो गया था।

"भाभी.... आज्ञा हो तो पीछे से शुरु करू.... तुम्हारी प्यारे प्यारे गोल गोल चूतड़ मुझे बहुत पसन्द है...." उसने अपनी पसन्द बिना किसी हिचक के बता दी।

"राऽऽऽज.... अब मैं तुम्हारी हू.... प्लीज़ अब कहीं से भी शुरू करो.... पर जल्दी करो.... बस घुसा दो...." मैंने राज से अपनी दिल की हालत बयां कर दी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

"भाभी.... जरा मेरे लण्ड को एक बार प्यार कर लो और थूक लगा दो...." मैंने प्यार से उसे देखा और नीचे झुक कर उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया.... हाय राम इतना मस्त लण्ड !.... वो तो मस्ती में फ़नफ़ना रहा था। मैंने उसका सुपाड़ा कस के चूस लिया। और फिर ढेर सारा थूक उस पर लगा दिया। अब मैं खड़ी हो गयी.... राज के होंठो के चूमा.... और अपने चूतड़ उघाड़ कर पीछे निकाल दी। मेरे गोरे चूतड़ हल्की रोशनी में भी चमक उठे। मैंने अपनी चूतड़ की प्यारी फ़ांके अपने हाथों से चीर दी और गाण्ड का छेद खोल कर दे दिया। मेरे थूक से भरा हुआ उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर आ टिका। मैंने हल्का सा गाण्ड का धक्का उसके लण्ड पर मारा। उसकी सुपारी मेरे गाण्ड के छेद में फ़ंस गयी। उसके लण्ड के अंदर घुसते ही मुझे उसकी मोटाई का अनुमान हो गया।

"राज.... प्लीज.... चलो न अब.... चलो....करो ना !" पर लगा उसे कुछ तकलीफ़ हुई। मैंने पीछे जोर लगाया तो उसने भी लण्ड को दबा कर अंदर घुसेड़ दिया। पर उसके मुख से चीख निकल गयी।

"भाभी.... लगती है.... जलता है...." मुझे तुरन्त मालूम हो गया कि उसने मुझे ही पहली बार चोदा है। उसके लण्ड की स्किन फ़ट चुकी थी। मेरा मन खुशी से भर उठा। मुझे एक फ़्रेश माल मिला था। एक बिलकुल नया लण्ड मुझे नसीब हुआ था। मेरे पर एक नशा सा चढ़ गया।

"राजा.... बाहर निकाल कर धक्का मारो ना.... देखो तो मेरा मन कैसा हो रहा है। ऐसी जलन तो बस दो मिनट की होती है...." मैंने उसे बढ़ावा दिया।

उसने मेरा कहा मान कर अपना लण्ड थोड़ा सा निकाल कर धीरे से वापस घुसेड़ा। फिर धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ाने लगा। मैं उसका लण्ड पा कर मस्त हो उठी थी। मैंने अपने दोनो हाथ छत की मुंडेर पर रख लिये थे और घोड़ी बनी हुई थी। मैंने अपने दोनो पांव पूरे खोल रखे थे। चूतड़ बाहर उभार रखे थे। राज ने अब मेरे बोबे अपने हाथों में भर लिये और मसलने लगा। मैं वासना के मारे तड़प उठी। उसे लण्ड पर चोट लग रही थी पर उसे मजा आ रहा था। उसके धक्के बढ़ते ही जा रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। अचानक उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया.... और मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गयी। मैं बिस्तर पर आ कर लेट गयी।

"भाभी.... आप बहुत प्यारी है....सच बहुत मजा आ रहा है.... जिन्दगी में पहली बार इतना मजा आया है...." मुझे पता था कि जब पहली बार किसी चूत में लण्ड जायेगा तो ....मजा तो नया होगा.... इसलिये आत्मा तक तो आनन्द मिलेगा। और फिर मेरी तो जैसे सुहाग रात हो गयी.... कई दिनों बाद चुदी थी। फिर कितने ही दिनों से मन में चुदने कि इच्छा थी। किस्मत थी कि मुझे नया लण्ड मिला।

राज मेरे पास बिस्तर पर आ गया। मैंने अपनी दोनो टांगे ऊपर उठा दी और चूत खोल दी। राज ने आराम से बैठ कर अपना लण्ड हाथ से घिसा और हिला कर चूत के पास रख दिया। मैं मुस्कुरा उठी.... उसे ये नहीं पता था कि लण्ड कहां रखना है.... मैंने उसका लण्ड पकड़ कर चूत पर रख दिया।

"राजा.... नये हो ना.... तुम्हे तो खूब मजा दूंगी मै....आ जाओ.... मुझ पर छा जाओ...." मैंने चुदाई का न्योता दिया।

उसने हल्का सा जोर लगाया और लण्ड बिना किसी रुकावट के मेरी गीली चूत के अन्दर सरकता हुआ घुसने लगा। मुझे चूत में तीखी मीठी सी गुदगुदी उठने लगी और लण्ड अन्दर सरकता रहा।

"आहऽऽऽ .... राज.... मेरे प्यार.... हाय रे........ और लम्बा सा घुसा दे....अन्दर तक घुसा दे...." मेरी आह निकलती जा रही थी। सुख से सराबोर हो गई थी। उसने मेरे दोनो चूंचक खींच डाले.... दर्द हुआ .... पर अनाड़ी का सुख डबल होता है.... सब सहती गयी। अब उसके धक्के इंजन के पिस्टन की तरह चल रहे थे। पर अब वो मेरे शरीर के ऊपर आ गया था....मैं पूरी तरह से उससे दब गई थी। मुझे परेशानी हो रही थी पर मैं कुछ बोली नही.... वो अपना लण्ड तेजी से चूत पर पटक रहा था, जो मुझे असीम आनन्द दे रहा था।

"भाभी.... आह रे.... तेरी चूत मारूं.... ओह हां.... चोद डालू.... तेरी तो.... हाय भाभी........" उसकी सिसकारियां मुझे सुकून पहुंचा रही थी। उसकी गालियाँ मानो चुदाई में रस घोल रही थी....

"मेरे राजा.... चोद दे तेरी भाभी को.... मार अपना लण्ड.... हाय रे राज....तेरा मोटा लण्ड.... चोद डाल...." मैंने उसे गाली देने के लिये उकसाया.... और राज्....

" मेरी प्यारी भाभी.... भोसड़ी चोद दूं.... तेरी चूत फ़ाड़ डालू.... हाय रे मेरी.... कुतिया....मेरी प्यारी...." वो बोलता ही जा रहा था।

"हां मेरे राजा .... मजा आ रहा है.... मार दे मेरी चूत ...."

"भाभी ....तुम बहुत ही प्यारी हो....कितने फ़ूल झड़ते है तुम्हारी बातों में.... तेरी तो फ़ाड़ डालूं.... साली !" फ़काफ़क उसके धक्के तेज होते गये.... मैं मस्ती के मारे सिसकारियाँ भर रही थी....वो भी जोश में गालियाँ दे कर मुझे चोद रहा था। उसका लण्ड पहली बार मेरी चूत मार रहा था। सो लग रहा था कि वो अब ज्यादा देर तक रह नहीं पायेगा।

"अरे.... अरे.... ये क्या....?" मैंने प्यार से कहा.... उसका निकलने वाला था। उसके शरीर में ऐठन चालू हो गई थी। मैं जानती थी कि मर्द कैसे झड़ते हैं।

"हां भाभी.... मुझे कुछ हो रहा है.... शायद पेशाब निकल रहा है.... नहीं नहीं.... ये ....ये.... हाय्.... भाभी....ये क्या...." उसके लण्ड का पूरा जोर मेरी चूत पर लग रहा था। और .... और.... उसका पानी छूट पड़ा.... उसका लण्ड फ़ूलता.... पिचकता रहा मेरी चूत में सारा वीर्य मेरी चूत में भरने लगा। मैंने उसे चिपका लिया। वो गहरी गहरी सांसे भरने लगा। और एक तरफ़ लुढ़क गया। मैं प्यासी रह गयी.... पर वो एक २२ वर्षीय जवान लड़का था, मेरे जैसी ३३ साल की औरत के साथ उसका क्या मुकाबला....। उसमें ताकत थी....जोश था.... पूरी जवानी पर था। वो तुरन्त उठ बैठा। वो शायद मुझे छोड़ना नहीं चाह रहा था। मुझे भी लग रहा था कि कही वो अब चला ना जाये। पर मेरा अनुमान गलत निकला। वो फिर से मुझसे प्यार करने लगा। मुझे अब अपनी प्यास भी तो बुझानी थी। मैंने मौका पा कर फिर से उसे उत्तेजित करना चालू कर दिया। कुछ ही देर में वो और उसका लण्ड तैयार था। एकदम टनाटन सीधा लोहे की तरह तना हुआ खड़ा था।

"भाभी....प्लीज़ एक बार और.... प्लीज...." उसने बड़े ही प्यार भरे शब्दों में अनुरोध किया। प्यासी चूत को तो लण्ड चाहिये ही था.... और फिर मुझे एक बार तो क्या.... बार बार लण्ड चाहिये था....

"मेरे राजा.... फिर देर क्यों .... चढ़ जाओ ना मेरे ऊपर...." मैंने अपनी टांगे एक बार फिर चुदवाने के लिये ऊपर उठा दी और चूत के दरवाजे को उसके लण्ड के लिये खोल दिया।

वो एक बार फिर मेरे ऊपर चढ़ गया.... उसका लोहे जैसा लण्ड फिर मेरे शरीर में उतरने लगा। इस बार उसका पूरा लण्ड गहराई तक चोद रहा था। मैं फ़िर से आनन्द में मस्त हो उठी.... चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुदवाने लगी। अब वो पहले की अपेक्षा सफ़ाई से चोद रहा था। उसका कोई भी अंग मेरे शरीर से नहीं चिपका था। मेरा सारा शरीर फ़्री था। बस नीचे से मेरी चूत और उसका लण्ड जुड़े हुये थे। दोनो हो बड़ी सरलता से धक्के मार रहे थे। वार सीधा चूत पर ही हो रहा था। छप छप और फ़च फ़च की मधुर आवाजे अब स्पष्ट आ रही थी। वो मेरे बोबे मसले जा रहा था। मेरी उत्तेजना दो चुदाई के बाद चरमसीमा पर आने लगी.... मेरा शरीर जमीन पर पड़े बिस्तर पर कसने लगा, मेरा अंग अंग अकड़ने लगा। मेरे जिस्म का सारा रस जैसे अंग अंग में बहने लगा। मेरे दोनो हाथों को उसने दबा रखे थे। मेरा बदन उसके नीचे दबा फ़ड़फ़ड़ा रहा था।

"मेरे राजा.... मुझे चोद दे जोर से....हाय राम जी.... कस के जरा.... ओहऽऽऽऽऽऽ ........ मैं तो गई मेरे राजा.... लगा....जरा जोर से लगा...." मेरे शरीर में तेज मीठी मीठी तरावट आने लगी.... लगा सब कुछ सिमट कर मेरी चूत में समा रहा है.... जो कि बाहर निकले की तैयारी में है।

"मेरे राजा.... जकड़ ले मुझे.... कस ले हाऽऽऽय्.... मेरी तो निकली.... मर गयीऽऽऽ ऊईईऽऽऽऽऽ आहऽऽऽऽऽ .... " मैं चरमसीमा लांघ चुकी थी.... और मेरा पानी छूट पड़ा। पर उसका लण्ड तो तेजी से चोद रहा था। अब उसके लण्ड ने भी अन्गड़ाई ली और मेरी चूत में एक बार फिर पिचकारी छोड़ दी। पर इस बार मैंने उसे जकड़ रखा था। मेरी चूत में उसका वीर्य भरने लगा। एक बार फिर से मेरी चूत में वीर्य छोड़ने का अह्सास दे रहा था। कुछ देर तक हम दोनों ही अपना रस निकालते रहे। जब पूरा वीर्य निकल गया तो हम गहरी गहरी सांसे लेने लगे। मेरे ऊपर से हट कर वो मेरे पास ही लेट गया। हम दोनो शान्त हो चुके थे....और पूरी सन्तुष्टि के साथ चित लेटे हुए थे। रात बहुत हो चुकी थी। राज जाने की तैयारी कर रहा था। उसने जाने से पहले मुझे कस कर प्यार किया.... और कहा...."भाभी.... आप बहुत प्यारी है.... आज्ञा हो तो कल भी...." हिचकते हुये उसने कहा, पर यहा कल की बात ही कहां थी....

मैंने उसे कहा -"मेरे राजा....मेरे बिस्तर पर बहुत जगह है.... यही सो जाओ ना...."

"जी....भाभी....रात को अगर मुझे फिर से इच्छा होने लगी तो...."

"आज तो हमारी सुहागरात है ना.... फिर से मेरे ऊपर चढ़ जाना....और चोद देना मुझे...."

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"प्यारी हूं ना.... और हां अब से भाभी नही....मुझे नेहा कहना ....समझे...." मैंनें हंस कर उसे अपने पास लेटा लिया और बचपन की आदत के अनुसार मैंने अपना एक पांव उसकी कमर में डाल कर सोने की कोशिश करने लगी।
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