मनेजर ने मेरी की ऑफिस की लिफ्ट में चुदाई manager ne meri ki office ki lift me chudai

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हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम जायरा हैं और आज मैं आप को मेरी चुदाई की एक घटना बताने आई हूँ. मैं दिल्ली के एक ऑफिस में रिसेप्शन का काम करती हूँ. मेरी उम्र 36 साल हैं और मेरी शादी हुए 10 साल हो चुके हैं. 10 साल के वैवाहिक जीवन में मुझे एक बेटा हुआ हैं जिसकी उम्र अभी 6 साल हैं. यह बात आज से कुछ 6 महीने पहले की हैं. उस शाम को मैं ऑफिस से निकलने ही वाली थी. तभी निबिद साहब (हमारे मैनेजर) ऑफिस से बाहर निकले और उन्होंने पूछा, “जायरा आज तुम घर नहीं गई अभी तक? हसबंड लेने तो आ रहे हैं ना.?” मैं: नहीं सर, आज हसबंड पुणे गए हुए हैं किसी काम से. मेरा बेटा अपनी नानी के वहाँ हैं. मैं घर जाते वक्त पार्सल ले लुंगी डिनर का. और बस लेट की हैं इसलिए मैं यहीं रुक गई. निबिद की आँखों में यह सुन के जैसे की एक अजब सी चमक आ गई. उन्होंने कहा, “अगर तुम फ्री हो तो हम लोग बाहर खाने के लिए जा सकते हैं.”

मुझे पहले तो लगा की वो मजाक कर रहे हैं इसलिए मैंने हां या ना कुछ नहीं कहा. वैसे पहले भी सर मुझे गलत नजरों से देखते रहते थे. लेकिन मैंने देखा की वो आराम से खड़े मेरे जवाब की राह देख रहे थे. मैंने इधर उधर देखा और कहा, “सर कोई गलत मतलब निकाल लेंगा इसका…!” निबिद: अरे छोडो वो सब, कोई अच्छे रेस्टोरेंट में डिनर कर के मैं तुम्हे अपनी गाडी में घर ड्राप कर दूंगा. अब मैं ना कही कर सकी. निबिद साहब की ऑडी गाडी में हम लोग करीब के ही एक चाइनीज़ रेस्टोरेंट में गए जहाँ उन्होंने दो तीन चींजें ऑर्डर की. बातों बातों में मैंने देखा की उनकी टांग मेरी टांग से टकरा रही थी. वो जानबूझ के ऐसा कर रहे थे शायद. मैंने देखा की अब मुझे निचे अपनी जांघ के ऊपर भी कुछ स्पर्श हो रहा था. अरे बाप रे निबिद साहब ने अपने हाथ को मेरी जांघ पे घिसा था. मैं घबरा गई की ऐसे भरचक रेस्टोरेंट में भी यह आदमी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा. मैं सच में घबरा रही थी की कही किसी ने एम्एम्एस बना लिया तो प्रॉब्लम हो जायेंगी.  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने अपनी कुर्सी को पीछे खिंचा और निबिद के चुदाई के सपने को जैसे तोड़ दिया. निबिद भी समझ गया कि मैं अभी इंटरेस्टेड नहीं हूँ और उसने चाउमीन को खाना चालू कर दिया. फिर मैंने हम दोनों खाना खाने के बाद रेस्टोरेंट से बाहर आयें तो मैंने देखा की मेरे घर की तरफ की एक बस आ रही थी. मैंने निबिद को थेंक्स कहा और बस पकड ली. पुरे रास्ते में इस गोल्डन चांस को छोड़ देने पे मैं मन ही मन पछता रही थी. निबिद कुछ 35 साल के होंगे लेकिन उनका फिजिक किसी जवान लड़के को भी शर्म में डाल सकता हैं. और ऐसे बन्दे से चुदवाना तो फिर एक सुनहरा मौका ही था मेरे लिए. रात को मुझे वही सारे ख़याल आये. जैसे की निबिद मेरी हार्ड चुदाई कर रहे हैं और मैं उनके लंड के ऊपर बैठ के उछल रही हूँ. दो बार तो इस ख़याल से मेरी आँख भी खुल गई थी. ज्यों त्यों से मेरी रात निकली और सुबह मैं ऑफिस के लिए निकल पड़ी, आज वक्त से पहले ही.

टेबल के ऊपर टेलीफोन वगेरह साफ़ कर के मैं अब जैसे निबिद साहब की ही राह देख रही थी. वो 10 बजे भी चले आते हैं कभी कभी. लेकिन आज 12 बजने तक भी उनका कोई नामोनिशान नहीं था. आज से पहले मैंने इतनी बेसब्री से किसी का भी इंतजार नहीं किया. तभी कुछ 12:20 को निबिद आये, उनके हाथ में एक छोटी सी ब्रीफकेस थी. आज उन्होंने मुझे गुड आफ्टरनून भी नहीं कहा और वो सीधे ही अपने केबिन की और चल पड़े. आखिर मुझे जिसका डर था वही हुआ ना. मैंने उन्हें भड़का दिया था. जब आदमी को लगता हैं की इस चूत से तेल नहीं निकलने वाला तो वो उसे रिजेक्ट कर देते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था. निबिद साहब को लगा की मैं इंटरेस्टेड नहीं हूँ इसलिए वो अब दूर रह रहे थे. या फिर उन्हें सच में गुस्सा आया था मुझ पर. मैंने सोचा की चलो देख ही लूँ जा के उनके केबिन में. मैंने अपनी स्कर्ट ऊँची की और सीधे उनकी ऑफिस में जा पहुंची. केबिन पे नोक करते ही उनकी आवाज आई, “कम इन प्लीज़.” आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

लेकिन जैसे ही मुझे देखा वो जैसे निरुत्तर से हो गए. मैंने उनके टेबल पे जानबूझ के झुक के अपनी बूब्स की गली का उन्हें नजारा करवाया. लेकिन वो तो फ़ाइल में ही अपनी माँ चुदवा रहे थे.

मैं: क्या बात हैं सर, आप तो नाराज हो गए.
निबिद: जायरा, ऐसी बात नहीं हैं. अगर तुम को दिलचस्पी ना हो फिर मैं लट्टू नहीं बनना चाहता हूँ.

मैंने अपनी चुंचियां निबिद के सामने और खोलते हुए कहा, “आप को किसने कहा की मुझे दिलचस्पी नहीं हैं?” निबिद की आँखों में एक अजब सी चमक आ गई उसने मेरी और देखा और कहा, “फिर कल भाग क्यूँ गई थी?” मैं: मैं अभी भी पछता रही हूँ. आज भी मैं शाम को फ्री हूँ; चलेंगे चायनिज़ खाने के लिए.
निबिद अपना सर खुजाते हुए: अरे बाबा मेरी दिल्ली की फ्लाइट हैं 1 घंटे में. और उसने बिना रुके आगे कहा, “अभी कुछ नहीं कर सकते हैं क्या हम.?”

मैंने चौंक के पूछा, “अभी, कहाँ, कैसे?”
निबिद ने कुछ सोचा और बोला, “आओ मेरे साथ.”

मैं उसके पीछे चलने लगी. जाते वक्त उसने मेरी टेलीफोन की पिन को निकाल डाला ताकि घंटी बजती ना रहें. हम लोग सीडियों से उपर होते हुए दूसरी मंजिल पे आये. और मैं समझ गई की वो कहाँ ले के जा रहा था मुझे. दुसरे मंजले पे एक स्टोर रूम था और एक लिफ्ट थी जो ख़राब थी. वो एक पुरानी लिफ्ट थी जिसे बंध कर के नई लिफ्ट लगवाई गई थी. दुसरे मजले पे शायद ही कोई आता था. निबिद मेरा हाथ पकड के लिफ्ट में घुसे और उसके दरवाजे को बंध किया. उन्होंने दरवाजे को थोडा खुला रखा और हम दोनों अंदर बंध थे. काफी गरम लग रहा था वहां पे. एक भी पल को गवाएं बिना निबिद साहब ने मेरे स्कर्ट को ऊपर कर दिया. मेरी पेंटी पहले से गीली हो चुकी थी, जिसे निचे खींचने में उन्होनें दूसरी मिनट वेस्ट नहीं करनी पड़ी. उन्होंने पेंटी को उतार के मेरी एक टांग को ऊपर किया. मैंने पेंटी को लिफ्ट की हुक में टांग दिया. निबिद साहब ने सीधे ही अपने मुहं को मेरी चूत पे लगा दिया. मेरी गरम और चिकनी चूत को वो अपनी जबान से चाटने लगे. 

मैंने उनके बालों को पकड के अपनी और खिंचा और उन्हें चूत में दबाने लगी. निबिद की जीभ अब मेरी चूत के छेद में घुस चुकी थी जिसे वो जोर जोर से कुत्ते की तरह चाटने में व्यस्त थे. आह क्या मजा था ऐसे चूत को चटवाने में. करीब पांच मिनिट तक वो मेरी चूत को अपनी जबान से मजे देते रहे और इस बीच एक बार मेरी चूत अपना पानी निकाल चुकी थी. अब मैं कैसे भी चुदाई करवाना चाहती थी. मैं काफी गरम हो चुकी थी. मैंने निबिद को कंधे से पकड के ऊपर उठाया. उठते ही उसने अपनी ज़िप खोल के लंड को बाहर निकाला. उनका लंड काफी मोटा था और उसके उपर हलके हलके बाल भी थे. अब घुटनों पे बैठने की मेरी बारी थी. जैसे ही मैं निचे बैठी वो 7 इंच का लंड मेरे मुहं में आ गया. निबिद साहब अपने लंड को बिना कुछ सोचे मेरे मुहं में मारने लगे. उनका लौड़ा मेरे गले तक घुस रहा था जैसे. मैं भी अपनी जबान को उनके लंड पे घिस के जैसे आइसक्रीम चाट रही थी.

अब उन्होंने मुझे उठाया और मेरे मुहं को लिफ्ट की दिवार की और किया. मेरे दोनों हाथ लिफ्ट की दिवार पे थे. मेरी अगली टांग को उन्होंने थोडा आगे कर के चूत के पास अपने लंड की जगह बनाई. अब उन्होंने धीरे से मेरी चूत में अपने लंड को टच किया. काफी हॉट था उनका लम्बा लंड. और दुसरे ही पल लंड की गरमी अब मेरी चूत के अंदर महसूस हो रही थी. हाँ निबिद ने एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चूत में डाल जो दिया था. मैंने गांड को थोडा पीछे किया ताकि मैं चुदाई आराम से करवा सकूँ. आह क्या मजा था उस चौड़े लौड़े को अपनी चूत में लेने में. निबिद ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और वो जोर जोर से मुझे चोदने लगा. उसका लंबा लंड मेरी चूत में आ जा रहा था और चुदाई अपनी असीम सीमा पे थी. आह आह ओह ओह की आवाजें निकाल के मैं भी अब अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी और वो मुझे और भी जोर जोर से चोदने लगा.

लंड ने मेरी चूत को लाल कर दिया और चूत की एक एक मसल को जैसे उसने छू लिया था. निबिद साहब भी अब चरमसीमा पे लग रहे थे और मैं भी उसी कगार पे थी. अब झटके और चुदाई तेज हो चुके थे. वो पुरे लंड को बाहर निकाल के एक झटके में अंदर मार रहे थे. तभी मुझे लगा की चूत की गली में गरम पिचकारी निकल चुकी हैं. निबिद साहब के लंड ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया था. उन्होंने मुझे लिफ्ट के साथ दबा दिया और आखरी बूंद तक अपने पानी को चूत में ही निकाल दिया. मैंने भी अपनी चूत को टाईट कर के उस महंगे पानी को अंदर ले लिया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

लंड बाहर निकाल के उन्होंने फट से उसे अंदर लिया. उन्होंने ज़िप बंध की और मैंने पेंटी पहन ली. स्कर्ट सही कर के मैंने अपनी हेन्की से चूत को भी साफ़ किया. निबिद को फ्लाईट लेनी थी इसलिए वो उस दिन निकल गये. लेकिन उस दिन के बाद मेरी चुदाई उस लिफ्ट में सिमित नहीं रही हैं. कभी हम किसी होटल में मजे करते हैं तो कभी उसके घर पे. मुझे उससे चुदने में बहुत ही मजा आ रहा था लेकिन इससे भी ज्यादा मजा तब आया जब मुझे सेलरी मिली क्योंकि इस बार मेरी मंथली सेलरी 5000 रुपए बढ़ गई थी......

पड़ोसन लड़की की कुँवारी चूत में लंड डाला Padosan ladki ki kuvari chut me land dala

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दोस्तो, मैंने बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं मगर आज पहली बार मैंने मेरे पड़ोस की लड़की की कुँवारी चूत ली। मेरा नाम मनीष शर्मा है।  मेरी उम्र 21 वर्ष, मेरा कद 6 फीट है और दिखने में ठीकठाक हूँ, मेरे लंड की लंबाई सात इन्च है। जब से उस लड़की ने मेरा लंड देखा है, वो मेरे लंड की दीवानी हो गई है। बात तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में था। तब हमारे घर के पास नये किरायेदार रहने आये। उनके घर में तीन लोग थे माँ, पापा, और उनकी लड़की जिसका नाम लक्ष्मी था। लक्ष्मी की उम्र 19 वर्ष थी। जब उसे पहली बार मैंने देखा तो देखता ही रह गया। मस्त माल थी… सांवला रंग और फिगर 32-28-34 क्या मस्त चूतड़ थे उसके ! जब भी वो घर के बाहर आती थी तो मैं केवल उसके कूल्हे ही देखता रहता था। मुझे उसे पटाना था ताकि मैं उसे चोद सकूँ। मगर उसकी माँ उसे कभी अकेली नहीं छोड़ती और उसके पापा तो ऑफिस के लिए सुबह जल्दी निकल जाते और शाम तक आते थे।

फिर एक दिन क़िस्मत ने मेरा साथ दिया और उसकी माँ को किसी काम से बाहर जाना पड़ा। उस दिन मैंने उससे बात की और दोस्ती का आग्रह किया। उसने हाँ कह दी और कुछ दिन बाद हमने अपने फ़ोन नंबर एक्सचेंज किये। तब से फोन पर हमारी बात होने लग गई। यह सिलसिला कुछ दिन चला और एक दिन मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार किया और उसने मुझसे कहा- वो भी मुझसे प्यार करती है। मुझे अपना सपना सच होते हुए दिखा। बस अब मैं उससे अकेले मिलकर उसे चोदना चाहता था। मगर मौका नहीं मिल रहा था। कहते हैं ना कि सब्र का फल मीठा होता है, वही हुआ मेरे साथ हुआ!उसके मम्मी पापा को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा 8-10 दिन के लिए। मैंने उसे मिलने के लिए कहा तो उसने अपने घर मिलने के लिए बुलाया। मैं जब उसके घर गया तो उसने लाल रंग की नाइटी पहनी हुई थी। उसमें वो हॉट लग रही थी। उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लग गया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैं उसके पास गया। हम दोनों ने थोड़ी देर तो बात की फिर मैं उसके एकदम पास गया, उसके होंठों को चूमने लग गया। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लग गई। फिर मैं धीरे से किस करते हुए उसके बूब्स को दबाने लग गया। वो आ-ह-ह-हुह करने लग गई। फिर मैं उसकी नाइटी के अंदर हाथ डालकर उसके निप्पल को पकड़कर मसलने लगा। फिर मैंने उसकी नाईटी उतार दी। जैसे ही मैंने उसकी नाईटी उतारी, उसने काले रंग की ब्रा-पेंटी पहन रखी थी, उसमें वो एकदम हॉट और सेक्सी लग रही थी। मैंने देर न करते हुए उसकी ब्रा खोलकर उसको लेटा दिया और उसके बूब्स को दबाने और निप्पल को एक-एक करके चूसने लग गया। मैं अपने साथ चोकलेट लेकर गया था जो पिंघल चुकी थी। मैंने चोकलेट को उसके निप्पलों पर लगाया और निप्पल को एक-एक करके चाटने लग गया। वो पूरी तरह से पागल होकर हुह… आह… हआ…आहह करने लग गई। 

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, केवल अंडरवियर में रह गया और वो पेंटी में ! मुझे अंडरवियर में देखकर उसने अपनी आँखें बंद कर ली। फिर मैंने उसके होंठों को चूसते हुए उसके पूरे बदन को चाटते हुए उसकी पेंटी तक पहुँचा, फिर मैंने उसकी पेंटी उतार दी। एकदम गीली और चिकनी कुँवारी चूत देखकर मैं और मेरा लंड दोनों पागल हो गये। मैं उसकी चूत को चाटने लग गया। दोस्तो, क्या बताऊँ कितना बढ़िया स्वाद था! फिर मैंने चोकलेट को उसकी कुँवारी चूत पर लगाकर खूब चाटा उसकी चूत को ! इस बीच वो एक बार झड़ गई और मैं उसका सारा पानी पी गया। फिर मैंने अपनी अंडरवियर उतारकर उसे अपना लंड चूसने को कहा। मगर उसने मना कर दिया तो मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया। उसके बाद मैंने उसकी गीली कुँवारी चूत पर अपना लंड रखा और अंदर डालने की कोशिश की तो मेरा लंड फिसलकर बाहर आ गया। उसकी चूत टाइट थी। मैंने रूककर अच्छे से सेट करके जोर लगाकर लंड डाला तो लंड थोडा ही अंदर गया होगा, उसे दर्द हुआ मगर वो चिल्लाई नहीं। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मैंने एक शॉट और मारा और उसके ऊपर गिर गया। उसे इतना दर्द हुआ कि उसने अपने नाख़ून मेरी पीठ पर गड़ा दिए और धीरे से कहा- बहुत दर्द हो रहा है। मगर उसकी हिम्मत थी कि वो चिल्लाई नहीं, पूरा दर्द सहन कर लिया। फिर थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर मैंने धीरे धीरे अपनी कमर चलाना शुरू कर दी। वो आह… आह… ह…हुहह… करने लगी। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वो भी अपने चूतड़ हिलाकर मेरा साथ देने लगी। दस मिनट मैंने उसे चोदा। फिर मैं झड़ने वाला था तो उसने कहा- अंदर मत झड़ना। मैंने सारा माल उसके पेट पर निकाल दिया। उसके बाद हमारा दूसरा राउंड 25 मिनट चला। उसमें मैंने उसे अलग अलग पोजीशन में चोदा। उस दिन दो घंटे तक हमारा कार्यक्रम चला। अगले 7-8 दिन तक हम दोनों ने मिलकर खूब मजे किये। मैंने उसे उसके घर के हर एक कोने में चोदा।

ट्रक ड्राइवर के लंड का मज़ा Chudai Ki hindi Kahaniya - Truck driver se chudwayi

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हैल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम अभिषेक झा हैं | मैं केरला का रहने वाला हूँ और मैं एक ट्रक ड्राईवर हूँ | मेरी उम्र 27 साल हैं और तुम लोग जैसा गन्दी सोच वाला नहीं हूँ | जो रोज रोज बैठ जाते हैं ये सेक्स स्टोरी की साईट खोल के और मजे लेते हैं सेक्स स्टोरी पढ़ के | चलो मै अपनी स्टोरी मै आता हूँ , हां तो मेरा तो रोज का काम ड्राइविंग करना है एक शहर से दुसरे शहर तक , इसी दौरान कुछ महीने पहले मेरे साथ एक बड़ी दिलचस्प कहानी हुई जो मैं इस स्टोरी में बताने जा रहा हूँ |

कुछ महीने पहले की बात है मैं रोज की तरह उस दिन भी ट्रैक चला रहा था उत्तर प्रदेश से मध्यप्रदेश  की तरफ और ट्रक मै कुछ सामान भी लोड था और समय तो लगभग रात के 10 बज के 30 मिनट हो रहा था | ट्रक में मेरे साथ दो लोग और थे एक का नाम अमन और एक का विवेक था | हम लोग अपने साथ हथियार रखते थे और उस वक़्त नशे में थे |

रास्ते में चलते चलते हम लोग एक जगह रुके, अमन ने ट्रक का दरवाजा खोल दिया और मजाक मजाक में कहा कि मै चलते ट्रक से उतर जाऊंगा, हम लोग ने भी कहा कि हां उतर जा, नशा था थोडा बहुत तो सब मुचोदी कर रहे थे | फिर मैंने कहा कि अबे मुचोदी मत कर नहीं तो फ्री में लोडे लग जायेंगे जिंदगी के, तब जा के वो माना और दरवाजा बंद करने को किया और उतने में बंद करते करते उसकी चप्पल उसके एक पैर से निकल के नीचे गिर गई और न चाहते हुए भी हम लोगो को उस सुनसान रास्ते में ट्रक रोकना पड़ा | हम लोगो ने ट्रक रोका और अमन गया चप्पल लेने | हम लोग तब तक नीचे उतर के बीडी पीने लगे | फिर अमन भागते हुए आया और कहा की यार वहा से कुछ मार पीट की आवाज आ रही है | फिर विवेक ने अमन को कहा मेरी तरफ देखते हुए की अबे इसको नशा हो गया है, ये ऐसे ही बोल रहा हैं | अमन ने कहा नहीं यारो मैं सच कह रहा हूँ, तो हम लोग एक बार दिल की तसल्ली करने के लिए देखने गए | तो पता चला की सही में वहाँ रोड के किनारे थोड़े दूर से किसी को मारने की आवाज आ रही थी | तो मैंने अमन और विवेक से कहा कि अबे छोड़ो तो यार,,, और हस्ते हुए बोला की वहाँ कोई किसी को लगा रहा होगा | पर विवेक बोला तो फिर चलो चलते हैं मजा लेते हैं | थोड़ी देर अपन भी वेसे भी बहुत दिन से मैंने ब्लू फिल्म नहीं देखी है, मैंने कहा कि नहीं यार हटा तो | फिर अमन बोलता की चल तो, फिर मैंने कहा की अगर लड़की नहीं हुई कोई और हुआ तो फ्री मै फस जायेंगे जा के, पर दोनों नहीं माने और बोले कि तू रुक हम लोग जाते हैं | अब मैं अकेले क्यों रुकता , मेरे को भी जाना पड़ा उन लोगों के पीछे पीछे |

फिर हम लोग बहुत पहले ही वहाँ पहुच गए थे | अभी तक चुदाई होना शुरू नहीं हुई थी बस तीन चार लोग एक लड़की को कहीं से किडनैप कर के उसको मार रहे थे और उसके साथ जबरदस्ती करना चाहते थे | मेरे साथ जो लोग थे उनको हीरो बनने की ज्यादा पड़ी थी तो उन्होंने चिला दिया उनपर | तो उन लोग बोले मादरचोद निकलो यहाँ से, कैसे आए यहाँ पे, तो अमन ने कहा की चले जायेंगे पहले तुम लोग उस लड़की को छोड़ दो | बस फिर क्या था इतना बोलने की देरी थी , उन लोगों में से एक आया और बोला की मतलब तुम लोग पीट के ही जाओगे और इतना बोल के अमन को एक चांटा मार दिया | फिर हम लोग की हाथापाई हुए और फिर वो लोग भाग खड़े हुए | फिर मैं उस लड़की के पास गया | वो तो पूरी सहम सी गई थी | तो मैंने कहा डरो मत हम लोग तुम्हे कुछ नहीं करेंगे, अब तुम सेफ हो | फिर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने बोला – मेरा नाम अंजलि हैं |

फिर हम लोग उसको अपने ट्रक के पास ले आए | हम लोग ट्रक में बैठे और लड़की को जब ला रहे थे तभी मैंने सबसे कह दिया कि भाइयों मुझे ये लड़की पसंद आ गई है | तुम लोग पीछे बैठना ट्रक की ट्राली में | मैं और वो लड़की अंजलि आगे बैठेंगे | वो लोग बोले पर ट्रक में तो पीछे सामान लोड है , मैंने कहा वो तुम लोग जानो पर मैं और अंजलि तो आगे बैठेंगे |

फिर मैंने अंजलि को आगे बैठाया उन लोग पीछे बैठे कर फिर मैंने अंजलि से पूछा कि तुम कहा रहती हो यह लोग तुम्हारे साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे थे ? वो बोली कि मैं अपने घर से भागी हूँ मेरे घर वाले मेरी शादी मेरी मर्ज़ी के बिना करवा रहे थे तो मैंने वहां से भाग गई | मेरा घर दिल्ली में हैं, और जब मेरे घर वालो को पता चला तो उन्होंने मुझे ढूँढने के लिए कुछ लोग भेज दिए | ये वही लोग थे उनमे से एक वो भी था जिससे मेरी शादी होने वाली थी | उसी ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और तुम लोग बिलकुल सही समय पे आ गए नहीं तो पता नहीं मेरे साथ क्या होता | मैंने कहा अच्छा तो ये बात हैं फिर हम लोग एक पुलिस स्टेशन गए और रिपोर्ट लिखवाई |

सब कुछ सही होने में कुछ दिन लग गए और मेरा अंजलि को पटाने का काम भी पूरा हो गया क्यूंकि वो मेरे ही घर में रुकी हुई थी | मेरे मम्मी पापा और मेरी बहन के साथ उसे मेरे घर वालो का भी नेचर बड़ा अच्छा लगा और कुछ दिन के बाद वो भी मुझसे प्यार करने लगी | उसके बाद कुछ और दिन उसको मेरे साथ घुलने मिलने में लग गए और हम काफी करीब आ चुके थे एक दुसरे के | उसके बाद आखिर वो रात आ ही गई जिसका मुझे इन्तजार था | मैं तो यही सोचता था की कैसे रात मै उसके कमरे में जाऊ पर उस दिन तो वो खुद मेरे कमरे में आ गई और मुझसे बोली मैं यहाँ सो जाऊ | मुझे वहाँ सोने में डर लग रहा है आज | मैंने कहा बिलकुल तो वो मेरे बेड पर आके लेट गई और मैं उसके बगल मै फिर क्या बात थी लड़की मेरे बगल में थी और कहानी पूरी सेट थी |

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे पूछा कि तुम्हे एक किस कर लूँ उसने मुस्कुराते हुए बोला कि तुम्हे बिना किस किये नींद नहीं आयगी क्या ? मैंने कहा नहीं  फिर वो खुद हल्का सा उठी मुझे किस करने के लिए फिर हम लोगों ने किस की पहले गाल पर फिर लिप्स पर और करीब १५ मिनट तक की | उसे भी बहुत मजा आया और फिर मैं उसके एक हाथ से दूध दवाने लगा वो काफी अच्छा फील कर रही थी | फिर में किस करते करते उसके गले तक आया और अपने हाथ उसके नाइटी के अंदर डाल दिया फिर उसने मेरे शर्ट के बटनों को खोला और शर्ट उतार दी | मैंने भी उसकी नाइटी उतर दी वो अंदर से वाईट रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुयी थी | फिर में उसको अपने ऊपर लिटाया और उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके दूध को चूसने लगा और दबा भी रहा था | वो भी गरम होने लगी और उसके बाद मैंने उसे किस किया होठो पर और अपने हाथ से उसकी कमर पे सहलाते हुए उसे अपने नीचे लिटाया और उसके पैंटी उतारी और दूध को चूमा | फिर उसकी कमर में किस की और फिर उसके पैरों पर किस करते हुए उसकी दोनों टांगो को फल दिया और चूत में अपनी दोनों ऊँगली डाल कर उसे अन्दर बहार करने लगा | फिर मैंने किस की और अपनी जीभ से उसे मस्त चोदने लगा और अब उससे रहा नहीं जा रहा था |

वो काफी गरम हो गई थी और अब उसे चुदवाना था फिर उसने उठ कर मेरी पेंट और मेरी अंडर वियर उतार दी और मेरे लंड को चूसने लगी जोर जोर से | मैंने उसे करीब २० से २५ मिनट अपना लंड चुसाया होगा फिर मैंने उसको सीधा लिटाया और अपना लंड उसकी चूत में डाला और उसके ऊपर लेटा | उसे आराम आराम से चोदना शुरू कर दिया और उसके दूध भी पी रहा था | पहले खूब देर तक उसको ऐसे चोदा फिर मै पलंग मै बैठा और उसे अपनी जांघो पर सीधा बैठाया और अपना लंड उसकी चूत में डाला और अपने हाथो से उसके दूध दबाते हुए और उसे किस करते हुए चोदना शुरू कर दिया |

वो बी मुह से आह्ह्ह्हह् अह्ह्ह्ह कर के आवाज़ निकालने लगी उसकी ये आवाज सुन के मेरा जोश और बढ़ गया | मैंने उसको जोर जोर चोदना शुरू कर दिया और करीब ४० ४२ मिनिटे तक उसे चोदा होगा और वू ऊम्म्मम्म्म्म आआआह्ह्ह्ह ऊऊह्हह्हह कर रही थी | मैं भी खूब जोर जोर से आवाज निकाल रहा था अहह अहह अहह अहह अहह  अहह और फिर झड़ने के बाद हम लोगो ने किस की बिस्तर में | फिर एक दुसरे के ऊपर लेटे रहे ,,,,, और तब जा के मुझे याद आया की यार मैं तो कंडोम पहनना भूल ही गया और उसी के अंदर झड़ गया …..तो दोस्तों मैं तो भूल गया पर आप लोग जरुर ध्यान रखना इस बात का | मिलते हैं फिर अगली कहानी के साथ |

कुतिया बनके चुदने में बहुत मजा आता हैं Kutiyan banke chudne me bahut majaa hai

कुतिया बनके चुदने में बहुत मजा आता हैं Kutiyan banke chudne me bahut majaa hai,  लण्ड निकाल कर मेरे हाथ में पकड़ाया, तना हुआ लण्ड, कड़क लण्ड, लण्ड चूसती रही, कई लड़कों ने एक साथ चोदा.

Hindi Chut Sex मेरा नाम रानी है, मैं 22 साल की हूँ. Stories अभी शादी नहीं हुई है। xxxStory करीब डेढ़ साल पहले की है, मैं अपने दीदी और जीजाजी के पास गई हुई थी। एक रात की बात है, मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं जा कर बाल्कनी में खड़ी हो गई और नीचे सड़क पर देखने लगी। तभी वहाँ, पे एक कुतिया और उसके पीछे 5-6 कुत्ते वहीं गली में आ गए।

कुतिया बैठ गई तो कुत्ते भी उसके आस पास बैठ गए। तभी पास वाली दूसरी बाल्कनी में दीदी और जीजाजी आकर खड़े हो गए। मैं एकदम से पीछे हट गई।

जीजा जी बोले- वो देख, यह साली हरामज़ादी इन सब कुत्तों से चुदवाएगी।

तो दीदी ने मज़ाक में कहा- आप क्यों पीछे रहते हो आप भी चले जाओ।

जीजाजी बोले- मेरे लिए तुम हो न चलो आओ, आज तुझे कुतिया बना के चोदूँगा।

दीदी खिलखिला के हंस पड़ी और दोनों अंदर चले गए।

मैं बड़ी हैरान हुई कि कैसे एक कुतिया 6-6 कुत्तों से चुदवा सकती है।

मैं वहीं बैठ गई यह देखने के लिए कि कैसे होता है।

थोड़ी देर बाद कुतिया उठी और वो कम्पाउण्ड में जहाँ भी जाती कुत्ते उसके पीछे पीछे।

आखिर एक कुत्ते ने उसको पीछे से पकड़ा और चोदना शुरू कर दिया।

उनकी चुदाई देख के तो मैं भी गर्म हो गई।

नीचे कुत्ता कुतिया को चोद रहा था, अंदर कमरे में जीजाजी मेरी दीदी को और मैं अपने लोअर में हाथ डाल के अपनी चूत का दाना मसल रही थी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

थोड़ी देर बाद ऐसे ही चूत सहलाते सहलाते मेरा तो पानी छुट गया और नीचे कुतिया ने कुत्ते का लण्ड अपनी चूत में जकड़ लिया और उस कुत्ते के नीचे ही लटक गई।
‘हाय…’ मेरी तो जान ही निकाल गई, मेरा तो दिल कर रहा था कि नीचे जाऊँ और किसी भी कुत्ते के सामने अपनी चूत कर दूँ कि ले मादरचोद, इसे भी चोद, या फिर दीदी ही मुझे पे मेहरबान हो जाएँ और कहें ‘ले रानी, आज की रात मेरा पति पूरा तेरा…’

पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

मुझे सारी रात नींद नहीं आई और मैं सारी रात बाल्कनी में बैठी उस कुतिया को देखती रही, जिसने एक ही रात में चार अलग अलग कुत्तों से चुदवाया और जितनी बार अलग कुत्तों ने उसे चोदा, उतनी बार मैंने उन्हें देख कर हस्तमैथुन किया और अपना पानी छुड़वाया।

मगर मेरी आग बुझने की बजाय और भड़क गई।

खैर कुछ दिन बाद मैं वापिस अपने घर आ गई, मगर उस कुतिया वाला ख्याल मेरे दिल में घर कर गया और मैं भी चाहने लगी कि कोई 4-5 लड़के हों और मुझे कुतिया की तरह चोदें।

अक्सर मैं इस खयाल को दिल में लेकर हस्तमैथुन करती, मगर मेरे मन की तृप्ति नहीं होती।

फिर मैंने इस बात को सच करने के लिए अपनी क्लास के, पड़ोस के और जहाँ कहीं भी मौका मिलता, मैं लड़कों को लाईन देने लगी।

थोड़े ही दिनों में एक लड़के तुषार से मेरी सेटिंग हो गई।

सेटिंग के अगले ही दिन हम दोनों शाम को एक रेस्तरां में गए, जहाँ तुषार ने मुझे पहले बार किस किया।
मैंने कोई विरोध नहीं किया और उसका पूरा साथ दिया।

जब वो मुझे वापिस घर छोड़ने आया तो कार से उतारने से पहले उसने मुझे गुड नाईट किस करने को कहा, मैंने हाँ कर दी।

वो एक बहुत ही लंबा किस था, करीब डेढ़ दो मिनट तक तुषार ने मेरे और मैंने तुषार के होंठ चूसे।

होंठ चूसते चूसते तुषार ने मेरे बूब्स भी दबाये, जिसका मैंने कोई विरोध नहीं किया।

उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरी ब्रा ऊपर उठा दी और दोनों हाथों से खूब दबा दबा कर मेरे बूब्स को मसला, मेरे दोनों निप्ल्स को उँगलियों से मसला।

सच कहूँ मुझे बहुत मज़ा आया, मेरा दिल चाह रहा था कि तुषार मुझे यही गाड़ी में ही चोद दे।
मगर वो सब्र वाला लड़का था।

मैंने अपने कपड़े ठीक किए और घर वापिस आ गई, मगर एक बात मुझे लग रही थी के अगली बार जब भी हम मिलेंगे तुषार पक्का मुझसे सेक्स करेगा।

इसी गुलाबी ख्यालों में मैंने तुषार के नाम का हस्तमैथुन किया और सो गई।

करीब 2-3 महीने हमारा प्यार ऐसे ही चलता रहा।

एक दिन हम मूवी देखने गए, उस दिन सिनेमा में तुषार ने अपना लण्ड निकाल कर मेरे हाथ में पकड़ाया।

मैं अंधेरे में उसे गौर से देखने की कोशिश करने लगी तो तुषार ने मेरा सिर नीचे को दबाया और अपना लण्ड मेरे मुँह से लगा दिया।

मैंने बड़े आराम से उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया और जैसे जैसे तुषार कहता गया, वैसे वैसे मैं उसका लण्ड चूसती रही।

करीब 10-12 मिनट मैंने उसका लण्ड चूसा, वो एक मोटा और लंबा लण्ड था, मेरा तो मुँह दुखने लगा, मैंने तुषार से कहा- बस करो तुषार, मुँह दुखने लगा है।

वो बोला- फिर ऐसे करते हैं, किसी दिन कमरे में चलते हैं, वहाँ आराम से एंजॉय करेंगे।

मैंने कहा-ठीक है, वैसे भी यहाँ इतना मज़ा नहीं आ रहा।

खैर अब तो सेक्स पक्का ही था।

तय दिन को हम दोनों चल पड़े।

तुषार अपनी गाड़ी में बैठा कर मुझे अपने किसी दोस्त के घर ले गया, जब हम उसके घर पहुँचे तो अमन (तुषार का दोस्त) के घर पे उसके दो दोस्त पहले से ही आए बैठे थे।

मुझे बेडरूम में बैठा कर तुषार उनसे बात करने लगा।

थोड़ी देर में तुषार वापिस आया और बोला- यार थोड़ी प्रोब्लेम हो गई, अमन के दो कज़िन भी हैं, हम सब दोस्त इककट्ठे ही खाने पीने का प्रोग्राम बनाते हैं, अगर तुम्हें कोई ऐतराज न हो तो हम अलग बेडरूम में अपना हनीमून मना लेते हैं, ये सब दूसरे कमरे में अपना पेग शेग का प्रोग्राम कर लेंगे।

मैंने बिना संकोच हाँ कर दी पर मन में सोचा, अबे सालो यहाँ एक शानदार आइटम तुम सब से चुदने को तैयार है और तुम साले दारू के पीछे पड़े हो।

खैर वो तीनों दूसरे कमरे में चले गए और तुषार मुझे एक बेडरूम में ले गया।

अंदर जाते ही उसने मुझे बाहों में कस लिया, मैं तो खुद ही मरी जा रही थी तो मैंने खुद ही अपने होंठ तुषार के होंठों पे रख दिये।

होंठ चूसते चूसते तुषार मुझे बेड तक घसीट कर ले गया और जाते जाते ही उसने मेरा टॉप उतार दिया और ब्रा की हुक भी खोल दी। तो मैंने भी तुषार की टी शर्ट उतार दी।

अगर तुषार ने गर्मी दिखाई तो कम मैं भी नहीं थी।

तुषार ने मुझे बेड पे धक्का दे के गिरा दिया और मेरी ब्रा नोच के दूर फेंक दी और मेरे बूब्स पे टूट पड़ा, दोनों बूब्स को अपने हाथों में पकड़ के खूब दबाया और मुँह में लेकर चूसा।

मैं उसके सर में हाथ फेर रही थी, अपने मम्मे चुसवाने का मज़ा ले रही थी।

तुषार ने मेरी गर्दन, छाती और चेहरा सब को बारी बारी से चूमा, चाटा और जी भर के चूसा।

फिर वो उठा और उसने मेरी जीन्स और पेंटी दोनों एक साथ ही उतार दी।

मेरी शेव की हुई चूत देख कर बोला- साली पूरी तैयारी के साथ आई है, क्या चिकनी चूत निकाली है शेव करके।

मैंने भी आँखें मटका कर उसको जवाब दिया।
फिर उसने अपने पैंट उतारी।
उसकी जोकी की चड्डी में उसका तना हुआ लण्ड साफ दिख रहा था।
मेरी आँखें तो उसके दीदार की प्यासी थी।

तुषार बेड पर आया और मेरी छाती पर बैठ गया- ले निकाल बाहर अपने यार को और जी भर के प्यार कर इसे!

मैंने उसकी पेंटी नीचे की, लोहे की सलाख जैसा कड़क लण्ड मेरी आँखों के सामने झूल गया।

उसने भी अपने लण्ड के आस पास पूरी तरह से शेव कर रखी थी।

मैंने उसके लण्ड को अपने हाथों में पकड़ा और बिना उसके कहे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

अभी मैं चूस ही रही थी के दरवाजा खोल कर अमन अंदर आया और बोला- अरे तुषार तू कब तक फ्री होगा, तेरा भी पेग बनाऊँ क्या?

बहाना तो वो तुषार से बात करने का कर रहा था मगर ताड़ वो मेरे नंगे बदन को रहा था।

मैंने भी कोई शर्म नहीं की, मैं अपने बड़े आराम से तुषार का लण्ड चूसती रही। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

फिर अमन मुझसे बोला- अरे रानी, तुम पेग लेती हो?

मैंने लण्ड मुँह से निकले बगैर सिर हिला कर हामी भरी।

मैं तो खुद चाहती थी इन सबको पता चल जाए कि मैं यहाँ सिर्फ एक से चुदने नहीं आई।

मेरी हाँ देख कर अमन बिल्कुल मेरे पास आया और आँख मार कर बोला- ऐसी टेस्टी चीज़ के बाद पेग की ज़रूरत है?

मैंने भी लण्ड मुँह से निकाल कर कहा- अगर है तभी तो हाँ कही है।

वो तो जैसे उछलता हुआ बाहर गया।

उसके बाद तुषार ने मेरी टाँगें फैलाई और अपना लण्ड मेरी चूत पे सेट किया।

मैंने नीचे से अपनी कमर हिला कर उसे सही से बैठाया और अगले ही धक्के में तुषार के लण्ड का सुपारा मेरी कुँवारी चूत में घुस गया।
हालांकि मैं अक्सर अपनी दो दो तीन तीन उंगलियाँ और कभी कभी तो गाजर मूली जैसी चीज़ें अपनी चूत में लेती रहती थी पर लण्ड घुसने का अपना ही आनन्द है।
मुझे कोई खास दर्द भी नहीं हुआ और धीरे धीरे बड़े ही प्यार से तुषार ने अपना सारा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया।

हम दोनों काम के सागर में डूब गए, तुषार मुझे धड़ाधड़ पेल रहा था।

उधर खुले दरवाजे से तुषार के तीनों दोस्त बारी बारी से मुझे चुदते हुए देख गए थे मगर मुझे किसी की परवाह नहीं थी।

हम दोनों के होंठ आपस में बड़ी ज़ोर से चिपके हुए थे, दोनों अपनी अपनी जीभ एक दूसरे के मुँह के अंदर और बाहर घूमा रहे थे।

10-12 मिनट यह खेल पहले धीरे धीरे और फिर पूरी रफ्तार से चला।

तुषार के सख्त लण्ड की रगड़ से मैं तो 7-8 मिनट में ही झड़ गई।

सच कहूँ तो जो मज़ा आज मुझे लण्ड से चुदवा कर झड़ने में आया, वो इससे पहले और किसी भी तरह से झड़ कर नहीं आया था।

जब मेरा हो गया तो मैं निढाल सी होकर लेट गई, उसके बाद तुषार ने अपना पूरा ज़ोर लगा दिया।

बेशक मैं झड़ चुकी थी पर इसके बाद भी चुदवाने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर तुषार का भी हो गया, उसने अपना ढेर सारा वीर्य मेरी चूत में ही छुड़वा दिया और मेरे ऊपर ही लेट गया।

कुछ देर वो लेटा रहा फिर बोला- पेग लगाने चलें?

मैंने कहा- चलो।

जब मैं उठ कर कपड़े पहनने लगी तो बोला- अरे, इसकी क्या ज़रूरत है, ऐसे ही चलते हैं।

मैं हंस कर बोली- ऐसे ही, नंगे?

‘हाँ, तो क्या हुआ?’ वो बोला।

‘देख लो तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ, अगर मेरे साथ कुछ भी हुआ तो तुम ज़िम्मेवार होगे?’ मैंने उसे चेतावनी दी।

‘अरे डरो मत, तुम चलो तो सही…’ उसने मेरा हाथ पकड़ा और दूसरे कमरे में ले गया।

जब हम कमरे में गए तो देखा के वो सब तो पहले से चड्डियों में बैठे थे।

मुझे देख कर सबने खड़े हो कर मेरा अभिवादन किया- आइये आइये, हुस्नों की सरकार पधार रही हैं, सब सलामी देंगे, सलामी दो…

इतना कहते ही सब ने अपने अपने लण्ड अपनी चड्डियों से बाहर निकाले और ऊपर की उठा कर मुझे सलामी दी।

‘बाई गॉड…’ एक साथ तीन चार लण्ड देख कर तो मेरा मन खुशी से भर गया, मैं मन ही मन में सोचने लगी, क्या आज ये सभी मुझे उसे कुतिया की तरह चोदेंगे।

मैंने मन बना लिया के ओके अगर ऐसा है तो कोई बात नहीं मैं आज सबके लण्ड का स्वाद चख कर ही जाऊँगी।

पहले सब एक एक पेग बनाया, हम सबने पिया, मेरा पहली बार था, बहुत कड़वा स्वाद था मगर पीने के थोड़ी देर बाद ही मुझे सुरूर सा चढ़ गया जो बहुत ही अच्छा लगा।

इसी सुरूर में मैं पीछे को लुढ़क गई।

मेरे बेड पे लेटते ही सब अपना खाना पीना छोड़ के मेरे चारों तरफ आ गए।

मुझे नहीं पता लगा कि किसने मुझे उल्टा किया और बोला- आज साली की घोड़ी बना के लूँगा।

दूसरा कोई बोला- अरे नहीं, आज तो इसे कुतिया बनाएँगे और हम सब कुत्ते बन कर इसे एक साथ चोदेंगे।

सब हंस पड़े और मन ही मन में मैं भी।

उसके बाद मुझे नहीं पता के कौन पहले मुझ पर चढ़ा, एक ने पीछे से चूत में लण्ड घुसाया तो कोई होंठ चूस रहा, कोई छातियाँ दबा रहा था, कोई निप्पल चूस रहा था।
किसी ने इस बात की भी परवाह नहीं की, अभी मेरे मुँह में किसी का लण्ड था और दूसरे ही पल किसी की जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।
इसी दौरान उन्होने मुझे एक पेग और पिला दिया, अब तो मेरे रही सही सुध बुध भी जाती रही, सब मुझ पे पिल पड़े।

एक घंटे से भी ज़्यादा मेरी चुदाई चली, मुझे नहीं पता इस दौरान मैं कितनी बार स्खलित हुई पर उन सब ने अपना वीर्य मेरी चूत में ही छुड़वाया।

मेरी चूत उन सब के वीर्य से भरी पड़ी थी और मुझे नहीं मालूम किस किस का वीर्य मेरी चूत में था।
मेरी टाँगें और हाथ एक घंटे से कुतिया बने हुये कारण दुखने लगे थे।
जब सबका हो गया तो सबने फिर से खुशी में एक एक पेग और लगाया।

मैं उनके सामने ही बेड पर बिल्कुल नंगी गिरी पड़ी थी। मुझे आधी अधूरी होश थी, शराब का नशा पूरा चढ़ा हुआ था।
मैं देख सुन सब सकती थी, मगर एक लंबी चुदाई और नशे के कारण हिलने तक की ताकत मुझमें नहीं थी।

थोड़ी देर बाद सब के सब फिर उठ कर मेरे आस पास आ गए और इस बार उन्होंने मुझे सीधा लिटाया और फिर से मेरी चुदाई शुरू हो गई।

अमन बोला- इस बार भाई कोई इस कुतिया के अंदर नहीं छुड़वाएगा, सब इसको अपने वीर्य से नहलाएंगे।

सबने हामी भरी।

उसके बाद तो जिसका भी छुटता, वो लण्ड बाहर निकालता और और मेरे मुँह पे, छातियों पे पेट पे अपने वीर्य के फव्वारे छुड़वाता।

मेरा सारा बदन उन चारों कुत्तों के वीर्य से भीग गया।

सुबह 10 बजे शुरू हुई मेरी काम क्रीड़ा दोपहर बाद करीब 4 बजे खत्म हुई।

थोड़ा संभलने पर मैं उठ कर खड़ी हुई और बाथरूम में जाकर नहाई।

जब नहा रही थी तब भी वो चारों मेरे साथ ही नहाये और सबने मेरे बदन को खूब नोचा।

मेरे बूब्स पे, पेट पे, पीठ पे, जांघों पे और चूतड़ों पे उन सब के दाँतों के काटने के निशान थे।

नहा कर बाहर निकली तो सब ने मिलकर मेरे बदन को तौलिये से साफ किया और मुझे अपने हाथों से कपड़े पहनाए।
उसके बाद मुझे घर छोड़ा।

रात को मुझे नहीं पता चला कि मैं सो रही थी या मर गई थी।

अगली सुबह उठी तो सारा बदन दर्द कर रहा था, चूत तो ऐसे लग रही थी जैसे किसी ने पत्थर से रगड़ कर छील दी हो।

छुट्टी होने के कारण मैं सारा दिन अपने कमरे से नहीं निकली। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

जब नहाते हुये मैंने अपना नंगा बदन शीशे में देखा तो हैरान रह गई, ज़ालिमो ने एक इंच भी जगह ऐसी नहीं छोड़ी थी जहाँ काटा न हो।

मगर मैं फिर भी खुश थी कि जैसी चुदाई मैं चाहती थी, उससे भी बढ़िया उन लोगों ने मुझे चोदा था।

दोपहर को तुषार का फोन आया और मेरे हाल चाल पूछा। बातों बातों में अगले प्रोग्राम के बारे में पूछा तो मैंने कहा- इस बार तू चार थे, अगली बार छह लेकर आना।

मैं बॉयफ्रेंड के फ्लैट में चुद गई Main boyfriend ke flat me chut gayi - Mast sex story

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Hindi Sex Kahani मेरी प्यारी Sex सहेलियों कैसी है आपकी मदमस्त और रस में भीगी हुई चूत. Story सच बोलू, मेरी चूत में तो इस समय आग लगी हुई है. इस समय आप लोगो के लिए मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ की गयी मस्ती की एक रोमेंटिक कहानी ले कर आई हु. साला बड़ा हरामी था. में बड़ी ही शर्मीली लड़की थी तब. लेकिन, उस भोसड़ी ने मुझे इतना चोदा, कि मेरी चूत को बिना लंड लिए अब शांति ही नहीं मिलती. अगर अब उसको लंड न मिले, लंड का मतलब कोई भी लंड नहीं, सिर्फ मजबूत लंड. जिसके अन्दर इतनी ताकत हो, कि वो साला मेरे अन्दर के जवालामुखी को शांत कर सके.

सुमित नाम था उसका. सीनियर था मेरा कॉलेज में. बहुत रेगिंग की साले ने मेरी. लेकिन, मुझे उस से कोई गिला नहीं था. क्योंकि, मैं कोई स्पेशल लड़की तो थी नहीं. जो सीनियर सबके साथ कर रहे थे, वो भी मेरे साथ कर रहा था. लेकिन, मैं और लोगो से थोड़ी अलग थी. बिंदास थी मैं. क्लास में एक – दो बार चुदवाया था मैंने. पहली बार तो मुझे मेरे मामा के लड़के ने ही चोदा था. कॉलेज नया था मेरे लिए और मुझे मालूम था, कि मैं वहां बिंदास होकर नहीं रह सकती थी. चुदाई का शौक अभी तक लगा नहीं था मुझे.

सुमित ने पता नहीं मुझ में क्या देखा, वो मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का बहाना ढूंढने लगा. कॉलेज को ६ महीने हो चुके थे. रेगिंग तो अब नहीं होती थी. लेकिन सुमित मेरे आगे पीछे मंडराता रहता था. फिर उस दिन, मैं कैंटीन में अकेले बैठी थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। वो अचानक से आया और मेरे सामने बैठ गया. उस ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझ से बोला, कि मैं उसे बहुत अच्छी लगती हु. क्या मैं उस के साथ एक पिक्चर देखने चल सकती हु?

पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने उसको हाँ कह दिया. हम दोनों कुछ दिन साथ में घुमे, पिक्चर देखी. वो मुझे अब अच्छा लगने लगा था. उसने एक – दो बार पिक्चर देखते हुए, मुझे किस करने कि कोशिश भी की थी. लेकिन, जब मैंने उसको देखा, तो उसने अपने आप को रोक लिया. उस दिन, उसने कहा कि उसके घर में कोई नहीं है. क्या मैं उसके घर आ सकती हु? मैंने हाँ कह दिया दिया. मैंने हाँ तो कह दिया था, लेकिन डर रही थी. मुझे लग रहा था, कि वो मेरी चुदाई करना चाहता है.

लेकिन, अब मैं भी चुदाई के लिए तैयार थी. जब मैं उसके घर पहुची, तो वो हरामी श्रीफ अंडरवियर में ही घूम रहा था. उस ने मुझे एक पैकेट दिया और कहा – मेरे लिए गिफ्ट है. मैंने ख़ुशी से ले लिया और जब खोला, तो देखा कि उसमे एक सेक्सी ब्रा – पेंटी थी. मुझे शर्म आने लगी. सुमित मुझे फ़ोर्स करने लगा पहनने के लिए. उसने सारे दरवाजे बंद कर दिए और पर्दों को भी गिरा दिया. जब मैं कमरे में आई ब्रा – पेंटी में. तो देख कर हैरान रह गयी. साले ने अपने कपडे उतार दिए थे और वो साला पूरा का पूरा नंगा खड़ा हुआ अपने लंड को हिला रहा था.

अब तो मुझे डर लगने लगा था. मुझे लगने लगा था, कि साला आज तो मेरा रेप कर के ही मानेगा. वो मेरे पास आया और मेरे बूब्स को देख कर एकदम से बैचेन हो कर ब्रा को फाड़ दिया. मैंने कहा – साले, हरामी. जब देखनी ही नहीं थी, तो दी क्यों थी? वो हँसने लगा और उसने अपने लंड को मेरे हाथ में रख दिया. बॉयफ्रेंड का लंड किसी भट्टी की तरह धधक रहा था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मेरे मुह से एकदम से आह्ह्ह्ह निकल गयी. अहहहहः.. उसके लग गया, कि मैं भी गरम हु. उस ने एक मिनट भी देरी नहीं की. उसने मेरे बालो को पकड़ कर खीच लिया और मेरे होठो को अपने होठो के बीच में दबा लिया.

वो साला मेरे होठो को चूस कम रहा था, चबा ज्यादा रहा था. उसने मेरे पुरे होठो को खा डाला. पागल कर दिया था मुझे. मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी. मेरी चूत से यास टपक रहा था. उसने तभी अपनी एक ऊँगली को तेजी से मेरी चूत में घुसा दिया. मेरी चीख निकलने वाली थी. लेकिन, उस साले ने मेरे मुह को जकड़ा हुआ था अपने मुह में. फिर उसने मुझे जोर से धक्का मारा और बिस्तर पर गिरा दिया. फिर वो सीधे मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गया. सच कहू, मुझे भी मजा आ रहा था. वाइल्ड होने लगा था वो. मैंने उसको कस कर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वो रुक ही रहा था.

मेरी चूत अब तक दो बार रस छोड़ चुकी थी. मैंने उसको कहा – और नहीं. ठोक दो मेरी चूत को अब. डाल दो लंड को अब मेरी चूत. बुझा दो इस भट्टी को. उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ कर एक ही झटके में अपने लंड को मेरी चूत में उतार दिया. ऐसा लगा, कि जैसे किसी ने गरमागरम कोयला मेरी चूत में भर दिया हो. पागल कि तरह चिल्लाना चाहती थी मैं. लेकिन वो मुझे कोई मौका ही नहीं दे रहा था. उसकी गांड बहुत तेजी से चल रही थी और वो ताबड़तोड़ धक्को कि बरसात किये हुए था.

मैं पता नहीं कितनी बार झड चुकी थी. सारा शरीर थक कर चूर हो चूका था. उसकी स्पीड बढती जा रही थी और फिर ५ मिनट के बाद, उसके लंड ने लावा उगल कर मेरी चूत को जो भरा, मेरी तो बस जान ही निकल गयी. लेकिन, उस हरामी ने जो मेरी चुदाई की, मजा ही आ गया उस में. मैं ये नहीं कह रही हु, कि आप लोगो ने चुदाई नहीं करवाई है या चुदाई का मजा नहीं लिया है. लेकिन, यकीन मानो. वाइल्ड चुदाई में जो मजा है. मेरा मतलब अपना रेप करवाने वाला जैसा मजा है. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। वो कहीं नही है. लंड ऐवरेज साइज़ का हो, तो भी प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन साला नीयत उसकी हरामी होनी चाहिए. वो साला तुम को देखे, तो बस उसका लंड तुम्हारी चूत के लिए बावला होना चाहिए. क्या लगता है तुमको? मिलेगा कोई तुमको ऐसा?

पडोसी के लड़के ने गांड चाटकर चूत मारी – INDIAN SEX KAHANI

पडोसी के लड़के ने गांड चाटकर चूत मारी – INDIAN SEX KAHANI, मुझे पड़ोसी ने रांड बनाकर चोदा, padosi ne bade lund se choda, padosi ne apna bada lund de ke khub choda, पड़ोसन ने चोदना सिखाया, Padosan ko Choda.

मैं अंजली, आज फिर से एक अपनी लाइफ का मजेदार Hindi Sex Stories लेकर आपके सामने हु. मुझे उम्मीद है, कि आपको मेरे पहले लिखे हुए अनुभव अच्छे लगे होंगे. मुझे आप लोगो के कमेंट का हमेशा इंतज़ार रहेगा. ताकि मुझे पता लग सके, कि आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते है और मेरे लिए आपके मन में क्या फेंटेसी है. आपके मन की फेंटेसी मुझे गरम करती है और हो सकता हु, कि आपकी फेंटेसी इतनी मजेदार हो; कि वो मुझे इतना गरम कर दे. कि मैं आपसे मिलने के लिए बैचेन हो उठू. अगर मियां – बीवी आपस में खुले हु और एक दुसरे की इच्छाओ की रेस्पेक्ट करते हो. तो लाइफ बहुत आसान हो जाती है. मेरे और मेरे पति रजत के बीच में कुछ छुपा नहीं है और इसी वजह से हम दोनों को कोई मजेदार सेक्स की ओपोर्तुनिटी मिलती है, तो हम उसे मिस नहीं करते है. आज मैं आपको बताती हु, कि किस तरह मेरे पडोसी शर्मा जी के लड़के ने लाइट ना होने का फायदा उठा कर मेरी गांड चाटी और मेरे सारे छेदों की मदमस्त चुदाई की.


दोस्तों, मैंने पहले भी बताया था, कि मेरी उम्र ४३ इयर्स है और मेरा फिगर देख कर अच्छे – अच्छे मर्दों का लंड अपना पानी छोड़ देता है. मेरे बूब्स ३६सी, कमर ३२ और चुतड ३८ इंच के है और मेरी मदमस्त चाल को देख कर मेरी पीठ पीछे आहे भरते है. चाहे वो हमारे पडोसी हो, दूध वाला, सिक्यूरिटी गार्ड या मेरे ऑफिस के मेरे साथ काम करने वाले लोग. मुझे इस बाद का पता था और जब लोग मुझे घुर – घुर कर देखते है, तो मेरे दिल में एक अजीब सी ठंडक महसूस होने लगती है. ये बात ज्यादा पुरानी नहीं है. कुछ महीने पुरानी ही है. रजत अपने ऑफिस की पार्टी में गये हुए थे और रात को देर से आने वाले थे. मैं उस समय अपने फ्लैट में अकेले थी और अचानक से लाइट चली गयी. उस समय रात के १० बजे थे. मुझे कहीं भी कोई इलेक्ट्रिशियन नहीं मिलने वाला था. रजत को फ़ोन किया, तो रजत का फ़ोन नहीं उठा. फिर, मैंने पड़ोस में जाकर शर्मा जी की डोरबेल बजायी. तो दरवाजा उनके बेटे रवि ने खोला. जब मैंने रवि को अपनी परेशानी बताई, तो वो बोला – आंटी, पापा तो सो गये है. मैं देख लेता हु.

रवि बाहर आ गया और मेरे पीछे – पीछे आने लगा. शायद, मेरी मटकती चाल ने उसको मदमस्त कर दिया था. उस समय मैंने एक हलके कपड़े की नाइटी पहनी हुई थी और ऊपर से बस शौल ले लिया था. शौल ने मेरे ऊपर का भाग तो ढक दिया था. लेकिन मेरी गांड नीचे से शायद नहीं ढक पायी थी. उसने अपने घर की रौशनी में शायद मेरी गांड का वो भाग देख लिया था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। वो इलेक्ट्रिक बोर्ड के पास गया. तो वो बोला, आंटी शोर्ट सर्किट हो गया है. फेस चेंज कर देता हु. आप वायर और पलास दे दीजिए. मैंने घर में मोमबती जलाई हुई थी. मैंने शौल को कुर्सी पर छोड़ा और चली गयी. जब मैं वापस आई, तो मैं तो एकदम से भौचक्की रह गयी. रवि ने अपने सारे कपड़े उतारे हुए थे और वो सिर्फ अंडरवियर में था और उसका लंड तम्बू बना हुआ था और अपने लंड को अपने एक हाथ से सहला रहा था और उसके आगे के भाग को बेरहमी से खीच रहा था. मुझे देखते ही, उसने मुझे पकड़ लिया और अपनी गोदी में उठा लिया.

मैंने उसको जोर से खीच कर एक थप्पड़ रसीद किया, तो उसने मुझे वहीँ सोफे पर पटक दिया और बाहर जाकर दरवाजा बंद कर आया. वो जब वापस आया, तो मैं डरी और सहमी हुई रजत का फ़ोन लगा रही थी. लेकिन, मेरे हाथ कांप रहे थे. रवि ने मेरे हाथ से मेरा मोबाइल ले लिया और बोला – नाटक करती है छिनाल. कब तुझे किसने चोदा है. सब जानता हु मैं. बहुत दिनों से मौका ढूंढने के बाद, आज किस्मत से तू हाथ आई है. आज नहीं छोडूंगा. मुझे डर लग रहा था, कि जवान खून है. पता नहीं क्या करेगा? फिर वो मेरे पास आया और एक ही बार में, मेरी नाइटी फाड़ दी और मैं एकदम से नंगी हो गयी. मुझे नाइटी के नीचे ब्रा और पेंटी पहन कर सोने की आदत नहीं है. उस दिन लाइट चले जाने की टेंशन में, मुझे कुछ ध्यान ही रहा. मोमबती में मेरा शरीर सोने के जैसे चमक रहा था. रवि मुस्करा रहा था और उसकी आँखों में एक चमक थी. वो बोला – साली, जिसने भी तुझे चोदा होगा, वो दुनिया का लकी आदमी होगा और आज मैं बन जाऊँगा.

फिर वो मेरे पास आ गया और मेरे बालो को पकड़ कर मेरे मुह को अपने लंड पर अंडरवियर के ऊपर से रगड़ने लगा. उसके लंड से पेशाब की बदबू आ रही थी. उसने मेरे बालो को बहुत जोर से खीचा हुआ था और मुझे लग रहा था, कि कुछ ही देर में मेरे बाल उसके हाथ में निकल जायेंगे. मैंने कहा – रवि, मुझे बहुत दर्द हो रहा है. रवि हसने लगा और बोला – अभी तो और भी दर्द होगा. अभी तो बस शुरुवात है. फिर वो हसने लगा और मेरे सिर को अपने लंड पर और जोर से दबा दिया और अब वो भी अपनी गांड को हिलाकर मुझे अपनी बदबू सुंघा रहा था. मैं कुछ नहीं कर पा रही थी. बेबस थी उसके आगे. फिर उसने मुझे पीछे कर दिया और एकदम से अपना अंडरवियर उतार दिया और उसका फनफनता हुआ लंड मेरे मुह के आगे लहराने लगा. मुझे नहीं पता था, कि पड़ोस वाले शर्मा के बेटे का लंड इतना बड़ा होगा. देखने में तो वो शरीफ ही लगता था. उसको देख कर मेरी चुदासी आँखों में बिजली कौध गयी और मेरे होठो पर रस आ गया. रवि बोला – मज़ा आया ना, छिनाल देख कर. है ना मस्त और जवान लंड…

सही कह रहा था वो… वो केवल २२ साल था और उसके गोरे रंग के लंड पर हल्का कालापन था. उसने अब अपने लंड मेरे मुह पर हर तरफ फेरना शुरू कर दिया. उसका लंड मेरे मुह पर हर जगह मेरे होठो पर, मेरी आँखों पर और मेरी नाक पर लग रहा था और अब हलके – हलके मैं भी गरम होने लगी थी और मुझे अपनी चूत पर गीलेपन का अहसास होने लगा था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। ,मेरे निप्पल अब कड़क भी होने शुरू हो गये थे. रवि मेरी इस हालत को देख कर बोला, लगता है. छिनाल तेरे भी अरमान जाग गये और हंस पड़ा. अब मेरे चेहरे पर भी हलकी मुस्कान आ गयी थी. मैं एक बहुत पुरानी कहावत को फॉलो करने लगी थी. “अगर आप रेप होने से रोक नहीं सकते हो, तो उसे एन्जॉय करो”. मुझे नहीं लग रहा था, कि मैं रवि को रोक पाउंगी. फिर मैं रवि के लंड को अपने एक हाथ से पकड़ लिया और उसको मसलने लगी. मेरे हाथ की ताकत और गर्मी पाकर उसके लंड ने और भी जोर से झटके मारने शुरू कर दिए.

रवि अब मस्ती में अपनी गांड चला रहा था और बोल रहा.. अहहाह अहहाह आआआ.. बहुत खूब.. मस्त … आआऊअऊओ ऊऊओह्ह्ह् एस एस … फिर मैंने एकदम से आगे बढकर गप्प से उसके लंड को अपने मुह में ले लिया और मस्ती में उसको चूसने लगी. रवि ने एक हाथ अपनी गांड पर रखा और एक हाथ से मेरे बालो को पकड़ा और अपनी गांड को हिला कर मेरे मुह को चोदने लगा. उसका लंड बहुत ही तेजी से सटास्ट अन्दर – बाहर हो रहा था और कभी – कभी मेरे गले तक पहुच जाता था. मैंने तो पागलो की तरह उसके लंड को हाथ से मसल रही थी और मस्ती में चूस रही थी. अभी १० ही मिनट हुए होंगे, कि उसके लंड ने एक बहुत ही गरम वीर्य की धार मेरे मुह में मार दी. उसका तेज स्पीड से वीर्य झट से मेरे गले से टकराया और मेरे हलक में उतर गया. मैंने उसके लंड को पूरा का पूरा चूस लिया. और फिर मैंने उसके लंड को उगल दिया. रवि के चेहरे से पसीना टपक रहा था. फिर उसने मुझे सोफे से लगा कर उल्टा खड़ा किया, तो मैंने बोला – गांड ही मारने दूंगी. वो बोला – हाँ छिनाल, पलट हो सही.

फिर, वो अपने घुटनों पर बैठ गया और अपने हाथ से मेरे बट्स को खोलने लगा. मुझे एकदम से दर्द हुआ, तो मैंने अपनी गांड आगे कर ली. उसने फिर से मेरी गांड को पकड़ा और नीचे से आकर अपनी जीभ को मेरी चूत पर रख दिया. ऊऊऊओह्हह्ह ओह…. माय गॉड! ऐसा तो आज तक मैंने किसी भी चुदाई में नहीं देखा था. उसकी जीभ नीचे से सीधे ही मेरी चूत में घुस गयी और ऐसा लगा, कि किसी ने धारदार छुरी नीचे से एकदम से मेरी चूत में घुसा दी हो. मैंने तो मरने ही लगीऔर अपनी गांड हिलाकर अपनी जीभ को बाहर निकालने लगी. पर उसने मेरी जांघो को कसकर पकड़ा हुआ था और मैं ज्यादा हिल नहीं सकती थी. वो अपनी जीभ से मेरी चूत के अन्दर की साईं दीवारों को चाटने में लगा हुआ था. मैं तो बस बावरी हुए जा रही थी. अब मैं ज्यादा देर कण्ट्रोल नहीं कर सकती थी. मैंने उसको कहा – बस रवि, और नहीं.. चोद डालो मुझे अब. बहुत खुजली होने लगी है अब.

रवि ने मुझे इग्नोर कर दिया. लेकिन उसने अपनी जीभ हटा ली. और फिर उसने अपनी जीभ को मेरी गांड के छेद पर रख दिया और उसको चाटने लगा… ऊऊऊओह्हह्ह क्या मस्त फीलिंग थी और वो मेरी गांड के छेद के आसपास के एरिया को चाट रहा था. फिर साथ ही साथ में उसने अपनी एक ऊँगली से मेरी चूत को रगड़ना शुरू किया. आआऊऊ बाबा.. उसकी जीभ गांड के छेद पर और ऊँगली चूत के छेद पर. मैं तो बस पागल ही हो चुकी थी. मैंने अपने हाथ से अपने चुचे दबाने शुरू कर दिए और निप्पल को खीचना भी शुरू कर दिया. मैंने अपने होठो को अपने दातो से काट रही थी और फिर पागलो की तरह अपनी अपनी गांड को रवि के मुह पर घुमा रही थी. पूरा माहौल में मेरी सिस्कारिया हाहाहा हहह ह्ह्ह ह्ह्ह आआअ अहहाह आआ अहहाह अहहाह आआआ गूंज रही थी और मेरी साँसे बहुत तेज चल रही थी. अचानक से मेरे शरीर ने रगड़ना शुरू कर दिया और मुझे अपनी चूत से अपना गरम माल बाहर बहने का अहसास हुआ. बहुत ही गाड़ा और बहुत सारा. रजत या किसी और साथ, जब मैं बहुत कामुक सेक्स किया था, तब मेरा इतना सारा वीर्य बाहर आया होगा.

मेरा सारा वीर्य उसकी ऊँगली के साथ चूत से बाहर आ गया. अब तो मैं पागल हो चुकी थी और अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था. मैंने एकदम से मुड़कर रवि के बालो को खीचा और उसकी खड़ा कर के उसके लंड को खीचने लगी. वो मुस्कुरा रहा था, मेरी बैचेनी पर. पर क्या करू, वो था ही इतना अच्छा और माहिर. किसी भी लड़की या औरत को एकदम से अपना दीवाना बना दे. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। आज तक मैंने सेक्स तो कई के साथ किया था, लेकिन प्यार सिर्फ रजत से. लेकिन, आज मुझे फिर से रवि से प्यार होने लगा था. फिर, रवि ने मुझे सोफे के किनारे को पकड़ कर घोड़ी बना दिया और मेरे बूट्स को अपने हाथ से खोलकर उस पर थूक दिया. फिर, थोड़ा थूक अपने हाथ में लेकर अपने लंड को रगड़कर गीला कर दिया और फिर अपने एक हाथ से अपने लंड को मेरी चूत पर सेट करने लगा और रगड़ने लगा. मैंने बहुत ही ज्यादा बैचेन हो गयी थी और फिर एक जोरदार धक्के के साथ उसने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार था.

मेरी सांस एक दम से अटक गयी. उसने मुझे सँभालने का मौका भी नहीं दिया और फिर से एक और जोरदार धक्का मारा और उसका लंड सीधा मेरी बच्चेदानी से जाकर टकरा गया. मेरे मुह से जोर से अह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआआआआआ निकल गयी और मैं सोफे के साइड पर गिरने ही वाली थी, कि उसने मुझे थाम कर खड़ा कर दिया और मस्ती में जोर से धक्के मारने लगा. मैंने सोफे को कसकर पकड़ा हुआ था, क्योंकि उसके धक्का का फ़ोर्स बहुत ज्यादा था और मैं बैलेंस नहीं बना पा रही थी. फिर वो पुरे जोश के साथ जोरदार धक्के मार रहा था. मेरे चुचे मस्ती में हवा में झूल रहे थे और मेरे मुह से लार टपक रही थी. मुझे नहीं पता था, कि मैं कितनी बार झड़ चुकी थी. लेकिन १० मिनट के बाद, मैं उसके लंड को और लेने की हालत में नहीं थी. फिर रवि के धक्को की स्पीड बड गयी और अगले ५ मिनट में उसने एक जोर दार धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. बहुत ही गरम था, जैसे की लावा मेरे अन्दर फुट पड़ा हो. वो जवान था, इसलिए उसके वीर्य की गरमी बहुत ज्यादा थी.

उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला था और जब उसके लंड ने पूरा का पूरा पानी मेरी चूत में छोड़ दिया. तब उसके लंड को बाहर निकाल दिया. उसके बाद, मेरी ज्यादा देर खड़ी वाली हालत नहीं थी और अब मुझे डर लगने लगा था. क्योंकि रजत कभी भी आ सकते थे. मैंने रवि को कहा, मैं चल नहीं सकती. प्लीज मुझे कपड़े पहना कर मेरे बेडरूम में पलंग पर लिटा दो. लाइट भी सही कर दो. रजत के पास दूसरी चाभी है. वो अन्दर आ जायेंगे. रवि ने मुझे कपड़े पहनाकर वहीँ बिठाया और लाइफ सही कर दी. फिर रवि ने जगह ठीक थी और मुझे बेडरूम में लिटा कर चले गया. मैंने बहुत थक गयी थी और मुझे नहीं पता चला, कि रजत कब आये. लेकिन, जब मैं सुबह उठी, तो मैं बहुत खुश थी; क्योंकि इतने जवान लंड से इतनी मस्त चुदाई मेरी बहुत टाइम बाद हुई थी.

मजदूर से चुदने में निराला ही मजा आता है Majdur se chudne me bahut maja aaya

मजदूर से चुदने में निराला ही मजा आता है Majdur se chudne me bahut maja aaya, उसने मेरी गांड में ऊँगली डाल दी, जोर जोर से आगे पीछे करने लगा और मैं मजे में चूर होने लगी.

दोस्तो, पिछली बार जैसे मैंने बताया था कि नेट के गाण्ड मारने वाले पुरुष ने मुझे यह मशवरा दिया था कि रात को कार लेकर निकलूंगा तो कोई ना कोई तो मिलेगा ही ! उसकी बात सच हुई और मुझे एक मस्त मोटा लम्बा चौड़ी छाती पर घने बालों वाला हट्टा-कट्टा मर्द भी मिल ही गया जिसने पूरी रात मेरी गांड का बैंड बजाया। उसके बाद जैसे मैंने कहा था कि अगली रात भी मैं अकेला ही था लेकिन मेरे नेट वाले दोस्त ने मुझे एक सलाह दी थी कि एक मर्द को जो मजदूर टाइप का हो, उसको दुबारा नहीं बुलाना, और दिन में तो बिल्कुल ही नहीं !

उसकी इसी नसीहत पर मैं कायम रहा और अगली रात फिर कार से निकला और एक मस्त लंड की तलाश में था। आज मैं उस इलाके में नहीं गया हालांकि उसने मुझे आज मिलने के लिए पक्का किया था लेकिन मैंने आज अपने नेट फ्रेंड की बात मानी आज मैं रेलवे स्टेशन गया, वहां एक पेड-पार्किंग में मैंने कार पार्क की और सड़क पर पहुँच गया। कई रिकशा वाले जाने के लिए बोले लेकिन काफी देर खड़े होने के बाद मुझे मुझे एक साफ़ सा मूंछों वाला हट्टा-कट्टा रिक्शा वाला दिखा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसने मुझे बड़े गौर से घूरा और मेरे पास आया। उसने मुझे भांप लिया था क्यूंकि वो दूर खड़ा देखता रहा था कि मैंने इतने रिक्शा वालों को मना क्यूँ किया था।

बोला- साहिब, इतनी महंगी कार पार्किंग में लगा कर इतनी रात को कहाँ जाने के लिए रिक्शा देख रहे हो ?

मेरी नज़र घूम फिर कर उसके पजामे पर अटक जाती कि शायद वहां कोई हरक़त दिखे।

तुम्हें कैसे पता कि मैंने कार पार्क की है? कह मेरी नज़र फिर वहीं चली गई तो आखिर उसने अपना लंड खुजलाया।

तब मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया।

अरे ओ चिकने साहिब, अब देख भी लो ! कब से कुछ देखने की कोशिश में थे !

वो मेरी तरफ बढ़ा, आसपास कोई ना था, मैं भी थोड़ा आगे बढ़ा और अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ते हुए मसल दिया- इसके लिए खड़ा हूँ इतनी देर से !

हाँ ! मुझे मालूम था साहिब ! रोज़ रात को रिक्शा चलता हूँ, आप जैसे अमीर घर के लोग, चाहे लड़कियाँ, औरतें हां बुड्ढे तक ऐसी गलियों में रात को निकलते हैं अपनी वासना मिटाने या फिर मिटवाने के लिए !

बोला- अब कहाँ चलना है?

मैंने कहा- मेरे घर !

बोला- ज़रा रुकना, मैं स्टैंड पर रिक्शा ज़मा करवा के यहाँ आता हूँ, आप अपनी कार ले आयें।

फिर उसको बिठा मैंने तेजी से कार उल्टे सीधे रास्तों से इतने चक्कर काट कर घर ले गया। पूरे रास्ते मेरा एक हाथ उसके लंड पर था।

बत्ती बन्द कर पहले की तरह उसको अन्दर ले गया। रात के ग्यारह बजे थे। अपने लिए बियर और उसको मोटा पैग विस्की का दिया, उसका पजामा उतार दिया। जब कच्छा उतारा तो भयंकर सा लंड फनफ़नाता हुआ बाहर निकला। रास्ते में उसका लंड पूरा खड़ा नहीं हुआ था। पूरी तरह से आज़ाद हो शराब के नशे से उसका लण्ड पूरा जोश में आ चुका था। उसने अपना एक पैग और लिया। मैं उसको अपने बिस्तर में ले गया और खुद को नंगा कर दिया। मेरा जिस्म देख उसकी आंखें फटी रह गईं। इतने गोल-मोल मम्मे, गुलाबी चुचूक, गोरी चिकनी गांड, पूरे बदन पे एक बाल नहीं था। उल्टा उसके बाल ही बाल थे।

बहनचोद, साले, तू तो मस्त माल है रे ! हाय, मुझे गरीब को तो कभी ऐसी लड़की तक नसीब नहीं हुई !

कहते ही वो मुझ पर टूट पड़ा।

हाँ ! ऐसे ही रौंदो मुझे !

मैं ऐसा ही साथी चाहता था। मसल रहा था वो मेरे जिस्म को ! पागल हो चूका था वो ! दारु सर चढ़ कर बोलने लगी थी उसके ! मैं बता नहीं सकता कि कितना आनंद आ रहा था मुझे ! उसने मेरी छातियों को मसल कर लाल कर दिया था, दांत के निशाँ डाल दिए थे, चुचूक चूस कर सुर्ख कर दिए।

बोला- एक और पैग दे !

मैंने उसके लिए एक मोटा पैग डाला और अब उसकी छाती पर बैठ गया। उसकी तरफ कमर कर 69 का आसन सेट किया और उसके मोटे लंड को मुँह में ले लिया। वो मेरी गांड पर बियर डाल-डाल चाट रहा था।

इतनी गोरी गांड है तेरी साले ! मेरी तो आज चांदी हो गई ! मुफ्त की शराब और तेरे जैसा शबाब !

उसने बियर की बोतल खोलकर पास रखी हुई थी, गांड पे डालता और चाटता।

मैंने भी एक बियर का टिन पास रखा हुआ था, उसके लंड पर डालकर चूसता जा रहा था। अब मुँह में लेना मुश्किल सा होने लगा था क्योंकि बहुत बड़ा हो गया था। उसने अपनी जुबान गांड के छेद में डाल घुमा दी। आज तक किसी ने मेरी गांड नहीं चाटी थी, वो भी इस तरह !

मेरे मुँह से अब सिसकारियाँ निकलने लगीं। जब वो जुबान घुमाता मेरी आंखें बन्द होने लगतीं !

मैं उठा और वहां से अपने कंप्यूटर-टेबल के दराज़ से कंडोम निकाला और प्यार से उसके लंड पर डाल दिया। उसने मुझे अपने नीचे लेते हुए दोनों टांगें चौड़ी करवा लंड को छेद पर टिकाया। उसको पूरा नशा था, उसने झटका मारा तो लंड फिसल गया। मैंने अपने हाथ से पकड़ छेद पर रख दोनों टांगों को उसकी कमर से लिपटा लिया जिससे दबाव बढ़ा तो लंड खुद ही ठिकाना ढूंढने लगा। मेरी आँखों का इशारा पाते ही उसने झटका दिया और उसका आधा लंड मेरी गाण्ड में घुस गया। थोड़ी तकलीफ हुई। इस आसन में मुझे हमेशा शुरु में दर्द सहन करना पड़ता है। लेकिन उसके बाद जब उसका पूरा घुस गया और वो झटके पर झटका मारने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा।

अब उसकी कमर को मैंने और ताक़त से लपेट लिया ताकि लण्ड बाहर न आये और मुझे मजे मिलते रहें। अहऽऽ उहऽ रजा और झटको लंड को ! हाय साले फाड़ मेरी गाण्ड !

अभी बहिन के लौड़े, गांडू ! बस देखता जा ! आज रात तुझे कितना मजा दूंगा !

हाय साले, तेरी रांड तेरे नीचे लेटी है, इसके अंग अंग को चाट लो ! मेरा दूध पी लो रजा ! हा कमीनी तू है ही लड़की जैसा रे !

उसने बाहर निकाल लिया और मुझे कुतिया की तरह झुका लिया और बजाने लगा मेरी गोरी गांड को ! साथ साथ थप्पड़ मारता रहा !

फाड़ मेरी ! और तेज़ !

उसकी रफ़्तार बढ़ती गई !

हाय हाय ! और, और, और ! और हाँ हाँ डालता जा !

उसने एक दम से कंडोम उतार दिया और सारा पानी गोरी गांड पर उगल दिया और रगड़ रगड़ के लाल किये हुए छेद पर महरम की तरह लगाने लगा। बाकी का माल उसने मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने उसके लंड को साफ़ कर दिया।

फिर हम नहाने लगे। बाथरूम के टब में एक दूसरे से चिपके हुए थे- मेरा हाथ में उसका मूसल लंड था जिसे मैं बहुत प्यार से सहला रहा था और वो खड़ा होता जा रहा था। उसने पास में विस्की की बोतल रखी हुई थी। उसने दो तीन मोटे पैग वहीं ठोक लिए। मैंने भी बियर का काफी नशा कर लिया था। उसने मुझे टब से निकाल चमचमाते फर्श पर लिटा लिया। ऊपर से शावर का पानी बरसने लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसका लंड छत की तरफ तना जोश में हिल रहा था। मैं उसकी मर्जी समझ चुका था। थोड़ी देर मुँह में लेकर उसको मजा दिया फिर उसके लंड पर बैठ गया। उसकी जांघों में इतना दम था कि वो मुझे टेनिस की बाल जैसे उछाल उछाल के चोद रहा था।

जब मैं वापस लंड पर गिरता तो उसका लंड मेरी गुठली से रगड़ खाता तो में आंखें बंद कर लेता।

पूरी रात न जाने कितनी बार उसने मुझे चोदा। सुबह साढ़े पांच बजे मैंने उसको कार में बिठाया। उसने मुझे अपना नंबर दिया, बोला- यह घर के पास पी.सी.ओ का है, उन्हें कहना कि राम लुभाया को बुलवा दो !

ठीक है !

वैसे ही उल्टे-सीधे रास्ते मैंने उसको वहीं उतार दिया। उतरने से पहले उसने मुझे कहा- साइड पर लगा ले, थोड़ा सा मजा और मिल जायेगा।

वहीं उसका थोड़ा चूसा और पजामा नीचे करके सीट पर ही उसके लंड पर बैठ गया और धीरे धीरे झटके लगाता। कुछ देर वो चोदता रहा और फिर निकाल के मुँह में डाल मुठ मारने लगा। मैंने उसके हाथ से लंड लिया खुद उसकी मुठ मार उसका माल निकलवा दिया, उसने सारा मेरे जुबान से साफ़ करवाया और उतर गया।

इस बन्दे ने मुझे आज वो चुदाई का मजा दिया था जो किसी से नहीं मिला था। उसके बाद घर आया और सो गया। दोपहर तीन बजे आंख खुली जब पापा का फ़ोन आया कि वो एक-दो दिन और रुकने वाले हैं। तू अपना ख़याल रखना, खाना ठीक से बनवा के खाना !
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