जंगल में बॉस के साथ चुदाई - Jungle Me Boss Ke Sath Chudai

जंगल में बॉस के साथ चुदाई - Jungle Me Boss Ke Sath Chudai , अफसर ने जंगल में चूत चोदी , ऑफिसर ने घने वन में गांड मारी , बॉस ने चोदकर दिया मजा , बॉस ने पानी चूत में निकाला.

आदाब दोस्तो, मेरा नाम सोफिया कुरैशी है, मैं उत्तर प्रदेश के एक बड़े औद्योगिक शहर से हूँ। इस कहानी में दिए गए सभी नाम और पते काल्पनिक हैं।

मैं तहसील दफ्तर में टाईपिस्ट हूँ। दोस्तो यह हकीकत एक साल पहले की है.. जब मैं दफ्तर में नई थी, मेरे साथ तहसीलदार दीपक और चंदन थे। हम तीनों एक ही दफ्तर में काम करते थे।
ये दोनों अफसर अच्छे थे.. जब मैं नई थी.. तो सभी मुझे काफी सहयोग करते थे। अब मैं काफी कुछ सीख चुकी थी।

एक दिन दफ्तर में फोन आया कि कुछ लोग नदी से बिना इजाजत के रेत ले जा रहे थे।
यह सुनकर दीपक और चंदन जाने लगे।

चंदन ने मुझसे कहा- सोफी तुम भी चलोगी.. वैसे भी आज दफ्तर में कुछ काम नहीं है.. यदि तुम चाहो तो घर भी जा सकती हो।
मैंने कहा- ठीक है सर.. मैं आपके साथ चलती हूँ।

हम तीनों और ड्राइवर निकल लिए.. जब हम नदी के पास पहुँचे तो कुछ लोग रेत भर कर निकल रहे थे। हमने उनका पीछा किया। गाड़ी थोड़ी आगे तक गई मगर बीच जंगल में ही गाड़ी का टायर फट गया और गाड़ी में स्टेपनी भी नहीं थी। ड्राइवर से चंदन ने कहा कि आप टायर लेकर जल्दी आ जाओ।

शाम का वक्त था और ठंडी के मौसम की वजह से थोड़ी ही देर में अंधेरा होने वाला था।

दीपक सर ने मुझसे पूछा- मैडम डर तो नहीं लग रहा?
मैंने कहा- नहीं सर जब आप दोनों मेरे साथ हैं तो किस बात का डर?

दीपक और चंदन एक-दूसरे को इशारा कर रहे थे, पर कुछ कह नहीं रहे थे।
फिर उन्होंने मुझसे पूछा- मैडम कुछ सॉफ्ट ड्रिंक या और कुछ चलेगा?

मैंने मना कर दिया और बताया कि मैं सिर्फ घर में ही लेती हूँ.. क्योंकि मेरे अब्बू आर्मी में थे तो दादा के लिए शराब ले आते थे। हम तीन बहनें जायरा शबाना और मैं चोरी-चोरी शराब पीते थे।

चंदन गाड़ी से शराब, पेप्सी और कुछ खाने की चीजें ले आया। अब अंधेरा हो चुका था, दीपक ने गाड़ी के लाइट चालू कर दी और शराब का प्रोग्राम भी शुरू हो गया। चंदन ने मुझे एक गिलास में भर कर दे दी। अब मैं मना नहीं कर सकती थी। मुझे गिलास से शराब की गंध आ रही थी.. चूंकि मुझे आदत थी.. तो मैंने गिलास खाली कर दिया।

चंदन ने मुझे इसी तरह से पेप्सी का और एक गिलास भर दिया। जैसे मुझको पता न था कि इसमें शराब है.. मैंने ऐसा जताते हुए दूसरा गिलास भी खाली कर दिया था, मुझे नशा हो गया था।

मैंने चन्दन की तरफ सवालिया निगाह से देखा तो चंदन ने मुझे बताया कि पेप्सी में उसने शराब मिला दी थी।
मैं मुस्कुरा दी.. लेकिन मैं काफी नशे में हो गई थी। शायद चंदन ने शराब की मात्रा अधिक कर दी थी।

मैं कुछ बोल न सकी। उस वक्त मैं जीन्स और टॉप पहने हुई थी। चंदन मुझे घूर रहा था और उतने में दीपक ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी चुचियाँ दबाने लगा।
मेरी 34-32-38 की मारू फिगर से तो आप लोग अंदाज लगा ही सकते हैं कि किसी का लंड किस तरह खड़ा हो सकता है… ये सब तो आपको पता ही होगा।

चुस्त जीन्स में मेरी गांड और कूल्हे काफी मोटे और बड़े नजर आते थे।

तभी चंदन ने आगे से जीन्स की चैन खोल दी और मेरी चुत में उंगली डाल दी। उम्म्ह… अहह… हय… याह… ये सब इतनी जल्दी हुआ कि मैं समझ ही नहीं पाई। इस वक्त तो मैं वैसे ही मानो अधमरी सी हो गई थी। मुझे इतना नशा हो गया था कि कोई विरोध की स्थिति ही न थी।

लेकिन मुझे अब सब समझ आ रहा था। दीपक मेरी चूचियां इतनी जोर से दबा रहा था कि मुझे काफी दर्द हो रहा था। चंदन ने मेरी जीन्स निकाल कर फेंक दी और मेरी आँखें गाड़ी की लाइट के सामने लगा दीं। इससे मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा.. लाइट मेरे बिल्कुल सामने हो गई थी।

कुछ ही पलों में उन दोनों ने मुझे पूरी नंगी कर दिया। मुझे जमीन पर लिटा दिया और मेरी टांगों को फैला दिया। मुझे मजा आ रहा था पर मैं कुछ कर नहीं पा रही थी।
तभी मेरी चुत में एक लंड ऐसे घुसा मानो बंदूक से गोली मार दी गई हो। चूत में लंड घुसते ही मुझे काफी दर्द होने लगा था.. क्योंकि मुझे बिना चुदे बहुत दिन हो चुके थे।

अब दीपक ने मेरी चुत में अपना लंड डाल रखा था और चंदन ने जबरदस्ती अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। चंदन का लंड इतना बड़ा था कि मेरे गले तक जा रहा था.. मुझसे सांस भी ठीक से नहीं ली जा रही थी। उधर नीचे जमीन पर पड़े कंकड़ आदि मेरी पीठ पर चुभ रहे थे। मेरे बड़े कूल्हे भी जमीन में रगड़ रहे थे।

दीपक के बाद अब चंदन ने मेरी चुत में अपना लंड ठूंस दिया था और दीपक ने मुँह में पेल दिया। वे दोनों मुझे खूब रगड़ रहे थे.. मानो मुझसे कोई पुराना बदला ले रहे थे। दीपक ने मेरे मुँह में ही पानी छोड़ दिया और वह बाजू में बैठ गया था।

अब चंदन ने मुझे औंधा लिटा दिया था और मेरी गांड में शराब डालने लगा। साथ ही वो अपनी एक उंगली भी मेरी गांड में डाले जा रहा था।

फिर चंदन ने जबरदस्ती अपना मोटा लंड मेरी गांड में डाल दिया था। मैं पहले भी गांड मरवा चुकी हूँ तो जल्दी ही मेरी गांड का मुँह बड़ा हो गया था और कुछ देर के दर्द के बाद चंदन का लौड़ा मेरी गांड में आराम से अन्दर-बाहर हो रहा था।

कुछ देर गांड मारने के बाद चन्दन ने गाड़ी के सहारे खड़ा करके मुझे कुतिया जैसा करके मेरे मेरी गांड में अपना मूसल डालना चालू कर दिया था।

कुछ देर की धकापेल के बाद चंदन ने मेरी गांड में ही पानी छोड़ दिया था। वो मुझसे अलग हो गया था और मैं बिना कपड़ों के एक बड़े पत्थर पर जा कर बैठ गई थी। दीपक मेरे लिए फिर से शराब ले कर आया था.. मैंने बिना कुछ सोचे सीधे शराब की बोतल मुँह में लगा ली और काफी खाली भी कर दी। कुछ ही पलों में मैं फिर से मस्त हो गई।

अब दीपक ने मुझे औंधा लिटा दिया और उसने भी मेरी गांड में लंड डाल दिया। नशे के कारण मुझे कुछ भी असर नहीं हो रहा था.. तभी चंदन ने इशारा किया तो दीपक ने मुझे गोद में लेकर के मेरे पैर खोल दिए और अगले ही पल आगे से चन्दन ने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।

अब मैं सैंडविच बनी हुई उन दोनों के साथ चुदवा रही थी। एक का लंड आगे चुत में था और दूसरा पीछे से मेरी गांड बजा रहा था। मुझे इतना नशा था कि मैं सिर्फ अम्मी और अब्बू के नाम ले रही थी। थोड़ी देर बाद दोनों ने मेरे मुँह में एक साथ लंड घुसेड़ दिए और अपने पानी के फव्वारे छोड़ दिए।

मैं वहीं पर नंगी लेटी रही और ये दोनों नदी में हाथ-मुँह धोने चले गए थे। कुछ समय बाद और एक बार फिर किसी ने मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी चुत में लंड डाल दिया, मैंने मुड़ कर देखा तो वो गाड़ी का ड्राइवर सलीम था। उस मादरचोद ने दूर से मोबाइल में वीडियो बना लिया था। मैंने उसका विरोध किया तो उसने मुझे वीडियो दिखा कर जबरदस्ती लंड मेरी चुत में डाल दिया था और मैं बिना कुछ कहे उससे चुदती रही। वो जल्दी झड़ गया था।

बाद में मैंने उसके मोबाइल से वीडियो मेरे मोबाइल में ले लिया था और उसके फोन से डिलीट कर दिया था क्योंकि इस वीडियो से मुझे हर बार चंदन और दीपक से अपना हिस्सा मिलना तय करना था।

तो दोस्तो, इस तरह आपकी सोफिया चुदी थी.

कामुकता की आग के कर्ण बुर की चुदाई - Kamukta Ki Aag Ke Karan Bur Ki Chudai

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बारिश के कारण मुझे स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड के घर में रुकना पड़ा. बारिश के मौसम ने हम दोनों के बदनों में कामुकता भर दी और हमारे बदन आपस में खेलने लगे. मैं तो उसके चुम्बनों और मेरी चूची चूसने से ही झड़ गई.


‘सुनो, अब मेरा क्या होगा?’ पर वह मेरे जवाब को सुनने से पहले ही मेरे ऊपर आकर लेट गया। अब उसका राक्षसी लंड मेरी छोटी सी चुत पे रगड़ खा रहा था। मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसको मुट्ठी में पकड़ कर हल्के से दबा दिया।
उसके मुंह से आह निकल गई। उसको इस खेल की पकड़ नहीं छोड़नी थी इसलिए उसने झट से मेरे एक निप्पल को मुंह में ले लिया। अब वो मेरी जाँघों के बीच आ गया था और अपने आप को एडजस्ट करने लगा।
मैंने भी अपनी जांघें पूरी खोल कर उसको घुटनों के बल बैठने के लिए जगह बनाई। थोड़ी ही देर पहले मुझे तृप्त करने वाले मर्द को अब उसका इनाम देने के बारे में सोच रही थीं।


‘नरेन्द्र तुम्हारा ये मूसल, बड़ा और लंबा है। मैंने इतना बड़ा कभी देखा भी नहीं था।’
‘तुम्हारे पति का ऐसा नहीं है?’ उसने पूछा।
‘नहीं, उसका इतना बड़ा नहीं है, तुम धीरे से करोगे ना राजा? मुझे पता है कि मुझे बहुत दर्द होगा लेकिन मैं तुम्हारे लिए सहन कर लूंगी। पर तुम धीरे से करना’
‘मैं बहुत प्यार से करूँगा, भरोसा रखो मुझ पर… तुमको बहुत मजा आएगा मेरे साथ!’ उसने विश्वास दिलाया.


मैंने अपने पैरों को उसकी कमर पे लपेट लिया। वो एक हाथ से मेरे निप्पल छेड़ते हुए दूसरे हाथ से मेरी चुत सहलाने लगा।
मैंने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ कर उसके सुपारे को मेरी चुत के मुंह पर रख दिया। उसके सुपारे के स्पर्श से मेरे शरीर से तरंगें निकलने लगी। लगभग छः महीने बाद मेरी चुत को लंड का स्पर्श मिला था।


उसने अब दोनों हाथों से मेरे दोनों निप्पलों को छेड़ते हुए घुटनों के बल होते हुए मेरी चुत पे दबाव देना शुरू किया तो पहले से ही गीली मेरी चुत में उसका लंड धीरे धीरे अंदर घुसने लगा। मेरी चुत के अंदर अब तनाव बढ़ने लगा था, जैसे जैसे उसका लंड अंदर घुस रहा था मेरी चुत की पंखुड़ियाँ भी उसके लंड के साथ अंदर खींचती चली जा रही थी। मुझे ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था।
जैसे जैसे उसका लंड अंदर घुस रहा था मैं एकदम पागल होने लगी थी।


नरेन्द्र जोर लगा रहा था… वैसे अब मुझे हल्का सा दर्द होने लगा। मैंने अपनी जांघें कितनी फैला सकती थी फैला दी। मैंने अपने हाथों से उसकी कमर को पकड़ लिया। उसने धीरे से अपना लंड बाहर निकाल दिया और अबकी बार थोड़ा जोर से अंदर कर दिया।
मैं दर्द से उम्म्ह… अहह… हय… याह… चिल्लाई तो उसने नीचे झुक कर अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, मेरी चीख उसके मुँह में दब गई। हम दोनों की आँखें बंद थी।


तभी एक अजीब सी बात हुई, एक तेज ठंडी हवा का झोंका आया, दोनों ने आँखें खोली तो पूरी रूम बिजली की रोशनी से चमक रही थी और पंखा शुरू हो गया था।
मुझे तेज दर्द भी ही रहा था और शर्म भी आ रही थी।


नरेन्द्र ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला, फिर झुक कर मेरे होंठों पे कब्ज़ा किया और एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा लंड मेरी चुत की गहराई में उतार दिया।
मेरी मुँह से एक तेज चीख निकली जो की तेज बारिश में खो गई।


अब उसका पूरा लंड मेरी चुत में था।


वो कुछ देर मेरे बदन पर वैसे ही पड़ा रहा फिर धीरे धीरे मेरे गालों को किस करने लगा। अब मेरी चुत ने उसके लंड के आकार को एडजस्ट कर लिया था। मेरा दर्द कुछ कम हुआ, मैं अब उसके किस को रिस्पांस देने लगी।
मैंने अपनी आंखें खोल कर उसको एक स्वीट सी स्माइल दी और अपने पैरों को उसकी कमर पर लपेट लिए।


उसने मेरी कमर के नीचे हाथ डाल कर मुझे ऊपर खींचा और कमर के नीचे एक तकिया डाल दिया। उसने अब मेरे दोनों पैर अपने कंधे पे रखे और मेरी कमर पकड़ कर धीरे धीरे अपना लंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया। उसके हर एक धक्के पे मेरी कामुकता भरी सिसकारी निकल जाती, उसके हर धक्के पे मेरा पूरा बदन झूल रहा था, उसके बड़े बड़े अंडाशय मेरी गांड पे रगड़ खा रहे थे, मेरे स्तन उसके धक्कों की लय में ऊपर नीचे हो रहे थे।


अब उसकी स्पीड बढ़ने लगी, वो अब मेरी टाइट चुत में अपना लंड जोर से अंदर बाहर करने लगा। उसका लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था।
‘नीतू मेरी रानी… अःहः… तुम क्यों पहले नहीं आई मेरी आहहहह… जिंदगी में… मैं तुम्हें अपनी रानी बना के रखता। मेरा लंड अब आहहहह…तुम्हारा गुलाम हो गया है।’ वो मेरी चुत के मजे लेता हुआ पागलों की तरह बड़बड़ाने लगा।


‘हाँ मेरे राजा… अब मैं तुम्हारी हो गई हूँ… हमेशा के लिए.. आहहहह… तुम्हारे लंड ने… आहहह… मुझे पागल कर दिया है… मेरे राजा… आहहह.. ऐसे ही चोदना मुझे… जिंदगी भर… आहहहह.. चोदोगे न…’
मैं उसके हर धक्के पे अपनी कमर उठा कर उसका लंड जितना ज्यादा अंदर ले रही थी और जब भी लंड बाहर निकलता तब मैं चुत की नसों को सिकुड़कर उसको अंदर की रखने की कोशिश
करती।


मेरे इस तरह बड़बड़ाने से उसका लंड अब और भी बड़ा हो गया था। उसने अब फुल स्पीड पकड़ ली थी। जब से उसने शुरू किया था तब से मैं तीन बार झड़ गई थी।
हर बार मैं उसकी कमर को पैरों के बीच जोर से भींच कर उसके लंड पर झड़ जाती थी। तो वो फिर से मेरे निप्पल को मसल कर मुझे उत्तेजित कर देता था।


हमारी चुदाई काफी देर से चल रही थी, लाइट भी फिर से चली गई थी, उसके धक्के अब तेज होने लगे थे, वो अब झड़ने के करीब था।
उस छोटे से कमरे में जोर से पच पच… ठप ठप… आवाजें घूम रही थी। हम दोनों दुनिया की परवाह न करते हुए उस पल का आनंद ले रहे थे।


और फिर उसने एक जोर का धक्का दिया और अपना लंड मेरी बच्चेदानी में घुसा दिया और अपना गाढ़ा…गर्म बीज मेरी बच्चेदानी में छोड़ दिया।


उसी वक्त मेरा भी बांध टूटा और मेरी चुत में नदियाँ बहने लगी। बहुत दिनों के बाद हम दोनों को तृप्ति मिली थी। हर धक्के के साथ वो मेरी चुत को वीर्य भर रहा था। मेरी चुत भी उसके लंड पर सिकुड़कर लंड का सारा रस निकाल रही थी।


मैं अब बेड पे निढाल होकर गिर गई, नरेन्द्र अब भी मेरे ऊपर था, उसका लंड अभी भी मेरी चुत के अंदर था।


थोड़ी देर बाद नरेन्द्र ने अपना लंड पॉप की आवाज करते हुए मेरी चुत से बाहर निकाला। हम दोनों का रस अब मेरी चुत से नीचे बहने लगा।
मैंने उसकी ओर प्यार से देखा। उसने भी आगे बढ़कर अपने होंठ मेरे होंठों पे रखकर एक प्यारा सा किस जड़ दिया। यह किस पहले जैसा वासना से भरा नहीं था, बहुत ही प्यार भरा था जैसे दो प्रेमी पहली बार किस कर रहे हों।

उस मैराथन चुदाई से मैं बहुत थक गई थी। मैं अब नरेन्द्र की बांहों में समा कर उसके सीने पे सर रख के अपनी आँखें बंद कर ली। नरेन्द्र भी मुझे बांहों में लेकर सो गया।


कमरे में घना अँधेरा था। बारिश के वजह से हवा में ठंडक थी पर हम दोनों को उसकी कोई परवाह नहीं थी। एक दूसरे की बदन की गर्मी में हम दोनों कब के सो गए थे।


सुबह चार बजे मेरी नींद खुली, मैंने आँखे खोलकर देखा तो मेरा साजन नरेन्द्र मेरे पास ही नंगा सोया हुआ था।


मैंने उठ कर गैस पे पानी गर्म किया और नहाने चली गई। नहाते वक्त मेरी चुत को अच्छे से साफ़ किया, फिर वही धोती पहन कर बाहर आ गई और नरेन्द्र के पास बेड पर बैठ गई।
मैंने उसके चेहरे की ओर देखा तो वह अभी भी सोया हुआ था।
तभी मेरी नजर उठी, उसका लंड खड़ा होकर पड़फड़ा रहा था। यही वह मूसल था जो मैंने पूरी रात अंदर लिया था। मुझे अपने आप पर आश्चर्य हो रहा था। मैंने अपने हाथ से मेरी चुत को छू के देखा तो कल के प्रहार से थोड़ी सूज गई थी।


मैं उसके कमर के पास बैठ गई और उसके लंड को दायें हाथ से पकड़ लिया। वो लंड जैसे मुझे सम्मोहित कर रहा था, कामुकता वश मैं उस लंड के करीब झुकती चली गई। कुछ ही पलों में मैंने अपने नाजुक होंठ उसके सुपारे पे रखे। रात की चुदाई का मेरा रस और उसका वीर्य उसके लंड पर सूख गया था। मैंने हल्के से अपनी जीभ से वो सब साफ़ कर लिया और धीरे धीरे उसके पूरे सुपारे को मेरे होंठों में लेने लगी।
उसका पूरा सुपारा मेरे मुँह में आते ही स्ट्रॉ चूसने की तरह सपर सपर करके मैं उसका लंड चूसने लगी। मेरे नाजुज होंठों के स्पर्श से उसकी नींद खुल गई और उस असीम सुख का अनुभव होने के बाद उसका बदन थरथरा गया।


कॉलेज में पढ़ते वक्त एक सहेली के घर देखी हुई ब्लू फिल्म के जैसा ब्लो जॉब मैं मेरे प्रियतम को दे रही थी। धीरे धीरे मैंने अपने होंठों को उसके लंड पर ऊपर नीचे करना चालू कर दिया और अपने दोनों हाथों से उसके लंड को जड़ से पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी।


उसका लंड अब फड़फड़ाने लगा, उसने अब अपना हाथ मेरे सर पर रखा और नीचे दबाने लगा। मैं भी अपने मुँह के मसल्स को ढीला छोड़ते हुए उसका पूरा लंड अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी।
मैं अब एक सी स्पीड में अपना मुंह ऊपर नीचे करने लगी।
यह सब उसके कण्ट्रोल के बाहर हो रहा था- नीतू… रुक जाओ प्लीज…
वह बोल पड़ा।
उसका लंड धीरे से अपने मुँह से निकलकर मैंने उसे एक स्माइल दी- क्या हुआ राजा?
‘अब और करती रही तो मैं तुम्हारे मुँह मैं ही झड जाऊंगा, मुझे तुम्हारा मुँह ख़राब नहीं करना है!’ उसने बोला।
‘कल रात को तो बहुत वक्त लिया था आपने झड़ने में …तो अब इतनी जल्दी कैसे होगा?’ मैंने पूछा।
‘रात की बात अलग थी, तुम जो अभी कर रही हो उसकी आदत नहीं है मेरे लंड को!’ इतना बोलते हुए उसने मुझे बांहों में भर कर अपने ऊपर खींचा। मैं भी किसी बेल की तरह उससे लिपट गई।
गीले बालों की वजह से पहनी हुई धोती भी गीली हो गई थी और उसमें मेरे स्तन दिख रहे थे जैसे धोती फाड़ कर बाहर निकलना चाहते हों।
यह देख कर नरेन्द्र और मचल उठा, उसने मुझे बेड पर लिटाया और अपने हाथों से मेरी धोती उतारने लगा।
नहाया हुआ मेरा चेहरा अब शर्म से गुलाबी हो रहा था।
उसने मेरे चेहरे की ओर देखते हुए ही धोती को खींच कर उतार दिया और मुझे भी उसकी तरह नंगी कर दिया।


फिर उसने मेरे चेहरे पर चुम्बन करना शुरू कर दिया। मेरे माथे से शुरू कर के आँख कान, नाक, गाल ऐसा सफर करते हुए उसके होंठ अब मेरे होंठों तक पहुंच गये। मैं भी जैसे इन्तजार में ही थी, उसके होंठों के छूते ही मैंने अपने होंठों को अलग कर दिया और उसकी जीभ को रास्ता दे दिया।
उसने भी बढ़ी सफाई से अपनी जीभ को मेरे मुंह में डाल और दाया हाथ मेरे स्तनों पे ले जाते हुए मेरे स्तनों को बारी बारी मसलने लगा। मैं भी कहाँ चुप रहने वाली थी, मैं एक हाथ उसकी जांघों के बीच ले गई तो दूसरा मेरी जांघों के बीच!


उसका खड़ा लंड एक हाथ से सहलाते हुए मैंने दूसरे हाथ की उंगली मेरी चूत में डाल दी।
नरेन्द्र भी अब मेरे खड़े निपल्लों को उंगलियों में भींचने लगा।


मेरी सिसकारियाँ अब उसके होंठों में दबने लगी थी। मैं अब उसकी प्यार की बारिश में फिर से भीगने लगी थी। मेरी चुत भी अब गीली हो गई थी। नरेन्द्र भी अब अपना आपा खोने लगा था, उसी अवस्था में वह मेरे ऊपर आ गया।
मैंने भी उसको अपनी बांहों में लिया और अपनी टांगें फैला दी। मेरी छोटी सी गुलाबी चुत कल की चुदाई से अब थोड़ी खुल गई थी और अंदर का गुलाबी हिस्सा मेरी टांगों में बैठा हुआ नरेन्द्र आराम से देख रहा था।


मेरी आँखों में उसकी प्रति दिख रहे प्रेम और वासना को देखते हुए उसने फिर से अपने लंड को मेरी चुत की पंखुड़ियों के बीच में फंसा दिया और थोड़ा सा आगे झुक गया।
उसके साथ ही उसका लंड धीरे से मेरी चुत में घुस गया तो मेरी आहहहह निकल गई।


उसका बड़ा लंड मेरी चुत में जगह बना रहा था। वो मेरी नजरों से नजर मिलाते हुए कामुकता से मुस्कुराया। मैं भी शरमाते हुए उसकी मुस्कराहट का जवाब देते हुए अपने हाथ उसकी कांख के बीच से होते हुए पीठ पर ले आई और अपने पैरों से उसकी कमर को भींच लिया।
उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रखे और धीरे से धक्का दिया, उसका लंड मेरी चुत की गहराई में घुसता चला गया।


छह घंटे में दूसरी बार वो मूसल मेरे चुत में जा रहा था। मैं भी अपने से दुगने उम्र वाले मेरे प्रेमी के लंड को मुझ में समाने के लिए तैयार थी। उसका लंड एक ही धक्के में मेरी बच्चेदानी से टकरा गया. मैंने भी अपनी चुत की नसों को ढीला छोड़ दिया और उसके धक्कों को सिसकारते हुए एन्जॉय करने लगी।


नरेन्द्र अब घुटनों के बल बैठ गया और हाथों से मेरी चूचियाँ मसलने लगा। उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। उसकी कमर एक लय में हिल रही थी और उसकी वजह से उस नरम गद्दे पे मैं भी गचागच हिल रही थी।


मैंने अपने पैर उसकी कमर से हटाते हुए हवा में फैला दिए ताकि नरेन्द्र को जगह मिले। वो भी उस जगह का भरपूर इस्तेमाल कर रहा था। उसने अपने दोनों हाथों से मेरे स्तन दबा के लाल कर दिए थे और अपना बड़ा सा लंड मेरी छोटी सी चुत में पूरा अंदर बाहर कर रहा था।


मेरी टाइट चुत की वजह से उसका लंड जैसे छिल सा गया था। पर उस बात की परवाह किसे थी। हम दोनों उस स्वर्ग सुख लेने में मग्न थे। उस छोटे से रूम में हम दोनों की सिसकारियाँ गूंज रही थी।
कुछ ही पलों में मैंने अपने पैर उसकी कमर पे लिपट लिए और हाथों से उसको अपने करीब खींच लिया और उससे जोर से लिपट गई। मेरा शरीर मानो अकड़ सा गया था और मैं थरथराने लगी। मुझे कल रात से भी बड़ा ओर्गास्म महसूस हुआ था।
नरेन्द्र ने थोड़ी देर धक्कों को रोका और मुझे शांत होने का मौका दिया।


कुछ ही पलों में मैं शांत हुई, अपने पैरों को उसकी कमर पे से निकाल कर नीचे गद्दे पे रख दिया और प्यार से नरेन्द्र की आंखों में देखने लगी।
उसने नीचे झुक कर मेरा चुम्बन लिया।
उसका लंड अभी भी मेरी चुत के अंदर ही था.


थोड़ी देर बाद उसने अपनी कमर को हरकत में लाते हुए मेरी चुत की गहराई में धक्के लगाने चालू कर दिए। उसने अपने होंठ मेरे मीठे मीठे निप्पल पर रख दिए और उनको चूसने लगा।
मैं फिर से मूड में आने लगी और उसके धक्कों को मेरी कमर उठा कर के रिप्लाई देने लगी, मेरा साथ मिलते ही नरेन्द्र मस्ती में आ गया, उसने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी… पचाक पचाक… की आवाजें रूम में गूंजने लगी थी, वो राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड से मुझे चोदने लगा मैं नीचे से उसकी ताबड़तोड़ चुदाई का मजा ले रही थी, वासना की तरंगों में बहते हुए मेरी चुत में फिर से तूफान उठने लगा- मेरा होने वाला है… नरेन्द्र…


वो भी अपने परमोच्च बिंदु पे पहुंच गया था, वो भी ख़ुशी से चिल्लाया- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं भी आ रहा हूँ जान… मेरा भी होने वाला है…


नरेन्द्र इतना बोल पाता, तब तक मैंने अपने पैर उसकी कमर पर लिपट लिए और थोड़ी देर बाद ही मेरा चुत का रस उसके लंड को भिगोने लगा।
तभी उसका भी बांध टूटा और नरेन्द्र ने चार पांच जोर के धक्के लगा कर अपना वीर्य मेरी तड़पती टाइट चुत में डाल दिया और मेरे बदन पर गिर गया।


हम दोनों सारी दुनिया भुला कर एक दूजे की बांहों में सिमटे पड़े रहे।


फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपने सूखे कपड़े पहन लिए और किसी को शक ना हो इसलिए अपनी एक सहेली के घर चली गई।


अब जब भी मौका मिलता है, वो अपने कामुकता भरे प्यार की बारिश ऐसे ही मुझ पर बरसाता रहता है।

कामुकता की आग और चूत की चुदाई - Kamukta Ki Aag Aur Chut Ki Chudai

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बारिश में भीगने के बाद मेरे स्कूल के सिक्योरिटी गार्ड में मेरी कामुकता की आग पर अपने प्यार की जो बारिश की… मैं धन्य हो गई…


मैंने अपना चश्मा निकाल के नीचे टेबल पर रखा और आँख मलने लगी। टाइम देखा तो शाम के 6:30 हो गए थे। काम करते वक़्त टाइम का ध्यान ही नहीं रहा। मेरा नाम नीतू है और मैं एक टीचर हूँ। मैं जिस स्कूल मैं पढ़ाती हूँ, उसके टीचर्स रूम में अकेली बैठी थी, स्कूल भी दोपहर को छूट गया था और दूसरे टीचर्स और स्टाफ भी चला गया था।


मैं स्कूल की परीक्षा के पेपर तैयार कर रही थी, मैं पढ़ाती हूँ उस विषय के और दूसरे टीचर्स के दो और विषय के!


मेरी बारहवीं के बाद मैंने अपने मनपसंद कोर्स डी.एड. का कोर्स किया और फिर घर वालों की मर्जी से एक किसान के पढ़े-लिखे लड़के के साथ शादी करके मुम्बई से गांव में आ गई।
शादी के एक महीने बाद ही मेरे पति पढ़ने के लिए अमेरिका चले गए। उन एक महीने में भी हमने सेक्स का आनंद सिर्फ 15 दिन ही उठाया, बाकी के दिन पैकिंग और तैयारी में ही निकल गए। उस 15 दिनों मैं मेरी सेक्स की भूख बहुत बढ़ गई थी पर समाज के बंधनों की वजह से मैंने अपने आप पर काबू रखा था। दिन भर स्कूल के कामों में अपने आपको व्यस्त रखा था और रात को हाथ की उंगलियां तो थी ही।


मेरी उम्र बीस साल है, मेरा रंग गोरा है मेरी हाइट 5’4″ है, मेरे बाल मेरी कमर तक लंबे हैं। हर रोज जॉगिंग ओर डांसिंग करने के वजह से मेरा शरीर बहुत सेक्सी कामुकता भरा है। मेरे बूब्स 32″ के हैं और बहुत टाइट हैं, ब्रा पहनने की भी जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी निप्पल ना दिखें इसलिए पहन लेती हूं।


मेरे घर में मेरे ससुर जी हैं जो खेती के काम में ही व्यस्त रहते हैं, सास है जो मंदिर और पूजा पाठ में व्यस्त रहती है। इसलिए शुरू शुरू में घर में बैठे बैठे मैं बोर हो जाती थी, फिर 6 महीने पहले ससुरजी से बोलकर स्कूल मैं इंग्लिश पढ़ाने की परमिशन ले ली।
स्कूल मेरे घर से बहुत दूर था, एक घंटा बस से लग जाता था।


स्कूल में नरेन्द्र नाम का 45 साल का एक आदमी सेक्यूरिटी कम चपरासी के काम पर था। नरेन्द्र पहले मिल्ट्री में 15 साल काम करके रिटायर हुआ था। उसकी वाइफ से उसका तलाक हुआ था और उसी प्रोसेस में उसकी वाइफ और वकील ने उसको बहुत लूटा था इसलिए वो स्कूल में काम करता था।


आज मैं ओवरटाइम कर रही थी तो उसको भी स्कूल बंद करने के लिए मेरे साथ रुकना पड़ा।


वैसे तो मुझे पता था कि वो भी मुझे पसंद करता था, मुझे देखकर उसके आँखों में अजीब सी चमक आ जाती थीं।
दूसरी तरफ मुझे भी मिल्ट्री के लोगों का बहुत आकर्षण था। जब मुझे पता चला कि वह मिल्ट्री में काम कर चुका था तो मुझे भी उसके बारे में अजीब आकर्षण पैदा होने लगा था।


स्कूल में वो बहुत मृदु भाषी था, हमेशा मुझसे अच्छे से हंस कर बात करता। मैं जब भी काम के सिलसिले में देर तक रूकती तो वो खुल के मेरे साथ बात करता। कितनी बार बातें करते वक्त मैंने उसके पैंट में टैंट होता देखा था।
पर आज उसने मुझे डिस्टर्ब नहीं किया था।


थोड़ी देर बाद वो रूम के दरवाजे के पास आया और अंदर देखने लगा।
मेरी पिंक साड़ी ओर मैचिंग ब्लाउज में मेरे बदन को निहारने के बाद उसने मुझे पूछा- टीचर दीदी, आप कब निकलोगे?
सभी स्कूल के स्टूडेंट्स की तरह वो भी मुझे टीचर दीदी ही पुकारता था।
मैंने घड़ी के तरफ देखा, शाम के 6:45 बजे हुए थे, मेरे घर को जाने वाली बस अब छूट चुकी थी।


‘पता नहीं नरेन्द्र, थोड़ा सा काम बचा है, और मेरी बस भी छूट गई है। अब आठ बजे की बस है, तो यह सब काम खत्म करके ही जाऊँगी!’ मैंने कहा.
‘पर टीचर दीदी आपने आसमान की ओर देखा है क्या, बादल भर आये हैं, बहुत जोर से बारिश होने वाली है!’ वो इतना बोल पाता कि बारिश शुरू हो गई।


थोड़ी देर के बाद तेज हवा भी भी बहने लगी और बारिश भी तेज हो गई।
‘लगता है मैं यहाँ पर फंस गई!’ मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा.
मेरे मुस्कुराने का उस पे हमेशा ही तरह असर दिखने लगा.


तभी पूरे गांव की लाइट भी चली गई।
‘अब मैं अपना काम खत्म नहीं कर सकती!’ मैंने नाराज होते हुए कहा.
‘हाँ दीदी और गांव में लाइट चली गई तो कई कई घंटे तक नहीं आती, और अगर आंधी आई हो तो कोई भरोसा ही नहीं!’ वो बोला।
‘अब क्या करें?’ मैंने कहा।
‘मैं मोमबत्ती लेकर आता हूं, आपको अँधेरे में नहीं बैठना पड़ेगा, और इस अँधेरे में मैं तुम्हें देख भी सकता हूँ!’ कहकर वह चला गया।
नरेन्द्र जो बोला, उससे मैं सोच में पड़ गई। उसकी बातों से लग रहा था कि वह थोड़ा उत्तेजित हो गया है।


तभी नरेन्द्र एक मोमबत्ती का टुकड़ा ले के आया- सॉरी दीदी, इससे बड़ी मोमबत्ती नहीं मिली.
वो बोला, उसने मोमबत्ती को टेबल पे रख दिया।


मैं टेबल पर से पेपर्स समेटने लगी तब वो मेरे शरीर को ही निहारने मैं लगा था। पसीने से गीले हुए मेरे शरीर को वो मेरे कपड़ों के अंदर से इमेजिन कर रहा था। उसका असर उसके लंड पर हो
रहा था, वो अब खड़ा होने लगा था, उसको छुपाने के चक्कर मैं वो झट से सोफे पर मेरे बाजु में बैठ गया। उसकी इस हरकत से मैं थोड़ी डर गई, इस टेंशन में भी मैं उसकी तरफ देख कर हंस पड़ी।
उसने वो क्यों किया, यह वो बता भी नहीं सकता था तो वो भी सिर्फ हंसने लगा।


तभी ऐसा कुछ हुआ के हम दोनों की दुनिया एक पल में ही बदल गई।
कहीं पे जोर से बिजली कड़की ओर उसकी रोशनी स्टाफ रूम की खिड़की से पूरे रूम में फ़ैल गई। उसके तुरंत बाद ही कड़कड़ाने की आवाज जोर से सुनाई दी और जोर से बारिश शुरू हो गई, मैं डर कर एक छोटी बच्ची की तरह नरेन्द्र की गोद में जाकर के बैठ गई, उसके चौड़े सीने में मैंने अपना सिर छुपा लिया और उसे कस के पकड़ लिया, जैसे मेरी जान अब उसके ही हाथ में थी।


यह सब एकदम अचानक से हुआ, उसको समझ में नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे… उसने घबराते हुए उसके हाथों को मेरी पीठ पे ले जाते हुए मुझे गले लगा लिया।


लगातार बिजलियाँ चमक रही थी और कड़कड़ाहट की आवाजें सुनाई दे रही थी। हर तेज आवाज के साथ मैं डर कर कांप रही थी और उसे जोर से गले लगा रही थी। एकदम छोटी बच्ची जैसा बर्ताव करते देख उसने मेरा हौसला बढ़ाने के लिए मेरे गर्दन पर एक किस कर दिया।
उसे नहीं पता था कि वो मेरे बॉडी पे जितने कामुक पॉइंट्स थे उनमें से एक था।


मैं उस किस से स्तब्ध रह गई। मुझे मेरे शादीशुदा होने का अहसास हुआ। मुझे मेरी जांघों के बीच उसके लंड का कड़कपन भी महसूस हो रहा था। मैंने अपने आप को उसकी बांहों से छुड़ा लिया। मेरा मुँह अब शर्म से लाल हो रहा था। मोमबत्ती के उजाले में मेरे चेहरे की लाली वो देख सकता था। मैं शरमा के अपना सर नीचे झुका के मुस्कुराई।


मैं कुछ बोल पाती, तब तक नरेन्द्र ने मेरे गाल पर भी एक किस कर दिया। मुझे अब कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मैं एक शादीशुदा लड़की थी। मुझे इस बात का ख्याल भी था कि अगर ये ऐसा ही चलता रहा तो हालात काबू से बाहर निकल जाएंगे।
पर दूसरी तरफ मेरा शरीर मेरे विचारों के बिल्कुल विरुद्ध था, मेरी पैंटी में मुझे गीलापन महसूस हो रहा था। मुझे ऐसी कामुकता का अहसास अपने पति के साथ भी कभी नहीं हुआ था।
नरेन्द्र मेरे गालों पे हल्के हल्के किस करते हुए मेरे होंठों की ओर बढ़ने लगा।


‘नरेन्द्र म..मु..मुझे.. नहीं लगता हमें ये क…र..ना…’ तब तक नरेन्द्र ने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिए, मैं बाकी के शब्द उसके होंठों में ही बड़बड़ाई और शांत हो गई।
नरेन्द्र की जीभ मुझे अपने होंठों पे महसूस होने लगी थी।
कुछ देर के संकोच के बाद मैंने अपने होंठों को जरा सा खोल दिया और नरेन्द्र को अपना काम करने दिया।


नरेन्द्र ने हल्के से अपनी जीभ मेरे जीभ पर घुमाई। यह सब हो रहा था लेकिन मैं पूरी स्तब्ध थी।
थोड़ी देर के बाद डरते हुए ही मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी। वो मजे से मेरी जीभ को चूस रहा था। मेरी पैंटी अब मुझे और भी गीली लगने लगी थी।


नरेन्द्र ने अब अपनी किस रोक दी, उसकी तो जैसे साँसें ही थम गई थी। किसी बच्चे को चॉकलेट मिलने जैसा वो खुश हुआ और हंसने लगा- टीचर दीदी, मैंने ऐसा किस अब तक किसी का भी नहीं लिया!
वो बोला, तभी उसे एहसास हुआ कि उसे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था।


मैंने अपनी नजर झुका दी और हल्के से मुस्कुरा दी।
‘मुझे नहीं लगता कि ये टीचर दीदी नाम मुझे आपके मुँह से अच्छा लगेगा!’ मैंने कहा.
‘क्या कहना चाहती हो टीचर दीदी?’ उसने घबराते हुए पूछा।
‘आप मुझे अब नीतू ही बुलाया करो!’ मैंने कहा।
‘मैं याद रखूँगा टीचर दी… नीतू… वॉव तुम्हारा नाम जोर से लेने में कितना मजा आता है!’


उसके ऐसे कहने से मैं और भी शर्मा गई और मैंने फिर से उसके बांहों में अपना सर छुपा लिया। वो मेरे गर्दन पर अपने गाल घिसने लगा। फिर उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पे रख दिया। इस बार मैं आक्रामक हो गई। मुझे अब किसी बात की परवाह नहीं थी, मेरे तन में अब अजीब सी आग लगी थी जो केवल नरेन्द्र ही ठंडी कर सकता था।
इस बार की किस बहुत ही रोमांटिक थी।


बहुत देर के बाद हम अलग हुए। मेरे चेहरे की लाली अब और बढ़ गई थी। मैंने मोमबत्ती की ओर देखा तो वो भी खत्म होने को आई थी।
‘मोमबत्ती खत्म हो जायेगी अब!’ मैंने उसे कहा।
‘ह..हा… हमें जल्द ही कुछ करना चाहिए!’ उसने कहा।
उसके मुंह से यह सुनकर मैं फिर से मुस्कुराई, ‘हमें क्या करना चाहिए?’ मैंने उसे पूछा।


‘देखो, बहुत जोर से बारिश हो रही है, इस हालत मैं तुम अपने घर नहीं जा सकती. अगर जा भी सकती तो भी मैं तुम्हें नहीं जाने देता!’
मैं फिर से मुस्कुराई.


‘मैं ये रूम लॉक करता हूँ, तब तक तुम प्रिंसीपल के ऑफिस में जाकर अपने घर में फ़ोन करो, फिर हम आराम से मेरे घर जाकर रह सकते हैं।’
‘ह्म्म .. आईडिया तो अच्छा है!’ मैंने कहा।


वो उठ के खड़ा हुआ, उसके पैंट में तंबू अब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था पर इस बार उसने उसको छुपाने की कोशिश भी नहीं की।


हम रूम के बाहर आ गए, उसने रूम को लॉक किया तब तक मैंने घर पर फ़ोन किया और ‘मैं एक लेडी टीचर के घर रुक रही हूँ’ बोला।
घर वालों ने भी इजाजत दे दी।
फिर उसने सारे रूम्स लॉक कर दिए। उसका घर स्कूल के ठीक पीछे था, हमारे पास छाता भी नहीं था
‘नरेन्द्र, आपके घर पर जाते हुए मैं तो पूरी भीग जाऊँगी.’ मैंने कहा।
‘तो क्या अभी तुम भीगी हुई नहीं हो क्या?’


मैं फिर से शर्मा गई.
‘देखो अगर दौड़ के गये तो ज्यादा नहीं भीगेंगे.’ उसने कहा।

हम दौड़ के उसके घर तक गये पर उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, उसके घर पहुंचने तक हम सर से पैर तक पूरे भीग गये थे।
उसने दरवाजा खोला और अंदर जाकर घासलेट का दिया जलाया, मैं उसके रूम में पहुंची। मुझे उस रूम में मर्दाने पसीने की और वीर्य की गंध महसूस हुई, पर वो गंध भी मुझे कामुक लगी। अब तक नरेन्द्र अपने पूरे कपड़े उतारकर अपने बदन पर एक लुंगी पहने हुए था, उसने टॉवल से अपने बदन को सुखाया, मैं उसके अधनंगे शरीर को निहार रही थी।


‘तुम्हें भी अपने कपड़े बदलने चाहिएँ, नहीं तो बीमार पड़ जाओगी!’ उसने मुझे कहा।
‘हाँ, पर आपके पास लड़की के कपड़े होंगे तो बदलूंगी, नहीं तो में ऐसी ही ठीक हूँ.’ मैंने उसे कहा।
वो मुस्कुराया और मुझे टॉवल देते हुए कहा- तुम अपने आप को सुखा लो, मैं कुछ इंतजाम करता हूँ।


मैंने उस टॉवल को थोड़ी देर देखा। किसी पराये मर्द ने इस्तमाल किया हुआ टॉवल अब मैं इस्तमाल करने वाली थी… इस बात से मैं और उत्तेजित होने लगी। आज रात को मेरे लाइफ में आने वाले पराये मर्द के बदन की खुशबू मैं अपने बदन पे मल रही थी। मैं जैसे खुद को उसकी वाइफ बनने के लिए तैयार कर रही थी।


थोड़ी देर बाद नरेन्द्र एक धोती लेकर आया- तुम गीले कपड़े निकाल दो और ये धोती साड़ी की तरह पहन लो। इससे तुम अपना बदन तो ढक ही सकती हो.
मैंने उससे वो धोती ली और अंदर के रूम में कपड़े बदलने चली गई।


अंदर जाकर मैंने अपनी साड़ी उतारी और जमीन पे फेंक दी, उसके बाद पेटीकोट उतार कर साड़ी पर फेंक दिया।
अब मैंने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए और वो भी निकाल कर साड़ी पे फेंक दिया।


मैं सिर्फ बारिश से गीली हुई ब्रा में और खुद के पानी से गीली हुई पैंटी में थी।
मैंने टॉवल से मेरा बदन पोछा। फिर मैंने अपनी ब्रा निकाल कर जमीन पे फेंक दी।


मैंने अपने स्तनों की तरफ देखा, मेरे निप्पल खड़े हो गए थे। मैंने अपनी पैंटी भी खींच के उतार दी, मेरी चुत अभी भी पानी छोड़ रही थी। मैंने उस धोती को साड़ी की तरह अपने बदन पे पहना, पर उसके नीचे कुछ भी नहीं पहना था।


मैं अब बाहर आ गई। नरेन्द्र ने मुझे देखा और बस देखता ही रह गया। घासलेट के दिये की हल्की रोशनी में मेरे बदन और भी कामुकता बिखेर रहा था।
वह धोती मेरे गोल स्तनों को मुश्किल से ढक पा रही थी। मेरे स्तन धोती की साइड से बाहर निकले हुए थे। वह धोती मेरे चॉकलेटी निप्पल को छुपाने में भी असमर्थ थी और मेरे निप्पल धोती के ऊपर उभरे हुए साफ़ दिखाई दे रहे थे।


मैंने अपने बाल भी खुले छोड़ दिए थे, मुझे देखकर उसके मुँह से शब्द ही नहीं निकल रहे थे।
‘मुझे मेरे लाइफ में मिली तुम सबसे खूबसूरत लड़की हो!’ उसने मुझसे कहा।
मैंने मुस्कुरा के उसको रिप्लाई दिया- थैंक्स नरेन्द्र… अब हम आगे क्या करेंगे?
‘आ? मतलब? क्या करेंगे हम?’ वो अभी भी मुझे निहारने में व्यस्त था।


‘वो… तुम्हारी लुंगी में इतना बड़ा तम्बू देखते ही मुझे समझ में आ गया है कि आपका कुछ अच्छा प्लान जरूर होगा!’ उसके टेंट की ओर देखते हुए मैंने कहा.
‘पर पहले कुछ खा लेते हैं, उससे आप के प्लान को सफल बनाने में ताकत मिलेगी और आप थकोगे भी नहीं।’ मैंने उसे आंख मारते हुए कहा।


मैं उसकी किचन ने गई और खाना बनाने लगी। मुझे खाना बनाने में लगभग एक घंटा लगा। नरेन्द्र पूरे टाइम मुझे ही निहार रहा था। मैं जब भी नीचे झुकती तो वो मेरे गोल गोल नितम्बों को निहारता। दिए की हल्की रोशनी में वह मेरे हर अंग का शेप देख सकता था।
पसीने से मेरा पूरा शरीर चमक रहा था। वो एक घंटा उसके लिए बहुत मुश्किल समय था।


मैंने खाना परोस दिया, वो जल्दी जल्दी खाना ख़त्म करने लगा। उससे अब रुका नहीं जा रहा था। खाना खाने के बाद मैं सारे बर्तन उठा के बर्तन मांजने चली गई तो वो बेचैन हो गया।
मैं उसको जानबूज कर सता रही थी।
बर्तन धोते वक्त मेरे बदन की हलचल से वो भी उत्तेजित हो गया।


अब वह भी बदला लेने के बारे में सोचने लगा और मेरे पीछे आकर खड़ा हुआ। घुटनों में थोड़ा नीचे झुककर उसने अपने हाथों को आगे लाकर मेरे स्तनों को धोती के ऊपर से ही पकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से मैं थोड़ा चौंक गई और थोड़ी देर बाद संभलकर फिर से बर्तन धोने लग गई।
मैं अब शरमाते हुए हल्के से मुस्कुरा रही थी। मेरे गाल भी अब शर्म से लाल हो गए थे.


वो अपना सर मेरे पीठ के पास ले जाकर मेरे बालों को सूंघ रहा था, मेरे बालों की खुशबू अपने नथुनों में भर रहा था।
मुझे अब मेरे नितम्बों पे नरेन्द्र के पतली सी लुंगी से बाहर निकलने को मचलता हुआ लंड चुभ रहा था। उसकी आगे की हरकतों की राह देखते हुए मैं सिर्फ मुस्कुराई।


नरेन्द्र अब अपना हाथ मेरी धोती के अंदर ले जाते हुए मेरे स्तनों पे ले आया। बहुत दिनों से मेरे स्तनों को मेरे अलावा किसी ने नहीं छुआ था।
बहुत मुश्किल से मैंने अपना काम जारी रखा पर मेरी हाथों की थरथराहट उसे दिख रही थी। नरेन्द्र ने अपने मर्दाने हाथों से मेरे स्तनों को सहलाया फिर अपना हाथ मेरे स्तनों के नीचे ले जाकर
उनको टटोला जैसे वो मेरे स्तनों को तोल रहा हो।


उसका लंड अब पूरा खड़ा होकर कठोर हो गया था। वो अब मेरी पीठ पे, गर्दन पे जहाँ जगह मिली वहाँ चूमने लगा। अपने हाथों से मेरे स्तनों को प्यार से तोलना और दबाना जारी रखा।
मैं भी अब उसके हाथों का मजा ले रही थी। मेरी गर्दन पे कामुक जगह पर हो रहे हमले अब मुझे सहन नहीं हो रहे थे। कामुकता से मेरी चुत अब फिर से गीली होने लगी थी। मैं थोड़ा सा पीछे झुकी और अपना पूरा भार नरेन्द्र पे डाल दिया।


उसने भी मेरे बाल मेरे गर्दन पे से हटाए और मेरे गर्दन पे किस करने लगा। मैंने अपना सर पीछे घुमाकर अपने होंठों को उसके होंठों के नजदीक लेकर आ गई। उसने अपने होंठ मेरी गर्दन से उठाकर मेरे होंठों पे रख दिए।
इस बार मैंने पहल करते हुए मेरी जीभ उसके मुँह में डाल दी और उसके जीभ से खेलने लगी। वह चुम्बन बहुत ही उत्तेजक था।
लम्बे चले उस किस की वजह से हमारी लार एक दूसरे के मुँह में घुल मिल रही थी। उसका मेरे स्तनों को सहलाना चालू ही था। वो मेरे तेज दिल की धड़कनों को महसूस कर सकता था। हम दोनों की साँसें तेज चल रही थी।


नरेन्द्र ने अचानक से मेरे कड़े निप्पल को उंगलियों में पकड़ा और दोनों निप्पल को एक साथ मसल दिया। मेरे मुँह से कामुकता भरा ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहऽऽऽऽ स्स्स स्स्स’ निकल गया।
मैंने अपने होंठों को उसके होटों से हटाया तो उसको लगा कि मुझे बहुत दर्द हुआ है।
‘सॉरी, बहुत दर्द हुआ क्या?’ उसने पूछा।
‘नहीं… नहीं हुआ… बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ… मुझे तो बहुत…’ मैं फिर से शर्मा गई।
‘क्या?’ उसने पूछा।
‘मुझे अच्छा लगा, मुझे बहुत पसंद आया आप जो कर रहे थे!’


वो सुन के मुस्कुराया और फिर से मेरे निप्पलों को मसलना शुरू कर दिया।
‘सच… तुमको अच्छा लग रहा है मेरा तुम्हारे निप्पलों से खेलना?’ उसने मेरे निप्पलों को छेड़ते हुए पूछा.
‘ह… हाँ… रुको ना… प्लीज… मत सताओ ना!’ मेरे मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे।


‘तुम भी तो दो घण्टों से मुझे अपना बदन दिखा कर सटा रही थी.’ उसने मेरे निप्पलों को जोर से मसला।
‘आह… नहीं… प्लीज…’ मैं चिल्लाई- प्लीज मेरे राजा, मुझे थोड़ा टाइम दो। मैं हाथ धोकर आती हूँ ना आपके पास!’ मैंने उसे रिक्वेस्ट की।


मेरे मुँह से राजा सुनकर वो बहुत खुश हुआ। उसने सर को हाँ में हिलाया और वहाँ से हट गया। उस गड़बड़ में धोती जो मैंने पल्लू की तरह ओढ़ रखी थी वो निकल गई और मेरे स्तन उसके सामने नंगे हो गए।
थोड़ी देर मेरे स्तनों को देखने के बाद वो अपनी आगे की तैयारी को लग गया। उसने गद्दे को जमीन पर बिछाया, फिर उस पर नई बेडशीट डाल दी। फिर वो उस पे बैठ के मेरी राह देखने लगा। थोड़ी देर के बाद उसने अपनी लुंगी भी खोल दी और अपने हाठों से अपना लंड हिलाते हुए लेट गया।


मैंने भी झट से सारे काम निपटाए फिर दिया लेकर रूम में पहुंची और दिए को नीचे रखकर मैं नरेन्द्र के सामने खड़ी हुई।
मेरी नजर अब उसके लंड पे पड़ी और मैं स्तब्ध हो गई। मैंने पहली बार किसी पराये मर्द का लंड देख रही थी। उसका लंड किसी लोहे के रॉड की तरह खड़ा था और मेरे पति के लंड से लंबा भी था और थोड़ा मोटा भी था। मेरे पति ने और मैंने लगभग 20 बार सेक्स किया था तब भी मेरे पति का लिंग मुझे बहुत बड़ा लगता था। नरेन्द्र का लंड देख कर मैं थोड़ा डर ही गई पर मेरे और पति के सेक्स की याद आते ही मेरी चुत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया।


मैंने नरेन्द्र की ओर देखा तो उसने आंखों में मिलन की बेकरारी दिखी।
उसको देखकर मैं थोड़ा मुस्कुराई और उसके आंखों में देख कर धीरे धीरे धोती को उतारने लगी।


शुरुआती शर्म अब कम होने लगी थी, मैं उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हुई और धोती पूरी खोल दी। फिर एक हाथ से अपने स्तनों को ढक लिया और दूसरे से मेरी चुत को ढका और उसकी तरफ मुड़ी।
वो आंखें बड़ी करके मेरा रूप निहार रहा था। हल्की सी रोशनी मैं भी वो मेरे जाँघों पे गीलापन देख सकता था। वो चुत की तरफ देख रहा था तो मैंने अपना हाथ धीरे से वहाँ से हटाया। वो मेरी पिंक चुत देख कर पागल हो गया।


मैं धीरे धीरे चल कर नरेन्द्र के नजदीक आ गई। जिंदगी में पहली बार मैं अपने से दुगने उम्र के आदमी के साथ बेड पे लेटी थी।


उसने जरा भी देर ना करते हुए अपने होंठ मेरे निप्पल पर रख दिए मैं उस अहसास से आहें भरने लगी। उसने मेरे दूसरे स्तन को हाथ से सहलाना चालू किया। उसने धीरे से मेरे चॉकलेटी एरोला पे जीभ गोल गोल घुमाना चालू किया और फिर धीरे से मेरे निप्पल पे जीभ घुमाई तो मैंने जोर से आह भरी।


अब उसको पता चल गया कि मुझे उसमें मजा आ रहा है तो उसने अपनी जीभ से मेरे निप्पल्स को चूसना चालू रखा। मैं अब उसका सर मेरे वक्ष पे दबा रही थी।
अब उसने भी अपने चूसने की स्पीड बढ़ा दी। और जब उसका मन भर गया तो ‘पॉप’ की आवाज निकालते हुए उसने मेरा निप्पल अपने मुँह से बाहर निकाल दिया।


मैं कुछ बोलने ही वाली थी, तभी उसने मेरा दूसरा निप्पल अपने मुँह में लिया और पहले जैसे ही चूसना चालू कर दिया।
अब मेरा खुद पर से कण्ट्रोल छूट गया था।
उसने मेरे स्तनों को छोड़ा और वासना भरी निगाहों से मुझे देखने लगा। मैं उसकी नजरों से नजरें नहीं मिला सकी और मैंने अपनी आंखें बंद कर ली। उसने फिर से मेरे निप्पल को उंगलियों में पकड़ा और हल्के से दबा दिया।


मेरा बदन एकदम से अकड़ गया मेरी चुत का रस मेरी जांघों से चादर को भिगोने लगा।


उसे अब पता चल गया था कि उसका मेरे निप्पल्स से खेलना मुझे और उत्तेजित कर रहा था। वो मेरे निप्पल और जोर से दबा देता। हर बार मेरा दर्द झट से उत्तेजना में बदल जाता और चीखें सिसकारियों में बदल जाती!


नरेन्द्र अब और भी जंगली हो गया था। वो अब लगभग मेरे निप्पल्स खींच के जोर से मसल रहा था। मेरी आँखें बंद थी और मेरा मुख खुला हुआ था। पर मेरे मुह से सिसकारियों के अलावा कुछ भी नहीं निकल रहा था।


अब नरेन्द्र ने मेरे होंठों पे कब्ज़ा कर लिया, उसकी जीभ मेरी जीभ से कुश्ती लड़ने लगी, फिर वही हुआ, मेरी चुत से रस की नदी बहने लगी नरेन्द्र ने सिर्फ मेरे स्तनों से खेल कर मुझे झड़वा दिया था।
उसको भी इस बात पर आश्चर्य हुआ पर फिर वो खुश भी हुआ। मैं जब तक झड़ रही थी तब तक उसने मेरे स्तनों से खेलना जारी रखा।


झड़ने का जोर जब खत्म हुआ तब मैंने आँखें खोली। वो मेरी तरफ ही देख रहा था मैंने उसको अपनी आगोश में लिया और उसको चूमने लगी जैसे वो मेरा आखिरी चुम्बन हो। उस किस में अजब सी कशिश थी। मैं अपनी जीभ उसके मुँह में घुसेड़ के लम्बे समय तक किस करती रही।
जब मैंने किस रोकी तो मेरी साँस तेजी से चल रही थी.
‘नरेन्द्र… मेरे राजा… मैं सच कह रही हूँ, लाइफ में पहली बार मैं ऐसी तृप्त हुई हूं, वो भी मेरी चुत को छुए बिना!
मैं थकान और तृप्ति से पीठ के बल लेट गई.
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