ब्रेकअप के बाद मिली मस्त चूत - Breakup Ke Baad Mili Mast Choot

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आकांक्षा से मैं बहुत ज्यादा प्यार किया करता था लेकिन वह कभी भी मेरी बात को समझ ही नहीं पाई और आकांक्षा ने मुझसे अपना पूरा रिश्ता तोड़ लिया। हम दोनों ने अपने रिश्ते को खत्म कर लिया था लेकिन अभी भी आकांक्षा की यादें मेरे दिल में ताजा है मैं हमेशा से ही आकांक्षा की बहुत फिक्र करता था लेकिन आकांक्षा को कभी मेरा प्यार दिखाई नहीं दिया और वह मुझसे दूर चली गई।

हम दोनों साथ में एक वर्ष रहे एक वर्ष हम लोगों ने साथ में बिताया जब आकांक्षा ने मुझसे डिवोर्स ले लिया तो उसके बाद वह अपने माता पिता के साथ रहने लगी। उसने मुझसे अपने सारे रिश्ते खत्म कर लिए उसके बावजूद भी मैंने आकांशा से कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन आकांक्षा अब मुझसे कोई भी संबंध नहीं रखना चाहती थी। एक दिन मुझे आकांक्षा की बहन मिली तो वह मुझे कहने लगी आकांशा दीदी ने अपने लिए कोई लड़का देख लिया है अब आप अपने दिल से दीदी का ख्याल निकाल दो।

मैं मन ही मन सोचने लगा कि आखिर मैंने ऐसी क्या गलती कर दी की आकांक्षा ने मुझे इतनी बड़ी सजा दी मेरी गलती सिर्फ इतनी थी कि मैं आकांशा को समय नहीं दे पा रहा था मुझे इस बात का एहसास था लेकिन यह सब मैं आकांक्षा के लिए ही तो कर रहा था।

आकांक्षा के भी कुछ बड़े सपने थे और उन्हीं सपनों को पूरा करने के लिए उसने मुझसे अलग होने का फैसला कर लिया अब वह मुझसे अलग हो चुकी थी और हम दोनों के बीच कोई भी संबंध नहीं थे। काफी समय बाद मैं आकांक्षा से मिला मैंने कभी भी आकांक्षा के बारे में कुछ गलत नहीं सोचा था लेकिन स्थिति ही कुछ ऐसी बन गई की आकांक्षा को मेरा साथ छोड़ना पड़ा और मैं अकेला हो चुका था।

इसी बीच मेरे साथ ना जाने क्या-क्या दुर्घटना घटित हुई मेरे पिताजी का देहांत हो गया और जब उनका देहांत हुआ तो मैं पूरी तरीके से टूट चुका था लेकिन मुझे काम तो करना ही था क्योंकि मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। मैं अपने काम पर तो लगा हुआ था परंतु मैं यह बात नहीं समझ पा रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए जिससे कि मैं अपने अंदर के दुखों को दूर कर सकूं।

मैं अंदर ही अंदर से बहुत ज्यादा परेशान था लेकिन मैं किसी को भी यह बात नहीं बता पा रहा था। एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाले सागर ने मुझे कहा कि निखिल तुम कुछ ज्यादा ही परेशान नजर आते हो अभी कौन सा तुम्हारी इतनी उम्र हो गई है।

मैंने सागर को कहा देखो दोस्त तुम्हें तो मालूम है ना कि आकांक्षा ने मेरा साथ छोड़ दिया है और जब से वह मुझे छोड़कर गई है तब से मैं अकेला हो चुका हूं और ऊपर से पिताजी की मृत्यु भी हो गई मेरे ऊपर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो लेकिन मैं क्या करूं तुम ही बताओ। सागर मुझे कहने लगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा यदि तुम ऐसे ही सोचते रहोगे तो तुम्हें और भी ज्यादा दुख होगा और तुम इन समस्याओं से बाहर भी नहीं निकल पाओगे। मुझे लगा कि सागर बिल्कुल ठीक कह रहा है और मुझे सागर से बात कर के अच्छा लग रहा था मुझे ऐसा लगा जैसे कि सागर भी मुझे समझ सकता है।

जब भी मुझे कोई ऐसी परेशानी होती तो मैं सागर से बात किया करता सागर को मैं काफी वर्षो से जानता हूं। एक दिन मेरी सारी परेशानी का हल मुझे मिल गया जब मेरी मुलाकात मीनल से हुई, मीनल से मेरी पहली मुलाकात थी मीनल से मुझे सागर ने मिलवाया था और वह सागर की बहुत अच्छी दोस्त थी। मुझे मीनल के रूप में एक अच्छी दोस्त मिल चुकी थी और हम दोनों ही अब एक दूसरे के साथ अच्छे से बात किया करते और एक दूसरे के साथ हम लोग समय बिताया करते हैं।

हम दोनों को एक दूसरे के साथ समय बिताना बड़ा अच्छा लगता है और मैं मीनल के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगा था। सागर को भी यह बात पता चल चुकी थी तो सागर ने मुझसे कहा की तुम मीनल को क्यों अपने दिल की बात नहीं बता देते।

मैंने सागर से कहा हां तुम कह तो ठीक रहे हो लेकिन मुझे इस बात की चिंता है कि कहीं मीनल को मेरे पुराने रिश्ते के बारे में पता चला तो कहीं वह मना ना कर दे। सागर कहने लगा नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें मीनल को बता देना चाहिए यदि तुम मीनल को बताओगे तो उसका भरोसा तुम पर और भी ज्यादा बढ़ेगा तुम्हे उससे आकांक्षा के बारे में बात करनी चाहिए।

मैंने भी सोचा सागर बिल्कुल ठीक कह रहा है आखिरकार झूठ की बुनियाद पर कितने दिन तक बात टिक पाती। मैंने मीनल से आकांक्षा के बारे में बात करने का फैसला कर लिया था जब हम दोनों मिले तो मैंने मीनल से कहा मीनल मुझे तुम्हें कुछ बताना है।

मीनल कहने लगी हां बताओ ना तो मैंने मीनल को अपने और आकांक्षा के रिश्ते के बारे में बताया मिनल कहने लगी तुमने मुझे यह सब पहले क्यों नहीं बताया। मैंने मीनल से कहा शायद मैं डर रहा था लेकिन मीनल ने हम दोनों के रिश्ते को अपना लिया था और हम दोनों अब एक हो चुके थे मैं अपनी पुरानी जिंदगी को धीरे धीरे भुलाने लगा था और मीनल भी मेरा साथ देने लगी थी।

उसी दौरान मीनल की जॉब बेंगलुरु में लग गई जब मीनल की जॉब बेंगलुरु में लगी तो वह जॉब करने के लिए बेंगलुरु चली गई। मीनल अब बेंगलुरु जा चुकी थी और हम दोनों की फोन पर ही बात होती थी मैं चाहता था कि मैं भी बेंगलुरू चले जाऊं और अपनी बूढ़ी मां को भी अपने साथ बेंगलुरु ही लेकर चला जाऊं। मैं मीनल से जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था हम दोनों फोन पर घंटों बात किया करते लेकिन तब भी दूरियां कम कहां हो पाती आखिरकार मैंने भी बेंगलुरु की कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए ट्राई किया और वहां पर मेरा सिलेक्शन भी हो गया।

मैंने मीनल को कुछ भी नहीं बताया था मैं चाहता था कि मैं मीनल को सरप्राइज़ दूँ और मेरी जब उससे मुलाकात हुई तो वह चौक गई उसने मुझे बेंगलुरु में देखा तो वह कहने लगी तुम यहां बेंगलुरु में क्या कर रहे हो। मैंने मीनल से कहा बस अब यह समझो कि मैं भी यहीं आ गया हूं।

मीनल खुश हो गई और कहने लगी चलो तुमने यह हो तो बहुत अच्छा फैसला किया मैंने मीनल को पूरी बात बताई और उसे कहा कि मैं भी अब बेंगलुरु में ही जॉब करने लगा हूं। मीनल कहने लगी इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए कुछ हो ही नहीं सकती मीनल ने मुझे पूरी तरीके से स्वीकार कर लिया था और हम दोनों ही एक दूसरे को बड़े अच्छे से समझते थे।

यह सब सागर की वजह से ही संभव हो पाया था यदि सागर से मैं नहीं मिल पाता तो मैं और मीनल कभी मिल ही नहीं पाते। हम दोनों अब एक हो चुके थे और मैंने मीनल को जब अपनी मां से मिलाया तो वह भी मीनल से मिलकर बहुत खुश हुई। मीनल को उन्होंने अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था और मीनल भी बड़ी खुश थी उसकी खुशी का कारण सिर्फ और सिर्फ मै था।

हम दोनों एक दूसरे को समय देते और मुझे भी बहुत अच्छा लगता क्योंकि मैं मीनल के साथ अच्छा समय बिता पा रहा था मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं बेंगलुरु नौकरी करने के लिए आ जाऊंगा और हम दोनों अपने ऑफिस के बाद हमेशा मिला करते थे। मीनल मुझसे मिलने के लिए घर पर अक्सर आया करती थी और मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।

मीनल और मेरे बीच में प्यार बहुत ज्यादा था हम दोनों ही एक दूसरे को बहुत चाहते थे तभी एक दिन जब मीनल मुझसे बैठ कर बात कर रही थी तो उस दिन ना जाने मुझे मीनल को देखकर ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे मैंने मीनल के होठों को चूमना शुरू किया तो उसकी उत्तेजित जागने लगी।

मुझे अच्छा लगने लगा हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को महसूस करने लगे मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैं मीनल के होंठो को महसूस कर रहा था। मीनल मेरी गर्मी को भी महसूस करने लगी उसके स्तनों को दबाने में मुझे बड़ा अच्छा लगता मैने उसके स्तनों से खून निकाल दिया था।

वह मुझे कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कुछ भी तो नहीं लेकिन जैसे ही मैंने मीनल की योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। उसकी योनि से पानी बाहर निकल रहा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने भी मीनल की चूत को अपनी उंगली से को बहुत देर तक सहलाया।

जैसे ही मैंने अपने लंड को मीनल की योनि के अंदर डाला तो वह चिल्ला ऊठी और उसके मुंह से चीख निकली और उसी के साथ वह मुझे कहने लगी मुझे दर्द हो रहा है। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा उसकी योनि से खून निकलने लगा था और उसकी योनि से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था लेकिन मुझको तो उसे धक्के देने में भी मजा आता। मैं

उसे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था मेरे अंदर का जोश और भी ज्यादा बढ़ने लगा था और मीनल भी मुझे कहने लगी मुझे वाकई में मजा आ रहा है। मैंने मीनल से कहा देखो मीनल अपने पैर चौडे कर लो तुम्हारी चूत मे भी मजा आने लगेगा। मीनल ने अपने पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे कहने लगे तुम मुझे और तेजी से धक्के मारो।

मैंने उसे ओर से भी ज्यादा तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। मैं उसे तेज धक्के मार रहा था वह भी उत्तेजित होकर अपने मुंह से मादक आवाज लेने लगी उसकी सिसकियो से मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाती और मुझे बड़ा मजा आता। मैंने काफी देर तक मीनल की योनि के पूरे मजे लिया जैसे ही मीनल की योनि से पानी ज्यादा मात्रा में बाहर निकलने लगा तो मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी है मैंने भी मीनल की योनि में अपने वीर्य को गिरा दिया उसकी चूत के अंदर मेरा वीर्य जा चुका था वह मेरी हो चुकी थी। हम दोनों जल्दी शादी करने वाले थे और यह बात मैंने अपनी मां को बता दी थी मेरी मां को भी कोई आपत्ति नहीं थी। मीनल का मुझसे मिलना होता था हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बन ही जाते थे।

मेरी बीवी की मस्त कामुक जवानी - Meri Biwi Ki Mast Kamuk Jawani

मेरी बीवी की मस्त कामुक जवानी - Meri Biwi Ki Mast Kamuk Jawani , पति पत्नी की चुदाई , मियां ने अपनी बीवी को चोदा. सैयां के साथ चुदाई का खेल , घरवाला बना लंड वाला , चूत गांड और मुंह की चुदाई.

मेरा नाम ऋषभ जैन है, मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ। मेरी उम्र 34 साल है.. मेरी शादी हुए दस साल हो चुके हैं। मेरे वाइफ का नाम जूही जैन है.. उसकी उम्र 31 साल है.. लेकिन लगती 25 की है। वो बहुत ही सेक्सी दिखती है। गोरा रंग.. ऊंचा कद.. बड़े-बड़े बूब्स.. पतली कमर और उभरे हुए नितंब यानि चूतड़..
उसकी बात ही कुछ और है, उसे जो भी देखे.. उसका लण्ड तन जाए.. और उस देखने वाले के मन में उसे चोदने की इच्छा हो जाए।

अपने जीवन की एक रोचक कामुकता भरी घटना पाठकों के लिये लिख रहा हूँ।
उस वक्त मेरी और जूही की शादी हुए 4 साल चुके थे, हमारी लाइफ बड़े आराम और मस्त चल रही थी। जूही एक सीधी-सादी घरेलू औरत थी, अपने पति यानि कि मेरा पूरा ख्याल रखती थी।

हमारी लाइफ में अलग मोड़ आया और हमारी लाइफ और भी रंगीन हो गई।
मेरा ट्रान्सफर दूसरे शहर में हो गया, मैंने अपने दोस्त रवि की मदद से उसके घर के बाजू में ही एक घर किराये पर ले लिया।
घर बहुत बढ़िया था.. हॉल.. रसोई और बेडरूम..

हमने वहाँ शिफ्ट कर लिया, उसी दिन हमने पूरे घर की साफ-सफाई करके सारा समान सैट कर दिया।
घर की सफाई करते वक़्त जूही को वहाँ पर एक सीडी का एलबम मिला, वो मेरे पास लेकर आई और उसने मुझे दिखाया।
मैंने देखा और सोचा कि पुराने किराएदार का छूट गया होगा, मैंने उसको साइड में रख दिया।

हमें घर का समान सैट करते-करते रात हो गई, मैंने होटल से खाना मंगवाया और हमने खाना खाया और सोने लगे।
तभी मुझे वो सीडी एलबम की याद आई और मैंने उसे टीवी पर लगाया.. और जो हमने देखा हमारी दोनों की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो ब्लू-फिल्म की सीडियाँ थीं। इसके पहले हम दोनों ने साथ में कभी ब्लू-फिल्म नहीं देखी थी।

ब्लू-फिल्म देखने के बाद हमारी जबरदस्त चुदाई हुई।

उस दिन से हमारा जीवन ही बदल गया। अब हम हर रोज वो सीडियां देखने लगे और चुदाई करने लगे, हमें चुदाई में बहुत मज़ा आने लगा।
इसके पहले हम खामोशी से चुदाई करते थे और सो जाते थे, अब हम सेक्सी बातें करने लगे।

एक दिन ऐसे ही सेक्स करते समय मैंने जूही से कहा- जूही जब तुम्हें कोई मर्द प्यासी नज़रों से देखता है.. तो मुझे बहुत मज़ा आता है।
जूही मेरी बात सुनकर हैरान हो गई.. वो बोली- क्या जानू.. अक्सर मरदों को उनकी वाइफ को कोई देखे.. तो गुस्सा आता है.. और आप हैं कि आपको मज़ा आता है?

मैंने कहा- क्या करूँ जान.. मैं हूँ ही ऐसा.. वैसे भी तुम्हें नहीं अच्छा लगता अगर तुम्हें कोई प्यासी नज़रों से देखे तो.. सच सच बताना?
वो मेरी बात सुन कर चुप हो गई।

‘बताओ ना जान.. चुप क्यों हो गईं?’
उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोली- सच कहूँ तो मुझे भी बड़ा अच्छा लगता है..
मैंने कहा- यह हुई ना बात.. मुझे भी मज़ा आता है और तुम्हें भी.. फिर क्यों ना मज़े किए जाएं।

हम दोनों हँसने लगे और चुदाई करके सो गए।

दूसरे दिन सबेरे जब मैं उठा.. तो जूही रसोई में काम कर रही थी.. मैं उठा और रसोई में गया.. जूही को पीछे से बाँहों में भर लिया और किस किया- जूही मेरी चाय..
जूही बोली- जानू चाय के लिए तुम्हें थोड़ा रुकना पड़ेगा..
मैंने कहा- क्यों?
जूही- वो दूध वाला अभी तक आया नहीं है.. बस अभी आता ही होगा।

यह बात सुनकर मेरे दिमाग़ में एक आईडिया आया और मैं जूही का हाथ पकड़ कर सीधा उसे बेडरूम में लेकर गया।
वो बोली- अरे यह क्या कर रहे हो.. मुझे काम करने दो.. रात में दिल नहीं भरा क्या?
मैंने कहा- तुम पहले यह गाउन उतारो।
वो- तुम क्या चाहते हो?
मैं- जल्दी करो जानू.. तुम्हें बाद में समझाता हूँ.. अभी सिर्फ़ वैसा करो.. जैसा मैं कह रहा हूँ।

उसने गाउन उतारा.. जूही ने काले रंग की पैन्टी और ब्रा पहनी हुई थी।
मैंने उसे ब्रा भी उतारने के लिए कहा। उसने अपनी ब्रा भी उतार दी। मैंने कपबोर्ड में से एक ट्रांसपेरेंट पिंक कलर की नाईटी निकाली और उसे पहनने को कहा। उसने झट से नाइटी पहन ली।

वाउ.. क्या बताऊँ दोस्तों.. उस नाईटी में जूही क्या माल लग रही थी.. उसके बड़े-बड़े चूचे उसमें से साफ नज़र आ रहे थे। वो नाईटी उतनी ट्रांसपेरेंट थी.. कि वो ना के बराबर थी। ऐसा लग रहा था कि जूही मेरे सामने सिर्फ़ ब्लैक-पैन्टी में खड़ी है।
उसे ऐसा देखकर तो मेरा भी लण्ड खड़ा हो गया।

तभी हमारे दरवाजे की घण्टी बजी, मैंने कहा- जूही.. लो जिस समय का मैं इंतज़ार कर रहा था.. वो आ गया… दूध वाला आ गया.. जाओ दूध ले लो..
वो बोली- ऐसे ही? इस हालत में?
मैंने कहा- हाँ जानू.. ऐसे ही.. आज दूध वाले का मज़ा लेना है।

जूही मेरे तरफ़ देखकर मुस्कराई और दूध लेने चली गई, मैं बेडरूम में से छिपकर देख रहा था।

जैसे ही जूही ने दरवाजा खोला.. दूधवाला उसे देखते ही रह गया।
जूही- क्या देख रहे हो भईया.. दूध दे दो..
‘हाँ मेमसाब… आज आप बहुत सुंदर लग रही हो..’

और वो जूही के संतरों को घूरते हुए दूध देने लगा और साथ ही एक हाथ से अपने लण्ड को भी मसल रहा था।
मैंने देखा कि उसके पैन्ट में टेंट बन चुका था, उसका लण्ड ऊपर से देखने में काफ़ी बड़ा लग रहा था।
जूही भी उसके लण्ड को देख रही थी.. और मुस्कुरा रही थी।

जूही ने दूध ले लिया और पीछे मुड़ गई.. दूधवाला अभी भी वहीं खड़ा था और जूही की उभरी हुई गाण्ड को निहार रहा था।
तभी जूही फिर से मुड़ी और कहा- हाँ भैया.. कल जल्दी आना.. आज तुम देर से आए हो।
‘ज्ज…जी मेमसाब..’

दूध वाला लण्ड मसलते हुए चला गया।

जैसे ही वो गया.. मैं बाहर आया और जूही को गले लगा लिया और कहा- जूही तुमने तो दूधवाले का बुरा हाल कर दिया। देखा तुम्हें देख कर कैसे लण्ड मसल रहा था.. उसका लण्ड भी काफ़ी बड़ा लग रहा था..
‘हाँ जान.. उसका काफ़ी बड़ा लग रहा था.. उसका लण्ड का नाप देख कर तो मेरी चूत में भी कुछ-कुछ होने लगा था..’

मैंने कहा- क्या हो रहा था जान?
वो बोली- मेरा मन कर रहा था कि उसको छूकर देखूं।
मैं मुस्काराया और बोला- चिंता मत करो जान.. बहुत जल्द मौका आएगा कि वो लण्ड तुम्हें छूने के लिए ही बल्कि चूसने और तुम्हारी चूत में डालने के लिए भी मिलेगा।

हम दोनों काम-पिपासु हो चले थे.. जल्दी से बेडरूम में गए और मैंने जूही की जमकर चुदाई की।

इसी तरह हम दोनों मजा लेते हुए अपनी जिन्दगी का लुत्फ़ लेते हैं..

भाभी को देख मन मचल गया - Bhabhi Ko Dekh Man Machal Gaya

भाभी को देख मन मचल गया - Bhabhi Ko Dekh Man Machal Gaya , भाभी ने चुदने के लिए चूत दिखाई , भाभी की मस्त चुदाई , भाभी की बड़ी गांड मारी , भाभी की चूत चाटकर पानी निकाला , लंड भी चुसाया.

अमिता मेरे बड़े साले की बीवी यानि मेरी सलहज है, दो बच्चों की माँ है, मुझसे करीब आठ साल बड़ी यानि कि 38 साल की लेकिन उसे देखकर लगता है कि उसकी उम्र 30 की होगी।
गोरा रंग, 34-30-36 का बदन, उसके बाल लम्बे हैं और कूल्हों तक आते हैं, खुले बाल लेकर जब वो चूतड़ मटकाती हुई चलती है तो आग सी लग जाती है।

मुझे उसकी नज़रों से लगता था कि मेरी तरफ़ उसका कुछ झुकाव है।
मेरे सामने उसकी हरकतें बड़ी मादक होती थी, छेड़छाड़ और मज़ाक वगैरह, कभी कभी व्यस्क चुटकले भी!

लेकिन उसने कभी भी अपनी सीमा नहीं लांघी थी और उसकी यही अदा मुझे उसकी तरफ खींचती थी।
उससे मिल कर आने के बाद मैं बेचैन हो जाता था और उस दिन सुरेखा (मेरी बीवी) को बुरी तरह चोदता था।
वो भी कहती थी ‘आज क्या हो गया है.. उफ़ मार डालोगे क्या..?’

वो बेचारी वैसे ही मेरे मोटे लंड से खौफ खाती थी, पहली रात की चुदाई के बाद ही उसने मुझसे वादा लिया था कि मैं उसके साथ आहिस्ता और सलीके से सेक्स करूँ।
बेचारी को क्या मालूम कि मैं उसे नहीं अमिता भाभी को चोद रहा हूँ।
मैं उन्हें भाभी कहता हूँ।

और अमिता भाभी को तो ऐसे ही चोदना होगा… तभी मजा आयेगा… मैं दिन-रात उस मौक़े की तलाश में रहता था…
और एक दिन वो मौका आ ही गया!

हुआ यों की मेरी बीवी और उसके भाई यानि अमिता भाभी के पति को अपने किसी प्रॉपर्टी के सिलसिले में अपने पुश्तैनी गाँव में जाना था, मुझे भी उन्होंने चलने के लिये कहा लेकिन मुझे ऑफ़िस में कुछ जरूरी काम था।

मैं उन्हें सुबह स्टेशन पर छोड़ने गया.. तब भाई साब ने कहा- अमिता अकेली है और बच्चे भी नाना के यहाँ गए हैं एक महीने के लिये, तुम शाम को एक फ़ोन कर लेना घर पर या फ़िर घर जाकर आना।

मैंने कहा- जी ठीक है!

और मैं वहीं से ऑफ़िस चला गया।

शाम को लौटने में देर हो गई, करीब सात बज चुके थे, अचानक सेल पर मेरी बीवी का फ़ोन आया- अरे भाभी का फ़ोन नहीं लग रहा.. तुमसे कोई बात हुई क्या?

मैंने कहा- नहीं!
‘प्लीज़ जरा उनके घर जाकर आओ!’
मैंने कहा- ठीक है..

लेकिन अचानक मेरे दिमाग में घंटी बजी, ‘यह गोल्डन चांस है, आज उसे उत्तेजित करो और मौका मिले तो… काम कर लो।’

मैंने घर आकर टीशर्ट और जींस पहने, एक अच्छा वाला सेंट स्प्रे किया और कार लेकर चल पड़ा उनके घर।

उनका घर दोमंजिला है। मैं वहाँ पहुँचा तो आवाज़ दी- भाभी…!!

कोई उत्तर नहीं आया।

फ़िर दरवाज़ा खटखटाया, तब हल्की आवाज़ आई- तुम रुको, मैं आती हूँ।

थोड़ी देर में दरवाजा खुला.. उफ़्फ़… भाभी के बाल थोड़े बिखरे हुये उनके चेहरे पर आ गए थे और सीने पर दुपट्टा नहीं.. क्या मस्त चूचियाँ हैं… मेरी बीवी की इनके सामने कुछ भी नहीं…

‘आओ!’
‘भाभी, आपका फ़ोन बंद है क्या?’
‘मालूम नहीं, वैसे बहुत देर से किसी का फ़ोन आया नहीं!’

मैं फ़ोन का रीसिवर उठाया.. ‘ओह भाभी, यह तो बंद है।’

मैंने अपने सेल पर सुरेखा का फ़ोन लगाया- हाँ सुरेखा, भाभी का फ़ोन बंद है.. लो भाभी से बात करो।

उन दोनों ने कुछ बात की फ़िर भाभी ने कहा- तुम थोड़ा बैठो, मैं ऊपर स्टोर में से कुछ समान और बिस्तर निकाल रही हूँ। अभी और भी थोड़ा काम है, फ़िर चाय बनाती हूँ..

मैं चुप रहा और उन्हें देखता रहा।

उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा- लगता है सुरेखा की बहुत याद आ रही है?
और एक सेक्सी मुस्कान मेरी ओर फ़ेंक दी।

मैं तो तड़प गया, फ़िर वो अपने सेक्सी कूल्हे मटकाते हुए सीढ़ियाँ चढ़ने लगी और कहा- तब तक तुम टीवी देखो!

मैं अपने को रोक नहीं सका और 5 मिनट बाद मैं भी सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर पहुँचा, वहाँ भाभी की पीठ मेरी तरफ थी और वो बेड को ठीक कर रही थी।

मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया।

‘क्या कर रहे हो?’
‘प्यार! अभी आपने कहा ना कि सुरेखा को मिस कर रहे हो? मैं उसे नहीं आपको मिस करता हूँ भाभी!’
‘बदमाशी मत करो!’

पर मैंने अपने लंड को उनके चूतड़ों पर दबाया.. जो अब थोड़ा कड़क हो रहा था.. वहाँ लगते ही उसकी आकार बढ़ने लगा।

वो मुझसे छुटने की कोशिश करने लगी.. मेरा हाथ उनकी चूचियों पर पहुँच गया.. मैंने उनके गर्दन पर पीछे चूम लिया।

‘अखिलेश…!!! प्लीज़… यह गलत है!’
‘क्या गलत है भाभी?’
‘मैं सुरेखा की भाभी हूँ!’
‘तो क्या हुआ.. आप इतनी हसीं हो कि मेरा दिल मचल गया है आपके लिये!’

मैंने हाथों से उनकी चूचियाँ और जोर से दबाई।

‘नहींई कर…ओ… आआह्ह धीईरे…’

मेरा लौड़ा पूरा अकड़ कर उनके चूतड़ों में जैसे घुसा जा रहा था।

अमिता बोल रही थी- नहीं…ई…ई…

मैंने हाथों से उनकी चूची और जोर से दबाई।

‘आआह्ह… ह्ह्ह… धीरे…’

यह सुन कर मैं समझ गया कि भाभी चुदवाना तो चाहती हैं लेकिन नखरे कर रही हैं।

मेरा लंड पूरा खड़ा होकर उनकी गांड में घुसा जा रहा था।

अब वो भी अपनी गांड मेरे लंड पर दबा रही थी, मैंने उनकी कमीज़ के अंदर पीछे से हाथ डाल दिया.. नरम पीठ से होता हुआ मेरा हाथ सीधे ब्रा के हूक पर गया, मैंने उसे जोर से खींचा, वो टूट गया।

‘क्या कर रहे हो?’
‘आप प्यार से नहीं करने दे रही हैं।’
‘क्या नहीं करने दे रही हूँ??’

और वो घूम गई, मैंने इस मौक़े पर एकदम उनका चेहरा पास लाया और उनके रसीले लाल होंटों पर अपने होंठ चिपका दिये।
पहले तो वो मुँह इधर उधर करने लगी.. फ़िर थोड़ी देर बाद मेर होंठों को जगह मिल गई…
वो लम्बा चुम्बन.. गीला… ऊओह.. और भाभी मुझसे दूर हटने लगी.. मैंने फ़िर भी नहीं छोड़ा, उन्हें और अब उनके चूतड़ जोर से पकड़ कर खींचा.. मेरा लंड उनके पेट पर लगा… उनके हाथ झटके से मेरे गले पर आ गए..

फ़िर एक बोसा…

इस बार कूल्हे दबाते हुये और उन्होंने मुँह मेरे मुँह से नहीं हटाया।

मैंने भाभी के शर्ट को ऊपर करना शुरू किया और गले तक ले आया, उनके हाथ ऊपर किये और निकाल दिया।
‘क्या कर रहे हैं आप?’
‘प्यार भाभी!’
मैंने अपना कुरता भी अब उतारा…

वो जाना चाहती थी लेकिन कमीज़ निकल गई, वो ऊपर पूरी नंगी थी, जाली वाली ब्रा थी और उसमें से उनके अंगूर जैसे काले निप्पल दिख रहे थे।

मैंने देर नहीं की, झपट कर उन्हें पकड़ लिया और निप्पल पर मुँह लगाया।

‘आआह्ह हा… मैं तुमसे बड़ी हूँऊ.. ये मत करो..; लेकिन मेरा सिर उन्होंने अपनी छाती पर दबा लिया।

मैंने पीछे हाथ किये और ब्रा का हुक तोड़ दिया, बड़ी बड़ी दूधिया चूचियाँ बाहर मेरे हाथो में आ गई.. जोर से दबाया।

‘ऊऊफ़्फ़्फ़ फ्फ धीईरेएए… इतने ज़ोर से मत दबाओ…’

मैंने कुछ सुना नहीं, उनके बिस्तर पर धकेला… उनके पैर नीचे लटक रहे थे… मैंने सलवार की इलास्टिक खींची तो साथ में गुलाबी रंग की पैंटी भी नीचे आ गई।

‘जीईईजाजी, क्या कर रहे हओओ.. मुझे खराब मत करो…’

लेकिन उन्होंने गांड उठा दी और सलवार निकल आई और पैंटी भी…

चूत पर छोटे छोटे बाल थे.. मेरा तो लंड अब बेकाबू होने लगा… भाभी की गांड पर हाथ फेरा और ज़ोर से मसल दिया।

‘आआआअह्ह ह्ह्ह… प्लीज मत करो… वो उछल पड़ी… क्या गोरी और चिकनी गांड थी उनकी… मैंने अब अपने कपड़े उतारना शुरू किया.. इस मौक़े का फायदा उठा कर भाभी उठी और कपड़े उठा कर जल्दी से नीचे भागी।

मेरी पैंट आधी खुली थी.. मैंने पूरी खोली, उसे वहीं फेंका और अंडरवीयर में उनके पीछे भागा, वो अपने बेडरूम में घुस गई, दरवाजा बंद दिया… मैं दरवाजे के पास गया और हल्के से धकेला… दरवाजा खुल गया।

भाभी वैसी ही बेड पर उलटी लेटी हुई थी.. मैं समझ गया, मैं उनके पीछे गया, मैंने अपना अंडरवीयर भी निकाल दिया.. मेरा काला मूसल जैसा 7″ का लंड छिटक कर बाहर आ गया, मैंने पीछे से उनके बदन पर लण्ड छुआया।

वो चौंक कर पलटी- आआह्… ओह… मुझे क्यों परेशान कर रहे हो.. और यह क्या… हाय अल्ल्लाआह्ह्ह इतना बड़ा और मोटा… बाप रे… सुरेखा तो रोती होगी?

‘उसकी बात छोड़ दो भाभी!’ लेकिन आपको तो यह अच्छा लगेगा।

मैंने फ़िर से उन्हें दबोच लिया।

अब मेरा लंड उनके पेट के पास था, मैंने उनकी चूचियाँ ज़ोर ज़ोर से मसलन शुरू की और उनके होंठ चूमने लगा।

इस बार वो सिर्फ ‘आआह नहीं.. ऊऊओह्ह अखिलेश मत करो..’ बोल रही थी लेकिन साथ में मुझसे लिपटी जा रही थी, मेरे लंड का प्री-कम उनके पूरे पेट को गीला कर रहा था।

मैंने उनसे कहा- इसे पकड़ो ना…
और उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया..

उन्होंने बदमाशी की और उसे पकड़ के जोर से दबा दिया।

‘आआआह भाभी… प्यार से सहलाओ!’
‘क्या प्यार से इतना मोटा?’ भाभी पुरानी खिलाड़ी थी लेकिन फ़िर भी कहा- तुम्हारा बहुत लम्बा और मोटा है… तुम आज मुझे बर्बाद कर के छोड़ोगे!

मैंने कुछ नहीं कहा और उनके गोरे पेट को सहलाते हुए जीभ से गीला करने लगा।
भाभी मुझे धकेल रही थी लेकिन उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा।

मैंने अब सीधे उनके पैर फैला दिये, अपना मुँह उनके पैरों के बीच रखा और चूमा।

‘आआआअ अह्ह्हह… कितने गंदे हो.. वहाँ क्यों मुँह लगा रहे हो?’

‘भाभी, अभी आप कुछ मत कहो!’

‘तुम भाभी भाभी कहते हो, कहते हो ‘इज्जत करता हूँ!’ यह इज्जत का तरीका है? ..उईईई ईईइ…’

मेरी जीभ चूत के अंदर दाखिल हो गई और अंदर गोल गोल घुमाने लगा।

‘आआह्ह ह्ह्ह… अखिलेश… मैं पागल हो रही हूँ… मत करओ… प्लीज.. मैं तुम्हारी भाभी हूँऊ…’

लेकिन मुझे अब उनकी गुलाबी चूत और उसके अंदर का नमकीन पानी ही याद था.. मैंने तेजी से चाटना शुरू किया..

भाभी अपने चूतड़ उछालने लगी थी- अखिलेश… हरामीई ये क्या कर रह है… ईआआअह!
भाभी का बदन अकड़ने लगा था, उनका पानी निकलने वाला है, यह मैं समझ गया।

अब मैंने अपनी एक उंगली उनके मुँह में डाली, उन्होंने काट ली।
फ़िर उसे धीरे धीरे चूसना शुरू किया.. मैंने पोजीशन बदली और उन्हें उठाया, किनारे पर मैं बैठ गया और उनसे कहा- नीचे आओ!

‘क्यों?’
‘आओ तो!’

वो नीचे आई मैंने उन्हें घुटनों पर बिठाया, मेरा लंड उनके मुँह के सामने था, वो तो तड़प रही थी, फ़िर भी उठ कर जाने लगी।

मैंने जबरदस्ती बिठाया और लंड को उनके गालों पर रगड़ा, फ़िर होंठों पर रख कर कहा- इसे किस करो !

वो मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने उनके सिर को पकड़ा और लंड को होंठों पर रगड़ा।

चाहती तो वो भी थी…
पहले थोड़ा चाटा, जीभ से फ़िर होंठों को खोला और लंड का सुपारा मुँह में लिया।

मैंने देखा उनके छोटे मुँह में लंड नहीं जा रहा था.. बहुत मोटा जो है..
मैंने सिर को कस के पकड़ा और दबाया- ले साली… बहुत दिनों से तडपा रही है… अपनी चूची और चूतड़ दिखा दिखा के..

अब उन्होंने चूसना शुरू किया मैं तो जन्नत में पहुँच गया था.. ‘ऊओह्ह भाभीईईई… मज़ा आ रहा है…!

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मेरे गोटियों में सूजन आ रही है, मेरा हो जाएगा, मैंने भाभी को उठाया और बेड पर लिटा दिया।
पैर नीचे लटक रहे थे, पैरों को उठाया।

‘नहीं प्लीज़… अभी मैं सेफ नहीं हूँऊ.. मेरे ठहर सकता है.. नहीईई…’

मैंने कहा- फ़िक्र मत करो, मैं बाहर निकाल लूँगा।
और पैरों को फैलाया, अपने कंधे पर रखा, लंड को चूत के ऊपर रगड़ना शुरू किया- भाभी, कैसा लग रह है?

‘हरामजादे अपने लंड को मेरी चूत पे लगा के भाभी कह रहा है…? अब जल्दी कर जो करना है।’

यह सुन कर मुझे तो जोश आ गया और अपना लंड उनकी चूत पे धीरे धीरे रगड़ने लगा, रगड़ता रहा, रगड़ता रहा, भाभी को छटपटाता हुआ देख कर मुझे बहुत मजा आ रहा था!!

फ़िर मैं भाभी के मम्मे दबाने लगा !!

वो बोली- मादरचोद… और कितना तड़पायेगा?

मैं हंसा और अपना लंड उनके छेद पर रख कर दबाया।

भाभी तड़प उठी- ऊऊओह्ह ह्ह्ह मर गई मादरचोद निकाल… निकाआल… बहुत मोटा है.. अह… मैं मर जाऊँगीई!मैं रूक गया और लंड को बाहर खींच लिया।
भाभी ने आँखें खोली और पूछा- अब क्या हुआ?

मैंने कहा- आपने कहा ‘निकाल!’ इसलिए निकाल लिया।

‘हरामी, क्यों तड़पा रहा है… अब जो करना है कर…’

मैंने आव देखा ना ताव और लंड को चूत पर रख कर जोर का झटका मारा।

भाभी का पूरा बदन ऐंठ गया- आआअ आआह्ह ह्ह्ह मार डालाआअ रे हरामीईईई… ये आदमी का है या घोड़े का, सुरेखा की क्या हालत करते हो, ऊऊफ़्फ़्फ़ पूरी भर गई मेरी…

मैं अब थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा और भाभी को चूमने लगा, निप्पल चूसने लगा.. वो थोड़ा नॉर्मल हुई और उनकी चूत ने भी अब फ़िर से पानी छोड़ा…

मैंने आधा लंड बाहर निकाल के इस बार तूफानी शॉट मारा और बिल्कुल धोनी के सिक्सर की स्पीड से लंड पूरा भाभी के चूत में पेल दिया।

‘आआआअ… उईईईइ ईईईई माआआआ… किस मनहूस घड़ी में मैं तुम्हारे हाथ लग गईईईई…!’

मैंने उनके बगल के नीचे से हाथ डालकर उनके कंधों को पकड़ा जिससे वो हिल नहीं पाए और फ़िर मैंने धोनी की स्टाइल बैटिंग शुरू की।

वो उफ़ उफ्फ्फ आआह अह्ह्ह कर रही थी, चूत से पानी की धार बहने लग गई।

उनकी गांड तक बहने लगी और नीचे चादर भी गीली हो रही थी।

मेरी स्पीड जोर की थी, भाभी के मुँह से निकला- वाह मेरे शेर !!! वाह… आज मुझे पहली बार इतना मजा आया ऊऊऊ.. आज मेरी मुराद पूरी हो गईईइ… ऊऊह ऊओह्ह मेरा होने वालाआ हैईई ! और ज़ोर सेईई…

मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था, काट रह था.. उनके लंबे नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।
‘फाड़ दे… मेरी फाड़ दीईईईए… आआ आआह्ह्ह!’

उन्होंने मुझे कस के पकड़ा और वो झड़ने लगी।

करीब दो मिनट उनका ओर्गैस्म चालू था।
इधर मेरा भी होने वाला था। उस तूफानी स्पीड में मैंने कहा- भाभी, मेरा झड़ने वाला है, मैं कहाँ निकालूँ।

‘मेरे अंदर डाल दो दओ.. आआह्ह !’

‘लो भाभी… ये लओ !’
और मैंने लंड को उनकी चूत के एकदम अंदर मुँह पर टिका दिया और मेरी पिचकारी शुरू हो गई।

दोनों ने एक दूसरे को कस के पकड़ा था.. इसी तरह हम करीब दस मिनट रहे।

उन्होंने फ़िर मुझे धकेला और मेरी तरफ देखा- कर दिया ना भाभी को खराब..?
और मुझे धकेला।

मैंने उनकी चूत से लंड बाहर खींचा, वो मासूम भाभी के और मेरे पानी से लिपटा हुआ था।
उसे देख कर भाभी ने कहा- देखो कैसे मासूम लग रहा है..!!
उन्होंने नीचे देखा, चूत फ़ूल गई थी।

उन्होंने हाथ लगाया और सिहर उठी- देखो क्या हालत की तुमने… छोटी सी थी.. कितना सूज गई है और कितना दर्द हो रहा है…
उनकी चूत से मेरा सफ़ेद पानी और उनका पानी बाहर टपक रह था, चूत का मुँह भी खुल गया था… वो उठ भी नहीं पा रही थी।

एक बार की चुदाई के बाद भाभी की हालत तो एकदम खराब हो गई थी..
इस उमर में इतनी जबर्दस्त चुदाई होगी, यः उन्होंने सोचा भी नहीं था लेकिन मुझे भी उनका वो गदराया बदन इतने सालों बाद मिला.. मैंने जम कर चोदा..
सबसे बड़ी बात.. मुझे पता था कि भाभी को मोटे और लंबे लंड से ज्यादा मजा आयेगा और वो मेरे पास है…
लेकिन मेरी बीवी मुझसे इस तरह चोदने नहीं देती, रोने लगती है और मुझे चुदाई में रहम से नफ़रत है…

खैर मैं उठा, लंड तो पूरा लथपथ था भाभी के योनि रस से और मेरे वीर्य से.. इतना माल तो मेरा कभी नहीं निकला था..
और भाभी की चूत भी मुँह खोले ‘O’ की आकृति की हो गई थी.. पूरी लाल दीख रही थी.. बाथरूम बाजू में था।

मैंने देखा कि भाभी ठीक से उठ नहीं पा रही हैं… मैंने उन्हें हाथ पकड़ कर उठाया.. मैंने देखा भाभी की कांख में बाल है.. और चूत पर भी बाल बढ़े हुए थे..

किसी तरह मैंने उन्हें उठाया और बाथरूम ले गया।

मैं- भाभी, आप कांख के बाल क्यों साफ नहीं करती?

भाभी- नहीं, क्यों?

मैं- किया करो ना.. और स्लीव्लेस पहना करो!

भाभी- वहाँ शेव कैसे करूँ… डर लगता है, कट जाएगा तो?

मैं- शेविंग का सामान दो मुझे..

भाभी- क्यों?

मैं- मैं कर देता हूँ आपका जंगल साफ!

मैंने वहीं बाथरूम में रखा शेविंग का सामान लिया, भाभी को अपने सामने खड़ा किया, भाभी पूरी नंगी खडी थी मेरे सामने और मेरा लंड आधा खड़ा हो रहा था।
उन्होंने एक हाथ ऊपर कर लिया, उनके कांख में साबुन लगा कर आराम से शेव किया, इस बीच मैं उनकी चूचियाँ भी सहला रहा था तो उनके निप्प्ल कड़क होने लगे थे।

भाभी- तुमने मुझे रंडी बना दिया.. मैंने पहली बार किसी दूसरे मर्द को नंगा देखा.. और खुद भी इतनी बेशरम जैसी तुम्हारे साथ नंगी खडी हूँ।

मैंने दोनों बगलों के बाल साफ़ करके पानी से धोया और उस पर चुम्बन करने लगा।
भाभी- आआअह… फ़िर से मुझे मत गर्म करो प्लीज… एक बार मैंने गुनाह कर लिया है… आआ आह्ह्ह…

मेरे होंठ उनके निप्प्ल पर आ गए और उन्होंने मेरा सिर जोर से दबा लिया.. मेरा खड़ा लंड उनकी चूत के दरवाजे पर खड़ा था… वो अपनी चूत उसके साथ सटा रही थी- आआ ह्ह्ह… मत करो नाआह…

मैं- क्या मत करो?
भाभी- बहोत बदमाश हो तुम? अपने से बड़ी भाभी के साथ ये सब किया?

मैं अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा… चूत का पानी अब भाभी की जांघों पर बह रहा था.. भाभी से नहीं रहा गया और खुद मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और अपने चूत के दाने पर रगड़ने लगी।

मैं तो बेकाबू होने लगा, वहीं दीवार पर उनकी पीठ टिका दी और उनके पैर खुद ही फ़ैल गए लंड को रास्ता देने के लिए…

मैंने वैसे ही खड़े खड़े अपना लंड सेट किया और क़मर हिला कर धक्का मारा।

भाभी- आआअह्ह ह्ह हरामीईई धीरे कर ना.. अपनी बीवी की चूत समझी है क्या?
मैं- बीवी की नहीं, मेरी सेक्सी भाभी की गदराई चूत है यह तो !
भाभी- अरे अभी तक दर्द हो रहा है.. आआअह्ह ह्ह…

उन्होंने हाथ लगा कर देखा- अभी तो इतना बाहर है.. हईईइ अल्लाह मैं तो मर जाऊँगी।
मैं- आपको दर्द हो रहा है तो मैं बाहर निकाल लेता हूँ?
मैंने तड़पाने के लिए कहा।

भाभी- अरे.. अब इतना डाल के बाहर निकालेगा…
और अब उन्होंने खुद चूत को लंड पर दबाया- कितना मोटा है!

मैं अब क़मर हिला कर आगे पीछे कर रहा था।

भाभी की चूत ने इतना पानी छोड़ दिया कि अब लंड आराम से जा रहा था और मैंने भी अब सनसना कर धक्का मारा और पुरा लंड अंदर!

‘मर्र गईई रे ! आप सच में मर्द हो… आज मुझे पता लगा कि असली मर्द क्या होता है… आई लव यू.. मेरे राजा… चोदो मुझे ज़ोर से चोदओ… फाड़ दो मेरीईइ…

मैं धक्के लगाते हुए और उनके निप्प्ल को काटते हुए- क्या फाड़ दूँ भाभी?
भाभी- जो फोड़ रहे हो…
मैं- उसका नाम बोलो?
भाभी- अपना काम करो!
मैं- अभी तो एक जगह और बची है उसे भी फाड़ना है… सबसे सेक्सी तो वो ही है तुम्हारे पास!
भाभी- क्या?

मैंने भाभी के चूतड़ों पर हाथ लगाया और उनकी गांड के छेद में उंगली डाल कर- ये वाली फाड़नी है।

भाभी- आआह्ह्ह हह नहींईई वो नईइ.. वो तो मैंने उनको भी नहीं दी!
मैं- तो क्या हुआ.. मुझे तो पसंद है।
भाभी- नहीं नहीं..

मेरे धक्के चालू थे, मैंने देखा कि भाभी का बदन अकड़ने लगा है, वो पैर सिकोड़ कर लंड को कस रही थी और मेरे कंधे पर दांतों से काट रही हैं… नाख़ून मेरी पीठ में गड़ा रही हैं- यह क्या किया.. आआह्ह मैं गयईईइ मेरा हो गया ओऊओह्ह अब नहीईईइ आआआह हाह!

और भाभी की चूत का पानी धार निकलने लगी, मैं गिरने लगा.. मैं रूक गया.. वो एकदम हल्की हो गई थी।

मैंने अब उन्हें दीवार से हटाया और बाथ टब के अंदर ले गया, उसमें पानी और साबुन भरने लगा..
मैंने देखा उनकी चूत पर भी बाल हैं, सोचा अगर इसे भी चिकनी कर लूँ तो..

मैंने उन्हें वहीं लिटा दिया..

भाभी- अब क्या कर रहे हो?
मैं- तुम्हारे खजाने को और खूबसूरत बाना रहा हूँ जान!
भाभी- क्या कहा.. जान.. फ़िर से कहो ..आह्ह मैं तुम्हारी जान..? लो कर लो साफ इसे भी!

मैंने चूत पर भी साबुन लगाया और उसे साफ करने लगा।
जब चूत पूरी साफ हो गई तो उसे मैंने गुनगुने पानी से धोया।
मेरा हाथ बार बारा उनके दाने से लग रहा था…

इधर मेरा अभी तक स्खलन नहीं हुआ, एक बार भी नहीं हुआ था.. तो वो तो उछल रहा था..
मैंने भाभी से कहा- इसे थोड़ा सहलाओ ना…!!

मैं उनके मुँह के पास लंड को ले गया, उन्होंने कुछ नहीं किया, मैंने उनकी चूत को देखा, दोनों जांघों के बीच एक लकीर.. लग रहा था की एक शर्माई हुई मुनिया..

मैंने हाथ फेरा… लकीर के बीच ऊँगली डाली.. फ़िर से गीली लबालब पानी.. मुझसे अब रहा नहीं गया!

मैंने भाभी के पेट को चूमना शुरू किया और दोनों पैर भाभी के दोनों तरफ डाले और उनकी पर मुँह रख दिया।

भाभी तड़प उठी- छीईः गंदे..
और पैर उठाने लगी…

मैंने जबरदस्ती पैरों को फैलाया और उनका रस चाटने लगा.. जीभ को दाने पर रगड़ा…

मेरा लंड उनके मुँह के पास लटक रहा था, भाभी से रहा नहीं गया, वो उसे हाथ में पकड़ और खींच रही थी।

मैंने क़मर और नीचे की और उसे ठीक उनके होंठों पर टिका दिया।

थोड़ी देर तो उन्होंने कुछ नहीं किया लेकिन फ़िर अचानक उसे जीभ से चाटा और होंठ खोलकर उसे अंदर लिया।

मैंने सिहरन सी महसूस की।

मैं- आआअह्ह्ह भाभी चूसओ मेरी जान… अआः मजा आ रहा है आईईइ!

मैं तो उनके गर्म होंठों के स्पर्श से पागल हो रहा था… अब वो भी पूरी मस्ती में उसे मुँह में ले रही थी..

अचानक मैंने थोड़ा अंदर दबाया, लंड एकदम उनके हल्क तक पहुँच गया।

उन्होंने तड़प कर उसे बाहर निकाला और कहा- अब क्या मार डालोगे.. इतना लम्बा और मोटा गले के अंदर डाल रहे हो.. मेरी सांस रूक जायेगी।
मैं- ओह भाभी जी, आप इतना अच्छा चूस रही हो!

इधर भाभी की हालत फ़िर खराब होने लगी, मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर पूरी सैर कर रही थी।
भाभी ने फ़िर से पानी छोड़ दिया, मैंने पूरा चाट लिया, उनकी गाण्ड तक बह रहा था तो गांड के छेद तक जीभ से पूरा चाटा।

इधर मुझे लग रहा था कि मेरा भी पानी भाभी के मुँह में निकल जाएगा… मैंने अपना लण्ड उनके मुँह से निकाल लिया, मेरा लवड़ा उनके थूक से गीला होकर चमक रहा था और भी मोटा हो गया था।

मैं उठ कर कमोड पर बैठ गया और भाभी को अपने पास खींचा।

भाभी- अब क्या कर रहे हो?
मैं- आओ ना, दोनों पैर साइड में कर लो और सवारी करो!
भाभी- दिमाग खराब है क्या? मुझसे नहीं होगा!

मैंने उन्हें पकड़ कर पोजिशन में लिया, अब वो मेरी गुलाम थी..
और लंड के ऊपर भाभी की चूत को सेट करके कहा- बैठो…
उन्होंने कोशिश की- …आआह नहीं होगा..

मैंने उनके चूतड़ों पर हाथ रखे और नीचे से धक्का लगाया..
आधा लण्ड गप्प से अंदर!

अब मैंने उन्हें कहा- धीरे धीरे इस पर बैठो…
वो बैठने लगी.. फ़िसलन तो थी.. अंदर घुसने लगा!
फ़िर वो रूक गई.. अभी भी थोड़ा बाहर था..

मैंने उनकी चूची और निप्पल चूसना शुरू किया, बहुत चूमाचाटी की और पीछे से उनकी गांड के सुराख में उंगली डाली।

‘उईईईईई…’

और मैंने उन्हें जोर से अपने ऊपर बिठा लिया।

पूरा लंड अंदर… और भाभी की चीख नीकल गई- आआअह्ह ह्ह्ह मर गईई ऊओह…

अभी तक दो बार चुदने के बाद भी चूत इतनी कसी लग रही थी, मुझे मज़ा और जोश दोनों आ रहा था…

भाभी मेरे सीने से चिपटी रही.. फ़िर थोड़ी देर बाद वो खुद ही मेरे लंड पर ऊपर नीचे करने लगी… मैं भी नीचे से धक्के मार रहा था।

भाभी बड़बड़ाने लगी- आआआअह, तुमने मुझे जिन्दगी का मज़ा दे दिया… अह्ह्ह मुझे माँ बना दो..
और उनके उछलने की गति बढ़ गई।

‘आअह आआह्ह… मेरे अखिलेश… इतने दिन क्यों नहीं किया.. आआअह्ह्ह मेरा होने वाला है…’

और ऐसे ही उछलते हुए उनका पानी नीकल गया, वो मेरे सीने से लिपट गई, मैं उन्हें चूमने लगा।

अब मैंने भाभी को खड़ा किया, मेरे दिमाग में एक नया पोज़ आया, कमोड के ऊपर मैंने भाभी को झुकाया, उनके दोनों हाथ कमोड के ऊपर रखे।

भाभी- यह क्या कर रहे हो?
मैं- मैं तुम्हें और मजा दूँगा जानेमन..
मैं पीछे आ गया।

ऊऊओह क्या मस्त उभरे हुये चूतड.. और ऐसे में उनकी चूत का छेद एकगम गीला… और गांड का गुलाबी छेद…

मैंने पीछे से लंड को उनके चूतड़ों पर घुमाया… और गांड के छेद पर लगाया…
वो एकदम उठ कर खड़ी हो गई- नईई वहाँ नहींई… प्लीज़!
‘नहीं डार्लिंग, मैं सही जगह पर दूंगा!

और फ़िर से उन्हें झुकाया…

चूतड़ और ऊपर किये ताकि चूत ऊपर हो…
और फ़िर..
भाभी- अह्ह धीरे… आआ अह्ह!

मेरा लंड अंदर जा रहा था, लेकिन मैंने उसे बाहर खींचा और अब एक झटके में पूरा अंदर पेल दिया।
वो तो चिल्ला पड़ी- अररे… मार डालोगे क्या?

मैंने उनके चूतड़ सहलाये और आगे हाथ बढ़ा कर उनकी चूचियाँ दोनों साइड से दबाने लगा।

करीब 3-4 मिनट में भाभी फ़िर पानी छोड़ने लगी।

मैंने उसी पोज़ में उन्हें खड़ा किया, दीवार की तरफ मुँह किया और उनका एक पैर कमोड के ऊपर रखा।
और फ़िर तो मैंने भी राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड से चोदना शुरू किया।

भाभी उफ़ उफ़ आह अह्ह्ह कर रही थी।
मैंने उनके कानों के पास चूमा- जानू.. मजा आ रहा है ना?
भाभी- बहुत.. और जोर से करो!

अब मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है… एक घंटे से ऊपर हो गया था.. मेरे अंडों में दबाव आ रहा था..

मैंने भाभी को वहीं बाथ टब के अंदर लिया और लिटाया, दोनों पैर फैलाये, घुटनों से ऊपर मोड़ कर एक झटके में अंदर डाला…

उनकी आँखें फ़िर बड़ी बड़ी हो गई लेकिन मैंने कुछ देखा नहीं और फ़िर ‘उफ्फ्फ़; वो धक्के लगाए कि भाभी की सांस फूलने लगी, वो सिर्फ अआह इश्ह्ह् इश्ह्ह्ह आआः कर रही थी।

मैं- जानू मेरा निकलने वाला है.. अंदर डालूँ या बाहर?
भाभी- एक बार तो अंदर डाल दिया है, अब बाहर क्यूँ? डाल अंदर तेरा माल!
मैं- तो लो आआह अह्ह्ह आह्ह ओह्ह ये लो मेरी जान…

और पूरा लंड उनके बच्चेदानी के ऊपर टिकाया और 1.. 2.. 3.. 4.. 5.. 6.. 7..
कितनी पिचकारी मारी कि मैं भूल गया और उनके ऊपर लेट गया।

करीब दस मिनट हम ऐसे ही पड़े रहे.. मैंने फ़िर उठकर उन्हें चूमा।
उन्होने आँखें खोली- तुमने आज मुझसे बहुत बड़ा गुनाह करवा लिया.. आज के बाद मैं तुमसे बात भी नहीं करुँगी।
‘बात मत करना जान.. लेकिन ये काम तो करोगी ना?’
भाभी- बेशरम, अब मेरी जूती करेगी ये काम!

मैंने अपना लंड बाहर खींचा..
पूरा लथपथ.. उनकी चूत से सफ़ेद रस निकल रहा था और बाथ टब में फ़ैल रहा था।

मैंने उनकी गांड के छेद पर हाथ रख कर कहा- अभी तो इसका उदघाटन करना है.. अभी दो दिन और मैं यही रहूंगा.. तुम्हें माँ बना के ही जाऊँगा मैं।
वो बोली- ..क्क्या कहा? दो दिन में? मैं तो मर जाऊँगी!

मैंने धीरे से पूछा- जानेमन कैसा लगा?
वो कुछ बोली नहीं.. सिर्फ मुस्कुरा दी..

फ़िर हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया रगड़ रगड़ कर !
मेरा फ़िर खड़ा होने लगा था लेकिन भाभी जल्दी से तौलिया लपेट कर बाहर निकल गई।

पड़ोसन भाभी को चुदाई की तलब - Padosan Bhabhi Ko Chudai Ki Talab

पड़ोसन भाभी को चुदाई की तलब - Padosan Bhabhi Ko Chudai Ki Talab , पड़ोसन भाभी की गांड फाड़ी , पड़ोस में रहने वाली महिला की गांड मारी , आस-पडोस की औरत को लंड चुसाया.

दोस्तो.. आज मैं आपके सामने अपनी एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ.. लेकिन उससे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ.. मेरा नाम राज है और मैं उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में रहता हूँ। इस वक़्त मेरी उम्र 35 साल हो गई है।
आज भी मैं हर वक़्त सेक्स का भूखा रहता हूँ।

बात उन दिनों की है.. जब मैं सिर्फ़ 20 साल का था। मेरे यहाँ एक फैमिली किराए पर रहने आई। उस फैमिली में एक आदमी.. उसकी बीवी और दो छोटे बच्चे थे।
उनका कमरा मेरे बगल में ही था। आदमी की उम्र यही कोई 35 साल होगी और उस औरत की 30 साल थी। लेकिन उसकी उम्र 30 के बावजूद भी वो लगती बिल्कुल 25 साल की थी। वो बहुत ही सुन्दर औरत थी.. मैं उसे भाभी कहता था.. लेकिन मुझे वो औरत कुछ चालू किस्म की लगती थी।

जब उसका पति अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और बच्चे स्कूल चले जाते थे.. तो उस वक्त वो मुझसे थोड़ा हँसी-मज़ाक कर लेती थी।
मैं भी इसे सामान्य तौर पर लेता था। इसी तरह से तीन महीने बीत गए.. हम लोग आपस में काफ़ी खुल गए थे।
अक्सर ऐसा होता था कि रात में नज़दीक होने की वजह से मैं उनका टॉयलेट इस्तेमाल कर लेता था।

उसके पति जिनका नाम अशोक सक्सेना था.. वो कई बार टूर पर ऑफिस के काम से लखनऊ भी जाते थे और उन्हें वहाँ कई-कई दिन रुकना पड़ जाता था। तब घर में वो अकेली रह जाती थी.. तो उससे मेरी खूब बातें होती थीं।

मैं कभी-कभी छत पर जाकर छुप कर ड्रिंक कर लिया करता था। एक दिन मैं ड्रिंक कर रहा था.. अचानक वो भी ऊपर आ गई और उसने मुझे ड्रिंक करते हुए देख लिया।
मैं डर गया कि आज तो भांडा फूट गया.. लेकिन वो मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली- जब मेरे ‘वो’ यहाँ नहीं होते हैं.. तो तुम मेरे कमरे में बच्चों के सोने के बाद ड्रिंक कर सकते हो।
मैंने उन्हें ‘धन्यवाद’ दिया और झेंपते हुए बताया- बस भाभी जी.. मैं कभी-कभार ही ड्रिंक करता हूँ।

उन्होंने कहा- तुम्हारे भाईसाब भी कभी-कभी काम से बाहर जाते हैं.. तो तुम मेरे कमरे में ये सब कर सकते हो।
मैंने उन्हें ‘थैंक्स’ बोला और अपना क्वार्टर लेकर उनके कमरे में आ गया।

उन्होंने फ्रिज से ठन्डे पानी की बोतल और गिलास टेबल पर रख दिया और बातें करने लगीं।
अब मुझे सुरूर होने लगा था.. उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी है क्या?
‘नहीं तो..’ मैंने लौड़े पर हाथ फेरते हुए बताया- अभी तक तो कोई नहीं है।

फिर उन्होंने मुझे लौड़े पर हाथ फेरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए पूछा- कभी सेक्स किया है?
तो मैं चौंक गया.. मुझे इतनी जल्द इसी उम्मीद नहीं थी.. मुझे बड़ा अजीब सा लगा।
मैंने कहा- नहीं..
तो आँख मारते हुए बोली- अच्छा.. इतने शरीफ लगते तो नहीं हो..

बस मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने झट से उनको बाँहों में भर लिया और बोल दिया- भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
उसने छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा-तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो.. पर अभी तुम अपने कमरे में जाओ.. रात को आना.. जब तुम्हारे सभी घर वाले सो जाएँगे।

तो दोस्तो, मैं समझ गया कि चुदाई की आग दोनों तरफ लगी है।
मैं उधर से उठ कर अपने कमरे में आ गया और खाना खाकर सोने का नाटक करने लगा।
दो घंटे के बाद सभी घर वाले भी सो गए.. तो मैं चुपके से उठा और भाभी के कमरे में घुस गया। उन्होंने दरवाजा बंद नहीं किया था।

मैं जैसे ही अन्दर घुसा तो मैं देखता ही रह गया। भाभी ने सफेद रंग की नाईटी पहनी थी.. वो बड़ी मस्त लग रही थी। मैंने जाते ही उनको दबोच लिया.. लेकिन उन्होंने कहा- ऐसे नहीं.. पहले टॉयलेट में जाकर मुठ्ठ मार के आओ।
मैंने कहा- भाभी जब आप तैयार हैं.. तो फिर मुठ्ठ मारने की ज़रूरत क्या है?
तो उन्होंने कहा- जो मैं कहती हूँ.. वो करो..

मैं टॉयलेट में घुस गया और मुठ्ठ मारी और फिर से भाभी के कमरे में आ गया। इस बार देख की भाभी बिल्कुल नंगी होकर बिस्तर पर बैठी थीं।

क्या कयामत लग रही थी.. उस वक्त वो.. मैं बता नहीं सकता। उन्होंने अपने बिस्तर के बगल में नीचे बिस्तर लगा दिया था.. जिससे बच्चों की आँख ना खुल सके। अब भाभी ने मेरे कपड़े भी खुद ही उतार दिए।

खैर.. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. मैं फिर से गरम हो गया और भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी।
वाह.. क्या मज़ा आया..

फिर मैंने उनकी चूचियों की चूसना शुरू कर दिया। अब भाभी बहुत ही गरम हो गई थीं। उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया और अपनी चूत मेरे मुँह की तरफ कर दी और अपना मुँह मेरे लंड की तरफ करके मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं।
मैंने भी अपनी जीभ उनकी चूत में डाल दी।
जन्नत का मज़ा आ रहा था..

ऐसे ही लगभग 5 मिनट तक चुसाई का कार्यक्रम चला। भाभी की चूत से पानी की धार बह निकली.. उधर मेरा भी निकलने को हो गया।
मैंने भाभी से कहा- मेरा निकल जाएगा..
तो उन्होंने कहा- छोड़ दे.. मैं मुँह में ही ले लूँगी।
मेरे लौड़े ने उनके मुँह में ही पिचकारी छोड़ दी.. वो सारा वीर्य पी गई।

अब वो उठी और मेरे बगल में लेट गई। वो मुझे सहला रही थी.. और मैं उन्हें मसल रहा था।
इसी तरह से मुश्किल से 10 मिनट बीते थे कि लण्ड फिर से पूरा खड़ा हो गया और भाभी भी पूरी गर्म हो गई।
अब उन्होंने अपनी चूत फैलाते हुए कहा- ले.. अब अन्दर डाल..

मैं उनके ऊपर आ गया.. लण्ड का सुपारा चूत पर रखा और अन्दर डाल दिया और चुदाई शुरू कर दी। लगभग 7-8 मिनट की चुदाई के बाद भाभी ने मुझे बुरी तरह से कस लिया और बोली- थोड़ी सी रफ़्तार और बढ़ाओ..

मैंने रफ़्तार बढ़ा दी.. भाभी की साँसें रुक गईं.. उनका जिस्म बुरी तरह से अकड़ा और वो झड़ गई।
लेकिन दो बार वीर्य निकलने की वजह से मैंने चुदाई जारी रखी और मैं चोदता रहा। फिर दस मिनट के बाद भाभी फिर अकड़ गई और फिर से झड़ गई।

अब वो मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिए कहने लगी। मैंने लंड बाहर निकाला और उन्हें घोड़ी बना कर फिर उनकी चूत में लंड पेल दिया। फिर मैंने करीब 10 मिनट उन्हें और चोदा।

इस बार हम दोनों साथ-साथ छूटे और एक-दूसरे के बगल में लेट गए।

भाभी पूर्ण संतुष्ट हो चुकी थीं।
उन्होंने कहा- आज असली मज़ा आया.. तुम्हारे भैया तो ढंग से चुदाई करते ही नहीं..

एक घंटे के बाद मेरा लंड एक बार फिर तैयार था। इस बार भाभी मेरे ऊपर बैठ गईं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं।
यह दौर भी 30 मिनट तक चला और वो दो बार और मैं एक बार झड़ा। लेकिन अब थकान होने लगी थी.. खास तौर से भाभी को..
मैं उनके कमरे से जाना नहीं चाहता था.. लेकिन उन्होंने कहा- थोड़ी देर अपने कमरे में जाकर सो जाओ।

तो मैं बुझे मन से अपने कमरे में आकर सो गया.. लेकिन जोर से पेशाब लगने के कारण मेरी आँख 3 बजे फिर से खुल गई और मैं टॉयलेट मैं गया।

मैंने देखा कि भाभी ने कमरा बंद नहीं किया था.. तो उत्सुकतावश मैंने अन्दर झाँका.. भाभी बिस्तर पर नाइटी पहने हुए सो रही थीं।
मेरा मन फिर खराब हो गया.. लंड ने फिर सैल्यूट मारा और मैं धीरे से अन्दर घुस गया और उनको जगा दिया।
मैंने कहा- भाभी एक बार और..
वो फिर से नाईटी उतार कर नीचे वाले बिस्तर पर आ गई और बोली- बड़ी जबरदस्त जवानी है.. राज तुममें..
तो मैंने कहा- भाभी उमर ही ऐसी है।

वो रंडी की तरह मुस्कुराई और लेट कर उसने अपनी चूत फैला दी।
मैंने भाभी से कहा- भाभी मैं पीछे से करना चाहता हूँ।
तो वो बोली- आज तुमने मुझे जो सुख दिया है.. उसके लिए तुम कहीं भी अपना लंड डाल सकते हो.. लेकिन धीरे से करना।

वो उठ कर रसोई से तेल की शीशी ले आई और मुझे दे दी। मैंने अपनी उंगली से उनकी गाण्ड में जहाँ तक हो सकता था.. तेल डाल दिया और अपने लंड पर भी तेल लगा लिया।
उनको घोड़ी बनाकर उनकी गाण्ड में अपना लौड़ा डालने की कोशिश करने लगा।

बड़ी मुश्किल से सुपारा ही अन्दर गया कि भाभी मना करने लगी, बोली- दर्द हो रहा है..
तो मैं सिर्फ़ सुपारा डाल कर रुक गया। अब मैं भाभी की चूचियों से खेलने लगा।

कुछ ही पलों में भाभी भी उत्तेजित हो गई थी.. उन्होंने धीरे-धीरे अपनी गाण्ड को मेरे लंड की तरफ सरकाया और धीरे-धीरे पूरा लंड अपनी गाण्ड में ले लिया।

सच में दोस्तो.. गाण्ड में लंड डालकर ऐसा लगा जैसे किसी ने लंड को बुरी तरह से भींच लिया हो।
मैंने धीरे-धीर धक्के लगाने शुरू किए और फिर अपनी रफ़्तार बढ़ाता चला गया लेकिन उनकी गाण्ड बहुत कसी हुई थी।
मैंने एक हाथ से भाभी की चूची पकड़ रखी थी.. और एक हाथ की उंगली उनकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था।

हाय.. क्या मस्त नज़ारा था..
भाभी सिसकारियाँ ले रही थी.. लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में..
भाभी का जिस्म फिर से अकड़ा और वो झड़ गई थी.. दो मिनट के बाद मैंने भी सारा वीर्य भाभी की गाण्ड में ही भर दिया।
पता नहीं उनकी चूत झड़ी थी कि गाण्ड फटी.. लेकिन मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया।

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और सो गया। सुबह जब भाभी से सामना हुआ तो उन्होंने मुस्कुराकर मुझे आँख मारी और हमारा ये सिलसिला 3 साल तक चला।

फिर मेरी माँ को कुछ शक सा हो गया और उन्होंने उनसे मकान खाली करवा लिया। कुछ दिन बाद उनकी पति का तबादला भी कहीं और हो गया और वो लोग शहर से चले गए।

लेकिन भाभी की वो मस्त चुदाई.. मैं आज तक नहीं भूल पाया हूँ। दोस्तो, आपको मेरे कहानी कैसी लगी। आपके कमेन्ट आए तो अपने दूसरे किस्से भी आप तक ज़रूर भेजने की कोशिश करूँगा।

तू मेरे पति से चुद ले मैं तेरे पति से चुद लुंगी - Tu Mere Pati Se Chud Le Main Tere Pati Se Chud Lungi

तू मेरे पति से चुद ले मैं तेरे पति से चुद लुंगी - Tu Mere Pati Se Chud Le Main Tere Pati Se Chud Lungi , पति बदलकर चुदाई , पत्नियों की अदला बदली में चोदा चादी.

मेरा नाम संगीता जैन है, मैं तेईस वर्षीया खूबसूरत और मांसल बदन की लड़की हूँ, मैं आधुनिक विचारों की हूँ और फैशनेबल तरीके से रहना मुझे अच्छा लगता है।
हम लोग चण्डीगढ़ शहर में अभी नए आए हैं, मेरे पति ॠषभ जैन एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं और महीने में पंद्रह-बीस दिन बाहर के दौरे पर रहते हैं।

मेरे पति ॠषभ काफी खुले विचारों के इन्सान हैं, वे न केवल मेरे लिये सेक्सी और रोमांटिक किताबें खरीद कर लाते हैं बल्कि ब्ल्यू फिल्में भी मुझे दिखाते हैं, चुदाई के खेल में नये नये तरीके अपनाने के लिये उकसाते हैं, उनके कहने पर मैंने कई बार चुदाई के मामले में काफी मौज मस्ती की है, वे मेरी इस आदत का कभी बुरा नहीं मानते बल्कि खुश होते हैं।

हमने इस शहर में जो घर लिया है, इसके दो हिस्से हैं, जिसमें से एक में हम लोग रहते हैं और दूसरे हिस्से में एक अन्य नव दम्पति रहते हैं, उन दोनों के नाम नवीन और शीनू है, नवीन किसी ऑफिस में काम करते हैं, वे सुबह दस बजे घर से निकलते हैं और शाम को पाँच साढ़े पांच बजे के बीच वापस आते हैं, हाँ.. कभी कभी उन्हें भी दौरे पर बाहर भी जाना पड़ता है।

शीनू काफी सीधी-सादी युवती है, उसके साथ कुछ ही दिनों में मेरी अच्छी दोस्ती हो गई, हम लोग आपस में हर तरह की बातें कर लेती हैं, शीनू वैसे तो काफी संकोची स्वभाव की है लेकिन लड़कियाँ एक दूसरे को घर-बाहर की हर बात बता देती हैं, यही हाल शीनू का है, वह मुझे अपने परिवार की सारी बातें बता देती है, यहाँ तक कि हम दोनों अपनी सेक्स लाइफ के बारे में भी खुल कर बातें कर लेती हैं।

एक दिन शीनू ने मुझे बताया कि उसके पति नवीन को व्हिस्की पीने का शौक है और नशे में होने के बाद वे उसे काफी रात तक परेशान करते रहते हैं।

यह बात सुन कर मुझे उत्सुकता हुई, मैं उसे कुरेदने लगी कि वह इस बारे में और खुल कर बताए।

काफी कहने के बाद आखिरकार शीनू बताने को तैयार हुई, वह बोली- ये चाहते हैं कि हम लोग कमरे की लाईट जला कर पूरे नंगे होकर चुदाई करें, इतना ही नहीं, वे मुझे भी शराब पीने की भी जिद करते हैं, ताकि मैं भी उनकी तरह बेशर्म हो जाऊँ, कई बार ये मुझसे अपना लौड़ा चूसने को भी कहते हैं, लेकिन लौड़ा चूसना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, लौड़ा चूसने में मुझे कई बार उबकाई आ जाती है।

शीनू ने बातों बातों में यह भी बताया कि नवीन का लौड़ा काफी मोटा और लम्बा है, चुदाई के दौरान वे काफी देर से झड़ते हैं, जितनी देर में वे एक बार झड़ते हैं, उतनी देर में शीनू दो बार झड़ जाती है।

‘मेरे पति ॠषभ की आदत उलटी है!’ शीनू की देखादेखी मैं भी बताने लगी- उन्हें अपना लौड़ा पिलाने में उतना मजा नहीं आता जितना की मेरी चूत चूसने में आता है, मुझे चित लिटा कर जब वे मेरी चूत पर जीभ फ़ेरते हैं और मेरी फांकों को अपने होंठों में दबा कर चूसते हैं तो मेरा पूरा बदन गर्म हो जाता है, यदि मर्द चूत को मुँह में रख कर औरत के साथ मुख मैथुन करे तो वाकई उसे बहूत मजा आता है।

शीनू बोली- संगीता तू कितनी खुश किस्मत है कि तेरा पति तेरी चूत को मुँह से चाटता और प्यार करता है, काश मेरे पति भी ऐसे होते, लेकिन उनकी निगाह में तो बीवी की चूत की सिर्फ इतनी ही अहमियत है कि उसे अपने डण्डे जैसे लौड़े से बुरी तरह ठोका पीटा जाये!

‘तू इतना निराश क्यों हो रही है शीनू?’ मैंने शीनू के गले में अपनी बाँहें डाल कर उसे अपने से चिपटाते हुए कहा- तेरी चूत चटवाने की ज्यादा इच्छा हो तो किसी दिन अपने ॠषभ से तेरी यह इच्छा पूरी करवा दूँ, बोल?

मेरी बात पर शीनू हंस कर रह गई।

लेकिन मैंने जब से उसके मुँह से यह सुना था कि उसके पति का लौड़ा काफी मोटा और लम्बा है और वह काफी देर से झड़ता है तब से मेरे मन में बार बार यह विचार पैदा हो रहा था कि काश एक बार किसी तरह मुझे नवीन का लौड़ा देखने को मिल जाये।

संयोग से कुछ दिन बाद ही मेरी यह इच्छा पूरी हो गई, शीनू ने एक दिन मुझे बताया कि उसकी शादी कि सालगिरह है और नवीन एक स्कॉच की बोतल लेकर आया है, वह रात में लाईट जला कर चुदाई भी करना चाहता है।

यह सुन कर मैंने शीनू को समझाया कि एक अच्छी बीवी की तरह आज की रात उसे यह सब करना चाहिये, जो कि उसका पति चाहता है।

मेरी बात शीनू की समझ में आ गई, वह बोली- तू ठीक कह रही है संगीता, पति को जिस चीज में ख़ुशी मिले औरत को वही काम करना चाहिये, मैंने सोच लिया है कि आज मैं स्कॉच भी पीऊँगी और इनके साथ खुल कर चुदाई भी करुँगी, आज मैं इनको पूरी तरह खुश कर देना चाहती हूँ।

शीनू की बात सुन कर मेरा दिमाग दौड़ने लगा, मैंने सोचा कि आज नवीन और शीनू अपने कमरे में लाईट जला कर चुदाई करेंगे, तो आज नवीन का लौड़ा देखने का काफी अच्छा मौका है।
यह इच्छा काफी दिन से मेरे मन में अंगडाई ले रही थी, लेकिन उसके पूरा होने का वक्त आज आया था।
शा
म को शीनू और नवीन घूमने चले गए, बाहर से पिक्चर और खाना खाने के बाद लगभग दस बजे वे लोग वापस आए, मैं उनके इन्तजार में अभी तक जाग रही थी।

शीनू और मेरे बैडरूम के बीच में सिर्फ एक खिड़की थी, जो बंद रहती थी लेकिन दूसरी तरफ लाईट जलती हो तो खिड़की की दरार से दूसरी और दिख जाता था, मैंने सोच लिया था कि मैं इसी दरार का फायदा उठाऊँगी।

करीब साढ़े दस बजे मैंने अपने कमरे की बत्ती बुझा दी और खिड़की के पास जम गई।

जैसे ही मैंने दरार से झाँका तो पता चला कि शीनू और नवीन के प्यार का खेल शुरू हो चुका है।
शीनू ने पूरा मेकअप कर रखा था और वह काफी सुन्दर लग रही थी, इस समय वह अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी और केवल लाल रंग का पेटीकोट और काले रंग की डिजाइनर ब्रा उसके बदन पर शेष थी।

उधर नवीन के जिस्म पर केवल अंडरवीयर था, उसका विशाल सीना और जाँघों के जोड़ पर उसका उठा हुआ अंडरवीयर साफ़ चमक रहा था।

नवीन ने पहले शीनू को अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठों को चूसने लगा, जवाब में शीनू भी उसे चूमने लगी।

कुछ देर बाद वे पूरी तरह नंगे हो कर चुदाई में लग गये।

मैं हैरानी से नवीन के बदन की मजबूती देखती रह गई।
शीनू का कहना बिल्कुल सच था कि उसका पति देर से झड़ता है, उसके जबरदस्त धक्कों से शीनू तो थोडी देर में ही झड़ गई थी, लेकिन नवीन फिर भी उसकी चूत में लौड़ा डाले पड़ा रहा और अपनी बीवी की चूचियों को मसलता रहा और उसके होंठों को चूसता रहा।

कुछ ही देर में शीनू दोबारा गर्म हो गई और अपने पति के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी, नवीन जोर जोर से लौड़ा उसकी चूत में अन्दर बाहर करता रहा।

करीब बीस मिनट की रगड़ाई के बाद दोनों बारी बारी से झड़ गये।
अब शीनू के साथ साथ नवीन भी पूरा संतुष्ट नजर आ रहा था।

नवीन का दमदार लौड़ा देख कर मेरा मन लालच में पड़ गया, दूसरे मर्दों के प्रति मेरे विचार काफी खुले हुए थे, क्योंकि मेरे पति ॠषभ जैन ने शादी के तुरन्त बाद से ही मुझे अपने दोस्तों से मिलवाना शुरु कर दिया था।
वे लोग ना केवल मेरे साथ हंसी मजाक करते थे बल्कि कई बार तो मेरे बदन से भी छेड़छाड़ कर लेते थे, यह सब चोरी छिपे नहीं होता था बल्कि खुले आम होता था और मेरे पति भी उस वक्त मौजूद रहते थे।
मेरे पति की तरह उनके सारे दोस्त भी काफी खुले दिमाग थे, ॠषभ उन लोगों की बीवियों के बदन पर खुलम-खुल्ला हाथ डाल देते थे, पर वे लोग बुरा नहीं मानते थे।

चूँकि मैं अपने पति ॠषभ का स्वभाव जानती थी, इसलिए नवीन के लौड़ा को देखने के बाद मैंने मन में ठान लिया था कि मैं ॠषभ को सब कुछ बता कर नवीन से चुदवाऊँगी।
मैंने यह भी सोच लिया था कि मैं किसी ना किसी बहाने शीनू को ॠषभ से चुदवाने के लिए राजी कर लूँगी, ताकि ॠषभ को यह सारा खेल एक तरफा ना लगे।

अपनी योजना पर चलते हुए मैंने शीनू के साथ सेक्सी मैगजीनों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया। बीच बीच में मैं उसे बताती रहती कि मेरे पति ॠषभ उसे बहुत पसन्द करते हैं और मुझसे कहते रहते हैं कि शीनू कितनी सेक्सी औरत है।

यह सब सुन कर शीनू काफी खुश हो जाती थी, कई बार वह मजाक में कहती- संगीता, अगर मैं तेरे पति ॠषभ को फांस लूँ तो तू क्या करेगी?

‘करना क्या है, मेरी जान?’ मैं भी हंस कर बोल देती- तू ॠषभ को फंसाएगी तो मैं तेरे पति नवीन को फंसा लूँगी, कितना मोटा और सख्त लौड़ा है नवीन का, कितना मजा आयेगा जब तेरे पति मुझे अपनी जाँघों के बीच दबायेंगे और मेरे पति तेरी चुसवाने को बैचैन चूत को जम कर चूसने के बाद जम कर चोदेंगे। समझ ले, उसके बाद तो हम लोगों की दोस्ती और भी पक्की हो जायेगी।

इतना कह कर मैं और शीनू एक दूसरे से लिपट जाती।

चूँकि मैं अपने पति ॠषभ का स्वभाव जानती थी, इसलिए नवीन के लौड़ा को देखने के बाद मैंने मन में ठान लिया था कि मैं ॠषभ को सब कुछ बता कर नवीन से चुदवाऊँगी।
मैंने यह भी सोच लिया था कि मैं किसी ना किसी बहाने शीनू को ॠषभ से चुदवाने के लिए राजी कर लूँगी, ताकि ॠषभ को यह सारा खेल एक तरफा ना लगे।

अपनी योजना पर चलते हुए मैंने शीनू के साथ सेक्सी मैगजीनों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया। बीच बीच में मैं उसे बताती रहती कि मेरे पति ॠषभ उसे बहुत पसन्द करते हैं और मुझसे कहते रहते हैं कि शीनू कितनी सेक्सी औरत है।

यह सब सुन कर शीनू काफी खुश हो जाती थी, कई बार वह मजाक में कहती- संगीता, अगर मैं तेरे पति ॠषभ को फांस लूँ तो तू क्या करेगी?

‘करना क्या है, मेरी जान?’ मैं भी हंस कर बोल देती- तू ॠषभ को फंसाएगी तो मैं तेरे पति नवीन को फंसा लूँगी, कितना मोटा और सख्त लौड़ा है नवीन का, कितना मजा आयेगा जब तेरे पति मुझे अपनी जाँघों के बीच दबायेंगे और मेरे पति तेरी चुसवाने को बैचैन चूत को जम कर चूसने के बाद जम कर चोदेंगे। समझ ले, उसके बाद तो हम लोगों की दोस्ती और भी पक्की हो जायेगी।

इतना कह कर मैं और शीनू एक दूसरे से लिपट जाती।

इसी बीच मेरे पति घर आये, मैंने उन्हें भी बताया की शीनू उन्हें बहुत पसंद करती है और जब भी मैं उसे बताती हूँ कि चुदाई के समय आप किस तरह से मेरी चूत को चूसते हैं तो वह बुरी तरह उत्तेजित हो जाती है।

ये बातें सुन कर ॠषभ बहुत खुश हुए और कहने लगे- डार्लिंग, शीनू है तो काफी खूबसूरत, किसी रोज उसे पटा कर बैडरूम में ले आओ तो उसे अपने लौड़ा का मजा चखा दूँ!

‘शीनू तो कब से बैचैन है डार्लिंग!’ मैंने अपने पति से झूठमूठ कहा- वह कई बार कह चुकी है कि किसी रोज अपने हसबेंड से मेरा क्रॉस करवा दो, लेकिन मैंने हामी नहीं भरी, आखिर तुमसे पूछना भी तो जरूरी था।

‘कमाल करती हो डार्लिंग!’ ॠषभ बोले- ऐसे कामों के लिये भी पूछने की जरूरत होती है क्या? अरे यार, शीनू जैसी मांसल और गठीली औरत को चोदने के लिये तो मैं आधी रात को घने जंगल तक में जा सकता हूँ।

‘तो फिर ठीक है, मैं आज ही शीनू को हरा सिगनल दे देती हूँ!’ मैंने कहा- लेकिन डीयर, मेरी भी एक शर्त है, अगर तुम शीनू के साथ धक्कम धक्का करोगे तो मैं भी उसके हसबेंड नवीन के साथ चुदाई का मजा लूँगी, तुम्हें इसमें कोई आपत्ति तो नहीं?

‘कमाल करती हो संगीता, यह भी कोई आपत्ति करने लायक बात है? अरे यार, हम पढ़े लिखे और मॉडर्न लोग हैं, हमें अपना जीवन पूरी आज़ादी के साथ गुजारने का हक़ है, मेरी तरफ से तुम्हें पूरी आज़ादी है कि तुम नवीन के साथ जम कर चुदाई का मजा लूटो, चार दिन की यह जवानी है, हमें इसका भरपूर मजा लेना चाहिये।’ ॠषभ बोले।

फ़िर तो मैं नवीन को फंसाने को पूरी तरह तैयार हो गई, नवीन दो तीन दिन बाद ही दौरे पर चले गये, संयोग से इसी बीच शीनू की माँ की बिमारी का फोन आ गया, उसे फौरन अपने मायके जाना पड़ा, जाते जाते वह अपने पति के खाने पीने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर डाल गई जिसे मैंने ख़ुशी ख़ुशी मान ली।

अगले दिन मैंने अपनी कामवाली को पूरे दिन कि छुट्टी दे दी, वह रविवार का दिन था, नहा धोकर मैंने जींस और स्लीवलेस शर्ट पहनी और होंठों पर कॉफी कलर की लिपिस्टिक लगा ली।

दोपहर में नवीन को मैंने अपने घर पर बुला कर खाना खिलाया, खाना खाते समय वह बार बार कनखियों से मुझे देख रहा था, मैं समझ गई मेरी खूबसूरती उसे घायल कर दे रही है।

जब वह खाना खाकर जाने लगा तो मैं उससे लिपट गई और बोली- मेरा जी बहुत घबरा रहा है नवीन, प्लीज, इस वक्त मुझे छोड़ कर मत जाओ।

उससे लिपटते वक्त मैंने इस बात का खास ध्यान रखा था कि ब्रा में तनी हुई मेरी गोल गोल चूचियाँ नवीन के सीने से अच्छी तरह सट जायें।

मेरी बात मान कर नवीन वहीं बैठ गया, उसने इस समय केवल बनियान और लुंगी पहन रखी थी।
मेरा मन हो रहा था कि उसके ये दोनों कपड़े हटा कर उसके लौड़े को बाहर निकाल लूँ और उसे जी भर कर प्यार करूँ।

नवीन मुझे एकटक देख रहा था, मैंने उसकी ओर मादक निगाहों से देख कर अपनी आँख मार दी।
अब तो नवीन को जोश आ गया, शायद उसे मेरे मनोभावों का अंदाज हो गया था, उसने अपनी बनियान उतार दी और मेरे पास आकर बैठ गया, मैं अपनी हथेली उसके सीने पर फिराने लगी, फ़िर अचानक मैंने उसे चूम लिया।

फिर तो नवीन पूरा मर्द बन गया, उसने मेरी शर्ट जींस ब्रा और पेंटी तक उतार डाली और अपनी लुंगी भी खोल फेंकी।
मैंने जैसे ही उसकी दोनों जाँघों के बीच लटकते उसके लण्ड को देखा तो अपने नंगेपन का ख्याल छोड़ कर मैं उस पर झपट पड़ी और अपने हाथों से उसे दबोच लिया, फिर उसे अपने होंठों से चूमती चाटती हुई मैं चटखारे लेने लगी।

फ़िर हम दोनों जोरदार धक्का मुक्की में लग गए, कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन नवीन अभी भी पूरी तरह मजबूती से मैदान में डटा हुआ था, वह मेरा पानी छुट जाने के बाद भी मेरी चूचियों को प्यार से सहलाता रहा और मेरी जाँघों और मेरी चूत को हौले हौले मसलता रहा।
कुछ देर में मेरे बदन में दोबारा आग लग गई, मैं भी नवीन के लण्ड से खेलने लगी।

फिर तो नवीन ने मुझे दोबारा चित कर दिया और मेरी चूत में अपना लौड़ा डाल दिया।
मैं उछल उछल कर उसका उत्साह बढ़ाने लगी और वह कमर हिला हिला कर मेरी चूत पर जोरदार धक्के मारने लगा, मैंने अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन नवीन के लौड़ा ने मेरी कसी हुई चूत में ऐसी खलबली मचा दी थी की थोडी ही देर में मैं दोबारा झड़ गई,

इस बार नवीन ने मेरा पानी छूटने के बाद भी मुझे छोड़ा नहीं और मेरी चूत पर जोर जोर से धक्के मारता चला गया। शायद वह भी झड़ने के करीब आ चुका था, कई जोरदार धक्के मारने के बाद वह अपने आठ इंच के लौड़ा को जड़ तक मेरी चूत में घुसा कर मेरे ऊपर औंधा पड़ गया, उसके बदन में काफी जोर की सिहरन हुई और उसके साथ ही उसके लौड़े ने मेरी चूत में गर्मागर्म लावा उगल दिया।
मैंने खुशी में उसको अपनी मांसल बाँहों में बाँध लिया और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार कर दी।

अब मेरा मकसद तो पुरा हुआ, लेकिन मुझे अब अपने पति से किया वायदा पूरा करना था।
इसलिए कुछ दिन के बाद जब नवीन घर में नहीं था, मैंने उसकी बीबी शीनू को अपने घर बुला कर ॠषभ के हवाले कर दिया, हालांकि काफी दिनों से शीनू का मन ॠषभ के साथ चुदाई का आनन्द लेने का था क्योंकि मैंने उसे बता रक्खा था कि ॠषभ को औरत की चूत चूसने और चाटने का महारत हासिल है।
लेकिन कुछ तो वह शर्माती थी और कुछ वह अपने पति से डरती थी, इसलिए मैंने नवीन के बाहर ज़ाने पर ही रंगारंग कार्यक्रम का प्रोग्राम रखा था और शीनू की शर्म दूर करने के लिये मैंने उससे वायदा किया था कि जिस वक्त ॠषभ उसके साथ चुदाई करेगा, मैं उसके करीब मौजूद रहूँगी।

आपने कभी किसी औरत के बारे में नहीं पढ़ा या सुना होगा कि कोई औरत खुद किसी पराई औरत को अपने पति के बिस्तर पर ले जाकर उन दोनों का यौन सम्बन्ध कराया हो?
लेकिन मैंने खुद इस काम को अंजाम दिया, अपनी पड़ोसन शीनू को ॠषभ के बिस्तर पर ले जाकर मैंने खुद अपने हाथों से बारी बारी उन दोनों के कपड़े खोले, फिर मैं अपने कपड़े भी उतारने लगी।

चूँकि मैंने ॠषभ को बता रखा था कि शीनू को अपनी चूत चुसवाने का काफी शौक है,लेकिन उसका पति नवीन उसकी चूत चाट कर उसे वह सुख नहीं देता, अतः शीनू के नंगे होते ही ॠषभ उसकी कमर की ओर चेहरा करके लेट गया और दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर जमा कर उसकी चूत चूसने लगा, फिर उसने अपनी जुबान बाहर निकाली और शीनू की मलाई जैसी त्वचा पर फिराने लगा।

चूत पर ॠषभ की जुबान लगते ही शीनू बेचैन हो गई, वह दोनों हाथों से ॠषभ के सिर और चेहरे को सहलाने लगी और गांड उचका कर अपनी चूत उसके होंठ पर छुआने लगी। इससे ॠषभ का जोश बढ़ता चला गया, उसने शीनू की चूत की सुडौल मोटी मोटी फांकों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चोकलेट की तरह चबाने लगा।

शीनू का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया, वह अपने पूरे बदन को बुरी तरह तोड़ने मरोड़ने लगी।
मैं औरत होने के नाते उसकी बैचैनी को समझ सकती थी, इस वक्त तक मैंने खुद को भी पूरी तरह नंगा कर लिया था, उसी हालत में मैं शीनू के पास जाकर घुटनों के बल बैठ गई और उसकी चूचियों को हाथ से धीमे धीमे सहलाने लगी।

शीनू की चूचियाँ उत्तेजना के कारण पूरी तरह तन गई थी और उसके दोनों निप्पल भी सख्त हो गये थे, मैं झुक कर उसकी चूचियों पर जुबान फिराने लगी, फिर उसके एक निप्पल कों दांतों के बीच रख कर काटने लगी।

‘हाय संगीता, कितनी अच्छी है तू!’ शीनू ने सिसिया कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया- तेरे जैसी प्यारी सहेली मुझे पहले क्यों नहीं मिली?

तभी ॠषभ का हाथ मेरे कूल्हों पर आ गया और गांड को टटोलते टटोलते उन्होंने एक अंगुली मेरी चूत में घुसेड़ दी, उनकी इस हरकत से मैं भी उत्तेजित हो गई और पलट कर उन्हें देखती हुई बोली- अंगुली से काम नहीं चलेगा डार्लिंग, मुझे तो तुम्हारी तीसरी टांग चहिये, यही मेरी प्यास बुझा पायेगी।

‘सॉरी, डार्लिंग, मेरी तीसरी टांग की बुकिंग तो आज शीनू ने करवा रखी है, अगर तीसरी टांग से मैंने तुम्हारी सेवा की तो बेचारी शीनू प्यासी रह जायेगी, मैं नवीन तो हूँ नहीं जो की खुद झड़ने के पहले औरत को दो दो बार झडवा दूँ।’ ॠषभ बोले और मेरी ओर देख कर मुस्कुराने लगे।

मैं ॠषभ का यह कहने का मतलब तुरन्त समझ गई, दरअसल नवीन के साथ चुदाई करने के बाद अपने पति से उसकी मर्दानगी और मजबूती की काफी तारीफ़ की थी, इसी लिये उन्होंने इस समय यह बात मजाक में कही थी लेकिन उनके इस नहले का जवाब मैंने दहले से दिया, मैं बोली- डार्लिंग, तुम नवीन भले ना हो, लेकिन उससे कम भी नहीं हो, मैं जानती हूँ कि तुम अपनी पर उतर जाओ तो दो क्या, चार चार औरतों को पानी पिला सकते हो।

‘थेंक यू, मेरी जान, तुम्हारी इस बात ने मेरा जोश दस गुना बढ़ा दिया है।’ ॠषभ बोले।

‘अब तुम मेरा कमाल देखो, मैं पहले शीनू को चोदूँगा, फिर तुम्हारी चूत की आग ठंडी करूँगा।’ इतना कह कर उन्होंने शीनू की दोनों टांगों को उपर की ओर मोड़ दिया और उसकी चूत को चुटकियों से मसलने लगे।

ॠषभ के मुँह से चूत चटवाने का स्वाद ले चुकने के कारण उसकी चूत पहले ही गीली हो चुकी थी अतः कुछ देर हाथ से मसलने के बाद ज्यों ही अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल कर चोदना शुरू किया, वह बार बार काँपने लगी।
उसकी हालत देख कर मैं समझ गई कि वह ज्यादा देर तक ॠषभ की मर्दानगी का सामना नहीं कर पायेगी और आखिरकार यही हुआ, ॠषभ ने मुश्किल से बारह चौदह धक्के ही मारे होंगे की शीनू बुरी तरह सिसियाती हुई उनसे चिपक गई, उसकी हालत दीवार पर चिपकी छिपकली जैसी दिख रही थी।

शीनू को अपने से अलग करने के बाद ॠषभ ने मेरी जाँघों के बीच आसन लगा लिया, काफी देर तक लौड़ा चूत की आपस की लड़ाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये।

उस दिन के बाद से शीनू और मेरा एक दूसरे के पतियों के साथ चुदाई का सम्बन्ध बराबर बना हुआ है, जब भी हम में से किसी का पति किसी काम से बाहर जाता है तो उसकी बीवी दूसरे के पति से अपनी चूत की गर्मी शांत करती है, आपसी सहमति का यह खेल पिछले दो सालों से चल रहा है, केवल शीनू के पति नवीन इस पूरी हकीकत से अनजान है, वह यही समझता है कि मैंने उसके साथ सम्बन्ध बना रखे हैं, लेकिन उसकी बीवी शीनू बिल्कुल सीधी सादी और शरीफ है।

अभी हमने नवीन को हकीकत बताया नहीं है, शीनू डरती है उसके बताने से कोई गड़बड़ ना हो जाये।

चांदनी रात में मिली कमसिन चूत - Chandni Raat Me Mili Kamsin Choot

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यह कहानी मेरे ससुराल की है, जहाँ एक रात मैंने उस गाँव देहात में छत पर चाँदनी रात में रसीली चटपटी चूत का आनन्द लिया।
मेरा नाम प्रशान्त है और मैं आप लोगों को यह अनुभव अपने शब्दों में पात्रों के नामों में कुछ फेर बदल के साथ सुना रहा हूँ जिससे किसी की गोपनीयता भंग न हो और आपकी छुपी अन्तर्वासना जाग उठे।

मैं ससुराल अक्सर आता जाता रहता हूँ क्योंकि मेरे साले रितेश की बीवी अत्यंत खूबसूरत और दिल-चोर हसीना है।
ऊपर वाले ने उसे फुर्सत से दिलों का कत्ल करने के लिए बनाया है, उसके आकर्षक, गठीले पर मुलायम छत्तीस इंच के चूतड़ों का प्लेटफार्म जिन्हें मटकते देख कर लंड से पानी अपने आप निकलने लगता है, उसकी छ्त्तीस की ही चूचियाँ, जिनको हिलते देख कर कच्छे की पूरी कायनात हिल जाती है और जिसकी अठ्ठाइस की कंटीली कमर देख दीवाने हो जाते हैं हर उम्र के लोग।

ऐसी सलहज मीनाक्षी को चोदने के लिए कौन नहीं दीवाना हो जाएगा।
तो उस दिन मैं शाम को फिर से इस शादीशुदा पर हुस्न की मलिका, चूत की रानी को चोदने की आस में ससुराल गया।
सच तो यह है कि उसका पति रितेश भी करियाने की दुकान पर दिन भर नून-तेल बेचता, एकदम कछुए जैसा मोटा और भोंदू हो गया है, शादी के तीन साल बाद तक उसे कोई बच्चा नहीं हुआ और होता भी कैसे, दुकान से आकर वो जवानी का ताला खोलता ही नहीं, थक कर सो जाता है और खर्राटे लेने लगता है।
उस रात पूर्णिमा की चाँदनी थी और मेरा बिस्तर छत पर ही लगाया था मीनाक्षी ने।

दोनों पति पत्नी भी छत पर ही बने एक कमरे में सो गये थे।
मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं बस उपर वाले से सही मौके पर चूत देने की दुआ कर रहा था कि मीनाक्षी मुझे पेटीकोट और ब्लाउज में कमरे से बाहर निकल के पेशाब करने के लिए आती दिखाई दी।

मैंने अपनी आँखें मूंद लीं, रात को वो बेधड़क पेटीकोट उठा कर मूतने जा रही थी, उसकी चिकनी कदलीतरु सरीखी जंघाएँ व संकीर्ण कटि प्रदेश देख कर मेरा लौड़ा एकदम उन्नत हो रहा था कि उसने पेटीकोट पूरा उपर उठा दिया।

उफ्फ !! बिना बालों वाली हसीन चूत देख कर मेरा जी ललचा गया, वो मेरे जगने से बेखबर मेरी तरफ अपने खूबसूरत विशाल कूल्हे करके मूत रही थी।
मूतने से ‘शर्र शर्र’ सीटी की आवाज सी मेरे कानों में टकरा रही थी और लंड को चौकन्ना कर रही थी।
यह सब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो रहा था, मैं दबे पांव उठा और जाकर उसे मूतते हुए ही दबोच लिया। वो आधा ही मूत पाई थी कि मैंने उसे पीछे से पकड़ कर बैठे हुए मुद्रा में ही गोद में उठा लिया और वो अपना पेशाब ना रोक पाई, मेरे ऊपर मूतती मुझे भिगोती चली गई।

इससे पहले कि वो चिल्लाती मैंने अपने होंठ उसके होंटों में सटा के चुम्बन करना शुरू कर दिया।
वो आश्चर्यचकित भयभीत और आनन्दमयी हो गयी थी, ऐसी कल्पना शायद उसने की नहीं थी।

मैंने उसे अपनी खाट पर लाकर लिटा दिया, उसका पेटीकोट उलट गया था और भीगी चूत मेरे सामने थी।
मैंने पेशाब लगा होने की परवाह न की और उसके जांघों के बीच घुस गया, अपनी जीभ से उसके जांघों के बीच चूत के होटों में मुँह लगाकर जीभ ऊपर नीचे करते हुए मैंने उसके दोनों चूचे पकड़ लिए।

‘वह आह्ह्ह ! जीजा जी ! प्लीज ऐसा ना करिये !’ कह कर अपनी गर्दन आनन्द के मारे दायें बाएं कर रही थी और बदन ऐंठ रही थी। मैंने अपनी मुखमैथुन क्रिया जारी रखी।

उसका गुप्तांग मारे पानी पानी के लबालब किसी प्याले की तरह भर चुका था और मैं प्याले का रस किसी आदी शराबी की तरह पी रहा था।
हम दोनों ही वासना के नशे में बह रहे थे और वो पांच मिनट के गहन मुखमैथुन क्रिया के बाद मेरे मुख में स्खलित होकर निढाल पड़ गई।
इतना सुखद अनुभव उसकी काम जीवन में शायद ही कभी हुआ हो।

उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और थोड़ी देर के लिए शिथिल पड़ गई पर मुझे चैन कहाँ था, मैंने अपना लंड जो कि फूल कर लौकी की तरह हो चुका था, उसके मुख में दे दिया।

वो आराम से किसी लाइमचूस की तरह चूसती रही और मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा।
अब मैंने दो उंगलियाँ निकाल कर बड़ी वाली उसकी गाण्ड में और तर्जनी उंगली उसकी चूत में करनी शुरु कर दी।
सच तो यह है कि इस तरह से चूत से निकले कामरस से गाण्ड में भी चिकनाई आ गई थी।

मैंने मीनाक्षी की गाण्ड की सेवा पहले लेने की सोची, चूंकि कुँवारी इंडियन गाण्ड भी काम जीवन को परम सुख देती है।
मैंने उसकी टांगें पकड़ कर खटिया के किनारे खींच लिया, अब उसकी गांड खटिया के सहारे थी और दोनों पैर मेरे कंधे पर !

मैंने कठोर मोटे लंड का सुपारा उसकी गाण्ड के नन्हे संकीर्ण छेद पर रख कर उसकी दोनों चूचियाँ मसलनी शुरु कीं, जैसे ही मैंने उसकी चूचियों को जोर से मसला, वो छटपटाई और कराही, उसी दौरान एक तेज धक्के ने लंड के मोटे सुपाड़े को गाण्ड की गहराई में पहुँचा दिया।

मैंने अपने होंटों से उसके होटों को बंद कर दिया था।
चुम्बन करते हुए और स्तन मर्दन करते हुए मैंने उसकी गाण्ड की गहराई में उतरना जारी रखा और फिर पूरे जोश से गाण्ड को पंद्रह मिनट तक चोदा।
जब मुझे लगा कि मैं अब उसकी गांड में ही स्खलित हो जाऊँगा तो मैंने लंड को बाहर खींच थोड़ी देर के लिए उसके मुह में दे दिया। उसने फिर उसे किसी लॉलीपॉप की तरह चूषण करने में जरा भी हिचक ना दिखाई।

अब मैं उसकी योनि की थाह लेने को तैयार था, उसे इतना मोटा लंड कभी नसीब न हुआ था और वो आनन्द की पूर्वानुभूति में अपनी आँखें बंद करके अपने को समर्पित कर चुकी थी।

मैंने उसकी गाण्ड तले तकिया रख चूत को पोजिशन में लिया और ऊपर आकर मिशनरी स्टाइल में उसके जांघों के बीचोंबीच लण्ड को रास्ता दिखाया।
चमकती चाँदनी में चाँद सा हुस्न और जवान हसीना को चोदने के अनुभूति में मेरा बदन का रोम रोम खड़ा था।

मैंने हल्के हल्के उसकी चूत में लंड को उतारना शुरु किया और वो कराहते हुए अपने गर्दन को ऐंठने लगी, मानो कोई उसे चीर रहा हो बीचो बीच।
बीस मिनट तक मैं उसे चोदता रहा इस तरीके से और वो कराहती रही पर धीरे धीरे उसकी सहभागिता बढ़ती चली गई और उसने अपने नितम्ब ऊपर नीचे करके ताल-लय में चुदाई करवानी शुरु कर दी।

मैंने उसे अपने ऊपर ले लिया और उसके चूचे पकड़ कर मसलते हुए नीचे से पचाक पचाक पचाक धचाक उसकी चूत में झटके मारने शुरु किये, वह खुद ही कमर लचका लचका कर मुझे चोद रही थी।

उसने मुझे गहरे चुम्बन देते हुए चोदा और आखिर मैं स्खलित हो ही गया क्योंकि उसने अपनी स्पीड लगातार बेतहाशा बढ़ा दी थी। उसने अपनी वीर्य से भरी लबालब चूत से जिसमें कि उसका खुद का भी कामरस मिला हुआ था, मेरा लण्ड निकाल कर मेरे मुँह पर रख दी।
मैं उसे पी गया और फिर एक नई ताजगी प्राप्त की।

उस पूरी रात सुबह तक मैंने कइ बार चाँदनी रात में चूत विहार किया।

चन्दा की गाँड़ ने दीवाना बना दिया - Chanda Ki Gaand Ne Deewana Bna Diya

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एक बार मैं फिर हाजिर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर। दरअसल मैं जिस कंपनी के लिए काम करता हूँ वो एक प्रोफेशनल जिगोलो और एस्कोर्ट सुविधा देने वाली कंपनी है।

एक बार मेरे ऑफिस से फोन आया कि ग्रेटर कैलाश की एक महिला को चुदाई की सर्विस देनी है जिसके लिए मुझे शाम के छः बजे जाना था। हालाँकि मैं एक दिन पहले ही गोवा से बंगलोर ट्रेन सर्विस देकर आया था लेकिन यह असाइनमेंट मैं नहीं छोड़ना नहीं चाहता था क्योंकि यह ग्रेटर-कैलाश का था और हाई-प्रोफाइल को सर्विस देने का मजा ही कुछ और है। यही सोच कर मैंने हामी भर दी।

ठीक समय पर पहुँच कर घंटी बजाई तो सामने एक 38-40 साल की महिला ने मेरा स्वागत किया। देखने में ठीक-ठाक ही थी, चूचियाँ भी तनी थी लेकिन उम्र का तकाजा था, जिसे वो वह चाहकर भी छुपा नहीं सकती थी।

खैर मैं अंदर दाखिल हुआ, घर देख कर ही पता चल गया कि महिला ने भले ही चुदवाने के लिए मुझे बुलाया है लेकिन ठाट-बाट सब अमीरों वाले हैं। थोड़ी देर इधर उधर के बातों में उसने अपना नाम चंदा बताया। वो एक विधवा है और उसके पति को गुजरे हुए तक़रीबन दस साल हो गए हैं तब से आज तक वो प्यासी है, जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो आज उसने हमारी सर्विस का याद किया। हमारी सर्विस का पता अक्सर किटी पार्टियो में एक से दूसरे तक पहुँच जाता है।

थोड़ी देर बात करने के बाद उसने पूछा- क्या पियोगे?
और मैंने भी हमेशा की तरह बोल दिया- आप जो लेंगी, वही मैं भी ले लूँगा।

आंटी दो ग्लास में विस्की लेकर आई जिसे हम धीरे धीरे पीने लगे और इसी बीच उन्होंने बताया कि उनकी एक 18 साल की बेटी है जो होस्टल मैं रह कर बी ए कर रही है और अक्सर छुट्टी में ही घर आती है। उनका कोई भी रिश्तेदार दिल्ली में नहीं है। कभी साल में एक आध बार कोई आ गया तो ठीक, वरना वो अकेली ही रहती हैं।

फिर मैंने ही शुरु किया क्योंकि मैं तो एक असाइनमेंट पूरा करने आया था।

विस्की पीते हुए मैंने चंदा को अपनी तरफ खींचा तो वो बिना किसी विरोध के मेरे करीब आ गई। फिर मैं अपनी ड्रिंक का ग्लास वहीं मेज़ पर रख कर चंदा के गुलाबी होंठ पीने लगा। मेरे हाथ अपना करतब दिखाते हुए उसकी चूचियों को मसल रहे थे। कभी चंदा मेरा होंठ पीती तो कभी मैं उसके होंठ पीता। इस तरह लगभग एक घंटा तक हम एक दूसरे से चिपक कर चूमा-चाटी करते रहे।

फिर मैं अपने कपड़े उतार कर केवल चड्डी में आ गया। मेरा ७ इंच का लंड काले नाग की तरह उछल रहा था। फिर मैंने चंदा के टॉप को उससे अलग किया तो मैं देखता रह गया क्योंकि काली ब्रा में उसकी गोरी गोरी चूचियों का कुछ अलग ही सौंदर्य था जिसे मैं देखता ही रह गया।

यह देख कर चंदा बोली- क्या देख रहे हो राजा! अब तो ये तुम्हारे हैं!
और वो हंस दी।
मैं साथ ही बोल पड़ा- रानी तुम्हारी चूचियों को देख कर तो साली किसी की भी नियत डोल जायेगी।

फिर उसे झुका कर अपने लंड को चुसाने लगा। वो एक तजुरबेकार की तरह जीभ से चाट चाट कर अलग ही मजा देने लगी। फिर 69 के पोज में आने के लिए मैंने उसे बोला तो उसकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। उसने तुरंत अपनी जींस को अलग कर डाला। अब वो भी चड्डी में थी और मैं भी। पहले तो फिर हम एक दूसरे की बाजुओं में काफी देर तक चूमते रहे, फिर मैंने उसे 69 पोजिशन में लाते हुए चड्डी से मुक्त कर दिया, उसने भी मुझे चड्डी-मुक्त कर दिया।

अब 69 पोजिशन में वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं जीभ उसके चूत की शिश्निका को छेड़ रहा था। वो थोड़ी ही देर में झड़ गई तो मुझे थोड़ी बुरा सा जरुर लगा। फिर भी वो बोली- एक पग विस्की के बाद फिर उसमें वही जोश होगा और सच मुच ऐसा ही हुआ। वो फिर तैयार थी, बल्कि पहले से ज्यादा जोश उसमें आ गया था, मुझे भी संतुष्टि हुई कि अब ये साली ज्यादा मजा और माल देगी। थोड़ी देर तक चूमा-चाटी के बाद मैंने सीधे उसकी चूत को अपने लंड से खोलने का मन बना लिया, साथ ही उसकी चूत पर अपने लंड को रगड़ते हुए एकदम जोर से उसकी बुर में पेल दिया। चंदा शायद मेरे हमले को तैयार नहीं थी और उसके मुंह से निकल गई- अह्ह ………….अह्ह! प्लीज धीरे धीरे चोदो! दर्द हो रहा है!

लेकिन मेरे ऊपर इसका कोई प्रभाव न देखकर बोली- साले चूतिये! आराम से पेल! नहीं तो मेरी चूत फट जायेगी!

तो मैं थोड़ा धीमा हुआ लेकिन चोदना चालू रखा। वो भी अब सामान्य हो गई थी और अपनी कमर को उछाल-उछाल कर चुदा रही थी। यह मस्ती दो घंटे तक चली। उसके बाद उसका बदन अकड़ने लगा तो मैं समझ गया कि अब यह झड़ने वाली है। फिर मैंने अपनी गति बढ़ा दी। हम दोनों एक साथ झड़ गए, उसकी चूत की कटोरी मेरे वीर्य से लबालब हो गई।

दस मिनट तक हम एक दूसरे से चिपके रहे, उसके बाद अलग हुए तो चंदा बोली- बाथ लेने जा रही हूँ!
तो मैं बोला- मैं भी बाथ लूँगा!
इतना सुन के वो खुश हो गई और बोली- तब तो और मजा आयेगा।

हम दोनों नंगे ही बाथरूम में घुस गए और शॉवर के नीचे एक दूसरे से चिपक गए। वो मेरे शरीर में साबुन लगा रही थी और मैं उसके शरीर में!

थोड़ी देर में ही मेरा लंड फिर अपने विकराल रूप में आ गया। जिसे देख कर वो और खुश हो गई और होंठ लगा पर चूसने लगी- बिल्कुल जैसे छोटा बच्चा लॉलीपोप चूसता है।

उसने फिर चुदाई की मांग कर दी तो मैं बोला- इस बार तुम्हारी गांड में पेलना है!
वो थोड़ा डरने लगी।
फिर मैंने उसे समझाया- थोड़ा सा मुंडी घुसने के वक्त दर्द होगा फिर उसके बाद मजा ही मजा है!

थोड़ी ना-नुकुर के बाद वो तैयार हो गई। मैंने अपने लंड पर साबुन का झाग लगाया जिससे चंदा को दर्द काम हो।
बाथरूम में उसे कुतिया की तरह झुका कर उसकी गांड में पेलना चालू किया।
जैसे ही थोड़ा सा घुसा, वो दर्द से चिल्लाने लगी और गालियां देने लगी, साथ ही आगे बढ़ना चाहा, लेकिन मैंने उसकी कमर को पकड़ कर जोर का झटका मारा जिससे पूरा का पूरा लंड चंदा की गांड में था। बदले में था- वोह… वोह वो माँ …साले ने मेरी गांड फा दी… अबे साले बाहर निकाल… वोह वोह… चूतिये बाहर निकल! नहीं तो मेरी गांड फट जायेगी।

लेकिन सब सुन कर भी मैंने झटके धीरे धीरे चालू रखे।

थोड़ी देर चोदने के बाद वो सामान्य हो गई और मजे लेने लगी।

एक घंटे तक हमारा यह चुदाई का प्रोग्राम फिर चला, तब जाकर मैं भी झड़ गया।

चलने के वक्त एक दूसरे को चूम कर चल दिया इस वादे के साथ कि चंदा जब चुदने को बुलाएगी मैं हाजिर हो जाऊंगा।

यह थी चंदा की चुदाई!
लेकिन अभी तो उसकी मस्त माल बेटी जिसका नाम छवि है को चोदना बाकी है, शायद मेरी आने वाली कहानी में चुद जायेगी।
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