मेरी गरम जवानी पर भाई का कब्ज़ा - Meri Garam Jawani Par Bhai Ka Kabja

मेरी गरम जवानी पर भाई का कब्ज़ा - Meri Garam Jawani Par Bhai Ka Kabja , बहन भाई की चुदाई , भैया ने दीदी की चूत गांड को चोदा , भाई से चुद गई , सगा भाई बना चूत का दीवाना , भाई के लंड की दीवानी बहना.

हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम नेहा (बदला हुआ) है. मैं बहुत खूबसूरत हूँ और उतनी ही घुल-मिल कर रहने वाली हूँ. मेरी गांड बहुत बड़ी और सेक्सी है. मैं दिखने में भी बहुत सेक्सी हूँ. मैं अपने आपको बहुत अच्छे से बन संवार कर रखती हूँ और फैशन में रहती हूँ. मैं हमेशा सलवार सूट पहनती हूँ और जब ऑफिस जाती हूँ तो मॉडर्न कपड़े पहन कर जाती हूँ.

मैं आपको मेरे पड़ोसी भाई और मेरी चुदाई की कहानी बता रही हूँ. यह कहानी कुछ दिन पहले की है.

मेरे पड़ोस में एक भैया है उनके घर मैं जाती हूँ. वो भी बहुत मुझसे बहुत अच्छे से बात करते हैं. मैं जब भी उनके घर जाती हूँ तो वो पीछे से मेरी गांड को देखते हैं क्योंकि मैं जब भी चलती हूँ तो मेरी गांड का उभार वो देखते हैं.मैं जब भी भैया के घर जाती हूँ तो उनकी पत्नी से बात करती हूँ और उनकी पत्नी भी बहुत अच्छी है और वो भी मेरे घर आती है.
हम दोनों पड़ोसियों में बहुत प्यार है. मैं और भैया, हम लोग कभी-कभी साथ में टीवी भी देखते हैं. मैं कभी-कभी रात को भी भैया के घर जाती हूँ घूमने के लिए, तो उनकी पत्नी मुझे खाना खिलाये बगैर मुझे घर से आने नहीं देती है. हम दोनों लोग पड़ोसी हैं लेकिन हम दोनों के बीच में एक परिवार की तरह प्यार है.

जब मैं उनके घर जाती थी तो भैया मुझे हवस भरी नजरों से देखते थे. मैं भी सलवार सूट पहन कर एकदम सेक्स बम बन कर जाती थी. मुझे इस तरह से अच्छा लगता था जब लोग मेरी तरफ ध्यान देते थे. ऐसा लगता था कि सब मेरे जिस्म के भूखे हैं. मुझे उनको तड़पाने में बहुत मजा आता था इसलिए मैं जान-बूझ कर इस तरह से अपने आप तैयार करती थी कि सबकी नजर मुझ पर जाये बिना रह ही न पाये.

वैसे तो मेरा मकसद पड़ोसी भैया के घर ही जाना होता था क्योंकि मैं स्पेशल उनके लिये तैयार होकर जाती थी. मगर इसी के साथ मेरे मन की इच्छा भी पूरी हो जाती थी कि मुझे पड़ोस के और लोग भी देखें. घर से निकलती थी तो मुझे बाकी के पड़ोसी लोग भी देखते थे.
भैया मुझसे हमेशा अकेले में बात करते थे और जब उनकी पत्नी मेरे साथ होती थी तो वो बहुत कम मुझसे बात करते थे. मैं कभी-कभी मॉडर्न सलवार सूट पहन कर भैया के घर जाती थी जिसमें से मेरी ब्रा और पेंटी का रंग बिलकुल साफ़ दिखाई देता था.

एक दिन मैं भैया के घर गयी थी तो उनकी पत्नी किसी पड़ोस की औरत के साथ बाजार चली गयी थी और भैया घर में अकेले थे.

मुझे नहीं पता था कि उनकी पत्नी पड़ोस की किसी औरत के साथ बाजार गयी है. भैया घर में अकेले थे तो मैं वापस अपने घर आने लगी तो भैया मुझसे बोले कि तुम अकेले में मुझसे बात नहीं करोगी क्या?
उनकी यह बात सुनकर मैं भैया के घर रुक गयी और हम दोनों बात करने लगे. मुझे नहीं पता था कि उनकी पत्नी कब आएँगी और इधर भैया मुझसे बात कर रहे थे और मैं भी हंस-हंस कर उनसे बात कर रही थी. हम दोनों लोग पहले भी अकेले में एक दूसरे से बात करते थे तो हमें अकेले में एक दूसरे से बात करने में कोई परेशानी नहीं थी.

भैया बात करते-करते मुझे हवस भरी नजरों से देख रहे थे. हम दोनों लोग एक दूसरे से बात करते-करते घुल मिल गए थे. अचानक से भैया ने मुझे पकड़ लिया और मैं भैया से बोली- आप ये क्या कर रहे हैं?
वो बोले- मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ!
और जब तक मैं कुछ और कह पाती वो मुझे किस करने लगे. हम दोनों लोग घर में अकेले थे तो किसी के आने का भी डर नहीं था.

किस करने के बाद मैंने खुद को पीछे हटाया और कहने लगी- ये सब मत करिए.
वो बोले- मैं तुमको बहुत चाहता हूँ.
और वो मुझे पकड़ कर फिर से किस करने लगे.

मैं भी गर्म होने लगी और वो मुझे किस करते-करते मेरी सलवार के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगे. भैया मुझे अपनी बाँहों में उठा कर बेडरूम में ले गए. वो मुझे बेड पर गिरा कर किस करने लगे. मेरी चूचियों को दबाने लगे और मैं भी ज्यादा गर्म होने लगी. उन्होंने मुझे किस करते करते मेरी सलवार और सूट को निकाल दिया और मैं ब्रा और पेंटी में रह गयी. वो मुझे ब्रा और पेंटी में देख रहे थे.

उनकी नजरों से हवस टपक रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई भूखा भेड़िया अपने शिकार को देख रहा है.

उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मेरे जिस्म को चाटने लगे और उसके बाद वो मेरी ब्रा निकाल कर मेरी चूचियों को अपने हाथों से दबाने लगे और मेरी एक चूची को पकड़े हुए दूसरी चूची को मुंह में लेकर चूसने लगे.
मेरी चूची को चूसने के बाद वो मेरे निप्पल को मसलने लगे और फिर मेरे निप्पल को चूसने लगे. मेरी चूचियों को पीने के बाद वो मेरी चूची को बहुत जोर से दबा रहे थे. मेरी चूची बहुत बड़ी हैं तो उनको मेरी चूची को दबाने में मजा आ रहा था. वो मेरी चूची को दबाने के बाद वह उठ गये.

फिर भैया किचन से चॉकलेट लेकर आये और मेरी चूची पर चॉकलेट लगा कर मेरी चूची को चूसने लगे.
मेरी चूची पर से चॉकलेट को चूसने के बाद वो मेरी पेंटी को निकालने लगे. उन्होंने मेरी पेंटी को खींच कर मेरी टांगों से अलग कर दिया और फिर चूत को गौर से देखने लगे. कुछ देर तक देखने के बाद उन्होंने मेरी चूत पर चॉकलेट लगा दी.

मेरी चूत पर चॉकलेट लगाने के बाद वो मेरी चूत को चाटने लगे. मैं भी उनका साथ दे रही थी और वो मेरी चिकनी चूत पर चॉकलेट लगा कर मेरी चूत को चाट रहे थे.

मुझे लगा कि भाभी आ सकती हैं, मैं उनको मना करने लगी- अब रहने दीजिए, कोई आ जायेगा.
वो बोले कि उनकी पत्नी अभी नहीं आएगी. वो मेरी चूत को जोर से चाटते रहे.

मेरी चूत को खूब चाटने के बाद अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे. भैया अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ रहे थे तो मैं बहुत ही गर्म हो गई और वो अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे. मेरी चूत में वो अपना लंड डाल कर मुझको चोदने लगे. मेरी चूत में उनका लंड अन्दर बाहर हो रहा था. वो मेरी टांगों को फैला कर मेरी चूत को चोद रहे थे. हम दोनों लोग सेक्स कर रहे थे और वो मुझे अपने बेडरूम में नंगी करके मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मेरी चूत को चोद रहे थे.

उनका लंड मेरी चिकनी चूत को चोद रहा था. हम दोनों लोग सेक्स करते करते गर्म हो गए थे. वो मेरी चूत में झटका मार रहे थे और मैं सिसकारियाँ ले रही थी. मेरी चूत गीली हो गयी थी और हम दोनों लोग सेक्स करते-करते एक दूसरे को किस भी कर रहे थे.

हम दोनों सेक्स करते हुए पूरा मजा ले रहे थे. बहुत दिनों के बाद मेरी चूत की चुदाई हुई थी. मैं तो पहले से ही चाहती थी कि भैया मेरी चूत को चोद दें मगर अभी तक मौका नहीं मिल पा रहा था.
हमें चुदाई करते हुए बीस मिनट हो गये थे. फिर एकदम से दोनों का माल निकलने को हो गया. भैया ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और वो अपना माल मेरे चूची पर छोड़ने लगे. मेरी चूची पर उनका सफेद माल आकर गिरने लगा और यहाँ-वहाँ बहने लगा. मुझे बहुत मजा आया उनका माल अपनी मोटी चूचियों पर लगवा कर. मैंने उनके माल को अपनी चूचियों पर पूरी तरह से मल दिया. मेरी चूची पूरी तरह से भैया के माल से सन गई थी.

मेरी चूची पर अपना माल छोड़ने के बाद वो मेरी चूत को चाटने लगे और मैं उनके माल को साफ़ करने लगी. मैंने एक कपड़े से अपनी चूचियों को साफ़ किया और उसके बाद वो मेरी चूत को बहुत अच्छे से चाटने लगे. बीच-बीच में वो दो उंगली डाल कर मेरी चूत को चोद रहे थे.

कुछ देर तक ऐसा करने के बाद वो मेरी चूत में अपनी जीभ डालने लगे. मुझे फिर से मजा आने लगा. मैं अपनी चूत को उनके मुंह में फेंकने लगी. गांड उठाकर अपनी चूत को उनकी जीभ की तरफ धकेल रही थी.
भैया जीभ पूरी अंदर डाल कर मेरी चूत को चोद रहे थे. मैं भी उनका साथ दे रही थी. फिर भैया ने अपना लंड मेरे मुंह की तरफ कर दिया. वो मेरी चूत चाट रहे थे और मैंने उनका लंड मुंह में ले लिया. मुंह में लेकर उनके खड़े हुए लंड को चूसने लगी. मैं बहुत ही मजे से उनके लंड को चूस रही थी.

हम दोनों फिर से पूरी तरह गर्म हो चुके थे. भैया अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदने लगे. अबकी बार मेरी चूत को और भी ज्यादा मजा आ रहा था भैया के लंड से चुदने में. यह दूसरी बार की चुदाई थी. वो जोर-जोर से मेरी चूत को चोदने लगे. हम दोनों सेक्स का पूरा मजा ले रहे थे.

मेरी चूत को चोदते हुए भैया के मुंह से आह्ह् … ओह्ह जैसी आवाजें निकल रही थीं. मैं भी अपनी चूत को उनके लंड की तरफ धकेल रही थी. मेरे मुंह से भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं. हम दोनों बहुत आनंद ले रहे थे.

जब कुछ देर भैया को मेरे ऊपर लेट कर चुदाई करते हुए हो गई तो उसके बाद उन्होंने मुझे उठने के लिए कहा. उन्होंने मेरी चूचियों को जोर से मसला और मेरी गर्दन को पकड़ कर अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया. घुटने के बल बेड पर खड़े हुए भैया मेरे मुंह को अपने लंड पर धकेलने लगे. उनका लंड मेरे मुंह जाकर अंदर तक पहुंचने लगा. कभी कभी तो भैया इतनी जोर से मुंह को धकेल देते थे कि उनका लंड मेरे गले में जाकर फंस जाता था. मेरी हालत खराब होने लगी थी. मुझसे अच्छी तरह सांस भी नहीं ली जा रही थी.

उसके बाद जब भैया ने अपना लंड बाहर निकाला तो उनका लंड मेरे थूक से पूरा गीला हो गया था. मैं हाँफने लगी. उसके बाद भैया ने मुझे पलटा दिया और बेड पर धकेल दिया. उन्होंने मेरे चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मुझे घोड़ी की पोजीशन में ले आये. उन्होंने ने पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड लगा दिया और मुझे घोड़ी बनाकर चोदने लगे.

वो पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोद रहे थे. हम दोनों लोग जिस बिस्तर पर सेक्स कर रहे थे वो बिस्तर भी हम दोनों की चुदाई से गर्म हो गया था. भैया मेरी कमर से चिपके हुए थे. उनका लंड मेरी चूत में जाकर उसको मजा दे रहा था. हम दोनों लोग एक दूसरे से चिपक कर सेक्स कर रहे थे.

भैया मुझसे पूछने लगे- चुदवाने में मजा आ रहा है?
मैं पीछे पलट कर उनको देख कर स्माइल कर रही थी और वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरी चूत को चोद रहे थे.

मेरे पड़ोसी भैया बहुत ही चोदू किस्म के इंसान निकले. उनको देख कर यह नहीं लगता था कि उनको सेक्स के बारे में इतना कुछ पता है. उनको सेक्स की सारी पोजीशन के बारे में पता था. वो शक्ल से देखने में बहुत भोले लगते थे. मगर जब उन्होंने मेरी चूत की चुदाई शुरू की तो मैं आनंद में गोते लगा रही थी.
हम दोनों का ये पहली बार ही था इसलिए भैया मुझे धीरे-धीरे चोद रहे थे जबकि मेरा बॉयफ्रेंड मुझे तेज-तेज चोदता है.

भैया की नजर मुझ पर बहुत दिनों से थी और मैं भी चाहती थी कि कभी भैया के लंड को अपनी चूत में लेने का मौका मिले. मेरे बॉयफ्रेंड के लंड से चुद कर मैं बोर हो गयी थी. वैसे मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरे साथ बहुत बार सेक्स किया है. उसने मुझे जवान बनाया था. मगर वक्त के साथ-साथ धीरे-धीरे मुझे उसके साथ बोर होने वाली फीलिंग आने लगी थी. जब से मैंने भैया को देखा कि वह मेरे बदन पर नजर रखते हैं तो उसके बाद से ही मैंने भी भैया की हरकतों पर नजर रखना शुरू कर दिया.

मैं बहुत समय से इस दिन का इंतजार कर रही थी जब भैया का लंड अपनी प्यासी चूत में लेने का मौका मिलेगा. मगर भैया तो मुझसे भी ज्यादा प्यासे थे. उन्होंने उस दिन मेरी चूत को जम कर चोदा. हम लोगों ने तीन बार चुदाई की. भैया ने अलग-अलग पोजीशन में मेरी चूत की चुदाई की.

कभी वो बेड के किनारे पर लाकर चोदने लगते थे, तो कभी सोफे पर ले जाकर घोड़ी बना देते थे. कभी कुर्सी पर बैठ जाते थे और मुझे अपने लंड पर बैठा लेते थे. जब मैंने कुर्सी पर बैठ कर उनके लंड की सवारी की तो मुझे बहुत मजा आया. इस पोजीशन में भैया का लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया था. भैया मेरी चूचियों के साथ खेल रहे थे. मैंने भैया के कंधों को पकड़ा हुआ था. वो मेरी एक चूची को अपने मुंह में लेकर पी रहे थे और दूसरी को अपने हाथ से दबा रहे थे. इस पोजीशन में तो मैं पांच-सात मिनट की चुदाई के बाद ही झड़ गई.

उसके बाद आखिरी चुदाई बेड पर हुई जब भैया ने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा कर मुझे चोदा. इस चुदाई में मुझे दर्द होने लगा था. मगर मजा बहुत आया.

हम दोनों सेक्स करने के बाद मदहोश हो गए थे. हम सेक्स करने के बाद बिस्तर पर सो गए. कुछ देर हम सोये रहे और उसके बाद मैंने उठ कर अपने कपड़े पहन लिये. भैया भी मेरे साथ ही उठ गये थे. उन्होंने भी अपने कपड़े पहन लिये थे.

मैं उनके लंड से इतनी चुद गई कि मुझसे चला भी नहीं जा रहा था. मैं बड़ी मुश्किल से अपने दर्द को छिपाते हुए उनके घर से बाहर निकली.
घर जाने के बाद मैंने अपनी चूत को साफ़ किया और उसके बाद नहा कर मैं सो गयी. मैं भैया से चुदवाकर बहुत थक गयी थी इसलिए मुझे नहाने के बाद तुरंत नींद लग गयी.

जब मैं उठी तो शाम हो चुकी थी. मैं अब फ्रेश फील कर रही थी. मैंने सोचा कि कुछ देर बाहर कॉलोनी के पार्क में घूम कर आती हूँ. मैं आज मन ही मन बहुत खुश हो रही थी. भैया ने मुझे जम कर चोदा था. मुझे एक नया लंड मिल गया था. इसलिए मेरे मन में खुशी और संतोष का भाव था.

जब मैं पार्क में पहुंची तो पड़ोसी भैया भी वहीं पर घूम रहे थे. हम दोनों ने एक-दूसरे को देख कर स्माइल किया. भैया मुझसे बात करने का मौका देख रहे थे.

जब थोड़ा सा अंधेरा हो गया तो हम लोग पार्क में एक तरफ पेड़ों के पीछे चले गये. भैया ने पूछा- सेक्स करने में मजा आया या नहीं तुमको?
मैंने कहा- हाँ, बहुत मजा आया. मगर मेरी चूत अभी भी दुख रही है.
भैया बोले- ठीक है, आज की चुदाई बहुत जोरदार थी. अब तुम कुछ दिन आराम कर लेना. हम उसके बाद फिर से चुदाई करेंगे.

जेब से फोन निकाल कर भैया ने मुझसे मेरा नम्बर पूछा. मगर मैं अपना फोन घर पर ही छोड़ आयी थी. भैया ने मुझसे मेरा नम्बर मांगा तो मैंने उनको नम्बर दे दिया. उन्होंने मेरे फोन पर मिस कॉल करके अपना नम्बर छोड़ दिया.

उसके बाद मैं घर आई तो मैंने सबसे पहले फोन को ही चेक किया. मैंने देखा तो मेरे फोन पर मिस कॉल आई हुई थी. मैंने भैया का नम्बर सेव कर लिया.

तीन-चार दिन बाद भैया का मैसेज आया कि मैं आकर उनसे मिलूं. मैं उनके घर गई तो भैया ने जाते ही मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मुझे चूसने लगे. उन्होंने मेरे कपड़े निकाले और खुद भी नंगे हो गये. अगले कुछ ही मिनटों के बाद हम बेड पर एक दूसरे के जिस्मों को चुदाई का मजा दे रहे थे. भैया ने मेरी चूत को फिर से जम कर चोदा.

अब जब भी उनकी पत्नी घर से बाहर होती है भैया मुझे चोदने के लिए बुला लेते हैं.
मगर कई बार जब मेरा मन करता है हमारे पास जगह नहीं होती.
एक दिन ऐसे ही मेरा मन भैया के पास जाने के लिए करने लगा. मैंने भैया को फोन किया तो उन्होंने मेरा फोन नहीं उठाया. मैंने सोचा कि शायद उनकी पत्नी घर पर ही होगी इसलिए वो फोन नहीं उठा रहे हैं.

मुझसे रुका नहीं जा रहा था इसलिए मैं खुद ही भैया के घर पर चली गई. घर जाकर देखा तो उनकी पत्नी वहीं पर थी. अब मुझे उनकी पत्नी के सामने बहाना बनाना पड़ा कि मैं उनके घर पर चीनी लेने आई थी. जब भाभी किचन में चीनी लेने गई तो मैंने भैया के लंड पर हाथ फेर दिया. भैया ने आंखों ही आंखों में अपनी पत्नी की तरफ इशारा किया.
मैं उदास हो गयी. उसके बाद मैं अपने घर वापस आ गई.

कुछ देर के बाद भैया का फोन आया.
मैंने पूछा- आपकी पत्नी चली गई क्या?
वह बोले- नहीं, मैं बाथरूम से बात कर रहा हूँ. तुम तैयार हो जाओ. हम दोनों बाहर कॉलोनी के गेट पर मिलेंगे.

मैं जल्दी से तैयार हो गई और अपने दोस्त के घर जाने का बहाना बनाकर घर से निकल गई. भैया बाहर मेरा इंतजार कर रहे थे. मैंने मुंह पर कपड़ा बांधा और भैया के साथ कुछ दूर तक पैदल जाकर आगे हम लोग एक बात करने लगे. भैया ने बताया कि हम होटल में जा रहे हैं. मैं खुश हो गई.

हम लोग एक होटल में गये और वहाँ पर जाकर हमने मस्त चुदाई की.
कई बार ऐसा होता है कि जब हमें जगह नहीं मिलती तो हम बाहर जाकर चुदाई करके आ जाते हैं. ऐसे में भैया मुझे बाहर होटल में लेकर जाते हैं. हम वहाँ पर जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं.

पड़ोसन भाभी को लंड का दीवाना बनाया - Padosan Bhabhi Ki Lund Ka Deewana Banaya

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एक पुरानी भाभी की याद आ गई… तब मैं करीब 24 साल का था, अविवाहित था, अपने पैतृक निवास से दूर एक छोटा सा घर किराये पर लेकर नौकरी कर रहा था।
स्कूल के जमाने से मैं हारमोनियम बज़ाया करता था। शहर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुझे सादर निमन्त्रण मिलता था।

गरमी के दिन थे, मैं ऑफिस से घर में आकर अपने कपड़े निकाल कर सिर्फ अंडरवियर और बनियान में ही बिस्तर पर पड़ा आराम कर रहा था। खुला हुआ था इसलिए मेरे लंड में कुछ-कुछ सेक्स की उत्तेजना महसूस हो रही थी। मुझे बिस्तर पर आराम करते हुए लगभग दस मिनट हो गए होंगे.. इतने में किसी ने दरवाजे पर खटखटाया।

‘इस वक्त कौन आया होगा?’ सोचते हुए मैंने दरवाजा खोला और शर्म के मारे लज्जित सा गया।

सामने प्रभा भाभी खड़ी थीं, प्रभा भाभी हमारी ही कालोनी में से मेरे अच्छे दोस्त की बीवी थी, उनकी उम्र लगभग 35 होगी.. वो शरीर से बड़ी ही मस्त और आकर्षक थी।

‘आईए ना अन्दर..’ दरवाजे से हटते हुए मैंने बोला।
वो कमर लचकाती हुई अन्दर आकर बिस्तर पर बैठ गई।
मैंने झट से लुंगी पहन ली और कहा- कैसे आना हुआ?

‘वैसे तो मैं आपको बधाई देने आई हूँ..’
मैंने थोड़ा आश्चर्य से पूछा- बधाई? वो किस बात की?
‘कल आपने हारमोनियम बहुत अच्छी बजाई.. अभी भी वो स्वर मेरे कान में गूँज रहे हैं।’

उसकी बात सही थी क्योंकि मैं एक कार्यक्रम में हारमोनियम बजा रहा था।
मैंने कहा- मैं ऐसे ही बजा रहा था.. पहले से ही मुझे संगीत का शौक है।
‘इसीलिए मैं आपसे मिलने के लिए आई हूँ।’

मुझे उसकी यह बात कुछ समझ में नहीं आई.. मैं शांत ही रह गया।
वो फिर से बोली- एक विनती है आपसे.. सुनेंगे क्या?
‘आप जो कहेंगी.. वो करूँगा.. इसमें विनती कैसी..’ मैंने सहजता से कहा।
‘मुझे भी संगीत का शौक है.. पहले से ही मुझे हारमोनियम सीखने की इच्छा थी.. पर कभी वक्त ही नहीं मिला… आप अगर मेरे लिए थोड़ा कष्ट उठाकर मुझे सिखायेंगे.. तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा.. हमारे घर में हारमोनियम भी है। हमारे उनसे भी मैंने इजाजत ले ली है.. और रात का खाना होने के बाद हम तालीम शुरू कर देंगे।’
मुझे उन्हें ‘ना’ कहना मुश्किल हो गया.. मैंने कहा- चलेगा.. रोज रात को हम नौ से दस तालीम करेंगे।

ऐसा सुनते ही उसका चेहरा खिल उठा.. ‘दो-तीन दिन में तालीम शुरू करेंगे।’ ऐसा तय करवा के वो चली गई।

तीसरे दिन मैं रात को साढ़े नौ बजे उसके घर पहुँच गया।
‘आनन्द कहाँ है..?’ मैंने अन्दर आते ही पूछा।
‘आपकी राह देखते-देखते वो सो गए हैं.. आप कहें तो मैं उन्हें उठा दूँ?’
मैंने कहा- नहीं.. रहने दो।

मैं प्रभा भाभी के साथ एक कमरे में चला गया, यह जगह तालीम के लिए बहुत अच्छी है।
प्रभा भाभी ने सब खिड़कियाँ बंद की.. और कहा- यह कमरा हमारे लिए रहेगा..

एक पराई औरत के साथ कमरे में अकेले रह कर मैं कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था। प्रभा भाभी को देख मेरे लंड में हलचल पैदा होने लगती थी।
उस दिन उसको बेसिक चीजें सिखाईं और मैं अपने घर के लिए चल पड़ा।

उसके बाद कुछ दिनों में तालीम में रंग चढ़ने लगा। प्रभा भाभी मेरा बहुत अच्छी तरह से खयाल रखती थीं, चाय तो हर रोज मुझे मिलती थी.. कभी-कभी आनन्द भी आ जाता.. पर ज्यादा देर नहीं रूकता.. लगता था उसका और संगीत का कुछ 36 का आंकड़ा था।

उस दिन शनिवार था.. कुछ काम की वजह से मुझे तालीम के लिए जाने के लिए देरी हो गई थी, दस बजे मैं प्रभा भाभी के घर गया।
‘आज तालीम रहने दो..’ ऐसा कहने के लिए मैं गया था.. पर मैंने देखा.. प्रभा भाभी बहुत सजधज के बैठी थीं।

मुझे देखते ही उसका चेहरा खिल उठा, मैं उसकी तरफ देखता ही रह गया, बहुत ही आकर्षक साड़ी पहने उसकी आँखों में अजब सी चमक थी।

‘आज तालीम रहने दो.. आज सिर्फ हम तुम्हारी मेहमान नवाजी करेंगे।’
‘मेहमान नवाजी..?’ मैंने खुलकर पूछा।
‘आज ‘वो’ अपने मौसी के यहाँ गए हैं.. वैसे तो मैं आपको खाने पर बुलाने वाली थी.. लेकिन अकेली थी.. इसलिए नहीं आ सकी।’

उन्होंने दरवाजे और खिड़कियाँ बंद करते हुए कहा.. उन्होंने मेरे लिए ऑमलेट और पाव लाकर दिया। मैंने ऑमलेट खाना शुरू कर दिया..
कि तभी उसने अपने कपड़े बदलने शुरू किए, मैं भी चोर नजरों से उसे देखने लगा, उसने अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज भी निकाल डाला और अन्दर के साए की डोरी भी छोड़ डाली..

मेरे तो कलेजे में ‘धक-धक’ सी होने लगी।
प्रभा भाभी के शरीर पर सफेद ब्रा और छपकेदार कच्छी थी।

उसकी छाती के ऊपर बड़े-बड़े मम्मे ब्रा से उभर कर बाहर को आ गए थे। ये नज़ारा देख कर तो मेरा लंड फड़फड़ाने लगा, उसके गोरे-गोरे पैर देख कर मेरा मन मचलने लगा।
सामने जैसे जन्नत की अप्सरा ही नंगी खड़ी हो गई हो.. ऐसे लग रहा था, कामुकता से मेरा अंग-अंग उत्तेजनावश कांपने लगा।
फिर उसने एक झीना सा गाउन लटका लिया।

‘आज तुम नहीं जाओगे.. आज मैं अकेली हूँ..’
और वो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर बेडरूम में लेकर गई, मानो मुझसे ज्यादा उसको ही बहुत जल्दी थी।
उसके मेकअप के साथ लगे हुए इत्र की महक पूरे कमरे में छा सी गई थी।

मेरी ‘हाँ’ या ‘ना’ का उन्होंने विचार न करते हुए मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसके स्पर्श से मेरा अंग-अंग खिल उठा.. कुछ ही देर में भाभी ने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
मेरी दोनों जाँघों के बीच में खड़ा हुआ बहुत ही लम्बा मेरा लंड प्रभा भाभी देखती ही रह गई… और अपना गाऊन निकालने लगी..

‘तुम्हारी होने वाली बीवी बहुत ही भाग्यशाली होगी..’ गाऊन निकालते हुए उसने कहा।
‘वो कैसे?’ मैंने उसके गोरे-गोरे पेट को देखते हुए कहा।
‘इतना बड़ा लंड’ जिस औरत को मिलेगा.. वो तो भाग्यवान ही होगी ना.. मैं भी भाग्यवान हूँ.. क्योंकि अबसे मुझे तुम्हारा सहवास मिलेगा।’

उसने पीछे हाथ लेते हुए अपनी ब्रा निकाली।
मुझे उसके साहस का आश्चर्य हुआ।
झट से उसके तरबूज जैसे मम्मे बाहर आ गए।

उसके बाद झुक कर अपनी पैन्टी भी निकाल दी.. दूध सा गोरा जिस्म है भाभी का… पूरी नंगी.. मेरे सामने खड़ी थी.. मेरा लंड फड़फड़ाने लगा।
वो झट से मेरे पास आ गई और मेरे गालों पर चुम्बन लेने लगी.. उसने मुझे कस के पकड़ा.. वो तो मदहोश होने लगी थी। उसने अपने नाजुक हाथों से मेरा लंड हिलाना शुरू किया और झुक कर अपने होंठों से चूमने लग गई..

मेरे दिल में हलचल सी पैदा हो गई.. भाभी की ये हरकत बहुत ही अच्छी लग रही थी।
वो मेरा लंड वो ख़ुशी के मारे चाट रही थी, मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ रखकर दबाना शुरू किया। उसके बड़े-बड़े मुलायम नितम्ब.. हाथों को बहुत ही अच्छे लग रहे थे। मैं बीच-बीच में उसकी चूत में उंगलियाँ डालने लगा… उसकी चूत गीली हो रही थी।

भाभी तो मुझसे चुदवाने के लिये दीवानी हो रही थी।

मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी टांगें फैलाकर मैं उसकी चूत चाटने लगा। ऐसा करते ही वो मुँह से ख़ुशी के स्वर बाहर निकालने लगी।
मैंने भी जोर-जोर से उसकी चूत चाटने को शुरू कर दिया… उसकी टांगें फैलाकर अपना मूसल सा मोटा लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर घुसाने लगा।

उसको मेरा लंड अन्दर जाते समय बहुत ही मजा आ रहा था। वो जोर-जोर से चिल्ला कर बोल रही थी- डालो.. पूरा अन्दर डालो.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मेरा लंड अब सटासट उसकी चूत में जा रहा था.. मेरी रफ्तार बढ़ गई.. मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा रहा था..
भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया था, मैंने भी उसके मोटे-मोटे मम्मों को दबाते हुए उसको चोदना चालू किया।

बहुत ही मजा आ रहा था… बीच-बीच में उसके होंठों में होंठ डाल के नीचे से जोर-जोर से लंड अन्दर घुसा रहा था, नीचे से दिए धक्कों से उसके मम्मे जोर-जोर से हिल रहे थे, उसकी सुंदर काया बहुत ही आकर्षक दिख रही थी, उसको चोदने में बहुत ही आनन्द मिल रहा था, मेरी रफ्तार इतनी बढ़ गई कि बिस्तर की आवाज गूँजने लगी।

दोनों ही चुदाई के रंग में पूरे रंगे जा रहे थे। मैं अपना लंड जितना उसकी चूत में घुसा सकता था.. उतना जोर-जोर से घुसा रहा था। इतनी ताकत से उसे चोदना चालू किया कि उसने भी मुझे जोर से पकड़ लिया।

मेरा वीर्य अब बाहर आने का समय हो गया था, जोर से चूत में दबा कर मैंने सारा वीर्य उसकी मरमरी चूत में ही छोड़ दिया और थोड़ी देर उसके शरीर पर ही पड़ा रहा।

‘वाह मुझे आज क्या मस्त चोदा है तुमने.. मेरे पति ने भी मुझे आज तक ऐसा आनन्द नहीं दिया है.. जो आज तुमने मुझे दिया है.. आह्ह.. तृप्त हो गई.. प्लीज मुझे जब भी वक्त मिले.. मुझे चोदने जरूर आ जाना..’
मैंने कहा- मुझे भी तुम्हें चोदने में बहुत मजा आ गया प्रभा..
मैं तो उसे अब नाम से पुकारने लगा।

‘तुम्हें जब भी चुदवाने की इच्छा हो.. तब मुझे बताना.. मैं कुछ भी काम हो.. सब छोड़कर तुम्हारे पास आ जाऊँगा.. तुम्हें चोदने के लिए..’

प्रभा तो मेरे लंड की जैसे दीवानी हो गई थी।

मित्रो.. आपको भाभी की लंड की दीवानगी कैसी लगी.. कमेन्ट लिख भेजें..

पड़ोसन भाभी को चुदाई की तलब - Padosan Bhabhi Ko Chudai Ki Talab

पड़ोसन भाभी को चुदाई की तलब - Padosan Bhabhi Ko Chudai Ki Talab , पड़ोसन भाभी की गांड फाड़ी , पड़ोस में रहने वाली महिला की गांड मारी , आस-पडोस की औरत को लंड चुसाया.

दोस्तो.. आज मैं आपके सामने अपनी एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ.. लेकिन उससे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ.. मेरा नाम राज है और मैं उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में रहता हूँ। इस वक़्त मेरी उम्र 35 साल हो गई है।
आज भी मैं हर वक़्त सेक्स का भूखा रहता हूँ।

बात उन दिनों की है.. जब मैं सिर्फ़ 20 साल का था। मेरे यहाँ एक फैमिली किराए पर रहने आई। उस फैमिली में एक आदमी.. उसकी बीवी और दो छोटे बच्चे थे।
उनका कमरा मेरे बगल में ही था। आदमी की उम्र यही कोई 35 साल होगी और उस औरत की 30 साल थी। लेकिन उसकी उम्र 30 के बावजूद भी वो लगती बिल्कुल 25 साल की थी। वो बहुत ही सुन्दर औरत थी.. मैं उसे भाभी कहता था.. लेकिन मुझे वो औरत कुछ चालू किस्म की लगती थी।

जब उसका पति अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और बच्चे स्कूल चले जाते थे.. तो उस वक्त वो मुझसे थोड़ा हँसी-मज़ाक कर लेती थी।
मैं भी इसे सामान्य तौर पर लेता था। इसी तरह से तीन महीने बीत गए.. हम लोग आपस में काफ़ी खुल गए थे।
अक्सर ऐसा होता था कि रात में नज़दीक होने की वजह से मैं उनका टॉयलेट इस्तेमाल कर लेता था।

उसके पति जिनका नाम अशोक सक्सेना था.. वो कई बार टूर पर ऑफिस के काम से लखनऊ भी जाते थे और उन्हें वहाँ कई-कई दिन रुकना पड़ जाता था। तब घर में वो अकेली रह जाती थी.. तो उससे मेरी खूब बातें होती थीं।

मैं कभी-कभी छत पर जाकर छुप कर ड्रिंक कर लिया करता था। एक दिन मैं ड्रिंक कर रहा था.. अचानक वो भी ऊपर आ गई और उसने मुझे ड्रिंक करते हुए देख लिया।
मैं डर गया कि आज तो भांडा फूट गया.. लेकिन वो मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली- जब मेरे ‘वो’ यहाँ नहीं होते हैं.. तो तुम मेरे कमरे में बच्चों के सोने के बाद ड्रिंक कर सकते हो।
मैंने उन्हें ‘धन्यवाद’ दिया और झेंपते हुए बताया- बस भाभी जी.. मैं कभी-कभार ही ड्रिंक करता हूँ।

उन्होंने कहा- तुम्हारे भाईसाब भी कभी-कभी काम से बाहर जाते हैं.. तो तुम मेरे कमरे में ये सब कर सकते हो।
मैंने उन्हें ‘थैंक्स’ बोला और अपना क्वार्टर लेकर उनके कमरे में आ गया।

उन्होंने फ्रिज से ठन्डे पानी की बोतल और गिलास टेबल पर रख दिया और बातें करने लगीं।
अब मुझे सुरूर होने लगा था.. उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी है क्या?
‘नहीं तो..’ मैंने लौड़े पर हाथ फेरते हुए बताया- अभी तक तो कोई नहीं है।

फिर उन्होंने मुझे लौड़े पर हाथ फेरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए पूछा- कभी सेक्स किया है?
तो मैं चौंक गया.. मुझे इतनी जल्द इसी उम्मीद नहीं थी.. मुझे बड़ा अजीब सा लगा।
मैंने कहा- नहीं..
तो आँख मारते हुए बोली- अच्छा.. इतने शरीफ लगते तो नहीं हो..

बस मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने झट से उनको बाँहों में भर लिया और बोल दिया- भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
उसने छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा-तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो.. पर अभी तुम अपने कमरे में जाओ.. रात को आना.. जब तुम्हारे सभी घर वाले सो जाएँगे।

तो दोस्तो, मैं समझ गया कि चुदाई की आग दोनों तरफ लगी है।
मैं उधर से उठ कर अपने कमरे में आ गया और खाना खाकर सोने का नाटक करने लगा।
दो घंटे के बाद सभी घर वाले भी सो गए.. तो मैं चुपके से उठा और भाभी के कमरे में घुस गया। उन्होंने दरवाजा बंद नहीं किया था।

मैं जैसे ही अन्दर घुसा तो मैं देखता ही रह गया। भाभी ने सफेद रंग की नाईटी पहनी थी.. वो बड़ी मस्त लग रही थी। मैंने जाते ही उनको दबोच लिया.. लेकिन उन्होंने कहा- ऐसे नहीं.. पहले टॉयलेट में जाकर मुठ्ठ मार के आओ।
मैंने कहा- भाभी जब आप तैयार हैं.. तो फिर मुठ्ठ मारने की ज़रूरत क्या है?
तो उन्होंने कहा- जो मैं कहती हूँ.. वो करो..

मैं टॉयलेट में घुस गया और मुठ्ठ मारी और फिर से भाभी के कमरे में आ गया। इस बार देख की भाभी बिल्कुल नंगी होकर बिस्तर पर बैठी थीं।

क्या कयामत लग रही थी.. उस वक्त वो.. मैं बता नहीं सकता। उन्होंने अपने बिस्तर के बगल में नीचे बिस्तर लगा दिया था.. जिससे बच्चों की आँख ना खुल सके। अब भाभी ने मेरे कपड़े भी खुद ही उतार दिए।

खैर.. मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.. मैं फिर से गरम हो गया और भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी।
वाह.. क्या मज़ा आया..

फिर मैंने उनकी चूचियों की चूसना शुरू कर दिया। अब भाभी बहुत ही गरम हो गई थीं। उन्होंने मुझे नीचे लिटा दिया और अपनी चूत मेरे मुँह की तरफ कर दी और अपना मुँह मेरे लंड की तरफ करके मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं।
मैंने भी अपनी जीभ उनकी चूत में डाल दी।
जन्नत का मज़ा आ रहा था..

ऐसे ही लगभग 5 मिनट तक चुसाई का कार्यक्रम चला। भाभी की चूत से पानी की धार बह निकली.. उधर मेरा भी निकलने को हो गया।
मैंने भाभी से कहा- मेरा निकल जाएगा..
तो उन्होंने कहा- छोड़ दे.. मैं मुँह में ही ले लूँगी।
मेरे लौड़े ने उनके मुँह में ही पिचकारी छोड़ दी.. वो सारा वीर्य पी गई।

अब वो उठी और मेरे बगल में लेट गई। वो मुझे सहला रही थी.. और मैं उन्हें मसल रहा था।
इसी तरह से मुश्किल से 10 मिनट बीते थे कि लण्ड फिर से पूरा खड़ा हो गया और भाभी भी पूरी गर्म हो गई।
अब उन्होंने अपनी चूत फैलाते हुए कहा- ले.. अब अन्दर डाल..

मैं उनके ऊपर आ गया.. लण्ड का सुपारा चूत पर रखा और अन्दर डाल दिया और चुदाई शुरू कर दी। लगभग 7-8 मिनट की चुदाई के बाद भाभी ने मुझे बुरी तरह से कस लिया और बोली- थोड़ी सी रफ़्तार और बढ़ाओ..

मैंने रफ़्तार बढ़ा दी.. भाभी की साँसें रुक गईं.. उनका जिस्म बुरी तरह से अकड़ा और वो झड़ गई।
लेकिन दो बार वीर्य निकलने की वजह से मैंने चुदाई जारी रखी और मैं चोदता रहा। फिर दस मिनट के बाद भाभी फिर अकड़ गई और फिर से झड़ गई।

अब वो मुझे अपने ऊपर से उतरने के लिए कहने लगी। मैंने लंड बाहर निकाला और उन्हें घोड़ी बना कर फिर उनकी चूत में लंड पेल दिया। फिर मैंने करीब 10 मिनट उन्हें और चोदा।

इस बार हम दोनों साथ-साथ छूटे और एक-दूसरे के बगल में लेट गए।

भाभी पूर्ण संतुष्ट हो चुकी थीं।
उन्होंने कहा- आज असली मज़ा आया.. तुम्हारे भैया तो ढंग से चुदाई करते ही नहीं..

एक घंटे के बाद मेरा लंड एक बार फिर तैयार था। इस बार भाभी मेरे ऊपर बैठ गईं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं।
यह दौर भी 30 मिनट तक चला और वो दो बार और मैं एक बार झड़ा। लेकिन अब थकान होने लगी थी.. खास तौर से भाभी को..
मैं उनके कमरे से जाना नहीं चाहता था.. लेकिन उन्होंने कहा- थोड़ी देर अपने कमरे में जाकर सो जाओ।

तो मैं बुझे मन से अपने कमरे में आकर सो गया.. लेकिन जोर से पेशाब लगने के कारण मेरी आँख 3 बजे फिर से खुल गई और मैं टॉयलेट मैं गया।

मैंने देखा कि भाभी ने कमरा बंद नहीं किया था.. तो उत्सुकतावश मैंने अन्दर झाँका.. भाभी बिस्तर पर नाइटी पहने हुए सो रही थीं।
मेरा मन फिर खराब हो गया.. लंड ने फिर सैल्यूट मारा और मैं धीरे से अन्दर घुस गया और उनको जगा दिया।
मैंने कहा- भाभी एक बार और..
वो फिर से नाईटी उतार कर नीचे वाले बिस्तर पर आ गई और बोली- बड़ी जबरदस्त जवानी है.. राज तुममें..
तो मैंने कहा- भाभी उमर ही ऐसी है।

वो रंडी की तरह मुस्कुराई और लेट कर उसने अपनी चूत फैला दी।
मैंने भाभी से कहा- भाभी मैं पीछे से करना चाहता हूँ।
तो वो बोली- आज तुमने मुझे जो सुख दिया है.. उसके लिए तुम कहीं भी अपना लंड डाल सकते हो.. लेकिन धीरे से करना।

वो उठ कर रसोई से तेल की शीशी ले आई और मुझे दे दी। मैंने अपनी उंगली से उनकी गाण्ड में जहाँ तक हो सकता था.. तेल डाल दिया और अपने लंड पर भी तेल लगा लिया।
उनको घोड़ी बनाकर उनकी गाण्ड में अपना लौड़ा डालने की कोशिश करने लगा।

बड़ी मुश्किल से सुपारा ही अन्दर गया कि भाभी मना करने लगी, बोली- दर्द हो रहा है..
तो मैं सिर्फ़ सुपारा डाल कर रुक गया। अब मैं भाभी की चूचियों से खेलने लगा।

कुछ ही पलों में भाभी भी उत्तेजित हो गई थी.. उन्होंने धीरे-धीरे अपनी गाण्ड को मेरे लंड की तरफ सरकाया और धीरे-धीरे पूरा लंड अपनी गाण्ड में ले लिया।

सच में दोस्तो.. गाण्ड में लंड डालकर ऐसा लगा जैसे किसी ने लंड को बुरी तरह से भींच लिया हो।
मैंने धीरे-धीर धक्के लगाने शुरू किए और फिर अपनी रफ़्तार बढ़ाता चला गया लेकिन उनकी गाण्ड बहुत कसी हुई थी।
मैंने एक हाथ से भाभी की चूची पकड़ रखी थी.. और एक हाथ की उंगली उनकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था।

हाय.. क्या मस्त नज़ारा था..
भाभी सिसकारियाँ ले रही थी.. लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में..
भाभी का जिस्म फिर से अकड़ा और वो झड़ गई थी.. दो मिनट के बाद मैंने भी सारा वीर्य भाभी की गाण्ड में ही भर दिया।
पता नहीं उनकी चूत झड़ी थी कि गाण्ड फटी.. लेकिन मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आया।

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और सो गया। सुबह जब भाभी से सामना हुआ तो उन्होंने मुस्कुराकर मुझे आँख मारी और हमारा ये सिलसिला 3 साल तक चला।

फिर मेरी माँ को कुछ शक सा हो गया और उन्होंने उनसे मकान खाली करवा लिया। कुछ दिन बाद उनकी पति का तबादला भी कहीं और हो गया और वो लोग शहर से चले गए।

लेकिन भाभी की वो मस्त चुदाई.. मैं आज तक नहीं भूल पाया हूँ। दोस्तो, आपको मेरे कहानी कैसी लगी। आपके कमेन्ट आए तो अपने दूसरे किस्से भी आप तक ज़रूर भेजने की कोशिश करूँगा।

सफर में सेक्सी भाभी की मस्त चुदाई - Safar Me Sexy Bhabhi Ki Mast Chudai

सफर में सेक्सी भाभी की मस्त चुदाई - Safar Me Sexy Bhabhi Ki Mast Chudai , सफ़र के दौरान भाभी को चोदा , गांड मारी , चूत गांड का बाजा बजाया , चोद कर खुश कर दी.

मिताली और उनके पति पंकज सहारनपुर में रहते थे, पंकज सरकारी बैंक में नौकरी करते थे, लेकिन उनका तबादला पटियाला हो गया था तो वे अपना कुछ सामान पटियाला लेकर जा रहे थे, वैसे तो काफ़ी सामान उन्होंने छोटे ट्रक से भेज दिया था पर कांच की कुछ चीज़ें, क्रॉकरी आदि अपनी कार से लेकर जा रहे थे।

हर्षित नाम का एक युवक उनके पड़ोस में ही रहता था। सामान कुछ ज़्यादा था इसलिये पंकज ने हर्षित को भी साथ चलने को कहा ताकि वहाँ जाकर सामान गाड़ी से उतारकर रखवाने में ज़्यादा दिक्कत ना हो।

रविवार का दिन होने के कारण हर्षित के कॉलेज की छुट्टी थी और वैसे भी हर्षित मिताली भाभी का कहा हुआ कभी नहीं टालता था। उनका बात करने का तरीका ही इतना लुभावना था कि जब भी वो प्यार से कोई भी काम कहती, हर्षित मना ना कर पाता था।

सितम्बर का महीना था। हर्षित की पूरी सुबह मिताली भाभी और उनके पति पंकज का सामान उनकी गाड़ी में रखवाने में निकल गई थी।

पंकज और मिताली की शादी को अभी ढाई साल ही हुए थे, अभी तक उनके कोई बच्चा नहीं हुआ है।
मिताली भाभी पंजाबी परिवार से हैं और बला की खूबसूरत हैं, उनका गोरा रंग, नीली आँखें, गदराया बदन और गुलाबी होंठ किसी भी उम्र के मर्द को पागल कर दें, और फ़िर हर्षित तो एकदम युवा है, सिर्फ़ उन्नीस साल का, उस पर मिताली भाभी का जादू चलना लाज़मी था।

वो हर्षित के पड़ोस में दो सालों से रह रही थीं, इतने समय में हर्षित और मिताली भाभी काफ़ी घुलमिल गए थे।

हर्षित तो पहले दिन से ही मिताली भाभी के हुस्न का दीवाना था।

उस दिन सुबह से ही हर्षित, मिताली भाभी और उनके पति गाड़ी में सामान रखते-रखते पसीने से लथपथ हो चुके थे।

गाड़ी सामान से लगभग भर ही चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे सारा सामान रखने के बाद किसी और के बैठने की जगह ही नहीं बचेगी।
तभी पंकज घर के अन्दर गए ताकि आखिरी बचा हुआ सामान ला सकें।

हर्षित और मिताली भाभी ने जैसे ही उन्हें घर से बाहर आने की आहट सुनी तो मुड़ कर देखा तो दोनों हैरान रह गये।
पंकज अपना 42 इंच का टीवी उठाए आ रहे थे।

‘अब इस टीवी को कहाँ रखेंगे?’ हर्षित ने मिताली भाभी को बोलते सुना।

‘मुझे नहीं पता, पर इसके बिना मेरा काम नहीं चलने वाला। इसे तो मैं लेकर ही जाऊँगा। थोड़ा बहुत सामान इधर-उधर खिसका कर जगह बन ही जायेगी।’ पंकज बोले।

हर्षित ने पिछली सीट पर देखा और कहा- पीछे तो जगह नहीं है। मेरे ल्ह्याल से आगे वाली सीट पर ही रखना पड़ेगा?
‘अच्छा? तो फ़िर तुम्हारी भाभी कहाँ बैठेंगी?’ पंकज बोले।

उनके चेहरे से लग रहा था जैसे वो गहन चिंतन में डूबे हुए हैं और कोई न कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने टीवी आगे वाली सीट को लेटाकर इस तरह से रखा कि आधा टीवी आगे ड्राईवर के साथ वाली सीट पर और आधा ड्राईवर के ठीक पीछे वाली सीट पर आ गया।

फ़िर हर्षित से पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा।

हर्षित के बैठते ही उन्होंने मिताली भाभी को भी हर्षित के साथ बैठने को कहा और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द करने की कोशिश करने लगे, पर काफ़ी कोशिश करने के बाद भी दरवाज़ा बन्द नहीं हुआ।

भाभी कहने को मोटी तो नहीं थी पर जगह ही इतनी कम थी कि किसी भी हालत में दो जने वहाँ नहीं बैठ सकते थे।

भाभी ने अपने पति को समझाने की कोशिश की- एक काम करते हैं, आज टीवी यहीं छोड़ दीजिये। आप जब अगली बार जायेंगे तो ले जाना।

‘बिल्कुल भी नहीं… कल से क्रिकेट के मैच शुरू हो रहे हैं, मेरा काम नहीं चलने वाला टीवी के बिना!’ वो बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थे।

भाभी पहले ही गर्मी से परेशान थीं, उनके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिखाई देने लगा था, उन्होंने झल्ला कर कहा- देखिये, फ़टाफ़ट फ़ैसला कीजिए, इतनी कम जगह में दो लोग नहीं आ सकते।

या तो आप अपना टीवी छोड़ दीजिये, या फ़िर हर्षित को मेरी गोद में बैठना पड़ेगा और मुझे नहीं लगता कि मैं हर्षित का वज़न झेल पाऊँगी!

इतना सुनते ही उनके पति ने झट से कहा- अरे हाँ! यह तो मैंने सोचा ही नहीं था। एक काम करो, तुम हर्षित की गोद में बैठ जाओ। वैसे भी तुम हल्की सी ही तो हो, हर्षित को ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी। रास्ता भी इतना लम्बा नहीं है, बस कुछ घण्टों की तो बात है।

पंकज हर्षित को बच्चा ही समझते थे, इसलिए उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी कि उनकी बीवी हर्षित की गोद में बैठे।

‘आपका दिमाग तो ठीक है? इतनी गर्मी में यह परेशान हो जायेगा।’ भाभी ने अपने पति को गुस्से से घूरते हुए कहा।

‘कोई दिक्कत नहीं है भाभी! वैसे भी रास्ता इतना लम्बा नहीं है और ऊपर से दूसरा कोई तरीका नहीं है।’ हर्षित ने कहा।

तभी पंकज भी बोले- सही बात है मिताली, मान जाओ ना?

मिताली भाभी के पास पंकज की बात मान लेने के सिवा कोई चारा नहीं था, उन्होंने कहा- चलो ठीक है। अगर हर्षित को दिक्कत नहीं है तो ऐसे ही कर लेते हैं। लेकिन अगर रास्ते में हर्षित को दिक्कत हुई तो थोड़ी देर गाड़ी रोक लेंगे।

भाभी ने हर्षित की ओर देखा तो उसने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया।

भाभी ने कहा- तो ठीक है। चलो सब नहा लेते हैं, गर्मी बहुत है। फ़िर चलेंगे।

हर्षित अपने घर गया और फ़टाफ़ट नहा-धोकर वापिस आ गया। रास्ता साढ़े तीन से चार घण्टे का था और काफ़ी गर्मी होने वाली थी इसलिए हर्षित ने थोड़े आरामदायक कपड़े पहनने का फ़ैसला किया और अपनी टी-शर्ट और निकर ही पहन ली।

मिताली और पंकज भी थोड़ी देर में तैयार होकर आ गए।

भाभी ने भी गर्मी को ध्यान में रखते हुए एक पतला सा कुर्ता और सलवार ही पहनी थी। पंकज ड्राईवर सीट पर बैठ गए और हर्षित पीछे की सीट पर बैठ गया। भाभी भी पीछे वाली सीट पर हर्षित की गोद में बैठ गई और गाड़ी का दरवाज़ा बन्द कर दिया।

‘तुम ठीक से बैठे हो ना?’ भाभी ने हर्षित से पूछा।

‘जी भाभी, आप चिन्ता मत करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आप तो एकदम हल्की सी हैं!’ हर्षित ने जवाब दिया तो भाभी मुस्कुराए बिना न रह सकी।

तभी उन्होंने अपने पति को चलने को कहा। उनके पति को सिर्फ़ उनका सिर ही दिखाई दे रहा था क्योंकि सारी जगह उनके टीवी ने घेर रखी थी।

‘तुम ठीक से बैठी हो ना?’ उनके पति ने पूछा।

भाभी अपनी जगह पर थोड़ा हिली और बोली- हाँ! एकदम ठीक हूँ।

गाड़ी चल पड़ी और चलते ही पंकज ने गाने चला दिये।
सफ़र लम्बा था। करीब एक घण्टा बीत गया था और गाड़ी अपनी पूरी रफ़्तार से चली जा रही थी।
मिताली आराम से बैठी गाने सुन रही थी कि तभी उन्हें अपने नीचे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ।

उन्होंने खुद को थोड़ा हिलाकर ठीक करने की कोशिश की पर अभी भी उन्हें कुछ चुभ रहा था।

वो थोड़ा ऊपर उठी और फ़िर ठीक से बैठ गई, पर अभी भी मिताली को अपने नीचे कुछ महसूस हो रहा था।

हर्षित साँस रोके चुपचाप बैठा था कि अब तो भाभी को पता लग ही जायेगा कि क्या हो रहा है।

‘मैं जब बैठी थी तब तो यहाँ ऐसा कुछ नहीं था तो अब कहाँ से…’ मिताली खुद से बातें कर रही थी और तभी अचानक से उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वह चुभने वाली चीज़ क्या है।

मिताली के गोद में बैठने के कारण हर्षित के लंड में तनाव आ रहा था और वही मिताली की गांड की दरार में चुभ रहा था।

‘हे भगवान! हर्षित का लंड मेरे बैठने के कारण खड़ा हो गया है।’ मिताली ने मन ही मन सोचा, ‘मुझे उम्मीद नहीं थी के आज भी मेरी वजह से किसी जवान लड़के का लंड खड़ा हो सकता है। कितना बड़ा होगा हर्षित का लंड? क्या सोच रहा होगा वह मेरे बारे में मन ही मन? क्या उसे भी मेरे चूतड़ों के बीच की खाई महसूस हो रही है?’ मिताली का मन ऐसे रोमांचक सवालों से प्रफ़ुल्लित हो उठा था।

मिताली ने नीचे कि ओर देखा तो उनका कुर्ता भी खिसक कर ऊपर उठ गया था और उनकी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी। एक बार तो मिताली ने सोचा कि कुर्ता नीचे कर लिया जाये, पर फ़िर मिताली ने हर्षित को थोड़ा तंग करने के इरादे से उसे वैसा ही रहने दिया।

मिताली को यह विचार बड़ा रोमांचित कर रहा था कि उनकी वजह से हर्षित उत्तेजित हो रहा है।

हर्षित के हाथ उनके दोनों तरफ़ सीट पर टिके हुए थे।
चलते-चलते एक घण्टे से ज़्यादा हो चुका था, पर अभी भी कम से कम दो ढाई घण्टे का सफ़र बाकी था।

मिताली जानती थी कि पंकज को उनके सिर के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था कि नीचे क्या हो रहा है। उनके टीवी के आड़ में सब कुछ छुपा हुआ था।

तभी मिताली ने महसूस किया कि हर्षित थोड़ा उठकर अपने आप को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था।

जैसे ही हर्षित दोबारा बैठा तो उसका लण्ड ठीक भाभी के चूतड़ों के बीच में आ गया।

मिताली का मन इस एहसास से और भी रोमांचित हो उठा और वो मन ही मन कामना करने लगी कि हर्षित कुछ ना कुछ और करे।

‘तुम ठीक से बैठे हो ना हर्षित?’ मिताली ने पूछा।

‘हाँ भाभी! मैं तो एकदम ठीक हूँ। आपको तो कोई दिक्कत नहीं हो रही ना?’ हर्षित ने इस उम्मीद में पूछा कि अगर भाभी को उसके लंड की वजह से कोई दिक्कत होगी तो वो इशारों में कुछ कहेंगी।

लेकिन मिताली ने कहा- ‘बिल्कुल नहीं! बल्कि मुझे तो अच्छा ही महसूस हो रहा है ऐसे बैठकर। तुम्हारे दोनों हाथ एक ही जगह रखे-रखे थक तो नहीं गए ना?’
हर्षित को भरोसा नहीं हो रहा था कि भाभी ने सच में वो सब कहा है, उसने जवाब दिया- हाँ भाभी, थोड़ा सा..

‘एक काम करो, तुम अपने दोनों हाथ यहाँ रख लो।’ कहकर मिताली ने हर्षित के दोनों हाथ अपनी दोनों जांघों पर रखवा लिये।

‘अब ठीक है?’

‘हाँ, अब तो पहले से बहुत बेहतर है।’ हर्षित ने खुश होकर कहा।

मिताली ने नीचे की ओर देखा तो पाया कि हर्षित ने अपनी दोनों हथेलियाँ उनकी दोनों जांघों पर रख ली थी और उसके दोनों अँगूठे मिताली की चूत के बहुत पास थे।

मिताली मन में सोचने लगी के अगर हर्षित थोड़ा सा भी अपने अँगूठों को अन्दर की ओर बढ़ाए तो उनकी चूत को सलवार के ऊपर से छू सकता है, पर मिताली जानती थी कि हर्षित इतनी आसानी से इतनी हिम्मत नहीं करने वाला।

हर्षित की छुअन से मिताली की चूत से रस निकलने लगा था और उनकी पैंटी भीगने लगी थी, उन्हें लग रहा था कि थोड़ी ही देर में यह गीलापन उनकी सलवार तक पहुँच जायेगा और तब अगर हर्षित ने उसे छू लिया तो वह समझ जायेगा भाभी के मन में क्या चल रहा है और वो कितनी गर्म हो चुकी हैं।

मिताली ने खुद ही हिम्मत करके बात आगे बढ़ाने की सोची और अपने दोनों हाथ हर्षित के हाथों पर रख लिये।

देखने में भाभी की यह हरकत बड़ी ही स्वाभाविक सी लग रही थी। फ़िर उन्होंने हर्षित के हाथों को ऊपर से धीरे-धीरे मसलना शुरू किया।

मिताली ने एक बार सिर उठाकर अपने पति की ओर देखा। अपने पति के इतनी पास होते हुए हर्षित के साथ ऐसी हरकतें करना उन्हें बड़ा ही रोमांचित कर रहा था।
मिताली ने हर्षित के हाथों को मसलते-मसलते उन्हें धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसकाने की कोशिश की ताकि हर्षित के हाथों को अपने चूत के ठीक ऊपर ला सके।

हर्षित भी अब तक समझ चुका था कि भाभी क्या चाह रही हैं, वह खुद भी वासना से भर कर पागल हुआ जा रहा था।

मिताली ने नीचे की ओर देखा तो हर्षित अपने दोनों हाथ भाभी की टाँगों के ठीक बीच में ले आया था और अपने दोनों अँगूठों से भाभी की चूत को उनकी सलवार के ऊपर से हल्के-हल्के सहलाने लगा था।

मिताली ने हर्षित का एक हाथ पकड़कर अपनी चूत के बिल्कुल ऊपर रख लिया और अपनी टाँगों को थोड़ा और चौड़ा कर लिया जिससे हर्षित अच्छे से भाभी की चूत को उनकी गीली हो चुकी सलवार और पैंटी के ऊपर से सहला पा रहा था।

मिताली ने हर्षित का हाथ पकड़कर ज़ोर से अपनी चूत पर दबा दिया तो हर्षित ने भी भाभी की चूत को थोड़ा और ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया।

अब मिताली भी वासना की आग में बुरी तरह जल रही थी, उन्होंने अपने हाथ हर्षित के हाथों के ऊपर से हटा लिए थे पर हर्षित ने अपने हाथ वहीं रखे और भाभी की चूत को रगड़ना बन्द कर दिया।

मिताली बेसब्री से इंतज़ार करने लगी कि हर्षित कुछ करे, पर शायद हर्षित आगे बढ़ने में अभी भी डर रहा था।

लेकिन मिताली जानती थी कि उसका डर कैसे दूर करना है, मिताली ने हर्षित का एक हाथ पकड़ा और उसे उठाकर अपने पेट पर अपनी सलवार के नाड़े के ठीक ऊपर रख दिया और उसके हाथ को दबा दिया और दूसरे हाथ से अपना नाड़ा खोलने लगी।

नाड़ा खोलते ही मिताली ने हर्षित का हाथ अपनी सलवार के अंदर की ओर कर दिया जिससे हर्षित का हाथ भाभी की बुरी तरह भीग चुकी पैंटी पर आ गया।

हर्षित ने भाभी की चूत को गीली पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया। वह अब भाभी की चूत की फ़ाँकों को अच्छे से महसूस कर सकता था।

मिताली ने थोड़ी देर तक तो उसी तरह हर्षित के हाथ का मज़ा लिया, फ़िर उसे पकड़कर अपनी पैंटी की इलास्टिक की तरफ़ ले जाकर उसके अन्दर की ओर धकेल दिया।

भाभी की पैंटी हर्षित और भाभी दोनों के हाथों के लिए बहुत छोटी थी, इसलिए मिताली ने अपना हाथ बाहर ही रखा और सिर्फ़ हर्षित के हाथ को ही आगे बढ़ने दिया।

हर्षित ने भाभी की चूत के होंठों को पहली बार छुआ तो उसके पूरे शरीर में गर्मी सी आती हुई महसूस हुई।
हर्षित ने भाभी की चूत की दोनों फ़ाँकों के ठीक बीच में अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया तो मिताली के मुख से ज़ोर की सिसकारी निकल गई पर गाड़ी के शोर में और गानों की आवाज़ में मिताली की आवाज़ दब कर रह गई।

मिताली की चूत एकदम गर्म होकर तप रही थी और पूरी तरह से भीगकर चिकनी हो चुकी थी।

तभी मिताली ने अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठाए और अपनी पैंटी की इलास्टिक के दोनों ओर अपने दोनों हाथों के अँगूठे फ़ंसाकर उसे नीचे की ओर खिसका दिया जिससे उनकी पैंटी और साथ ही उनकी सलवार उनके घुटनों तक नीचे खिसक गई।

मिताली के ऐसा करते ही हर्षित ने एक बार भाभी के चूतड़ सहलाए और फ़िर अपने दूसरे हाथ की उंगली भाभी की चूत में घुसा दी और उसे धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, पर पैंटी के कारण मिताली की टाँगें ज़्यादा खुल नहीं पा रही थी इसलिए मिताली अपनी पैंटी पूरी तरह उतारने के लिए थोड़ा नीचे झुकने ही लगी थी कि हर्षित ने अपने दूसरे हाथ से उनकी पैंटी को पकड़कर नीचे की ओर खींच दिया जिससे वो भाभी के टखनों तक आ गई।

तभी मिताली ने अपने पाँव ऊपर उठाए ताकि हर्षित उन्हें पूरी तरह निकाल दे।

हर्षित ने भाभी की पैंटी के साथ-साथ उनकी सलवार भी खींचकर नीचे उतार दी।

अब मिताली ने आराम से अपनी टाँगें पूरी खोल ली थीं, जितना वो खोल सकतीं थीं।

हर्षित को तो जैसे इसी मौके का इंतज़ार था, उसने तुरन्त अपनी दो उंगलियाँ भाभी की चूत में घुसा दीं।

मिताली के मुँह से हल्की सी ‘आह’ निकल गई।

‘तुम ठीक तो हो ना?’ अचानक पंकज ने पूछा।

वो मिताली के चेहरे को ही देख रहे थे।

मिताली मुस्कुराई और बोली- मैं तो एकदम ठीक हूँ। मुझे लगा था हर्षित की गोद में बैठने से दिक्कत होगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं है। मुझे लगता है यह सफ़र काफ़ी अच्छा जाने वाला है।

मिताली अपने पति से बड़े आराम से बात कर रही थी और हर्षित की उंगलियाँ भाभी की चूत को चोद रही थी।

‘और कितनी देर चलने के बाद विराम लेना है?’ पंकज ने पूछा।

‘मैं अभी रुकना नहीं चाहती, थोड़ा और आगे बढ़ना चाहती हूँ।’ मिताली ने जवाब दिया- तुम्हारा क्या विचार है हर्षित?

उन्होंने हर्षित से पूछा।

‘हाँ भाभी, मेरा भी अभी और आगे चलते रहने का मन है।’ हर्षित ने कहा।

‘अच्छा है, जितना आगे तक चलें, उतना ही बेहतर है।’ मिताली मुस्कुराते हुए बोली।
‘ठीक है ना?’ मिताली ने अपने पति से पूछा।

‘हाँ मुझे भी लगता है बिना रुके जितना आगे पहुँच जायें, उतना ही बेहतर है।’ उन्होंने जवाब दिया।

मिताली पीछे की ओर मुड़ी और हर्षित की ओर देखते हुए बोली- मुझे भी! मैं नहीं चाहती कि तुम्हें रुकना पड़े।
मिताली ने धीमी आवाज़ में कहा।

‘हर्षित?’ पंकज बोले- तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं ना तुम्हारी भाभी के गोद में बैठने से?
‘बिल्कुल नहीं! भाभी थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर अपना स्थान बदल लेती हैं जिस से एक ही जगह ज़्यादा देर भार नहीं रहता और मुझे भी आसानी रहती है।’ हर्षित पंकज से बात कर रहा था और भाभी की फ़ुद्दी में अपनी उंगलियाँ और भी गहराई में उतारे जा रहा था।

हर्षित ने फ़िर से अपनी उंगलियाँ भाभी की योनि में तेज़ी से अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी थी।

मिताली को अपनी सिसकारियाँ रोके रखने के लिए अपने होंठों को कसकर दबाए रखना पड़ रहा था।
मिताली ने कसकर हर्षित की कलाई पकड़ ली थी। ऐसा करके मिताली हर्षित को यह एहसास दिलाना चाह रही थी कि उन्हें कितना आनन्द आ रहा है और वे चाहती हैं कि हर्षित अपनी उंगलियाँ और अन्दर तक घुसाता रहे।
हर्षित भाभी का इशारा समझ कर अपनी उंगलियों को भाभी की चूत में जितनी अन्दर तक घुसा सकता था, घुसाने लगा।

मिताली ने हर्षित की उंगलियों के साथ-साथ धीरे-धीरे अपने कूल्हे भी हिलाने शुरू कर दिये।
उँग ने अपने पति की ओर देखा, खुशकिस्मती से उनके टीवी की वजह से वो कुछ नहीं देख पा रहे थे।
अगर उन्हें पता होता कि हर्षित की उंगलियाँ उनकी बीवी की चूत में घुसी हुई हैं तो जाने क्या होता।

मिताली का पूरा बदन हर्षित की उंगलियों की गति के हिसाब से सिहर रहा था।

तभी हर्षित ने अचानक से अपनी उंगलियाँ भाभी की चूत से बाहर निकाल ली।

मिताली को थोड़ी निराशा हुई, पर उन्हें ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा।

हर्षित ने तुरन्त भाभी के कुर्ते के बटन खोलने शुरू कर दिये।

मिताली ने गर्मी के कारण ब्रा नहीं पहनी थी।
जैसे-जैसे हर्षित भाभी के कुर्ते के ऊपर से नीचे तक के बटन खोल रहा था, मिताली को गाड़ी के ए.सी. की ठंडी हवा के झोंके अपनी चूचियों पर लगते महसूस हुए जिससे उनके निप्पल सख्त होने लगे।

हर्षित ने भाभी के कुर्ते का आखिरी बटन खोलकर कुर्ता सामने से पूरा खोल दिया।

अब मिताली आगे से भी बिल्कुल निर्वस्त्र हो गई थीं। हर्षित ने भाभी के नंगे बदन पर अपने हाथ ऊपर से नीचे तक फ़िराने शुरू कर दिये।
वो भाभी की चूचियों को मसल-मसल कर उनसे खेलने लगा।

मिताली ने अपनी चूचियाँ आगे की तरफ़ धकेल दी ताकि हर्षित अच्छे से उन्हें दबा सके।

मिताली ने अपने चूतड़ उठाए और अपना कुर्ता नीचे से निकाल कर हटा दिया।

हर्षित भाभी का इशारा समझ गया, वह अपने हाथ नीचे ले जाकर अपनी निकर के हुक खोलने लगा।
मिताली को एक बार फ़िर थोड़ा ऊपर उठना पड़ा ताकि हर्षित ठीक से अपनी निकर का हुक और चेन खोल सके।

हर्षित का लंड अभी भी भाभी के चूतड़ों के ठीक बीच में सटा हुआ था, मिताली ने अपने कूल्हे थोड़े और ऊपर उठा लिये।

‘सब ठीक है ना मिताली?’ उनके पति ने पूछा- क्या तुम्हें हर्षित की गोद में बैठने में दिक्कत हो रही है? क्या मैं गाड़ी रोक दूँ ताकि तुम दोनों को थोड़ी देर आराम मिल सके?

‘अरे नहीं! सब ठीक है। वो तो मैं थोड़ी जगह बदल रही थी ताकि हर्षित को दिक्कत ना हो। अगर मैं ठीक जगह पर बैठ जाऊँ तो हम दोनों के लिए बड़ा आराम हो जायेगा।’

भाभी के यह कहते ही हर्षित ने अपने निकर और अंडरवियर खींच कर नीचे उतार दिये।

मिताली को हर्षित का लंड अपने नंगे चूतड़ों के बीचोंबीच फंसता हुआ महसूस हुआ।

‘हर्षित, क्या मैं अपनी जगह थोड़ी बदलूँ ताकि तुम्हें आराम मिल सके?’ मिताली भाभी ने हर्षित से पूछा।

हर्षित ने अपने दोनों हाथ भाभी के चूतड़ों के दोनों ओर रखे और कहा- भाभी अगर आप थोड़ा ऊपर उठें तो मैं खुद को सही जगह पर ले आऊँ। फ़िर हम दोनों के लिए सब ठीक हो जायेगा।’

मिताली समझ गई कि हर्षित ऐसा क्यों कह रहा है, वो जितना ऊपर उठ सकती थीं उतना उठ गई।
हर्षित का एक हाथ उनके चूतड़ से हट गया, वो समझ गई हर्षित उस हाथ से क्या करने वाला है।
हर्षित ने अपना लंड पकड़कर भाभी की चूत के मुँह पर सेट किया और दूसरे हाथ से भाभी के चूतड़ को नीचे की ओर धकेल कर उन्हें नीचे आने का इशारा किया।

मिताली ने धीरे-धीरे अपने चूतड़ नीचे की ओर करने शुरू कर दिये।
मिताली को हर्षित के लौड़े का ऊपरी हिस्सा अपनी चूत के प्रवेशद्वार पर लगता हुआ महसूस हुआ।

मिताली और नीचे होने लगी तो हर्षित का लंड बड़ी आराम से उनकी चूत मे फ़िसलते हुए घुसने लगा।

जैसे-जैसे मिताली अपने चूतड़ नीचे ला रही थी, वैसे-वैसे हर्षित का लंड भाभी की चूत को चौड़ा करता हुआ और अंदर घुसे जा रहा था।
भाभी की गर्म और चिकनी हो चुकी चूत में लंड घुसाने से होने वाले एहसास से हर्षित के आनन्द की सीमा ना रही।

तभी मिताली खुद को रोक नहीं पाई और उनके मुँह से ज़ोर की सिसकारी निकल गई- आआह्ह्ह!!

उनके पति ने तुरन्त उनकी ओर देखा और कहा- मुझे लगता है हमें थोड़ी देर आराम करने के लिए रुक जाना चाहिये।

मिताली खुद को तब तक और नीचे करती रही जब तक कि हर्षित का लिंग पूरी जड़ तक उनकी चूत की गहराइयों में नहीं उतर गया और फ़िर अपने पति पंकज से बोली- नहीं, नहीं, रुको मत। मैं चाहती हूँ अभी तुम चलते रहो। फ़िलहाल अगले एक घण्टे तक भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं सही कह रही हूँ ना हर्षित?

‘हाँ भाभी! अब जब आप दोबारा बैठने लगीं तो मैंने खुद को सही जगह पर सेट कर लिया ताकि हमें कोई दिक्कत ना हो। बस मुझे एक बार थोड़ा ऊपर और उठना है अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो। ठीक है ना भाभी?’

‘क्या मैं भी तुम्हारे साथ-साथ ऊपर उठूँ, हर्षित?’

‘नहीं, आप बस मेरी गोद में बैठी रहिए और मैं आपको अपने साथ-साथ खुद ऊपर उठा लूँगा।’ इतना कहकर हर्षित ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लंड भाभी की चूत में और भी गहराई में घुसा दिया।

मिताली को एक बार तो लगा जैसे वो उसी पल स्खलित हो जाएँगीं।

‘चलो मैं भी खुद को थोड़ा ठीक कर लेती हूँ।’ कहकर मिताली ने अपनी गाण्ड आगे पीछे हिलाई जिससे हर्षित का लण्ड भाभी की चूत में और अच्छी तरह अन्दर-बाहर हो गया।

हर्षित के लौड़े की सवारी करते-करते मिताली ने अपने पति की ओर देखा।
हर्षित अभी भी अपना लंड पूरा ज़ोर लगाकर भाभी की चूत में घुसा रहा था और पूरी गति के साथ अपनी मिताली भाभी को चोद रहा था।

मिताली मन ही मन सोचने लगी- मेरे बेवकूफ़ पति को क्या पता कि उसकी बीवी कैसे लगभग नंगी होकर, उसके इतनी पास होकर भी एक जवान लड़के से चुदाई का आनन्द ले रही है।
अपने पति के इतनी पास होते हुए हर्षित से चुदना मिताली को बहुत ज़्यादा रोमांचित कर रहा था।

तभी हर्षित ने एक ज़ोरदार धक्का लगाकर भाभी को उनके विचारों की कैद से बाहर निकाला।

हर्षित ने धीरे से मिताली से पूछा- आपका कितनी देर में हो जायेगा भाभी?

‘बहुत जल्द हर्षित, बहुत जल्द!!’ मिताली ने उत्तर दिया।

तभी भाभी को महसूस हुआ कि उनका स्खलन होने ही वाला है, उन्होंने हर्षित के दोनों हाथ अपने चूतड़ों से हटाकर अपनी चूचियों पर रख लिए और ज़ोर से दबा दिया।

हर्षित ज़ोर से भाभी की चूचियाँ मसलने लगा और तेज़ी से अपना लंड भाभी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

तभी उसे महसूस हुआ भाभी का पूरा बदन अकड़ने लगा और उनकी चूत की अंदरूनी दीवारें उसके लंड को ऐसे दबाने लगीं जैसे वो उसे निचोड़ लेना चाहती हों।

काफ़ी क्षणों तक ऐसे ही चलता रहा।
हर्षित समझ गया कि भाभी स्खलित हो गई हैं।

यह शायद मिताली का आज तक का सबसे लम्बे समय तक चलने वाला और सबसे आनन्ददायक स्खलन था।

थककर मिताली हर्षित के सहारे टेक लगाकर पीछे की ओर लेट गई।

हर्षित अभी भी स्खलित नहीं हुआ था, वह लगातार अपने लंड को अन्दर-बाहर करते हुए भाभी की चूत चोदे जा रहा था।

तभी हर्षित ने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का लगाकर अपना लंड भाभी की चूत की गहराई में पूरा अंदर तक घुसा दिया और अपने वीर्य का फ़व्वारा भाभी की चूत में छोड़ दिया।

हर्षित का गर्मागर्म वीर्य मिताली को अपनी चूत को पूरा भरता हुआ महसूस हुआ।
मिताली तब तक ऐसे ही पड़ी रही जब तक कि हर्षित ने अपने लंड से वीर्य की आखिरी बूँद उनकी चूत में नहीं खाली कर दी।

हर्षित और मिताली भाभी दोनों ही अब तक थक चुके थे।

‘एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर लिखा हुआ है लगभग दस किलोमीटर दूर एक रेस्टोरेंट है। क्या तुम दोनों को भूख लग गई है?’ मिताली के पति पंकज ने पूछा।

‘हाँ, मेरे ख्याल से हमें कुछ खा लेना चाहिये।’ हर्षित ने कहा।

मिताली ने पीछे मुड़कर हर्षित की ओर देखा तो वह मुस्कुरा दिया- आप क्या कहती हो भाभी?’ हर्षित ने पूछा।

‘वैसे तो मैं एकदम फ़ुल हूँ, पर मेरे खयाल से कुछ हल्का-फ़ुल्का खाया जा सकता है।’ मिताली ने शरारती अंदाज़ में हर्षित की ओर आँख मारते हुए कहा।

मिताली झुकी और अपनी पैंटी उठाने लगी जो काफ़ी देर से नीचे पड़ी थी।

उसी समय हर्षित का लंड उनकी चूत से फ़िसल कर बाहर निकल गया।

मिताली ने अपने पाँव अपनी पैंटी में डाले और उसे ऊपर की ओर खींच लिया।

जैसे ही उनकी पैंटी उनकी चूत को ढकने वाली थी, तभी हर्षित ने एक बार फ़िर अपनी उंगली उनकी चूत में घुसा दी।

मिताली ने प्यार भरे अंदाज़ में हर्षित के हाथ पर थपकी दी और हर्षित ने अपनी उंगली बाहर निकाल ली।

फ़िर मिताली ने अपनी सलवार पहन कर नाड़ा बांध लिया और फ़िर अपने कुर्ते के बटन बन्द करने लगीं।

हर्षित ने भी अपनी निकर और अण्डरवीयर फ़िर से पहन लिए और अपना लौड़ा अन्दर करके ज़िप बन्द कर ली।

‘खाना खाने के बाद कितना रास्ता और बचा है?’ मिताली ने अपने पति से पूछा।

‘बस आधा घण्टा और, मेरे ख्याल से तब तक तो तुम दोनों काम चला ही लोगे?’ उनके पति ने कहा।

‘मुझे कोई दिक्कत नहीं है।’ मिताली ने अपने पति से कहा- अगर हर्षित को मेरे गोद में बैठने से दिक्कत ना हो तो मैं तो चार घण्टे और इस तरह से बैठ सकती हूँ।

‘तुम्हारा क्या कहना है हर्षित? तुम्हें तो अपनी भाभी को गोद में आधा घण्टा और बैठाए रखने में कोई दिक्कत नहीं होगी ना? मुझे लगा था तुम दोनों में से कोई एक तो अब तक परेशान हो ही गया होगा।’

‘अरे नहीं भैया! मुझे भी कोई परेशानी नहीं है। अगर भाभी चार घण्टे और मेरी गोद में बैठी रहें तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है।’ यह कह कर उसने भाभी की ओर देखा, वह पहले से ही हर्षित की ओर देखकर मुस्कुरा रही थीं।

पडोसी लड़के ने अँधेरे में जबरदस्ती चोदा - Padosi Ladke Ne Andhere Me Jabardasti Choda

पडोसी लड़के ने अँधेरे में जबरदस्ती चोदा - Padosi Ladke Ne Andhere Me Jabardasti Choda, पड़ोस का छोरा चूत का राजा बन गया, आस-पास के छोरे ने गांड फाड़ दी, धक्का मुक्की से चोद दिया.

मैं अंजली, आज फिर से एक अपनी लाइफ का मजेदार अनुभव लेकर आपके सामने हु. मुझे उम्मीद है, कि आपको मेरे पहले लिखे हुए अनुभव अच्छे लगे होंगे. मुझे आप लोगो के कमेंट का हमेशा इंतज़ार रहेगा. ताकि मुझे पता लग सके, कि आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते है और मेरे लिए आपके मन में क्या फेंटेसी है. आपके मन की फेंटेसी मुझे गरम करती है और हो सकता है, कि आपकी फेंटेसी इतनी मजेदार हो; कि वो मुझे इतना गरम कर दे कि मैं आपसे मिलने के लिए बैचेन हो उठूँ.

अगर मियां – बीवी आपस में खुले हों और एक दुसरे की इच्छाओं की रेस्पेक्ट करते हों. तो लाइफ बहुत आसान हो जाती है. मेरे और मेरे पति रजत के बीच में कुछ छुपा नहीं है और इसी वजह से हम दोनों को कोई मजेदार सेक्स करने का मौका मिलता है, तो हम उसे मिस नहीं करते है. आज मैं आपको बताती हूँ, कि किस तरह मेरे पडोसी शर्मा जी के लड़के ने लाइट ना होने का फायदा उठा कर मेरी गांड चाटी और मेरे सारे छेदों की मदमस्त चुदाई की.

दोस्तों, मैंने पहले भी बताया था, कि मेरी उम्र 43 साल है और मेरा फिगर देख कर अच्छे – अच्छे मर्दों का लंड अपना पानी छोड़ देता है. मेरे बूब्स 36 सी, कमर 32 और चुतड 38 इंच के है और मेरी मदमस्त चाल को देख कर मेरी पीठ पीछे आहे भरते हैं. चाहे वो हमारे पडोसी हों, दूध वाला, सिक्यूरिटी गार्ड या मेरे ऑफिस के मेरे साथ काम करने वाले लोग.

मुझे इस बाद का पता था और जब लोग मुझे घूर-घूर कर देखते हैं, तो मेरे दिल में एक अजीब सी ठंडक महसूस होने लगती है. ये बात ज्यादा पुरानी नहीं है. कुछ महीने पुरानी ही है. रजत अपने ऑफिस की पार्टी में गये हुए थे और रात को देर से आने वाले थे. मैं उस समय अपने फ्लैट में अकेले थी और अचानक से लाइट चली गयी. उस समय रात के १० बजे थे. मुझे कहीं भी कोई इलेक्ट्रिशियन नहीं मिलने वाला था.

रजत को फ़ोन किया, तो रजत का फ़ोन नहीं उठा. फिर, मैंने पड़ोस में जाकर शर्मा जी की डोरबेल बजायी. तो दरवाजा उनके बेटे रवि ने खोला. जब मैंने रवि को अपनी परेशानी बताई, तो वो बोला – आंटी, पापा तो सो गये है. मैं देख लेता हूँ.

रवि बाहर आ गया और मेरे पीछे – पीछे आने लगा. शायद, मेरी मटकती चाल ने उसको मदमस्त कर दिया था. उस समय मैंने एक हलके कपड़े की नाइटी पहनी हुई थी और ऊपर से बस शौल ले लिया था. शौल ने मेरे ऊपर का भाग तो ढक दिया था. लेकिन मेरी गांड नीचे से शायद नहीं ढक पायी थी.

उसने अपने घर की रौशनी में शायद मेरी गांड का वो भाग देख लिया था. वो इलेक्ट्रिक बोर्ड के पास गया. तो वो बोला, आंटी शोर्ट सर्किट हो गया है. फेस चेंज कर देता हूँ. आप वायर और प्लास दे दीजिए. मैंने घर में मोमबती जलाई हुई थी. मैंने शौल को कुर्सी पर छोड़ा और चली गयी. जब मैं वापस आई, तो मैं तो एकदम से भौचक्की रह गयी. रवि ने अपने सारे कपड़े उतारे हुए थे और वो सिर्फ अंडरवियर में था और उसका लंड तम्बू बना हुआ था और अपने लंड को अपने एक हाथ से सहला रहा था और उसके आगे के भाग को बेरहमी से खींच रहा था. मुझे देखते ही, उसने मुझे पकड़ लिया और अपनी गोदी में उठा लिया.

मैंने उसको जोर से खीच कर एक थप्पड़ रसीद किया, तो उसने मुझे वहीँ सोफे पर पटक दिया और बाहर जाकर दरवाजा बंद कर आया. वो जब वापस आया, तो मैं डरी और सहमी हुई रजत का फ़ोन लगा रही थी. लेकिन, मेरे हाथ कांप रहे थे. रवि ने मेरे हाथ से मेरा मोबाइल ले लिया और बोला – नाटक करती है छिनाल. कब तुझे किसने चोदा है. सब जानता हु मैं. बहुत दिनों से मौका ढूंढने के बाद, आज किस्मत से तू हाथ आई है.

आज नहीं छोडूंगा. मुझे डर लग रहा था, कि जवान खून है. पता नहीं क्या करेगा? फिर वो मेरे पास आया और एक ही बार में, मेरी नाइटी फाड़ दी और मैं एकदम से नंगी हो गयी. मुझे नाइटी के नीचे ब्रा और पेंटी पहन कर सोने की आदत नहीं है. उस दिन लाइट चले जाने की टेंशन में, मुझे कुछ ध्यान ही रहा. मोमबती में मेरा शरीर सोने के जैसे चमक रहा था. रवि मुस्करा रहा था और उसकी आँखों में एक चमक थी. वो बोला – साली, जिसने भी तुझे चोदा होगा, वो दुनिया का लकी आदमी होगा और आज मैं बन जाऊँगा.

फिर वो मेरे पास आ गया और मेरे बालो को पकड़ कर मेरे मुह को अपने लंड पर अंडरवियर के ऊपर से रगड़ने लगा. उसके लंड से पेशाब की बदबू आ रही थी. उसने मेरे बालो को बहुत जोर से खीचा हुआ था और मुझे लग रहा था, कि कुछ ही देर में मेरे बाल उसके हाथ में निकल जायेंगे. मैंने कहा – रवि, मुझे बहुत दर्द हो रहा है. रवि हसने लगा और बोला – अभी तो और भी दर्द होगा. अभी तो बस शुरुवात है.

फिर वो हसने लगा और मेरे सिर को अपने लंड पर और जोर से दबा दिया और अब वो भी अपनी गांड को हिलाकर मुझे अपनी बदबू सुंघा रहा था. मैं कुछ नहीं कर पा रही थी. बेबस थी उसके आगे. फिर उसने मुझे पीछे कर दिया और एकदम से अपना अंडरवियर उतार दिया और उसका फनफनता हुआ लंड मेरे मुह के आगे लहराने लगा. मुझे नहीं पता था, कि पड़ोस वाले शर्मा के बेटे का लंड इतना बड़ा होगा. देखने में तो वो शरीफ ही लगता था. उसको देख कर मेरी चुदासी आँखों में बिजली कौध गयी और मेरे होठो पर रस आ गया. रवि बोला – मज़ा आया ना, छिनाल देख कर. है ना मस्त और जवान लंड.

सही कह रहा था वो. वो केवल २२ साल था और उसके गोरे रंग के लंड पर हल्का कालापन था. उसने अब अपने लंड मेरे मुह पर हर तरफ फेरना शुरू कर दिया. उसका लंड मेरे मुह पर हर जगह मेरे होठो पर, मेरी आँखों पर और मेरी नाक पर लग रहा था और अब हलके – हलके मैं भी गरम होने लगी थी और मुझे अपनी चूत पर गीलेपन का अहसास होने लगा था. ,मेरे निप्पल अब कड़क भी होने शुरू हो गये थे.

रवि मेरी इस हालत को देख कर बोला, लगता है. छिनाल तेरे भी अरमान जाग गये और हंस पड़ा. अब मेरे चेहरे पर भी हलकी मुस्कान आ गयी थी. मैं एक बहुत पुरानी कहावत को फॉलो करने लगी थी. “अगर आप रेप होने से रोक नहीं सकते हो, तो उसे एन्जॉय करो”. मुझे नहीं लग रहा था, कि मैं रवि को रोक पाउंगी. फिर मैं रवि के लंड को अपने एक हाथ से पकड़ लिया और उसको मसलने लगी. मेरे हाथ की ताकत और गर्मी पाकर उसके लंड ने और भी जोर से झटके मारने शुरू कर दिए.

रवि अब मस्ती में अपनी गांड चला रहा था और बोल रहा.. अहहाह अहहाह आआआ.. बहुत खूब.. मस्त . आआऊअऊओ ऊऊओह्ह्ह् एस एस . फिर मैंने एकदम से आगे बढकर गप्प से उसके लंड को अपने मुह में ले लिया और मस्ती में उसको चूसने लगी. रवि ने एक हाथ अपनी गांड पर रखा और एक हाथ से मेरे बालो को पकड़ा और अपनी गांड को हिला कर मेरे मुह को चोदने लगा.

उसका लंड बहुत ही तेजी से सटास्ट अन्दर – बाहर हो रहा था और कभी – कभी मेरे गले तक पहुच जाता था. मैंने तो पागलो की तरह उसके लंड को हाथ से मसल रही थी और मस्ती में चूस रही थी. अभी १० ही मिनट हुए होंगे, कि उसके लंड ने एक बहुत ही गरम वीर्य की धार मेरे मुह में मार दी.

उसका तेज स्पीड से वीर्य झट से मेरे गले से टकराया और मेरे हलक में उतर गया. मैंने उसके लंड को पूरा का पूरा चूस लिया. और फिर मैंने उसके लंड को उगल दिया. रवि के चेहरे से पसीना टपक रहा था. फिर उसने मुझे सोफे से लगा कर उल्टा खड़ा किया, तो मैंने बोला – गांड ही मारने दूंगी. वो बोला – हाँ छिनाल, पलट हो सही.

फिर, वो अपने घुटनों पर बैठ गया और अपने हाथ से मेरे बट्स को खोलने लगा. मुझे एकदम से दर्द हुआ, तो मैंने अपनी गांड आगे कर ली. उसने फिर से मेरी गांड को पकड़ा और नीचे से आकर अपनी जीभ को मेरी चूत पर रख दिया. ऊऊऊओह्हह्ह ओह.. माय गॉड! ऐसा तो आज तक मैंने किसी भी चुदाई में नहीं देखा था. उसकी जीभ नीचे से सीधे ही मेरी चूत में घुस गयी और ऐसा लगा, कि किसी ने धारदार छुरी नीचे से एकदम से मेरी चूत में घुसा दी हो.

मैंने तो मरने ही लगीऔर अपनी गांड हिलाकर अपनी जीभ को बाहर निकालने लगी. पर उसने मेरी जांघो को कसकर पकड़ा हुआ था और मैं ज्यादा हिल नहीं सकती थी. वो अपनी जीभ से मेरी चूत के अन्दर की साईं दीवारों को चाटने में लगा हुआ था. मैं तो बस बावरी हुए जा रही थी. अब मैं ज्यादा देर कण्ट्रोल नहीं कर सकती थी. मैंने उसको कहा – बस रवि, और नहीं.. चोद डालो मुझे अब. बहुत खुजली होने लगी है अब.

रवि ने मुझे इग्नोर कर दिया. लेकिन उसने अपनी जीभ हटा ली. और फिर उसने अपनी जीभ को मेरी गांड के छेद पर रख दिया और उसको चाटने लगा. ऊऊऊओह्हह्ह क्या मस्त फीलिंग थी और वो मेरी गांड के छेद के आसपास के एरिया को चाट रहा था. फिर साथ ही साथ में उसने अपनी एक ऊँगली से मेरी चूत को रगड़ना शुरू किया. आआऊऊ बाबा.. उसकी जीभ गांड के छेद पर और ऊँगली चूत के छेद पर.

मैं तो बस पागल ही हो चुकी थी. मैंने अपने हाथ से अपने चुचे दबाने शुरू कर दिए और निप्पल को खीचना भी शुरू कर दिया. मैंने अपने होठो को अपने दातो से काट रही थी और फिर पागलो की तरह अपनी अपनी गांड को रवि के मुह पर घुमा रही थी. पूरा माहौल में मेरी सिस्कारिया हाहाहा हहह ह्ह्ह ह्ह्ह आआअ अहहाह आआ अहहाह अहहाह आआआ गूंज रही थी और मेरी साँसे बहुत तेज चल रही थी.

अचानक से मेरे शरीर ने रगड़ना शुरू कर दिया और मुझे अपनी चूत से अपना गरम माल बाहर बहने का अहसास हुआ. बहुत ही गाड़ा और बहुत सारा. रजत या किसी और साथ, जब मैं बहुत कामुक सेक्स किया था, तब मेरा इतना सारा वीर्य बाहर आया होगा.

मेरा सारा वीर्य उसकी ऊँगली के साथ चूत से बाहर आ गया. अब तो मैं पागल हो चुकी थी और अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था. मैंने एकदम से मुड़कर रवि के बालो को खीचा और उसकी खड़ा कर के उसके लंड को खीचने लगी. वो मुस्कुरा रहा था, मेरी बैचेनी पर. पर क्या करू, वो था ही इतना अच्छा और माहिर.

किसी भी लड़की या औरत को एकदम से अपना दीवाना बना दे. आज तक मैंने सेक्स तो कई के साथ किया था, लेकिन प्यार सिर्फ रजत से. लेकिन, आज मुझे फिर से रवि से प्यार होने लगा था. फिर, रवि ने मुझे सोफे के किनारे को पकड़ कर घोड़ी बना दिया और मेरे बूट्स को अपने हाथ से खोलकर उस पर थूक दिया.

फिर, थोड़ा थूक अपने हाथ में लेकर अपने लंड को रगड़कर गीला कर दिया और फिर अपने एक हाथ से अपने लंड को मेरी चूत पर सेट करने लगा और रगड़ने लगा. मैंने बहुत ही ज्यादा बैचेन हो गयी थी और फिर एक जोरदार धक्के के साथ उसने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार था.

मेरी सांस एक दम से अटक गयी. उसने मुझे सँभालने का मौका भी नहीं दिया और फिर से एक और जोरदार धक्का मारा और उसका लंड सीधा मेरी बच्चेदानी से जाकर टकरा गया. मेरे मुह से जोर से अह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआआआआआ निकल गयी और मैं सोफे के साइड पर गिरने ही वाली थी, कि उसने मुझे थाम कर खड़ा कर दिया और मस्ती में जोर से धक्के मारने लगा.

मैंने सोफे को कसकर पकड़ा हुआ था, क्योंकि उसके धक्का का फ़ोर्स बहुत ज्यादा था और मैं बैलेंस नहीं बना पा रही थी. फिर वो पुरे जोश के साथ जोरदार धक्के मार रहा था. मेरे चुचे मस्ती में हवा में झूल रहे थे और मेरे मुह से लार टपक रही थी. मुझे नहीं पता था, कि मैं कितनी बार झड़ चुकी थी. लेकिन १० मिनट के बाद, मैं उसके लंड को और लेने की हालत में नहीं थी. फिर रवि के धक्को की स्पीड बड गयी और अगले ५ मिनट में उसने एक जोर दार धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा वीर्य मेरी चूत में गिरा दिया. बहुत ही गरम था, जैसे की लावा मेरे अन्दर फुट पड़ा हो. वो जवान था, इसलिए उसके वीर्य की गरमी बहुत ज्यादा थी.

उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला था और जब उसके लंड ने पूरा का पूरा पानी मेरी चूत में छोड़ दिया. तब उसके लंड को बाहर निकाल दिया. उसके बाद, मेरी ज्यादा देर खड़ी वाली हालत नहीं थी और अब मुझे डर लगने लगा था. क्योंकि रजत कभी भी आ सकते थे. मैंने रवि को कहा, मैं चल नहीं सकती. प्लीज मुझे कपड़े पहना कर मेरे बेडरूम में पलंग पर लिटा दो. लाइट भी सही कर दो. रजत के पास दूसरी चाभी है. वो अन्दर आ जायेंगे. रवि ने मुझे कपड़े पहनाकर वहीँ बिठाया और लाइफ सही कर दी.

फिर रवि ने जगह ठीक की और मुझे बेडरूम में लिटा कर चले गया. मैंने बहुत थक गयी थी और मुझे नहीं पता चला, कि रजत कब आये. लेकिन, जब मैं सुबह उठी, तो मैं बहुत खुश थी; क्योंकि इतने जवान लंड से इतनी मस्त चुदाई मेरी बहुत टाइम बाद हुई थी.

पति के सामने पड़ोसी ने गाँड़ मारी - Pati Ke Saamne Padosi Ne Gaand Maari

पति के सामने पड़ोसी ने गाँड़ मारी - Pati Ke Saamne Padosi Ne Gaand Maari , हसबैंड के होते हुए चूतड़ फाड़ गया, मियां के सामने चूत की चुदाई , मजे से चोदा, चोद गया सेक्सी तरीके से.

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम नीता और मैंने अपने पति के एक दोस्त से चुदवाया. दोस्तों अब में आपको अपना दूसरा किस्सा बताती हूँ. उस दिन रोहन से चुदवाने के बाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और जाते वक़्त रोहन ने मुझे फिर से एक बार चोदने की ख्वाहिश जाहिर की थी. तो मैंने उससे कहा कि अगली बार जब वापस आओगे तब हम फिर से ऐसे ही करेंगे और फिर वो बैंगलोर चला गया और कुछ दो हफ़्तो के बाद वो फिर से पुणे में आया और में खुश थी..

क्योंकि वो हमारे ही घर में रहने वाला था. फिर उस दिन में उसको देखकर बहुत ही ज्यादा खुश थी और हम सबने रात का खाना कुछ जल्दी ही खा लिया.. फिर वो लोग मतलब मेरे पति और रोहन गप्पे लगाते हुए बाहर घूमने गये और इधर मैंने जल्दी से बर्तन धोकर साफ किए और उन लोगों का आने का इंतज़ार करने लगी. दोस्तों में सच कहूँ तो में चुदने के लिए तरस रही थी और करीब एक घंटे के बाद वो लोग घूम फिरकर घर वापस आए और आते वक़्त वो अपने लिए शराब लेकर आए थे.

फिर वो लोग शराब पीने बैठ गये रोहन मुझे बहुत घूर रहा था और में उसे स्माईल दे रही थी जैसे कि हमने यह सब तय किया था और रोहन बहुत लाईट ड्रिंक ले रहा था और मेरे पति को ज्यादा पीने पर मजबूर कर रहा था. वैसे भी मेरा पति बहुत ड्रिंक करता है और उसे चड़ती भी जल्दी है.

रोहन ने तीन पेग के बाद ही पीना बंद कर दिया था और मैंने देखा कि मेरे पति को अब धीरे धीरे चड़ने लगी है.. में उठी और बोली कि अपने दोस्त को बोलो कि वो तो कुछ पी ही नहीं रहा है.. मेरे मुहं से यह बात सुनकर रोहन मेरी तरफ हैरानी से देखने लगा. तो मेरे पति बोले कि अरे रोहन तुम भी पियो ना.. नीता जाओ तुम उसको गिलास भरकर दो.

फिर में उठी और बॉटल लेकर रोहन के पास गयी और उसके गिलास में थोड़ी शराब डाल दी और गिलास को उठाकर में रोहन की तरफ मुड़ गयी और बोली कि चलो अब पीना स्टार्ट करो क्योंकि अब में पिलाने वाली हूँ. तो रोहन ने धीमी आवाज़ में कहा कि में तो इसलिए ही आया था कि तुम मुझे रात भर पिलाओ.

तो में बोली कि मेरे राजा थोड़ा सब्र करो में हूँ ना और मैंने अपने पति को भी एक बड़ा पेग बनाकर दिया और उसके पास बैठकर अपने हाथ से पिलाने लगी. फिर मैंने अपने पति का एक हाथ उठाकर अपने कंधे पर रख दिया और उसके चिपककर बैठ गयी. मुझे ऐसा करते देख रोहन बहुत हैरान हो रहा था..

मैंने उसको देखा और स्माईल के साथ उसको आँख मारी. फिर मैंने अपना एक हाथ अपने पति के सीने पर रखा और उसे सहलाने लगी और पेग को खाली किया. फिर और एक बड़ा पेग बनाया और उसको दिया और बोली कि देखो आपका दोस्त अभी भी पी नहीं रहा है लगता है मुझे ही ज़बरदस्ती पिलाना पड़ेगा. तो मेरा पति कुछ नहीं बोला.. वो सिर्फ़ देख रहा था और में जाकर रोहन के पास में बैठ गयी लेकिन रोहन थोड़ा डरा हुआ था और वो बोला कि तुम्हारा पति सामने ही बैठा है तुम थोड़ी दूर बैठो.

तो में हंस पड़ी और बोली कि अब वो दूसरी दुनिया में पहुँच गया है और तू क्यों डर रहा है और आखरी बार तो मेरा पति घर में था.. तब भी तू मुझे चोदकर गया था. तो वो बोला कि अगर ऐसा है तो मेरी बाहों में आ जा और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. में भी उसकी बाहों में सिमट गयी और वो मुझे चूमने लगा. मैं उसकी पीठ को सहला रही थी तो इतने में मेरे पति के हाथ से गिलास नीचे गिर गया तो में उठी और उसको दूसरा गिलास भरकर दिया. फिर वापस रोहन के पास आ गई और रोहन ने मुझे अपनी गोद में ही बैठा लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा.

फिर मैंने अपने पति को देखा तो वो गिलास को मुहं से लगाने की कोशिश कर रहा था.. में उठी और फिर से उसको अपने हाथ से पिलाने लगी. तभी रोहन बोला कि नीता अब रहा नहीं जा रहा है छोड़ ना उस साले को.. प्लीज मेरे पास आ जा. तो मैंने कहा कि तू इसी साले की बीवी को चोदने वाला है और पहले इसको थोड़ा सा पिला दूँ. तो इतने में मेरा पति बोला कि कौन साला? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं..

मैं और रोहन बातें कर रहे है और वो मुझे अपने बीते हुए समय के बारे में बता रहा है. फिर उसके बाद में रोहन के पास आने लगी और करीब आते ही उसने मुझे फिर से गोद में बैठाया और ज़ोर-ज़ोर से मेरे तरबूज दबाने लगा और उसने मेरा पल्लू नीचे कर दिया और अपना एक हाथ मेरे ब्लाउज के अंदर डालकर मेरे निप्पल को पकड़ लिया. तो मैंने अपने ब्लाउज के हुक को खोल दिया और उसके खेलने के लिए मैदान को तैयार कर दिया. रोहन अब मेरे दोनों तरबूज अपने दोनों हाथों से दबा रहा और उन्हे मसल रहा था.

तो मैं बोली कि पहले तो इन्हे पीने के लिए तरस रहे थे.. अब सिर्फ़ दबा ही रहे हो. तो वो ज़ोर से हंसा और मुझे अपने पास में बैठाया और फिर मेरे बूब्स को चूसने लगा.. थोड़ी देर तक चूसने के बाद में बोली कि रुक जा मेरे राजा.. में पहले उसका गिलास भरकर देती हूँ.

तो रोहन बोला कि अब उसकी क्या ज़रूरत है? वो वैसे भी अपने होश में नहीं है. तो मैंने कहा कि हाँ मुझे मालूम है लेकिन फिर भी हम टेंशन क्यों ले? थोड़ा ज्यादा पिलाने से यह ज्यादा देर बेहोश रहेगा. तो रोहन बोला कि वो सब तो ठीक है लेकिन तुम्हे अपना ब्लाउज यहीं पर उतारकर जाना पड़ेगा.

फिर मैं बोली कि अच्छा आज मूड में हो.. चलो कोई बात नहीं और मैंने अपना ब्लाउज वहीं पर निकाला और पल्लू को सीधा करके मेरे पति के लिये एक और पेग बनाया लेकिन रोहन पीछे से आया और उसने मेरा पल्लू नीचे खींच लिया. फिर में चुपचाप खड़ी हो गयी तो उसने मेरे बूब्स अपने दोनों हाथों में पकड़ लिए और बोला कि अब उसको पिला. तो में हँसी और अपने पति को गिलास देने लगी..

मेरा पति मुझे सिर्फ़ देख रहा था और में उससे बोली कि अरे ऐसे क्या देख रहे हो? लो अपना पेग लो.. में तो रोहन को अपना पेग पिला रही हूँ. तो रोहन बोला कि साले में तेरी बीवी को तेरे सामने मसल रहा हूँ और तू कुछ बोल भी नहीं रहा है..

फिर मैं बोली कि धन्यवाद मुझे दो उसे नहीं.. जो तुम्हे यह सब करने दे रही हूँ और फिर रोहन ने मुझे किस किया और धन्यवाद बोला. तो मैंने कहा कि ऐसे धन्यवाद नहीं चलेगा. तो रोहन ने कहा कि तो कैसे चाहिए? फिर में बोली कि मेरे पिछवाड़े से अंदर तक जाना चाहिए. तो रोहन बोला कि इसके लिए तो मुझे तुम्हे नंगा करना पड़ेगा.

तो मैंने कहाँ कि करो ना तुम्हे किसने रोका है और मेरे इतना कहते ही उसने मेरी साड़ी को खोल दिया और मेरी पेंटी को नीचे उतारने लगा और अब मैं बिल्कुल नंगी खड़ी हुई थी और मेरा पति नशे में धुत होकर देख रहा था और मैंने भी रोहन के कपड़ों को उतारना शुरू किया और उसे नंगा कर दिया. फिर हम दोनों ने किस्सिंग स्टार्ट कर दी और इतने में मेरे पति के हाथ से ग्लास फिर से नीचे गिर गया.

तो मैंने उसका ग्लास उठाया और उसमे और शराब डालकर उसे देने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी.. इतने में रोहन ने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरी कमर को पकड़ कर धक्के मारने लगा.. मुझे बहुत अच्छा लगा. फिर में अपने पति को ग्लास देने के लिए आगे बड़ती और वो मेरी कमर को पकड़कर मुझे फिर से पीछे खींचता और अपने लंड को और अंदर घुसा देता और मैंने जैसे तैसे अपने पति को शराब का ग्लास दिया और वो अपनी आधी बंद आँखो से मुझे देख रहा था.

तो मैंने उसे अनदेखा किया और रोहन का साथ देने लगी. वो मेरी चूत को जोश में आकर बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोद रहा था. फिर रोहन बोला कि क्यों मेरा धन्यवाद करने का तरीका अच्छा लग रहा है या नहीं? तो मैंने कहा कि तुम धन्यवाद दोगे तो अच्छा ही लगेगा ना.. लेकिन मैंने तो पिछवाड़े में डालने को कहा था.. चूत में नहीं.

तो रोहन बोला कि ओह मुझे माफ़ करना.. तुम जाकर तेल लेकर आओ.. आज में तेरी गांड में धन्यवाद देता हूँ. फिर मैंने कहा कि इसमें तेल की क्या ज़रूरत है? धन्यवाद ऐसे ही देना स्टार्ट कर. फिर रोहन ने मेरी चूत में से अपने लंड को बाहर निकाला और मेरी गांड में डालने लगा और फिर उसका लंड बिना किसी रोक टोक के एकदम फिसलकर अंदर चला गया. तो रोहन मुझसे कहने लगा कि तुम्हारा पिछवाड़ा तो पूरा खुला हुआ है. क्यों अब तक कितनो से गांड मरवा चुकी हो?

फिर मैंने कहा कि तो क्या तुझे लगा में एक नई नवेली दुल्हन हूँ.. जो पहली रात में ही तेरे हाथ में आ गयी हूँ? और तुझसे पहले भी बहुत से लोगों ने हमेशा मुझे खुश रखा है और मैंने भी कभी उन्हे शिकायत का मौका नहीं दिया. फिर रोहन ने अपना लंड ज़ोर ज़ोर से मेरी गांड में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

दोस्तों मैं वैसे सही में हर रोज अपनी गांड मरवाती हूँ और मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है.. मैंने आज तक में ज्यादातर गांड ही मरवाई थी. फिर लगभग 8-10 मिनट तक मेरी गांड में अपना लंड दौड़ाने के बाद वो बहुत तेज हो गया और कुछ देर बाद मेरी गांड में ही झड़ गया और वो बोला कि आज तो मज़ा ही आ गया..

काश तुम मेरी बीवी होती. तो मैंने उससे कहा कि तो आज में तेरे सामने ऐसे ही तेरे किसी दोस्त से चुद रही होती.
फिर वो मेरी बात को सुनकर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और कहने लगा कि वो देख तेरा पति कैसे नशे में सो रहा है..

उसे तो पता ही नहीं कि उसकी बीवी अभी भी चुदने के लिए तैयार खड़ी है. तो मैंने कहा कि सोने दो उसे.. तुम्हे मुझसे मतलब है और फिर में उठकर बाथरूम में चली गयी और अपनी गांड और चूत को अच्छी तरह साफ करके आई और मैंने देखा कि वो सोफे पर बैठा था.

तो मैं जाकर उसके पास बैठ गयी और उसको अपने बूब्स की तरफ खींच लिया और अपना एक बूब्स उसके मुहं में दे दिया और रोहन मेरे बूब्स को एक छोटे बच्चे की तरह चूस रहा था और में एक हाथ से उसका सर पकड़कर बूब्स पर दबा रही थी और मज़े ले रही थी और अपने दूसरे हाथ से उसके लंड को दूसरी बार के लिए तैयार कर रही थी.

फिर जब उसका लंड खड़ा हो गया तो वो बोला कि चलो अब तुम्हारी चूत को भी एक बार धन्यवाद बोल देता हूँ और उसने मुझे पकड़कर सोफे पर ही लेटा दिया और मेरी चूत को अपने एक हाथ से फैलाकर उसमे अपना लंड डाल दिया. तो मैंने उसको अपने ऊपर खींच लिया और में उसकी गांड दबाने लगी तो वो समझ गया और उसने अपनी चुदाई का दौर शुरू किया.

तो मैं बोली कि अह्ह्ह रोहन तुम्हारा लंड अंदर तक नहीं जा रहा है.. काश यह थोड़ा और लंबा होता. तो रोहन ने बोला कि लेकिन यह मोटा तो है और अगर तुम इतनो से नहीं चुदवाती तो मेरा यह लंड भी तुम्हे बहुत मोटा लगता.

फिर वो अब और भी तेज हो गया था और मेरी चूत पर उछल रहा था और अपने लंड को मेरी चूत के आखरी हिस्से तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा था और करीब 10 मिनट के बाद वो मेरी चूत में ताबड़तोड़ धक्को के साथ झड़ गया और मैंने उसके वीर्य को अपनी चूत में स्वीकार कर लिया और उसको अपनी चूत में महसूस कर रही थी. तभी वो मुझसे बोला कि क्या तुम हमेशा ऐसे ही सबको अपनी चूत में झड़ने देती हो?

तो मैंने कहा कि बिल्कुल नहीं.. सिर्फ़ कुछ ही लोगों को और जो मुझे बहुत ज्यादा पसंद है. तो वो बोला कि इसका मतलब कि जो पसंद नहीं है उनसे भी तुम चुदवाती हो? फिर मैंने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है.. जो पसंद है में उससे ही चुदवाती हूँ लेकिन जो ज्यादा प्यारा होता है उसको ही बिना कंडोम के चोदने देती हूँ और बाकी सब कंडोम के साथ.

तो रोहन बोला कि तो में तुम्हे बहुत पसंद हूँ और मेरा मतलब कि मैं तुम्हे बहुत प्यारा भी लगता हूँ? फिर मैंने कहा कि हाँ और अब इसमे क्या झूठ बोलना और वो मेरे मुहं से यह सब बात सुनकर बहुत खुश हो गया और मुझे किस करने लगा.

तभी थोड़ी देर किस्सिंग करने के बाद वो बोला कि चलो हम कपड़े पहन लेते है और सो जाते है. तो मैंने कहा कि अगर हमे सोना ही है तो कपड़ो की क्या ज़रूरत है? वो बोला कि लेकिन तुम्हारा पति रात को उठ गया और ऐसी हालत में तुम्हे देखेगा तो क्या सोचेगा?

तो मैंने कहा कि हम उसे कपड़ो के साथ ही सोने देते है. फिर उसने भी मेरी बात मान ली और कहा कि ठीक है.. उसे हम अंदर बेडरूम में ले जाते है और हम यहीं हॉल में सो जाएँगे. फिर हम दोनों ने मेरे पति को बेडरूम में ले जाकर बेड पर लेटाया और बाहर से ताला लगाकर हम दोनों नंगे ही हॉल में सो गये!
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