तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ - Mujhe jor se chodo

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मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।

मम्मी ने बेड से उठते हुए कहा- ये कुछ ज्यादा ही हो गया।
ऋतु ने उनसे पूछा- क्या आपको ये सब अच्छा नहीं लगा मम्मी?
मम्मी ने धीरे से कहा- हम्म्म्म हाँ अच्छा तो लगा… पर ये सब एकदम से हुआ… मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.
ऋतु ने उनसे सवाल किया- पर हमें तो बड़ा मजा आया, क्या आपको मेरी चूत को चूसना अच्छा नहीं लगा… मेरी तो इतने दिनों की इच्छा पूरी हो गयी पापा के लंड से अपनी चूत मरवा कर… कितना मजा आया उनका मोटा लंड लेने में… क्या आपको नहीं आया भैया का लंड अपनी चूत में लेने में… बोलो??

सब की नजरें मम्मी की तरफ उठ गयी।
ऋतु ने पापा से पूछा- और पापा क्या आपको मेरी चूत पसंद नहीं आई??
उन दोनों को चुप देख कर चाची ने कहा- अरे… अब आप दोनों ऐसे क्यों शर्मा रहे हैं… आप दोनों को अपने बच्चों के साथ सेक्स करने में मजा आया है तो इस बात को कबूल करने में इतना झिझक क्यों रहे हो?? हमने भी तो अपनी बेटी नेहा को इस खेल में शामिल किया है और उसकी चूत चूसने में मुझे तो बड़ा मजा आता है, उसके पापा भी कल से अपनी बेटी की कसी हुई चूत की बार बार तारीफ़ कर रहे हैं.
मम्मी ने कहा- चलो ठीक है… अब हमें अपने कमरे में चलना चाहिए।

चाची ने कहा- अरे भाभी… मूड मत खराब करो… अभी तो मजा आना शुरू हुआ है… अभी तो पूरी रात पड़ी है।
मैंने मन ही मन सोचा- साली, इस चाची के बदन में आग लगी है, पूरी रात चुदवाने की तैयारी से आई थी हरामजादी।
मम्मी ने कहा- नहीं… अब और नहीं… चलो तुम दोनों अब चुपचाप सो जाओ… और आरती अजय… प्लीज… आप भी चलो यहाँ से!

हम सबने उनकी बात को मानना उचित समझा और अपने बेड पर जाकर रजाई के अन्दर घुस गए।

चाची- चलो ठीक है… तुम कहती हो तो चलते हैं। चलो अजय… अपने रूम में जाकर हम दोनों ही आपस में चुदाई करते हैं.
और चाची हमारे पास आकर हमें गुड नाईट बोली और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल दिया और बोली- काफी मजा आया… कल मिलते हैं।

सब के जाने के बाद हम तीनों अपने बेड पर नंगे रजाई में बैठे हंस रहे थे।
ऋतु- मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि हमने अपने मम्मी पापा के साथ भी चुदाई की. और इतना सब होने के बाद भी उन लोगों ने हमें फिर से इस कमरे में छोड़ दिया… हा हा हा!

नेहा ने अपनी चूत को मेरी टांगों पर दबाते हुए कहा- और मैं सच कहूं तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी काफी मजा आया होगा। वो अभी खुल कर नहीं बता रहे हैं पर तुम दोनों से सेक्स करके वो भी कम खुश नहीं थे।

ऋतु ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर कहा- तो तुम्हारा ये लंड अभी भी कुछ कर दिखाने के मूड में है क्या?
मैंने उन्हें उकसाया- मेरे लंड के कारनामे देखना चाहते हो तो उसे तैयार करो और फिर मैं तुम दोनों को दिखाता हूँ की चुदाई क्या होती है।
ऋतु ने अपनी आँखें मटकाते हुए नेहा की तरफ देखा- ओह… माय माय… लगता है किसी को अपने लंड पर कुछ ज्यादा ही गुरुर हो गया है…
और फिर वो दोनों एक साथ बोली- लगता है गुरुर तोड़ना पड़ेगा… हा हा हा…

उसके बाद जो चुदाई का खेल शुरू हुआ तो उनकी चूत के परखचे ही उड़ गए। उस रात मैंने ऋतु और नेहा की कितनी बार चुदाई की… मुझे खुद ही नहीं मालूम और वो दोनों बेचारी अपनी सूजी हुई चूत लेकर नंगी ही मुझ से लिपट कर सो गयी।

उधर अपने कमरे में पहुंचकर चाची ने शीशे वाली जगह पर ही खड़े होकर दूसरे कमरे में अपनी बेटी और अपनी भतीजी को मुझसे चुदते हुए देखकर चाचू से लगभग तीन या चार बार अपनी चूत मरवाई।

अगली सुबह मैंने अपने लंड के चारो तरफ गीलेपन का एहसास पाया, कोई मेरा लंड चूस रहा था। मैंने अपने दोनों तरफ देखा ऋतु और नेहा दोनों अपने मोटे मोटे चुचे मुझ में घुसेड़े आराम से सो रही थी।
मैंने नीचे देखा तो पाया कि आरती चाची मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही है। मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो मुस्कुरा दी और मुझे गुड मोर्निंग बोलकर फिर से मेरा लंड चाटने लगी।

मेरे शरीर की हलचल पाकर ऋतु भी जाग गयी और जब उसने देखा कि चाची मेरे लंड से ब्रुश कर रही है तो उसकी चूत भी सुबह की खुमारी में रस से सराबोर हो गयी। उसने थोड़ी जगह बना कर चाची को बेड पर आने को कहा।
चाची ऊपर आई और अपनी टांगें ऋतु के चेहरे के ऊपर करके वापिस मेरा लंड चाटने लगी।

नेहा भी अब जाग चुकी थी, अपनी माँ को सुबह सुबह नंगी लंड चूसते देख कर उसके बदन में भी आग लग गयी और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने अपने हाथ नेहा के उभारों पर रख दिए और उन्हें दबा दबाकर उन्हें और बड़ा करने लगा।

नेहा के चुचों के बारे में एक बात कहना चाहता हूँ, वो बड़े ही मुलायम है पर उसके एरोला और निप्पल उतने ही कठोर, वो किसी कील की तरह मेरे हाथों में चुभ रहे थे। मैंने उन्हें और जोर से दबाना शुरू कर दिया और उतनी ही बेदर्दी से उसके नाजुक होंठों को भी चूसना जारी रखा।

तभी दरवाजा खुला और हमारे पापा अन्दर आ गए। उन्होंने जब देखा कि अन्दर सुबह की चुदाई की तैयारी चल रही है तो वो चुपचाप अन्दर आये और अपने कपड़े उतार कर वो भी ऊपर चढ़ गए। चाची की चूत तो वो कई बार मार चुके थे और कल रात उन्होंने ऋतु की भी जम कर चुदाई करी थी।

इसलिए आज उनकी नजर नेहा के कमसिन जिस्म पर थी। नेहा जो मेरे मुंह में घुसी हुई कुछ ढूँढ रही थी, उसकी टांगें चौड़ी करके पापा ने अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे।
नेहा ने जब अपनी चूत पर अपने ताऊ जी की गर्म जीभ को पाया तो उसकी रस बरसाती चूत से एक कंपकपी सी छूट गयी- आआ आआआ आअह्ह्ह्ह… म्म्मम्म म्म… हाआआ अन्न्न… ऐसे ही… जोर से…
और वो पापा को और जोर से अपनी चूत को चूसने के लिए प्रोत्साहित करने लगी।

जवान लड़की की चूत पाकर पापा भी दुगने जोश से अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए नेहा की चूत की तलाशी लेने लगे।

वहां अजय चाचू की जब नींद खुली तो चाची को बगल में ना पाकर उन्होंने भाग कर शीशे वाली जगह देखा और वहां का नजारा देखकर वो नंगे ही हमारे कमरे में दौड़ कर चले आये। उनकी पत्नी मेरा लंड चूस रही थी और उनके बड़े भाई उनकी बेटी की चूत चाट रहे थे और उनकी पत्नी की चूत को उनकी भतीजी साफ़ कर रही थी।

कमरे में अब सिर्फ ऋतु की चूत ही बची थी जो खाली थी। चाचू झट से उसकी तरफ चल पड़े और वहां पहुंच कर अपनी लम्बी जीभ का इस्तेमाल करके ऋतु की चूत और गांड बारी बारी से चाटने लगे, पूरे कमरे में सिसकारियां गूंज रही थी।

पापा का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, वो नेहा को बेड पर लिटा कर खुद जमीन पर उठ खड़े हुए और नेहा की एक टांग को हवा में उठा कर अपना लंड उसकी छोटी सी चूत पर टिका दिया। उनका टोपा काफी बड़ा था, नेहा की छोटी सी चूत के सिरे पर वो फंस सा रहा था।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया तो नेहा दर्द से बिलबिला उठी- आआ आआआ आआआह्ह्ह्ह… धीरे डालो… बड़े पापा… धीरे…
लंड का टोपा अन्दर जाते ही बाकी का काम उसकी चूत की चिकनाई ने कर दिया। पापा का लौड़ा उस पतली सुरंग में फिसलता चला गया.
“अयीईईई ईईईई ईईई… मर… गयी.. अह..अह.. अह..अह.. अह.. अह…”
और पापा ने तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।

नेहा की छाती मेरे सीने पर रखी हुई थी, नेहा के मोटे चूचे मेरे सीने से टकरा रहे थे और उसके खुले मुंह से निकलती लार मेरी छाती पर टपक रही थी।

चाची भी उठ खड़ी हुई और मेरे दोनों तरफ टांगें करके अपनी चूत को मेरे लंड पर टिकाया और मेरी टाँगों पर बैठ गयी। अब उनके मोटे तरबूज भी मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे। मैंने हाथ बढ़ा कर उन्हें भी सहलाना शुरू कर दिया। चाची थोड़ा और आगे हुई और मेरे सीने पर लेटी हुई अपनी बेटी नेहा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी।

ऋतु जो अब तक अपनी चूत चटवा कर काफी गर्म हो चुकी थी।, उसने चाचू के मुंह से बड़ी मुश्किल से अपनी चूत छुड़वाई और उनके लम्बे लंड को एक किस करके उनके ऊपर चढ़ बैठी। बाकी काम चाचू ने कर दिया अपना खड़ा हुआ लंड उसकी रस टपकाती चूत में डाल कर।

अब हमारे कमरे में तीन चुदाई चल रही थी और सभी बड़े जोरो से आवाजें निकाल निकाल कर चुदाई कर रहे थे।

ऋतु चिल्लाई- आआआ आआआह्ह्ह… चाअचूऊऊऊऊऊ… चोदो मुझे… और जोर से… अह…
नेहा भी बोली- बड़े पापा… डालो अन्दर तक अपना मोटा लंड… आआआआह्ह… और तेज… चोदो… अपनी नेहा को बड़े पापा।
चाची भी कहाँ पीछे रहने वाली थी- आआआआअह्ह… रोहण… डाल बेटा… अपनी चाची की चूत कैसी लगी… बता ना?

मैंने चाची की आँखों में देखा और कहा- भेनचोद… कुतिया… कितने लोगों से मरवा चुकी है… तेरी माँ की चूत… साली… कमीनी.. बता मुझे?
चाची ने उखड़ती साँसों से कहा- बड़े लंड लिए है अपनी चूत में… पर अपनों का लेने में जो मजा है वो कहीं नहीं है… चोदो मुझे… दुनिया की हर चाची को तेरे जैसा भतीजा मिले जिसका इतना मोटा लंड हो तो मजा ही आ जाए… बिना पूछे डाल दिया कर अपना लंड मेरी चूत में कभी भी… कहीं भी… आआआ आआआह्ह्ह्ह…
लगता है चाची मेरे लंड से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो गयी थी।
मैंने उनके होर्न अपने हाथों में पकड़े और अपने इंजिन की स्पीड बढ़ा दी।

तभी दरवाजा दुबारा खुला और मम्मी वहां खड़ी थी, मम्मी ने अन्दर आकर पूछा- तुम लोगों को कोई शर्म है या नहीं?
मैंने उनसे कहा- हाय मॉम… गुड मोर्निंग!
मम्मी ने पापा की तरफ देखा और कहा- आप तो कम से कम इन्हें रोकते, पर आप तो खुद ही यहाँ लगे हैं अपनी भतीजी की चूत मारने में!
पापा ने जवाब दिया- पूर्णिमा, अब ये लोग हमारे कहने से रुकने वाले तो हैं नहीं और कल जब सब कुछ हो ही चुका है तो आज इन्कार करने से क्या फायदा… आओ तुम भी आ जाओ ऊपर और खा जाओ घर के लौड़े!

मैंने अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराते हुए कहा- हाँ मम्मी, आप यहाँ आओ, मेरे मुंह के ऊपर मैं आपकी चूत चूसना चाहता हूँ… बड़ी प्यास लगी है मुझे…
चाचू ने भी जोर दिया- हाँ भाभी… आ जाओ ऊपर!

मम्मी ने सभी की बात सुनी और अपना सर हिलाते हुए उन्होंने अपनी हार मान ली और उन्होंने अपना गाउन वहीं जमीन पर गिरा दिया और नंगी ऊपर बेड पर चढ़ गयी और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गई।
मेरी लम्बी जीभ उनकी चूत का इन्तजार कर रही थी।
जैसे जैसे मम्मी नीचे हुई, मेरी पैनी जीभ उनकी चूत में उतरती चली गयी.
“आआ आआआ आअह्ह्ह्ह…” मम्मी ने एक लम्बी सिसकारी मारी और मैंने अपनी जीभ से उनकी क्लिट को दबाना और चुबलाना शुरू कर दिया।

मम्मी का मुंह मेरे लंड की तरफ था जहाँ चाची मेरे लंड की सवारी करने में लगी हुई थी। चाची ने आगे बढ़ कर मम्मी के मोटे चूचों को पकड़ा और उन्हें फ्रेंच किस करने लगी। मम्मी अपनी चूत मेरे मुंह पर बड़ी तेजी से रगड़ रही थी।
मैं जिस तरह से मम्मी की चूत चाट और चबा रहा था, उन्हें काफी मजा आ रहा था। आज अपने बीच तीनों बच्चो को शामिल करके सेक्स करने का मजा लेने में लगे थे सभी बड़े लोग।

मम्मी ने अपनी दायीं तरफ देखा जहाँ उनके पति अपनी भतीजी की चूत का तिया पांचा करने में लगे थे और बायीं तरफ उनकी लाड़ली बेटी अपने चाचू के लंड को आँखें बंद किये मजे से उछल उछल कर ले रही थी और उनके नीचे लेटा उनका बेटा उनकी चूत चाटने के साथ साथ अपनी चाची को भी चोद रहा था.
इतनी कामुकता फैली है इस छोटे से कमरे में।

तभी चाची ने एक तेज आवाज करते हुए झड़ना शुरू कर दिया और वो निढाल होकर नीचे लुढ़क गयी। मेरा लंड उनकी गीली चूत से निकल कर तन कर खड़ा हुआ था। मम्मी ने जब अपने सामने अपने बेटे का चमकता हुआ लंड देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया।
मम्मी ने नीचे झुक कर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूस चूस कर साफ़ करने लगी। मैंने पलट कर मम्मी को नीचे किया और घूम कर उनकी चूत की तरफ आया और अपना साफ़ सुथरा लंड उनकी फूली हुई चूत पर टिका दिया। मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा- आई लव यू मॉम!
और अपना लंड उनकी लार टपकाती चूत में उतार दिया।

मम्मी ने लम्बी सिसकारी भरी- आआ आआआ आह्ह्ह्ह… म्म्म्म म्म…
मम्मी ने मेरा लंड पूरा निगल लिया और मेरी कमर पर अपनी टांगों का कसाव बना कर मुझे बाँध लिया और बोली- बस थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहो… मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ।

मैं मम्मी की छाती पर लेटा रहा और उनके अधखुले होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। धीरे धीरे उन्होंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैंने उनकी टांगों का जाल खोला और उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उनकी टांगों को और भी चौड़ा कर दिया और लगा धक्के पे धक्के मारने अपनी माँ की चूत में।

मम्मी के मुंह से बरबस ही बोल फूट पड़े- आआआ आअह्ह्ह… चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल अपना लंड… मादरचोद… चोद मुझे… बहन चोद… चोद मुझे… आआआ आआह्ह्ह… डाल अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत में… आआह… ह्ह्ह्हहाहा… आहा… ह्ह्ह.. हा.. अह्ह्ह्ह ह्ह…
मैंने भी मम्मी की चूत मारते हुए कहा- ले साली रंडी… बड़ी सती सावित्री बनती है… अपने देवर से चुदवाती है और मुझसे शर्मा रही थी… और अब लंड डाला है तो दुगने मजे ले रही है… कुतिया कहीं की… साली रंडी…

मम्मी ने अपनी गांड उठा कर चुदते हुए कहा- हाँ मैं रंडी हूँ… तेरी रंडी हूँ मैं आज से… चोद मुझे… घर पर जब भी तेरा मन करे चोद देना मुझे… अपने दोस्तों से भी चुदवाना अपनी रंडी माँ को… शाबाश बेटा चोद मुझे!
मम्मी पहले जितना शरमा रही थी उतनी ही खुल गयी थी अब।

पापा ने अपनी भतीजी की कसी चूत जैसी चूत आज तक नहीं मारी थी। नेहा के कसाव के आगे उनके लंड के पसीने छुट गए और उन्होंने अपनी बाल्टी नेहा की चूत में खाली कर दी पर नेहा अभी भी नहीं झड़ी थी।
चाचू के लंड को ऋतु अजीब तरीके से दबा रही थी अपनी चूत से। उन्होंने भी अपनी जवान भतीजी के आगे घुटने टेक दिए और झड़ने लगे उसकी चूत के अन्दर।

ऋतु भी बिना झड़े रह गयी, उसने नेहा को इशारा किया और उसे अपने पास बुला कर उसकी टांगों के बीच अपनी टांगें फंसा कर अपनी चूत से उसकी चूत को रगड़ने लगी।
दोनों की चूत जल रही थी और जल्दी ही उन्होंने एक दूसरे की चूत को अपने रस से नहलाना शुरू कर दिया- आआआ आआह्ह्ह… येस्स स्सस्स… बेबी… ओह… फक्क… आआआह्ह्ह!

इधर मम्मी भी मेरे लंड की सवारी को ज्यादा नहीं कर पायी और उन्होंने एक दो झटके मारे और झड़ने लगी- आआस्स आआअह्ह्ह्ह… मैं तो गयी… आआअह्ह्ह… मजा आआअ… गयाआआ… आआआ आआ आआअह्ह्ह्ह!
मैंने मम्मी की चूत की गर्मी महसूस करी और मैंने भी अपना रस अपनी जननी की चूत में उतार दिया।

चारों तरफ वीर्य और चूत के रस की गंध फैली हुई थी. सबने एक दूसरे को चूमना और सहलाना शुरु किया और बारी बारी से सब की चूत और लंड साफ़ किये और फिर सभी उठ खड़े हुए और फिर सब लोग तैयार होकर नाश्ता करने चले गए।

सुबह नाश्ता करने के बाद हम सब लोग घूमने निकल गए। आज हम पूरे परिवार के साथ घूमने निकले थे तो बड़े लोगो के साथ खुले में चुदाई नहीं कर सकते थे। कुछ देर बाद हम वापस अपने केबिन में आ गए। चाचा चाची, नेहा के साथ अपने रूम में चले गए और मैं, ऋतु और मम्मी पापा के साथ उनके रूम में चले गए।

आते ही ऋतु हरकत में आई और उसने पापा का लंड पकड़ा और उन्हें लंड से घसीटते हुए बेड पर जाकर लेट गयी और उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। पापा का खड़ा हुआ लंड सीधा ऋतु की फड़कती हुई चूत में घुस गया और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर में लपेट कर उसे पूरा अन्दर ले लिया और सिसकारने लगी- आआ आआह आअह्ह… पाआअपाआअ… म्मम्मम्मम!

मम्मी ने भी मुझे बेड पर धक्का दिया और अपनी चूत को मेरे लंड पर टिका कर नीचे बैठ गयी और मेरा पूरा लंड हड़प कर गयी अपनी चूत में!
“उयीईईई ईईईईई… अह्ह्ह- उनके मुंह से एक लम्बी सी सिसकारी निकली।

पापा ने भी चोदते हुए अपने होंठों को ऋतु के होंठों पर रख दिया। पापा के गीले होंठों के स्पर्श से ऋतु का शरीर सिहर रहा था। उसके लरजते हुए होंठों से अजीब अजीब सी आवाजें आ रही थी। अपनी पतली उंगलियाँ वो पापा के घने बालों में घुमा कर उन्हें और उत्तेजित कर रही थी। पापा के होंठ जब उसके खड़े हुए उरोजों तक पहुंचे तो उसकी सिहरन और भी बढ़ गयी, उसके मुंह से अपने आप एक मादक चीख निकल गयी- अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह… पाआआ..पाआ… म्म्म्मम्म…

ऋतु ने अपनी आँखें खोलकर देखा तो पापा अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसके निप्पल के चारों तरफ घुमा रहे थे, उसके कठोर निप्पल और एरोला पर उभरे हुए छोटे छोटे दाने पापा की कठोर जीभ से टकरा कर उसे और भी उत्तेजित कर रहे थे।
ऋतु चाहती थी कि पापा उन्हें और जोर से काटें, बुरी तरह से दबायें। वो अपने साथ उनसे वहशी जैसा बर्ताव करवाना चाहती थी पर पापा तो उसे बड़े प्यार से सहला और चूस रहे थे।

तभी पापा ने उसे जोर से चोदने लगे।
ऋतु चीखी- आआआआह… पपाआआअ… जोर से… चूसो… नाआआआअ.. अपनी बेटी को… हां.. ऐसे… हीईईई… आआआआआह्ह… काटो मेरे निप्पल को दांतों से… आआ आआअह्ह्ह्ह… दबाओ इन्हें अपने हाथों सेईईईईई… आआआआह्ह्ह्ह… चबा डालो… इन्हें ईईए… मत तड़पाओ… ना पपाआआआ… प्लीज…
ऋतु की बातें सुन कर पापा समझ गये कि वो जंगली प्यार चाहती है इसलिए उन्होंने अपनी फूल सी बेटी के जिस्म को जोर से मसलना और दबाना, चूसना और काटना शुरू कर दिया।

मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था। आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे मोटे चुचे मेरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे। मैं उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एड़ियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था।

मम्मी के मुंह में सिसकारियों की झड़ी लगी हुई थी- उफ्फ्फ… ओफ्फ्फ.. ओफ्फ्फ्फ़.. अआः अह अह अह अह अह अहोफ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… ओफ्फ्फ्फ़… फक्क.. मीई… अह्ह्ह्ह्ह… हाआआआन…
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया- आआ आआअह्ह्ह्ह… मैं… गयीईइ… ओह्ह्ह्… गॉड…

मैंने मम्मी को नीचे लिटाया और अपना लंड निकाल कर उनकी दोनों टांगें उठा कर अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया। उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयी। मैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोटी और फूली हुई गांड मारना चाहता था। आज मौका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड पर और एक तेज धक्का मारा।
वो चिल्ला पड़ी- आआआ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआ आआआह्ह्ह्ह…
मॉम की गांड का कसाव सही में लाजवाब था।

मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये। गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था। मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी। मम्मी ने अपनी चूचों को पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिसकारियां सी भरने लगी- आआ आआआ आअह्ह्ह… म्मम्मम्म… ओफ्फ्फ… ओफ्फ्फ… अह्ह्ह्ह… शाबाश बेटा… और तेज करो… हाँ ऐसे ही… आआ आह्ह्ह्ह…
मम्मी अब दोबारा उत्तेजित हो रही थी, मेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी.

और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया- आआआआह्ह… मॉम्म्म… मैं… आआया… आआआआ … आअह्ह्ह…
मम्मी ने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली- आजा… आआआ… मेरे…लाल्ल… आआआअह्ह्ह
और वो भी झड़ने लगी।
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये मेरे लंड को अपनी गांड में लिए लेटी रही।

पापा भी आज काफी खूंखार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतु की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्कों से।
ऋतु तो जैसे भूल ही गयी थी कि वो कहाँ है। अपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी- आआआआआह्ह्ह… पपाआआआ और तेज मार साले… बेटी चोद… मार अपनी बेटी की चूत… आआआह… माआअर… कुत्ते… ओफ्फफ्फ्फ़… अयीईईईई…

वो बड़बड़ा भी रही थी और सिसकारियां भी मार रही थी। जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतु ने अपनी टांगें पापा की कमर के चारों तरफ लपेट ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबा कर और उनके होंठों को अपने होंठों में फंसा कर वो झड़ने लगी।
अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही पापाके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए और वो भी झड़ते हुए ऋतु के नर्म और मुलायम होंठों को काटने लगे… और उसके ऊपर ही ढेर हो गए।

थोड़ी देर बाद हम सभी चाचू कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए। अन्दर अजय चाचू और आरती चाची, नेहा के साथ थ्रीसम कर रहे थे।

अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी आरती चाची की चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल रहे थे और वो चुदक्कड़ आरती चाची तो लंड को देख कर बिफर सी गयी और चाचू के मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी।

नेहा भी अपनी माँ की कमर पर गांड रखकर लेटी हुई थी और अपनी माँ के होंठों और उनके चूचों को चूस रही थी। चाचू भी पीछे से नेहा की चूत और गांड चाट रहे थे।

हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए। मैंने देखा कि चाची ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी। उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था। उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे और उसकी टांगें हवा में थी।

आरती चाची हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोली- आओ भाभी… यहाँ आ जाओ… बड़ा ही मजा आ रहा है… आआ आ आआ आआअह्ह्ह्ह…

हम सभी अभी अभी चुदाई करके आये थे इसलिए थोड़ा थक गए थे। हमने ये बात चाचू को बताई और कहा- आप लोग मजे लो, हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे और फिर शामिल भी हो जायेंगे।
और वो तीनों फिर से अपनी चुदाई में लग गए।

मम्मी, ऋतु और मैं बड़े ही गौर से चाचा को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा भी उन्हें देख कर फिर से ताव में आने लगे थे। चाची के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे।
चाची तो पहले से ही पापा के लंड की दीवानी थी पर आज उसकी चूत में पापा का लंड भी नहीं गया था। इसलिए वो आगे गए और चाची के पास जा कर खड़े हो गए।
आरती चाची ने जब देखा कि उनके जेठ बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रहे है तो उसने पापा पुचकार कर अपने पास बुला लिया और नेहा को उठा कर, पापा को अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल डाल दिया।

पापा ने अपने दांतों से चाची के दाने को चूसना शुरू कर दिया… नीचे से चाचा का लंड और ऊपर से अपने दाने पर जेठ के होंठों का दबाव पाकर आरती चाची लंड पर नाचने सी लगी। पापा तो जैसे चाची के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे। वो अपने छोटे भाई को उसकी पत्नी की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए।

चाची ने जब देखा कि मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा, मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी। उसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर पापा का लंड पकड़ लिया। फिर चाची ने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पूरे शवाब पर आ गया।

चाचू ने जब देखा कि पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने चाची की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले- भैय्या आप आ जाओ… आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत!
पापा ने कहा- अरे नहीं अजय… ऐसे कैसे… तुम एक काम करो… तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मारूँगा।

चाची भी खुशी खुशी यह मान गयी। पापा का लण्ड बिल्कुल सूखा था तो उन्होंने चाची से कहा- तुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ, वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से तुम्हारी चूत में डाल दूंगा जिससे मेरा लौड़ा चिकना हो जाए।
चाची ने उनकी बात समझते हुए हाँ बोल दिया।

उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी। नेहा भी उठकर हमारे पास आ गयी थी। ऋतु भी अपने होंठों पर जीभ फिरा कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी।

अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने चाची को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया। नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था।
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी पर और एक करार झटका मारा।

चाची- अयीईईई ईईई… मररर… गयीईईई… अह्ह्ह्हह्ह!
करते हुए लुढ़क कर चाचू के ऊपर गिर गयी।

पापा का मोटा लंड चाची की चूत के अन्दर घुस गया था। उसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे, उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दिया। पीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा चाची के मोटे चूतड़ों को थामे जोर जोर से धक्के मारने लगे।

चाची की सिसकारियां गूंजने लगी मजे के मारे ‘हम्म्म्म… अ हा हा अ अह अह.. आ… ऊओफ उफ ओफ्फोफ़… ऑफ़… ऑफ़ ऑफ़.. उफ.. ऑफ… ऑफ.. फ़… आह… आह्ह… म्मम्मम जोर से करो ना… भाई साब… प्लीज… और तेज मारो…

तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया चाची की चूत से क्योंकि अब चाचू की बारी जो थी। वो परेशान सी हो गई लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड डाल दिया और वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में।
पापा ने भी अपना गीला लंड चाची की गांड के छेद पर रख दिया। वो समझ गयी और अपने दोनों हाथों से अपनी गांड के छेद को फैलाने लगी।

पापा के एक झटके ने उन्हें चाचू के ऊपर फिर से गिरा दिया और इस बार पापा का लंड उसकी गांड को चीरता हुआ अन्दर जा धंसा.
वो चीखी- आआआआअह्ह्ह्ह… मररर… गयीईईई… अह्ह्हह्ह्ह…

पापा ने अगले दो चार और तेज झटकों ने अपना पूरा आठ इंच लंड चाची की गांड में घुसा दिया था। नीचे से चाचू ने फिर से चाची के दूध पीना शुरू कर दिया। वो हिल भी नहीं पा रही थी। अब दोनों भाई चाची की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे… बड़ा ही कामुक दृश्य था।

ऋतु भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुग्ध सी उन्हें देख रही थी। उसने अपने पूरे कपड़े उतार फैंके और मेरे से लिपट गयी। मेरे कपड़े भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे।
दो लंड से चुद रही आरती चाची अचानक जोर जोर से चिल्लाने लगी- आआआ आआआह्ह… अह.. अह.. अह.. अ हा.. आह.. आह. आह.. आह… उफ.. उफ..उफ.. आआ आआ आअह्ह और तेज मारो… आआआ आअह्ह मजा आ गया!
और चाची ने अपना रस छोड़ दिया चाचा के लंड के ऊपर।
पर अभी भी उनके दोनों छेदों की बराबरी से चुदाई चल रही थी।

तभी ऋतु ने मुझे धक्का देकर नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टिका कर उसके ऊपर बैठ गयी और धक्के मारने लगी। मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा।
मम्मी भी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी भतीजी नेहा की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगी। नेहा ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए और दोनों 69 की अवस्था में एक दूसरी को चूसने लगी।

मैंने अपनी बहन की चूत को ऐसे चोदा कि उसकी चीखें निकल गयी और वो भी झड़ने लगी- आआआ आअह्ह्ह्ह… रोहाआआन्न.. मैं तो गयीईई…
और वो भी गहरी साँसें लेने लगी।

मैंने भी चारों तरफ देखा, चाची को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थे। मम्मी और नेहा भी एक दूसरे की चूत चाट रही थी।

मैंने भी ऋतु को पीछे घुमाया और अपना लंड ऋतु की गांड के छेद में फंसा दिया। ऋतु को जैसे ही मेरे मोटे लंड का अहसास अपनी गांड के छेद में हुआ, वो सिहर उठी, उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और मैंने भी एक तेज शोट मारकर अपना लंड उसकी गांड में धकेल दिया।
वो चिल्ला उठी- आआ आआ आआ आआह्ह्ह…

मैं ऋतु की गांड मैं अपना लण्ड पेल रहा था और मम्मी और नेहा एक दूसरी की चूत को चाटकर झड़ने लगी औऱ फिर उन दोनों ने एक दूसरी के रस को चाट कर साफ कर दिया। नेहा अब मम्मी के ऊपर निढाल होकर गिर पड़ी।

तभी पापा ने अपना लण्ड चाची की गांड से बाहर निकाल दिया। चाची ने हैरानी से पीछे मुड़ कर देखा और फिर पापा ने अपना लंड उनकी चूत पर टिका दिया। चाचू का लंड पहले से ही वहां पर था।

पापा के मोटे लंड का अहसास पाकर चाचू ने अपना लंड बाहर निकलना चाहा पर पापा ने दबाव डाल कर चाचू के लंड को बाहर नहीं आने दिया और अपना लंड चाची की चूत में फंसा कर एक तेज झटका मारा।

चाची की चूत के धागे खुल गए, उनका मुंह खुला का खुला रह गया- अयीईईई ईईईईईई… मर… गयीईई…साले कुत्ते… भेन के लंड… निकाल अपना लौड़ा मेरी चूत से… फट गयी… आआआ आआआह्ह्ह्ह!
चाची की आँखों से आंसू आने लगे, उनकी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे। चाची की चूत में तेज दर्द हो रहा था। शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा था। पर पापा नहीं रुके और उन्होंने एक और शोट मार कर अपना लंड पूरा उनकी चूत में डाल दिया।

चाचू के लंड के साथ अब उनका लंड भी चाची की चूत में था। उन दोनों का लंड एक दूसरे की घिसाई कर रहा था और दोनों की गोलियां एक दूसरे के गले मिल रही थी। चाची के लिए ये एक नया अहसास था, उनकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए, ये सोच कर पापा ने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। चाचू ने भी पापा के साथ ताल मिलायी और वो दोनों चाची की चूत में अपने अपने लंड पेल रहे थे।

दो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखाने लगे और चाची की दर्द भरी चीखें मीठी सिसकारियों में बदल गयी- आआआ आआह आआह्ह्ह्ह… म्मम्मम्म… साले कुत्तो… तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली… आआआ आअह्ह्ह पर जो भी है… म्मम्मम्म… मजा आ रहा है… मारो अब दोनों… मेरी चूत को… आआआआह्ह्ह्ह…
और फिर तो पापा और चाचू ने चाची जो रेल बनायी… जो रेल बनायी… वो देखते ही बनती थी।
आरती चाची की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी।

सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोड़ा, वो चिल्लाए- आआआ आअह्ह्ह्ह… वाह… मजा आ… गयाआआ!
चाची भी अपनी चूत में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसा कर कूदने लगी। जल्दी ही चाचू और चाची भी एक साथ झड़ने लगे. आआआ आअयीईई ईईई… म्मम्मम्म… मैं तो गयी…आआह आआअह्ह्ह्ह… ऊऊओफ़ गॉड!

मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब था, ऋतु तो ना जाने कितनी बार झड़ चुकी थी, वो फिर से झड़ने लगी तो मैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया। हम दोनों का पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा।
ऋतु उठी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया। सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा और हम सभी की हंसी निकल गयी।

अगले तीन दिनों तक हम सभी ने हर तरीके से एक दूसरे को कितनी बार चोदा, बता नहीं सकता और अंत में वो दिन भी आ गया जब हमें वापिस जाना था।

मुझे इतना मजा आज तक नहीं आया था। मैंने इस टूर पर ना जाने कितनी चूतें चोदी थी और कितनी बार चोदी, मैं गिनती भी नहीं कर पा रहा था।
चाचा चाची, नेहा के साथ अपनी कार में सवार हो कर घर के लिए निकल गए और हम लोग भी अपने घर चल दिये थे।

वापिस जाते हुए मैं कार में बैठा सोच रहा था कि कैसे विकास और सन्नी को ऋतु की चूत दिलाई जाए और इसके लिए कितना चार्ज किया जाए। मैं तो ये भी सोच रहा था कि मम्मी को भी इसमें शामिल कर लेना चाहिए.
देखते हैं।

तभी मम्मी के फोन की घंटी बज उठी और उन्होंने कहा- अरे… दीपा का फोन है.
और ये कहते हुए उन्होंने फोन उठा लिया और बातें करने लगी।
दीपा मम्मी की छोटी बहन है यानी हमारी मौसी! वो मम्मी की तरह ही गोरी चिट्टी हैं, बाल कटे हुए, दुबली पतली। पर उनके चुचे देख कर मेरे मुंह में हमेशा से पानी आ जाता था। वो गुजरात में रहती हैं और उनके पति सरकारी जॉब करते हैं। उनके दो बच्चे हैं अयान और सुरभि, दोनों लगभग हमारी ही उम्र के हैं।

मैं गोर से उनकी बातें सुनने लगा। बात ख़त्म होने के बाद मम्मी ने खुश होते हुए कहा- अरे सुनो… दीपा आ रही है अपने परिवार के साथ। वो लोग भी छुट्टियों में घुमने के लिए शिमला गए थे और वापसी में वो लोग कुछ दिन हमारे पास रुकना चाहते हैं।

मम्मी की बात सुनकर पापा बड़े खुश हुए, उनकी नजर हमेशा अपनी साली पर रहती थी, ये मैंने कई बार नोट किया था पर दीपा मौसी बड़े नकचढ़े स्वभाव की थी। वो पापा की हरकतों पर उन्हें डांट भी देती थी इसलिए पापा की ज्यादा हिम्मत नहीं होती थी पर अब बात कुछ और थी। मम्मी पापा हमारे साथ खुल चुके थे इसलिए वो खुल कर बात कर रहे थे हमारे सामने।

पापा बोले- इस बार तो मैं इस दीपा की बच्ची की चूत मार कर रहूँगा। बड़े सालों से ट्राई कर रहा हूँ, भाव ही नहीं देती साली।
मम्मी ने कहा- अजी सुनो… तुम ऐसा कुछ मत करना। वो पहले भी कई बार मुझसे तुम्हारे बारे में बोल चुकी है और इस बार तो उसके साथ सभी होंगे। उसके बच्चे और उसका पति हरीश भी। तुम ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे उसे कोई परेशानी हो… समझे?
“देखेंगे…” पापा ने कहा और ड्राइव करने लगे।

जल्दी ही हम सभी घर पहुँच गए और सीधे अपने कमरे में जाकर बेसुध होकर सो गए। ऋतु मेरे साथ मेरे कमरे में ही सो रही थी वो भी नंगी पर हमारे में इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि चुदाई कर सकें, सफ़र में काफी थक चुके थे।

ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली - Reetu ne chut chudai ke liye ungli daali

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ऋतु और नेहा भी वापिस आ चुकी थी, नेहा थोड़ी लड़खड़ा कर चल रही थी, उस की मासूम चूत सूज गयी थी मेरे लंड के प्रहार से। ऋतु ने उसे पेनकिलर दी और नेहा उसे खा कर सो गयी।

मैं भी घुस गया उन दोनों के बीच एक ही पलंग में और रजाई ओढ़ ली.

मजे की बात ये थी कि हम तीनों भाई बहन नंगे थे। सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गयी और मैंने पाया की नेहा वहीं शीशे वाली जगह से अन्दर देख रही है। मैंने ऋतु की तरफ देखा पर वो सो रही थी। नेहा नंगी खड़ी दूसरे रूम में देख रही थी।

मैं उठ कर पास गया और उसके गोल गोल चूतड़ों पर अपना लंड टिका कर उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने मुस्कुरा कर पीछे देखा और मुझे जगह देते हुए साइड हो गयी। मैंने अन्दर देखा कि चाचू और चाची 69 की अवस्था में एक दूसरे के गुप्तांगों को चूस रहे थे… क्या गजब का सीन था।

मैंने मन ही मन सोचा ‘सुबह सुबह इन को चैन नहीं है.’ और नेहा की तरफ देखा… उस की साँसें तेजी से चल रही थी; अपने मम्मी पापा को ऐसी कामुक अवस्था में सुबह देखकर वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी; उसकी चूत में से रस बहकर जांघों से होता हुआ नीचे बह रहा था।

मैंने मन ही मन सोचा कितना रस टपकाती है साली… उसके होंठ कुछ कहने को अधीर हो रहे थे। उसकी आँखों में कामुकता थी, एक निमंत्रण था… पर मैंने सोचा चलो इसको थोड़ा और तड़पाया जाए और मैंने उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और वापिस अन्दर देखने लगा।

अन्दर उन्होंने अपना आसन तोड़ा और चाची उठ कर चाचू के सामने आ गयी और उनका लंड मुंह में डाल कर चूसने लगी। अजय चाचू की आँखें बंद होती चली गयी। आरती चाची किसी प्रोफेशनल पोर्न आर्टिस्ट की तरह चाचू का लंड चूस रही थी।
मेरा तो दिल आ गया था अपनी रांड चाची पर… जी कर रहा था कि अभी अन्दर जाऊं और अपना लौड़ा उसके मुंह में ठूस दूं… साली कुतिया।

यहाँ नेहा काफी गरम हो चुकी थी, वो अपना शरीर मेरे शरीर से रगड़ रही थी, अपने चुचे मेरे हाथों से रगड़ कर मुझे उत्तेजित कर रही थी। मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की और अन्दर ही देखता रहा पर मेरा लंड मेरी बात कहाँ मानता है, वो तो खड़ा हो गया पूरी तरह।

जब नेहा ने देखा कि मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ तो वो मेरे सामने आई और मेरे लबों पर अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने लगी और अपना पूरा शरीर मुझ से रगड़ने लगी। अब मेरी सहन शक्ति ने जवाब दे दिया और मैंने भी उसे चूमना शुरू कर दिया और मैं उसे जोरों से चूसने और चाटने लगा। मैंने अपने हाथ उसके गोल और मोटे चूतड़ों पर टिकाया और उसकी गांड में उंगली डाल दी।
वो चिहुंक उठी और उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी और अपनी टाँगें मेरे चारों तरफ लपेट ली।

मेरी उंगली मेरी बहन की गांड में अन्दर तक घुस गयी। वो उसे जोर जोर से हिलाने लगी; मेरे मन में उसकी गांड मारने का विचार आया पर फिर मैंने सोचा अभी कल ही तो इसने चूत मरवाई है… इतनी जल्दी गांड भी मार ली तो बेचारी का चलना भी दूभर हो जाएगा इसलिए मैंने अपनी उंगली निकाल कर उसकी रस उगलती चूत में डाल दी।

नेहा तो मस्ती में आकर मुझे काटने ही लगी और इशारा करके मुझे बेड तक ले जाने को कहा। मैं उल्टा चलता हुआ बेड तक आया और उसे अपने ऊपर लिटाता हुआ नीचे लेट गया। उस से सहन नहीं हो रहा था, उसने मेरे लंड को निशाना बनाया और एक ही बार में मेरे लंड को अपनी कमसिन चूत में उतारती चली गयी।

उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज के साथ मेरा पप्पू उसकी पिंकी के अन्दर घुसता चला गया…”म्म्म्म म्म्म्मम्म…” आनंद के मारे उसकी आँखें बंद होती चली गयी। पास सो रही ऋतु को अंदाजा भी नहीं था कि हम भाई बहन सुबह सुबह फिर से चूत लंड खेल रहे हैं।
नेहा मेरा लंड अपने तरीके से अपनी चूत के अन्दर ले रही थी, वो ऊपर तक उठ कर आती और मेरे लंड के सुपारे को अपनी चूत के होंठों से रगड़ती और फिर उसे अन्दर डालती। इस तरह से वो हर बार पूरी तरह से मेरे लंड को अन्दर बाहर कर रही थी।

नेहा की चूत के रस से काफी चिकनाई हो गयी थी इसलिए आज उसे कल जितनी तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि उसे आज मजे आ रहे थे। उसके बाल्स जैसे चुचे मेरी आँखों के सामने उछल रहे थे, मैंने उन्हें पकड़ा और मसल दिया; वो सिहर उठी और अपनी आँखें खोल कर मुझे देखा और फिर झटके से मेरे होंठों को दबोच कर उन्हें अपना अमृत पिलाने लगी।

उसके धक्के तेज होने लगे और अंत में आकर वो जोरो से हांफती हुई झड़ने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ाई और 8-10 धक्कों के बाद मैं भी झड़ने लगा… अपनी सेक्सी बहन की चूत के अन्दर ही।
नेहा धीरे से उठी और मेरे साइड में लुढ़क गयी और मेरा लंड अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी और उसे साफ़ करके अपनी चूत में इकठ्ठा हुए मेरे रस में उंगलियाँ डालकर उसे भी चाटने लगी और फिर वो उठी और बाथरूम में चली गयी।

मैं थोड़ा ऊपर हुआ और सो रही नंगी ऋतु के साथ जाकर लेट गया। उसने भी अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया और मुझ से चिपक कर सो गयी। मैं बेड पर पड़ा अपनी नंगी बहन को अपनी बाँहों में लिए अपनी किस्मत को सराह रहा था।

9 बजे तक ऋतु भी उठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर मेरे होंठों पर एक मीठी सी पप्पी दी और बोली- गुड मोर्निंग जानू…
जैसे कोई नव-विवाहित अपने पति को बोलती है।
मैंने भी उसे जवाब दिया और चूम लिया। मैंने नेहा को भी उठाया और उसे भी उसी अंदाज में गुड मोर्निंग बोला।

हम जल्दी से उठे और कपड़े पहन कर बाहर की तरफ चल दिए। बाहर मम्मी पापा, चाचू चाची सेंट्रल टेबल पर बैठे न्यूज़ पेपर के साथ चाय पी रहे थे।

हमें देख कर पापा बोले- अरे बच्चो, गुड मोर्निंग… कैसी रही तुम्हारी रात, नींद तो ठीक से आई ना?
मैं- गुड मोर्निंग पापा, हाँ हमें बहुत बढ़िया नींद आई… मैं तो घोड़े बेच कर सोया।
ऋतु- और मैं भी, मुझे तो सोने के बाद पता ही नहीं चला कि मैं हूँ कहाँ?

नेहा भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, वो बोली- और मेरा तो अभी भी उठने को मन नहीं कर रहा था… कितनी प्यारी नींद आई कल रात।
वो हल्के से मुस्कुरायी और हम दोनों की तरफ देखकर एक आँख मार दी।
मम्मी- अरे इन पहाड़ों पर ऐसी ही नींद आती है… अभी तो पूरे दस दिन पड़े हैं अपनी नींद का पूरा मजा लो बच्चो…
मैं- मम्मी पापा, हमें इस बात की बहुत ख़ुशी है कि इस बार आप लोग हमें भी अपने साथ लाये.. थैंक्स ए लोट…
पापा- यू आर वेल्कम बेटा, चलो अब जल्दी से नहा धो लो और फिर हमें बाहर जा कर सभी लोगों के साथ नाश्ता करना है।

हम सभी नहाने लगे। मेरी पेनी नजरें यह बात पता करने की कोशिश कर रही थी कि ये दोनों जोड़े कल रात वाली बात का किसी भी तरह से जिक्र कर रहे है या नहीं… पर वो सब अपने में मस्त थे, उन्होंने कोई भी ऐसा इशारा नहीं किया।

तैयार होने के बाद हम सभी बाहर आ गए और नाश्ता किया। हम तीनों एक कोने में जाकर टेबल पर बैठ गए, वहां हमारी उम्र के और भी युवा जन थे, बात करने से पता चला कि वो सभी भी पहली बार इस जगह पर आये हैं और ये भी कि यहाँ की टीम ने बच्चे लाने की छूट पहली बार ही दी है।

हम तीनों ने नाश्ता किया और वहीं टहलने लगे। ऋतु ने नेहा को गर्भनिरोधक गोलियां दी और उन्हें लेने का तरीका भी बताया। वो भी ये गोलियां पिछले 15 दिनों से ले रही थी और वो जानती थी की नेहा को भी अब इनकी जरूरत है।
नेहा गोली लेने वापिस अपने रूम में चली गयी। मैं और ऋतु थोड़ी और आगे चल दिए।

पहाड़ी इलाका होने की वजह से काफी घनी झाड़ियाँ थी। थोड़ी ऊंचाई पर ऋतु ने कहा- चलो वहां चलते हैं।
हम बीस मिनट की चढाई के बाद वहां पहुंचे और एक बड़ी सी चट्टान पर पहुँच कर बैठ गए। चट्टान के दूसरी तरफ गहरी खायी थी। वहां का प्राकृतिक नजारा देखकर मैं मंत्रमुग्ध सा हो गया और अपने साथ लाये डिजिकैम से हसीं वादियों के फोटो लेने लगा।

मेरे पीछे से ऋतु की मीठी आवाज आई- जरा इस नज़ारे की भी फोटो ले लो।
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी… मेरी जवान बहन ऋतु उस बड़ी सी चट्टान पर मादरजात नंगी लेटी थी। उस ने ‘कब अपने कपड़े उतारे और यहाँ क्यों उतारे’ मेरी समझ में कुछ नहीं आया… उस ने अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाली और अपना रस खुद ही चूसते हुए मुझे फिर बोली- कैसा लगा ये नजारा?

मैं- ये क्या पागलपन है ऋतु… कोई आ जाएगा, यहाँ ये सब करना ठीक नहीं है…
पर मेरा लण्ड ये सब तर्क नहीं मान रहा था, वो तो अंगड़ाई लेकर चल दिया अपने पूरे साइज़ में आने के लिए।
ऋतु- कोई नहीं आएगा यहाँ… हम काफी ऊपर हैं अगर कोई आएगा भी तो दूर से आता हुआ दिख जाएगा… और अगर आ भी गया तो उन्हें कौन सा मालूम चलेगा कि हम दोनों भाई बहन हैं। मुझे हमेशा से ये इच्छा थी कि मैं खुले में सेक्स के मजे लूं.. आज मौका भी है और दस्तूर भी।

मैंने उसकी बातें ध्यान से सुनी, अब मेरे ना कहने का कोई सवाल ही नहीं था, मैंने बिजली की तेजी से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। मेरा खड़ा हुआ लंड देख कर उसकी नजर काफी खूंखार हो गयी और उसकी जीभ लपलपाने लगी मेरा लंड अपने मुंह में लेने के लिए।

मैंने अपना कैमरा उठाया और उसकी तरफ देखा, वो समझ गयी और उसने चट्टान पर लेटे लेटे एक सेक्सी पोज लिया और मैंने उसकी फोटो खींच ली।
बड़ी सेक्सी तस्वीर आई थी।
फिर उसने अपनी टाँगें चौड़ी करी और अपनी उंगलियों से अपनी चूत के कपाट खोले। मैंने झट से उसका वो पोज कैमरे में कैद कर लिया। फिर तो तरह तरह से उसने तस्वीरे खिंचवाई।
ऋतु की रस टपकाती चूत से साफ़ पता चल रहा था कि वो अब काफी उत्तेजित हो चुकी थी। मेरा लंड भी अब दर्द कर रहा था, मैं आगे बढ़ा और अपना लम्बा बम्बू उसके मुंह में ठूस दिया- ले बहन की लोड़ी… चूस अपने भाई का लंड… साली हरामजादी… कुतिया… चूस मेरे लंड को… आज मैं तेरी चूत का ऐसा हाल करूँगा कि अपनी फटी हुई चूत लेकर पूरे शहर में घूमती फिरेगी।

ऋतु ने मेरी गन्दी गालियों से उत्तेजित होते हुए मेरे लंड को किसी भूखी कुतिया की तरह लपका और काट खाया। उस ठंडी चट्टान पर मैंने अपने हिप्स टिका दिए और वो अपने चूचों के बल मेरे पीछे से होती हुई मेरे लंड को चूस रही थी।
मैंने अपना हाथ पीछे करके उसकी गांड में एक उंगली डाल दी.
“आआआ आआआह आअह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… म्म्म्म म्म्म्म” उसने रसीली आवाज निकाली।

ठंडी हवा के झोंकों ने माहौल को और हसीं बना दिया था। मुझे भी इस खुले आसमान के नीचे नंगे खड़े होकर अपना लंड चुसवाने में मजा आ रहा था। ऋतु काफी तेजी से मेरे लंड को चूस रही थी और चूसे भी क्यों न… आज उसकी एक सीक्रेट फैंटसी जो पूरी हो रही थी।

ऋतु चिल्लाई- साआआले… भेनचोद… हरामी कुत्ते… अपनी बहन को तूने अपने लम्बे लंड का दीवाना बना दिया है. मादरचोद… जी करता है तेरे लंड को खा जाऊं… आज मैं तेरा सारा रस पी जाऊँगी… साले… जब से तूने मेरी गांड मारी है… उस में खुजली हो रही है… भेन के लौड़े… आज फिर से मेरी गांड मार…
मैंने उसे गुड़िया की तरह उठाया और अपना लंड उसकी दहकती हुई भट्टी जैसी गांड में पेल दिया.
“आय्य्य्यीईई… आअह्ह्ह…” उसकी चीख पूरी वादियों में गूँज गयी। मैंने उसे चुप करने के लिए अपने होंठ उसके मुंह से चिपका दिए।

आज मुझे भी गाली देने और सुनने में काफी मजा आ रहा था। आज तक ज्यादातर हमने चुपचाप सेक्स किया था। घर वालों को आवाज न सुनाई दे जाए इस डर से… पर यहाँ ऐसी कोई परेशानी नहीं थी इसलिए हम दोनों काफी जोर से सिसकारियां भी ले रहे थे और एक दूसरे को गन्दी गन्दी गालियाँ भी दे रहे थे।

मैं भी उत्तेजक था और ऋतु से बोला- ले साली कुतिया… हरामजादी… मेरे लंड से चुदवाने के बाद अब तेरी नजर अपने बाप के मोटे लंड पर है… मैं सब जानता हूँ… तू अपनी रसीली चूत में अब अपने बाप का लंड लेना चाहती है… छिनाल… और उसके बाद चाचू से भी चुदवायेगी… है ना… और फिर वापिस शहर जाकर मेरे सभी दोस्तों से भी जिनसे अभी तक तूने अपनी चूत ही चटवाई है… बोल रंडी?

ऋतु- हाँ हाँ… चुदूँगी अपने बाप के मोटे लंड से… और अपने चाचू के काले सांप से… साले कुत्ते… तू भी तो अपनी माँ की चूचियां चूसना चाहता है और अपने मुंह से उनकी चूत चाटना चाहता है.. और चाची मिल गयी तो उसकी चूत के परखच्चे उड़ा देगा तू अपने इस डंडे जैसे लंड से… साला भड़वा… अपनी बहन को पूरी दुनिया से चुदवाने की बात करता है… तू मेरे लिए लंड का इंतजाम करता जा और मैं चुदवा चुदवा कर तेरे लिए पैसों का अम्बार लगा दूंगी।

ये सब बातें हमारे मुंह से कैसे निकल रही थी हमें भी मालूम नहीं था; पर यह जरूर मालूम था कि इन सबसे चुदाई का मजा दुगुना हो गया था।

मेरा लंड अब किसी रेल इंजन की तरह उस की कसावदार गांड को खोलने में लगा हुआ था। उस का एक हाथ अपनी चूत मसल रहा था और मेरे दोनों हाथ उसके गोल चूचों पर थे और मैं ऋतु के निप्पलों पर अपने अंगूठे और उंगली का दबाव बनाये उन्हें पूरी तरह दबा रहा था।

ऋतु के चूतड़ हवा में लटके हुए थे और पीठ कठोर चट्टान पर… मैं जमीन पर खड़ा उसकी टांगों को पकड़े धक्के लगा रहा था।
मैंने हाँफते हुए कहा- ले चुद साली… बड़ा शौक है ना खुले में चुदने का… आज अपनी गांड में मेरा लंड ले और मजे कर कुतिया…
ऋतु- मेरा बस चले तो मैं पूरी जिंदगी तेरे लंड को अपनी चूत या गांड में लिए पड़ी रहूँ इन पहाड़ियों पर… चोद साले… मार मेरी गांड… फाड़ दे अपनी बहन की गांड आज अपने मूसल जैसे लंड से… मार कुत्ते… भेन के लंड… चोद मेरी गांड को… आआअह… हयीईईई ईईईईई… आआअह्ह…
और फिर उस की चूत में से रस की धार बह निकली… उसका रस बह कर मेरे लंड को गीला कर रहा था, उसके गीलेपन से और चिकनाहट आ गयी।

मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी- ले छिनाल… आआआह… ले मेरा रस अपनी मोटी गांड में… आआह्ह्ह… हुन्न्न्न न्न्न्न आआआ…
भाई ने बहन की गांड में लंड दिया मेरे मुंह से अजीब तरह की हुंकार निकल रही थी, काफी देर तक मेरा लंड बहन की गांड में होली खेलता रहा और फिर मैं उसकी छातियों पर अपना सर टिका कर हांफने लगा।

ऋतु ने मेरे सर पर अपना हाथ रखा और हौले हौले मुझे सहलाने लगी; मेरा लंड फिसल कर बाहर आ गया; मैंने नीचे देखा तो उसकी गांड में से मेरा रस बह कर चट्टान पर गिर रहा था.
उसकी चूत में से भी काफी पानी निकला था; ऐसा लग रहा था कि वहां किसी ने एक कप पानी डाला हो… इतनी गीली जगह हो गयी थी।

ऋतु उठी और मेरे लंड को चूस कर साफ़ कर दिया; फिर अपनी गांड से बह रहे मेरे रस को इकठ्ठा किया और उसे भी चाट गयी.
मेरी हैरानी की सीमा न रही जब उसने वहां चट्टान पर गिरे मेरे वीर्य पर भी अपनी जीभ रख दी और उसे भी चाटने लगी और बोली- ये तो मेरा टोनिक है!
और मुझे एक आँख मार दी।

उसे चट्टान से रस चाटते देखकर मेरे मुंह से अनायास ही निकला “साली कुतिया…”
और हम दोनों की हंसी निकल गयी। फिर हम दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और नीचे की तरफ चल दिए। हम दोनों नीचे पहुंचे और वापिस टेबल पर आ कर बैठ गए और भीड़ का हिस्सा बन गए। किसी को भी मालूम भी नहीं चला कि हम दोनों कहाँ थे और हमने क्या किया।
टेबल पर मैंने देखा कि दो लड़कियां बैठी है एक ही उम्र की… वो शायद जुड़वाँ बहनें थी क्योंकि उनका चेहरा काफी हद तक एक दूसरे से मिलता था।
ऋतु ने उनसे बात करनी शुरू की।

ऋतु- हाय… मेरा नाम ऋतु है… और ये है मेरा भाई रोहण!
उनमें से एक लड़की बोली- हाय ऋतु… मेरा नाम मोनी है और ये मेरी जुड़वाँ बहन सोनी।

वो दोनों बातें कर रहे थे और मैं अपनी आँखों से उन्हें चोदने में…दोनों ने जींस और टी शर्ट पहन रखी थी, दोनों काफी गोरी चिट्टी थीं। एक समान मोटी मोटी छातियाँ, पतली कमर, फैले हुए कूल्हे और स्किन टाइट जींस से उभरती उनकी मोटी-२ टांगें।
वो देखने से किसी बड़े घर की लग रही थी।

सोनी जो चुपचाप बैठी हुई थी… मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी। मैंने भी उसे स्माइल पास की। फिर हमने काफी देर तक एक दूसरे से बात की। उन्होंने बताया कि वो भी पहली बार यहाँ आई हैं और उनके पापा काफी बड़े बिज़नेसमैन हैं।

उनका रूम सामने ही था, मैंने कुछ सोच कर उनसे कहा- चलो, हमें भी अपना रूम दिखाओ!
और हम उनके साथ चल पड़े।
अन्दर जाकर देखा तो वो बिल्कुल हमारे जैसा रूम ही था। मैंने शीशे के पास जाकर देखा और उसे थोडा हिलाया… दूसरी तरफ का नजारा मेरे सामने था। मैं समझ गया कि यहाँ हर रूम ऐसे ही बना हुआ है जिस में शीशा हटाने से दूसरे रूम में देख सकते हैं।

हम ने थोड़ी देर बातें करी और वापिस लौट आये। मेरे दिमाग में अलग अलग तरह के विचार आ रहे थे। शाम को हम सभी बच्चों के लिए रंगारंग कार्यक्रम था। हम सब वहां जा कर बैठ गए।

थोड़ी देर में ही मैंने पेशाब का बहाना बनाया और वहां से बाहर आ गया और पास के ही एक रूम में जहाँ से रोशनी आ रही थी… चुपके से घुस गया। ड्राइंग रूम में कोई नहीं था। एक बेडरूम में से रोशनी आ रही थी, मैं उसके साथ वाले रूम में घुस गया, वहां भी कोई नहीं था।
मैंने जल्दी से दीवार पर लगे शीशे को हटाया और दूसरी तरफ देखा। मेरा अंदाजा सही था… वहां भी ओर्गी चल रही थी… दो औरतें और दो मर्द एक ही पलंग पर चुदाई समारोह चला रहे थे।

दोनों औरतें काफी मोटी और भरी छाती वाली थी। एक की गांड तो इतनी बड़ी थी कि मैं भी हैरान रह गया। वो एक आदमी का लंड चूस रही थी और दूसरी उसकी चूत चाट रही थी और उसकी गांड दूसरा आदमी मार रहा था।
पूरे कमरे में सिसकारियां गूंज रही थी।

मैंने जींस से अपना लंड बाहर निकाला और मुठ मारना शुरू कर दिया। जो औरत लंड चूस रही थी.. वो उठी और मेरी तरफ अपनी मोटी सी गांड करके कुतिया वाले आसन में बैठ गयी। एक आदमी पीछे से आया और अपना थूक से भीगा हुआ लंड उसकी चूत में डाल दिया।
दूसरी औरत भी उठी और उसके साथ ही उसी आसन मैं बैठ गयी और दूसरे आदमी ने अपना मोटा काला लंड उसकी गांड में पेल दिया। दोनों ने एक दूसरे को देखा और ऊपर हाथ करके हाई फाइव किया और एक आदमी दूसरे से बोला- यार, तू सही कह रहा था.. तेरी बीवी मंजू की गांड काफी कसी है.. हा हा!
दूसरे ने जवाब दिया- और तेरी बीवी की चूत भी कम नहीं है। शशि भाभी की मोटी गांड को मारने के बाद इनकी चूत में भी काफी मजा आ रहा है.
और दोनों हंसने लगे।

मैंने गौर किया कि उनकी बीवियाँ… मंजू और शशि भी उनकी बातें सुनकर मुस्कुरा रही है.
मैंने ये सोचकर कि वो दोनों कितने मजे से एक दूसरे की बीवियों की गांड और चूत मार रहे हैं, अपने हाथ की स्पीड बढ़ा दी। वहां चर्म-स्तर पर पहुँच कर मंजू और शशि की चीख निकली और यहाँ मेरे लंड से गाढ़ा गाढ़ा वीर्य उस दीवार पर जा गिरा।

मैंने अपना लंड अन्दर डाला और बाहर निकल गया। मैंने वापिस पहुँच कर ऋतु को इशारे से बाहर बुलाया। उसे भी प्रोग्राम में मजा नहीं आ रहा था, बाहर आकर मैंने ऋतु को सारी बात बताई। वो मेरी बात सुन कर हैरान हो गयी, उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं ऐसे किसी और रूम में घुस गया पर जब चुदाई की बात सुनी तो वो भी काफी उत्तेजित हो गयी।

मैंने उसे अपना प्लान बताया। मैंने कहा- यहाँ कुछ ही लोग अपने बच्चे साथ लाये है। बाकी फॅमिली अकेली हैं और रोज शाम को प्रोग्राम के बहाने से बच्चों को बाहर निकाल कर वो अपने रूम में ओर्गी कर सकते हैं।

मैंने ऋतु से कहा- हम रोज किसी भी रूम में घुसकर देखेंगे कि वहां क्या हो रहा है. और अगर इस खेल को और भी मजेदार बनाना है तो कुछ और बच्चों को भी इसमें शामिल कर लेते हैं।

ये सब तय करने के बाद हम दोनों वापिस अपने रूम की तरफ आ गए। नेहा वहीं प्रोग्राम में बैठी थी। अन्दर आकर हमने नोट किया कि अजय चाचू के रूम की लाइट जल रही है। मेरे चेहरे पर मुस्कान दौड़ गयी और हम चुपके से अपने रूम में घुस गए।

शीशा हटा कर देखा तो अंदर वासना का वो ही नंगा नाच चल रहा था। आरती चाची और मेरी माँ पूर्णिमा नंगी लेटी हुई एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रही थी। मेरी माँ की गांड हवा में थी जबकि चाची पीठ के बल लेटी हुई अपनी टाँगें ऊपर किये हुए मेरे पापा का मूसल अपनी चूत में पिलवा रही थी।

मैंने ऋतु के कान में कहा- देखो तो साली आरती चाची कैसे चुदक्कड़ औरत की तरह अपनी चूत मरवा रही है… कमीनी कहीं की… कैसे हमारे बाप का लंड अपनी चूत में ले कर हमारी माँ के होंठ चूस रही है कुतिया…
ऋतु भी हमारी चाची की कामुकता और अन्दर का नजारा देखकर गर्म हो चुकी थी, मेरी गन्दी भाषा सुन कर वो भी उत्तेजित होते हुए बोली- हाँ भाई देखो तो जरा, हमारी कुतिया माँ को, कैसे अजय चाचू के घोड़े जैसे काले लंड को अपनी गांड में ले कर चीख रही है मजे से… मम्मी के चुचे कैसे झूल रहे हैं और आरती चाची कितने मजे से उन्हें दबा रही है और पापा का लंड तो देखो कितना शानदार और ताकतवर है, कैसे चाची की चूत में डुबकियां लगा रहा है… काश मैं होती चाची की जगह!

मैं समझ गया कि अगर ऋतु को मौका मिला तो वो अपने बाप का लंड भी डकार जायेगी।

पापा ने अपनी स्पीड तेज कर दी, आरती चाची की आवाजें तेज हो गयी, वो लोग समझ रहे थे कि घर में वो अकेले हैं, बच्चे तो बाहर गए हैं इसलिए वो तेज चीखें भी मार रहे थे और तरह तरह की आवाजें भी निकाल रहे थे।

तभी चाची चिल्लाई- आआह्ह… माआआह… जेठ जी… चोदो मुझे… और जौरर सेईईई… आआहहह… फाड़ डालो मेरी चूत… बड़ा अच्छा लगता है आपका लंड मुझे… चोदो… आआअह्ह…
चाची ने एक हाथ से मेरी माँ के चुचे बुरी तरह नोच डाले।
मेरी माँ तड़प उठी और जोर से चिल्लायी- आआआ आआअह्ह कुतियाआअ… छोड़ मेरी छाती… साली हरामजादी… मेरे पति का लंड तुझे पसंद आ रहा है… हांन्न… और तेरा ये घोड़े जैसा पति जो मेरी गांड मार रहा है उसका क्या… बोल कमीनी… उसका लंड नहीं लेती क्या घर में… मेरा बस चले तो मैं अपने प्यारे देवर का लंड ही लूं…
मेरी माँ चिल्लाये जा रही थी और अपनी मोटी गांड हिलाए जा रही थी।

अजय चाचू ने अपनी स्पीड बढ़ाई और मेरी माँ के कूल्हे पकड़ कर जोर से झटके देते हुए बोले- भाभी… ले अपने प्यारे देवर का लण्ड अपनी गांड में… सच में भाभी आपकी गांड मार कर वो मजा आता है कि क्या बोलूं… आआआह्ह्ह… तेरे जैसी हरामजादी भाभी की गांड किस्मत वालों को ही मिलती है… चल मेरी कुतिया… ले ले मेरा लंड अपनी गांड के अन्दर तक्क्क…
और चाचू ने अपना लावा मेरी माँ की गांड में उड़ेलना शुरू कर दिया।

मेरी माँ के मुंह से अजीब तरह की चीख निकली- आय्यय्य्य्यी… आआआह..
और उन्होंने आधे खड़े होकर अपनी गर्दन पीछे करी और अजय चाचू के होंठ चूसने लगी। चाचू का हाथ माँ की चूत में गया और माँ वहीं झड़ गयी- आआआह्ह… म्मम्मम…

वहां मेरे पापा भी कहाँ पीछे रहने वाले थे- ले आरती… मेरी जान… मेरी कुतिया… अपने आशिक जेठ का लंड अपनी चूत में ले… तेरी चूत में अभी भी वो ही कशिश है जो सालों पहले थी… और तेरे ये मोटे मोटे चुचे… इन पर तो मैं फ़िदा हूँ…
यह कह कर पापा ने झुक कर आरती चाची के दायें चुचे को मुंह में भर लिया और जोर से काट खाया।

चाची चीखी- आआअह कुत्त्त्ते… छोड़ मुझे… आह्ह्ह्ह… म्म्म्म म्म्म्मम्म
और मेरे पापा का मुंह ऊपर कर के उनके होंठों से अपने होंठ जोड़ दिए और चूसने लगी किसी पागल बिल्ली की तरह।
पापा से सहन नहीं हुआ और अपना रस उन्होंने चाची के अन्दर छोड़ दिया। चाची भी झड़ने लगी और अपनी टाँगें पापा के चारों तरफ लपेट ली।
सभी हाँफते हुए वहीँ पलंग पर गिर गए।

ऋतु ने घूम कर मुझे देखा, उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, उसने अपने गीले होंठ मुझ से चिपका दिए और मेरे हाथ पकड़ कर अपने सीने पर रख दिए। मैंने उन्हें दबाया तो उसके मुंह से आह निकल गयी।
मैंने उसे उठा कर पलंग पर लिटाया और उसके कपड़े उतार दिए। ऋतु की चूत रिस रही थी अपने रस से… मैंने अपना मुंह लगा दिया उसकी रस टपकाती चूत पर और पीने लगा.

वो मचल रही थी बेड पर नंगी पड़ी हुई, उसने मेरे बाल पकड़ कर मुझे ऊपर खींचा और अपनी चूत में भीगे मेरे होंठ चाटने लगी और अपना एक हाथ नीचे ले जा कर मेरे लंड को अपनी चूत पर टिकाया और “सुर्रर” करके मेरे मोटे लण्ड को निगल गयी।

ऋतु ने किस तोड़ी और धीरे से चिल्लाई- आआआहहह…
आज वो काफी गीली थी। मैंने अपना मुंह उसके एक निप्पल पर रख दिया… वो सिहर उठी और प्यार से मेरी तरफ देखकर बोली- मेरा बच्चा…
ये सुनकर मैंने और तेजी से उसका “दूध” पीना शुरू कर दिया।

ऋतु ने मुझे नीचे किया और मेरे ऊपर आ गयी.. बिना अपनी चूत से मेरा लंड निकाले और अपने बाल बांध कर तेजी से मेरे ऊपर उछलने लगी। मैंने हाथ ऊपर करे और उसके चुचे दबाते हुए अपनी आँखें बंद कर ली।
जल्दी ही वो झड़ने लगी और उसकी स्पीड धीरे होती चली गयी और अंत में आकर उसने एक जोर से झटका दिया और हुंकार भरी और मेरे सीने पर गिर गयी।

अब मैंने उसे धीरे से नीचे लिटाया, वो अपने चार पायों पर कुतिया की तरह बैठ गयी और अपनी गांड हवा में उठा ली। मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और झटके देने लगा। मेरी एक उंगली उसकी गांड में थी।

मैंने किसी कसाई की तरह उसे दबोचा और अपना घोड़ा दौड़ा दिया। वो मेरे नीचे मचल रही थी। मैंने हाथ आगे करे और उसके झूलते हुए सेब पर टिका दिए। मेरा लंड इस तरह काफी अन्दर तक घुस गया।
मेरे सामने आज शाम की घटना और दूसरे रूम में हुई शानदार चुदाई की तसवीरें घूम रही थी। ये सोचते सोचते जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने भी अपने लंड का ताजा पानी अपनी बहन के गर्भ में छोड़ दिया।

बुरी तरह से चुदने के बाद ऋतु उठी और बाथरूम में चली गयी।
मुझे भी बड़ी जोर से सुसु आया था, मैंने सिर्फ अपनी चड्डी पहनी और दरवाजा खोल कर बाहर बने कॉमन बाथरूम में चला गया। मैंने अपना लंड निकाला और मूत की धार मारनी शुरू कर दी।

मैंने मूतना बंद ही किया था कि बाथरूम का दरवाजा खुला और आरती चाची नंगी अन्दर आई और जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया, पर जैसे ही मुझे देखा तो वहीं दरवाजे पर ठिठक कर खड़ी हो गयी। मेरे हाथ में मेरा मोटा लंड था।
आरती चाची ने कहा- ओह्ह्ह… सॉरी…
मैंने वहीं खड़े हुए कहा- क्या आपको दरवाजा खड़काना नहीं आता?
मेरा लंड अभी भी मेरे हाथ में था।

आरती चाची ने शर्माते हुए कहा- सॉरी… मुझे माफ़ कर दो रोहण… अन्दर अँधेरा था तो मैंने सोचा अन्दर कोई नहीं है… और वैसे भी तुम लोग तो बाहर प्रोग्राम देख रहे थे न?
वो अपने नंगे जिस्म को छुपाने की कोशिश कर रही थी।

मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा- मेरा वहां मन नहीं लगा इसलिए वापिस आ गया… और…
आरती चाची ने सकुचाते हुए और मेरी बात काटते हुए कहा- और ये कि… मुझे शू शू आया है।
मैं- हाँ तो कर लो न…

चाची का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था- तुम बाहर जाओगे तभी करुँगी न!
मैं- तुमने मुझे देखा है सू सू करते हुए… तो मेरा भी हक बनता है तुम्हें सू सू करते हुए देखने का…
और मैं दीवार के सहारे खड़ा हो गया और अपना लम्बा लंड उनके सामने मसलने लगा।

चाची ने ज्यादा बहस करना उचित नहीं समझा और जल्दी से सीट पर आकर बैठ गयी। पेशाब की धार अन्दर छुटी और मैंने देखा कि उनके निप्पल कठोर होते चले जा रहे हैं।
सू सू करने के बाद उन्होंने पेपर से अपनी चूत साफ़ करी और खड़ी हो गयी।
आरती ने कहा- ठीक है… अब खुश हो?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- हाँ… पर मैं तुम्हें कुछ दिखाना भी चाहता हूँ…
मैंने अपनी योजना के आधार पर उन्हें कहा।
“अभी…? तुम्हें नहीं लगता कि मुझे कुछ कपड़े पहन लेने चाहियें… और तुम्हें भी!” चाची ने अपनी नशीली आँखें मेरी आँखों में डाल कर कहा।
मैंने कहा- इसमें सिर्फ दो मिनट लगेंगे… आपको हमारे रूम में चलना होगा।
“चलो फिर जल्दी करो… देखूँ तो सही तुम मुझे क्या दिखाना चाहते हो?” चाची ने कहा और दरवाजा खोलकर मेरे साथ चल दी… नंगी।

मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला और अन्दर आ गया। ऋतु का चेहरा देखते ही बनता था… जब उसने चाची को मेरे पीछे अपने रूम में घुसते हुए देखा… वो भी बिल्कुल नंगी।
ऋतु उस समय बेड पर लेटी अपनी चूत में उंगलियाँ डाल कर मुठ मार रही थी।

मैंने ऋतु से कहा- चाची मुझे बाथरूम में मिली थी, मैं इन्हें कुछ दिखने के लिए लाया हूँ।
चाची भी ऋतु को नंगी बिस्तर पर लेटी देखकर हैरान रह गयी। मैं जल्दी से शीशे वाली जगह पर गया और बोला- आप इधर आओ चाची… ये देखो।
चाची झिझकते हुए आगे आई। वो समझ तो गयी थी कि मैं उन्हें क्या दिखाने वाला हूँ। जब उन्होंने अन्दर देखा तो पाया कि मम्मी ने चाचू का लंड मुंह में ले रखा है और चूस रही है और पीछे से पापा उनकी चूत मार रहे हैं।

चाची ने थोड़ा कठोर होते हुए कहा- तो तुम लोग हमारी जासूसी कर रहे थे, हमें ये सब करते हुए देख रहे थे। इसका क्या मतलब है, ऐसा क्यों कर रहे थे तुम?
मैंने कहा- मुझे लगा आपको अच्छा लगेगा कि आपकी कोई औडिएंस है और इस से एक्साइटमेंट भी आएगी।
उन्होंने कहा- अब से हम तुम्हारे परेंट्स का रूम यूज़ करेंगे.

मैंने उन्हें डराते हुए कहा- फिर तो मैं उन्हें बता दूंगा कि आप बाथरूम में आई और मुझे शीशे वाली जगह दिखाई और हमें अन्दर देखने के लिए भी कहा।
चाची का मुंह तो खुला का खुला रह गया मेरी इस धमकी से… उन्होंने हैरानी से ऋतु की तरफ देखा जो अब उठ कर बैठ गयी थी, पर वो भी उतनी ही हैरान थी जितनी की चाची।
“तुम क्या चाहते हो रोहण…?” चाची ने थोड़ा नर्म होते हुए कहा।

“मैं भी कुछ खेल खेलना चाहता हूँ.” मैंने कहा और आगे बढ़ कर चाची के मोटे चुचे पर हाथ रख दिया और उनके निप्पल को दबा दिया।
चाची ने गंभीरता से कहा- आआउच…
वो बिदकी और बोली- तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि इटनी छोटी सी उम्र में तुम ये खेल खेलने के लिए तैयार हो?
मैंने अपना अंडरवियर नीचे गिरा दिया और अपना पूरा खड़ा हुआ मोटा लंड उनके हाथों में दे दिया और कहा- मुझे ये इसकी वजह से लगता है।
“तुम्हारी उम्र के हिसाब से तो ये काफी बड़ा है…” चाची ने मेरे लंड से बिना हाथ और नजरें हटाये हुए कहा।
वो जैसे मेरे लंड को देखकर सम्मोहित सी हो गयी थी।

मैंने उनसे कहा- चाची, मेरा लंड चूसो…
उन्होंने झिझकते हुए कहा- पर ऋतु… वो भी तो है यहाँ…
मैंने कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए कहा- आप उसकी चिंता न करो, वो ये सब होते हुए देखेगी… और उसके बाद आप उसकी चूत को भी चाट देना… वो शायद आपको भी पसंद आएगी।

मैंने चाची को घुमा कर बेड की तरफ धकेल दिया, बेड के पास पहुँच कर मैंने उन्हें धीरे से किनारे पर बिठा दिया मेरा खड़ा हुआ लण्ड उनकी आँखों के सामने था। उन्होंने ऋतु की तरफ देखा, वो भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी ये सब देख कर और उछल कर वो भी सामने आ कर बैठ गयी।

फिर चाची ने मेरा लंड पकड़ा और धीरे से अपनी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर फिराई और फिर पूरे लंड पर अपनी जीभ को फिराते हुए उन्होंने एक एक इंच करके किसी अजगर की तरह मेरा लंड निगल लिया।
मैंने मन ही मन सोचा- एक्सपेरिएंस भी कोई चीज होती है…
उनका परिपक्व मुंह मेरे लंड को चूस भी रहा था, काट भी रहा था और अन्दर बाहर भी कर रहा था।

मेरे लंड का किसी अनुभवी मुंह में जाने का ये पहला अवसर था, मुझ से ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ, चाची के गर्म मुंह ने जल्दी ही मुझे झड़ने के कगार पर पहुंचा दिया। मेरे लंड से वीर्य की बारिश होने लगी चाची के मुंह के अन्दर… उन्होंने एक भी बूँद जाया नहीं जाने दी और सब पी गयी।
चाची ने मेरे लंड को आखिरी बार चूसा और छोड़ दिया- तुम यही चाहते थे न?

मैंने उनके कंधे पर दबाव डाला और उन्हें बेड पर लिटा दिया- हाँ बिल्कुल यही… तुम बिल्कुल परफेक्ट हो चाची… अब लेट जाओ।
पीछे से ऋतु ने उन्हें कंधे से पकड़ा और चाची के मुंह के दोनों तरफ टाँगें करके उनके मुंह के ऊपर बैठ गयी.
“आआअह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… म्मम्म म्मम्म…” और अपनी गीली चूत उनके मुंह से रगड़ने लगी।
मैंने चाची की टाँगें पकड़ी और हवा में उठा ली और उनकी जांघो पर हाथ टिका कर अपना मुंह उनकी दहकती हुई चूत में दे मारा। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत में डाली, उन्होंने एक झटका मारा…”आआअह्ह…यीईईईईईई…” और मेरी गर्दन के चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा मुंह चोदने लगी।

चाची की चूत ऋतु और उसकी सहेलियों की चूत से बिल्कुल अलग थी। वो एक पूरी औरत की चूत थी जिसकी एक जवान लड़की भी थी और मजे की बात ये थी कि मैं उनकी लड़की की चूत भी चाट और मार चुका था।
ऋतु भी बड़ी तेजी से अपनी बिना बालों वाली चूत को उनके मुंह में घिस रही थी। मैंने चाची की चूत पर काटना और चुसना शुरू कर दिया। जल्दी ही उनकी चूत के अन्दर से एक सैलाब सा उमड़ा और मेरे पूरे मुंह को भिगो दिया।

उनका रस भी बड़ा मीठा था, मैंने जल्दी से सारा रस पी लिया।
उधर ऋतु ने भी अपनी टोंटी चाची के मुंह में खोल दी और अपना अमृत उन्हें पिला दिया।

हम सभी धीरे से अलग हुए और थोड़ी देर तक सांस ली। चाची का चेहरा उत्तेजना के मारे तमतमा रहा था, उन्होंने उठने की कोशिश की पर उनके पैर लड़खड़ा रहे थे।
चाची बिस्तर से उठते हुए बोली- मुझे अब वापिस जाना चाहिए उस रूम में।
“प्लीज चाची दुबारा आना!” मैंने उन्हें कहा।

ऋतु- और अजय अंकल को भी लेकर आना और मॉम डैड को मत बताना।
चाची ने हँसते हुए कहा- ठीक है आऊँगी… और तुम्हारे मम्मी पापा को भी नहीं बताऊँगी.
और फिर चली गयी।

चाची के जाते ही मैंने शीशा हटा कर देखा। वो अन्दर गयी और चुदाई समारोह में जाकर वापिस शरीक हो गयी। पापा ने अपना रस मम्मी की चूत में निकाल दिया था। चाची ने जाते ही अपनी डिश पर हमला बोल दिया और माँ की चूत में से सारी मलाई खा गयी।

चाची को झड़े अभी 5 मिनट ही हुए थे पर जैसे ही चाचू ने उनकी चूत में लौड़ा डाला वो फिर से मस्ता गयी और अपनी मोटी गांड हिला हिला कर चुदवाने लगी। जल्दी ही चाचू का लंड… जो मम्मी के चूसने की वजह से झड़ने के करीब था, चाची की गीली चूत में आग उगलने लगा।
सभी हाँफते हुए वहीं बेड पर लुढ़क गए।
थोड़ी देर में मम्मी और पापा उठे और अपने रूम में चले गए।

मम्मी पापा के जाते ही मैंने ऋतु को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गीले और लरजते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो भी दोबारा गर्म हो चुकी थी, उसके होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे दबाने शुरू किये और जल्दी ही उसके निप्प्ल्स को अपने होंठों के बीच रख कर चबाने लगा।

ऋतु पागल सी हो गयी मेरे इस हमले से… वो चिल्लाई- आआआ आअयीईईई ईईईइ… म्म्म्म म्म्म्मम… चुसो ऊऊऊ… इन्हें… अयीईईईईइ थोड़ा धीरेईईईए… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह…
वो बुदबुदाती जा रही थी, जल्दी ही मैं उन्हें चूसता हुस नीचे की तरफ चल दिया और उसकी रस टपकाती चूत में अपने होंठ रख दिए। ऋतु से भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने पलट कर 69 की अवस्था ली और मेरा फड़कता हुआ लंड अपने मुंह में भर लिया और तेजी से चूसने लगी।

उधर दूसरे रूम में मम्मी पापा के जाते ही… थोड़ी देर लेटने के बाद चाची उठ कर शीशे के पास आई और शीशा हटा कर झाँकने के बाद देखा… तो मुझे और ऋतु को 69 की अवस्था में देख कर मुस्कुरा दी।

उन्होंने इशारे से अजय चाचू को अपने पास बुलाया। वो उठे और नंगे आकर चाची के पीछे खड़े हो गए। अन्दर झांकते ही वो सारा माजरा समझ गए और मुझे और ऋतु को ऐसी अवस्था में देख कर आश्चर्य चकित रह गए। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि हम दोनों भाई बहन ऐसा कर सकते हैं पर फिर उन्होंने सोचा की जब वो अपने भाई और भाभी के साथ खुल कर अपनी पत्नी को शामिल कर के मजा ले सकते हैं तो ये भी मुमकिन है।
उनकी नजर जब ऋतु की मोटी गांड पर गयी तो उन का मुरझाया हुआ लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा।

चाची ने अजय को सारी बात बता दी कि कैसे हम दोनों उनके रूम में देखते हैं और शायद वो ही देख देख हम दोनों भाई बहन भी एक दूसरे की चुदाई करने लगे हैं।

मेरी एक उंगली ऋतु की गांड के छेद में थी और मेरा मुंह उसकी चूत में। वो अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी और मुंह से सिसकारियां ले लेकर मेरा लंड चूस रही थी।

चाचू ने जब ऋतु की गोरी, मोटी घूमती गांड देखी तो वो पागल ही हो गए। उन्होंने पहले ऐसा कभी ऋतु के बारे में सोचा नहीं था। चाची ने बताना चालू रखा कि कैसे वो बाथरूम में गयी और नंगी मुझ से मिली और वापिस उनके रूम में जा कर उन्होंने मेरा लंड चूसा और ऋतु की चूत चाटी।

चाचू चकित हो कर सभी बातों को सुन रहे थे, उनकी नजर ऋतु के नंगे बदन से हट ही नहीं रही थी और जब चाची ने ये बताया कि उन्होंने उन दोनों को अपने रूम में बुलाया है और खास कर ऋतु ने बोला है कि ‘चाचू को भी लेकर आना…’ तो अजय समझ गया कि उसकी भतीजी की चूत तो अब चुदी उस के लंड से।

चाचू ने झट से आरती को कहा- तो चलो न, देर किस बात की है, चलते हैं उनके रूम में…
चाची- अभी…? अभी चलना है क्या?
चाचू- और नहीं तो क्या… देख नहीं रही कैसे दोनों गर्म हुए पड़े हैं।
चाची- हाँ…! ठीक है, चलते हैं, मुझे वैसे भी रोहण के लंड का स्वाद पसंद आया, देखती हूँ कि उसे इस्तेमाल करना भी आता है या नहीं।

दोनों धीरे से अपने कमरे से निकले और हमारे रूम में आ गए। हम दोनों एक दूसरे में इतने खो गए थे कि हमें उनके अन्दर आने का पता ही नहीं चला। चाचू बेड के सिरे की तरफ जा कर खड़े हो गए। वहां ऋतु का चेहरा था जो मेरा लंड चूसने में लगा हुआ था।

ऋतु ने जब महसूस किया कि कोई वहां खड़ा है तो उसने अपना सर उठा कर देखा और चाचू को पा कर वो सकपका गयी। नजरें घुमा कर जब चाची को देखा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी आँखों के इशारे से ऋतु को चाचू की तरफ जाने को कहा।
वो समझ गयी और अपना हाथ ऊपर करके अपने सगे चाचा का काला लंड अपने हाथों में पकड़ लिया।

चाचू के मोटे लंड पर नन्हे हाथ पड़ते ही वो सिहर उठे…”आआआ आअह्ह्ह…” और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली।
ऋतु थोड़ा उठी और अपने होंठों को चाचू के लंड के चारों तरफ लपेट दिया।

मैंने जब महसूस किया कि ऋतु ने मेरा लंड चूसना बंद कर दिया है तो मैंने अपना सर उठा कर देखा और अपने सामने चाची को मुस्कुराते हुए पाया। मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही चाची ने अपनी टाँगें घुमाई और मेरे मुंह की सवारी करने लगी।
चाची की चूत काफी गीली थी, शायद दुसरे कमरे में चल रही चुदाई की वजह से और हमें देखने की वजह से भी।
“आआआ आआआ आआह्ह्ह” चाची ने लम्बी सिसकारी ली।

चाची ने भी झुक कर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने अपनी जीभ चाची की चूत में काफी गहरायी तक डाल दी। इतना गहरा आज तक मैं नहीं गया था। उनकी चूत और चूतों के मुकाबले थोड़ी बड़ी थी, शायद इस वजह से।

चाची मेरे ऊपर पड़ी हुई मचल रही थी, उन्होंने मेरा लंड एक दम से छोड़ दिया और घूम कर मेरी तरफ मुंह कर लिया और अपनी गीली चूत में मेरा लंड लगाया और नीचे होती चली गयी.
“म्मम्म म्मम… आआआ आआआह्ह्ह… मजा आ गया…” वो बुदबुदाई और अपने गीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।

मेरे हाथों ने अपने आप बढ़ कर उनके हिलते हुए स्तनों को जकड़ लिया। बड़े मोटे चुचे थे चाची के… उनके निप्पल के चारों तरफ लम्बे लम्बे बाल थे। मैं जब उनके दानों को चूस कर छोड़ता तो उनके लम्बे बाल में रह जाते जिनको मैं दांतों से दबा कर काफी देर तक खींचता।

चाची मेरे इस खेल से सिहर उठी, उन्हें काफी दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था इसलिए वो बार बार अपने निप्पल फिर से मेरे मुंह में भर देती।

उधर, ऋतु के मुंह को काफी देर तक चोदने के बाद चाचू ने उसे घुमाया जिससे मेरी बहन की गांड हवा में उठ गयी। उन्होंने अपना मोटा लंड ऋतु की चूत पर टिकाया और एक तेज झटका मारा, चाचू का लंड अपनी भतीजी की कसी चूत में उतरता चला गया।

ऋतु चीखी- आआ अयीईईई ईईईईइ… आआह्ह्ह… चाचू धीरे… आआआह…
ऋतु अपनी कोहनियों के बल बैठी थी, उसका चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल ऊपर था। चाचू के लंड डालते ही उसकी आँखें फ़ैल गयी और फिर थोड़ी ही देर में उत्तेजना के मारे बंद होती चली गयी। वो थोड़ा झुकी और मेरे होंठ चूसने लगी। उसकी चूत में उसके चाचू का लंड था और मेरे लंड के चारों तरफ चाची की चूत लिपटी हुई थी। पूरे कमरे में गर्म सांसों की आवाज आ रही थी।

मेरे लंड पर चाची बुरी तरह से उछल रही थी जैसे किसी घोड़े की सवारी कर रही हो। उनकी चूत बड़ी मजेदार थी, वो ऊपर नीचे भी हो रही थी और बीच बीच में अपनी गांड घुमा घुमा कर घिसाई भी कर रही थी।
जल्दी ही मेरे लंड की सवारी करते हुए चाची झड़ने लगी- आआअह्ह्ह… मैं…आयीईईई ईईइ…
और उनके रस ने मेरे लंड को नहला दिया।
मेरा लंड भी आखिरी पड़ाव पर था, उसने भी बारिश होते देखी तो अपना मुंह खोल दिया और चाची की चूत में पिचकारियाँ मारने लगा।

ऋतु से भी चाचू के झटके ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुए, वो तो अपने चाचू का लंड अपनी चूत में लेकर फूली नहीं समा रही थी, उसने भी जल्दी ही झड़ना शुरू कर दिया। चाचू ने भी दो चार जोर से झटके दिए और अपना रस अपनी भतीजी की कमसिन चूत में छोड़ दिया।

चाचू ने अपना लंड बाहर निकला और ऋतु के चेहरे के सामने कर दिया। ऋतु ने बिना कुछ सोचे उन का रस से भीगा लंड मुंह में लिया और चूस चूस कर साफ़ करने लगी।

चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी, चाची की चूत में से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था। वो थोड़ा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका दिया। फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी।

ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली और चाचू का रस इकट्ठा कर के चाट गयी।

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चाची भी मेरे लंड से उठी और खड़ी हो गयी, चाची की चूत में से हम दोनों का मिला जुला रस टपक रहा था। वो थोड़ा आगे हुई और मेरे पेट पर पूरा रस टपका दिया। फिर नीचे उतर कर मेरे लंड को मुंह में भरा और साफ़ कर दिया। फिर अपनी जीभ निकाल कर ऊपर आती चली गयी और मेरे पेट पर गिरा सारा रस समेट कर चाट गयी।

ऋतु ने भी अपनी चूत में उंगलियाँ डाली और चाचू का रस इकट्ठा कर के चाट गयी।

तभी दरवाजे की तरफ से आवाज आई- ये क्या हो रहा है?
हमने देखा तो नेहा वहां खड़ी थी अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लिए…
हम सभी की नजर दरवाजे पर खड़ी नेहा पर चिपक सी गयी। मैं, ऋतु, आरती चाची और अजय चाचू सब नंगे हुए एक दूसरे को चाट और चूस रहे थे और थोड़ी ही देर पहले हम सबने चुदाई भी की थी.. ना जाने कब से नेहा ये सब देख रही थी।

मेरी और ऋतु की तो कोई बात नहीं… पर चाचू और चाची की शक्ल देखने वाली थी, उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी उन्हें ‘नंगे’ हाथों पकड़ लेगी।
मैंने गौर से देखा तो नेहा का ध्यान चाचू के लंड पर ही था और उस के चेहरे पर अजीब तरह के भाव थे।
मैं समझ गया और उठ खड़ा हुआ- देखो नेहा, तुमने तो वैसे भी अपने मम्मी पापा को हमारे मम्मी पापा के साथ नंगा देख ही लिया है उस शीशे वाली जगह से और आज हालात कुछ ऐसे हुए कि हमें चाचू चाची को अपने राज में शामिल करना पड़ा!

और फिर मैंने सारी बात विस्तार से बता दी नेहा को।

चाचू और चाची ने जब ये सुना कि नेहा ने भी उन्हें दूसरे कमरे में रंगरेलियां मनाते हुए देखा है तो वो थोड़ा शर्मिंदा हो गए। पर फिर उन्होंने सोचा की जब उसे पता चल ही गया है तो क्यों न उसे भी इसमें शामिल कर लिया जाए।

आरती चाची जानती थी कि नेहा अपने स्कूल में लड़कों को काफी लिफ्ट देती है और उसने कई बार नेहा को उस के रूम में एक साथ पढ़ाई कर रहे लड़कों के साथ चूमते चाटते भी देखा था। उन्होंने अजय चाचा की तरफ देखा और आँखों आँखों में कुछ इशारे करे।
फिर वो आगे आई और नेहा का हाथ पकड़ कर वही बेड पर बिठा लिया।

नेहा आँखें फाड़े हम सभी नंगे लोगों को देख रही थी। दरअसल उस का भी प्रोग्राम में दिल नहीं लग रहा था और जब वो वापिस आई तो उसने अपने मम्मी पापा को हमारे रूम में घुसते हुए देखा, वो भी पूरे नंगे… वो समझ गयी कि अन्दर क्या होने वाला है पर अपने मम्मी पापा के सामने वो एकदम से ये नहीं दर्शाना चाहती थी कि वो भी मेरे और ऋतु के साथ चुदाई के खेल में शामिल है, इसलिए उसने खिड़की से अन्दर का सारा प्रोग्राम देखा।

अपने पापा के द्वारा ऋतु की चुदाई करते देख कर उस की छोटी सी चूत में आग लग गयी थी और जब मैंने उस की माँ की चुदाई की तो उस के बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसने वही खिड़की पर खड़े खड़े अपनी चूत में उंगलियाँ डाल कर उस की अग्नि को शांत किया… पर अन्दर के खेल को देख कर उस की चूत अभी भी खुजला रही थी। इसलिए उसने तय किया कि वो भी अन्दर जायेगी और इसमें शामिल हो जाएगी।

आरती चाची ने नेहा की टी शर्ट उतार दी। नेहा किसी बुत की तरह बैठी थी।
फिर ऋतु आगे आई और उसने उस की जींस के बटन खोल कर उसे भी नीचे कर दिया। अब नेहा सिर्फ पर्पल कलर की पेंटी और ब्रा में बैठी थी। उस का बाप यानी अजय चाचू तो उस के ब्रा में कैद मोटे मोटे और गोल चुचे देख कर अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया… वो मुंह फाड़े अपनी कमसिन सी बेटी के अर्धनग्न जिस्म को निहार रहा था और अपनी जीभ अपने सूखे होंठों पर फिरा रहा था।
मैं एक कोने मैं बैठा सबकी हरकतें नोट कर रहा था।

चाची उठी और अपने चुचे को नेहा के होंठों से चिपका दिए, नेहा ने कुछ नहीं किया। शायद वो अभी भी दर्शाना चाह रही थी कि वो ये सब नहीं करना चाहती पर अन्दर ही अन्दर उस की चूत में ऐसी खुजली हो रही थी कि अपनी माँ को वही पटके और उस के मुंह में अपनी चूत से ऐसी रगड़ाई करे कि उस की सारी खुजली मिट जाए।

थोड़ी देर बाद उसने अपने होंठ खोले और अपनी आँखें बंद करके अपनी माँ का दूध पीने लगी। ऋतु ने उस की ब्रा खोल दी और नीचे से हाथ डाल कर उस की पेंटी भी उतार दी।
ब्रा के खुलते ही नेहा के दोनों पंछी आजाद हो गए। मैंने देखा उस के निप्प्ल्स एक दम खड़े हो चुके हैं और चूत से भी रस टपक कर चादर को गीला कर रहा है यानि वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी। अजय चाचू ने अपनी बेटी को नंगी देखा तो उनकी साँसें रुक सी गयी।

चाची ने इशारे से चाचू को आगे बुलाया, वो तो जैसे इसी इन्तजार में बैठे थे, वो लपक कर आगे आये और अपनी बेटी के दायें चुचे को अपने मुंह में भर कर लगे चूसने किसी बच्चे की तरह। उन्होंने उत्तेजना के मारे उस के दाने पर जोर से काट मारा।

नेहा चिल्लाई- आआआ आआह्ह्ह…. पाआआ… पाआआआ… स्स्सस्स सस्स्स… अयीईईई ईईईई…
नेहा ने अपने पापा के सर को किसी जंगली की तरह पकड़ा और उनकी आँखों में देख कर अपने थूक से गीले हुए होंठ उनसे भिड़ा दिए, नेहा के पापा के तो मजे आ गए। अपनी बेटी के इस जंगलीपन को देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया।
खड़ा तो मेरा भी हो गया था पर लगातार 3-4 बार झड़ने के बाद मैं अपने लंड को थोड़ा आराम देना चाहता था।

बाप बेटी एक दूसरे को ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई गेम चल रही हो और दोनों एक दूसरे से ज्यादा पॉइंट्स लेने के लिए ज्यादा चूसने वाली गेम खेल रहे हैं।
चाचू ने अपने हाथ नेहा की गोलाइयों पर टिका दिए और उन्हें मसलने लगे.
नेहा की सिसकारी निकलने लगी- आआह आआअह्ह दबाओ ऊऊऊ इन्हीईए.. पाआआ… पाआआ…

आरती चाची ने अपनी बेटी नेहा को बेड पर लिटा दिया और उस की रस टपकती चूत पर हमला बोल दिया। ऋतु ने भी अपनी चाची का साथ दिया और वो दोनों नेहा की चूत के दोनों तरफ आधे लेट गई और बारी बारी से नेहा की चूत चाटने लगी।

ऊपर चाचू अपनी जवान सेक्सी बेटी के मुंह के अन्दर घुसे हुए उस का रसपान कर रहे थे। उन्होंने किस तोड़ी और थोड़ा नीचे खिसक कर अपने होंठ से नेहा के चुचे चूसने लगे। नेहा बेटी ने हाथ बड़ा कर अपने पापा का लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे आगे पीछे करने लगी, फिर उसने लंड को थोड़ा और खींच कर अपने मुंह के पास खींच लिया।

चाचू समझ गए और अपना चेहरा उस की चूत की तरफ घुमा कर उस के मुंह पर बैठ गए और नेहा ने अपने पापा का लंड अपने कोमल मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
चाचू का चेहरा देखने लायक था, उनके आनंद की कोई सीमा नहीं थी। आज अपनी भाभी से और फिर अपनी भतीजी से चुसवाने के बाद अब वो अपना लंड अपनी ही बेटी के मुंह में डाले मजे ले रहे थे।

चाचू थोड़ा झुके और ऋतु और आरती को हटा कर अपना मुंह अपनी बेटी की चूत पर रख कर चाटने लगे उस की रसीली चूत को। बीच बीच में वो सांस लेने के लिए ऊपर आते और ये मौका ऋतु और आरती ले लेती और उस की चूत चाटने लगती।
कुल मिला कर नेहा की चूत तीन लोग चाट रहे थे और वो अपने पापा का लंड चूस रही थी।

चाचू जब झड़ने वाले थे तो उन्होंने एकदम से अपना लंड नेहा के मुख से निकाल लिया और वापिस ऊपर आ कर उस को चूमने लगे। नेहा से भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने अपने पापा को धक्का दिया और उछल कर उन के ऊपर बैठ गयी।
अजय चाचू का फड़कता हुआ लंड नेहा की चूत के नीचे था। नेहा ने अपने पापा के दोनों हाथों में अपनी उंगलियाँ फंसाई और अपनी गांड और अपना सर नीचे झुका दिया। उस के होंठ अपने पापा के होंठों से जुड़े थे और चूत उनके लंड से।

पीछे से आरती चाची ने अपने पति का लंड पकड़ा और अपनी बेटी की चूत में फंसा दिया और उसे नीचे की तरफ दबा दिया। नेहा की कसी चूत में उस के पापा का लंड उतरता चला गया।
“आआ आआअ आआआह्ह…. आआस्स… आआअह्ह्ह… पाआआ… पाआआ… म्म्म्म म्म्म्म म्म…” नेहा ने थोड़ा ऊपर होकर लम्बी सिसकारी निकाली… और अपने चुचे को अजय चाचू के मुंह में ठूँस दिया।
अब चाचू का पूरा लंड उनकी बेटी की चूत के अन्दर था।

नेहा ने उछलना शुरू किया और चाचू का लंड अपनी चूत में अन्दर बाहर करने लगी। चाची और ऋतु नीचे बैठी बड़े गौर से इस चुदाई को देख रही थी। चाची ने हाथ आगे करके अपनी उंगलियाँ ऋतु की चूत में डाल दी और ऋतु ने आरती चाची की चूत में। फिर उन्होंने अपनी टाँगें एक दूसरे में ऐसी फंसाई कि दोनों की चूत आपस में रगड़ खाने लगी और उन्होंने बैठे बैठे ही एक दूसरी की चूत को अपनी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया।

“आआम्म आआह… अह्ह्ह ह्ह्ह्हह… अहहहः… आहाहाहा.. हा.. हा हा.. हा.. अहा.. हह्ह्ह.. म्मम्म…” ऋतु और चाची अजीब तरह से हुंकार रही थी।
पूरे कमरे में सेक्स का नया दौर शुरू हो चुका था। मेरा लंड भी तन कर खड़ा हो चुका था पर इतनी चुदाई के कारण वो दर्द भी कर रहा था इसलिए मैंने दूर बैठे रहना ही उचित समझा।

चाचू ने नेहा के गोल चूतड़ों को पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए। नेहा की सिसकारियां चीखों में बदल गयी और जल्दी ही वो झड़ने लगी- आआआअह्ह… अह्ह्ह.. अहः अहः अ अहः अ आहा हा… हा… पपाआआआ… मैं… आयीईईईइ… ऊऊओ… ऊऊऊ… ऊऊऊऊ… आआआह्ह.. और उसने अपने रस से पापा के लंड को नहला दिया और अपने मोटे मोटे चूचों को उनके मुंह पर दबा कर वही निढाल हो कर गिर पड़ी।

चाचू ने उसे नीचे उतारा और उस की टांगों को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया और अपना लंड उस की चूत में फिर से डाल दिया और धक्के देने लगे। चाचू का भी तीसरा मौका था इसलिए झड़ने में काफी समय लग रहा था। पर जल्दी ही अपने नीचे पड़ी अपनी बेटी के मोटे मोटे मम्मे हिलते देख कर वो भी झड़ने लगे और अपना रस उस की चूत के अन्दर उड़ेल दिया वो अपनी बेटी की चूत में झड़ गये, और उस की छाती के ऊपर गिर कर हांफने लगे।
नेहा ने उनके चारों तरफ अपनी टाँगें लपेट ली और सर पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगी।

चाची और ऋतु की चूत भी आपसी घर्षण की वजह से जल उठी और उन का लावा भी निकल पड़ा और उन्होंने झड़ते हुए एक दूसरी को चूम लिया।
मैं ये सब देख कर बेड के एक कोने में बैठा मुस्कुरा रहा था।

थोड़ी देर लेटने के बाद चाचू और चाची चले गए। उन के जाते ही ऋतु और नेहा ने एक दूसरे की चूत चाट कर साफ़ कर दी और हम तीनों वही नंगे लेट गए।
दूसरे कमरे में जाकर चाची ने शीशा हटा कर देखा और अपनी नंगी बेटी को मेरी बगल में लेटते हुए देख कर वो मुस्कुरा दी। अगले दिन सुबह हम तीनों, यानि मैं, ऋतु और नेहा नाश्ता करने के बाद पहाड़ी की तरफ चल दिए। ऋतु आगे चल रही थी। वो वही कल वाली जगह पर जा रही थी, उस ऊँची चट्टान पर।

मैं और नेहा उसके पीछे थे। नेहा ने अपने हाथ मेरी कमर पर लपेट रखे थे और मैंने उसकी कमर पर। बीच बीच में हम एक दूसरे को किस भी कर लेते थे। बड़ा ही सुहाना मौसम था, आज धूप भी निकली हुई थी।

नेहा थोड़ा थक गयी और सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। मैं भी उसके साथ बैठ गया। ऋतु आगे निकल गयी और हमारी आँखों से ओझल हो गयी।

नेहा ने अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिए और मैं उन्हें चूसने लगा। मैंने हाथ बड़ा कर उसके सेब अपने हाथों में ले लिए और उनके साथ खेलने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था।

मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, पर तभी मेरा ध्यान ऋतु की तरफ गया और मैं जल्दी से खड़ा हुआ और नेहा को चलने को कहा। क्योंकि वो जंगली इलाका था और मुझे अपनी बहन की चिंता हो रही थी।
हम जल्दी जल्दी चलते हुए चट्टान के पास पहुंचे और वहां देखा तो ऋतु अपने उसी पोज में बैठी थी अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी।

ऋतु ने हमसे शिकायती लहजे से पूछा- तुम क्या रास्ते में ही शुरू हो गए थे, इतनी देर क्यों लगा दी?
नेहा ने जब देखा कि ऋतु नंगी है तो उसने भी अपनी लोन्ग फ्रोक को नीचे से पकड़ा और अपने सर से उठा कर उसे उतार दिया। वो नीचे से बिल्कुल नंगी थी और वो भी जाकर अपनी बहन के साथ चट्टान पर लेट गयी।
अब मेरे सामने दो हंसती खेलती नंगी जवान लड़कियां बैठी थी, मेरा लंड मचल उठा और मैंने भी अपने कपड़े बिजली की फुर्ती से उतार डाले।

नेहा ने मेरा लंड देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी, वो आगे बड़ी तभी ऋतु ने उसे पीछे करते हुए कहा- चल कुतिया पीछे हो जा, पहले मैं चूसूंगी अपने भाई का लंड!
नेहा को विश्वास नहीं हुआ कि ऋतु ने उसे गाली दी। पर जब हम दोनों को मुस्कुराते हुए देखा तो वो समझ गयी कि आज गाली देकर चुदाई करनी है… तो वो भी चिल्लाई- तू हट हरामजादी, अपने भाई का लंड चूसते हुए तुझे शर्म नहीं आती… कमीनी कहीं की…
और उसने ऋतु के बाल हल्के से पकड़ कर पीछे किया और झुक कर मेरे लम्बे लंड को मुंह में भर लिया।

ठन्डे मौसम में मेरा लंड उसके गर्म मुंह में जाते ही मैं सिहर उठा।
ऋतु- अच्छा तो तू इसे चूसना चाहती है, ठहर मैं तुझे बताती हूँ…
और ये कहते ही उसने नेहा की गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी जीभ रख दी उसके गांड के छेद पर!
नेहा चिल्ला उठी… और इतने में ऋतु ने एक जोरदार हाथ उसके गोल चूतड़ पर दे मारा… और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी.
“आआ आआह्ह्ह्ह… नहीईई ईईईईईई… वहान्न्न न्न्न्न.. नहीईई ईईई… ”
पर ऋतु ने नहीं सुना और अपनी छोटी बहन की गांड में दूसरी उंगली भी घुसेड़ दी… उसकी आँखें बाहर निकल आई पर उसने मेरा लंड चूसना नहीं छोड़ा।

उन दोनो की लड़ाई में मेरे लंड का बुरा हाल था क्योंकि अपने ऊपर हुए हमले का बदला नेहा मेरे लंड को उतनी ही जोर से चूस कर और काट कर ले रही थी।
मैंने नेहा के बाल वहशी तरीके से पकड़े और उसका चेहरा ऊपर करके उसके होंठ काट डाले।
वो दर्द से बिलबिला उठी- छोड़… कुत्ते… आआआ आयीईईईई… भेन चोद… भूतनी के… आआआआआह…
वो चिल्लाती जा रही थी क्योंकि उसकी गांड में ऋतु की उंगलियाँ थी जिससे उसकी गांड फट रही थी और ऊपर से मैं उसके होंठ काट काट कर उसकी फाड़ रहा था।

नेहा के मुंह से लार गिर रही थी और उसके पेट पर गिर कर उसे चिकना बना रही थी। अचानक ऋतु ने अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी गांड में एक उंगली डाल दी। मेरे तन बदन में बिजली दौड़ गयी। मैं उछल पड़ा, पर मैंने नेहा को चूसना नहीं छोड़ा।

मैंने अपनी बलशाली भुजाओं का प्रयोग किया और नेहा को किसी बच्चे की तरह उसकी जांघों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और उसने अपनी टाँगें मेरे मुंह के दोनों तरफ रख दी और अपनी चूत का द्वार मेरे मुंह पर टिका दिया।

ऋतु ने चूस कर उसकी चूत को काफी गीला कर दिया था। मेरे मुंह में उसका रस और ऋतु के मुंह की लार आई और मैं सपड़ सपड़ करके उसे चाटने लगा। नेहा ने मेरे बालों को जोर से पकड़ रखा था और मैं चट्टान पर अपनी गांड टिकाये जमीन पर खड़ा था। नेहा मेरे मुंह पर चूत टिकाये चट्टान पर हवा में खड़ी थी और ऋतु नीचे जमीन पर किसी कुतिया की तरह अब मेरे गांड के छेद को चाट रही थी।

पूरी वादियों में हम तीनों की सिसकारियां गूंज रही थी। मैंने अपना हाथ पीछे करके नेहा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड के छेद में एक साथ दो उंगलियाँ घुसा दी। अब उसे भी अपनी गांड के छेद के द्वारा मजा आ रहा था।
पिछले दो दिनों में वो मुझ से और अपने बाप से चुद चुकी थी… पर आज उसके मन में गांड मरवाने का भी विचार आने लगा।

अपनी गांड में हुए उत्तेजक हमले और चूत पर मेरे दांतों के प्रहार से नेहा और भड़क उठी और वो अपनी चूत को ओर तेजी से मेरे मुंह पर घिसने लगी और झड़ने लगी- आआहह आआआअह्ह्ह… ले कुत्ते… भेन के लोड़े… पी जा मेरा रस… आआह्ह…
उसकी चूत आज काफी पानी छोड़ रही थी। मेरे मुंह से निकल कर नेहा की चूत के पानी की बूंदें नीचे गिर रही थी और वहां बैठी हमारी कुतिया ऋतु अपना मुंह ऊपर फाड़े उसे कैच करने में लगी हुई थी।

झड़ने के बाद नेहा मेरे मुंह से नीचे उतर आई और चट्टान पर अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी। मैंने अपना फड़कता हुआ लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा ही था कि उसने मुझे रोक दिया और बोली- बहन चोद, आज मेरी गांड में डाल…
मैंने हैरानी से उसकी आँखों में देखा और उसने आश्वासन के साथ मुझे फिर कहा- हां… बाबा… चलो मेरी गांड मारो… प्लीज…

मैंने अपनी वही पुरानी तरकीब अपनाई ओर एक तेज झटका मारकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया.
वो चिल्लाई- अबे… भेन चोद… समझ नहीं आती क्या… गांड मार मेरी… चूत नहीं कुत्ते…
पर मैं नहीं रुका और उसकी चूत में अपना लंड अन्दर तक पेल दिया ओर तेजी से झटके मारने लगा।

अब मेरा लंड नेहा की चूत के रस से अच्छी तरह सराबोर हो चुका था, मैंने अपना लण्ड निकाला… नेहा की आँखों में विस्मय के भाव थे कि मैंने उसकी चूत में से अपना डंडा क्यों निकाल लिया। मैंने उसे उल्टी लेटने को कहा, कुतिया वाले पोज में। वो समझ गयी और अपनी मोटी गांड उठा कर चट्टान पर अपना सर टिका दिया।

ऋतु जो अब तक खामोश बैठी अपनी चूत में उँगलियाँ चला रही थी, उछल कर चट्टान पर चढ़ गयी और अपनी टाँगें फैला कर नेहा के मुंह के नीचे लेट गयी। नेहा समझ गयी और अपना मुंह उसकी नर्म और गर्म चूत पर रख दिया और चाटने लगी।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली ओर चटवाने के मजे लेने लगी। वो नेहा के सर को अपनी चूत पर तेजी से दबा रही थी- चाट कुतिया… मेरी चूत से सारा पानी चाट ले… आआहह आआअह्ह… भेन चोद… हरामजादी… चूस मेरी चूत को… आआआह्ह्ह्ह!

नेहा ने उसकी चूत को खोल कर उसकी क्लिट को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। ऋतु तो पागल ही हो गयी- ओह.. ओह.. ओह.. ओह.. ओ.. ओह.. ओह.. ओह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह…
वो बुदबुदाये जा रही थी और चुसवाती जा रही थी।

पीछे से मैंने नेहा की गांड की बनावट देखी तो देखता ही रह गया। उसके उठे हुए कूल्हे किसी बड़े से गुब्बारे से बने दिल की आकृति सा लग रहा था। मैंने उसे प्यार से सहलाया और अपने एक हाथ से उसे दबाने लगा।

नेहा ने ऋतु की चूत चाटना छोड़ा और पीछे सर करके बोली- अबे भेन चोद… क्या अपना लंड हिला रहा है पीछे खड़ा हुआ… कमीने, मेरी गांड मसलना छोड़ और डाल दे अपना हथियार मेरी कुंवारी गांड में… डाल कुत्ते…
वो लगभग चिल्ला ही रही थी।

मैंने अपना लंड थूक से गीला किया और उसकी गांड के छेद पर टिकाया, थोड़ा सा धक्का मारा- अयीईईई… मर… गयीईई… अह्ह्ह ह्ह्ह्ह… नहींईईईईइ…
मेरे लंड का टॉप उसकी गांड के रिंग में फंस गया था।

मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड को निशाना बनाकर थूका… जो सही निशाने पर लगी, लंड गीला हो गया। मैंने एक और धक्का मारा- आआआ आआआ आआअह्ह्ह…
मेरी चचेरी बहन की ये चीख काफी लम्बी थी… उसने अपने दांत ऋतु की चूत में गाड़ दिए।
ऋतु भी बिलबिला उठी- हटट… कुतियाआ… अपनी गांड फटने का बदला मेरी चूत से ले रही है… आआआ आआह्ह्ह्ह… धीरे चाट… नहीं तो तेरी चूत में लकड़ी का तना डाल दूंगी…
ऋतु ने नेहा को धमकी दी।

मेरा लंड आधा उसकी गांड में घुस चुका था… मैंने उसे निकाला और थोड़ी और थूक लगाकर फिर से अन्दर डाला। अब मैं सिर्फ आधा लंड ही डाल रहा था। नेहा भी अपनी गांड धीरे धीरे मटका कर घुमाने लगी। मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है।

नेहा की गांड मोटी होने के साथ साथ काफी टाईट भी थी। आठ दस धक्के लगाने के बाद मैंने फिर से आगे की तरफ झटका मारा… तो नेहा फिर से चिल्लाई- माँ के लौड़े… तेरी माँ की चूत… भोंसड़ी के… कमीने… कुते… फाड़ डाली मेरी गांड… आआ आआह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह…
वो चिल्लाती जा रही थी और अपनी गांड मटकाए जा रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे मजा आ रहा है या दर्द हो रहा है।

उधर ऋतु का बुरा हाल था, चटवाने से पहले उसे बड़े जोर से पेशाब आ रहा था पर चटवाने के लालच में वो कर नहीं पायी थी। अब जब नेहा उसकी चूत का ताना बाना अलग कर रही थी तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपने तेज पेशाब की धार सीधे नेहा के मुंह में दे मारी।

पहले तो नेहा को लगा कि ऋतु झड़ गयी है पर जब पेशाब की बदबू उसके नथुनों में समायी तो उसने झटके से अपना मुंह पीछे किया और ऋतु की चूत पर थूक दिया।
ऋतु की चूत का फव्वारा बड़ी तेजी से उछला और नेहा के सर के ऊपर से होता हुआ नेहा की पीठ पर गिरा। मेरे सामने ऋतु अपनी चूत खोले अपने पेशाब से नेहा की कमर भिगो रही थी। नेहा की कमर से होता हुआ ऋतु का पेशाब, मेरे गांड मारते लंड तक फिसल कर आ गया और उसे और लसीला बना दिया और मैं और तेजी से नेहा की गांड मारने लगा।

नेहा ने अपना मुंह तो हटा लिया था पर उसके गले से कुछ बूँदें उसके पेट में भी चली गयी थी। उसका स्वाद थोड़ा कसैला था.. पर उसे पसंद आया। आज नेहा किसी जंगली की तरह बर्ताव कर रही थी। उसने उसी जंगलीपन के आवेश में अपना मुंह वापिस बारिश कर रहे फव्वारे पर टिका दिया और जलपान करने लगी।

ऋतु ने जब देखा कि उसकी बहन उसका पेशाब पी रही है तो वो और तेजी से झटके दे देकर अपनी चूत नेहा के मुंह में धकेलने लगी। मेरा लंड भी अब काफी गीला हो चुका था… थूक, पेशाब और नेहा की चूत के रस में डूब कर… मेरा लौड़ा किसी पिस्टन की तरह नेहा की गांड में अन्दर बाहर हो रहा था। नेहा की गांड का कसाव मेरे लंड पर हावी हो रहा था।
मेरे लंड ने जवाब दे दिया और उसने नेहा की गांड में उल्टी कर दी।

नेहा ने भी अपनी गांड में गर्म वाला महसूस करते ही झड़ना शुरू कर दिया और वहां ऋतु की चूत ने भी जवाब दे दिया और वो भी रस टपकाने लगी।

नेहा ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपना मुंह ऋतु की चूत की तरफ घुमा कर अपनी गांड उसके मुंह पर टिका दी। ऋतु उसकी गांड से बहते हुए मेरे लावे को चाटने लगी और अपना रस नेहा को चटवाने लगी।
मैं जमीन पर खड़ा हुआ अपने मुरझाते हुए लंड को देख रहा था और उन दोनों कुतियों को एक दूसरे की चूत चाटते हुए देख रहा था।

सारी चुदाई की कथा ख़त्म होने के बाद हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और नीचे की तरफ चल दिए। नेहा थोड़ा धीरे चल रही थी… चले भी क्यों न… मेरी बहन की गांड जो फट गयी थी आज!
हम को काफी समय हो गया था, हम भागते हुए अपने केबिन पहुंचे तो हमारे मम्मी पापा नंगे अजय चाचू के कमरे से निकल रहे थे। हम दोनों को सामने पाकर वो दोनों ठिठक कर वहीं खड़े हो गए।

हमें सामने पाकर पापा ने अपने लण्ड को हाथों से छुपा लिया औऱ मम्मी भी अपने बदन को ढकने के लिए अपने छोटे से हाथो का सहारा ले रही थी पर उनसे कुछ छुप नहीं पा रहा था।
हड़बड़ाहट में मम्मी ने हम से पूछा- तुम इतनी देर तक कहाँ थे?? क्या करके आ रहे हो??
वो पूरी नंगी हमारे सामने खड़ी थी इसलिए थोड़ा शर्मा भी रही थी अपनी हालत पर।

ऋतु ने अपने पापा के आधे खड़े हुए लंड को घूरते हुए कहा- हम सब बस घूम कर आ रहे हैं।
मैंने मम्मी की तरफ देखते हुए पूछा- क्या आप दोनों चाचू के कमरे से आ रहे हैं?
मम्मी ने हड़बड़ा कर कहा- ह्म्म्म… हम उन्हें गुड नाइट बोलने गए थे… उनके निप्प्ल्स तन कर खड़े हो चुके थे।
मैंने कहा- ठीक है… गुड नाइट.
और हम सब अपने कमरे में चले गए।

अन्दर जाते हुए हम तीनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी। हम जानते थे कि हमने मम्मी पापा को रंगे हाथों पकड़ लिया है, उनकी शक्ल देखते ही बनती थी।
अन्दर आकर नेहा सीधे बाथरूम में चली गयी, ऋतु ने भी अपने कपड़े बड़ी फुर्ती से उतार फैंके और बेड पर जाकर लेट गयी।

दूसरे कमरे में चाचू और चाची ने जब हमारी बात सुनी और बाद में हमें अन्दर आते देखा तो उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर झाँका और ऋतु को नंगी लेटे देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगे।

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार डाले और बेड पर कूद कर ऋतु की रसीली रसमलाई जैसी चूत पर मुंह टिका दिया। ऋतु ने अपने चूतड़ ऊपर हवा में उठा दिए और मेरे मुंह में अपनी चूत से ठोकरें मारने लगी।

दूसरे कमरे में आरती चाची ने मेरा लंड मेरी टांगों के बीच से लटकता हुआ देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और वो दोनों नंगे ही अपने कमरे से निकल कर हमारे कमरे में आ गए। चाची ने आते ही मेरी टांगो के बीच लेटकर मेरे लटकते हुए खीरे को अपने मुंह में भर लिया। मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी… “आआआ आअह्ह्ह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

चाचू भी अपना फड़कता हुआ लंड लेकर आगे आये और मेरे सामने लेटी हुई ऋतु के मुंह के पास जाकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। ऋतु ने उसे भूखी शेरनी की तरह लपका और उसका रस चुसना शुरू कर दिया।

चाची बड़ी आतुरता से मेरा लंड चूस रही थी। उनके और ऋतु के मुंह से सपड़ सपड़ की आवाजें आ रही थी। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और नेहा अन्दर आ गयी। वो अन्दर का नजारा देखकर बोली- मुझे तुम लोग वहां छोड़ कर यहाँ मजे ले रहे हो..
ये कह कर उसने भी अपने कपड़े उतारे और कूद गयी वो भी बेड पर।

नेहा भी ऊपर आकर अपने पापा के पास गयी और अपने नन्हे होंठों से उनके मोटे मोटे होंठ चूसने लगी। चाचू ने हाथ आगे करके अपनी बेटी के मोटे मोटे चुचे थाम लिए और उन्हें जोर से दबा डाला।
नेहा चाचू के आगे आ कर ऋतु के मुंह के ऊपर जाकर बैठ गयी। ऋतु ने चाचू का लंड चुसना छोड़ दिया और नेहा की चूत को चाटने लगी। चाचू का लंड अब नेहा के पेट से टकरा रहा था। नेहा काफी उत्तेजित हो गई थी और उससे सहन नहीं हुआ और उसने अपने पापा का लंड पकड़ कर अपनी रस उगलती चूत पर टिका दिया और उसे अन्दर समाती चली गयी.
“आआ आआआईईईई ईईईई… पपाआआ आआ…”
नीचे लेटी ऋतु ने इस काम को बड़ी खूबी से अंजाम दिया… लंड को चूत में धकेलने के लिए।

ऋतु अब नेहा की गांड के छेद को चूस रही थी। उधर अपने कमरे में जाने के बाद मम्मी को इस बात की बड़ी चिंता हो रही थी की आज वो चाचू के कमरे से नंगे बाहर निकलते हुए पकडे गए।
मम्मी इस बात को चाचू को भी बताना चाहती थी ताकि अगर हम उनसे भी पूछें हमारे मम्मी पापा रात के समय नंगे उनके कमरे से क्यों निकल रहे थे तो वो भी वो ही जवाब दें जो मम्मी ने दिया था।

यह सोच कर मम्मी अपने कमरे से निकली और चाचू के कमरे में चली गयी। वहां जाकर उन्होंने देखा कि कमरा तो बिल्कुल खाली था। तभी उनकी नजर दीवार पर गयी, शीशा नीचे पड़ा हुआ था और उस जगह एक बड़ा सा छेद था।

मम्मी आगे गयी और अन्दर झाँका। वहां का नजारा देखकर पूर्णिमा मैडम यानि मेरी माम के दिमाग के परखच्चे उड़ गए। उनका बेटा नंगा अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था और नीचे लेटी उनकी देवरानी उनके बेटे का लंड चूस रही थी और ऊपर उनका देवर अपनी ही बेटी को चोद रहा था और नीचे से उनकी बेटी नेहा अपनी जीभ से अपनी बहन ऋतु की गांड चाट रही थी।
उनकी आँखें घूम गयी ये सब देख कर।

मम्मी जल्दी से भाग कर वापिस गयी और अपने कमरे से पापा को बुला कर लायी। तब तक मैं अपने लण्ड को ऋतु की चूत में डाल कर चुदाई करने लगा था। मम्मी ने शीशे वाली जगह से पापा को अन्दर देखने को कहा।
जब पापा ने अन्दर का नजारा देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी। उनका छोटा भाई अपनी बेटी को चोद रहा था और उनका बेटा अपनी सगी बहन की चुदाई कर रहा था। ये देखकर वो आग बबूला हो गए और मम्मी को साथ लेकर वो दनदनाते हुए हमारे कमरे में आये और चिल्लाये- ये सब हो क्या रहा है!?!

पापा की आवाज सुन कर मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मैं स्तब्ध रह गया। पर मेरा लंड जो झटके मार मार कर अपनी बहन को चोद रहा था, वो नहीं रुका। मैंने धक्के देते हुए हैरानी से उनकी तरफ देखा और बोला- मम्मी.. पापा.. आप..?
उधर नेहा की चूत में उसके पापा का लंड अपनी आखिरी साँसें ले रहा था, चाचू से सहन नहीं हुआ और उन्होंने अपना रस अपनी बेटी की चूत में उगलना शुरू कर दिया। नेहा ने भी आँखें बंद करके अपने पापा के गले में अपनी बाहें डाल कर एक लम्बी चीख मारी- आआआआ अयीईईईइ… पपाआआ आआआ…
और वो भी झड़ने लगी। उनका मिला जुला रस नीचे लेटी ऋतु बड़े चटखारे ले ले कर पी रही थी।

ऋतु को मालूम तो चल गया था कि उसके मम्मी पापा कमरे में आ गए हैं पर अपनी चूत में अपने भाई के लंड के धक्के और अपने मुंह पर बरसते गर्म रस का मजा लेने से उसे कोई नहीं रोक सका।
ऋतु ने भी अपनी उखड़ी साँसों से उन्हें देखा और पूछा- मोम… डैड… आप यहाँ क्या कर रहे हैं?
मम्मी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए कहा- रोहण… क्या तुम ये करना बंद करोगे?
वो एक तरह से मुझे अपनी बहन की चूत मारने से रोक रही थी।

मैं अपने आखिरी पलों में था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला उसका विकराल रूप जो मेरी बहन की चूत के रंग में डूब कर गीला हो चुका था और उस पर चमकती नसे देख कर मेरी माँ की आँखें फटी की फटी रह गयी।
मेरे लंड ने बाहर निकलते ही झड़ना शुरू कर दिया और मेरी पिचकारी सीधे ऋतु की खुली हुई चूत से जा टकराई। चाची जल्दी से आगे आई और मेरे लंड पर अपना मुंह टिका दिया और मेरा सारा रस पी गयी।

चाची ने फिर ऋतु की चूत के ऊपर अपना मुंह टिकाया और वहां से भी मलाई इकट्ठी करके खा गयी और मेरी माँ की तरफ देखकर बोली- भाभी, आपके बच्चे बड़े टेस्टी हैं।

मम्मी ने चाची को डांटते हुए कहा- आरती… तुम ये सब कैसे कर सकती हो?
चाची ने सपाट लहजे में कहा- हमें तो इन्होंने ही बुलाया था।
मेरी माँ का मुंह खुला का खुला रह गया- क्या???

और फिर चाची ने सारी कहानी हमारे मम्मी पापा को सुना दी। वो अपना मुंह फाड़े सब बातें सुन रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि हम दोनों उनके कमरे में देखते हैं और हमें उनके बारे में सब पता है कि कैसे वो चारों लोग ग्रुप सेक्स करते हैं।
मम्मी-पापा ये सारी बात सुन कर शर्मिंदा हो गए पर फिर भी मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- तुम दोनों ने ये सब क्यों किया??
मैंने मम्मी को सीधे शब्दों में बताया- हम भी आपके और पापा की तरह बनना चाहते थे। जब हमने देखा कि आप और पापा, चाचू और चाची के साथ मिल कर सेक्स कर रहे हो और एन्जॉय भी कर रहे हो तो हमने भी ठान लिया की हम भी ये करेंगे। हमने यहाँ और लोगों को भी ग्रुप सेक्स करते देखा है और वो सब भी खूब एन्जॉय करते हैं।
मम्मी ने मुझसे रुंधी आवाज में कहा- लेकिन तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए।

अब ऋतु भी मेरे पक्ष में बोल पड़ी- क्यों नहीं करना चाहिए… मेरी चूत में हर तरह का लंड चला जाता है और मुझे उन्हें चूसने में भी मजा आता है… तो फिर ये सब क्यों नहीं करना चाहिए?
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये सब गलत है, भाई बहन को आपस में ये सब नहीं करना चाहिए।
ऋतु ने अपने शब्दों को पीसते हुए मम्मी से कहा- अच्छा… तो आप लोग जो करते हो वो गलत नहीं है क्या??

चाची जो बड़े देर से ये सब देख रही थी, वो मम्मी की तरफ हँसते हुए बोली- देखो भाभी, ये जो कह रहे हैं, वो सही है। हम लोग भी कहाँ रिश्तेदारी का ख्याल रखते हैं। हमें भी तो सिर्फ सेक्स करने में मजा आता है, अगर ये भी वो ही कर रहे है तो बुरा क्या है।
मम्मी ने फिर से कहा- पर ये हमारे बच्चे हैं।

अब की बार चाचू ने कहा- हाँ हैं… और तभी इनके साथ ये सब करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है.
और उन्होंने अपनी बाँहों में पकड़ी नंगी नेहा को अपने सीने से दबा दिया और आगे बोले- और मुझे लगता है… कि आपको भी एक बार ये सब करना चाहिए।
मम्मी ने अपने सर को एक झटका दिया और कहा- मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं सोने जा रही हूँ, इस बारे में कल बात करेंगे।
चाची ने उनसे कहा- ठीक है बाय…

मम्मी ने हैरानी से पूछा- बाय का क्या मतलब है… तुम लोग नहीं जा रहे क्या अपने कमरे में?
चाची- नहीं, अभी मुझे कुछ और भी काम है.
और चाची ने हाथ बढाकर मेरे लंड को थाम लिया और दूसरे हाथ से अपनी चूत मसलने लगी।

मम्मी चिल्लाई- आरती… बंद करो ये सब!
चाचू आगे आये और मम्मी का हाथ पकड़ कर बेड पर बिठा दिया और कहा- अरे भाभी, आप यहाँ आओ और थोड़ा आराम करो.
चाचू का झूलता हुआ लंड मम्मी की आँखों के सामने लटक रहा था।

चाचू ने मम्मी का मुंह पकड़ा और अपना लंड उनके मुंह में ठूस दिया और उन्हें नीचे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उनकी छाती पर चढ़ बैठे।

चाचू ने मम्मी की आँखों में देख कर कहा- अब चुपचाप लेटी रहो और मेरा लंड चूसो भाभी!
और आरती की तरफ देख कर बोले- डार्लिंग… मेरी थोड़ी मदद करो न…
चाची- हाँ… हाँ… क्यों नहीं..
और चाची अपनी जगह से उठी और बेड के किनारे आकर मम्मी के गाउन को खींच कर बीच में से खोल दिया। मम्मी ने नीचे कुछ नहीं पहना था और चाची ने उनकी मोटी जांघें पकड़ कर उनकी रसीली चूत पर अपना मुंह रख दिया।

मम्मी के मुंह में चाचू का लंड था पर फिर भी उनके मुंह से घुटी हुई सी सिसकारी निकल गयी- आआआ आअह्ह्ह्ह…
चाचू का लम्बा लंड मम्मी के मुंह में किसी पिस्टन की तरह आ जा रहा था। नीचे बैठी चाची भी अपनी लम्बी जीभ के झाड़ू से मम्मी की चूत की सफाई करने में लगी हुई थी। चाचू ने मम्मी के ऊपर बैठे हुए उनके गाउन के बटन खोल दिए और मम्मी के मोटे चुचे ढलक कर दोनों तरफ झूल गए।

चाचू ने मम्मी के गाउन को कंधों से थोड़ी मुश्किल से उतारा और बाकी काम नीचे बैठी चाची ने कर दिया। चाची ने उनकी गांड ऊपर करके उसे नीचे से बाहर खींच दिया और इस तरह मम्मी हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी।

मम्मी को इतनी पास से नंगी देखने का ये मेरा पहला अवसर था। वो किसी अनुभवी की तरह चाचू के लंड को आँखें बंद किये चूस रही थी। मम्मी की चूत से इतना रस बह रहा था कि चाची उसे पी ही नहीं पा रही थी और वो बह कर मम्मी की गांड को भी गीला कर रहा था।

मम्मी के मोटे मोटे चुचे देख कर मेरे मुंह में भी पानी आ गया। मैंने उनके चुचे हमेशा अपने मुंह में लेने चाहे थे। घर में भी जब वो बिना चुन्नी के घूमती थी तो मेरा मन उनकी गोलाइयाँ देख कर पागल हो जाता था और अब जब वो मेरे सामने नंगे पड़े थे… मेरा लंड उन्हें देख कर तन कर खड़ा हो गया था, मैंने अपने हाथ से लण्ड को मसलना शुरू कर दिया।

ऋतु ने इशारा करके पापा को अपनी तरफ बुलाया। वो थोड़ा झिझकते हुए ऋतु के पास आये और हम सबके साथ आकर खड़े हो गए। ऋतु ने अपना हाथ उनकी कमर में लपेट दिया और उनसे सट कर खड़ी हो गयी।
पापा थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे.. हो भी क्यों न उनकी जवान लड़की नंगी जो खड़ी थी उनसे चिपक कर…

हम सभी की नजर मम्मी पर गड़ी हुई थी। मेरी देखा देखी पापा ने भी अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपनी पत्नी को अपने भाई और उसकी पत्नी के द्वारा चुदता हुआ देखकर वो भी अपना लंड हिलाने लगे।
पापा का मोटा लंड देखकर ऋतु की आँखों में एक चमक आ गयी। वो अपने पापा के लंड को काफी दिनों से देख रही थी और मन ही मन उनसे चुदना भी चाहती थी। आज उन्हें अपने साथ खड़ा होकर हिलाते देखकर उससे सहन नहीं हुआ और उसने झुक कर अपने पापा का लंड अपने मुंह में भर लिया।

पापा के मुंह से एक ठंडी सिसकारी निकल गयी- स्स्स स्स्स्स स्स्स… आआआ आअह्ह्ह…
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया।
अपने सामने बैठी अपनी नंगी बेटी को देख कर उनका लंड फुफकारने लगा और वो तेजी से उसका मुंह चोदने लगे।

“आआआ आआआ आह्ह्ह…” पापा ने अपनी आँखें बंद करी और एक तेज आवाज निकाली। ऋतु उठ खड़ी हुई और पापा के लंड को पकड़ कर आगे की तरफ चल पड़ी। बेड पर पहुंचकर उसने पापा को नीचे लिटाया और उनकी कमर के दोनों तरफ टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी और उनकी आँखों में देखकर अपनी चूत का निशाना उनके लंड पर लगाया और बोली- पापा प्लीज… चोदो मुझे… और उसने अपने मोटे चूतड़ों का बोझ पापा के लंड के ऊपर डाल दिया।

पापा का मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में ऐसे गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.
“आआ आआआआ आआअह्ह…” ऋतु ने एक तेज सीत्कार ली.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी ने अपनी आँखें खोली और पास लेटे अपने पति को अपनी बेटी की चूत मारते हुए देखा और फिर उन्होंने भी मौके की नजाकत समझी और अपनी आँखें बंद करके चाचू का लंड चूसने में मस्त हो गयी।

पापा और मम्मी ने जब एक दूसरे को देखा तो वो समझ गए कि अब अपने आपको रोकना व्यर्थ है इसलिए इन हसीं पलों के मजे लो और जब मम्मी ने आँखें बंद कर ली तो पापा ने अपना ध्यान ऋतु की तरफ लगा दिया।

पापा ने अपने हाथ ऊपर उठाये और ऋतु के झूलते हुए मम्मे अपने हाथों में भर लिए। वो हमेशा घर पर अपनी बेटी के ब्रा में कैद और टाइट टी-शर्ट में बंद इन्ही कबूतरों को देख कर मचलते रहते थे। आज ये दोनों रस कलश उनके हाथ में थे। उन्होंने अपना मुंह ऊपर उठाया और उन कलशों से रस का पान करने लगे। उनके मोटे मोटे होंठ और मूंछें ऋतु के नाजुक निप्पलों पर चुभ रही थी पर उनका एहसास बड़ा ही मजेदार था।

ऋतु ने अपने पापा के सर के नीचे हाथ करके अपनी छाती पर दबा दिया और अपना चुचा उनके मुंह में ठूँसने की कोशिश करने लगी। पापा ने अपना मुंह पूरा खोल दिया और ऋतु का आधे से ज्यादा स्तन उनके मुंह के अन्दर चला गया।
पापा का मुंह अपनी बेटी के चुचे से पूरा भर गया और फिर जब उन्होंने अपनी जीभ अन्दर से ऋतु के चूचों पर घुमानी शुरू की तो ऋतु तो जैसे पागल ही हो गयी। इतना मजा आज तक उसे नहीं आया था। नीचे से पापा का लम्बा लंड उसकी चूत की प्यास बुझा रहा था और ऊपर से पापा उसका दूध पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे।

चाची अपनी जगह से उठी और अपनी चूत को मम्मी के मुंह के ऊपर ले जाकर रगड़ने लगी। चाचू मम्मी के मुंह से नीचे उतर गए और उनके उतरते ही अपनी जवानी की आग में तड़पती हुई नेहा उन पर झपट पड़ी और चाचू के होंठ अपने मुंह में दबाकर नीचे चित लिटा दिया और चाचा का मोटा लंड अपनी चूत पर टिका कर उसे अन्दर ले लिया।
मैंने मम्मी की चूत के ऊपर अपना मुंह रखा और उसे चाटने लगा। मम्मी को शायद पता चल गया था कि मैं उनकी चूत चूस रहा हूँ। उन्होंने उत्तेजना के मारे अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये। मैंने नीचे हाथ करके उनके चौड़े पुट्ठे पकड़े और अपनी दो उँगलियाँ उनकी गांड के अन्दर डाल दी और अपनी लम्बी जीभ उनकी चूत के अन्दर।

मम्मी मचल उठी इस दोहरे हमले से…”आआआ आआआ आआआ आआआ आआह्ह्ह्ह..”
मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत के छेद पर टिका दिया।

आज मैं मम्मी की चूत चुदाई कर रहा था, उसी छेद के अन्दर अपना लंड डाल रहा था जहाँ से मैं निकला था। मेरे लंड का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर मम्मी तो बिफर ही पड़ी। उन्होंने अपने चूतड़ फिर से ऊपर उठा लिये और मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर समाता चला गया।
“आआआ आअह…” मम्मी के मोअन की हल्की आवाजें चाची की चूत से छन कर मुझे सुनाई दे रही थी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैं तेजी से अपनी माँ की चूत मारने लगा।

उधर ऋतु अपने आखिरी पड़ाव पर थी, वो पापा के लंड के ऊपर उछलती हुई बडबडा रही थी- आआआअह्ह्ह… चोदो मुझे पापा… अपने प्यारे लंड से… फाड़ डालो अपनी बेटी की चूत इस डंडे से… चोदो न… जोर से… आआआह्ह्ह… बेटी चोद… सुनता नहीं क्या तेज मार… कुत्ते… बेटिचोद… चोद जल्दी जल्दी… आआआ आआह्ह… डाल अपना मुसल मेरी चूत के अन्दर तक… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह… और तेज और तेज और तेज… आआआअह्ह्ह… हाँ… ऐसे..ही… भेन्चोद… चोद… अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह!

पापा से अपनी बेटी के ये प्यारे शब्द बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने अपना रस अपनी छोटी सी बेटी की चूत के अन्दर उड़ेल दिया। ऋतु भी पापा के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु को देखकर नेहा को भी जोश आ गया… वो भी चिल्लाने लगी चाचू के लंड पर कूद कर- हननं… डेडी…चोदो अपनी बेटी को… देखो ऋतु को ताऊ जी कैसे चोद रहे है… वैसे ही चोदो अपनी लाडली को… डालो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर तक… आआहहह… डाआल ऊऊऊऊओ…
और वो भी चाचू के साथ साथ झड़ने लगी।

ऋतु पापा के लंड से नीचे उतरी और पापा के लण्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। चाची जो अपनी चूत मम्मी से चुसवा रही थी, उन्होंने अपना सर आगे किया और ऋतु की चूत से टपकते पापा के रस को पीने लगी।

मेरे लिए भी अब सब्र करना कठिन हो गया था। मैंने भी एक दो तेज झटके मारे और अपना पानी मम्मी की चूत के अन्दर छोड़ दिया। मम्मी ने अपने अन्दर मेरे गर्म पानी के बहाव को महसूस किया और वो भी जोर से चिल्ला कर झड़ने लगी- आआह आआ आअह्ह्ह्ह… आआआ… अह.. अह.. अ..अ..हहा.. ह..अ..ह.. हा..हा.. हा…!
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतु जो पापा के लंड से उतर चुकी थी, आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी। अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी।

मम्मी ने ऋतु के सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगें खींच कर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी। ऋतु की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी। थोड़ी ही देर में उन दोनों की चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक दूसरी के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी।

चाची ने हम तीनों बच्चों की तरफ हाथ करके कहा- ये कितने अच्छे बच्चे हैं…
वो हमारी परफ़ोरमेन्स से काफी खुश थी।

अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ - Main tumhara lund chusna chahti hun

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सुबह दोनों को नाश्ते पर देखकर ऐसा नहीं लगा कि दोनों इस तरह की हैं.
दोनों ने नाश्ता किया और स्कूल चली गई. मैं भी कॉलेज गया और सारा दिन दोनों के बारे में सोचता रहा.

शाम को घर पहुंच कर ऋतु का इंतज़ार करने लगा.
वो स्कूल से आते ही सीधे मेरे रूम में घुसी और मुझसे लिपट गई और मुझसे पूछा- तुमने देखा… कैसा लगा… मजा आया या नहीं… बोलो?
मैंने कहा- अरे हाँ, मैंने देखा और बहुत मजा आया.

ऋतु बोली- हाय… मैं तुम्हें क्या बताऊँ पूजा की चूत का रस इतना मीठा था कि बस मजा आ गया.
और फिर मेरे लंड पर हाथ रखकर बोली- पर इसका कोई मुकाबला नहीं है.

फिर ऋतु ने पूछा- क्या तुम्हें देखने में अच्छा लगा?
मैंने कहा- हाँ, मेरा मन तो कर रहा था कि काश मैं तुम्हारे रूम में होता तुम्हारे साथ!
ऋतु ने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा- शायद एक दिन तुम भी वहाँ पर होगे… हम दोनों के साथ!

मैंने पूछा- तो क्या मैं सन्नी और विकास को बुला लूं… तुम दोनों का शो देखने के लिए, तुम्हें कोई आपत्ति तो नहीं है न?
ऋतु- तुम कितना चार्ज करोगे उनसे?
मैं- एक हजार एक बन्दे से यानी टोटल दो हजार रूपए पर शो!
ऋतु- पर अब हम दो लड़कियाँ हैं क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें ज्यादा चार्ज करना चाहिए?
मैं- हाँ, बात तो सही है कितने बोलू उनको… पंद्रह सौ ठीक है क्या?
ऋतु- हाँ ठीक है.
मैं- तो ठीक है, अगला शो कब का रखें, पूजा कब आ सकती है दुबारा तुम्हारे साथ रात को रुकने के लिए?
ऋतु- उसको जो मजे कल रात मिले है.. मैं शर्त लगा कर कह सकती हूँ वो रोज रात मेरे साथ बिताने के लिए तैयार होगी.
और वो हंसने लगी.

ऋतु- मुझे भी एक आईडिया आया है जिससे हम और ज्यादा पैसे कम सकते हैं.
मैं- कैसे?
ऋतु- अगर मैं भी अपनी सहेलियों को अपने रूम में बुलाकर तुम्हें मुठ मारते हुए दिखाऊं तो?
मैं- मुझे मुठ मारते हुए… इसमें कौन रूचि लेगी?
ऋतु- जैसे तुम लड़के लड़कियों को नंगा देखने के लिए मचलते रहते हो वैसे ही हम लड़कियां भी लड़कों के लंड के बारे में सोचती हैं और उत्तेजित होती हैं, अगर कोई लड़की तुम्हें मुठ मारते हुए देखे तो इसमें तुम्हें क्या आपत्ति है.
मैं- लेकिन ये तुम करोगी कैसे?

ऋतु- मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर चार बजे घर ले आऊँगी और तुम उससे पहले ही आ जाते हो. तुम ठीक चार बजे मुठ मारनी चालू कर देना. मैं उसको बोलूंगी कि मेरा भाई रोज इसी समय बजे अपने रूम में मुठ मारता है और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ. मुझे विश्वास है कि वो भी तुम्हें देखने की जिद करेगी, तब मैं उससे पैसों के बारे में बात करके तुम्हें मुठ मारते हुए दिखा दूँगी.

मैं- वाह, मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया… तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो.
ऋतु- आखिर बहन किसकी हूँ.
मैं- और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?
ऋतु- वो ही… एक हजार रूपए… ठीक है ना?
मैं- ठीक है.

ऋतु- और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों हम दोनों को देखने के तीन हजार रूपए अलग से तुम्हें देंगे… तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं.
ऋतु- वैसे एक बात बताऊँ… मुझे काफी उत्तेजना हो रही थी कि कल तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो… काफी मजा आ रहा था.
मैं- मुझे भी काफी मजा आ रहा था. मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है.
ऋतु- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ.
मैं- अभी… मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी.
ऋतु- अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा… अपना लंड निकालो… जल्दी!

मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतु झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई. ऋतु ने मेरी चड्डी एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नर्म हाथों में लेकर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और फिर उसे चूसने लग गई.

ऋतु के होंठ लगते ही उत्तेजित होकर एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली. वो उठी और अपना मुंह साफ़ करते हुए बोली- मुझे तो तुम्हारे वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है… और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसें छोड़ती हुई बोली- आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगे… समझे ना!
मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.

मैंने धीरे से कहा- अगर तुम चाहो तो बाद में मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ.
ऋतु- तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली… मैं रात होने का इन्तजार करुँगी.
मैं- मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा.

फिर वो अपने रूम में चली गई और रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए.

मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था कि पिछले कुछ दिनों से मैं और ऋतु एक दूसरे से कितना खुल गए हैं… लंड-चूत की बातें करते हैं… मुठ मारना… एक दूसरे को नंगा देखना और छूना.. कितना आसान हो गया है… मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया. मुझे ऋतु का इन्तजार था.

मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गई और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली- वाह.. तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ.

मैं- पर मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ!
ऋतु- कोई बात नहीं तुम मेरी चूत चूसो और मैं तुम्हारा लंड… हम 69 की पोजीशन ले लेते हैं.

ऋतु ने जल्दी से अपना गाउन खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मम्मे और तने हुए निप्पल देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे और मैंने नोट किया कि आज उसकी चूत एकदम साफ़ और चिकनी थी. शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया.

ऋतु झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगें उठा कर घुमाते हुए बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गई.
उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गई. उसकी चूत जल रही थी… एकदम गर्म, लाल, गीली, रस छोड़ती हुई…

मैं तो अपने काम में लग गया. उसकी चूत के लिप्स को अपनी उंगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखी तो मुझे उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…
मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियाँ साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता… मैं लगा रहा… लगा रहा… साथ ही साथ मैं अपनी एक उंगली से उसकी क्लिट भी रगड़ रहा था.

मेरे लंड का भी बुरा हाल था. ऋतु उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो… अन्दर तक ले जाती, जीभ से चारों तरफ चाटती और फिर बाहर निकालते हुए हल्के से दांतों का भी इस्तेमाल करती… वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.

मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चूसना शुरू कर दिया. वो तो बिफर ही गई मेरे इस हमले से… और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी.

मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और ऋतु ने जैसे ही मेरे टट्टों को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया… मैं झड़ गया और वो मेरा पूरा माल पी गई.

फिर हम दोनों उठे और एक दूसरे की तरफ देखा. हम दोनो के चेहरे गीले थे और हम ये देखकर हंसने लगे.

ऋतु- तुमने तो मुझे अपने वीर्य की लत लगा दी है… कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में!
मैं- मैं भी तुम्हारे मीठे रस का शौकीन हो चुका हूँ… जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.

मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था वो मेरे साथ लेट गई. उसके मोटे चूचे मेरे सीने से लग कर दब गए. उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगा. उसकी गर्म साँसें मेरे कानों पर पड़ रही थी. ऋतु की एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतु की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.

ऋतु- तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है… मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है…
और फिर उसने जो किया, मैं स्तब्ध रह गया.

ऋतु उठी और अपनी दोनों टाँगें फैला कर मेरे ऊपर आ गई. उसकी दोनों बाहें मेरे सर के दोनों तरफ थी और ऋतु के दोनों मोटे मोटे मम्मे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे और मेरी बहन की रसीली चूत मेरे खड़े हुए लंड को छू रही थी.

फिर ऋतु थोड़ा झुकी और मेरे होंठों को चूसने लगी. उसके मुंह में से मेरे वीर्य की गंध आ रही थी.
मैंने भी उसके नर्म होंठों को चूसना और चाटना शुरू कर दिया. फिर जब उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली तो मैं उसकी मचलती जीभ को पकड़ने की नाकाम कोशिश करते हुए जोर जोर से उसे चूसने लगा.

मेरे हाथ अपने आप उसकी छाती पर जा चिपके और मेरी उंगलियाँ उसके निप्पल को सहलाने लगी. लटकने की वजह से उसके मम्मे काफी बड़े लग रहे थे और मेरी हथेली में भी नहीं आ रहे थे.
ऋतु धीरे धीरे अपनी चूत की बाहरी दीवारों पर मेरे खड़े हुए लंड को रगड़ रही थी और उसकी चूत की गर्म हवाओं से मेरा लंड झुलस रहा था.
मैंने भी अपनी जीभ अब उसके मुंह में डाल दी. वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे मेरा लंड हो… पूरी तरह से वो मुझे पीना चाहती थी.

दूसरी तरफ मेरा लंड अब उसकी चूत की दरार में फंस गया था. ऋतु ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ नशीली आँखों से देखा और मुझसे कहा- आई लव यू… रोहण!

मैं कुछ समझ पाता इससे पहले उसने अपनी गांड का दबाव मेरे ऊपर डाल दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समाता चला गया.
ऋतु के मुंह से एक कराह निकल गई ‘आआआईईई… .म्म्मम्म्म्म… माआआअर.. ग्ईईईईई.. आआआअहहह!’

मैं तो भौचक्का रह गया. मुझे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी पर जब मैंने ऋतु का तृप्ति भरा चेहरा देखा तब उसकी बंद आँखें और हलकी मुस्कराहट से भरा चेहरा देखा तो मुझे एक सुखद अहसास हुआ और मैं भी पूरे जोश के साथ अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा.
ऋतु ने अपनी बाहों से मेरी गर्दन के चारों तरफ फंदा बना डाला जिसकी वजह से उसके मम्मे मेरे चेहरे पर रगड़ खा रहे थे.

मैंने अपने हाथ उसकी चौड़ी गांड पर रखे और उन्हें दबाते हुए नीचे से धक्के मारने लगा. उसके होंठ मेरे कान के बिल्कुल पास थे और वो मीठे दर्द से हल्के हल्के चिल्ला रही थी ‘आआआ आआअहहह… रोहण… आई लव यू… फ़क मी… आई लव यौर बिग… कॉक… तुम्हारा मोटा लंड… उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआ… मेरी चूत में अन्दर तक डाआआअलो… और जोर से… और जोर से… आआआअह्ह्ह… मेरी चूत तुम्हारी है… मारो मेरी चूत… चोदो मुझे..’

ऋतु अब गन्दी गन्दी गालियाँ भी देने लगी थी ‘बहनचोद… चोद न… आआआअह… चोद अपनी कुँवारी… कमसिन… बहन को… अपने लम्बे लंड से… पूरा ले लूंगी… आआअईईई… हरामखोर… चोद मुझे… फाड़ दे अपनी बहन की चूऊऊत… आआआह…..माआआ आआआऐन तो गईई ईईई… आआअह…’

थोड़ी देर की चुदाई के बाद वो झड़ने लगी. मैंने अपने लंड पर उसका लावा महसूस किया. वो गहरी गहरी साँसें लेकर ढीली पड़ गई… फिर मैंने उसे बेड पर धक्का दिया और उसे घोड़ी बना कर उसकी चूत में पीछे से अपना लंड डाल दिया.

ऋतु की फैली हुई गांड काफी दिलकश लग रही थी. मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ा और अपनी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी. उसके मुंह से ‘ओह्ह्हह्ह… ओफ्फ फ्फ्फ… आआहह…’ की आवाजें दोबारा आने लगी. मैं भी अब झड़ने के करीब पहुँच गया.

मैंने ऋतु से कहा- ऋतु मैं आया…
और अपना लण्ड उसकी चूत से निकालकर अपने हाथों में ले लिया.
वो जल्दी से पलटी और मेरे लंड पर अपना मुंह लगा दिया… मेरे लिए ये काफी था. मैंने उसका मुंह उसकी मनपसंद मिठाई से भर दिया और वो सारी रसमलाई खा गई.

फिर ऋतु उठी और ‘आई लव यू’ कहकर मेरे सीने से लग गई. मैं भी उसके कोमल से शरीर को सहलाते हुए ‘आई लव यू टू… आई लव यू टू…’ कहने लगा.

हाँफते हुए ऋतु ने अपनी नजर मुझसे मिलाई और मुस्कुराकर बोली- मुझे तुम्हारा लंड पसंद आया… ये अन्दर जाकर तो बहुत ही मजे देता है. डिल्डो को अन्दर ले लेकर मैं थक गई थी. ये कितना मुलायम, गर्म, और मजेदार है.
मैंने कहा- तुम्हारी चूत भी बहुत मजेदार है. मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है. कितना आनन्द आ रहा था तुम्हारी रेशम जैसी चूत में अपना लंड डालने में. मैंने कभी इस आनन्द की तो कल्पना भी नहीं की थी.

ऋतु ने बेड पर से उठते हुए कहा- अब तुम कल मुझे सुबह उठाने के लिए आ जाना मेरे रूम में!
मैं- उठाने के लिए… पर किसलिए?
ऋतु- क्योंकि मुझे और मजे चाहिए इसलिए… कल से रोज सुबह तुम मेरी चूत चाटोगे और फिर अपने इस खूबसूरत लंड से मेरी चूत मारोगे… और अब तो हम बिज़नस पार्टनर हैं… हैं ना!
मैंने खुश होते हुए कहा- हाँ हाँ… बिल्कुल हैं.

ऋतु- ठीक है फिर… गुड नाईट…

और उसने झुक कर मेरे लंड को चूम लिया और बाहर निकल गई.

अगले दिन सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गई और मैंने जब छेद से ऋतु के रूम में देखा तो वहाँ अँधेरा था. मैं दबे पांव उसके रूम में गया और उसके बेड के किनारे जाकर खड़ा हो गया. थोड़ी देर बाद अँधेरे में अपनी आँखें जमाने के बाद मैंने देखा कि ऋतु अपनी चादर से बाहर निकल कर सो रही थी.
मेरी बहन एकदम नंगी थी, उसकी दोनों टांगें फैली हुई थी जिसकी वजह से मेरी बहन की चूत अलग ही चमक रही थी.
मेरा लंड यह नजारा देख कर फुफकारने लगा. मैंने फुर्ती में अपने कपड़े उतारे और उसकी खुली हुई टांगों के बीच कूद गया.

मैंने अपना मुंह जैसे ही उसकी चूत पर टिकाया, उसके शरीर में एक सिहरन सी हुई और उसकी नींद खुल गई.
जब उसने मुझे अपनी चूत चाटते हुए देखा तो वो सब समझ गई और उसके मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी. ऋतु सिसकारती हुई बोली- म्म्म्म म्म्म… आआ आआआह आआ… गुड मोर्निंग.. रोहन!

मैंने उसकी रसीली चूत से अपना मुंह ऊपर उठाया और बोला- गुड मोर्निंग!

हमेशा की तरह उसकी चूत में से ढेर सारा रस बहने लगा और मैं चटखारे लेकर उसे पीने लगा. ऋतु ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे ऊपर की तरफ खींचने लगी. मैं ऊपर खिसकते हुए उसकी नाभि, पेट और फिर मोटे-मोटे चूचों पर किस करता चला गया और अंत में उसके होठों ने मुझे ऐसे जकड़ा कि मेरे मुंह से भी आह निकल गई.

मैंने अपने दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ लिया और चूम चूमकर उसे गीला कर दिया. उसने अपना हाथ हम दोनों के बीच डाला और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया. बाकी काम मैं जानता था और एक तेज धक्के से मैंने अपना सात इंच लम्बा लंड उसकी गर्म चूत में डाल दिया. उसकी आँखें उबल कर बाहर आने को होने लगी पर फिर कुछ झटकों के बाद वही आँखें मदहोश होने लगी और उसके मुंह से तरह तरह की आवाजें आने लगी- आअअ अअहह… चोदो… मुझए… मुझे तुम्हारा लंड रोज चाहिए…. आअहहह… जोर से और जोऊर से!

मैंने अपना मुंह ऋतु के मुंह से जोड़ दिया और उसकी जीभ चूसने लगा. कुछ देर बाद मैं झड़ने के करीब था. मेरे मुंह से एक भारी हुंकार निकली, ऋतु समझ गई और उसने हमारी किस तोड़ते हुए मेरा लंड बाहर निकाला और बेड के किनारे पर लेट कर मेरा गीला लंड अपने मुंह में ले लिया.
मैं अब तेजी से अपना लंड उसके मुंह में आगे पीछे करने लगा और अब मैं उसका मुंह चोद रहा था.

वो भी मेरे लंड को अन्दर तक ले जा रही थी जो उसके गले के अंत तक जाकर उसकी दीवारों से टकरा रहा था. मैंने जल्दी ही झड़ना शुरू कर दिया और अपने गर्म वीर्य की धारें ऋतु के गले में छोड़ने लगा.
वो मेरे वीर्य की हर बूँद चटखारे लेकर पी गई.

फिर ऋतु ने मुझे धक्का दिया और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गई. उसकी चूत ने मेरे होंठों को ढक लिया. मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली और उसे चूसना शुरू कर दिया और जल्दी ही उसका रस बहकर मेरे मुंह में आने लगा और वो हल्के से चिल्ला कर झड़ने लगी.

झड़ने के बाद ऋतु उठी और फिर हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे की किस ली. फिर उसने किस तोड़ी और बोली- अब तुम जल्दी से अपने रूम में जाओ. इससे पहले कि मम्मी पापा उठ जाएँ… और कॉलेज भी तो जाना है ना तुम्हें, मुझे भी स्कूल के लिए तैयार होना है.
मैं- ओह्ह मैं तो भूल ही गया था… मुझे तो बस आज रात का इन्तजार है.
ऋतु- मुझे भी!

फिर मैंने अपने कपड़े पहने और रूम में जाकर तैयार हुआ.

नाश्ता करते हुए ऋतु ने सबको बता दिया कि आज रात उसकी फ्रेंड पूजा रात को यहीं रुकेगी.

कॉलेज जाकर मेरा मन सारा दिन कहीं नहीं लगा, मुझे तो बस शाम का इन्तजार था.
मैं कॉलेज से जल्दी घर आ गया. घड़ी देखी तो तीन बजने वाले थे और ऋतु साढ़े तीन बजे तक स्कूल से आती थी. मैं अपने रूम में जाकर उसका इन्तजार करने लगा.

कुछ देर बाद ऋतु और पूजा घर आ गई. मैंने छेद से देखा तो दोनों अपने रूम में बैठकर बातें कर रही थी. वो पूजा को बता रही थी कि कैसे वो रोज मुझे छेद के जरिये मुठ मारते हुए देखती है और अगर वो भी देखना चाहती है तो उसे एक हजार रूपए देने होंगे.

पैसों का नाम सुनकर पूजा ऋतु को हैरानी से देखने लगी.
पर जब ऋतु बोली- अगर तुम्हें लगे कि यह ‘शो’ अच्छा नहीं हैं तो तुम पैसे मत देना.
कुछ सोचने के बाद वो मान गई क्योंकि उसने भी आज तक कोई असली लंड नहीं देखा था.

मैंने घड़ी की तरफ देखा तो चार बजने वाले थे. मैं अपने बेड पर आकर बैठ गया और संकुचाते हुए अपनी जींस और चड्डी को उतार दिया और मुठ मारना शुरू किया.

दूसरे रूम में से जब ऋतु ने देखा कि मैंने अपनी जींस उतार दी है और मुठ मारना चालू कर दिया है तो उसने पूजा को बुलाया और उसे छेद में से देखने को कहा.
छेद से झाँकने के बाद पूजा ने धीरे से कहा- वाव… ऋतु, तुम्हारे भाई का लंड तो काफी बड़ा है और सुन्दर भी!
ऋतु- हाँ शायद… क्योंकि मैंने कभी और किसी का लंड तो देखा नहीं है… ले दे के सिर्फ अपना डिल्डो ही है जिससे हम भाई के लंड को तौल सकते हैं.
और दोनों हंसने लगी.

मुझे इस बात का आभास हो गया था कि छेद से मेरी बहन और और उसकी सहेली बारी-बारी से मुझे देख रही हैं.

पूजा ने गहरी सांस लेते हुए कहा- ये सच में डिल्डो के मुकाबले कुछ ज्यादा ही है और इसे देखने में भी कितना मजा आ रहा है. लंड के ऊपर की नसें कैसे चमक रही हैं. सच में यह बहुत सुंदर है.

मैं भी अपने रूम में बैठा उत्तेजित होता जा रहा था यह सोच कर कि पूजा और ऋतु मुझे दूसरे रूम से देख रही हैं. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जब मैं झड़ने वाला था तो थोड़ा सा घूम कर अलमारी की तरफ हो गया और खड़े होकर अपनी धारें मारनी शुरू कर दी.

यह देखकर दूसरे रूम में पूजा आश्चर्यचकित रह गई और वो बोली- हाय… वो तो खड़ा हो गया है और अब उसका लंड मेरे बिल्कुल सामने है… वाव… अब उसके लंड में से रस निकल रहा है… कितना सुन्दर दृश्य है… मजा आ गया.

मैंने गहरी साँसें लेते हुए झड़ना बंद किया और बेड पर लेट गया और सोचने लगा ‘काश पूजा मेरे सामने होती तो मैं उसके चेहरे के भाव देख सकता!’

दूसरे रूम में पूजा ने उछलते हुए ऋतु को गले से लगा लिया और उसके होंठों को चूम लिया और बोली- मैंने इससे ज्यादा सुन्दर चीज आज तक नहीं देखी, मेरी तो चूत से पानी निकलने लगा है, निप्पल खड़े हो गए हैं… ये देख!
और उसने ऋतु का एक हाथ अपनी चूची पर और दूसरा सीधे अपनी चूत पर टिका दिया।

ऋतु दोनों चीजें अपने हाथ में लेकर दबाने लगी और पूजा से पूछा- मतलब तुम मानती हो न कि यह शो एक हजार रूपए का था.
पूजा कुछ नहीं बोली और सीधे अपने पर्स में से एक हजार रूपए निकाल कर ऋतु को दे दिए और बोली- बिल्कुल था… ये लो!
और आगे बोली- काश! ये सब मुझे बिल्कुल मेरे सामने देखने को मिल जाए तो मजा ही आ जाए.

मैं अपनी बहन के साथ सेक्स दो बार कर चुका था. वो अपनी सहेली को लाई थी घर मुझे नंगा मुठ मारते दिखाने के लिए.
ऋतु- तो चलो चल कर रोहन से ही पूछ लेती हैं… देखें वो क्या कहता है?
और फिर हँसने लगी.

पूजा- पागल हो गई है क्या… मैं तो सिर्फ बात कर रही हूँ. इसका मतलब यह नहीं कि मैं उससे जाकर बोलूँ कि वो मेरे सामने मुठ मार सकता है या नहीं.
ऋतु- तुम मत जाओ, मैं जाकर उसको बोलती हूँ तुम्हारी तरफ से.. अगर तुम चाहो तो?
पूजा- वो कभी भी नहीं तैयार होगा इस पागलपन के लिए… ये सिर्फ मेरे मन के विचार हैं और कुछ नहीं इन्हें ज्यादा गंभीरता से मत लो.

ऋतु- अरे कोशिश तो करते हैं ना… वो या तो हाँ करेगा या ना… और वो ये बात मोम डैड को भी नहीं बता पायेगा क्योंकि उसे ये बातें उन्हें बताने में बड़ी शर्म आएगी… मैं तो यह सोच रही हूँ कि उसको क्या देना पड़ेगा ये सब करवाने के लिए?
पूजा- क्या मतलब?
ऋतु- मतलब कि वो शायद कर सकता है अगर बदले में हम उसे कुछ ऐसा दें जिसकी उसे जरूरत है.
पूजा- जैसे कि?
ऋतु- मुझे नहीं पता…कुछ भी हो सकता है. ये तो सिर्फ मेरा आईडिया है. चलो एक काम करते हैं, मैं जाकर उससे पूछती हूँ कि क्या वो हमारे सामने मुठ मारने को तैयार है और उसके बदले में क्या चाहिए.
पूजा- तुझ में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि अपने सगे भाई से इस तरह की बात पूछ सके और अगर पूछती भी है तो वो तैयार नहीं होगा.

ऋतु- अगर ऐसी बात है तो मैं अभी जाकर पूछती हूँ!
और यह बोल कर वो दरवाजे की तरफ चल पड़ी.
जाते जाते उसने पूजा से कहा- अगर तुम भी आना चाहो तो आ सकती हो, या फिर छेद में से देख सकती हो.
पूजा- ना बाबा ना..मुझे तो बड़ी शर्म आएगी इस सबमें… तुम ही जाओ.

ऋतु ने आकर मेरे रूम का दरवाजा खड़काया और अन्दर आ गई. मैंने बड़ी हैरानी से उसे देखा.
वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे मुंह पर उंगली रख कर मुझे चुप रहने के लिए कहा और फुसफुसा कर बात करने लगी.

दूसरे रूम से पूजा बड़ी बेसब्री से ये सब देख रही थी. उसने देखा कि ऋतु ने मुझ से कुछ कहा और कुछ मिनट बात करने के बाद ऋतु का भाई झटके से अलग हुआ और अपने हाथ हवा में उठाकर मना करने के स्टाइल में कुछ बोलने लगा.

पूजा सांस रोके ये सब देख रही थी फिर ऋतु दुबारा अपने भाई के पास गई और उसे कुछ और बोला. फिर भाई ने भी आगे से कुछ कहा और ऋतु सोचने के अंदाज में सर खुजाने लगी और फिर कुछ और बातें करने के बाद दोनों एक दूसरे के गले लग गए और ऋतु बाहर निकल गई.

अन्दर आते ही पूजा ने ऋतु से बड़ी अधीरता से पूछा- तुमने उससे क्या कहा? कैसे पूछा?
ऋतु- वही जो हमने तय किया था.
मैंने पूछा- क्या वो हमारे सामने हस्तमैथुन कर सकता है क्योंकि हमने कभी भी असली में ऐसा नहीं देखा.
पूजा- और उसने क्या कहा?

ऋतु- वो तो यह सुनकर काफी भड़क गया था.
पूजा- देखा… मैंने कहा था ना!
ऋतु- पर जब मैंने उससे कहा कि हम इसके लिए उसे कुछ पैसे देंगे या फिर कुछ और भी जो वो चाहे तो बात आगे बढ़ी.

पूजा ने उत्तेजित होकर पूछा- तो उसने क्या कहा?
ऋतु- वो तैयार है और वो इसके लिए दो हज़ार रूपए मांग रहा है.
पूजा ने आश्चर्य के भाव दिए और बोली- क्या सच में… वो सब हमारे सामने करने को तैयार है और उसे सिर्फ रूपए चाहियें?
ऋतु ने धीरे से कहा- हाँ… और साथ ही साथ वो चाहता है कि हमें भी उसके सामने नंगी होना पड़ेगा.

पूजा ने कटाक्ष भरे स्वर में कहा- वाह बहुत बढ़िया… वो हमें नंगी देखना चाहता है, तभी हस्तमैथुन करेगा.
ऋतु ने उसे उकसाते हुए कहा- पर जरा सोचो… उसका लम्बा और खूबसूरत लंड तुम्हारी नाक से सिर्फ कुछ ही दूरी पर होगा.
पूजा कुछ सोचते हुए बोली- चलो वो तो ठीक है, पर क्या तुम अपने भाई के सामने नंगी हो सकती हो?
ऋतु- उसे अपने सामने मुठ मारता हुए देखने के लिए तो मैं ये सब कर ही सकती हूँ… ये कोई बड़ी बात नहीं है और जब हम दोनों करेंगे तो मुझे इसमें ज्यादा शर्म भी नहीं आएगी.

पूजा- हम दोनों से तुम्हारा क्या मतलब है… मैं तो अभी तक इसके लिए तैयार ही नहीं हुई.
ऋतु ने अपनी आवाज में थोड़ी कठोरता लाते हुए कहा- तुम मुझे ये बताओ तुम तैयार हो या नहीं… ये तुम्हारा लास्ट चांस है?
पूजा- ठीक है… जब तुम्हें अपने भाई के सामने नंगी होने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या… वो ये सब कब करेगा?
ऋतु- शायद आज रात को सबके सोने के बाद!

पूजा- मुझे तो बड़ी घबराहट हो रही है… क्या सच में तुम ये सब करना चाहती हो?
ऋतु- अरे हाँ… ये एक नया एडवेंचर होगा… मजा आएगा… और फिर हम बाद में… समझ गई ना?
पूजा- ठीक है… पर सच में तुम बड़ी पागल हो.
ऋतु- पागलपन करने में भी कभी-कभी बड़ा मजा आता है… चलो अब अपना होमवर्क कर लेती हैं, फिर रात को तो कुछ और नहीं कर पायेंगी.

रात को जब सभी डिनर कर रहे थे तो ऋतु ने सारी बातें मेरे कान में बता दी. बीच-बीच में जब मैं पूजा की तरफ देखता था तो वो शरमा कर अपना चेहरा नीचे कर लेती थी.
जब खाना ख़त्म हुआ तो ऋतु और पूजा अपने रूम में चली गई और आखिरकार सारे घर में शांति छा गई. ऋतु और पूजा अपने रूम में गाउन पहनकर मेरा इंतजार कर रही थी.

पूजा ने सोचा कि शायद मैं नहीं आऊँगा और कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था कि उसे दरवाजे पर हल्की सी खटखट सुनाई दी. आवाज सुनते ही ऋतु उछल कर दरवाजे के पास गई और मुझे अन्दर खींच लिया.
मुझे खींचकर वो बेड के पास तक ले गई और वहाँ बैठी पूजा के पास बैठ गई.
मैं उन दोनों के सामने नर्वस सा खड़ा हुआ था.

ऋतु ने पूछा- अरे भाई, किस बात का वेट कर रहे हो… तुम ये करना भी चाहते हो या नहीं?
मैं- मुझे लगा तुम मुझे पहले पैसे दोगी.

ऋतु पूजा की तरफ देखकर- बिल्कुल देंगी, हमने बोला है तो जरूर देंगी.
मैं- तुमने बोला था कि तुम मुझे 2000 रूपए दोगी और नंगी भी होओगी दोनों?
ऋतु- क्या तब तुम हस्तमैथुन करना शुरू करोगे?
मैं संकुचाते हुए- ह्म्म्म हाँ!
ऋतु- ठीक है…

और पूजा की तरफ देखकर उसे कुछ इशारा किया, पूजा ने झट से अपने पर्स में से 2000 रूपए निकाल कर मुझे दिए पर मुझे कुछ न करते देखकर वो समझ गई कि आगे क्या करना है.
ऋतु- पूजा… चलो एक साथ नंगी होती हैं.

फिर पूजा उठी और दूसरी तरफ मुंह करके अपना गाउन खोल कर नीचे गिरा दिया, ऋतु ने भी उसके साथ-साथ वही किया, दोनों की गांड मेरी तरफ थी. मैं तो वो दृश्य देखकर पागल ही हो गया. एक गोरी और दूसरी सांवली… एकदम ताजा माल… भरी हुई जांघें और सुडौल पिंडलियाँ…

फिर दोनों घूम कर मेरी तरफ मुंह करके बेड के किनारे पर बैठ गई. पूजा के चुचे देखकर मेरे मुंह से ‘आह’ निकल गई और मैं अपने लंड को अपने पायजामे के ऊपर से ही मसलने लगा.

यह देखकर ऋतु ने मुझे घूर कर गुस्से के लहजे में देखा और अगले ही पल हंसकर मुझे आँख मार दी.
पर पूजा ये सब नहीं देख पाई… वो तो अपनी नजरें भी नहीं उठा रही थी.

मैंने देखा कि उसके चुचे ऋतु से काफी बड़े हैं. थोड़े लटके हुए… शायद ज्यादा भार की वजह से… और उसके लाल निप्पल इतने बड़े थे कि शायद मेरे पैर की उंगली के बराबर… पेट बिल्कुल गोल मटोल और सुडौल था.

मैं खड़ा हो गया और अब मैं उसकी चूत भी देख पा रहा था. वो बिल्कुल काली थी, बालों से ढकी हुई और बीच में जो चीरा था, उसमें से गुलाबी पंखुड़ियाँ अपनी बाहें फैला कर जैसे मुझे ही बुला रही थी.
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