69 पोजीशन में पहली बार चुदाई - 69 Position Me First Time Sex

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दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं मेरा नाम राकेश है और मैं दिल्ली से हूँ। मैंने अपनी पिछली कहानी छवि की चुदाई में बताया था अपने बारे में जो कि वास्तविक कहानी थी। बात पॉँच साल पुरानी है और मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी और नौकरी के लिए रोज़ ही प्रयास करता था जिससे कि जल्द से जल्द मेरा काम कहीं सेट हो जाये। इसी प्रयास में चार महीने निकल गए लेकिन कहीं बात नहीं बनी। दिन पर दिन खर्चे होने ही थे लेकिन पैसे थे ही नहीं। मेरे परिस्थिति से मेरा मकान मालिक परिचित था सो किराए का कुछ नहीं बोलता। लेकिन अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी, बिना किराए के कितना दिन माकन मालिक के मेहरबानी पर रह सकता था। अंत में हार कर सोचा कि क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाये। यह सोच कर मैंने अपने मकान- मालिक से बोला कि अंकल कोई ट्यूशन पढ़ने वाला हो तो बताना, मैं शाम में ट्यूशन पढ़ा दिया करूँगा।

मेरी बात सुन कर गुप्ता जी (मकान मालिक) बोला- मेरी सपना भी तो दसवीं क्लास में पहुँच गई है, इसे मैथ और साइंस पढ़ा दोगे तो मेरे घर से ही शुरु कर दो, जैसे जैसे समय थोड़ा और निकलेगा तो तुम्हें आस-पास के कुछ और टयूशन मिल जायेंगे।

मैं थोड़ा निश्चिंत हुआ कि चलो कम से कम रहने खाने का इंतजाम हुआ, अब आगे की आगे देखेंगे।

अब मैं सपना के बारे में बता दूँ, सपना देखने में साधारण सी लड़की थी लेकिन पढने में साधारण न ज्यादा तेज न ज्यादा भोंदू, हमारी क्लास ठीक ठाक चल रही थी। मेरे नजर में उसे देख कर कोई गलत विचार कभी नहीं आये, पढ़ने का असर दो महीने में ही दिखने लगा। एग्जाम में उसे पहले से ज्यादा अंक मिले जिससे हर किसी ने मेरी तारीफ की। अब मैं भी उसके घर खुल कर आता जाता, कोई रोक टोक नहीं थी।

एक रोज़ रात को मैं सपना से बायलोजी की किताब लेने गया। शनिवार की बात है। किताब लेकर मैंने कुछ नोट बनाये, कुछ विधार्थियों को देने थे। मैं किताब पढ़ कर नोट बना रहा था कि किताब से मुझे एक खत मिला जिसे पढ़ कर मैं अन्दर तक हिल गया। वो पत्र सपना के बॉयफ्रेंड का था और उसमें दोनों के स्कूल में के बाथ रूम में स्तन दबाने की और लंड चूसने की बातें लिखी हुई थी। सपना का पत्र पढ़ कर उसके वक्ष मेरे सामने घूमने लगे।

मेरा भी मन उसे चोदने को होने लगा, रात में दो बार मैंने मुठ भी मारी क्योंकि वही एक साधन है हम लोगों के पास कि जब चाहो प्रयोग कर लो, वो भी बिना किसी खर्चे के ! वर्ना आप समझ सकते हैं…………..

दूसरे रोज रविवार था, और आमतौर पर गुप्ता जी इतवार को फिल्म देखने जाते हैं, यह रूटीन मुझे पहले से पता था। गुप्ता जी के जाने के बाद मैं सपना को किताब वापिस करने गया तो देखा की सपना कमरे में नहीं थी, फिर मुझे ध्यान आया कि कहीं रसोई में कुछ खाने का इंतजाम कर रही हो। लेकिन वो रसोई में नहीं थी। अब मैंने निराश होकर वापिस आने को कदम बढ़ाया, सोचा था कि सपना के बॉयफ्रेंड के पत्र जरिये ही सपना को डरा कर उसकी चूत-चोदन करूँगा लेकिन सपना मिली ही नहीं तो क्या?

वापिस गैलरी से होकर आ रहा था तो देखा की बाथरूम की बत्ती जल रही है। मेरे कदम वहीं रुक गए, बाथरूम से हल्की सी कुछ आवाज़ भी आ रही थी। मेरे मन को थोड़ी शका हुई, एक बार को सोचा कि छोड़ो यार कुछ भी तो क्या ! फिर ख्याल आया कि सपना बाथरूम में अवश्य कुछ कर रही होगी। यह सोच कर मैं अंदर से रोमांचित हो गया, दिल थाम कर दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ देखा ………….

देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई ………….

अंदर सपना अपने चूत के बाल साफ कर रही थी, वो भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर एक दम नंगी ! आज से पहले मैंने किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, यह देख कर तो मेरा पप्पू एक दम खड़ा हो गया, सपना की नजर मुझसे मिली तो उसके तो होश उड़ गए, हम दोनों की हालत शायद एक जैसी ही थी। सपना चूत एक दम साफ थी, बगल में एक क्रीम की शीशी रखी थी, उसके स्तन उतने बड़े भी नहीं थे लेकिन इतने बड़े जरुर हो गए थे कि उसे आराम से दबाया जा सके, 18-19 साल की लड़कियों का साइज़ उससे बिलकुल मैच करता था। मेरे दिमाग में तुंरत ध्यान आया- बेटा, सही मौका है इसे कैश कर ले वर्ना इंतजार ही करता रह जायेगा।

मैंने आगे बढ़ कर सपना के होठों को चूम लिया, सोचा कि देखूँ इसकी क्या प्रतिक्रिया है।

वो तुंरत अलग हो गई, बोली- मुझे छोड़ दो, वर्ना पापा को बोल दूंगी !

मैं बोला- अगर तुम अपने पापा को बोल दोगी तो मैं तेरा पत्र जो तेरी किताब में था उसे दिखा दूंगा।

थोड़ी देर को सपना सोचने लगी, फिर बोली- आप क्या चाहते हो?

मैं तेरा चूत चोदना चाहता हूँ………..

नहीं……….नहीं…………मैंने आज तक किसी से नहीं किया है………

तू घबरा मत ! तुझे कुछ नहीं होगा और मजा भी आयेगा।

सच सच………..?

हाँ डार्लिंग !

फिर आगे बढ़ कर सपना के होठ चूसने लगा, वो भी ऐसा ही कर रही थी।

फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगाई तो वो तड़प उठी- सर, प्लीज छोड़ दो , अह्ह्ह्ह्……. आह……. आह………….

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा सात इंच का लंड देख सपना बोली- क्या यह पूरा घुस जायेगा?

डार्लिंग फिकर मत करो लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो और चूत छोटी, लेकिन हर चूत बड़े आराम से लंड को खा जाती है !

सपना को बाथरूम के फर्श पर लिटा कर 69 पोजीशन में उसकी चूत का स्वाद लेने लगा, सपना पहले तो मना कर रही थी लेकिन थोड़ा सा प्रयास करने पर वो मेरा साथ देने लगी, मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। दस मिनट तक मजा लेने के बाद उसे लिटा कर उसके चूत में ढेर सारा थूक लगाया और चूत के मुँह पर लाकर एक धक्का मारा, लेकिन चूत इतनी कसी थी कि मेरा लंड अंदर घुस नहीं पाया, सपना भी अंदर लेने को बेचैन थी।

फिर उसके पैरों को थोड़ा फैलाया जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया, और जोर का धक्का मारा, इस बार मेरे लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत के अंदर चला गया।

छोड़ गया तो केवल- हाय मैं मर गई….. तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……

वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।

दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड सपना की चूत की गहराइयों को नाप गया।

हाय आह………..आह……..

वोह…आह……..वोह………

कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. और सपना भी मेरा साथ देने लगी।

काफ़ी देर तक चुदाई अलग अलग तरह से मैंने किया…….. कभी डौगी तो कभी दीवार पर टिका कर, सपना भी मुझे खूब साथ दे रही थी, फिर उसकी बदन अकड़ने लगा, थोड़ी देर में मैंने भी पस्त होकर उसकी चूत में ही अपना सारा माल छोड़ दिया। फिर हम साथ साथ नहाये, नहाते वक्त भी मैंने उसकी चुदाई की।

चुदाई के बाद भी मुझसे पढ़ने आती रही और हम एक दूसरे का मजा लेते रहे। अब तो उसकी इतनी लंड लेने की आदत हो गयी है उसे जब भी मौका मिलता है कैश कर लेती है।

दोस्तो, यह थी मेरी सपना !

टीचर की चूत की आग बुझाई - Teacher Ki Choot Ki Aag Bujhai

टीचर की चूत की आग बुझाई - Teacher Ki Choot Ki Aag Bujhai , अध्यापिका की बुर को चोदा , पढ़ाने वाली लड़की की गांड मारी, मास्टरनी की चूत चोदी, पढ़ने के साथ गांड मारने का मजा लिया.

यह मेरी पहली कहानी है. वैसे मैंने इस पर बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी है और वो मुझे बहुत अच्छी लगी और में उन्ही से प्रेरणा लेकर आज आप सभी के सामने अपनी एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को बहुत पसंद आएगी.

यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था. जिसमे मैंने एक इंग्लीश टीचर की वासना मिटाई. अब में आप सभी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए थोड़ा विस्तार से अपनी कहानी सुनाता हूँ. जिसको सुनने में आपको भी मज़ा आएगा और मुझे भी सुनाने में. दोस्तों यह बात उस समय की है, जब में अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और में अपनी पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद में भी एक बहुत अच्छा स्टूडेंट था और में अपने कॉलेज के वॉलीबॉल टीम का कप्तान था और साइन्स सब्जेक्ट्स के साथ साथ इंग्लीश भी हमारा एक सब्जेक्ट था जो सिर्फ़ पहले साल के लिए ही होता है.

तो उस समय मेरी एक बहुत अच्छी इंग्लीश टीचर थी और वो शादीशुदा थी. उनकी उम्र 29 साल थी और वो पंजाब की रहने वाली थी. लेकिन दिखने में बहुत सुंदर, गोरा रंग, पतली कमर, हिरनी जैसी आँखे इतना सब कुछ होने के बाद भी वो बड़े बड़े बूब्स के साथ बड़ी सी मस्त गांड की मालकिन थी, जिसको एक बार देखने के बाद हर कोई उनका दीवाना हो जाए. वो शादीशुदा होने के बाद भी अपने गदराए हुए बदन, पतली कमर, बड़ी बड़ी आंखे और बहुत सुंदर चेहरे की बनावट की वजह से कुंवारी लगती थी.

वो हमेशा बिल्कुल टाईट कुर्ता, लेगिंग, कुर्ता, पजामा, सलवार सूट पहनती थी और उनको पहनने के बाद तो वो क्या मस्त लगती थी. क्लास में वो अक्सर हर एक बच्चे के पास खड़ी होकर पढ़वाती थी और फिर उस शब्द का अनुवाद वो खुद करती थी और बच्चों को भी वो खुद पढ़ने की कहा करती थी. जिसका एक सेक्सी कारण था कि वो अपने पास खड़ा करके पढ़ाती थी.

बच्चे भी बहुत खुश थे क्योंकि ज्यादा पास से उसके मोटे मोटे बूब्स साफ साफ चमकते थे, जिनकी सुन्दरता को देखकर हर एक बच्चा उनसे बहुत खुश रहता था. लेकिन उसने कभी उन्हे ढकने की कोशिश भी नहीं की थी और वो तो कभी कभी अपना दुपट्टा भी नहीं लेकर आती थी. में अपनी पढ़ाई में बहुत अच्छा था तो इसलिए वो अक्सर मेरे ही पास में खड़ी होकर मुझसे पढ़ाती और कभी कभी वो मुझे उसके पास में बुलाकर खड़ा होकर पाठ पढ़ने को कहती और में पढ़ने के साथ साथ उसके बड़े ही सुंदर बूब्स देखा करता था.

दोस्तों मुझे कई बार ऐसा एहसास हुआ कि जैसे वो जानती है कि में उसके बूब्स को किस नजर से देखता हूँ और मेरे मन में क्या चल रहा था. लेकिन फिर भी उसने मुझसे कभी भी कुछ नहीं कहा और में उस बात का हमेशा फायदा उठाकर उनके मस्त बूब्स के दर्शन किया करता और वो भी बहुत खुश होकर मेरा साथ दिया करती थी.

फिर एक दिन हमारे कॉलेज की तरफ से बाहर पिकनिक पर जाने का प्रोग्राम बना और सभी कामों की जिम्मेदारी मिली हमारी इंग्लीश टीचर को और हम करीब 125 बच्चे मनाली जाने के लिए तैयार हुए और उनमे से एक में भी था और सब कुछ काम एकदम ठीक-ठाक था. हमने मनाली जाने के लिए बस पकड़ी. इंग्लीश टीचर मेरी आगे वाली सीट पर बैठी हुई थी और में बहुत खुश था कि मुझे उनसे थोड़ा घुलने मिलने का अब और भी अच्छा मौका मिलेगा.

उनके साथ मेरी दो दोस्त बैठी हुई थी, जो कि अच्छी तरह से जानती थी कि में मेडम को बहुत पसंद करता हूँ. फिर हम चारों एक दूसरे से बहुत देर तक हंसी-मजाक और बातें करते रहे. वो रात का सफ़र था तो कुछ ही घंटो की दूरी के बाद एक एक करके सब लोग सोने लगे और फिर ड्राइवर ने भी एक एक करके सभी लाईटो को बंद कर दिया और फिर मेडम भी हमसे शुभरात्रि कहकर सो गई.

लेकिन आज मुझे नींद नहीं आने वाली थी, क्योंकि में आज किसी भी तरह से उसको छूना चाहता था और फिर में अपना सर आगे की तरफ करके सोने का नाटक करने लगा और धीरे धीरे हाथ आगे की तरफ सरकाने लगा, इतना आराम से और धीरे से कि किसी को शक ना हो कि में जानबूझ कर यह सब रहा हूँ और फिर थोड़ी ही देर के बाद मुझे मेडम का हॉट जिस्म महसूस हुआ.

मेरा हाथ मेडम की गर्दन पर छू रहा था, जिसकी वजह से मेरे जिस्म में एक तरंग सी दौड़ गई और अब मेरे लंड ने अपने बड़े आकार में आकर फूंकार मारनी शुरू कर दी और एकदम तनकर खड़ा हो गया. तो मैंने थोड़ी देर अपना हाथ वहीं पर रखा ताकि किसी भी देखने वाले को लगे कि मेरा हाथ सोते सोते वहां पर पहुंचा है. तभी अचानक मेडम की आँख खुली और में एकदम घबरा गया. लेकिन मैंने फिर भी अपना हाथ बिल्कुल भी नहीं हिलाया और उसी तरह लेटा रहा. तो मैंने देखा कि मेडम ने उठकर पानी पिया, इधर उधर देखा लेकिन अँधेरा होने की वजह से उन्हे कुछ भी दिखाई नहीं दिया और फिर से लेट गयी.

तो कुछ देर के बाद मुझे अब एहसास हुआ कि मेरा हाथ गर्दन पर नहीं मेडम के नरम, गुलाबी, होंठ पर था और मेडम दुबारा वैसे ही लेट गई जिससे कि मेरा हाथ उसके होंठ पर लगा रहे. तो मेरा हाथ तो मानो पत्थर हो गया था, वो हिल ही नहीं रहा था और कुछ ही देर के बाद मुझे अपनी एक उंगली पर एक गीली रगड़ का एहसास हुआ जो मेडम की जीभ थी. वो पूरी मस्ती से मेरी एक एक उंगलियाँ चूस रही थी.

लेकिन में कुछ कर नहीं पा रहा था. में बहुत घबरा गया था क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था और वो मुझसे बड़ी थी. तो अब उसने थोड़ा खुद को स्ट्रेच करना शुरू किया और मैंने भी अपना हाथ एकदम सीधा कर दिया, जो सीधा मेडम के बूब्स पर जा गिरा और अब तो में बिल्कुल ही मदहोश हो चुका था और मेडम धीरे धीरे ऊपर खिसक खिसककर, मेरे हाथ को अपने कुर्ते के अंदर डालने की कोशिश करने लगी और बस उसी दौरान मुझे कब नींद आ गयी मुझे पता भी नहीं चला और जब में सुबह उठा तो मेरा हाथ मेरी सीट पर ही था और मेरी पेंट की जेब में एक खत था.

जिस पर लिखा हुआ था कि तुम्हारा हाथ बहुत गरम है और में इसे बहुत पसंद करती हूँ, इसने मुझे पूरी रात बहुत अच्छी तरह सहलाया, लेकिन अब इसके आगे भी इसको बहुत कुछ करना है. तो तुम अब एकदम तैयार हो जाओ. लेकिन उसमे किसी का नाम नहीं लिखा था.

तो हम अब तक मनाली पहुंच चुके थे और हम अपने हॉटल में चले गये. मेडम का रूम मेरे रूम के पास था. हम सब फ्रेश हुए और थोड़ा आराम किया और फिर शाम को सब लोग बाहर घूमने गये. लेकिन मैंने आराम करना ही ठीक समझा. तो हम एक रूम में 4 लोग थे और टीचर एक रूम में एक अकेली.

मेरे रूम में मुझे छोड़कर सभी लोग बाहर घूमने गए हुए थे. तभी उनके जाने के कुछ देर बाद मेरे कमरे के दरवाजे पर खटखटाने की आवाज हुई. मैंने दरवाजा ख़ोला और फिर मैंने देखा कि बाहर की तरफ मेरी इंग्लीश टीचर खड़ी हुई थी. तो मैंने उन्हे अंदर बुलाया. वो मुझे चेहरे से बहुत थकी हुई सी लग रही थी. तभी उन्होंने मुझसे सर दर्द की गोली माँगी.

मैंने मना कर दिया और कहा कि मेरे पास सर दर्द की गोली नहीं बाम है, क्योंकि में कभी भी दवाई नहीं ख़ाता और मैंने उनसे कहा कि अगर आप चाहे तो में आपके सर पर बाम लगा देता हूँ. तो झट से उन्होंने हाँ कर दी और मैंने उन्हे अपने बेड पर बैठाया और बाम लेकर आ गया और मैंने उनके माथे पर थोड़ा सा बाम लगाया और मालिश करने लगा.

वॉलीबॉल खेलने के कारण मेरे हाथ बहुत सख़्त हो गये थे, तो उन्हे मेरे टाईट हाथ से बहुत आराम मिल रहा था और अब मेरे सर दबाने की वजह से धीरे धीरे उनका दर्द जाने लगा और अब हम बातें करने लगे. तो वो मुझसे बहुत खुलकर बात कर रही थी और फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या कॉलेज में तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है? तुम्हारे सभी दोस्त तो अक्सर गर्लफ्रेंड के साथ ही रहते है.

मैंने कहा कि मुझे अपनी उम्र की लड़कियां पसंद नहीं. तो उन्होंने पूछा कि फिर कौन सी पसंद है? फिर मैंने कहा कि मुझे शादीशुदा औरत बहुत ज़्यादा आकर्षित करती है. तभी उन्होंने झट से पूछा कि क्यों? तुम्हे में कैसी लगती हूँ? दोस्तों में यह बात सुनकर एकदम सुन्न हो गया. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और उसे ज़ोर से दबाते हुए मुझसे दोबारा से पूछा कि में क्या तुम्हे अच्छी नहीं लगी? तो मैंने कहा कि आप तो मुझे बहुत पसंद हो और आप हो भी बहुत हॉट सुंदर.

तो वो एकदम शरमा गयी. लेकिन कुछ देर नजरे नीची करने के बाद वो अब मेरी आखों में आखें डालकर मुझे घूरकर देखने लगी. मुझे उनकी नजरों में अब वासना की भूख दिखने लगी, वो अब मुझसे बहुत कुछ चाहती थी. फिर वो बोली कि तभी तुमने रात में हाथ मेरे बूब्स के ऊपर रखा हुआ था.

तो मैंने कहा कि नहीं वो तो अपने आप चला गया था. लेकिन आपने तो कमाल ही कर दिया था, क्योंकि आपने तो पूरी रात भर मेरे हाथ से बहुत मज़े लिए. तो मेडम फिर से शरमाई और उन्होंने कहा कि तुम्हे मालूम है कि मैंने क्या कहा है?

वो बोली कि तो कमाल तो कुछ हुआ ही नहीं और अब तुम चाहो तो हम दोनों कमाल कर सकते है? तो मैंने कहा कि मतलब? तब वो बोली कि मेरे पति एक बहुत बड़े बिजनस मेन है और इस कारण वो अधिकतर समय बाहर ही रहते है और जब होते भी है तो वो अपने बहुत सारे कामों के कारण मेरे साथ कुछ नहीं कर पाते और मेरी प्यास अधूरी ही रह जाती है और जब मैंने पहली बार तुम्हे अपनी छाती को घूरते हुए देखा तो में तब से ही तुमसे सेक्स संबंध बनाना चाहती थी.

तो उनकी यह सभी बातें सुनकर मेरा लंड अब तनकर खड़ा हो चुका था और जब उनकी नज़र मेरे खड़े लंड पर पहुंची तो उन्होंने बड़े प्यार से मेरी पेंट की जिप खोली और उसे बाहर निकाल दिया और थोड़ा नीचे की झुककर बड़े ही मादक तरीके से, लंड को चूमा. दोस्तों में तो अब सब कुछ भूल बैठा था. वो मेरे लंड को चूस रही थी और में बेसुध होकर उनके बूब्स को देख रहा था.

वो तो बहुत लंबे समय से एकदम प्यासी थी इसलिए वो एकदम पागलों की तरह मेरे लंड को चूस रही थी. वो मेरे लंड को बहुत जोरदार झटके देकर अंदर बाहर करके किसी लोलीपोप की तरह चूस रही थी और फिर कब में उसके मुहं में ही झड़ गया मुझे पता ही नहीं चला.

उसने मेरे लंड से निकला हुआ गरम गरम लावा पी लिया और कुछ अपनी छाती पर लगाकर चली गयी. लेकिन में अब भी समझ ही नहीं पा रहा था कि यह सब क्या हो रहा है. फिर मुझे थोड़ी देर बाद होश आया और में बाथरूम में चला गया. फिर अपना लंड साफ किया और मेडम के रूम में गया. मेडम ने दरवाज़ा खोला. मैंने दरवाज़ा खुलते ही उन्हे अपनी बाहों में कस लिया और दरवाज़े को लात मारकर बंद करते हुए, उन्हे बेड पर लेटा दिया.

मुझे अब हवस चढ़ चुकी थी और मेडम तो पहले से ही चाहती थी और फिर हम यह सब पागलों की तरह एक दूसरे को किस करने लगे. में उनके दोनों बड़े बड़े बूब्स को भींच रहा था और उनके गुलाबी होंठ चूस रहा था. तभी मैंने आव देखा ना ताव और उनकी लेगी को उतारकर उनकी गरम जोश से भरी हुई चूत के मुहं पर लंड को रखा और एक ही झटके में लंड को उनकी गीली चूत में डाल दिया.

दोस्तों सब कुछ बहुत तेज़ी से हो रहा था और अब हम दोनों ही एकदम पागल हो चुके थे. में उनके बूब्स को दबाने के साथ साथ अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के भी दिए जा रहा था. जिसकी वजह से वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी और बार बार मुझसे अपनी चूत में लंड को अंदर तक डालने को कह रही थी.

तो मैं उनके मुहं से अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह्ह्ह और ज़ोर से डालो, हाँ पूरा अंदर तक जाने दो अह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे अह्ह्ह्हह आईईईईई एसी आवाजे सुनकर में और भी जोश में धक्के देने लगा और करीब बीस मिनट तक लगातार झटके मारने के बाद में चूत में झड़ गया और तब हमें होश आया कि हम क्या कर रहे थे और क्या कर चुके थे? मेडम की आखों में आँसू थे और वो बेसुध होकर पड़ी हुई थी और में एकदम भूल गया था कि मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है और वो मेडम की चूत को लहू लुहान कर चुका था और मेडम दर्द से करहा रही थी. लेकिन वो मन ही मन मेरी इस चुदाई से बहुत खुश थी, वो मुझे उनके चेहरे को देखकर लगा.

फिर मैंने मेडम से कहा कि शायद में गलती से जोश में आकर आपकी चूत के अंदर ही झड़ गया हूँ, में आपके लिए गर्भनिरोधक गोली लाता हूँ. तो उन्होंने कहा कि नहीं, मुझे उसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि में यह बच्चा चाहती हूँ. मेरा पति तो मुझे बच्चा नहीं दे पाएगा और में इस मौके को नहीं गवांना चाहती और मुझे तुमने जो सुख दिया है, उसके लिए में तुम्हारी बहुत आभारी रहूंगी और तुम्हे जब भी मन करे मुझे चोद लेना. अब मेरे इस जिस्म पर तुम्हारा भी अधिकार है.

फिर हम उठे फ्रेश हुए और में अपने रूम में चला गया. तो उसी रात को मेडम का मैसेज आया कि मेरे रूम में आ जाओ. तो में चुपचाप उनके रूम में चला गया और फिर हमने होश में रहकर पूरी रात चुदाई की. वो चुदाई हमारी सबसे ज़्यादा मजेदार थी क्योंकि उसमे हम दोनों ही पूरे होश में थे. तो हम कुछ दिन वहां पर रुककर मनाली से वापस आ गये और फिर हमें जब भी मौका मिला, अपनी चुदाई लगातार जारी रखी.

तो कुछ दिन बाद मेडम का मेसेज आया कि में अब गर्भवती हूँ. तो दोस्तों मुझे एक अजीब सी खुशी मिली और फिर मैंने मेडम को एक प्यारा सा गिफ्ट दिया और उसके बाद हमने सेक्स नहीं किया. फिर में दूसरे साल में चला गया था और तभी मेडम ने एक लड़के को जन्म दिया और उसके बाद हम अक्सर सेक्स करते रहे.

मैडम की कामुकता और चुदाई की शर्त - Madam Ki Kamukta Aur Chudai Ki Shart

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मैं स्कूल में बायलोजी विषय की टीचर थी. १२ वीं क्लास को पढाती थी. मेरी क्लास में लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते थे. स्कूल में साड़ी पहनना जरूरी था. मैं दूसरी टीचर्स की तरह खूब मेक-अप करती और खूबसूरत साडियाँ पहन कर स्कूल आती थी, जैसे कोई स्पर्धा चल रही हो. क्लास में मुझे रोहित बहुत ही अच्छा लगता था. वो १८ साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देख कर मुस्कुराता था, बल्कि खुश होता था. उसकी मतलबी मुस्कराहट मुझे बैचैन कर देती थी. मुझे भी कभी कभी लगता था कि रोहित मुझे अपनी बाँहों लेकर चूम ले… रोहित ही आज की कहानी का नायक है.


हमेशा की तरह आज भी क्लास में मैं पढ़ा रही थी. मैंने विद्यार्थियों को एक सवाल का उत्तर लिखने को दिया. सवाल सरल था. सभी लिखने लगे, पर रोहित मुझे बार बार देख रहा था. उसे देख कर आज मेरा मन भी मचल गया. मैं भी मुस्कुरा कर उसे निहारने लगी. वो मुझे लगातार देखता ही जा रहा था, कभी कभी उसकी नजरें झुक भी जाती थी. मुझे लगा कि कुछ करना चाहिए. मैं घूमते हुए उसके पास गयी, उसके कंधे पर हाथ रख कर बोली,”रोहित कुछ मुश्किल है क्या…” मैंने उसका कन्धा दबा दिया.


“न…नहीं…मैम…” मैं उस से सट गई. उसके कंधे का स्पर्श मेरी जाँघों में हुआ. मैं सिहर उठी. क्लास के बाद मैंने पेपर ले लिए. छुट्टी के समय मैंने रोहित को बुलाया और कहा,” मैंने तुम्हारा पेपर चेक कर लिया है ..रोहित, तुम बायोलोजी में कमजोर हो… तुम्हे मदद की जरूरत हो… तो घर पर आकर मुझसे पूछ सकते हो.”


“जी मैम… मुझे जरूरत तो है…पर आपका घर का पता नहीं मालूम है…”


“रोहित तुम कहाँ रहते हो?…” उसने अपने घर का पता बताया. वो मेरे घर से काफ़ी दूर था।


“अगर तुम्हें आना हो तो ४ बजे शाम को आ जाना… मेरा पता ये है ..” मैंने अपने घर का पता एक कागज़ पर लिख कर देते हुए कहा


“जी… थैंक्स .” रोहित से एक तरह की खुशबू आ रही थी, जिसे मैं महसूस कर रही थी.


शाम को वो ४ बजे से पहले ही आ गया. मैं उस समय लम्बी स्कर्ट और ढीले ढाले टॉप में थी. मेरे बड़े और भारी स्तन उसमें से बाहर निकल पड़ रहे थे. तब मैं सोफे पर बैठी चाय पी रही थी. मैंने उसे भी चाय पिलाई.


फिर मैंने कहा -“किताब लाये हो…” उसने किताब खोली… मैं उसे पढ़ाने लगी. मैं सेंटर टेबल पर इस तरह झुकी थी कि वो मेरी चुंचियां अच्छी तरह देख सके… ऐसा ही हुआ… उसकी नजरें मेरी चुन्चियों पर गड़ गयी. मैंने काफी देर तक उसे अपनी चुन्चिया देखने दी…मुझे अब विश्वास हो गया कि वो गरम हो चुका है. मैंने तुंरत ही गरम गरम लोहे पर चोट की…”रोहित .!..!… क्या देख रहे हो…???”


वो बुरी तरह से झेंप गया. पर सँभलते हुए बोला…”नहीं कुछ नहीं मैम…!”


मैंने देखा उसका लंड खड़ा हो गया था,”मुझे पता है तुम कहां झांक रहे हो… तुम अपनी घर में भी यही सब करते हो? अपनी माँ बहन को भी ऐसे ही देखते हो क्या…?… तुम्हें शर्म नहीं आती ?…”


वो घबरा गया…”मैम वोऽऽ…वोऽऽ… आई एम् सॉरी…”


“सॉरी क्यों?… तुम्हें जो दिखा, तुमने देखा…तुमने मेरा स्तन देखे पर मेरा टॉप तो उतार कर नहीं देखे हाथ नहीं लगाया फ़िर सॉरी किस बात की ?…मिठाई खुली पड़ी हो तो मक्खी तो आएगी ना ! पर हाँ…सुनो किसी को कहना मत…”


“नऽऽ ..नहीं मैम .. नहीं कहूँगा…”


“अच्छा बताओ तुम्हारी बहन है?”


हाँ मैम… है ! एक बड़ी बहन है !


तुम उसे भी ऐसे ही देखते हो? उसकी चुंचियां भी ऐसी हैं…मेरे जैसी?”


“नहीं मैम… वोऽऽ उसकी तो आप आपकी आपसे छोटी हैं… ” रोहित शरमाते हुए बोला।


“तुम्हें कैसे पता ..?. बोलो…”


“जी…मैंने छुप के देखी थी .. जब वो नहा रही थी…” वो शर्माता भी जा रहा था और मैंने देखा कि उसका मुंह लाल हो रहा था. मैं समझ गयी कि वो उत्तेजित होता जा रहा है. मैंने धीरे से उसकी जांघ पर हाथ रखा. वो सिहर गया. पर वो कुछ बोला नहीं. मैं अब उसकी जांघ सहलाने लगी. मेरे अन्दर उत्तेजना अंगडाई लेने लगी. मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने धीरे से उसके लंड पर हाथ रख दिया.


वो मेरा हाथ हटाने लगा…” मैम ना करो ऐसे…गुदगुदी होती है…”


“अच्छा… कैसा लगता है…?” मैंने अब उंगलियों से उसके लण्ड को ऊपर से पकड़ कर दबाया।


“मैम आह…… अह…… नहीं… मैम छोड़ो ना…”


“पहले बताओ कैसा लग रहा है…?”


“मैम… मीठी मीठी सी गुदगुदी हो रही है..” और वो शरमा गया.


उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया पर मेरा हाथ नहीं हटाया, बल्कि सोफ़े पर आगे सरक कर अपने लण्ड को और ऊपर उभार लिया। मैं खुश हो गई… चलो अब रास्ता साफ़ है.


मैंने जल्दी से उसकी पैन्ट की ज़िप खोली और उसका लण्ड बाहर खींच लिया। उसने अपनी आंखें बन्द कर ली। मैं लण्ड को प्यार से आहिस्ता आहिस्ता सहालाने, मसलने लगी। रोहित सीत्कारने लगा। उसने धीरे से अपनी आंखें खोल कर मुझे देखा…मैंने प्यार से उसके होठों को चूम लिया। अब उसके सब्र का बांध भी टूट गया। उसने मेरी चूचियां पकड़ ली और बुरी तरह भींचने लगा। मुझे दर्द हो रहा था पर मैंने कुछ कहा नहीं क्योंकि मज़ा भी तो आ रहा था।

उसकी हरकतें बढ़ गई और वो मेरे तोप के ऊपर से ही मेरे चूचुक खींचने लगा। रोहित मेरे साथ निर्दयता से पेश आ रहा था। मैं कराहने लगी- रोहित…! धीरे… धीरे रोहित। मैंने उसका हाथ पकड़ कर हटाना चाहा मगर उसने मुझे छोड़ा नहीं। उसका लण्ड फ़ूल कर फ़टने को हो रहा था। मैंने लन्ड के सुपाड़े की चमड़ी ऊपर खींच दी और झुक कर लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। रोहित अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे मुंह को चोदने लगा। उसका लण्ड बढ़ता ही जा रहा था। मेरी उससे चुदने की इच्छा भी बढ़ती जा रही थी।


मैं सोफ़े से उठी और रोहित को लेकर बिस्तर पर आ गई। जैसे ही मैंने अपना टॉप उतारने के लिए अपने हाथ ऊपर किए, रोहित ने मेरी स्कर्ट नीचे सरका दी। ब्रा और पैन्टी तो मैंने पहले से ही नहीं पहनी थी। अब मैं अपने जन्म-रूप में थी और चुदने को बिल्कुल तैयार थी। मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने रोहित से भी कपड़े उतारने को कहा। वो तो इसके लिए पहले से ही आतुर था, उसने फ़टाफ़ट अपने सारे कपड़े उतार दिए और मादरजात नंगा हो गया।


मैंने उससे प्यार से पूछा,”रोहित ! मुझे चोदोगे?”


” हां मैम… लेट जाओ जल्दी से…!”


अब मैंने उसे तड़पाने की सोची और कहा,” अगर मुझे चोदना है तो पहले मेरी गाण्ड चाटो…!”


मैंने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठा कर अपने चूतड़ों को ऊपर उठा लिया। इससे मेरी गाण्ड का छेद उभर कर दिखने लगा। मैंने उसे अपनी गाण्ड की तरफ़ इशारा कर के कहा,’ चाटो ! अपनी जीभ मेरी गाण्ड के छेद में घुसाओ !”


पर वो अपनी जगह से हिला नहीं और झिझकते हुए बोला,”नहीं ..मैम…मैं ये काम नहीं कर सकता, गंदा लगता है…”


“अरे चाटो ना… बहुत मज़ा आएगा मुझे…”


पर वो नहीं माना। मैंने कहा,” ठीक है…पर चूत तो चूसो… देखो कितनी पनीली हो रही है…”


“नहीं मैम… मैं तो बस अपना लण्ड चूत में घुसाना चाहता हूं…”


मुझे गुस्सा आने लगा। लेकिन अपने गुस्से को काबू में कर मैंने उससे कहा,” साले ! पहले कोई चूत देखी भी है या नहीं? बस चूत में घुसाने की जिद लगा रखी है”मैने भी सोच लिया कि जब तक अपनी गाण्ड और चूत रोहित से चटवा नहीं लूंगी इसको चूत में नही डालने दूंगी।


“अच्छा मेरे पास आओ…”. उसने मेरी एक चुन्ची को मुंह में ले लिया और दूसरी को हाथ से मसलने लगा. मैंने उसका लंड पकड़ लिया और उँगलियों से उसके लंड को मलने लगी. वो उत्तेजित हो उठा. मैंने खींच कर उसे अपने से चिपका लिया. मुझे पता था कि चोदना चाह रहा है. मैं उसके लंड की और तेजी से मुठ मारने लगी. वो सिस्कारियां भरता रहा. मुझे लगा कि वो अब जल्दी झड़ जाएगा. और उसी समय उसका वीर्य निकल पड़ा, वो अपनी उत्तेजना सम्भाल नहीं पाया। मुझे भी यही चहिए था। उसका लण्ड सिकुड़ गया और उसका वीर्य मेरे हाथ से टपक रहा था।
वो बोला- मैम ! ये क्या हो गया? अभी तो मैंने अन्दर भी नहीं डाला था !


अन्दर तो मैं तुझे तब तक नहीं डालने दूंगी जब तक तू मेरा कहा नहीं मानता, मेरी गाण्ड और चूत नहीं चूसेगा तो मैं भी चूत में नहीं डलवाऊंगी। ले अब चूस, चाट ले मेरी गाण्ड, इतनी देर में ये भी फ़िर तैयार हो जाएगा- मैं उसके निढाल लौड़े को छेड़ते हुए बोली।
नहीं मैम ! बहुत गंदी होती है ये, घिन आती है !


बहनचोद! घिन आती है, गंदी है फ़िर क्यूं अपना लण्ड हाथ में ले कर इसके पीछे पड़ा है? अच्छा बता अब तक कितनी बार चुदाई की है? किस किस को चोद चुका है?


मैम ! किसी को नहीं ! एक बार भी नहीं !


“अच्छा बताओ…तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है… ”


” नही मैम .. गर्ल फ्रेंड नहीं पर महिमा मुझे अच्छी लगती है…”


“अच्छा… और उसे तुम अच्छे लगते हो ?… ”


“हाँ मैम… मुझसे बात भी करती है और मुझे ललचाई नजरों से देखती है ”


“ठीक है… कल मैं उसको यहाँ बुलाती हूँ…या कल तुम उसे यहाँ ला सकते हो?


मैम ऐसे कैसे मैं ला सकता हूँ उसे? आप ही बुला लो यहाँ !


वो चुद जाएगी तुमसे ?


अगर आप हेल्प करोगी तो वो जरूर आ जायेगी ..और फ़िर देखेंगे क्या होता है… शायद चुद जाए ! ”


ठीक है.. उसे फिर खूब चोदना .. मेरे सामने…”


“प्रोमिस मैम…?


प्रोमिस !!!


वो खुश हो गया. और किताब उठा कर चला गया.

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मैंने महिमा को रोहित के साथ आने को कह दिया। महिमा तुंरत तैयार हो गई। मैं समझ गई आग दोनों और लगी है।


रोहित उसे अपनी मोटर साइकिल पर बैठा कर ले आया।
रोहित और महिमा को मैंने पास पास ही सोफे पर बैठाया।


मैं चाय बना कर ले आई।


मैंने देखा कि वो दोनों एक दूसरे की टांगों को स्पर्श करते हुए बैठे बात कर रहे थे।
मैं मुस्कुरा उठी।


‘महिमा… रोहित तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहा था…’


रोहित ने तुंरत ही कहा- मैम… मैं अभी आया…
वो उठ कर बाहर चला गया।


महिमा ने कहा- मैम ! मुझे क्यों बुलाया है?


‘तुम्हें रोहित अच्छा लगता है?’


‘वो मेरे से कुछ बात ही नहीं करता है ज्यादा…’


‘तुम उसे पसंद करती हो?’


वो शरमा गई- मैम वो मुझे अच्छा लगता है।


‘वो भी तुम्हें चाहता है, उसी के कहने पर तुम्हें मैंने यहाँ बुलाया है, पर वो झिझकता है अपने प्यार का इज़हार करने में ! देखो अब भी उठ कर दूसरे कमरे में चला गया शरमा कर !’


‘मैंने तो उसे कई बार संकेत दिए पर वो समझ ना सका!’


‘ऐसी बात नहीं कि वो तुम्हारे इरादों से बेखबर है, वो डरता है और शरमाता भी है, वो तो कल मुझ से पढ़़ने आया तो मैंने बातों बातों में ऐसे ही पूछ लिया उससे कि कोई गर्ल फ्रेंड है या नहीं तो बहुत बार पूछने पर बताया कि तुम उसे अच्छी लगती हो तो मैंने उस से प्रोमिस किया कि मै तुम दोनों की दोस्ती करा दूंगी।’


‘तो सुनो महिमा… तुम्हे मैं एक मौका देती हूँ… वो मेरे बेड रूम में है जाकर उसे जो कहना है… कह देना…’


‘मैम… शर्म आयेगी मुझे भी ! वो लड़का हो कर भी नहीं कह सकता फ़िर मैं तो लड़की हूँ !’


‘अच्छा… तो मैं तुम्हारा काम बनती हूँ… पर इसका टैक्स देना पड़ेगा…’


‘मैम बस एक बार हमारी दोस्ती करवा दो ! फ़िर…’


‘ओके… फ़िर क्या करोगी… बता दो…?’ मैंने उसे रहस्यमयी निगाहों से देखा।


‘मैम वो… कुछ खास नहीं बस कुछ नहीं मैम…’


‘कुछ तो… ! अगर वो तुम्हें किस करे तो? तो करने दोगी?’


‘मैम… आप भी बस !’
‘बताओ ना !’


‘मैम वो… कुछ खास नहीं बस कुछ नहीं मैम…’


‘कुछ तो… ! अगर वो तुम्हें किस करे तो? तो करने दोगी?’


‘मैम… आप भी बस !’


‘बताओ ना !’


‘हाँ !’


‘और?’


‘और क्या?’


‘हाँ… हाँ… बोलो… और भी कुछ…’


‘मैम… आपको भी मज़ा आ रहा है यह सब पूछ कर !’


‘हाँ बहुत मज़ा है इस सब में !’


‘अच्छा बताओ अगर रोहित तुम्हारे बूब्स पकड़ ले तो?’


‘मैम बस करो ! आप तो बेशरम होती जा रही हो !’


‘क्यूँ ! इसमें ऐसी क्या बात है ! क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि कोई तुम्हें किस करे तुम्हारे शरीर को मसल दे, इस उमर में यह सब करने की इच्छा होती है, मुझे तो बहुत होती है, तुम्हें भी जरूर होती होगी, है ना?’


‘हाँ मैम पर डर लगता है किसी को पता चल गया तो?’


‘यहाँ हमारे सिवा और कौन है बस सारी बात हम तीनों के बीच ही रहेगी।’


मैम कुछ होगा तो नही? मुझे डर लग रहा है और अब तो इच्छा भी बहुत जाग उठी है।


डरो मत ! अन्दर बेड रूम में जाओ और कह दो रोहित से दिल कि बात ! वो भी बेचैन है .


नहीं मैम आप उसे यहीं बुला लो यहाँ आपके सामने ही, बल्कि आप ही कह दो सारी बात !


लो यह काम अगर मै करुँगी तो बाकी काम भी मै ही कर लूंगी उसके साथ!


मैम!


अच्छा बुलाती हूँ! यह कह कर मैंने रोहित को आवाज लगा कर बुलाया.


रोहित अपनी किताबे ले कर अन्दर आ गया। वो मुझ से कुछ पूछने लगा किताब में से।


मैंने उसे कहा- ज्यादा नाटक मत करो और काम कि बात पर आओ। महिमा तुमसे कुछ कहना चाहती है


नहीं मैम नहीं मै क्या… मैंने तो कुछ नहीं कहना!


अब तुमने नौटंकी शुरू कर दी!


रोहित सुनो! महिमा मान गई है तुमसे दोस्ती के लिए, बल्कि ये तो पहले से ही चाहती थी तुम्हारी दोस्ती बस तुम्हारे प्रोपोज़ल का इंतजार कर रही थी। अब महिमा से बोलो- आई लव यू!


रोहित शरमाते और हकलाते हए बोला- महिमा आई लव यू !


मैंने ताली बजाई और महिमा को बधाई दी और कहा अब तुम भी बोलो रोहित से !


वो भी धीरे से बोली- रोहित आई लव यू !


मैंने फ़िर ताली बजाई और रोहित को बधाई दी और कहा अब आगे बढ़ो और कुछ करो !


दोनों एक साथ बोले- क्या?


क्या क्या? किस करो !


दोनों मेरे मुंह की तरफ देखने लगे.


‘हां… हां… करो… करो किस एक दूसरे को !… ‘


‘मैम ! नहीं मैम आपके सामने? आपके सामने नहीं …’ रोहित बोला।


‘मेरे सामने ! क्या हुआ मेरे सामने? ‘


‘महिमा तुम उठो और रोहित को किस करो गाल पर ! ‘


‘नहीं मैम मुझे नहीं आता किस करना !’


‘नहीं आता तो सीख ले ! ले देख किस कैसे करते हैं’ यह कह कर मैं रोहित के पास गई और पहले उसके गाल पे फ़िर उसके सिर के पीछे हाथ रख कर उसके होंठों पर जोरदार किस किया।


रोहित घबरा गया और महिमा मुझे ताकती रह गई।


‘चल रोहित तू ही शुरू कर ! पकड़ ले और चूस चूस के लाल कर दे इसके गालों और होंठों को’ मैंने रोहित को महिमा का हाथ पकड़ाते हुए आदेश दिया।


रोहित ने डरते हुए महिमा को अपनी ओर खींचा और उसके कंधे पर हाथ रख कर उसका चेहरा ताकने लगा जैसे उससे पर्मिशन मांग रहा हो।


मैंने उठ कर दोनो के सिर पकड़ कर उनके होंठों को आपस में मिला दिया। अब रोहित ने अपने होंठ खोले और महिमा के होंठो को किस करने लगा।


अब मैं वहां से उठ कर बाहर आ गई और दो चार मिनट इधर उधर बेचैनी से टहलने के बाद फ़िर अन्दर झांक कर देखा तो रोहित महिमा को चूम रहा था और उसकी चूचियाँसहला रहा था।


मैं तुंरत अन्दर आ गई.


महिमा एक दम से घबरा गई.


‘महिमा क्या हो गया… अरे करो… ये तो लड़की और लड़के के लिए जरूरी है… ‘


‘मैम सॉरी… सॉरी… ‘


‘सच कह रही हूँ… अपना काम चालू रखो… कहो तो मैं मदद कर दूँ… ‘


महिमा शर्म से झुकी जा रही थी… रोहित ने उसका मुंह ऊपर उठाया और उसके होंट फिर चूमने लगा । महिमा ने अपनी आँखे बंद कर ली । रोहित ने उसे धीरे से मेरे बिस्तर पर लेटा दिया… … और अपने कपड़े उतारने लगा । फिर महिमा के कपड़े उतारने लगा । महिमा ने मुझे मुझ से परमिशन मांगने की नजरों से देखा… मैंने ख़ुद ही उसका टॉप उतार दिया और कहा -‘ मस्ती करो… शरम नहीं… ‘


रोहित ने उसकी जेंस भी उतार दी । एक नंगी जवान 18 साल की लड़की… रोहित का लंड फूल कर कड़ा हो गया । वो बिस्तर पर उस से लिपट गया.


‘अरे ये क्या कर रहे हो… इसकी इजाज़त नहीं है… ‘


‘प्लीज़ मैम… ‘ दोनों ने मेरी और देखा.


‘नहीं… बिल्कुल नहीं… तुम दोनों अकेले कैसे मज़ा ले लोगे, मैं कहां जाऊंगी ?’ कह कर मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी।


रोहित ने मुझे कपड़े उतारते देखा तो बोला -‘मैम तो पहले आप… ‘


मैंने महिमा के कान में अपनी बात बताई। वो हंसने लगी -हाँ मैम… फ़िर तो आज इसकी खैर नहीं…


‘हाँ रोहित… पर मेरी शर्त याद है ना… मेरी गांड चाट कर मुझे मस्त कर दो ‘


‘हां मैं भी देखूं मैम की गाण्ड कैसे चाटता है तू, फ़िर मैं भी करवाऊंगी वैसे ही… ‘

‘नहीं… नहीं… मैं नहीं करूंगा… मैं नहीं चाट सकता गाण्ड …’


मुझे गुस्सा आ गया। मैंने उसके बाल पकड़ लिए… और उसके गाल पर एक चांटा जड़ दिया.


वो आश्चर्य से मुझे देखने लगा। मैंने फिर उसे कहा… ‘हरामजादे… बोल चाटेगा के नहीं… ‘ उसकी चूतडों पर लात मारते हुए बोली… पहले मेरी चूत चाट फ़िर गाण्ड…’


‘मैम ये ऐसे नहीं मानेगा… ये लो… इसे बाँध दो… ‘ महिमा बोली।


हम दोनों ने उसे बिस्तर पर लेटा कर बाँध दिया। महिमा ने उसके लंड को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया। मैं रोहित पर चढ़ गई। चूत को उसके मुंह से सटा कर बोली -‘अब चूसो इसे… ‘ मैंने अपनी चूत उसके मुंह पर धीरे धीरे रगड़ने लगी.


‘नहीं मैम… नहीं… मुझे छोड़ दो मैम… ‘


‘ रोहित… चुप चाप मेरी बात मानो… ‘ मैंने अपनी गीली चूत उसके होटों पर घिसनी चालू कर दी…


वो इधर उधर होने लगा… उसके मुंह पर मेरी चूत की चिकनाई फ़ैल गई थी.


‘ चल न… चाट ले रे चूत को… ज्यादा हरामीपना मत दिखा… ‘


‘मैम क्या कर रही हो… ‘


‘ चल चूस इसे मादर चोद… स्कूल में तो मेरी चुंचियाँखूब देखता था… अब चूस इसे… कुत्ते… ‘


उसने हार मान ली और चुप चाप चूसने लगा ।


मैंने कहा -‘शाबाश बेटा ! आ आह !… और अब देख बहनचोद… इसके बाद मेरी गांड का नम्बर है… ‘ और महिमा ! चल साली तू रोहित का लंड चूस …’


महिमा उसका लंड को अपने मुंह लेकर चूसने लगी।


मैंने अपने चूतड़ों की फ़ांकों को खोल कर उसके मुंह पर रख दिया । उसने हिम्मत करके अपनी जीभ निकाल कर मेरी गांड के छेद में डाल दी… मैं खुशी से झूम उठी । तरकीब काम आ गई थी। मैं अपनी गांड उसके मुंह पर पटकने लगी। ‘ले चाट इसे… बहन के लोड़े… मैंने उसका लंड पकड़ कर मुठ मारने लगी। उसे भी मजा आने लगा.


महिमा कहने लगी -‘मैम ये लण्ड तो मेरे लिए छोड़ दो ना… प्लीज़..’


मुझे सु सु आने लगी थी। मैंने अपनी गांड ऊँची की और उसके मुंह में पेशाब की धार छोड़ दी । उसने अपना मुँह बंद कर लिया, आंखे भी बंद ली। मैं अब उसके पूरे शरीर पर पेशाब करने लगी। वो पूरा भीग गया। महिमा भी उत्तेजित हो चुकी थी.’मैम… थोड़ा इधर भी… ‘


‘वो मेरी चूत के पास आ गई… और अपना मुंह खोल दिया । मैंने अपनी धार उसके मुंह की तरफ़ कर दी । उसने अपना मुंह पूरा पेशाब से भीगा लिया और अपना मुंह खोल लिया । अब धार उसके मुंह में जा रही थी… ‘ उसने पेशाब अपने मुंह में भर कर एक घूंट में पी गई। अब पेशाब मैं कर चुकी थी। महिमा ने मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी। महिमा बोली -‘रोहित देखो कैसा मजा आया ना… ‘


‘मैम… मजा आ गया… अब मैं भी मूतने की कोशिश करती हूँ… ‘


महिमा रोहित के ऊपर चढ़ कर मुझसे लिपट गई। और अपनी धार छोड़ दी… उसकी गर्म गर्म धार मेरे शरीर पर भी आ रही थी । मैंने अपनी गांड थोडी और ऊँची कर दी । जगह हो गई थे । अब महिमा के पेशाब की धार रोहित के मुंह पर पड़ रही थी । मैंने भी तुरंत हाथ में उसका पेशाब भर लिया… और मुंह में डाल कर पी गई… खारा खारा सा स्वाद लगा… पर उत्तेजना में उसमे भी स्वाद आया।


‘भोसड़ी की ! तूने ये क्या किया… तेरी तो मैं माँ चोद दूंगा ‘


‘मेरे प्यारे रोहित… मेरी मां बाद में चोदना पहले… मेरी गांड चाट ले… ‘महिमा ने अपनी गांड के छेद को उसके मुंह पर रख दिया । और रोहित का लंड को मुठ मारने लगी.


‘मजा आया हरामी… गांड चाट कर… ‘ मैंने उसका मुंह सीधा करके महिमा की गांड में घुसा दिया । उसे चाटना ही पड़ा.


‘चुद्दकड़ रांड… अब तो छोड़ दे मुझे… तुझे कुत्ते चोदें… रंडी । ‘


‘हाँ हाँ बोल… इतना मोटे लंड से क्या अपनी बहन को चोदेगा… हरामी… चल चाट तेरी इस चुद्दकड़ रांड की गांड को… ‘


‘हाँ मेरे राजा… चाट ले ना मेरी गांड को… फिर तू मुझे घोड़े की तरह से चोदना… ‘


वो भी गांड को आगे पीछे कर के गांड रगड़ने लगी। मेरी इच्छा पूरी हो गई थी। महिमा ने भी पूरी कसर निकाल ली और उस पर से उतर गई। महिमा मेरे से लिपट गई। उसकी चुंचियाँमेरी चुन्चियों से टकरा गई। दोनों ने एक दूसरे की चुंचियाँदबाई और रोहित को खोल दिया.


रोहित ने कहा -‘मैम आपको तो मजा आ गया ना… अब मेरी बारी है ना… ‘ उसने बिस्तर पर से हाथ बढ़ा कर मेरी कमर पकड़ ली । उसने मुझे दबोच लिया और बिस्तर पर पटकते हुए बोला -‘चल बहन की लौड़ी… घोड़ी बन जा… ‘ उसने मेरी चुंचियाँभींच डाली । मुझे घोड़ी बना कर उसने मेरे चूतडों पर कस कस के मारना शुरू कर दिया.


‘ रोहित… मत मार मुझे… बहन चोद… कुत्ते… अपनी माँ को मारना घर जा कर उसकी गांड की छिताई करना मैं गलियाँदेती हुई घोड़ी बन गई। उसने मेरे चूतड की दोनों फांकों को चीरते हुए… अपने लंड की सुपारी गांड के छेद में टिका दी…


‘ले कुतिया… अब तेरी गांड की माँ चोद दूंगा .’ कहते हुए उसने मेरी गांड में अपना 18 साल का जवान लंड चीरता हुआ अन्दर तक घुसा दिया। मैं चीख उठी। उसने फिर गांड फाड़ देने वाला धक्का लगाया। मैं फिर चीख उठी। उसके धक्के बढ़ते गए। मैं चीखती रह गई.


‘रोहित चोद दे मैम को… जल्दी कर ना… फिर मेरी बारी भी तो है… ‘


मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था -‘हरामजादे… बस कर अब… मेरी गाण्ड फ़ट गई है… ‘


‘साली रंडी… तू क्या समझती है.. तुझे छोड़ दूंगा… ये देख खून तो निकल रहा है…पर अभी और खून निकालूंगा.. तुने मेरे ऊपर पेशाब किया है ना…’


रोहित ने अपना लण्ड तुरंत बाहर निकाला और जोर लगाया… फ़िए एक झटके से लण्ड को मेरी गाण्ड में पेल दिया।


‘कुत्ते… हरामी.. मर जाऊंगी.. छोड़ दे मुझे… लण्ड को निकाल ले अब…’ पर उसने अनसुनी कर दी और धक्के बढ़ते गए…’


मेरे हाथ में अब कुछ नहीं था। मैंने अब अपने को रोहित के हवाले कर दिया..। अब दर्द कम हो गया था… पर झटके बेरहमी से मार रहा था। अब उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और चूत के द्वार पर रख दिया। रोहित ने धक्का मारते हुए लण्ड सीधा चूत में घुसा दिया। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के खून से लथपथ था। बिस्तर पर खून गिरा था।


चूत में लौड़े के घुसते ही फ़िर मेरी आह निकल पड़ी। उसके लण्ड ने सीधे जड़ में चोट की थी। मैं दर्द से तड़प उठी। दूसरा धक्का तो और भयंकर था। तेज़ दर्द से मैं लगभग रोते हुए बोली,’रोहित प्लीज़… अब छोड़ दे… मैं मर जाऊंगी… ‘


तभी एक और तेज़ धक्का लगा… मुझे लगा मैं बेहोश हो जाऊंगी,’रोहित… बस..अब नहीं…रोहित…नहीं…’


उसने अब नर्मी दिखाई, वो आराम से धक्के लगाने लगा, मुझे भी अब धीरे धीरे मज़ा आने लगा। रोहित चरम सीमा पर पहुंचने लगा था। मैं चुपचाप लेटी थी। मज़ा बदलता जा रहा था। अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूं। मुझे ज्यादा मज़ा आने लगा, मैंने भी गालियाँदेनी शुरू कर दी,


‘लगा हरामी.। चोद दे मुझे… लगा रे… दे लण्ड चूत में.. हाय उई ईइ सी सीऽऽऽ… मादरचोद दे धक्के… मर गई…’


और मेरा रस निकलने लगा… उसके धक्कों से मेरा पूरा शरीर हिल रहा था। मैं निढाल हो गई।


पर अभी उसके धक्के चालू थे… मेरी चूत में अब जलन बढ़ने लगी… गांड भयंकर दर्द कर थी। चूत का भी बुरा हाल था। चूत के अन्दर तो जैसे आग लग रही थी। ‘रोहित अब छोड़ दे मुझे… प्लीज़ छोड़ दे मुझे… ‘ पर शायद मेरी आवाज मुंह से नहीं निकल पा रही थी।


रोहित ने मुझे छोड़ दिया और महिमा को पकड़ लिया।


‘प्लीज़ रोहित… धीरे करना… ‘


रोहित ने महिमा को चूमा … और उसे मेरे पास बिस्तर पर लेटा दिया। बिस्तर गीला हो चुका था। महिमा को अपनी चूत में लण्ड घुसता महसूस हुआ। उसके मुंह से आह निकल गई। मैं निढाल सी लेटी थी। रोहित को देखा… उसके चोदने की ताकत कमाल की थी। महिमा खूब उछल उछलकर चुदवा रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली।


फ़िर धीरे से उठी… मैंने देखा- बिस्तर खून से लाल था। मेरी चूत और गाण्ड से खून की कुछ बूंदें टपकी थी। मुझे ठीक से चलने में परेशानी हो रही थी। मैं बाथरूम में गई। अच्छी तरह से नहा धो कर वापिस आई तो रोहित और महिमा दोनों गीले बिस्तर पर चित्त लेटे थे। वो झड़ कर निपट चुके थे। रोहित के लण्ड की चमड़ी ऊपर से कुछ कट सी गई थी।


महिमा और रोहित एक साथ उठे और बाथ्रूम में इकट्ठे घुस गए। जब नहा कर बाहर आए तो रोहित की नज़र बिस्तर पर पड़ी तो वो घबरा गया,’मैम, ये क्या हो गया… इतना खून !..’


‘रोहित तूने आज मेरी जान ही निकाल दी…’ रोहित तुरन्त रुई और पट्टी लाया। उसने मेरी टांगें उंची की और रुई पानी से मेरी चूत और गाण्ड को अच्ची तरह से पौंछा। मैंने उसे कहा,’ वहां से दवाई उठा कर मेरे अन्दर दोनों जगह लगा दे !’


रोहित उंगली पर दवाई लेकर मेरी चूत के अन्दर और गाण्ड के छेद में लगाने लगा। लेकिन ये क्या… मेरी चूचियाँफ़िर से खड़ी होने लगी..। मुझे चूत में मीठी सी जलन होने लगी… मैंने अपने आप को रोका… उसके लण्ड पर भी मैंने दवाई लगा दी।


‘मैम… आई एम सोरी..। सोरी मैम… ‘


मैंने उसे गले लगा लिया। उसकी चुदाई से मैं गहराई तक सन्तुष्ट हो गई। महिमा भी मुझ से लिपट गई,’रोहित… तू तो ही-मैन है रे… मज़ा आ गया..’


मैंने उसे चूमते हुए कहा- कल जब पढ़ने आओ तो फ़िर से ऐसे ही चोदना… ‘


वो हैरान होकर मुझे देखने लगा.. मैंने उसे धीरे से आंख मारी।


महिमा हंस पड़ी और पूछने लगी- मैम ! मैं भी कल पढ़ने आऊं?’
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